6th Day of Navaratri, Recognize Me

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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                                                नवरात्रि पूजा

 कबेला (इटली), 13 अक्टूबर 1991

आज हम यहां नवरात्रि पूजा करने के लिए एकत्रित हुए हैं।

नौ बार ऐसा हुआ था जब इस ब्रह्मांड की मां के प्रमुख अवतार प्रकट हुए थे। वे एक उद्देश्य के साथ प्रकट होते हैं। वह उद्देश्य अपने भक्तों, अपने शिष्यों, अपने बच्चों की रक्षा करना है। यह एक प्रेम का बंधन था, वह इससे बच नहीं सकती थी। माँ की ममता एक बंधन है, वह उससे बच नहीं सकती। और उसे उसे अभिव्यक्त करना ही होता है, उसे कार्यान्वित करना है और अपने सभी बच्चों को वह सुरक्षा देनी है। आधुनिक समय में इस सुरक्षा ने दूसरा रूप धारण कर लिया है।

उन दिनों शैतान उन लोगों को नुकसान पहुँचाने, नष्ट करने की कोशिश कर रहे थे, जो धर्मी थे, जो भक्त थे, जो अच्छे काम कर रहे थे, जो एक बहुत ही धार्मिक जीवन जीना चाहते थे। इसलिए उन्हें बचाने के लिए उन्होंने अवतार लिया। उनकी रक्षा के लिए उन्होंने अवतार लिया। लेकिन वे जानते थे कि क्या अच्छा है, वे जानते थे कि क्या गलत है और वे अपने अच्छे जीवन, अपने कीमती जीवन को संरक्षित करना चाहते थे। उन्हें धन की परवाह नहीं थी, उन्हें सत्ता की परवाह नहीं थी, लेकिन वे सिर्फ अपना जीवन चाहते थे, यानी वे जीवित रहना चाहते थे, देवी की पूजा करना चाहते थे। और जब वे इन शैतानी शक्तियों से परेशान या नुकसान या नष्ट हुए, तो उसे प्रकट होना पड़ा।

लेकिन आधुनिक समय में यह बहुत जटिल हो गया है क्योंकि आधुनिक समय जटिल है। सबसे पहले मन में, जीवन शैली में, अच्छे इंसानों के समाज में, नेक इंसानों में, गलत का डर घुस गया है। जैसे, वे डरते हैं, जैसे, अपने पुजारियों से, अपने चर्चों से, अपने मंदिरों से, अपनी मस्जिदों से, जो सभी झूठे हैं। वे ईश्वर से नहीं डरते। वे ईश्वर में विश्वास नहीं करते हैं। वे सोचते हैं कि उन्होंने ईश्वर को बनाया है और वे ईश्वर का प्रबंधन कर सकते हैं, तो ईश्वर कौन है? जिस तरह से वे व्यवहार करते हैं, आप स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि वे परमेश्वर, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अस्तित्व को मान्यता नहीं देते हैं, जो एक प्रकोपी परमेश्वर है। उन्हें इस बात की बिल्कुल भी चिंता नहीं है कि उनका क्या होगा। वे पुनर्जन्म में भी विश्वास नहीं करते हैं, वे पुनरुत्थान में विश्वास नहीं करते हैं। वे बहुत ही अदूरदर्शी, दुष्ट लोग हैं जो हर तरह के बुरे काम करते हैं।

तो, किसी न किसी तरह, जैसे ही आप पैदा होते हैं, आप किसी प्रकार की छाप ( ब्रांड) में पैदा होते हैं: जैसे ही आप पैदा होते हैं, आप यह हैं, आप वह हैं, आप वह हैं, आप वह हैं।

तो पहली छाप जो इस आधुनिक आदमी पर आती है वह उस धर्म का है जिससे वह संबंधित है। वह इससे बच नहीं सकता। उसे किसी न किसी धर्म से संबंधित होना चाहिए। तुम कहीं भी जाओ, पासपोर्ट में भीहालाँकि आजकल उन्होंने यह बंद कर दिया है लेकिन अन्यथावे पूछते थे, “तुम्हारा धर्म क्या है?” और भारत में यदि आपने कहा कि आपका कोई धर्म नहीं है, तो वे आपको पासपोर्ट नहीं देते क्योंकि आप अभी तक एक योग्य दुष्ट व्यक्ति नहीं हैं या आप योग्य दुष्ट लोगों का अनुसरण नहीं कर रहे हैं। ताकि बहुत ही सरल, भोले, अच्छे लोग, बहुत धर्मी, परमेश्वर के विश्वासी, इस तरह का भय विकसित करें, जो इन झूठे लोगों द्वारा उनके सिर में डाल दिया गया था, कि, “यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, यदि आप वैसा नहीं करते हैं यदि हमें पैसे नहीं दिए, तो भगवान तुम पर क्रोधित होगा।‘ “यदि आप confession स्वीकारोक्ति में नहीं आते हैं तो परमात्मा आप पर क्रोधित होंगे।” “यदि आप हमारी बकवास बर्दाश्त नहीं करते हैं, तो ईश्वर आपसे नाराज होंगे।” ये सारी बातें बहुत आसानी से लोगों के दिमाग में जाने लगीं.

 कुछ धर्मों में उनका मानना ​​है कि शराब पीने में कोई पाप नहीं है। कुछ धर्मों में उनका मानना ​​है कि कई महिलाओं से शादी करने में कोई पाप नहीं है। कुछ धर्मों में वे मानते हैं कि आपके पास जाति व्यवस्था हो सकती है। सब कुछ ईश्वर विरोधी है, पूरी तरह से ईश्वर विरोधी गतिविधि है, जिसे इन पुजारियों द्वारा समाज में कायम रखा गया है, जिन्हें धर्म का प्रभारी माना जाता है।

 तो जब हम सहज योग शुरू करते हैं तो हमारे पास पहली भयानक बद्धता यही होती है। इसलिए कुछ नए सिरे से शुरू करना उन्हें बहुत मुश्किल लगता है। तो माँ को जो पहली सुरक्षा प्रदान करनी थी वह इस बद्धता, कंडीशनिंग से है।

दूसरी देश की है। या तो आप इस देश के हैं या उस देश के हैं या अन्य किसी  देश के। और इन दिनों हर देश हर तरह के भ्रष्टाचार, माफिया में आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहा है; हर तरह की चीजें, हर देश। अचानक आपको पता चलता है। आपको एक देश में विश्वास है, फिर आप पाते हैं, “ओह, नहीं, नहीं! वे गुप्त रूप से एक खास व्यक्ति का समर्थन कर रहे थे।इसलिए चाहे वे लोकतांत्रिक हों या कुछ भी, किसी न किसी नाम से हर जगह एक तरह का माफिया काम कर रहा है।

तो तथाकथित कानून भी केवल उन लोगों के लिए हैं जो सरल, भोले, शुद्ध नागरिक हैं, न कि उन लोगों के लिए जो उन कानूनों को लागू करते हैं। वे रिश्वत लेते हैं, वे हर तरह की चीजें लेते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें कानून का प्रभारी माना जाता है; वे इस तरह के सभी अवैध काम कर रहे हैं। क्योंकि उन्होंने कानून बनाया है, इसलिए वे जानते हैं किस तरह अवैध काम करना  हैं। तो यह दूसरे प्रकार का भय है जो आधुनिक प्रकार के मन में है।

फिर तीसरी बात थी युद्ध। युद्ध के बाद युद्ध आए। इसलिए, कई लोगों ने युद्ध के बारे में एक तरह का भय विकसित किया और प्रतिक्रिया के रूप में, उन्होंने एक तरह का मूर्ख अहंकार विकसित कर लिया, उन्होंने कहा, यह अपनी रक्षा के लिए है। खुद को बचाने में उन्होंने एक बड़ा अहंकार बना लिया है और वे अब बहुत आक्रामक लोग बन रहे हैं।

तो इस तरह के व्यापक स्तर का भय … इसे किसी भी दिशा में निर्देशित किया जा सकता है, इसे किसी की ओर भी लक्ष्य किया जा सकता है। फिर आता है जाति का भय – जातिवाद। अब मुझे बताया गया है कि नव-नाज़ीवाद अपना काम कर रहा है और एक नन्हे साँप की तरह सामने आ रहा है। तो यह एक और क्षेत्र है, जो अब बहुत खतरनाक है, काम कर रहा है।

अब, साधकों के मन में, और उनकी खोज में वे कई गुरुओं के पास रहे हैं, उन्होंने सभी प्रकार की पुस्तकें पढ़ी हैं, लेकिन वे खोज रहे थे, आप जानते हैं। खोज में तुम किसी भी प्रकार का पानी पी सकते हो, सभी प्रकार के रोग विकसित कर सकते हो। तुम क्या कर सकते हो? आखिर तुम खोज रहे हो। आप प्यासे हो। इसे माफ़ करना होगा। और इस तरह वे न केवल अपने शरीर में, बल्कि अपने मस्तिष्क में भी बहुत सारी समस्याओं का विकास करते हैं। और अब यह बहुत नाजुक बात है – यदि आप किसी से कहते हैं कि, “आप ऐसे-ऐसे गुरु के पास गए हैं,” वह सुनना नहीं चाहता, क्योंकि उसके लिए, अब गुरु अंतिम शब्द बन गया है। आप उनके गुरु के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते। अब जब उसे कष्ट होने लगे, तो वह स्वीकार कर सकता है, लेकिन उसे बाहर निकालने के लिए, उस गुरु से यह भी बहुत नाजुक मामला है, क्योंकि यदि आप उस गुरु को बाहर निकालना चाहते हैं, तो उसे चोट लग सकती है। तो यह एक बहुत ही नाजुक ऑपरेशन है।

फिर आधुनिक समाज: जितना कम कहा जाए उतना अच्छा है! आधुनिक समाज के मानदंड हमें ऐसे लोगों द्वारा दिए गए हैं जो चरित्रहीन थे, जैसे फ्रायड, जिन्हें नैतिकता का कोई बोध नहीं था, या पियक्कड़ों द्वारा, हालांकि उनके पास किसी शराबी की कोई मूर्ति नहीं है, लेकिन उनमें से अधिकांश – यदि आप हमारी नैतिकता की मान्यता का अवमूल्यन देखते हैं- पीने के माध्यम से आता है। और वहां शराब थी, लेकिन इस हद तक नहीं। मेरा मतलब है, हर कोई शराबी नहीं था। आजकल हर कोई शराबी हो सकता है। और इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। उस शराब के साथ, हमारी नैतिक मूल्य प्रणाली गिरना शुरू हो गई, और लोगों ने स्वीकार कर लिया कि अब अवमूल्यन सामान्य बात है। यह एक और दृष्टिकोण है।

पूर्व में, माता-पिता ऐसे व्यक्ति का समर्थन करते थे यदि वह ईश्वर के मार्ग को अपनाता था, यदि वह धार्मिक जीवन या कुछ उच्चतर अपनाता और यदि वे अपने बच्चे में इन गुणों को देखते, तो वे खुश रहते थे। लेकिन इन दिनों यह दूसरा ही ढंग है – माता-पिता इसे पसंद नहीं करते हैं। जैसे कि माता-पिता ने खुद का तो सब कुछ गँवा दिया है, इसलिए वे अपने बच्चों, पोते-पोतियों को पकड़ना चाहते हैं और उन्हें अपने कब्ज़े में रखना चाहते हैं। और विवेकहीन प्राणी, क्योंकि उनका मस्तिष्क पहले ही खाली किया जा चुका है। उनके दिमाग में कुछ भी नहीं है। माता-पिता से लड़ना भी एक बड़ी समस्या है। तो इस तरह का डर भी है कि, “मेरी माँ को पता न चले, मेरे पिता को पता न चले, यह बात।”

आप कह सकते हैं कि हर तरफ से डर आग की लपटों की तरह जल रहा है। और अब हम यहाँ कलियुग में हैं। हमने सहज योग की शुरुआत की है।

इसलिए जिस तरह से हमें अपनी सुरक्षा के लिए कार्यान्वित होना है, वह आपसी होना चाहिए। माँ, निश्चित रूप से, हर समय आपकी रक्षा करने के लिए है। उसकी शक्तियाँ आपकी रक्षा करने के लिए हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि आधुनिक समय में एक शर्त है, जिसे पूरा करना पड़ता है। क्योंकि उन दिनों अच्छे अच्छे थे और बुरे बुरे थे। कोई मिलावट नहीं थी। तो एक बार जब उन्होंने देवी के लिए प्रार्थना की, तो उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया, वह अपने वास्तविक रूप में आई और उसने इसे पूरा किया। लेकिन आधुनिक समय में, आपको पता होना चाहिए कि, ये सभी बुरी चीजें आपके दिमाग में भी, थोड़ा इधर-उधर भटक रही हैं। लोग बेहद सतही हैं। वे भीड़ के रवैये, फैशन, इस तरह की चीजों के बहुत अधिक शिकार होते हैं। एक तरह से, उनका व्यक्तित्व उतना विकसित नहीं है जितना कि उन भक्तो का था जो जानते थे कि वे सत्यवादी थे, जो जानते थे कि वे धार्मिक हैं, जो जानते थे कि वे जो कुछ भी कर रहे थे वह सही था और अपने पैरों पर खड़े थे।

तो, आधुनिक सहज योगी पुराने समय के सहज योगी से बहुत अलग हैं, क्योंकि पुराने समय में आत्मसाक्षात्कार करना आसान नहीं था – एक अरब में या एक ख़राब में कोई एक – और उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। इसलिए, जैसे-जैसे उन्होंने कड़ी मेहनत की, बहुत मेहनत की, वे शुद्ध हो गए और खुद को बनाया और कड़ी मेहनत की। किसी भी कला कृति की तरह जिसमें समय लगता है, देखभाल के साथ किया जाता है, निश्चित रूप से इन आधुनिक कलाकारों की तुलना में हजार गुना बेहतर है जो, बस दो, तीन लाइन इस या उस तरह डाल दें। तो आज का मनुष्य एक आधुनिक कलाकार की तरह है। आप एक लाइन खींच देते हैं और फिर आप कहते हैं, “आपको उस व्यक्ति में यह देखना होगा, आपकी एक पहचान होनी चाहिए!” मेरा मतलब है कि आपकी क्या पहचान हो सकती है? एक लाइन के साथ? आप कहते हैं, “पहचान का पता लगाएं।”

तो सहजयोगियों को जो आज यहां हैं, उन्हें यह समझना होगा कि ये सब चीजें जो हमें घेरे हुए हैं और ये बुरी शक्तियां भी हैं। कुछ वे हमारे भीतर हैं, कुछ बाहर हैं। तो यह बहुत मुश्किल काम लगता है, लेकिन ऐसा है नहीं, क्योंकि एक शर्त, अगर आप समझ सकें, जो यह है कि आपको मुझे पहचानना होगा।

मैं जानती हूँ कि मैं महामाया हूँ। मैं वास्तव में इसमें बहुत चतुर हूँ! लेकिन मैं सच्ची हूं, मेरे पास मगरमच्छ के आंसू नहीं हैं: मेरे पास नहीं हो सकते। मैं सच्ची हूँ। लेकिन फिर भी मैं महामाया हूं। तो मुझे पहचानने के लिए हमें क्या करना चाहिए? अगर हम पहचानते हैं, तो आप सुरक्षित हैं।

और सहज योग में सबसे सरल चीज सामूहिक होना है। यदि आप सामूहिक नहीं हैं, तो जान लें कि आपके साथ कुछ गलत है। अगर आप सामूहिक हैं तो मानो आप गंगा नदी में स्नान कर रहे हैं। आपको हिमालय नहीं जाना है, आपको व्यक्तिगत साधना ज्यादा नहीं करनी है, आपको नहीं करना है – बस सामूहिक होना है!

यदि आप सामूहिक हैं, यदि आप सामूहिकता का आनंद ले रहे हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि आप स्वच्छ हैं; वहाँ कोई दोष नहीं। तुम बिल्कुल ठीक हो!

अब इस महामाया व्यवसाय का दूसरा भाग: मुझे आपके बहुत करीब होना था। मुझे आपके बेहद करीब होना था, आपसे बात करनी थी, संबंध बनाने के लिए, आपको योग के बारे में सब कुछ बताना था, आपको अपने बारे में पूरी तरह से जागरूक करना था। यह तो करना ही था और तुम्हारे मन में, तुम्हारे हृदय के भीतर, तुम्हारे शरीर के भीतर इन सभी जटिलताओं के साथ, मुझे इसे कार्यान्वित करना था।

वास्तविक रूप में करीब आना बहुत खतरनाक होता, इसलिए महामाया बनना पड़ा। लेकिन इसके बावजूद, अगर आप मुझे पहचान सकते हैं, मुझे समझना किमैं एक दिव्य व्यक्तित्व हूं, यह एक अवतार है, यही सभी देवता चाहते हैं। तब वे आपकी हर तरह से देखभाल करेंगे। वे तुम्हें सारी शक्तियाँ देंगे। वे आपको सारी संतुष्टि देंगे, वह सारी सुरक्षा जो आप चाहते हैं।

यह वह स्थिति है, जिसे तर्कसंगत मन के लिए समझना बहुत कठिन है, कि, “आदि शक्ति एक शरीर में कैसे हो सकती है? अनंत कैसे सीमित हो सकता है?” लेकिन मनुष्य ऐसा नहीं कर सकता। केवल मनुष्य ही नहीं। ईश्वर कर सकता है। आखिर वह ईश्वर है! और अगर ऐसा है, तो आपके पास इतने चमत्कार हैं, आपके पास इतनी तस्वीरें हैं, देखने के लिए बहुत सी चीजें हैं, लेकिन यही है जो पहचानना होगा।

अब मैं लोगों को देखती हूं, जब मैं उनसे बात करती हूं, तो वे मुझसे थोड़ी सी फालतू बातें करने लगते हैं, उस गहराई से नहीं, इस भावना से नहीं कि मैं महामाया हूं। फिर उनमें से कुछ मुझे जवाब भी देते हैं। उनमें से कुछ, अगर मैं उन्हें कुछ बताती हूं, तो वे जवाब देने, स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हैं। बेशक, यह आजादी मैंने तुम्हें जान-बूझकर दी है, लेकिन तुम्हें यह समझना होगा कि तुम मुझसे इस तरह बात करो कि तुम आदि शक्ति से बात करते -बहुत जरूरी है।

फिर आप कैसे व्यवहार करते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह कृत्रिम नहीं होना चाहिए। यह सतही नहीं होना चाहिए। लेकिन सबसे अच्छा यह है कि अपने दोनों हाथों को अपने दिल पर रखें, और इसे महसूस करने की कोशिश करें कि : आपकी माँ आदि शक्ति हैं, उन्होंने इस सारे ब्रह्मांड को बनाया है, उन्होंने इस सारे संसार को बनाया है और वह आपकी सुरक्षा के लिए हैं।

श्रीकृष्ण भी पांडवों की रक्षा नहीं कर सके। उन्हें जंगल में जाना पड़ा था, उन्हें भुगतना पड़ा, लेकिन सहजयोगियों को नहीं। जैसे ही मुझे आपकी समस्याओं के बारे में पता चलता है, मेरा चित्त आप पर काम कर सकता है। श्री राम को स्वयं जंगलों में जाना पड़ा।

यह सब तुम्हें दिया गया है, यह सुरक्षा, क्योंकि तुम सत्य के साधक हो और सत्य यह है कि मैं अवतरित आदि शक्ति हूँ।

एक बार जब यह सत्य खुद से एकाकार हो जाता है तो डरने की कोई बात नहीं है क्योंकि सभी देवता इस तथ्य को जानते हैं। वे इस अवतार के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। वे सभी इसके लिए तैयार हैं और वे आपके विश्वास को प्रमाणित करने के लिए कुछ भी करेंगे।

हर तरह से वे तुम्हें मेरी तस्वीरें देने की कोशिश कर रहे हैं, आकाश में, यह, वह, मेरा मतलब हर तरह की चीजें हैं। भगवान जाने आज वे क्या करने जा रहे हैं! वे इतने चिंतित हैं। वे मंच के पीछे हैं, मंच के आगे, मंच के चारों ओर, मेरी बात सुनकर, खुशी महसूस कर रहे हैं कि मैं आपको सत्य बता रही हूं। लेकिन जिस तरह से वे मान्यता करते हैं और जिस तरह से कार्य करते हैं कि, वे कभी भी अवज्ञा नहीं करते हैं। यदि आप ऐसा ही व्यवहार करते हैं, तो आप उन सभी समस्याओं से पूरी तरह सुरक्षित हैं जिनके बारे में मैंने आपको बताया है।

अब मैं यह नहीं कहूंगी कि आपको किसी से नफरत नहीं करनी चाहिए, आपको ऐसा नहीं करना चाहिए … ऐसा कुछ भी नहीं करुँगी। मैं यह नहीं कहूंगा कि आपको कुछ चोरी नहीं करना चाहिए। मैं यह नहीं कहूंगी कि आप सहज योग से पैसा नहीं बनायें। कुछ नहीं। मैं यह भी नहीं कहती कि मत पीओ, धूम्रपान मत करो, मैंने ऐसा कभी नहीं कहा। लेकिन स्वचालित रूप से, एक बार जब आप जान जाते हैं कि आप किसका सामना कर रहे हैं, आप किसकी सुरक्षा में हैं, तो आप स्वचालित रूप से उसे छोड़ देंगे – स्वचालित। आपको कोई डर नहीं होगा। एक बार पहचान लेने के बाद, आपको किसी से कोई डर नहीं होगा। और जितना अधिक आप ऐसी मान्यता को दिखाते हैं, उतना ही आप इसे महसूस करते हैं, आप न केवल आध्यात्मिक रूप से, बल्कि मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक रूप से हर तरह से ऊँचे और ऊँचे होते जाते हैं।

यह बहुत ही उल्लेखनीय है कि, न केवल आप मुझे एक ऐसी माँ के रूप में पहचानते हैं जो आपसे बहुत प्यार करती है, बल्कि एक ऐसी माँ जो आपकी रक्षा करने के लिए शक्तिशाली है, वह बहुत शक्तिशाली है। यदि आप को इस बात का अहसास हैं और यदि ऐसा आपको आपके दिल में लगता है तब मान लीजिए कि, मैं आपको कभी-कभी सुधारती हूं, तो दुखी होने के बजाय आपको यह देखना चाहिए कि, “मैं कितना भाग्यशाली हूं कि आदि शक्ति स्वयं मुझे ठीक कर रही है! वह मुझमें दिलचस्पी ले रही है। मैं कितना भाग्यशाली हूं कि मैं इस समय पैदा हुआ, उनके महान कार्य में उनके साथ रहा! इसके लायक बनने के लिए मैंने किया ही क्या है?” ऐसी यह मान्यता ही नवरात्रि के सभी अवतारों की पूर्ति करेगी।

तो आज हम दुर्गा, काली, इन सभी महान देवियों की पूजा कर रहे हैं। ये शक्तियां। राधा भी। कंस का वध राधा ने किया था, श्रीकृष्ण ने नहीं। उन्हें राधा से आकर उसे मारने के लिए कहना पड़ा। यह तो शक्ति है जो मारती है।

तो अगर आपको पता चलता है कि आपकी माँ आदि शक्ति हैं।

मैं बहुत से लोगों को जानती हूं। एक सज्जन हैं जो लंदन एयरपोर्ट पर कार्यरत हैं। किसी ने उसे परेशान करने की कोशिश की। उसने कहा, “देखो, सावधान रहो, मेरी माँ बहुत शक्तिशाली है, तुम नहीं जानते।” अगले दिन उस आदमी ने अपनी नौकरी खो दी, अपना व्यवसाय खो दिया, यह गँवा दिया, वह खो दिया। और वह उसके पास आया और कहा, “अब, कौन तुम्हारी माँ हैं ? मुझे उनसे मिलवा दो!”

राहुरी के पास एक किसान था और रात में तीन आदमी कुछ गन्ना चुराने आए, और अगले दिन वे आए और उन्होंने कहा, “आप किस देवी की पूजा करते हैं?” उन्होंने कहा, “क्यों?” “तुम्हारे खेत की रखवाली कर रहे तीन मोटे लोग थे और हम बस आए … और हमने सोचा कि इस गन्ने में से कुछ ले लो। आखिर यह कितना अच्छा लग रहा है। और उन्होंने हमें पीटा। बेशक, हमें कभी चोट नहीं लगी।”

तो इस मान्यता के ठीक पीछे ही सारी शक्तियाँ हैं। बहुत सारी, इतनी सारी कहानियाँ हैं जो मैं आपको बता सकती हूँ की चीजें कैसे हुई हैं, कैसे काम किया है। लेकिन अगर आप अभी भी संदेह में हैं, आधे इधर आधे उधर हैं, तो चीजें ठीक नहीं होंगी।

आपको अपनी प्रतिष्ठा की चिंता नहीं करनी चाहिए। बस एक बात समझ कर किसी भी दिशा में पूरी गति से जाओ, कि तुम मेरे बच्चे हो और मैं आदि शक्ति हूं। हर चीज जो भयानक लगती है वह बेहतर हो जाएगी। हमने इसे अब फ्रांस के इस मामले में देखा है और वह सब, जो हुआ है।

किसी बात की चिंता मत करो! बस इतना जान लो कि मैं आदि शक्ति हूँ। कि देवी-देवताओं की सारी शक्तियाँ और सब कुछ मेरे भीतर हैं, और वे मेरे भीतर हैं और वे सभी आपकी देखभाल कर रहे हैं।

लेकिन अगर वह मान्यता नहीं है, तो वे भी आपको नहीं पहचानेंगे।

तो आज की नवरात्रि के लिए मैं आपको बताना चाहती हूं कि – बस दिमाग में यह ध्यान रखने की कोशिश करें कि आज आप आदि शक्ति की पूजा कर रहे हैं न कि केवल दुर्गा की। और आप दुर्गा और इन सभी देवी-देवताओं की पूजा उन्हें धन्यवाद देने के लिए कर रहे हैं, क्योंकि अगर उन्होंने उस समय आपको नहीं बचाया होता, तो आप इतने डरे हुए होते, आप बुरे लोग बन जाते और यहाँ नहीं होते। इसलिए हमें उस वक्त जब हम बहुत असहाय थे, बचाने और हमें यह सुरक्षा देने के लिए हम उनके आभारी हैं,

परमात्मा आप को आशिर्वादित करे!