Shri Ganesha Puja

New Delhi (भारत)

1993-12-05 Shri Ganesha Puja, 53' Add subtitles:
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Shri Ganesha Puja. Delhi (India), 5 December 1993.

आज हम श्री गणेश पूजा करने है | इस यात्रा की शुरूआत हो रही है और इस मौके पर जरूरी है कि हम गणेश पूजा करें खासकर दिल्ली में गणेश पूजा की बहुत ज्यादा जरूरत है। हालांकि सभी लोग गणेश के बारे में बहुत कम जानते हैं। और क्योंकि महाराष्ट्र में अष्ट विनायक हैं और महा गणपति देव तो गणपति पूले में हैं। इसलिए लोग गणेश जी को बहुत ज्यादा मानते हैं। लेकिन उनकी वास्तविकता क्या है? गणेश जी हें क्या? इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। अब जो भी बात हम आपको बता रहे हैं यह सहजयोगी होने के नाते आप लोग समझ सकते हैं। आम दुनिया इसे नहीं समझ सकती। एक हद तक आम दुनिया, विशेषकर बढ्धि परस्त लोग सहजयोग को देख सकते हैं। किन्तु इस योग के घटित होने में कोई देवी देवता मदद करते है ये नहीं मानते और परमचैतन्य को भी अनेक तरह के नाम दे कर के वो समझाते है की ये कॉस्मिक एनर्जी है | पता नहीं लोग समझते है या नहीं |
सबसे पहले इस पृथ्वी की रचना होने से पहले समझ लीजिये परमात्मा ने यही सोचा आदिशक्ति ने यही सोचा इस पृथ्वी पर पवित्रया आना चाहिए पवित्रत्रता आणि चाहिए | और पवित्ररता जब यहाँ फ़ैल जाएगी उसके बाद सृष्टि में चैतन्य चारो और कार्यान्वित हो जायेगा जैसे समझ लीजिये परमचैतन्य चारो और फैला हुआ है लेकिन उसका असर तो तभी आता है जब आपके अंदर पवित्ररता आती है अगर आपके अंदर पवित्रता नहीं है आपके अंदर शुद्धता नहीं है या आप किसी और ही सतह पर रह रहे है तो आप सहज में गहराइ में नहीं उतर सकते | ये सभी कार्य श्री गणेश का है | सूक्ष्मता जो आपने सहज में प्राप्त की है इसमें सबसे बड़ा काम श्री गणेशा ने किआ है तो श्री गणेशा जो है वो परमचैतन्य के दूरदत्त है या ये कहना चाहिए की श्री गणेशा से ही ये परमचैतन्य जो है आलोकित और हर एक चक्र पैर ये कार्य करते है और हर एक चक्र पैर जब तक निर्बलता न आ जाये जब तक पवित्रता न आ जाये तब तक कुण्डलिनी का चढ़ना असंभव है | और चढ़ती भी है तो वो बार बार गिर जायेगा |
कुण्डलिनी का गणेश जी का जो सम्बन्ध है वो माँ और बेटे का है | आप सब उनकी कहानी जानते है की पारवती जी जब नाहा रही थी तब उन्होंने अपना मल निकल के , उनके मल में तो वाइब्रेशन होने ही है, उस से श्री गणेश बनाए और उनको बाहर बिठा दिया। उस वक्त एक बात समझनी चाहिए कि गणेश जो बनाया बो सिर्फ आदि शक्ति ने बनाया उसमें सदाशिव का हाथ नहीं था। परमात्मा का इसमें हाथ नहीं था। सिर्फ आदिशक्ति ने श्री गणेश को बनाया इसी तरह से आप समझ सकते हैं ईसा मसीह को ये जो कहते हैं कि गैबरील ने आकर जब मेरी को बताया कि तुम्हारे पेट से जग का उद्घारक पैदा होने वाला है तो वो कंवारी थी। तो कंवारेपन में किसी के यहां बच्चा हो तो अपने यहां उसे बड़ी शुभ बात नहीं समझते। पर अति शुभ ऐसे श्री गणेश हैं? उनको पार्वती जी ने सदाशिव की गैरहाजिरी में बनाया।इसी प्रकार कौमार्य अवस्था में ही इसा मसीह को बनाया गया , ये हिंदुस्तानी बोहत आसानी से समझ सकते है पर विदेशी लोग इसको नहीं समझ सकते क्युकी वो इंसान नहीं समझते वो इस से ऊपर नहीं उठ सकते | और इसके लिए उनके यहाँ जो बोधिक वर्ग है वो इतना आमड़ा है किसी भी तरह से ये वो मान्य नहीं करता की कौमार्य अवस्था में इस प्रकार इसा मसीह का जिसको को immaculate conception कहते है वो हो सकता है अब इसी झगडे में लगे हुए है इसी बात की और ध्यान देना है अब आप लोग सहजयोगी है आपने चमत्कार देखे है , चैतन्य में अनेक चमत्कार देखे है |
उसका असर आप पर भी आ गया दुनिया प्रति आपकी भी नज़र बदल गयी | ये जिन्होंने पाया है वो जरूर सोचने लग जाते है की जो दुनिया हम रोज़ देखते है वो माया है |उस से परे एक और भी दुनिया जरूर है जो सत्य है ये सहजयोगी देख सकते है वो अपने उंगलियों पर जान सकते है की श्री गणेशा की अभिव्यक्ति जो हुई वो सत्य है यहाँ तक की मेने ग्रीस में देखा अथीना , आथ मेने primodial , आदिशक्ति अथीना का वहा अवतरण हुआ और जब में वहा गयी वो मंदिर उन्होंने बनाया हुआ है उसे देखने के लिए तो वहा उन्होंने बताया की एक चाइल्ड गॉड है| बड़े आश्चर्य की बात है उनको ये मालुम नहीं ये कौन चाइल्ड गॉड है , क्युकी वह इतने साल बीत गए है अब वहा दूसरे लोगो ने आ कर के उनकी सारी परम्पराएं नष्ट करदी | हालाँकि हिंदुस्तान में अभी भी हमारी परम्पराएं जागृत हैं | इसलिए उनको अविश्वाश है ये सब बाते मानते नहीं है सोचते भी नहीं है |उसी प्रकार हम जा रहे थे एक जगह है उन्होंने कहा की ये नाभि वह पर एक ऐसा गोल सा आकार का ऐसा चट्टान जैसा पत्थर का टीला था बोहत चैतन्य उस से बह रहा था | लेकिन निचे से जब ऐसे वाइब्रेशन आने लग गए मेने मुड़ के देखा तो वहां साक्षात् गणेशा बैठे हुए हैं | इनको क्या मालुम गणेशा क्या होते है |में देख के हैरान हो गयी समूह और इतने चैतन्यपूर्ण लेकिन बैगर सहजयोग के गणेशा क बारे में कहना मुश्किल हो जाता है उसके बाद भी जो धर्म के लोग आये हैं जिन्होंने धर्म वाकिये में चाहा दुनिया में फैलाया जाये चित्त ज्यादा धर्म पर था | की लोग स्वच्छ हो जाये पवित्र हो जाये और उनको ऐसी दशा में चले जाये की कल जब उनका उद्धार होने का समय आएगा उस वक़्त वो साफ़ हो जाये इसलिए उन्होंने धर्म की और ज्यादा ध्यान दिआ की लोगो क धर्म को कैसे ठीक करे जैसे मोजेस वैगरह इनको १० अध्याय कमांडमेंट्स मिली | ये सब इसलिए की लोगो में एक तरह से वो स्थिति आ जाये जिस से वो अपना आत्मसाक्षत्कार आसानी से प्राप्त करे | हमारे यहां भी नानक आदि बड़े गुरु हुए हैं, बड़ा भारी कोई कार्य कर रहे हैं।उन्होंने यह मेहनत की कि मनुष्य कम से कम जो है धर्म पर जमा रहे | मने उसके अंदर बैलेंस हो ,शुद्ध विचार रहे, पाप पुण्य में पुण्य ही देखता रहे श्री गणेश का कार्य और तरह का है श्री गणेश अपनी शक्ति से ही स्वच्छ रखते हैं | उनकी सबसे बड़ी शक्ति है अबोधिता मने इनोसेंस , उनके सर पर जो ये हाथी का सर है उनके अंदर मनुष्य जैसा ईगो सुपर ईगो नहीं आता और वो बच्चे हैं | जिनको कहना चाहिए इटरनल चाइल्ड और उनका अवतरण इस संसार में जीसस क्राइस्ट और इसा मसीह के नाम से हुआ | अब इस से हमने साइंस का हर प्रकार का अनुमान लिआ | वो ऐसे की मेने कहा था की श्री गणेश एक शक्ति है, निराकार में और साकार में वो श्री गणेशा जैसे दिखाई देते है | इसका मतलब ये कि हमारे यहां अगर भोलापन, सादगी, हैं, सरलता, विश्वास हो, ऐसे निर्मल अन्तकरण से श्री गणेश कि जागृति हो सकती है। श्री गणेश के बगैर तो कुण्डलिनी ऊपर नहीं चढ़ सकती क्युकी कुण्डलिनी श्री गौरी है और उस गौरी को पूरी तरह से उथान करने क लिए श्री गणेश उसके साथ हर समय संरक्षित करते हैं इतना ही नहीं जब चक्र पर कुण्डलिनी चढ़ जाती है तो उसके तो उसके मुख को बंद करके कुण्डलिनी को निचे उतरने से रोकते हैं |
अब ये श्री गणेश हमारे अंदर मूलाधार पर बैठे हुए हैं इसी में बोहत लोगो ने गलती करदी की मूलाधार चक्र जो है वो त्रिकोणाकार अस्थि है , मूलाधार में सिर्फ कुण्डलिनी है और मूलाधार से निचे मूलाधार चक्र है और उस पर श्री गणेश है और उनके कार्य क्या क्या हैं ये तो आप सब जानते हैं आपने हमारे फोटो देखे है की हमारे पीछे श्री गणेश खड़े है और हमारे ऊपर भी श्री गणेश इसी प्रकार हर देवता के लिए हो सकता है लेकिन श्री गणेश की शक्ति जो पवित्रता आती है में जरूर कहूँगी की हिंदुस्तान में इसके मामले में सब लोग जानते है की हमको पवित्र रहना चाहिए , परदेश में नहीं , परदेश में मलेछ ठहरे , उनको मल इच्छा है | श्री गणेश निर्मल है हिन्दुस्तानियो में निर्मलता की इछा बोहत है अगर नहीं भी हो तो कम से कम इसका ढोंग तो करते है इसी ढ़ोंगीपना से कम से कम ये फायदा तो है की एक मनुष्य में अगर खराबियां है अगर वो ढोंगी है तो खराबियां वो समाज में नहीं फैलाती लेकिन विदेश में ये लोग सोचते है ये जो खराबियां है ये बड़ा भारी कोई हम आवाहन लिए हुए है और बड़ा भारी हम कार्य कर रहे हैं | सो खराबियों को अच्छा मान लेना और उसमे हम बड़ा भारी कोई एडवेंचर कर रहे है ऐसा समझना और उसमे रत रहना ये हम लोगो क हिसाब से तो बेवकूफी है | लेकिन अगर आप अमेरिका जाए तो आपको पता हो जाएगा कि वहां गणेश जी हैं ही नहीं। माने ये कि वो विचार ही तहीं रहे हैं। अब जब उसके दुश परिणाम दिखाने लग गए जब नुकसान दिखाने लग गए तब वो सोचते हैं कि हमें तो विश्वास होना चाहिए और हमें और वो सफाई रखनी चाहिए। आधी बातें कट गई और उसका असर अब हमारे यहां है। सहजयोग के सिवा वो लोग नहीं बच सकते । लेकिन आप लोगों के पास तो ये सम्पति है। अगर वहां के लोगों को देखा जाए तो उनके मुकाबले में यहां भी बहुत से लोग हैं गंदे रास्ते पर चलते हैं, गंदे काम करते इसका मतलब ये कि हमारे यहां अगर भोलापन, सादगी, हैं, पर छुपा कर करते हैं। खुले आम नहीं। मतलब वो सरलता, विश्वास हो, ऐसे निर्मल अन्तकरण से श्री गणेश जानते हैं कि इस चीज से समाज में प्रशंसा नहीं होगी। कि जागृति हो सकती है। श्री गणेश के बगैर तो कण्डलिनी विशेषकर जो लोग बाहर हो कर आए हैं उनमें ये दोष पाया जाता है। बड़े चरित्रहीन होते हैं और चरित्रहीनता को बो बड़ा भारी कमाल समझते हैं और सोचते हैं इसमें तो खास बात है। हम कोई विशेष सुन्दर हैं, हमारे अन्दर यह कृण्डलिनी चढ़ जाती है तो उसके मुंह को बंद करके विशेषता है। इस प्रकार का आरोप करते हुए अपने पर बहुत गर्व करने लग जाते हैं। अबोधिता की जो शक्ति है वो ये कि ये अबोध हैं। माने ये कि उसके अन्दर किसी तरह की खराबी नहीं है। कोई खराबी दिमाग के अन्दर नहीं है।वो बिलकुल साफ़ सुथरा इंसान है |इसा मसीह ने कहा था जब तुम्हारे उत्थान का समय आएगा तब तुम बच्चों जैसे हो जाओगे उस वक़्त और भी शक्तियां हैं जो गणेश जी की हैं उस वक़्त वो सब छोड़ के आपमें वो अबोधिता भर देते हैं|इसके सहारे आप अपना आत्मसाक्षत्कार प्राप्त कर लेते हैं अब किसी बुद्धिमान वयक्ति किसी बुद्धिमान से बात करें जो बुद्धि पुरस्तर है वो यह ही नहीं समझ पाता की गणेश जी ही कैसे हमारे देवता हैं|
तो समझाने की बात ऐसी है जब तक आप सूक्षम में नहीं उतरेंगे आप समझ नहीं पाएंगे आपके अंदर यह सब देवता हैं |श्री गणेश के चार हाथ हैं। मैंने बताया की चार संयोजकताएं (बैलेन्सीज) होती हैं। निराकार में सब आप उनको बाईं ओर से देखते हैं तो वो स्वास्तिक रूप में दिखाई देते |कार्बोन एटम को मेने कहा की उसका फोटो उत्तार के आप उसके ३ एंगल से फोटो लीजिए | फिर आप दाईं ओर से उनको देखते हैं तो वो ओंकार दिखाई देते हैं बहुत से ओंकार। जितने कार्बन एंटम हैं वो ओंकार से दिखाई देते हैं और नीचे से ऊपर को अगर आप देखें तो बीच में अल्फा और ओमेगा जो ग्रीक दो संकेत इस्तमाल होते हैं वो दिखाई देते हैं। ईसा मसीह ने कहा था मैं अल्फा और ओमेगा हूँ। अल्फा माने शुरूआत और ओमेगा माने अन्त। और उसके जो भी प्रतीक हैं वो बिल्कुल आपको दिखाई देंगे। हजारों लोगो ने उन पर काम किया।
जो भी कहती है ये विदेशी लोग खत्म हुए चले जा रहे हैं। वहां एकदम से बड़े जोर से उसका पता लगाते हैं। तो उन्होंनें विनाश शक्ति है वो अन्दर से चालित है। हम लोग यहां देखा कि जब इन्होंने कार्बन एटम का फोटो लिया तीन दिशाओं बैठे-बैठे समझ ही नहीं पा रहे हैं।से तो बराबर तीनों प्रतीक नजर आए। सिद्ध ईसा मसीह जो थे अल्फा और ओमेगा बन गए वहीं उसकी हम लोग यहां सुनते भी नहीं है वहां हो रही हैं। वही ओंकार थे और वही स्वास्तिक। हिटलर ने श्री गणेश की शक्ति इस्तेमाल करने के लिए स्वास्तिक बनाया जब तक वह सीधी तरह से बना था। तब तक वो काफी बचे रहे। दलाई लामा वैगरह जो लोग थे उन्होंने उस से बताया तो उसने कहा ठीक है |उन्होंने कहा अच्छा स्वस्तिक लगाओ | स्वस्तिक अगर ठीक से बनाया हो जो कहना चाहिए जिसका झुकाव है राइट साइड में होना चाहिए वो स्वस्तिक प्रगतिशील होता है वो इनोसेंस बढ़ाता है |स्वास्तिक प्रगतिशील होता है। और उसकी गति यदि बायीं ओर हो गयी, चक्र उल्टे हो गए तो मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है। उसे हर तरह कि बिमारियां हो जाती हैं। और फिर ऐसी बिमारियां हो सकती हैं जो आप बिल्कल भी किसी भी तरह से ठीक नहीं कर सकते। हमारे जो स्नाय है बो एक बार शिथिल होने लग जाते हैं। उसे आर्थराइटिस की बीमारी हो जाती है।कल एक आदमी यहाँ आया था उसके स्नायुजो हैं कमजोर होने लग जाते हैं। उसमें आदमी हिलने लग जाता है और उसकी बिमारी ठीक नहीं होती धीरे-धीरे उसके स्नायुजो हैं कमजोर होने लग जाते हैं। , श्री गणेश की उल्टी दशा में घूमने की वजह से. होता है। हिटलर का हुआ हिटलर ने श्री गणेश की शक्ति इस्तेमाल करने के लिए स्वास्तिक बनाया जब तक वह सीधी तरह से बना था। तब तक वो काफी बचे रहे। पर जब स्टेंसिल उन्होंने दूसरी तरफ से इस्तेमाल करना शुरू किया तो जो प्रतीक है। और ये जो प्रतीक होते हैं ये सब बनाए जाते हैं उल्ट गया। उसके उल्टे हो जाने से ही हिटलर हारा। स्वास्तिक का इलम बहुत से लोग समझते नहीं कि है। स्वस्तिक का हिटलर ने इस्तेमाल किआ था कोई भी इस्तेमाल कर सकता है वो तो अबोध हैं न लेकिन वो अपना असर दिखते थे , जैसे मेने पुणे में ३ , ४ बार पब्लिक में कहा था की श्री गणेशा की बोहत इज़्ज़त करो उसके सामने भद्र काम करो कोई भी तरह के अभद्रता उनको पसंद नहीं , कोई भी गलत काम उनको पसंद नहीं | महाराष्ट्र में गणेशा उत्सव होता है ,वहाँ १० दिन तक गणेश जी का उत्सव होते हैं | ये तीलक साहब हैं ने लाया था की आप गणेशा की इस तरह से वंदना करो | और पुणे में जब मेने देखे थे तो मुझे बड़ी हैरानी हुई ,कि वहां के लोग गणेश के सामने हैं उनकी अराधना करते हैं बाद में और पहले बहुत गंदे गीत गाते श्री गणेश के चार हाथ हैं। मैंने बताया था कि कार्बन कण हैं। डिस्को डांस करते हैं और इतने गंदे कपड़े पहनते हैं। गंदे गाने भी, शराब सिगरेट सब वहाँ चलता है तो मेने उनसे बतया था की बड़े और आप ऐसा न करिये और मेरे लेक्चर में मेने कहा था ये पृथ्वी तत्वा का आर्क है ज्यादा आप करएगा तो भूकंप हो जायेगा |
और वही बात हो गयी जिस दिन गणेशा जी का विषर्जन हुआ उसके बाद घर पर आके सब शराब पीके नाच रहे थे और सब फिर जमीन में गाडत हो गए | हम लोग सोचते हैं ऐसा क्या प्रदेश में सब हो रहा है whats wrong? कोई भी किसी को कह सकता है whats wrong? अब वह पर बीमारियां आ गयी एड्स आ गया |
एड्स आ बने हुए हैं वही प्रतीक बिल्कुल आपको दिखाई देंगे। इन्होंने गए और दनिया भर की गंदगी आ गयी। हजारों लोग इनसे उन पर काम किया। मैं जो भी कहती है ये विदेशी लोग खत्म हुए चले जा रहे हैं। वहां कि जो नाश शक्त है, एकदम से बड़े जोर से उसका पता लगाते हैं। तो उन्होंनें विनाश शक्ति है वो अन्दर से चालित है। हम लोग यहां देखा कि हम बैठे-बैठे समझ ही नहीं पा रहे हैं।कहते है की 65% लोग अमेरिका में कि एकदम जर्जर हो जाएंगे। अनेक तरह की बीमारियां है जो हम लोग यहां सुनते भी नहीं है वहां हो रही हैं। यहाँ कीड़े-मकोड़े, मच्छर आदि इतने हैं, सब तरह की गन्दगी है पर मनुष्य साफ हैं।
अब ये कह नहीं सकती कि की आजकल के ये आधुनिक काल में मनुष्य की क्या सिथति है और वो क्या कर रहा है | किसीका गणेशा जी क खिलाफ जाना माने माँ क खिलाफ पाप करना | माँ की जो पुण्य शक्ति है उसके खिलाफ जाना इसलिए वह फरयोड जैसे गंदे लोग आये | उन्होंने कहा की साहब ये सब गलत है इस से कोई फायदा नहीं होगा और माँ के साथ में जो ये पवित्रता बनायीं ये सब झूठ है अब उनके लिए ईसामसीह की जगह फरयोड आ गए और वो फरयोड की पूजा करने लग गए | उनको फिर मरे हैं कैंसर से बोहत परेशानी से मरे है, गणेश जी को ठीक करने से मनो दैहिक बीमारियां जो उन को भी ठीक करते है जिसको डॉक्टर लोग भी ठीक नहीं कर सकते । इन सबके लिए श्री गणेश को ठीक रखना चाहिए | अब ये बात जो सहजयोगी नहीं हैं उसको बताने कि नहीं है। वो कहेंगे कि ये क्या है कि हाथी जब शब्दों में बताया नहीं जा सकता न समाया जा सकता जानते थे। आज लोग कहते हैं कि ये कल्पनाए हैं और इस तरह से आप कल्पना में गहरे उतर गए। लेकिन सहजयोग में आज यही प्रतीक सिद्ध हो गए हैं। ये प्रतीक तब बनाये जाते है जब शब्दों में नहीं बताया जाता नहीं समझया जाता | आज ये वास्तविक है ये हैं वो श्री गणेश की ही शक्ति है क्योंकि वो सत्य असत्य प्रतीक रूप से जो आपके सामने सत्य में आ गया कि ये सच्चाई है। लेकिन मनष्य कि बह्धि कहां तक जा सकती है? उसके सीमाएं हैं और वो ऐसी चीजों को मान ही नहीं सकता दिखती नहीं है उसके लिए आँखें मुंद कर बो कभी सोचे कि ये जो प्रान्त है, क्षेत्र है जिसे मैंने जाना नहीं है, इसको अगर जानना है तो मेरी अन्दरूनी दशा समझनी होगी क्योंकि मानव स्थिति में मैं इसे नहीं जान सकता। ये हैं मैं दिल्ली के लिए इसलिए कह रही थी कि श्री गणेश कि पुजा आवश्यक है कयोंकि श्री गणेश और गौरी का सम्बन्ध हैं नितान्त है, शाश्वत और जब तक यहां श्री गणेश की स्थापना नहीं हो जाती है, तब तक यहां जो समस्याएं है, खासकर राजनैतिक समस्याएं वो ठीक नहीं होंगी। उसके लिए ऐसे करनी चाहिए, मतलब कि अपने अन्दर बो पवित्रता जो थी लोग चाहिए जो पवित्र हैं और जो बच्चों जैसे भोले हैं। तो गणेश का आशीर्वाद है बो आना चाहिए अब लोग कहेंगे कि लोग कहेंगे कि बच्चे जैसे लोग शासन नहीं कर सकते लेकिन ऐसे लोग हैं कहां ऐसे लोग जब प्रशासन में आएंगे तो आपको पता होगा।
श्री गणेश जो हैं वो बद्धिमान हैं । आपको लेकिन बद्धि में जो विवेक है, सत्य, असत्य क्या है पता होना चाहिए | ये जो पाप कर्म हैं इसी के लिए तो चीज है। सोचते हैं इसका पैसा खाओ, उसका पैसा खाओ। लोग पैसा इकट्ठा करते ह आप लोग ये किसी को पैसा दे दीजिए तो फौरन वो किसी गलत चीज के है। आपको क्या जरूरत है किसी से पैसे लेने की और उन्हें पीछे दौड़ेगा या शराब पीना शुरू कर देगा। लेकिन अगर आप गणेश के पूजारी हैं तो आप ये सब कभी नहीं करेंगे। क्योंकि ईसा मसीह ने जब उनका अवतरण लिया तो हमारे उधर चित्त हैी नहीं जाता। आप जानते हैं, कि आज्ञा चक्र की दो खिड़कियां हैं, एक आगे एक पीछे। आगे वाली जो हैं उससे हम देखते हैं. उससे आँखों की चालना होती है। इसलिए जिस आदमी के गणेश गड़बड़ हो जाते हैं उनकी आँख स्थिर नहीं हो सकती, घुमती रहती है। और ईसा मसीह ने तो मोजेस से कही अधिक बात कही उन्होंने ने तो १० चीज़ कहीं की चोरी मत कर किसी की बीवी की और मत देख ये वो ऐसा |
Though shall not have adultrous eyes, ‘आपकी दृष्टि अपवित्र नहीं होनी चाहिए’ भाने आंख में किसी भी तरह का लोभ या मोह या अपवित्रता नहीं होना चाहिए। ऐसी शुद्ध आँखें होनी चाहिए प्रकाश या दीप जलाने से निकल सकती है। लेकिन दीप जो बताईये कि ईंसाई लोगों में, अगर आप लोग परदेस में जाएं, तो आपको बहुत कम लोग मिलेंगे, जो आंखें नहीं घमाएंगे। नहीं तो सारे आंखे घुमाते हैं। उसका असर चित्त पर आता|
पूरी जिसकी आँख इधर उधर चलती रहती है किसी भी वजह से चाहे उसको किसी का लोभ हो जैसे कई कई लोग मेने देखा है रस्ते चलते हेर एक एडवेर्टीस्मेंट पढ़ते है अगर कुछ छूट गया तो मुद मुद कर देकते पढ़ते चलेंगे क्या जरूरत है | हर औरत की और देखतेगे कुछ औरते ऐसी है जो हर आदमी की और देखेंगी क्या जरूरत है ?या को अफलातून समझते है चाहते है की कितने लोग हमारी और देख रहे हैं अरे भाई देखने से क्या मिलना है अगर हज़ारो लोग आपके दर्शन करेंगे तो उनका भी फायदा नहीं और आपका भी फायदा नहीं | ऐसे बेकार क लोगो क दर्शन करने से कोई फायदा नहीं लेकिन हो सकता है इसमें और बी गहरी बाते हो ,
जो भूतग्रस्त होता है उसमे ज्यादा होता है अब गए किसी क घर तो उनको लगता है चीज़े देख कर ये बी होना चाहिए वो भी मेरे घर होना चाहिए | अब लगे उसी में वो भी इतना खराब नहीं पर कोई कोई लोग है चोरी कर के ले जायेंगे | उठा के ले जायेंगे क्युकी वो सोचते हैं की इसको से हमको बड़ी तृप्ति मिलेगी | फिर दूसरे घर जायेंगे चोरी करने क्यों जाते है इस तरह से अपना सारा चरित्र जो पावतीर और सुन्दर है वो श्री गणेश की ही शक्ति से बना है |क्युकी वो सत असत विवेक बूढी जिसे कहते है इस तरह से अपना चित जो गणंश की तरह बड़ा सुन्दर विवेक बद्धि हैं। नीर क्षीर विवेक बुद्धि। संस्कृत में एक शलोक है कि हँस भी सफेद है और बगला भी तो दोनों में जो क्या अन्तर है? नीर क्षीर अगर मिला दीजिये (पानी और दूध ) अन्तर ये है कि हँस दूध में से पानी अलग कर देता है पर बगुला ऐसा नहीं कर सकता वो दोनों चीज़ ले लेता है । इस प्रकार ये जो देवी विवेक बद्धि जो है,हालाँकि हंसा में इसका प्रादुर्भाव है पर देखा जाए तो श्री गणेश की शक्ति है। सहजयोग के बाद श्री गणेश की शक्ति आपमें आ जाती है जब आत्मा का प्रकाश हमारे अंदर आ जाता है तो फिर हम उस प्रकाश में सोचते बेकार है हमारे लिए नाश है,हम इसे नहीं लेंगे | कि अपने अन्दर बसे श्री गणेश की पूजा हो रही है ध्यान आपका बहार है की ये हो रहा है वो हो रहा है उसका कारन यये है की अपने अंदर स्तिथ श्री गणेश की पूजा करे | मतलब अपने अंदर वो पवित्रता जो श्री गणेश का आशीर्वाद है वो फैलना चाहिए | अब लोग कहते है माँ इसको कैसे करना है , इस के लिए आपको सिर्फ इस पर ध्यान करना है। ध्यान धरणा से अन्दर से सारी सफाई हो जाएगी। बाई और की सफाई जो है वो श्री गणेश को बनाती हैं। अब ये बात समझ लीजिए कि ये पाप जो हैं ये समझ पाप आप माँ के विरोध में करते है एक पाप आप पिता के विरोध में करते हैं | इसमें हिन्दुस्तानी बहत माहिर है माने हर समय ये सोचते हैं कि पैसा बहुत बड़ी चीज़ है ,और हेर समय ये सोचते है इसका पैसा खाओ ये करो वो करो पूरी चित्त उसमें और ये नहीं सोचते कि आपके पिता परमात्मा से धनबान कौन हैं।आपको क्या जरूरत है इंसानो के पैसे लेने की ,जैसे ठगने की? ये इसलिए होता है जब आप अपने को असुरक्षित महसूस करते हैं बस गणेश जी के आशीर्वाद से उधर चित्त ही नहीं जाता तो जो माँ के विरोध में आप हो रहे हैं , वो ज्यादा गहन हैं।अब ये बात आप समझ लीजिये ये पाप जो हैं ,ये अन्दर ही अन्दर आपको खाते हैं। सारी बाईं बीमारियाँ भी | ऐसे अनेक तरह की बीभारियाँ जो आज करना होगा। अगर आप सहजयोगी हैं तो रोज़ आपको ध्यान करना चहिए पहले बाई ओर से ध्यान कीजिए फिर दायीं ओर से है| और लेफ्ट साइड जो है वो प्रकाश या दीप जलने से निकल सकती है।क्युकी डीप जो है श्री गणेश का दूत है अन्धकार को दूर करना उनका कार्य हैं। जिससे कि हमारा खान पान ठीक तरह से पचता है औरउसका विसर्जन भी ठीक से हो जाये ये भी श्री गणेश की शक्ति है | इस प्रकार जो हम अपने में शरीर का इतना विचार करते हैं कि रोज़ शरीर को धोएंगे ये करेंगे वो करेंगे, उससे ज्यादा हमें अंदर की मलिनता की और नज़र करनी चाहिए | पर लाँछन लग सकते हैं। शीशे में देखकर कहना चाहिए कि मैं ये क्या कर रहा हूँ? और श्रीगणेश का आहुवान करना चाहिये। उनसे कहना चाहिए कि आप आइए विराजिए। और सिर्फ मूलाधार पर ही नहीं पर सरे चक्रो पर विराजिए आज्ञा तक उनका राज्य है इसलिए ईसामसीह ( i am the path i am the gate) | कहा की तो ये है कि “मैं ही मार्ग हूँ, मैं ही द्वार हैँं| पर उन्होंने ये नहीं कहा की में अंतिम मंजिल हु (destination)| ये कहा है में आत्मा है और में आत्मस्वरूप हु पर फिर उन्होंने आदिशक्ति पर छोड़ दिए की इसको तुम ठीक करो | यानी परमात्मा का स्वरूप अब अगर आप किसी भी धर्म को पढें तो आपको पता चलेगा इन सब ने ही आत्मा पर जोर दिए है|उनके कि हर ग्रन्थ में पवित्रता पर ही जोर दिया है| अवतरण परमात्मा का अंश है,।श्री गणेश वो जो भी करेंगे अच्छा ही करेंगे । गणेश पूरी तरह जागरूक हैं। ये पवित्रता जो की श्री गणेश की शक्ति है और जब मनष्य सिर्फ श्री गणेश पूजा करने से ठीक ही होगा और जब उनके उस पवित्रता का वह अपना मान नहीं रखता उसकी मर्यादाएं नहीं रखता है तब उसको ये तकलीफ देने लग जाते हैं तब श्री गणेश मतलब ये कि श्री गणेश वह से हट जाते हैं।वो अगर हट गए गए तो उनकी शक्तियां भी हट गयी। फिर कोई भी बीमारियां हो सकती है उसका सामना करें ।
सहजयोगियों को चाहिए कि श्री गणेश को नमन करें जब भी उनको ध्यान करे ,कोई गलत न करे कोई विचार अगर मन में आये तो उनकी शुद्धता से वो सफाई करें। अपनी आत्मिक जो चीजें हैं उनका ध्यान रखना, उनको उनकी सफाई और मेहनत से मनष्य शद्ध हो जाता है और मनुष्य जो है वो उस चरम सीमा तक पांच सकता है जिसका स्वप्न आप लोग देख रहे हैं । श्री गणेश हैं और जिन्होंने श्री गणेश को देखा सिम्पैथेटिक पर घमते देखा और समझ नहीं पाये। वे उसी को कण्डलिनी समझबैठे। इसी से बहुत गड़बड़ बात हो गयी और तांत्रिको ने बड़ी गड़बड़ियां की तो अपने अन्दर की धरोहर जो है। और विरासत है ये पवित्रता को समझना चाहिए ये बोहत बड़ी चीज़ है उसको समझना चाहिए । विवाह भी उसी पवित्रता का बन्धन है। तो जिन लोगों ने धर्म को संभालने की कोशिश की, हम दस गुरूओं को मानते हैं सहजयोग में , उन्होने विवाह के प्रति बहुत जागरूकता प्रकट की |जैसे की मोहम्मद साहब कह लीजिये ।बोहत से लोग बोलते है मोहम्मद साहब ने इतनी शादिया क्यों की? उस समय इतने लोग मारे गये थे, इतने परूष मारे गये थे कि आदमी ही नहीं बचे थे।और यही बात अपने पास कोई व्यवस्था ही नहीं थी| ये कार्य कामों में लग जाएं जिससे कि वो अपना धन उपार्जन कर सके, उस वक्त तो कोई व्यवस्था ही नहीं थी।तो वो करते क्या और विवाह एक बन्धन है। जिससे कि मनुष्य पवित्र पर पूरी तरह पवित्र है । इसलिए मोहम्मद साहब ने इतनी शादियां करके उन लोगो को बचने की कोशिश की और उन औरतों को जो पर जा सकती थी इसको समझने के लिए आप श्री कृष्ण को भी देखिये। उनकी सोलह हजार पत्नियां , बोहत से लोग कहते है १६००० पत्नियां और पाँच और पत्नियां थीं। अब वो परूष थे और परूषों पर लांछन पहले लगते हैं हम माँ हैं हमारे बच्चे सब हमारे बच्चे हमारे ऊपर कोई लांछन नहीं लगा सकता अब वो तो पुरुष थे ये उनकी 16,000 शक्तियाँ वो अगर अपनी 16,000 शक्तियाँ रखते तो लांछन हो जाता , ये उनकी16,000 शक्तियाँ और पाँच-पंच महाभूत की शक्तियां सोचा की शादी करले ठीक हैं कोई नहीं उन्हें कुछ सकेगा| में किसी भी उम्र में लांछन लग जाता हैं तो उन्होंने कहा की ठीक है शादी हो जाएगी और में इनको इस्तेमाल करूँगा शक्तियां थी | इस प्रकार हमारे यहां भी समझने की जरूरत है कि ये जो परमात्मा के अवतरण हैं इन्होंने ऐसे काम क्यों किये जो कि समाज आदि रीतियों से अलग हैं। देखने में ये सब विचित्र लगते हैं। क्योंकि वो सब अवतरण हैं | वो परमात्मा का अंश,परमात्मा का स्वरूप है। वो जो भी है जो भी करते हैं अच्छा वो पाप नहीं करते |उनके अंदर श्री गणेशा पूरी तरह से जागृत हैं | ऐसे बारे में सोचना है कि सिर्फ श्री गणेशा पूजा करने से नहीं होगा उनकी महत्ता गाने से नहीं होगा | उसके ऊपर लेक्चर देने से नहीं होगा उनको करना चाहिए उनको जागृत करने से ही लेकिन कभी कभी में सोचती हु डावांडोल और जैसे ही में ये सोचती हु चित्त भी डावांडोल |
फिर ऐसे जो सहजयोगी हो जाते हैं उनको हम कहते हैं की अधूरे हैं | ये डावांडोल हैं अभी ये किनारे पर हैं अंदर उतरे नहीं तो अपने चरित्र का मान रखना ये अपनी अपनी स्वयं की खास चीज़ है उनका ध्यान रखना और उनको खुलेआम रास्ते पर बेचना या उसका प्रदर्शन करना ये सब अपनी आँखों से उसको नष्ट करना ये सब बाते बोहत गलत हैं | और कोई समझ नहीं सकता की चित्त कितना बावला हो जाता है और चित्त जब बावला हो जाता है फिर अटेन्शन कही भी जाता है फिर आपको कोई भी बीमारी लग सकती है कोई भी दुविधा लग सकती है | कुछ भी हो सकता है |एक सहजयोगी के लिए हृदय से पूरी तरह श्री गणेश को मानना बोहत जरूरी है | इनकी स्तुति सबने की है अलग अलग फॉर्म में , मोहमद साहब ने भी इनकी स्तुति की है क्युकी वो जानते थे की निष्कलंक ये पूरी तरह से निष्कलंक , और यही बात हम सबको अपने बारे में सोचना है की हम अपने निष्कलंक रखे ये करते वक़्त बुद्धि से नहीं फिर आपको लगेगा अरे बाप रे बड़ी मुल्गैरात सी चीज़ है फिर आप इसे छोड़ दे अपने चित्त को ही समझा दे की देखो भाई गलत काम मत करो अगर आप इस बात पर पूरी तरह से जम जाये की हमे ये सब काम नहीं करने ये सब गन्दगी है तो कोई भी शक्ति उस में से आपको हटा नहीं सकती इसलिए में आपको कहती हु की सबसे आसान है की बच्चों जैसे होना उनके जैसा स्वाभाव भोलापन ,सादगी, पर आज में देखती हु की परदेश में बच्चो पर बड़ा भारी आघात आ रहा है | न जाने कैसे ये काम करते हैं बच्चो को नष्ट करने का , इसका मतलब बड़ी नेगेटिव फाॅर्स चल रही जो इनका सर्वनाश कर है , इसलिए हमे यहाँ हिंदुस्तान में बोहत सतर्क रहना चाहिए की ये नेगेटिव फाॅर्स यहाँ न आ जाये हमारी जो संस्कृति है वो बोहत सुन्दर है उसमे बच्चे पनपते भी बोहत सुन्दर है पर आप की जिम्मेदारी है की आप सतर्क होक अपनी और अपने बच्चो की और देखे माँ बाप को बच्चो को बताना होता है ये गलत काम है ये नहीं करना ये ठीक नहीं है करना हम सहजयोगी हैं ये कहने में कोई हर्ज़ नहीं और ये बताने में कोई हर्ज़ नहीं आजकल लोग सोचते हैं की बचो से अगर बताया जाये की तुम ये काम मत करो वो काम मत करो इसका मतलब है की हम बच्चो को रुकावटे डालते हैं | और परदेश में तो बच्चो को जैसा चाहे वैसा रहने दे तो ये बात थी की बचे पेड से क्यों नहीं लटके आपने क्यों पैदा किए आपकी क्या जिम्मेदारी है आपको क्या करना है | बच्चो को कहना होगा ये गलत काम है और हम नहीं चाहते इसलिए हम आपको पैसे नहीं देंगे आपकी मदद नहीं करेंगे आप कायदे से रहिए | नहीं तो हमारा भी समाज उसी तरह से हो जायेगा उनकी अच्छे तो है नहीं बुराई हम फट से ले लेंगे | आशा है आप लोग समझगए हैं कि गणेश जी का कार्य महत्वपूर्ण है क्योंकि वही आपकी जागृति करते हैं। आपके चक्रों को शुद्ध करते हैं। उनमें प्रकाश डाल देते हैं और आपको हमेशा प्रकाश की ओर अग्रसर करते हैं। आपकी नजर हमेशा प्रकाश की ओर रहती है। ये चीज आपको आत्मसात करनी होगी कि हम श्री गणेश को कभी भी अपमानित नहीं करेंगे, कभी भी जिंदगी में । आप लोगों में, जो दिल्ली के हैं, आशा है आज की पुजा के बाद एक नया धर्म प्रस्थापित होंगा। वो नया धरम ये है जिसे हम कहते है सुबह दो तरह के लोग होते हैं। ऐसे जो शुभ लोग हो जाते हैं उनकी एक नजर काफी है दूसरे आदमी को ठीक करने के लिए। एक नजर काफी हैं। वो नज़र जिसे कहते हैं कटाक्ष कटाक्ष निरीक्षण। हर एक गलांस में पूरा निरीक्षण होता है चित्त के जैसा | उस से आपकी मेमोरी जाएगी |
बाईं ओर की सारी समस्यायें ठीक हो सकती हैं। अगर आप अपने गणेश को जागृत करें। बाह्य में नहीं। बाहय में बिल्कुल नहीं। अन्दर की चीज है। जिसे आप लोग प्राप्त करें। उसके प्रकाश से आप प्रकाशित हों और सारे ब्रह्मांड परउनकी शक्ति का प्रादर्भाव हो, चेतना आ जाए और लोग उसको मानें। यही हमारा आशीरर्वाद है।गणेश जी की बात करते करते ज्ञानसत हो जाते है अंदर की और द्रिष्टि चली जाती है अंदर की और चित्त खींचता है ऐसे वो जैसे एक छोटे बच्चे को देखिए , एक छोटा बच्चा आये तो उसकी तरफ चित्त आकर्षित हो जाता है ऐसे श्री गणेश उनकी बात करिये तो चित्त अंदर ही चला जाता है | ये जो वात्सल्य रस है ये परदेश में इतना नहीं है जो यहाँ है ये वात्सल्य पन भी उन्ही क प्यारे पन की देन है | आशा है आप लोग इसको अमल करेंगे | अनंत आशीर्वाद |

H.H. Shri Mataji Nirmala Devi