Adi Shakti Puja: She is the Mother

Campus, Cabella Ligure (Italy)

Feedback
Share

आज आप सभी ने आदि शक्ति की पूजा करने का निर्णय लिया है।

कुंडलिनी शक्ति या आदि कुंडलिनी और आदिशक्ति की पूजा करने में फ़र्क़ है, अंतर इस प्रकार है, एक ओर कुंडलिनी आप में आदि कुंडलिनी के द्वारा प्रतिबिंबित हैं;

दूसरी ओर आदि शक्ति की शक्ति है, जो परम चैतन्य हैं तो समग्रता में अगर आप देखे तो इसके दो पहलू हैं।

एक है परम चैतन्य के रूप में उसकी शक्ति 

और उसके साथ ही मनुष्य में कुंडलिनी के रूप में उसका प्रतिबिंब।

तीसरा कार्य जो आदि शक्ति को करना था वह इस पूरे ब्रह्मांड की रचना करना ।

शुरुआत के लिए जैसा आपने कल भी देखा कि ब्रह्मांड कैसे बनाया गया था 

और फिर कैसे धरती माँ के इस विशेष ग्रह को बनाया गया। 

अब मैंने आपको एडम (नर) और ईव (मादा) के बारे में जो बताया है,

हमने पाया है कि जॉन ने अपनी किताब ज्ञानशास्त्र में भी कहा है। 

यह बहुत आश्चर्यजनक है। 

मैंने हमेशा आपको बताया है कि ईसा मसीह ने आपको बहुत सी बातें बताई होंगी, लेकिन वे बाइबिल में नहीं हैं।

इसलिए यदि आप समझते हैं कि यह आदि शक्ति एक सर्प के रूप में आई हैं, तो आदि कुंडलिनी उसका हिस्सा है,

और एडम और ईव से कहा, विशेष रूप से ईव से

कि उसे ज्ञान का फल खाने के लिए कहना चाहिए।

और इसका कारण जो मैंने दिया वह वहां लिखा है मैंने आपको बिलकुल वही दिया है क्योंकि मातृ शक्ति, नारी शक्ति नहीं चाहती थी कि उसके बच्चे जानवरों की तरह रहें।

बिना यह समझे कि उच्च लोकों का ज्ञान क्या है?

उन्हें अपनी स्वतन्त्रता के माध्यम से ऊपर उठने का मौका नहीं दिया। और फिर अधिक से अधिक उच्च जागरूकता 

यह माता की चिंता थी। 

इसलिए दो तरह के संसार निर्मित हुए: 

एक था दिव्य और दूसरा निर्मित होने लगा । यह देखने में बहुत ही ज़बरदस्त लगता है, हज़ारों-हज़ारों अरबों-अरबों साल इस तरह के कार्य को करने के लिए बीत चुके हैं,

लेकिन, अगर आप देखें, तो आधुनिक युग में 

हम इतने कम प्रयासों के साथ चाँद पर जा रहे हैं और साथ ही इतने कम समय में हम वहां पहुंच जाते हैं। 

कोई भी यह नहीं सोच सकता था कि हम कभी वहां भी होंगे। 

यह सब मानव मस्तिष्क के माध्यम से हुआ है। 

अब आख़िर मनुष्य का मस्तिष्क क्या है? 

मनुष्य मस्तिष्क विराट के मस्तिष्क के कहीं आसपास भी नहीं है 

और न ही यह पूरी तरह से इस्तेमाल किया गया है, इसका उपयोग पूरी तरह से नहीं किया गया है।

यह मानव द्वारा बहुत कम उपयोग किया जाता है, जिसके द्वारा उन्होंने इस तरह की चंद्रमा की उड़ान हासिल की है।

निस्संदेह इसमें कोई उद्देश्य नहीं था और मुझे नहीं पता कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। 

लेकिन उन्होंने ऐसा किया। 

तो पूरी प्रकृति उसके द्वारा बनाई गई थी। 

आज आप जो कुछ भी अपने आस पास देखते है, उसके द्वारा बनाया गया है,सब उसका काम है जो भी वहां है।

आप हैरान रह जाएंगे, बस अभी मैंने कहा था कि मैं बहुत भारी साड़ी पहनने जा रही थी 

और मैंने कहा कि यह बहुत गर्म है  

इसलिए साधारण साड़ी बदल लेना बेहतर है तो मैंने बदल ली 

और जब मैं बाहर आई तो मैंने पाया कि यहाँ ठंड हो गई है। 

तो प्रकृति सब जानती है 

और जो प्रकृति को सूचित करता है वह है परमचैतन्य। 

परमचैतन्य कभी भी इतना सक्रिय नहीं था जो मेरे जन्म के बाद से शुरू हुआ। मुझे कहना चाहिए कि जब कृतयुग शुरू हुआ

इस समय आपको अपना साक्षात्कार पाना  था। 

जिसे आप कह सकते हैं यह ईश्वरीय सामूहिकता द्वारा तय किया गया था।

सभी देवी, देवता, उन सभी ने इस कार्य को किसी ऐसे व्यक्ति पर डालने का फैसला किया जिसे वे बहुत सक्षम मानते थे

तो उन्होंने कहा कि हम सब आपके साथ रहेंगे, पूरी तरह से आप के साथ, हमारी सभी शक्तियां आपके साथ होंगी। 

लेकिन आप इस कलियुग में अब मनुष्य के परिवर्तन का कार्य करें।

एक तरह से इंसान जानवरों की तुलना में अधिक कठिन हैं

क्योंकि उनकी अपनी स्वतंत्रता है

और उन्हें यह स्वतंत्रता दी गई है, उनकी अंतिम स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए।

अपनी स्वतंत्रता में, वे जिस तरह से व्यवहार करते हैं, 

वह कुछ बहुत ही आश्चर्यजनक है कि कैसे वे पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर चले जाते हैं

और उन चीजों को करने की कोशिश करते हैं जो बहुत विनाशकारी हैं।

निस्संदेह कलयुग में इसकी भविष्यवाणी भारत में की गई थी,

लेकिन मुझे लगता है कि वह यह भविष्यवाणी नहीं कर सकते कि अमेरिका में क्या होगा 

या पश्चिमी देशों में क्या होगा जहां लोगों को केवल स्वयं को नष्ट करने की स्वतंत्रता थी ,

और वे स्वयं को नष्ट करने के नए तरीक़े खोज रहे थे। 

इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता था,

 आदि शक्ति या भगवान सर्वशक्तिमान के द्वारा भी रोका नहीं जा सकता था ।

क्योंकि आपको अपने आप को बर्बाद करने, अपने आप को ख़राब करने और नर्क में जाने की स्वतंत्रता दी गई थी। 

इसे किसी इश्वरीय शक्ति द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता। 

ईश्वरीय शक्ति भी आपकी स्वतंत्रता का सम्मान करती है। 

तो ईश्वरीय सामूहिकता ने सोचा, 

क्या हम आदि शक्ति के निर्माण को पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे?

क्या हम जो कुछ भी उसने बनाया है उसे पूरी तरह से नष्ट कर देंगे और फिर कुछ बेहतर बनाएंगे,

यह चर्चा चलने लगी। 

और उनमें से अधिकांश मनुष्यों से बहुत तंग आ गए थे, विशेषकर पश्चिमी स्वतंत्रता के साथ 

कि उन्होंने कहा कि ये लोग नर्क चाहते हैं 

और हम उन्हें स्वर्ग क्यों दें, यह उचित नहीं है। 

इसलिए सबसे पहले आदि शक्ति ने उनमें एक खोज की इच्छा पैदा की। उन्होंने इस इच्छा की रचना खोज करने के लिए की

और इसलिए इस संस्कृति से संबंधित लोग जो इतने विनाशकारी थे, उन्होंने खोजना शुरू किया। 

जब खोज शुरू कर भी दी गई थी हमेशा की तरह बाज़ार में कई अन्य लोग थे जो उनकी खोज का उत्तर देने के लिए आगे आ गए। 

उन्हें विभिन्न पंथों और चीज़ों और झूठे लोगों और उन सभी के पास जाना पड़ा क्योंकि उनके पास जानने का कोई रास्ता नहीं था। 

लेकिन अगर उन्होंने जागृत लोगों की कुछ किताबें पढ़ीं होतीं 

जैसे कबीर, नानक, यहाँ तक कि ज्ञानशास्त्र, उनके शास्त्रों जैसा कुछ भी, 

तो उन्हें समझ में आ जाता कि सच क्या है 

और इसे कहाँ खोजना है और कैसे खोजना है। 

यह एक बड़ा क़दम है जो मुझे उन लोगों के बीच मिला जो सच्चे साधक हैं और जो साधक बिल्कुल भी नहीं हैं। 

वे जानना ही नहीं चाहते हैं और वे कभी भी साधक नहीं बन सकते। 

मैं आपको आश्वासन दे सकती हूं कि उनमें से कुछ कभी भी खोजने के बारे में नहीं सोचेंगे। 

वे भूतग्रस्त हो जाएंगे, उन्हें बीमारियाँ होंगी, उन्हें भूकंप आएंगे उनके पास भूकंप होंगे।, उनके साथ कुछ भी होगा, वे कभी नहीं खोजेंगे। 

भले ही उन्हें बीमारियाँ हों, वे कहेंगे ‘ओह, हम शहीद हैं, हम बड़ा कार्य कर रहे हैं। 

ऐसी मूर्खता उनके सिर में आ गई है कि वे सोचते हैं कि इन ग़लत कार्यों को करने से हम बच जाएंगे

और यह मूर्खता विकृत मस्तिष्क के माध्यम से आती है 

और यह विकृत मस्तिष्क तब कार्य करता है जब लोग उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। 

मुझे नहीं पता कि वे चारों ओर क्यों नहीं देखते और अपने लिए देखें कि क्या हो रहा है। 

इसलिए यह उम्मीद करना कि पूरी दुनिया स्वर्ग बन जाएगी, यह बिल्कुल संभव नहीं है, यह संभव नहीं है, यह नहीं हो सकता। 

उन्होंने हर तरह की कोशिश की है। 

मैंने लोगों को नशीली दवाओं, शराब, यह, वह करते देखा है। 

एक व्यक्ति हैं जिन्होंने ऐसा लिखने पर अपनी पीएचडी प्राप्त की है, वह शराब पीने के माध्यम से आध्यात्मिकता तक कैसे पहुंचे 

और उन्होंने उसके लिए उन्हें पीएचडी दी। 

इसलिए विश्वविद्यालयों के मामलों की जानकारी के आधार पर, मुझे नहीं पता कि इस तरह के मूर्ख लोग कैसे, कहाँ से, किस रचना से बाहर आए हैं।

यह समझना असंभव है  वे कैसे सोच सकते हैं कि इस तरह का विनाश उन्हें उनके मोक्ष की ओर ले जाएगा। 

वे इसे रोज़ देखते हैं। वे इसे रोज़ देखते हैं। वे इसे जानते हैं, यह घटित हो रहा है लेकिन फिर भी वे सुन नहीं सकते। 

लेकिन जो साधक हैं वे इतने उत्साह से खोज रहे हैं कि उन सभी को उनका आत्म-साक्षात्कार देना होगा|

अब निस्संदेह यह मेरा कार्य है मैं मानती हूँ। मैं उस काम के लिए इस धरती पर आई हूं। मैं इसे करने वाली हूं। 

मैं अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही हूं और कोई भी अवतरण इस प्रकार नहीं रहा है जैसे मैं इतने वर्षों तक रही हूं 

और मेरी ऐसी करुणा जो वास्तव में मुझे जीवंत बनाती है 

कि मुझे लगता है कि हमारे पास बहुत अधिक सहजयोगी होने ही चाहिए हमें पूर्ण मोक्ष प्राप्त करना है। 

उस करुणा और प्रेम के साथ, कोई कुछ भी प्राप्त कर सकता है। मुझे नहीं लगता कि जो साधक नहीं हैं वे इसे प्राप्त कर पाएँगे। 

अब ऐसा क्यों है, कुछ साधक हैं और कुछ नहीं? कोई कह सकता है कि आदिशक्ति ने अगर सभी मनुष्यों को बनाया है, तो उन सभी  

को खोज होनी चाहिए। 

क्योंकि स्वतंत्रता में, वे अपना रास्ता भटक चुके हैं। 

वे कुछ और खोज रहे हैं और उन्हें लगता है कि वे सही हैं। उन्हें यह सोचने का अधिकार है कि वे सही हैं। 

यहां तक ​​कि एक मूर्ख व्यक्ति यहां तक ​​कि एक पागल व्यक्ति भी सोचता है कि वह सही है। 

अगर आप उससे कहते हैं कि आप पागल हैं, तो वह कहेगा, आप पागल हैं और यह खोज उनमें डाल दी गई है, हालांकि वे अभी तक सक्षम नहीं हैं।

इसलिए उनमें से कई इसे उचित ढंग से प्राप्त कर रहे हैं

क्योंकि इसके लिए व्यक्ति को समर्पण करना पड़ता है,

किसी की स्वतंत्रता को नहीं, किसी की बुद्धिमत्ता को नहीं बल्कि मनुष्य में विकसित हुए अहंकार को । 

इस अहंकार के साथ मैंने ऐसे लोगों को भी देखा है जो भूतग्रस्त  हैं, वे अपने अहंकार को बरक़रार रखना चाहते हैं 

और अहंकार के माध्यम से वे आधिपत्य करना चाहते हैं। 

क्या आप कल्पना कर सकते हैं? नकारात्मक शक्तियों का आधिपत्य होता है। 

ऐसे लोग उसे बरक़रार रखना चाहते हैं ताकि वे इसे अपने उद्देश्य के लिए उपयोग कर सकें। 

वे इससे घृणा नहीं करते,  न ही वे  इससे छुटकारा चाहते हैं। 

लेकिन वे इसे केवल इसलिए रखना चाहते हैं क्योंकि वे अपने उपयोग के लिए इस अधिकार का उपयोग कर सकें। 

इसलिए वहां खोज की श्रेणी बहुत कम है। 

लेकिन कई ऐसे हैं जो खोज के पास भी नहीं हैं। वास्तव में हम उन्हें बुरे लोग कहते हैं 

और वे कभी नहीं चाहते हैं, वे कभी नहीं चाहते हैं कि यह दुनिया बदल जाए।

हमारा मीडिया इन दुष्टों के प्रभुत्व में है। 

वे नहीं चाहते कि दुनिया बदले। वे ऐसा कुछ भी नहीं दिखाना चाहते जो अच्छा हो। 

वे उस बिंदु को नहीं देखना चाहते हैं जो मानव जाति के परोपकार के लिए मदद करने जा रहा है

इसलिए एक तरफ़, हम देखते हैं ऐसी सामूहिक नकारात्मकता 

दूसरी तरफ़ हम ऐसे साधक पाते हैं जो वास्तविक साधक हैं। कुछ ऐसे हैं जिन्हें हम अधपके हुए कह सकते और कुछ मिथ्या साधक हैं। 

अगर उन्होंने आध्यात्मिक खोज के नाम पर, 

हम कह सकते हैं कि किसी प्रकार का बलिदान किया है उनके लिए, वे बहुत महान हैं। 

इसके अलावा वे उन लोगों के साथ जुड़ जाते हैं जो दावा कर रहे हैं। 

क्योंकि मैंने कभी किसी चीज़ का दावा नहीं किया, वे मुझसे प्रभावित नहीं हैं। 

मैंने अपना पहनावा नहीं बदला है। मैं एक गृहिणी की तरह रहती हूं। इसलिए वे मुझसे प्रभावित नहीं हैं। 

मैंने अपने बारे में कुछ महान दिखाने के लिए दो सींग विकसित नहीं किए हैं इसलिए वे मुझसे प्रभावित नहीं होंगे। 

लेकिन दूसरी ओर अगर आप देखें, तो यह माया है, यह महामाया है जहाँ आप देखते हैं, आदि शक्ति मनुष्य की तरह हर काम करती है।

आप यह नहीं जान पाएंगे कि वह दिव्य है। 

मेरे परिवार के लोग यह पता नहीं लगा सके जब तक मैंने यह काम शुरू नहीं किया, उनमें से कोई भी नहीं था, सिवाय मेरे पिता और माँ के। 

कोई भी यह पता नहीं लगा सका कि मेरे पास कोई शक्तियां हैं। 

दिव्यता के प्रति ऐसी असंवेदनशीलता आदि शक्ति की महामाया शक्ति द्वारा बनाई जा सकती है, जो बहुत महत्वपूर्ण है,अन्यथा आप आकलन नहीं सकते, आप समझ नहीं सकते। 

इसके बावजूद, मैंने कई बार लोगों को ग़लत समझा क्योंकि वे जानते हैं कि थोड़ी देर के लिए छलावरण कैसे किया जाता है। 

लेकिन तब मुझे पता चलता है,

यदि चाहने वाले उत्साही हैं और वे वास्तव में सत्य की तलाश कर रहे हैं,

तो वे इसे पा लेंगे, वे इसे पा लेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है 

क्योंकि पूरी रचना उनके लिए है। 

पूरा ब्रह्मांड उनके लिए है। 

सभी देवता उनके लिए हैं। 

सभी स्वर्गदूत उनके लिए हैं। वे सभी उनकी तलाश कर रहे हैं। 

यह महत्वपूर्ण है कि हमारे पास कितने सहज योगी हैं। 

किसी के पास अपने जीवनकाल में इतने सहज योगी नहीं बने। 

क्योंकि हमारे पास माध्यम होने चाहिए, मेरे पास माध्यम होने चाहिए  

और इन माध्यमों को बहुत साफ़

-सुथरा, सुंदर, निर्दोष और परोपकारी होना है। 

यदि केवल वे इस बात के लिए आत्मसमर्पण करते हैं कि हम यहाँ सर्वशक्तिमान ईश्वर के साधन के रूप में हैं 

और हमें परोपकार करना है, तो मैं आपको बताती हूँ कि कम से कम 70% काम हो गया है। 

लेकिन भले ही उन्हें आत्म साक्षत्कार हो गया हो,

जैसे अंडा खोल से निकलता है, कुछ पक्षी अभी भी अंडे का हिस्सा ले जाते हैं और उनमें से कुछ पक्षी होने के लिए भी बड़े नहीं होते हैं। 

अब हमें स्वयं को आंकना होगा। 

हमें स्वयं को समझना होगा। 

एक और बात जो आप जानते हैं, मैं एक बहुत ही सौम्य व्यक्ति हूँ, । 

लोग सोचते हैं कि मैं बहुत क्षमाशील हूँ। 

मैं सभी को जानती हूँ, ऐसा नहीं कि मैं नहीं जानती। 

लेकिन मैं अनुमति देती हूँ, ठीक है जहाँ तक ​​आप आगे जा सकते हैं, उतना आगे बढ़िए। 

अनुभव ही एकमात्र तरीक़ा है जिससे इंसान समझ सकता है, इसमें कोई संदेह नहीं। 

अगर आप उसे कुछ बताएंगे, तो वह कभी नहीं समझेगा।

आत्म-साक्षात्कार के अनुभव ने आपको समझा दिया है 

लेकिन फिर से, मैं कहूंगी कि हम पूरी दुनिया को आत्म-साक्षात्कार नहीं दे सकते, हम नहीं कर सकते। 

वे पत्थर की तरह हैं, बिल्कुल भयानक लोग। 

जो कुछ भी हो रहा है वह यह है कि जो झूठे हैं वे उजागर हो रहे हैं

और हर कोई देख रहा है कि वे उजागर हो रहे हैं। 

निश्चित रूप से यह जोखिम उन्हें इन भयानक लोगों से बचाएगा। लेकिन मुझे नहीं पता कि क्या वे सहज योग में आएंगे या क्या वे अपना आत्म-साक्षात्कार पाएँगे। 

यह मैं आपको इसलिए बता रही हूँ क्योंकि अब मुझे मनुष्यों का अनुभव है और इन सभी वर्षों में मैं कार्य कर रही हूँ,मैं ने देखा है कि वहां लोग और लोग और लोग हैं। 

उनमें से जो साधक हैं उनको अपनी खोज पर बहुत गर्व है। 

इसलिए उनमें से कुछ अपने प्रयास छोड़ना नहीं चाहते हैं, वे कहते हैं यह एक तरह का कार्य है। आप इसे एक तरह का शौक़ कह सकते हैं कि वे साधक हैं।

अब उनके पास एक साधक होने का प्रमाण पत्र है, वे अजीब कपड़े पहनते हैं, उनके अजीब घर हैं, अजीब बाल हैं, सब कुछ, संन्यासी, वे आक्रामक हो सकते हैं, कुछ भी हो, पर हम साधक हैं। 

वे स्वयं के लिए एक प्रमाण पत्र लेते हैं कि हम साधक हैं। 

यह साधकों का एक और गुण भी है। 

उनके लिए यह एक तरह की जीवन शैली है कि वे साधक हैं और उन्हें जहां भी जाना है, वे खोजने के लिए जाएंगे, वे दस या बीस स्थानों पर जाएंगे। 

हर बार जब वे मेरे साथ बहस करते हैं, माँ कुछ और तरीक़े होने चाहिए, हाँ शायद, पर मुझे किसी का पता नहीं है, आप जा सकते हैं। 

अब आदि शक्ति का मुख्य कार्य आज साक्षात्कार देना है। यह मेरा मुख्य कार्य है। 

शेष सभी की देखभाल की जाती है, यह पहले से ही प्रबंधित है|

मुझे कहना चाहिए कि यह एक कंप्यूटर की तरह है। 

मुझे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, यह एक प्रतिवर्त क्रिया (पलट कर अपने आप होने वाली क्रिया) है। 

जो कुछ भी हो रहा है वह एक प्रतिवर्त क्रिया है। 

मुझे इन चीज़ों के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, चाहे, 

जैसे लोग कहें कि, माँ मैंने आपसे प्रार्थना की और यह कैसे आप मेरी इतनी मदद करती हैं

यह सभी प्रतिवर्त क्रियाएँ हैं। उस समय वह विचार मुझे भी आ सकता है,वह विचार, 

लेकिन यह प्रतिवर्त क्रिया है। मैं वास्तव में कुछ नहीं करती हूँ।  असल में, मैं निष्क्रिया हूँ जो कुछ भी नहीं कर रही है। सबसे आलसी व्यक्ति जिसके बारे में आप सोच सकते हैं, वह मैं हूँ। 

वास्तव में, क्योंकि अगर एक पूर्ण संगठन मेरे लिए कार्य कर रहा है तो मुझे कार्य क्यों करना चाहिए, कुछ भी आवश्यक नहीं है। 

लेकिन एक बात यह है, मैं देख रही हूँ और जब मैं देख रही हूँ कि जो प्रतिवर्त क्रिया पर कार्य करता है, वह है परमचैतन्य! 

क्योंकि अगर वह आदि शक्ति की शक्ति है तो जो कुछ भी मैं देखती हूँ उस शक्ति को सूचना दे दी जाती है, यह दूसरा तरीक़ा है।

जैसे हम देखते हैं कि हमारे पास कहीं न कहीं बिजली है और कुछ ग़लत हो जाता है, तो यह उस शक्ति को प्रतिबिंबित नहीं करता है। यह नहीं करता। 

यदि कुछ ग़लत होता है तो यह यहीं और यहीं पर ही समाप्त हो जाता है। 

लेकिन दूसरा तरीक़ा यह है कि अगर मैं कुछ ग़लत होता देखती हूँ तो मुझे, कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है, मैं सिर्फ़ साक्षी हूँ, मैं सिर्फ़ देख रही हूँ, 

तो सब कार्य परमचैतन्य की इस अद्भुत शक्ति के माध्यम से कार्यान्वित होता है। अब यह शक्ति आप नहीं जानते। 

आप कुंडलिनी को जानते हैं, आप चक्रों के बारे में जानते हैं,यह, वह जानते हैं लेकिन परमचैतन्य की यह शक्ति हर कण में, हर परमाणु में है। 

और यह इस प्रकार से कार्य करता है कि यह आपका निर्देशन करता है, यह आपको आगे की ओर धकेलता है, यह आपको परोपकार के मार्ग पर ले जाता है। 

कभी-कभी लोग कहते हैं, ‘माँ! मैं इस दुकान को ख़रीदना चाहता था, मैं इसे नहीं पा सका’ और वह सब। भगवान का शुक्र है यह आपके हित के लिए है जो आपको नहीं मिला। 

दस दिनों के बाद वे आएंगे और कहेंगे, शुक्र है भगवान का कि मुझे वह नहीं मिला। 

इसलिए धीरे-धीरे अनुभव के माध्यम से, आप समझने लगते हैं कि आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। 

यदि आप रास्ते में खो जाते हैं, तो आमतौर पर लोग बहुत परेशान हो जाते हैं, लेकिन सहज योगी नहीं, वे कहेंगे ओह, बहुत अच्छा है। यहाँ कुछ होगा जो भगवान हमें यहाँ लाए हैं। 

यह क्रिया थोड़ी बदल जाती है। 

मैं कहूंगी कि जो व्यक्ति अति सक्रिय है, वह अब विचार करना आरंभ कर देता है – आत्मसमर्पण, इस्लाम, आत्मसमर्पण। 

इस समस्या को परमचैतन्य पर छोड़ दो और यह कार्य करता है। 

विश्व में ऐसी ज़बरदस्त घटनाएँ हुई हैं, केवल बंधन द्वारा, यह अविश्वसनीय है, ये सब कैसे हो रहा है?

यहां तक ​​कि आपको लगता है कि बहुत सारी हत्याएं हुई हैं, यह बात हो गई, वह हो गई।

यह केवल परमचैतन्य की उपस्थिति को व्यक्त करने के लिए है,“कृत”, यह कार्य कर रहा है जिस तरह से यह कार्य करता है। 

“कृत” का अर्थ है जो किया जाता है। 

तब आप महसूस करना शुरू करते हैं कि यह शक्ति आप कुंडलिनी के माध्यम से ही प्राप्त कर सकते हैं।

इसलिए जब आपकी कुंडलिनी चढ़ती है, तो वह आदि शक्ति का ही प्रतिबिंब है, जैसा कि हम कह सकते हैं, हम चंद्रमा का एक हिस्सा देखते हैं, दूसरा हिस्सा जिसे हम नहीं देखते हैं। 

उसी तरह जब यह शक्ति आपके अंदर उठती है और इस परमचैतन्य को छूती है, तो उसी से आप सशक्त हो जाते हैं। 

ऐसे ही आप सहज योगी हैं। लेकिन आप भगवान नहीं हैं। 

अवतार कह सकते हैं, “मैं भगवान हूँ”। 

आप अवतार नहीं हैं। लेकिन किसी भी अवतार ने यह कभी नहीं कहा कि वे आदि शक्ति हैं, वे कह नहीं सकते । 

आदि शक्ति की यह शक्ति जिसे हम परमचैतन्य कहते हैं, वह शक्ति है जो आपको प्यार करती है और जिसका प्रकृति पर पूर्ण नियंत्रण है। 

यह समझती है, यह सोचती है, यह सब कुछ जानती है, आपके बारे में सब कुछ, यह जानती है। 

यह आपके जीवन के हर क्षेत्र में हर दृष्टिकोण में कार्य करती है। 

यह पूर्ण रूप से आपके साथ है जैसे कि मान लो आपको लगता है कि आप एक नदी जैसे ताओ में गिरते हैं जो तेज़ी से बह रही है 

और आप अब तैर नहीं सकते हैं, आप अपने हाथों का उपयोग नहीं कर सकते हैं, आप इसके साथ ही बहना शुरू कर देते हैं 

और तब आपको अहसास होता है कि इसके साथ बहना, बाहर निकलने की कोशिश से बेहतर कार्य है। 

लेकिन इसके साथ बहते हुए, बस आप अपने आस-पास की प्रकृति का आनंद लेते हैं। आप डूबते नहीं हैं। इसके विपरीत, आपको लगता है कि आप उन्नत हो रहे हैं। 

और आप इसके साथ बह रहे हैं, तब आप समझते हैं कि मैं किसी चीज़ के बारे में क्या कर रहा हूँ, क्या यह मेरे लिए परमचैतन्य द्वारा किया गया है?

परंतु इसका श्रेय आपकी कुंडलिनी को दिया जाना चाहिए जिसने इस कार्य को किया है। उसने आपको उस किनारे पर स्थित कर दिया है, आपको परमात्मा के सुंदर साम्राज्य में स्थापित कर दिया है। 

इस प्रकार, आप समझते हैं दो चीज़ें हुई हैं: पहला, आपकी माँ, आपकी कुंडलिनी जो आपके भीतर है, जो आपकी अपनी माँ है, जो आपके साथ सदैव रही है, इसने आपको यह जन्म दिया है। 

और फिर यह आपको उस शक्ति तक ले गई है, जो शक्ति आप स्वयं उपयोग कर सकते हैं। आप उससे सशक्त हैं।

आप हैरान होंगे कि यह शक्ति कैसे मदद करती है। मेरा अर्थ है, देखिए मुझे यह नहीं कहना चाहिए कि आपके पास सभी शक्तियां हो सकती हैं, मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए। 

लेकिन आप देखते हैं कि आज वे किसी के बारे में शिकायत कर रहे थे तो तुरंत मैंने उसका नाम बता दिया। अब आप कहेंगे कि मैं ये कैसे जानती थी? लेकिन मैं जानती हूँ, मैं इतना ही कह सकती हूँ। मैं इतना जानती हूँ। 

मान लें कि आप क़ालीनों पर कार्य कर रहे हैं, ठीक है, तो आप जानते हैं कि इसका क्या स्वरूप है, उसका क्या स्वरूप है, जहां से यह आया है, सब कुछ, आप जानते हैं, क्या ऐसा नहीं है। 

अगर आप वहां हैं, तो आप सब कुछ जानते हैं।

अगर यह शक्ति हर जगह है, तो कोई भी सब कुछ जान सकता है। संबंध ऐसा है कि अगर आप जानना चाहते हैं, तो आप कुछ भी जान सकते हैं। 

तो उन्होंने बुद्ध को “सर्वलोकितेश्वर” भी कहा है कि वह सर्वत्र देखता है। 

“सर्वलोकितेश्वर कैसे देखता है?” क्योंकि उसका अहंकार जिसे हम महत् अहंकार  कहते हैं, “महत् अहंकार” सब कुछ जानता है, जबकि आपका अहंकार कुछ भी नहीं जानता है। 

क्योंकि यह कुछ भी नहीं जानता है इसलिए आप इसके द्वारा आच्छादित हैं। 

अगर वह जानता था, अगर अहंकार जानता था कि सत्य क्या है, तो आप मुक्त व्यक्ति हो जाएँगे। 

लेकिन आप अपने अहंकार को समर्पण नहीं करना चाहते। आप स्वयं नदी के बहाव में बहने नहीं देना चाहते जैसा कहा है।

नहीं! आप आनंद नहीं लेना चाहते हैं, आप अपनी विशेषता रखना चाहते हैं। 

वैयक्तिकता होना एक प्रकार के अहंकार से बहुत अलग है कि मैं यह हूं, मैं वह हूं। 

तो आत्मसाक्षात्कार के बाद उसके प्रकाश में यह विभेदीकरण शुरू हो जाना चाहिए, आपको चीज़ों को देखना शुरू कर देना चाहिए।

अब सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने अहंकार को शांत हो जाने, चुप रहने के लिए कहें कि आप कुछ नहीं जानते हैं। 

और इस आधुनिक समय में यह एक बड़ा फैशन है कि जैसे आप किसी से कुछ पूछते हैं, तो वह कहता है “मुझे नहीं पता”। आप किसी से पूछते हैं, आपका नाम क्या है? वह कहता है “मुझे नहीं पता”।

वह अपना नाम तक नहीं जानता और मूर्ख होना एक फ़ैशन है। यह दिखाने के लिए कि आप बहुत मूर्ख हैं, उन्हें लगता है कि वे दिखा रहे हैं कि वे बहुत अबोध हैं और यह मूर्खता नहीं है।

मुझे नहीं पता कि यह मूर्खता कौन से जानवर से है। अभी तक मुझे नहीं पता कि इसका स्रोत क्या है? फिर भी मुझे पता लगाना पड़ेगा। कौन-सा जानवर है जिसने यह मूर्खता उत्पन्न की है। लेकिन मैं एक बात जानती हूं, यह हमारा अहंकार है। अहंकार व्यक्ति को बिल्कुल मूर्ख बना देता है। 

मराठी में, आप देखते हैं, भगवान का शुक्र है, भाषा इतनी समृद्ध है, कि जो कोई भी अपने अहंकार को दिखाना शुरू कर देता है, वे कहते हैं कि वह एक झाड़ी पर चढ़ रहा है, वहाँ थोड़ी-सी झाड़ी है और वह उस पर चढ़ रहा है।

यह सब अहंकार आपके अपने कथित विचारों तथा उपलब्धियों के माध्यम से आता है। 

लेकिन ये उपलब्धियां क्या हैं, आप कुछ भी नहीं जानते हैं।

और यही आज मुझे आपको बताना है कि अगर आज कुछ भी कार्य हो रहा है, तो वह आपके अहंकार का समर्पण है। यदि आप अपने अहंकार का समर्पण करना जानते हैं तो आप इसे कार्यान्वित करेंगे। 

एक और बात जो मुझे कभी-कभी आश्चर्यचकित करती है, विशेष रूप से पश्चिम में 

कि मुझे लगता है महिलाएं शक्ति हैं। 

लेकिन पश्चिम में मुझे लगता है कि महिलाएं आदिशक्ति का उपयोग नहीं कर रही हैं, नहीं। 

सबसे पहले, वे अभी भी अपनी भावनाओं और उनके विचारों और इस तरह की चीज़ों से बहुत अधिक प्रभावित हैं।

एक तरफ़ आदमी है, जो अहंकार के साथ है। 

लेकिन यहां तक ​​कि महिलाएं भी बहुत अहंकारी होती हैं, बहुत अधिक। यह बहुत मुश्किल है।

उदाहरण के लिए, आप किसी लड़की से शादी करते हैं, पश्चिमी लड़की से, किसी से, वह बहुत प्रसन्न होगी, उछल-कूद करेगी, सारे उपहार ले लेगी, बधाइयाँ लेगी, सारी पोशाकें पहन लेगी, सब कुछ। 

दस दिनों के बाद, वह आएगी और कहेगी, “माँ मैं उलझन में हूँ”। 

उलझन में, कैसे? अब मैं उलझन में हूँ”। आप अब उलझन में हैं या पहले से उलझन में हैं? “मैं अब उलझन में हूँ”। ठीक है! आप अपने सभी गहने और सब कुछ वापस कर दें। “नहीं, नहीं मुझे सोचने दो”। 

यह एक सहज योगिनी का स्तर नहीं है। सहज योगिनी “शक्ति” हैं और उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, मैं आपको दिखाऊँगी, मैं इसे बेहतर करूंगी।

इसके विपरीत मैं उन्हें बेहद हावी पाती हूँ, मैं हैरान हूँ कि शक्ति को क्यों हावी होना चाहिए। अगर वह शक्ति है, तो वह हावी नहीं होगी। जो नहीं हैं वह लोग हावी होते हैं। 

जैसे आप देखते हैं कि आप भारत में किसी भी कलेक्टर के घर जाते हैं, कलेक्टर विनम्र होगा, लेकिन कांस्टेबल हावी रहेगा। 

उसी तरह, मुझे लगता है, यह वर्चस्व व्यवसाय बहुत आम है। 

और एक तपस्वी की तरह स्वभाव भी। वे तपस्वी की तरह कपड़े पहनेंगी, तपस्वी की तरह व्यवहार करेंगी। वे मुस्कुराएंगी नहीं। 

क्या है? क्या आप सहजयोगिनी हैं? या आप क्या हैं, आप तपस्वी हैं? फिर बेहतर है आप आश्रम से जुड़ें। 

मैं आदि शक्ति के बारे में बात करते हुए आपको क्यों बता रही हूं| इसलिए मैं शक्ति के बारे में बात कर रही हूं कि कैसे शक्ति को ऊपर आना है। 

मुझे आश्चर्य हुआ कि महिलाएँ सहज योग का प्रसार नहीं कर रही थीं। किसी ने मुझसे कहा कि अगुआ गण नहीं चाहते कि महिलाएँ सहज योग का प्रसार करें। ये ग़लत है। 

अगर नेतृत्व करने वालों का यह कहना है तो यह उचित नहीं है। 

लेकिन सबसे पहले सहज योगिनियों को असली सहज योगिनी बनना होगा क्योंकि अब तक मैंने देखा है, आप किसी भी महिला को देने की कोशिश करते हैं, उसे एक नेता का पद देने की कोशिश करते हैं, वह बस बात को ख़त्म कर देती है। 

सभी नहीं, लेकिन कुछ। 

अब एक सहज योगिनी का कर्तव्य ध्यान के माध्यम से स्वयं को विकसित करना है, स्वयं को समझना है और आत्म-सम्मान के माध्यम से है 

कि मैं एक सहज योगिनी हूँ, मैं वही हूँ, जो शक्ति है, मैं उसी की क्षमता हूँ। मैं स्वयं सशक्त हूँ । मैंने क्या करना है, कुछ नहीं? मुझे यह पसंद नहीं आया, मैंने इस पर कोई बात नहीं की। ऐसा कुछ नहीं। मैं अच्छी तरह से बैठकर बात कर रही हूँ। 

लेकिन “क्षमता” मैं हूँ, क्या मैं क्षमता हूँ? यही सहज योगियों को तय करना है। 

अन्यथा, वे बाधित हैं, वे दिन में सपने देख रही हैं, स्वयं का कोई अंत नहीं सोच रही हैं। यह बहुत मुश्किल है। 

मैं चाहती हूँ कि कुछ अच्छी सहज योगिनियाँ अगुआ बने, मैं वास्तव में चाहती हूँ। 

लेकिन जैसे ही वे अगुआ बनती हैं, वे एक घोड़े पर सवार होती हैं, इतनी तेज़ी से दौड़ती हैं। 

इसलिए अपने आप को विनम्र बनाएँ। 

जब तक घड़े में एक बड़ा स्थान न हो, तब तक क्या उसमें पानी समा सकता है?

बहुत बड़ा दिल है, परंतु यदि कोई आपके घर आता है, आप इसे पसंद नहीं करते| अन्य सहज योगियों के लिए, उनकी देखभाल के लिए कुछ भी नहीं करना चाहते हैं। 

यह वास्तव में, बार-बार मैं कहती हूँ कि पश्चिम में है कि महिलाओं को स्वयं में शक्ति स्वयं लानी होगी और शक्ति का अर्थ यह नहीं है कि आप अपने पति पर हावी हो जाएं और उन्हें मूर्ख बना दें। नहीं, इसका अर्थ है कि उन्हें शक्तियां दें। 

आप पूरे परिवार की शक्ति की आपूर्ति हैं। और यह हमारा परिवार है। यह सब मेरा परिवार है। मुझे सबकी चिंता है। 

यहां तक ​​कि मैं छोटी सी बात से भी परेशान हो जाती हूँ।

मैं कभी संतुष्ट नहीं हुई कि मैंने अपना कार्य कर लिया है और मैं आज रात को सो जाऊंगी और किसी के बारे में नहीं सोचूंगी। 

कभी नहीँ। मैं इस बारे में चिंतित हूं, मैं उस बारे में चिंतित हूं। हर समय यह शक्ति बहती है| यह “शक्ति” और मेरी चिंता शक्तिशाली है और यह कार्य करता है, क्योंकि मेरी चिंता वास्तविक है। 

मैं स्वयं के बारे में चिंतित नहीं हूँ, कभी नहीं।

आप हैरान रह जाएंगे जब मैं इन सभी महिलाओं को स्वयं को बचाए रखने के लिए हर तरह की चीज़ें करते हुए देखती हूँ, तो मुझे आश्चर्य होता है। 

“किस बात की ज़रूरत है?” यह चिंता का विषय है। और एक बार जब आप दूसरों के बारे में सच्ची, प्रेममय, करुणामय सोच को विकसित कर लेते हैं। 

बच्चों के बारे में भी, मैंने देखा है कि, वे कभी भी एक-दूसरे के बच्चों की देखभाल नहीं करते हैं। वे कभी दूसरों की मदद नहीं करते। 

किसी को दांत निकालने के लिए जाना था, तो उसे बच्चे को अपने साथ ले जाना पड़ा। मेरा अर्थ है कि यह बहुत अधिक है। 

अगर आपको इस बात का सरोकार नहीं है, तो आपके पास सामूहिक मस्तिष्क नहीं होगा, आपके पास सामूहिक शक्ति नहीं होगी। 

और यह महत्वपूर्ण है कि आप सभी को बहुत सामूहिक बनने की कोशिश करनी चाहिए, एक दूसरे की देखभाल करें। 

अब मुझे यह नहीं कहना चाहिए, मैं इसे कबैला महिलाओं को बताने जा रही थी, कि यह घर कबैला में एक आश्रम है। 

और वे लोग जो अन्य आश्रमों से, यहां तक ​​कि ऑस्ट्रेलिया से भी आते हैं, आश्चर्यचकित हैं, कि वे सभी यहाँ एक होटल की तरह ही रह रहे हैं। 

वे इसके लिए भुगतान कर रहे हैं। हम सभी भुगतान करते हैं लेकिन हमारे पास बग़ीचे हैं, हम बाग़ानों की देखभाल करते हैं, हम बाहर की देखभाल करते हैं। 

यहां वे किसी बात के लिए सोचते नहीं। वे हर चीज़ का उपयोग कर रहे हैं, सोचते नहीं। 

हैरानी की बात यह है कि जब मैं यहां रह रही हूं, तो वे इस तरह रहते हैं। 

आप ऑस्ट्रेलिया में किसी भी स्थान पर जाते हैं, आप अमेरिका जाते हैं, कहीं भी, जहां भी आश्रम है, वे सभी रविवार को कार्य करते हैं। 

यहाँ मैंने नहीं देखा, वे सभी ग़ायब हो जाते हैं। यह आपका आश्रम है। आप यहाँ रह रहे हैं। 

और अब आज मुझे यह बताना है क्योंकि मुझे लगता है कि सहज योग अपनी शक्ति को खो रहा है। 

उनमें से कुछ मुस्कुराना नहीं जानते, और उनमें से कुछ अत्याधिक हावी हैं। 

मुझे आपको यह बताना होगा क्योंकि आप बहुत महत्वपूर्ण हैं। 

लेकिन मेरे लिए, किसी भी पुरुष ने यह काम नहीं किया होगा। किसी भी पुरुष अवतार ने यह काम नहीं किया। 

क्राइस्ट, वह एक छोटी उम्र में क्रूस पर चढ़ गए, बहुत अच्छा! इतनी कम उम्र में सूली पर चढ़ गए, तो दूसरा ज़हर लेता है, दूसरे को किसी ने मार दिया। 

यह ऐसा है, वे सभी बहुत युवा ही मर गए। 

कोई भी यह कार्य नहीं करना चाहता था, कोई भी नहीं, मेरा अर्थ है, वे तंग आ गए! तंग आ गए! हमारे यहाँ ज्ञानेश्वर जी थे जिन्होंने तेइस साल की उम्र में समाधि ले ली, क्या आप कल्पना कर सकते हैं। वह लोगों से तंग आ चुके होंगे। 

अब यह आप लोगों के लिए है, महिलाओं को, अपनी माँ के उस धैर्य, उस स्नेह, उस प्यार को विकसित करना होगा और फिर आप देखेंगे कि आपकी शक्ति कैसे कार्य करेगी।

मैंने बार-बार और हमेशा इस बारे में बात की है। और आदिशक्ति के विषय में, मेरा कहना है कि आप अपने परिवार में एक शक्ति की तरह हैं। 

और आपको बुद्धिमान होना होगा, आपको समझदार होना होगा। आपको अपने पति को समझना होगा। आपको अपने बच्चों को समझना होगा। आपको धैर्य रखना होगा। इसके विपरीत, वे अपने बच्चों को बिगाड़ते हैं। 

यह समझा जाना चाहिए, पहले से ही कि उनके कल्याण के लिए क्या अच्छा है?

आज उदाहरण के लिए, अगर मैं कहती हूं कि अगर बच्चे किसी स्कूल में जाते हैं, तो उन्हें हटाया नहीं जाना चाहिए। यह उनके कल्याण  के  लिए है। 

लोग इससे क्या हासिल करने जा रहे हैं। तो कोई कहता है, नहीं! ठीक है, बाहर निकलिए। आप क्या कर सकते हैं?

अपने बच्चों के प्रति ऐसा लगाव आपको शक्तिहीन व्यक्ति दिखाता है। 

आपको सभी बच्चों से प्यार करना चाहिए, आपको सभी बच्चों की देखभाल करनी चाहिए, आप सभी बच्चों का आनंद लें, उनमें रुचि लें। 

लेकिन मुझे क्या लगता है कि वे केवल अपने बच्चों में ही रुचि रखते हैं। 

हम एक संयुक्त परिवार हैं। हम साथ रहते हैं। हमें सब कुछ साझा करना होगा। 

यह कुछ ऐसा है जिसे मैं समझ नहीं सकती। जैसे हमारे भारत में, कहते हैं, यदि आप पाँच-छह बच्चों को देखते हैं, तो सभी लड़कियां उनके पीछे भागेंगी। 

सभी महिलाएं उनकी देखभाल करेंगी। मेरा अर्थ है, यह उनके लिए एक ऐसी ख़ुशी है कि किसी भी बच्चे के लिए, बस उनकी देखभाल करनी है। 

लेकिन आपका सामूहिकता के प्रति इस तरह का असंवेदनशील व्यवहार आपके बच्चों को भी बिगाड़ने वाला है। 

तो जो आप पूरी दुनिया में प्रसारित करने जा रहे हैं, वह है यह “सहज जीवन”|

और महिलाएँ समाज को बनाती हैं। अगर भारतीय समाज अच्छा है, तो इसका श्रेय भारतीय महिलाओं और उनकी बुद्धिमत्ता को जाता है। 

भारत में पुरुष मूर्ख हैं। वे राजनीति, अर्थशास्त्र, सब कुछ ख़राब करते हैं। लेकिन समाज अभी भी व्यवस्थित है और वे अभी भी बहुत सही रास्ते पर हैं। 

यह केवल महिलाओं की बुद्धिमत्ता के कारण होता है। यदि महिलाएं एक साथ घंटों तक कपड़े पहनने में व्यस्त रहती हैं, अपने कपड़ों के बारे में सोचती हैं कि वे क्या पहनने जा रही हैं, तो सब वहीं समाप्त।

यह कुंडलिनी की पूजा करने का दिन है, जो माँ है। 

वह माँ है और आप भी माँ हैं। आपको अपने बच्चे के बारे में एक-एक जानकारी होनी चाहिए। कोई आता है और मुझे बताता है, “मेरा बच्चा अब नशे का आदी है”। वह कैसे संभव हो सकता है?

भारत में बच्चे नशे के आदी नहीं हैं, क्योंकि हर समय उनकी माँ उनके सिर पर बाज़ की तरह रहती हैं। 

वह जानती है कि वह कहाँ जाता है, क्या करता है, वह प्यार करती है। लेकिन वह जानती है, कि वह कहाँ जाता है।

यहाँ तक कि जब हम कॉलेज में होते, तब भी जब मेरी शादी हुई, तो हम घर जाते थे, मेरी माँ पूछती थी, “आप कहाँ गए थे?

क्या मैंने नहीं कहा, छह बजे से पहले वापस आओ”। यहाँ तक कि जब हम शादीशुदा हैं तब भी और हम उसे बताने के लिए मान रहे हैं। 

वह माँ का कार्य था। वह बच्चा जहाँ जाता है, वह क्या करता है, और फिर यह कहना कि बच्चे मेरी बात नहीं मानते। बच्चे क्यों नहीं सुनते, क्योंकि आप उन्हें अनुशासित नहीं करते।

यहाँ का वातावरण बहुत बुरा है, सहमत हूँ और बच्चे बहुत बुरे हैं, सहमत हूँ। सब कुछ है, सहमत हूँ।

लेकिन अगर आप अपने प्यार में एक शक्तिशाली माँ हैं, तो आपके बच्चे भटकेंगे नहीं। 

देखिए, अब भी जैसा कि आप जानते हैं कि, हर समय ये सभी अगुआ लोग मेरे आस पास मंडराते रहते हैं, वहाँ क्या है? मेरे पास कोई शहद नहीं है या कुछ भी नहीं है, लेकिन वे सिर्फ़ मेरे पास बैठे हैं, सिर्फ़ मेरे पास, सभी अगुआ गण। 

लेकिन यह साक्षात्कार के बाद होता है, मेरे सभी भतीजे जो आप देखते हैं, वे सभी मेरे पास आकर बैठते हैं, मेरी बहुएँ मेरी बगल में बैठती हैं|

वे मुझे नहीं छोड़ते। और लोग कहने लगेंगे कि तुम्हारे साथ क्या गड़बड़ है, आप हर समय  अपनी चाची से चिपके रहते हैं, यह क्या है?

और वे समझते हैं कि यह चिंता उनके हित के लिए है जो आप उन्हें बता रहे हैं। 

लेकिन अपने आप को ठीक होना चाहिए। 

एक माँ के रूप में आपको सहनशील होना पड़ता है, आपको समझना पड़ता है लेकिन जब आपको उन्हें बताना होता है तो आपको उन्हें बताना पड़ता है।

यदि आपको लगता है कि आप उन्हें कटुतापूर्वक या उचित तरीक़े से बता सकते हैं, लेकिन बच्चे को पता होना चाहिए कि आप बच्चे से प्यार करते हैं और आप सभी बच्चों से प्यार करते हैं। 

यह बहुत सूक्ष्म है। जैसे मैंने देखा है, एक बार मैं एक सहज योगी के बच्चे को अपने साथ बाजार ले गई|

वह पूछ रहा था, मैं यह ख़रीदूंगा, मैं वह ख़रीदूंगा, मैं वह ख़रीदूंगा| वह सब कुछ ख़रीदना चाहता था। मैं सोच रही थी कि इस लड़के के साथ क्या ग़लत है। 

लेकिन अगर मैं अपने पोतों को ले जाऊं, तो वे कुछ भी नहीं खरीदेंगे।

यहां तक ​​कि अगर आप दो जोड़ी जूते ख़रीदना चाहते हैं, तो नहीं, नहीं, नहीं, एक पर्याप्त है, अगर यह ख़राब होगा तो ही। वे कभी कुछ नहीं माँगेंगे। यह एक तरह का आत्म-सम्मान है।

उन्हें कुछ नहीं चाहिए। पत्नियों के साथ भी यही है| पत्नियां अपने पति से कभी कुछ नहीं मांगती, कुछ भी नहीं, कुछ भी तो नहीं। 

पति पूछते चले जाएंगे, कृपया कुछ मांगें, कुछ मांगें। नहीं, हमें कुछ नहीं चाहिए। 

यह एक सहज योगिनी माँ और एक पत्नी और एक शक्ति होने जा रही है। 

उनकी कोई माँगे नहीं हैं। 

वह कुछ नहीं माँग रही हैं। जो देने वाला है, वह क्या माँगने वाला है?

जो एक प्रदायक(पूर्तिकार) है, वह क्या पूछने वाला है?

इसलिए मुझे कभी-कभी लगता है कि बाईं ओर, महिलाओं का (स्त्री) पक्ष सहज योग में थोड़ा कम हो रहा है। 

और उन्हें आगे आना होगा। सबसे पहले, ध्यान, माँ का सम्मान, बच्चों को सहजयोग के कार्य के बारे में बताना, उनसे सहजयोग के बारे में बात करना और न केवल भोजन के बारे में,

स्वच्छता के, दूसरों के साथ अच्छे व्यवहार के, चीज़ों को साझा करने के बारे में और बच्चों को उन अच्छी कहानियों के बारे में बता रहे हैं जिनके बारे में आपने सुना है और उन्हें बताना है कि धर्म क्या है? उनसे बात करना, तालमेल बिठाना।

यह आपको सहज योग को बहुत सशक्त बनाने के लिए समझना है।

आप सहजयोग की शक्ति हैं, मुझसे यह लो और आपको इसे कार्यान्वित करना होगा, छोटी-छोटी बातों की चिंता करने के बजाए। 

कभी कभी मुझे महिलाओं के कुछ पत्र मिलते हैं, यह वास्तव में मुझे पीड़ा देता है। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि वे कैसे सहज योगी हैं?

हमारी सहजयोग की पूरी प्रणाली एक आदर्श प्रणाली है, जिसे दूसरों द्वारा  देखा और समझा जाना चाहिए कि हमने अपने दैनिक जीवन में क्या प्राप्त किया है। 

आदिशक्ति दिन प्रतिदिन के जीवन में कार्य करती है, सबसे छोटी चीज़ों से लेकर सबसे उच्चतम तक। 

और हर समय आपको सीखना है, हर समय आपको सीखना है। चाहे आप अगुआ हों या अगुआ नहीं, हर समय आपको यह पता होना चाहिए कि आपको क्या जानना है। मैंने यह नहीं जाना है, मैंने वह नहीं जाना है।

जब तक आप उस तरह का दृष्टिकोण विकसित नहीं करते कि मुझे सीखना है विनम्र स्वभाव, वह विनम्रता, मुझे सीखना है, मुझे सीखना है,  अभी भी मुझे सीखना है तो यह अहंकार कभी नहीं आएगा।

इस अहंकार के कारण आप स्वयं से संतुष्ट होते हैं, यह अहंकार का लक्षण है।

आप नहीं जानते कि आप दूसरों पर कितना अत्याचार कर रहे हैं, आप क्या नष्ट कर रहे हैं? कुछ भी नहीं जानते। लेकिन आप स्वयं को अत्यधिक प्रसन्न पाते हैं।

ऐसे ख़ुशहाल भाग्यशाली व्यक्तित्व कभी – कभी हवा में रहते हैं|

मैंने आज किसी और के लिए क्या किया है?

मैंने किसी और से कैसे बात की है? मैंने किसी और को क्या दिया है?

मुझे आपको उपहार देने की आवश्यकता नहीं है, कुछ भी तो नहीं|
मैं आपको उपहार क्यों दूँ?

लेकिन मैं आपको अपनी संतुष्टि के कारण उपहार देती हूँ और अगर मैं आपसे उपहार लेती हूँ, तो भी यह आपकी अपनी संतुष्टि के लिए है|

तो हमें वह करना है, जिसमें हमें संतुष्टि मिले,  हमें किसमें संतुष्टि मिलती है?

ज़रा सोचिए, हम किसमें संतुष्टि पाते हैं? मेरा घर ठीक होना चाहिए, मेरे पति ठीक होने चाहिए,  मेरे बच्चों को ठीक होना चाहिए, मेरा, मेरा, मेरा।

जब तक यह मेरा(ममत्व) दूसरे व्यक्ति को स्थानांतरित नहीं हो जाता, तब तक आप माया के दायरे में हैं।

आपको यह सीखना है – हर रोज़ विचार करना है या लिखना है, आप सभी को डायरी लिखनी चाहिए कि मैंने दूसरों के लिए क्या किया है? मैंने दूसरों से क्या कहा है?

दूसरे व्यक्ति को क्या बात प्रसन्न कर सकती है

छोटी- छोटी बातें जीवन को इतना सुंदर बना सकती हैं और आपके लिए बहुत बड़ी बातें भी हैं|

अगर आप यह नहीं सोचते कि आप बहुत बड़े हैं, तो ये सभी बड़ी चीज़ें भी आपके लिए हैं।

यह इस तरह है कि जैसे इस पूरे आकाश को एक पत्ते से आच्छदित किया जा सकता है, अगर आप पत्ते को आकाश के विरुद्ध देखते हैं, पत्ता अपना अस्तित्व दिखाता है।

उसी तरह से सहजयोग का सम्पूर्ण स्वप्न एक व्यक्ति द्वारा पूरी तरह से आच्छदित किया जा सकता है।

जो इस महान विस्तार के साथ खड़ा है, एक व्यक्ति यहाँ और एक व्यक्ति वहाँ। यह इतना अद्भुत है। यह सहज योग है कि ऐसे लोग हैं जो यहां और वहां हैं, “इतना उल्लेखनीय  है”।

कि अगर उनका नाम भी लेते हैं, तो मुझे लगता है कि मैं आनंद के सागर में भीग रही हूं।

केवल एक व्यक्ति, फिर आपके बारे में क्या?

हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते, जब आदिशक्ति आपके साथ प्रतिबिंबित होती है, उसकी सारी शक्तियां आपके साथ हैं, मेरी दृष्टि के इस विस्तार में हम कितना कुछ कर सकते हैं।

मैं चाहती हूं कि मेरे पास अधिक से अधिक लोग हों जो स्वयं दूरदर्शितापूर्ण होंगे। 

लेकिन छोटे लोग नहीं जो सिर्फ़ अपने बच्चों के, भोजन के बारे में सोचते हैं। नहीं, नहीं, वे नहीं चाहिए, व्यर्थ के हैं। वे सब निकाल दिए जाएँगे। 

मुझे आशा है कि आप समझ गए होंगे कि आप कहाँ हैं, आपके पास क्या है, आपके भीतर क्या निर्मित है, यह कुंडलिनी है जिसने आपको सभी ज्ञान और सब कुछ दिया है।

लेकिन बहुत से लोग हैं, जिन्हें पता ही नहीं है कि यह चक्र क्या है, वे नहीं जानते, उन्हें मैं जानती हूँ|

मेरा अर्थ है कि अज्ञानता की उस सीमा पर जाना। आपको इन सभी बातों को जानना होगा।

आपको समझना होगा कि यह क्या है?

यह आपके लिए है, आपके लिए, यह सब ज्ञान।

और सबसे बड़ा विश्वास है। विश्वास जो अंधा नहीं है लेकिन प्रबुद्ध है कि अब आप उस दिव्य शक्ति के साथ एकाकार हैं। 

यह वास्तव में आपको पूरी तरह से व्यवस्थित करता है। 

मेरे विचार से यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण पूजा है क्योंकि अब तक वहाँ गुरु पूजाएँ होती रही हैं, इतने सारे लोग जिन्होंने गुरु पूजा की है।

या शायद मेरा जन्मदिन जैसा कि आपको लगता है कि यह हो सकता है, ठीक है।

लेकिन मुझे लगता है कि आपकी कुण्डलिनी की (अपनी) शक्तियों और आपकी शक्तियों को समझना, जो आपको परमचैतन्य के कार्य को करने के लिए उपलब्ध है, बहुत महत्वपूर्ण है।

वह आपको आत्मविश्वास देगा, वह आपको करुणा प्रदान करेगा, वह आपको एक दृष्टि देगा और वह आपको एक महान व्यक्तित्व, एक बहुत ही महान व्यक्तित्व बना देगा। 

जॉर्ज वाशिंगटन क्या थे ? उन्होंने कहा कि वह महान थे। अब्राहम लिंकन क्या थे? वह महान थे। 

लेकिन आप सभी ने अपना आत्म-साक्षात्कार प्राप्त किया है।

आपको पूरे ब्रह्मांड के बारे में सोचना होगा, विस्तृत रूप से, जब तक कि वह मस्तिष्क आप में विकसित नहीं हो जाता, मुझे पूरा विश्वास है कि सहज योग की प्रगति उसके बिना कम होगी। 

तो समझिए ये शक्तियां आपके साथ हैं। आपको उनका उपयोग विनम्रता के साथ करना होगा। आप सबको परमात्मा का अनंत आशीर्वाद।