Sahasrara Puja: You must feel responsible but be humble

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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                                                   सहस्रार पूजा 

                              आपको ज़िम्मेदार होना चाहिए, लेकिन विनम्र होना चाहिए

क्बेला लिगरे (इटली), 5 मई, 1996

आज के दिन हम  सहस्रार के खोलने का जश्न मना रहे हैं।

मुझे कहना होगा कि सम्पूर्ण मानवता के लिए यह एक महान घटना हुई थी। यह एक ऐसी उपलब्धि थी, जिसे मैंने पहले कभी हासिल नहीं किया था। अब मैं देख सकती हूं कि, आत्म-साक्षात्कार के बिना, लोगों से बात करना असंभव होता।

जब ऐसा हुआ तो मैंने सोचा कि, मैं इसके बारे में लोगों से कैसे बात करूंगी, क्योंकि कोई भी मुझे नहीं समझेगा, और सहस्रार के बारे में कुछ कहना मेरे लिए एक बड़ी भूल होगी, क्योंकि यहाँ तक कि सहस्रार के बारे में, शास्त्रों में कहीं कुछ वर्णन नहीं किया गया था। यह बिल्कुल अस्पष्ट विवरण था, मैं कहूंगी, जहां लोग यह भी नहीं सोच सकते थे कि सहस्रार से परे भी एक क्षेत्र है। और व्यक्ति को उस दायरे में प्रवेश करना है जहां वास्तविकता है। उस समय, मैंने अपने आस-पास जो देखा, मुझे लगा, वह सब अंधकार है। और जहाँ तक और जब तक और कई रौशनी ना हो, तब तक लोगों को कभी भी एहसास नहीं होगा कि रोशनी का होना कितना महत्वपूर्ण है।

यह एक मानवीय त्रुटि है, हर समय, कि अगर कोई कुछ हासिल करता है, तो वे उस व्यक्ति को एक ताक़ पर रख देते हैं। उदाहरण के लिए, “ईसा-मसीह – ठीक है, वह मसीह थे – हम मसीह नहीं हैं। मोहम्मद साहब, वह मोहम्मद साहब थे – हम मोहम्मद साहब नहीं हैं। राम राम थे, कृष्ण कृष्ण थे। हम वो नहीं हैं। आप मानव से उन जैसे बर्ताव की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? ” तो, बिल्कुल वे अलग कर दिए जाते हैं, दिव्य व्यक्तित्व मानव व्यक्तित्व से दूर बहुत दूर कर कर दिए जाते।

यह सिर्फ एक आराधना थी, मैं कह सकती हूं, विश्वास। लेकिन जब उन्होंने कहा, “हमने उनका अनुसरण करने की कोशिश की,” वे कर नहीं सके। वे उनका अनुसरण नहीं कर सके थे, क्योंकि मुझे लगता है कि मानव गतिविधि दिव्य के साथ समानांतर रेखाओं पर है और ये रेखाएं तब तक नहीं मिलती हैं, जब तक कि आप उन्हें आत्म-साक्षात्कार नहीं देते हैं।

मानव स्तर दूसरे तल पर जा रहा है और यह समझने के लिए कि वे जो जानते हैं वह वास्तविकता नहीं है उसे एक उच्च तल पर आना होगा ।

मैं यह नहीं कहूंगी कि इसके लिए क्या आवश्यक है, क्योंकि मेरे अपने अनुभव में, सभी प्रकार के लोग सहज योग में आए। ऐसे लोग हैं जिन का वर्णन बहुत बुरा, क्रूर जैसा किया जा सकता है अन्य ऐसे , जो बहुत ही लम्पट थे, ऐसे या वैसे , फिर दूसरे वे जो धोखेबाज़ थे और उन्होंने कहा, “माँ वे भयानक लोग हैं!” लेकिन जहाँ तक आत्मा का सम्बन्ध है मैंने देखा है कि,  प्रत्येक मनुष्य समान चरित्र का बना है। बाहर से वे देखने में भिन्न हो सकते हैं, उनकी बात करने का तरीका अलग हो सकता है, उनकी शैली अलग हो सकती है, चीजों के लिए उनका शौक अलग हो सकता है, लेकिन अंदर वे सभी बहुत सुंदर हैं। और एक के बाद एक, मुझे यह पता लगता चला गया।

आप नहीं जानते कि यह मुझे कितना आनंद दे रहा था; न केवल खुशी, बल्कि प्रोत्साहन, समर्थन और धैर्य भी। और फिर, अब, आप देखते हैं, सहज योग कैसे विकसित हुआ है। अब सबसे बड़ी बात  – जिसे मैं महसूस करती हूं, जिसके बारे में मैं बहत खुश हूँ, यह हुई है कि,  सहज योगी, सहज योग के बारे में बहुत जिम्मेदार महसूस करते है। और उन्हें लगता है कि उन्हें इस ज्ञान को हर जगह फैलाना है। सहज योग का प्रसार करना अब उनकी सहज इच्छा है।

सबसे पहले यह था कि उन्हें आत्मा बनना चाहिए। इससे पहले, कुछ ऐसे भी लोग थे जो वास्तव में आत्मा की खोज में नहीं थे, लेकिन वे भी सहज योगी बन गए।

और मुझे आश्चर्य है, आप में से कुछ के साथ, कि मैंने कभी ऐसी उम्मीद नहीं की थी कि वे इतनी दूर तक जाएंगे। और अचानक आप सुनते हैं कि, “अमूक-अमूक व्यक्ति वहाँ गया है, यह किया है, यह किया है।”

इसलिए, जब आप वास्तविकता के दायरे में आते हैं,  मुझे नहीं पता कि आपने पहले कौन सा सिद्धांत स्वीकार किया है – यह आपकी समझ है – लेकिन एक बात जो आपने महसूस की है कि आप निश्चित रूप से ईश्वर से जुड़े हुए हैं। कुछ लोगों को जबरदस्त अनुभव हुए, कुछ को सामान्य अनुभव था। लेकिन मैंने देखा, उनमें से ज्यादातर ने, खुद पर विश्वास करना शुरू कर दिया, खुद को समझना और खुद के बारे में आत्मविश्वास होना।

चूँकि भगवान, धर्म, और गुरुओं के बारे में बहुत सारी असत्य धारणाएं हैं कि, जब उन्होंने आत्मा के प्रकाश को देखा, जिसने उन्हें वास्तविकता का एहसास दिया, यह इस प्रकार वर्णित था जैसे कि उन्होंने अपने दिमाग को स्थिर किया, उन्होंने खुद को स्थिर किया। मुझे कहना चाहिए, यह सब हुआ, बहुत कम समय में। मैंने यह नहीं कहा कि मुझे लंबा समय लगा, या मुझे कई तरह के अनुभवों से गुजरना पड़ा, क्योंकि मेरे लिए, ये सभी अनुभव कुछ भी नहीं हैं। यदि कोई जहाज समुद्र में चलने योग्य है, तो यह सभी प्रकार के उच्च ज्वार और सभी प्रकार के शार्क और सब कुछ बिना किसी कठिनाई के सामना कर सकता है, क्योंकि यह समुद्र में चलने योग्य है। इसलिए मैंने ऐसा महसूस नहीं किया। लेकिन केवल मैंने यह महसूस किया कि, मानव स्तर से लेकर इस आध्यात्मिक स्तर तक, इस दिव्य स्तर तक, जब आप आ रहे हैं, तो अब भी पिछला कुछ चिपका हुआ है, कुछ अभी भी बाकी है। इसे साफ करना होगा, इसे उज्ज्वल करना होगा, हमें कहना चाहिए, या बिल्कुल प्रबुद्ध होना चाहिए।

लेकिन सहज योग के बारे में महान बात यह थी कि आपने खुद वह सब किया था। यह कहना अच्छा है कि, “माँ, आपने ही यह किया, आपने वह किया,” – हो सकता है, इसका बोध प्रदान करने वाला भाग । लेकिन जैसे कि अब यहां दीप है, और इन दीपों पर जब तक और जहाँ तक ध्यान नहीं दिया जाता, देखभाल नहीं कि जाती, और प्यार का तेल नहीं दिया जाता है, वे कैसे प्रकाशित बने रह सकते हैं?

मुझे कहना ही होगा कि, यह कुछ ऐसा है कि,  आप लोग ने किसी न किसी तरह से महसूस कर लिया कि अच्छे सहज योगी बनना कितना महत्वपूर्ण था। शायद आत्मनिरीक्षण; मैं नहीं कहती शायद किसी और ने इसके बारे में बात की हो। शायद यह आपकी अपनी समझ हो। यह जो भी हो, आप सभी ने अच्छे सहज योगी बनने की कोशिश की।

बेशक, ऐसे लोग हैं जो कभी-कभी मुझसे बहुत नाराज होते हैं, जैसे, “आप मेरी बहन का इलाज क्यों नहीं करती, या यदि आप भगवान हैं तो आप मेरे पिता का इलाज क्यों नहीं करती?” ऐसा वैसा सब,  वहां है। लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वे इतने निराश, परेशान हैं, इसलिए वे इस तरह की बात कर रहे हैं। यदि आप एक या दो व्यक्तियों को इधर-उधर देखते हैं, तो आप यहां हजारों, ऐसे सुंदर लोगों को भी देखते हैं। यह इस दुनिया का, इस पृथ्वी का पूर्ण उद्धार है, जोकि, मुझे यकीन है कि, यदि आप सभी लोग जिम्मेदारी लेंगे तो अवश्य होने जा रहा है|

जिम्मेदारी में कुछ समस्याएं हैं, जिन्हें हमें जानना चाहिए। जब आप जिम्मेदार महसूस करते हैं, उसी समय आपको पता होना चाहिए कि आप प्रभारी नहीं हैं -कि, यह पहली बात है।

दूसरे, आपको अवश्य ही यह भी पता होना चाहिए, कि बहुत सारी अन्य शक्तियाँ हैं, बहुत सारे देवदूत और गण आपके साथ हैं। तुम अकेले नही हो। तो यह सोचना कि,  आप कुछ कर रहे हैं, शायद आपको, अहंकारी बना देगा। उस समय, आपको क्या करना चाहिए, यह कहना सबसे अच्छा है कि, “सब ठीक है, मैं कुछ नहीं कर रहा हूं। यह ईश्वर ही हैं जो इसे कार्यान्वित कर रहे है। “

ऐसा नहीं है कि ईश्वर आपसे कोई क्रेडिट चाहते है, लेकिन ऐसा कहने से अहंकार का यह गुब्बारा ऊपर नहीं आएगा, और आप विनम्र हो जाएंगे। और यह विनम्रता आपके भीतर आध्यात्मिकता के इस महान पेड़ को निश्चित रूप से बेहतर करेगी। निश्चित रूप से यह आपको एक बहुत विकसित व्यक्तित्व बना देगा: इसके बारे में कोई संदेह नहीं है। लेकिन सबसे पहले, हमें यह कहना होगा, “मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ।”  जब आपके पास चीजें करने का आध्यात्मिक अधिकार हो तब यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है।

यह परीक्षा लेने का स्थान या अवसर नहीं है, मैं आपको यह बता सकती हूं। बहुत से लोग सोचते हैं कि माता हमें परख रही हैं। मैं आपकी परीक्षा नहीं ले रही हूँ, आप स्वयं अपना परीक्षण कर रहे हैं। मैं ऐसा नहीं कह रही हूँ कि, “यह मत करो!” या, “ऐसा मत करो!” आप अपना परीक्षण कर रहे हैं, और अब आपको पता होना चाहिए कि, आप वास्तविकता के खूबसूरत बगीचे में हैं, जहाँ बहुत कम लोगों ने प्रवेश पाया  हैं। और उस बगीचे में, जब आप प्रवेश करते हैं, तो आप जो देखते हैं वह है: सब कुछ सुंदरता से भरा हुआ है, हर व्यक्ति को स्वयं के बारे में कुछ मधुर प्राप्ति होती है, क्योंकि अन्य सभी सहज योगियों को भी इस वास्तविकता के समान अनुभव हैं, जिनका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता है , लेकिन आप उस एकाकारिता, उस नजदीकी, वह बिना किसी अपेक्षा के दोस्ती को महसूस करना शुरू कर देते हैं। आप को अहसास होना शुरू हो जाता हैं कि, “ओह, यह सहज योगी है!”

जैसे ही आप एक पूरी तरह से एकीकृत जीव बनते हैं। आप एक संस्था बन जाते हैं, जोकि मुझे कहना चाहिए, एक जीवंत संस्था है। इसमें आपको ऐसा नहीं लगता कि आप कुछ किसी भी सहज योगी से अलग हैं, चाहे वह उच्च पद पर आसीन हो या वह जीवन में बहुत कुछ नहीं कर रहा है।

यह एकात्मकता , यह एकाकारिता, दूसरों के साथ पहचान की यह भावना आपको इतना बड़ा, इतना बड़ा, इतना महान, इतना शक्तिशाली बनाती है। आप अकेले नहीं हैं, और आप कहते हैं, “मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ।”

इसलिए आप इतने विनम्र हो जाते हैं कि आप वर्ग भेद भावना, धर्म भेद भावना या मुझे नहीं पता, सभी प्रकार कि अन्य कैसी-कैसी भावनाएं लोग रखे हुए होते हैं ऐसे सभी गलत विचारों को भूल जाते हैं | मैं इन भावनाओं के बारे में ज्यादा नहीं जानती, जिनसे मानव पीड़ित है! लेकिन मैंने देखा है कि यह कैसे होता है। और जब वह विनम्रता आपका चरित्र बन जाती है, तब ऐसा नहीं होता है कि आप इसलिए विनम्र होते हैं क्योंकि कुछ किया जाना है। आप विनम्र हैं। जब लोग किसी प्रकार का व्यवसाय कर रहे होते हैं, तो वे बेहद विनम्र और अच्छे होते हैं, लेकिन अन्यथा वे बहुत निर्दयी होंगे।

फिर, आप बिल्कुल विनम्र हो जाते हैं और आपके व्यक्तित्व में कोई दोगलापन नहीं रह जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप कमजोर हो जाते हैं।

विनम्रता केवल उन लोगों के लिए संभव है जो शक्तिशाली हैं, क्योंकि उन्हें किसी भी प्रतिक्रिया की आवश्यकता नहीं है, उन्हें किसी संरक्षण की आवश्यकता नहीं है। उनकी विनम्रता उन्हें बहुत सुरक्षित रखती है। तो, आप सिर्फ सोचना शुरू करते हैं, या महसूस करते हैं – सोच एक अजीब शब्द है – महसूस करना, कि आप एक छोटे धूल कण हैं। उसी समय आपको लगता है कि आप पूरे आकाश हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहां हैं, आप क्या कर रहे हैं, आप दृष्टी क्या हैं, आप किस बात के साक्षी हैं।

कभी-कभी आपको लगता है कि ये सभी बड़े, बड़े ‘सुरमा’ बेकार हैं। आपको लगता है, “उनके बारे में चिंता करने की कोई बात नहीं! वे बहुत छोटे हैं। ” और कुछ लोगों के साथ आपको लगता है कि आप बहुत छोटे हैं। ऐसा लचीला स्वभाव आपमें विकसित होना चाहिए। और यह आपको सूक्ष्म और सूक्ष्मतर बनाता है क्योंकि आप किसी भी चीज, किसी भी विषय, किसी भी व्यक्तित्व, किसी भी समझ, किसी भी पुस्तक, किसी भी चीज, किसी भी उद्यम में, बहुत ही सूक्ष्म तरीके से घुस सकते हैं। और तुम तुरंत देख लेते हो कि क्या किया जाना है, क्योंकि तुम इतने सूक्ष्म हो जाते हो। और फिर जब आप बहुत महान हो जाते हैं, तो आप सोचना शुरू कर देते हैं – या मुझे  कहना चाहिए कि आप महसूस करते हो कि, इतने लोगों की मदद करने के लिए, इस महान काम को करने के लिए, आप क्या कर सकते हैं।

यह, जब यह आपके साथ होता है, तो वे यह नहीं सोचते हैं कि आप अहंकारी हैं, और न ही आपको यह सोचना चाहिए कि आप बहुत छोटे हैं। केवल एक चीज अब आप आत्मा हैं और आत्मा बहुत सूक्ष्म है। यह बहुत ही सूक्ष्म प्रकाश है, लेकिन यह किसी भी चीज में प्रवेश कर सकता है, यह किसी भी चीज में विस्तार कर सकता है। यह कहीं भी रह सकता है या यह कहीं भी गायब हो सकता है। आप जो यह सूक्ष्म व्यक्तित्व हैं, जो आपकी आत्मा है, आप इसका उपयोग भी नहीं करते हैं, लेकिन यह हर समय आपका उपयोग करता है। आपके संज्ञान में आए बिना यह आपका उपयोग करता है।

तो दूसरी बात यह होनी चाहिए कि आपको यह निर्धारित नहीं करना चाहिए कि आप क्या करने जा रहे हैं। “मुझे क्या करना है?” “अगर मैंने फैसला किया है, तो मुझे ऐसा करना चाहिए।” आपने जो भी निर्णय लिया है वह सब ठीक है, लेकिन अगर यह कार्यान्वित नहीं भी होता है, तो चिंता करने की कोई बात नहीं है, परेशान होने की कोई बात नहीं है, इसके बारे में अत्यधिक परेशान होने की कोई बात नहीं है। मैं आपको एक उदाहरण दूंगी: एक दिन मैं अमेरिका जा रही थी, और निश्चित रूप से, आप जानते हैं कि जैसा कि सभी सहज योगी हैं, वे काफी चिंता करते हैं कि, “अब, माँ को अमेरिका जाना है!” मतलब हर कोई परेशान है। वे समय देख रहे हैं, “अब समय यह है, समय यह है!” मैं बस मुस्कुरा रही थी! मैंने कहा, “मुझे अमेरिका जाना है, आप चिंतित क्यों हैं?” और अचानक सहज योगी का एक बच्चा गिर गया और उसका हाथ टूट गया और वह अपनी उंगलियां नहीं हिला पा रहा था। तो, मैं अभी बाहर आ ही रही थी, और जैसे ही उस बच्चे को लाया गया, मैंने कहा, “ठीक है, मैं अभी एयरपोर्ट नहीं जा रही हूँ।” और वे बहुत परेशान थे, “वह हवाई अड्डे पर कैसे नहीं जा रही है?” जैसे कि पूरा स्वर्ग ही नीचे गिरने वाला हो या क्या? लेकिन मैंने कहा, “अब, मुझे बच्चे को देखने दो।” मैंने बच्चे का इलाज किया। बच्चा बिलकुल ठीक था। “ठीक है, मैंने कहा, चलो अब हवाई अड्डे पर चलते हैं।”

और वे कह रहे थे, “माँ, विमान तो चला ही गया होगा।” “यह सब ठीक है, कोई फर्क नहीं पड़ता, चलो हवाई अड्डे के लिए जाना है।” हम हवाई अड्डे पर गए और यह विमान जो मुझे ले कर जाने वाला था, वह बस वहीं था क्योंकि विमान में कुछ गड़बड़ थी और एक अन्य विमान वाशिंगटन जाने वाला था, और मैं वास्तव में न्यूयॉर्क के बजाय वाशिंगटन जाना चाहती थी। इसलिए, मैं अच्छी तरह से विमान में वाशिंगटन जा रही थी!

लेकिन, व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि ऐसा आप नहीं कर रहे हैं। सब कुछ व्यवस्थित और योजनाबद्ध और खूबसूरती से आपके लिए रखा गया है। आप कुछ तय करते हैं, ठीक है: यदि आपका निर्णय ठीक है, अगर आपको ऐसा करना है, तो यह काम करेगा। यदि यह काम नहीं करता है, तो इसे काम नहीं ही करना चाहिए था। अब यह ऐसे व्यक्तियों के बीच अंतर है जो एक आत्मसाक्षात्कारी और गैर-आत्मसाक्षात्कारी है। एक आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति इस बारे में परवाह नहीं करता है कि, वह क्या चाहता है, उसे क्या पसंद है, वह क्या पसंद करता है, क्या नहीं। उसे जो भी मिलता है सब ठीक है।

अब, मैं देख सकती हूं कि आप इस छत के नीचे रह रहे हैं जो इतनी भयानक है (हंसते हुए) और यहां कोई उचित व्यवस्था नहीं है, कुछ भी नहीं। मुझे नहीं पता कि आप यहाँ कैसे रह रहे हैं, मेरा मतलब है, मुझे नहीं पता कि मुझे क्या करना है। और हम एक ज़मीन लेने का प्रयास कर रहे हैं और यह भूस्वामी एक ऐसा लालची व्यक्ति है, लेकिन मैं लालच के बारे में बुरा नहीं मानती, लेकिन फिर भी वह अभी तक हमें जमीन नहीं दे रहा है। यह सब ठीक है, अब क्या करें? लेकिन आप सभी इसका आनंद लेते हैं, आप बुरा नहीं मानते। अन्यथा आम तौर पर लोग कहते थे, “अरे नहीं, मुझे इस तरह का कमरा चाहिए, और मुझे इस तरह का घर चाहिए, और यह और वह।” आप किसी भी परिस्थिति में रह सकते हैं क्योंकि आप अपने भौतिक आराम के बारे में चिंता नहीं करते हैं। आप अपने स्वयं के आध्यात्मिक आराम के बारे में क्या सोचते हैं।

मैंने लोगों को, सहज योगियों को, बहुत सुंदर, यहां तक ​​कि बच्चों को भी देखा है: यदि कोई फिल्म चल रही है, और कुछ अजीब दृश्य आता है, तुरंत वे सभी अपनी आँखें बंद कर लेते हैं कि, “हम यह नहीं देखना चाहते हैं!” किसी को उन्हें बताना नहीं पड़ता क्योंकि उनके अंदर वह सूक्ष्म व्यक्तित्व निर्मित हुआ है जो बकवास सहन नहीं कर सकता। वे शायद कुछ ना कहें, वे कठोर नहीं हो सकते हैं, लेकिन बस वे दूर भागते हैं और ऐसे स्थानों से दूर जाते हैं, अपने आप|

इसलिए, नए व्यक्तित्व का वर्णन इस तरह किया जा सकता है: कि प्रकृति में हम, बहुत स्पष्ट रूप से देखते हैं। प्रकृति में जो हम देखते हैं वह है कि: एक पेड़ बढ़ता है, अब उसे विस्तार करना है, लेकिन वह नहीं कर सकता है, तो वह नहीं करता है। अगर वह कर पाए, वह करेगा। और वह किसी भी तरह, सभी पत्तों को सूरज की रोशनी के संपर्क में लाने की कोशिश करता है। अब, मुझे नहीं लगता कि पेड़ों के पास इसे व्यवस्थित करने के लिए इतनी बुद्धिमत्ता है। लेकिन कुछ है जो उन्हें इतनी खूबसूरती से व्यवस्थित करता है। अब, यह केवल एक पेड़ नहीं है – हजारों और हजारों और हजारों और हजारों। वह जो यह सब करता है, वह वही है जिसके साथ आप (योग)संपर्क में हैं। पेड़ नहीं हैं। वे सिर्फ प्रकृति के हाथों में खेल रहे हैं। लेकिन वे हेरफेर नहीं कर सकते, तिकड़म, नहीं कर सकते | इस दिव्य शक्ति को नहीं समझते हैं; वे नहीं कर सकते। जानवर नहीं कर सकते। यहाँ तक कि इंसान भी नहीं कर सकता। लेकिन आप कर सकते हैं, क्योंकि आपने इस मानव बंधन की सीमा को पार कर लिया है और अब आप महान देवत्व के महान नागरिकों की तरह हैं।

तो, यह ईश्वरीय शक्ति आपकी मदद करती है, सब कुछ करती है। और यह भी आपको लेता है, यह आपका मार्गदर्शन करता है, यह आपको प्रबंधित करता है। इसलिए, आपको ऐसा करना है कि मार्गदर्शन के लिए खुद को खुला रखना है। उसी समय आपको कार्य करना चाहिए, क्योंकि मार्गदर्शन भी भीतर से आएगा, जिससे आपको पता चलेगा, “यह ऐसा मुझे करना है।”

अब यह भी माना कि, आपको लगता है कि आपके द्वारा यह हासिल नहीं किया गया था और आपको लगता है कि, “ अब भी मुझे पता नहीं कि जो में चाहता था क्यों मुझे वह नहीं मिला? यह समझने की कोशिश करें, कि यही है जो, हमारे लिए सबसे अच्छा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको हार माननी चाहिए, आपको इच्छा नहीं करनी चाहिए। मैंने देखा है कि सहज योगियों की इच्छाएँ मेरी तुलना में अधिक शक्तिशाली हैं। कारण है, मैं इच्छा रहित हूं। मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं है। जब मैं देखने की कोशिश करती हूं, तो पूर्ण रूप से समझ के बाहर है कि, क्या मेरी कोई इच्छा है, तो मैं देखती हूं कि मुझे किसी तरह की कोई इच्छा नहीं है। या ईमानदारी से मैं कुछ नहीं चाहती। यह, आप इसे बहुत ही मनमाना स्वभाव कह सकते हैं। लेकिन यह आप लोगों से बहुत अलग है। आप लोग बहुत अलग तरीके से बने हैं, क्योंकि आपने कुछ हासिल किया है। मैंने कुछ भी हासिल नहीं किया है। मेरा व्यक्तित्व ऐसा ही है। क्योंकि आपने कुछ हासिल किया है, आप जानते हैं कि आप कैसे थे और अब आप क्या हैं। आपकी उपलब्धि के कारण, मुझे लगता है कि यह एक वरदान है कि आप जो भी चाहते हैं वह काम होता है। क्योंकि आपने इतनी मेहनत की है, यह आपके लिए एक वरदान है, जो कुछ भी आप चाहते हैं, यह आपके लिए एक विशेष आशीर्वाद है। इसलिए, कई बार मैंने आपसे कहा है, “अब ऐसी किसी भी चीज़ की इच्छा न करें जो उचित नहीं है!” क्योंकि आप जो भी इच्छा करेंगे, वह काम करता है और यह प्रभावी होगा।

अब इस बात को महसूस करने की कोशिश करें कि आप कोई और सामान्य इंसान नहीं हैं। आप बंधन को पार कर चुके हैं और अब आप सहस्रार में भी नहीं हैं, आप इससे परे हैं। सहस्रार लिम्बिक क्षेत्र है और यह लिम्बिक क्षेत्र कमल की तरह बंद है और जब आप अपनी कुंडलिनी का उसमें प्रवेश पाते हैं, तो यह कमल इस तरह खुलता है। और बाइबल में जो लिखा गया है, वह है, “मैं आपके सामने आग की लपटों कि तरह प्रकट होऊंगा।” यह दिव्य कहावत है। तो ये पंखुड़ियों अन्य कुछ नहीं वरन प्रबुद्ध तंत्रिका हैं, और वे लपटों की तरह दिखती हैं। लेकिन ये लपटें किसी गर्मी के साथ नहीं हैं। वे इसे संस्कृत में तापहीन कहते हैं, वहां कोई गर्मी नहीं: बेहद शीतलता दायक , सुखदायक, खूबसूरती से जलते हुए है।

इसलिए जब यह सहस्रार कमल खुलता है, तो कुंडलिनी आपके फॉन्टनेल के माध्यम से छेदती है और आपको अपना आत्मसाक्षात्कार होता है। आपके साथ भी ऐसा ही हुआ है। अब, केवल इस कमल को खुला रखना है। और वही है जहाँ हम कभ-कभी असफल होते हैं, क्योंकि अभी भी हमारे भीतर कुछ सुस्त मानवीय कमजोरियां  हैं। सबसे पहले, यह है, जैसा कि यह है, अहंकार और कुसंस्कार से आच्छादित  है, या हम प्रति-अहंकार कह सकते हैं – दो गुब्बारे। ये दो गुब्बारे, बार-बार, सहस्रार को बंद करने की कोशिश करते हैं। तो आपको पहरे पर रहना होगा, कि, ” क्या है जो मेरे सहस्रार को बंद कर रहा है?”

पहला अहंकार है: जिस पर कैसे हमला करें? क्योंकि यदि आप अपने अहंकार पर हमला करना चाहते हैं, आपको केवल अहंकार के माध्यम से हमला करना होगा, वही एकमात्र वाहन है। इस के लिए तो, हमारे पास निर्विचार जागरूकता की यह स्थिति है, जहां हमें जाना है। लेकिन करने वाली साधारण बात यह जो कि बहुत व्यावहारिक है: यह समझने की कोशिश करें कि आप अहंकारी क्यों हैं। किससे नाराज हो? तुम गुस्सा क्यों हो? क्या आपको किसी पर हावी होने या किसी को नियंत्रित करने या किसी को रोकने  को प्रेरित करता है? क्यों? मन जवाब नहीं देगा। साधारण बात, यदि आप ऐसा कर सकते हैं, [यह है कि], जो भी चीजें आपको परेशान करती हैं या आपको बहुत महान महसूस कराती हैं,  समझने की कोशिश करें कि आपकी तुलना में, कुछ भी उंच या महत्वपूर्ण नहीं है। आपके प्यार की तुलना में, कुछ भी बड़ा नहीं है। आपकी करुणा की तुलना में, कुछ भी अधिक नहीं है क्योंकि इसमें दिव्य प्रकाश का प्रवाह है।

[अगर] आप किसी से नफरत करते हैं, आप किसी से नाराज़ हो जाते हैं, बस यह जान लें कि आपको उस व्यक्ति से प्यार करना है। अब, आप उस व्यक्ति को कैसे प्यार करेंगे? इसको नापने का कोई पैमाना नहीं है लेकिन प्यार खुद ही बताएगा कि आप कितना संतुष्ट महसूस कर रहे हैं, आप कितना खुश महसूस कर रहे हैं। मैं एक उदाहरण दूंगी: एक अन्य दिन मुझे पोलैंड से किसी व्यक्ति का बहुत चुनौती देने वाला पत्र मिला – कि उसकी माँ किसी चीज, कैंसर या किसी चीज़ से बीमार है, और मुझे हर समय चुनौती दे रही है। “यदि आप भगवान हैं, तो आपको मेरी माँ का इलाज करना चाहिए। अगर तुम भगवान हो, यह करो, वह करो, वह करो! ” बहुत मजेदार। मैंने कहा, “ठीक है!” मैंने अपना ध्यान इस महिला पर लगाया, शायद मां बेहतर है। लेकिन, मैंने नाराज होने के बजाय कहा, “वह बहुत निराश है, वह बहुत परेशान है, वह बहुत चिंतित है।” यहां तक ​​कि अगर वह कहती है,  अगर तुम भगवान हो … ’और वह मुझे चुनौती दे रही है तो सब ठीक है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। चाहे वह मुझे भगवान कहे या भगवान नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं जो भी हूं, हूं। इसलिए, क्रोधित होने के बजाय, मुझे उसके प्रति जबरदस्त करुणा महसूस हुई। वह एक इंसान है और उसकी माँ बहुत बीमार है और अगर वह उसके जीवन का एकमात्र स्रोत है, तो मैं समझ सकती हूँ कि वह इतनी परेशान क्यों है।

इसलिए, यदि आप सिर्फ कोशिश करते हैं, जिसे आप बहुत आसानी से, बहुत आसानी से कर सकते हैं, तो यह मुश्किल नहीं है, क्योंकि आप आत्मसाक्षात्कारी हैं। मैं संतों से बात कर रही हूं अगर आप सिर्फ प्यार से अपना चित्त किसी व्यक्ति पर लगाते हैं, तो ऐसा होता है कि आपको समझ मिलती है, उस व्यक्ति की समझ मिल जाती है। आपको एहसास होता है, जैसे कि उस व्यक्ति के साथ पहचान हो। तब आपको एहसास होता है, “अगर मैं एक इंसान के रूप में उसकी जगह पर होता, तो मुझे क्या महसूस होता? यह हताशा, यह गुस्सा? अगर मैं वह होता, अगर मैं वैसा  ही व्यक्ति होता, वैसी ही समस्याओं के साथ, तो मैं क्या करता? ” इससे वह समस्या हल होती है। तो पहचान वाला हिस्सा: मेने बताया कि, आपके पास ऐसी शक्तियां हैं कि,  आप उसका भेदन कर सकते हैं। दूसरे के साथ पहचान बहुत महत्वपूर्ण है। और आप ऐसा कर सकते हैं। क्योंकि आप आत्मसाक्षात्कारी हैं, आप कर सकते हैं। बस अपने आप को उसी स्थिति में रखें जैसे दूसरा व्यक्ति है और फिर आपको एहसास होगा कि आपके पास प्यार की शक्तियां हैं। और पहचान ही एक ऐसा तरीका है जिससे मुझे लगता है कि कोई भी प्यार को समझ सकता है। जैसे ही आप अपना प्रेम भरा चित्त उस व्यक्ति पर डालेंगे, वैसे ही यह अहंकार तुरंत शोषित हो जाएगा।

ऐसे कितने ही अनुभव आपके जीवनकाल में आपको प्राप्त होंगे, कि आप खुद आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि, “मैं ये सब कैसे कर सकता हूं?” क्योंकि आप एक आत्मसाक्षात्कारी हैं।

इसके अलावा, जैसा कि मैंने कहा, जब आपकी पहचान किसी अन्य व्यक्ति से होती है, तो आप उस व्यक्ति को दिव्यता के प्रभार में रखते हैं: सिर्फ एकाकारिता कि एक भावना। कभी-कभी, हम अपने बारे में और दूसरों के बारे में भी बहुत गलत विचार रखते हैं। छोटी-छोटी बातों में भी, किसी चीज के बारे में हमारे अपने विचार होते हैं: जैसे कि, कुछ लोगों के किसी प्रकार के जीवन स्तर होते हैं जैसे कि, हमें यह पसंद  हैं। “मुझे यह पसंद नहीं है!” “मुझे यह पसंद है” और “मुझे यह पसंद नहीं है।” संत नहीं, संत कभी ऐसा नहीं कहते।

जब आप ऐसा कहते हैं उस समय, आप किसी अन्य व्यक्ति के साथ गलत तरीके से अपनी पहचान बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, माना कि, किसी ने इस तरह से एक सुंदर फूल की व्यवस्था की है, इसकी सराहना करने और आनंद लेने के बजाय, यदि आप आते हैं और कहते हैं, “मुझे यह पसंद नहीं, यह इस तरह से बेहतर हो सकता था।” मुझे नहीं पता कि लोग ऐसा क्यों कहते हैं! लेकिन अगर आप अपने आप को उस सज्जन आदमी के साथ पहचानते हैं जिसने यह किया है,  तो आप भी इसका उसी तरह आनंद लेंगे जैसा उस व्यक्ति को इसे करने में मज़ा आया। चूँकि आप केवल खुद के बारे में सोच रहे हैं, खुद कि विचारधारा से सोच रहे हैं, जिसके साथ आप सोचते हैं कि, “यह इतना अच्छा नहीं किया गया है, यह बेहतर हो सकता था, यह बेहतर हो सकता था!” किसी को आंकने वाले आप कौन होते हैं?

यह आलोचना का स्वभाव स्वयं के बारे में एक भयानक गलतफहमी से होती है। हम हैं ही क्या ? हमें किसी और का आकलन क्यों करना चाहिए? क्या हमें इसके लिए मेहनताना प्राप्त कर रहे हैं? तो दूसरों के आकलन में ऊर्जा क्यों बर्बाद करें?

हमें यह देखना चाहिए कि दूसरों में क्या अच्छा है। क्योंकि वास्तविकता के दायरे में, यह सब कुछ अच्छा है, सब कुछ ठीक है, सब कुछ प्रथम श्रेणी में है। लेकिन अगर आप यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि दूसरों के साथ क्या गलत है, तो आप वास्तविकता में नहीं हैं। आप देख सकते हैं, आप साक्षी हो सकते हैं, लेकिन आप इससे परेशान नहीं होते हैं या आप ऐसा कुछ नहीं कहते हैं जो दूसरों को परेशान करेगा।

आप इसे देख रहे हैं – यह सब सुंदर है। मेरा मतलब है, बस उस व्यक्ति का,उन सभी व्यक्तियों का आनंद जिन्होंने यह सभी सुंदर चीजें रखी हैं, बस इस माध्यम से चहकती हैं। लेकिन जब तक आप इसे करने वालों के साथ पहचाने नहीं जाते, आप ऐसा भी कह सकते हैं कि, “यह बेहतर होना चाहिए था,  जो ऐसा होना चाहिए था।” आप भी वैसी ही स्थिति में हो सकते हैं।

मान लें कि आप कुछ करते हैं, तो एक अन्य व्यक्ति आएगा और कहेगा, “ओह, आपको इसे इस तरह से करना चाहिए था, इस तरह से!” अकारण हमारी ऊर्जा बर्बाद करना! हमारी ऊर्जा आध्यात्मिक ऊर्जा है।

तब फिर से तुम आकाश की तरह हो जाते हो, मैंने तुमसे कहा, महानता। आप इन चीजों के बारे में परवाह करने के लिहाज़ से बहुत ऊँचे हैं: हमारी ऊर्जा को बहुत, बहुत ही तुच्छ चीजों और बेकार चीजों पर बर्बाद करना और बस खुद को छोटा बनाना।

लेकिन अगर इस आध्यात्मिक ऊर्जा का उपयोग किया जाता है – चूँकि आप इसका उपयोग कर सकते हैं, तो आप ही उन में से हैं जो इसे कुशलतापूर्वक प्रयोग कर सकते हैं। पेड़ नहीं, फूल नहीं – फिर जो भी आप करेंगे वह आनंद के महासागरों कि रचना करना होगा |

तो फिर हम सहज पर आते हैं: सहज ने आपको जो दिया है वह सब ठीक है, लेकिन आपने सहज योग को क्या दिया है? “मैंने सहज योग को क्या दिया है?” क्या मैंने दूसरों के लिए आनंद के महासागरों की रचना करी है? मैंने क्या दया मैंने दिखाई है, मैंने क्या करुणा दिखाई है, मैंने क्या प्रेम व्यक्त किया है?

ठीक है, सहज योग ने जो भी दिया है, हमने उस का महत्व नहीं समझा है। एक बार जब वे सहज योग में आते हैं, तो उन्हें लगता है कि यह पहले से ही हस्ताक्षरित एक अनुबंध है, और अगर यह बात काम नहीं करती है, तो फिर, “यह है ही क्या?” वे कहते हैं, “हमारा ईश्वर के साथ एक अनुबंध था और हमने जो कुछ भी भुगतान किया है, जो कुछ भी किया उसके बदले में हमें पूरा पारितोषिक नहीं मिला है।”

लेकिन वास्तविकता के इस दायरे में आपने क्या किया है? क्या आपने वास्तविकता का आनंद लिया है? क्या आपने वास्तविक ईश्वरीय प्रेम का आनंद महसूस किया है? क्या आप उसमें घुल गए हैं, या आप अभी भी किनारे पर खड़े देख ही रहे हैं? आप रचना कर सकते हैं – आप  – जबरदस्त आनंद, जबरदस्त प्रसन्नता और शांति उत्पन्न करने में काफी सक्षम हैं।

आज दुनिया को देखें कि वह किन हालात में है: यह पूरी तरह से उथल-पुथल, भ्रम, सभी प्रकार की भ्रष्ट और विनाशकारी चीजों में हैं। यह दुनिया इतनी बदसूरत बन गई है। क्या आप इसे सुशोभित कर सकते हैं? आप कर सकते हैं, क्योंकि आप लोगों का अंत: परिवर्तन कर सकते हैं। लेकिन अगर आप खुद एक सुंदर सहज योगी नहीं हैं, तो आप कैसे कर पायेंगे?

इसलिए, कार्य करते समय हमारा स्वयं पर चित्त ही है कि,  हमें दूसरों को इस वास्तविकता के दायरे में लाना है। यह एक तरफ तो स्वयं हम है, जहाँ हमें अपनी सूक्ष्मताओं को समझना होगा। दूसरी तरफ यह है कि हम अभी भी उन चीजों से पहचाने जाते हैं जिनकी वजह से हमें पहचाना नहीं जाना चाहिए। हम बिलकुल इस बात का पता लगा सकते हैं।

हमारी पहचान किन्ही विचारों, किसी विशेष प्रकार कि चेतना कि वजह से होती है| ये सभी चीजें वास्तव में स्पष्ट तौर पर आप को मुर्ख बनाती हैं| आप देखिये, सभी मूर्ख जो वास्तव में कुसंस्कारित हैं … मुझे नहीं पता कि उनके बारे में क्या कहना है, क्योंकि वे एक ऐसी ट्रेन की तरह हैं जिसका कोई चालक नहीं है । भगवान ही जानता है कि कब वे टकराने जा रही हैं!

क्योंकि ऐसे लोग जो चिन्हित होते हैं, मुझे पता है … अब आपने भी अब देख लिया होगा, जो लोग चर्च जाते हैं, अच्छी तरह से तैयार होकर, चर्च जाते हैं, वहाँ बैठते हैं, भजन गाते हैं, घर आते हैं और फिर झगड़ा करते हैं। लेकिन अगर वे एक चर्च देखते हैं, तो वे झुकेंगे। लेकिन उस चर्च के बाहर,  स्वयं उनके अंदर कुछ भी नहीं जाता है।

या वहाँ हैं, आप देखिये, आप ने अवश्य देखे होंगे, जो ऐसे हैं,  जैसे कि, यहूदी, आप देखते हैं, उन्हें वेलिंग वाल ( येरुशलम में यहूदियों का तीर्थ ) मिली है, जिसके सामने जाकर वे सभी प्रकार के कर्मकांड करते हैं और उनके साथ क्या होता है? कुछ भी तो नहीं!

ऐसा ही मुसलमानों के साथ भी है, वे इतने संस्कारित हैं। मेरा मतलब है, आप उनकी संस्कार बद्धता का वर्णन नहीं कर सकते,  वे इतने मूर्ख हैं। और ये संस्कार बद्धता हमे बेवकूफ बनाती ही जाती है। मैंने ऐसे कितने ही लोगों को जाना है। एक बार मेरे अपने जीवन में, मैं अपने किसी रिश्तेदार के साथ थी। यह सज्जन चार बजे उठते थे और किसी तरह का राम रक्षा गाना शुरू करते थे।

पूरा घर सो रहा है, बच्चे सो रहे हैं, वह अपनी ऊँची आवाज में चिल्ला रहे है। मैंने कहा, “क्या बात है? राम भी इस समय सो रहे होंगे! लेकिन वह चिल्लाएंगे। और उसका स्नान एक और ही बात थी: हर कोई जान जाता था कि वह स्नान कर रहा है, क्योंकि वह कोई और श्लोक या कुछ और गाया करता था। लेकिन ऐसा हुआ कि मैं बगल के कमरे में थी और मैंने कुछ ऐसा सुना, जैसे धम, धम। मैंने कहा, “क्या बात है?” मैंने सोचा, “वह मिर्गी से पीड़ित है। या और क्या?” इसलिए मैं अन्य लोगों के पास गयी और उनसे कहा, “यह सज्जन मिर्गी से पीड़ित है!” 

वे बोले, “नहीं, वह पीड़ित नहीं है!” 

मैंने कहा, “फिर यह आवाज़ क्यों आती है?”

 “नहीं,  नहीं! वह उस चंदन, को घिस रहा है। ” और हर बार इतने बड़े आवाज़ धड़ धड़ के साथ, वह उस पत्थर को जमीन पर रख रहा था जोकि मुझे लगा कि उसे मिर्गी है। 

उन्होंने कहा, “आप उसे जो भी कह सकते हैं वह कभी नहीं सुनेगा!” वह हर दिन ऐसा करता है। ” यह क्या है? इसे हम मूर्खता समझते हैं। जब हम दूसरों को देखते हैं, जब हम मनुष्यों को देखते हैं। लेकिन यहां तक ​​कि आत्मसाक्षात्कारी,  आप वास्तविकता के दायरे में हैं, आप भी कभी-कभी अवास्तविक चीजों को स्वीकार करते हैं, क्योंकि सदियों पुरानी संस्कार बद्धता : आपके पूर्वज ऐसे थे, उनके पिता इस तरह थे, और आपके पूर्वजों के पूर्वज भी ऐसे ही थे, इसलिए यह अभी भी चला आ रहा है| वे इसे जीन कहते हैं। लेकिन सहज योग में ये जीन भी बदल जाते हैं।

तो इस तरह की एक संस्कार बद्धता जो अभी भी आपके शरीर पर, आपके दिमागों पर, आपकी भावनाओं पर, फंसी हुई है, इसे देखना और साफ़ करना है, क्योंकि यह आनंद को मारता है। यह वास्तविकता के पुरे ही अनुभव को मार देता है। यदि आप वास्तविकता की सुंदरता का पूरा अनुभव करना चाहते हैं तो आपको इन सभी चीजों को छोड़ देना चाहिए जो वास्तव में सुबह से शाम तक आप को बेवकूफ़ बना रही हैं।

लोग ऐसे लोगों का बहुत फायदा उठाते हैं। जैसा कि मैंने आपको [उद्यमियों के बारे में] बताया है: वे एक फैशन से शुरू करते हैं, हर कोई ऐसा ही करने लगता है। लेकिन हम बुद्धिहीन लोग नहीं हैं। न केवल कि हमारे पास दिमाग है, बल्कि प्रबुद्ध दिमाग भी है। हम उन चीजों को नहीं लेते हैं जो केवल फैशन में हैं या जो कुछ हैं – हम नहीं करते हैं। हम क्या करते हैं, हम अपने ही फैशन के हैं। यह अहंकार नहीं है, यह आपकी अपनी आत्मा से पहचान है। यदि आप में आपकी आत्मा का ज्ञान है, तो आप कुछ भी मूर्खतापूर्ण और निरर्थक को नहीं अपनाओगे ।

इसलिए, वास्तविकता के दायरे में, हमारे पास, बिल्कुल प्रबुद्ध, एकीकृत और पोषित, सभी सात चक्र हैं। जैसा कि मैंने कहा, उस स्थिति में हम जैसा स्वयं को देखते हैं वह  सीमित नहीं बल्कि पूर्णतया असीमित है।

यहाँ तक कि, जब हम कहते हैं, हम व्याप्त हो जाते हैं, हम वास्तव में होते हैं। जब हम कहते हैं, हम विस्तार करते हैं, हम वास्तव में करते हैं। जब हम सिकुड़ते हैं, हम करते हैं। यह बिल्कुल लचीला व्यक्तित्व है और एक ऐसा व्यक्तित्व है जो शांति, आनंद, सद्भाव कि रचना करता है।

सहस्रार खुलने से, मुझे यकीन है कि एक दिन पूरी दुनिया एकीकृत हो जाएगी, और हम इन समस्याओं को समझेंगे जो मूर्खता के कारण हमारे सामने आ रही हैं।

 मुझे यकीन है कि यह एकीकरण होगा। और जब ऐसा होता है, तो हम देखेंगे कि दिव्य जीवन पूरी तरह सभी अंधेरे या विनाशकारी शक्तियों को प्रकाशित कर नष्ट कर देगा। यह होने जा रहा है। यदि इतने सहस्रार खोले जा सकते थे, तो क्यों नहीं इस संसार का सहस्रार भी सत्य और वास्तविकता के लिए खुल सकता? यह खुलेगा।

इसलिए आज,  हमारे लिए ऐसे महत्वपूर्ण दिन पर, मुझे लगता है कि, आध्यात्मिकता के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण दिन हमें यह अहसास कराने के लिए है कि,  हम प्रबुद्ध हैं, हम आनंद के प्रकाश हैं, करुणा के प्रकाश हैं, प्रेम के प्रकाश हैं, सहस्रार की मौन लपटों की तरह, विभिन्न रंगों में, खूबसूरती से नृत्य कर रहे हैं।

तब हमें पता चलेगा कि वास्तविकता का आनंद क्या है।

तो परमात्मा आपको आशीर्वाद दे।

(पूजा शुरू होती है)

श्री गणेश मंत्र ३ बार। भजन: “गणेश स्तुति”। “जय गणेश”। )

योगी: “सभी नेता”। (नेता मंच पर जाते हैं)

योगी: तो, श्री माताजी की अनुमति से, हम सभी एक साथ हमारी दिव्य माँ को 108 धन्यवाद देने जा रहे हैं, जो सहस्रार पूजा के इस अवसर के लिए बनाए गये है। और हम इसे उस तरीके से करने जा रहे हैं जैसे ही मंत्र पढ़ा जाता है, और मंत्र के बाद हम सभी एक साथ कहते हैं, “धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।”

1) कलियुग के अंधेरे में प्रकाश लाने के लिए, आप माता-द्विपा का स्वर्गीय निवास से पधारने का धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

2)  एक भ्रमित और आत्म-विनाशकारी मानवता तक सहज योग को पहुँचाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

3)  सृजन और विकास के अर्थ को हमें समझाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

4)  भगवान के वास्तविक अस्तित्व को हमारे लिए प्रकट करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

5) मानवीय अस्तित्व को दिव्य अर्थ देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

6) विश्व रूपा के प्रतिबिंब को मानव शरीर में हमें समझाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

7) सृष्टि के आदि सिद्धांतों को हमारे लिए प्रकट करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

8) मानव स्वभाव की वास्तविकता को हमारे लिए प्रकट करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

9) हमारे लिए सच्चे धर्म का अर्थ प्रकट करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

10) सहज योग का दिव्य ज्ञान हमें सिखाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

11) यीशु मसीह के वादे को पूरा करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

12) हमारे लिए भ्रम का पर्दा उठाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

13) हमें अच्छे और बुरे का सही अर्थ बताने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

14) हममें माँ कुंडलिनी जगाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

15) हमारे लिए सामूहिक चेतना के आयाम को खोलने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

16) हमें आत्म-साक्षात्कार देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

17) हमारे मध्य नाड़ी तंत्र पर चैतन्य मयी जागरूकता स्थापित करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

18) सर्वशक्तिमान ईश्वर की सर्वव्यापी शक्ति के द्वारा हमें पोषण देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

19)  अंतिम न्याय का अर्थ हम पर प्रकट करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

20)  जीवन के वृक्ष को हर्षित आशाओं कि नींद से उबार कर पुनर्जागरण 

 के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

21) सभी अवतारों और पैगम्बरों के काम को अभिषेक करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

22) सभी संतों और साधकों के सपनों को पूरा करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

23) उन सभी लोगों के काम को सही अर्थ देने के लिए धन्यवाद जिन्होंने मानव जाति की मुक्ति के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया है।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

24) हमारे दिलों में आशा, विश्वास और श्रद्धा को पुनः स्थापित करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

25) मानव आत्मनिर्णय को नस्ल, जाति व्यवस्था और धर्म की अवधारणाओं से परे उठाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

26) स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के विचार को दिव्य अर्थ देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

27) एक ईश्वर, एक अनुभव और एक सत्य के चरणों में मानव जाति को एकजुट करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

28) निरपेक्षता के दायरे में मानव जाति को आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

29) एक दोहरे मापदंड कि दुनिया के भ्रम से हमें मुक्त करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

30) हमें अज्ञान, भ्रम और अकेले पन से मुक्त करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

31) भौतिकता वादी दुनिया की राक्षसी ताक़तों को उजागर करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

32) एक तरफ़ा सोच की अक्षमता को उजागर करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

33) पितृ सत्तात्मक राजनीति की क्रूरता और खतरे को उजागर करने के लिए धन्यवाद।

34) व्यक्तिगत और सामाजिक प्रतिमानों और कुसंस्कारों का गुलाम बनाने वालों को नष्ट करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

35) कैथोलिक चर्च की घुटन भरी श्रृंखला से मानवता को मुक्त करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

36) इस्लामिक सरकारों द्वारा धार्मिक अधिकार के दुरुपयोग से मानवता को मुक्त करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

३) फर्जी गुरुओं और सभी धार्मिक संस्थानों के झूठ का खुलासा करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

38) अंध विश्वास और सतही धार्मिक कुसंस्कारों से मानवता को मुक्त करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

39) वास्तविकता के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सीमाओं और कमियों को उजागर करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

40) पश्चिमी मूल्य प्रणाली के भ्रम को उजागर करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

41) ईश्वरीय रिश्ते से हमें परिचित कराने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

42) हमें योग्य जान कर खोजने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

43) हमें मानव जाति के उद्धार प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

44) हमें एक लालायित साधक का परिचय अपनी प्यार करने को लालायित माँ से करवाने का आनंद देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

45) हम सभी को देवी के दरबार में आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

46) पृथ्वी पर परमेश्वर के राज्य की स्थापना के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

47) हमारे प्रस्तावों और प्रार्थनाओं को स्वीकार करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

48) आप के द्वारा असीम कृपा बरसाने के लिए आपका धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

49) हमारे भीतर स्वर्ग का प्रवेश द्वार खोलने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

50) हम पर योग का उपहार देने कि कृपा के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

51) हमें बनाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

52) हमें बपतिस्मा देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

53) हमें चंगा करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

54) हमें शुद्ध करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

55) हमें स्वच्छ करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

56) हमें परिवर्तित करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

57) हमारे ज्ञानवर्धन के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

58) हमें पोषण देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

59) हमारे उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

60) हमारे साथ बने रहने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

61) हमें प्यार करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

62) हमें क्षमा करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

63) हमारी मदद करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

64) हमारी रक्षा करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

65) हमें प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

66) हमें मार्गदर्शन देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

67) हमें आराम देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

68) हमें परामर्श देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

69) हमें सुधारने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

70) हमें कभी नहीं छोड़ने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

71) हमें बचाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

72) हमें इकट्ठा करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

73) हमें सिखाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

74) हमारे दिल को खोलने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

75) हमारे लिए देखभाल करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

76) हमें समायोजित करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

77) हम पर विश्वास करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

78) हम पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

79) हमारा इंतजार करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

80) हमें आपके दिव्य शरीर में ले जाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

81) हमें सामूहिकता देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

82) हमें दोस्ती देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

83) हमें परिवार देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

84) हमें जीवन में स्थान देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

85) हमें संपत्ति देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

86) हमें आध्यात्मिक अधिकार देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

87) हमें आत्म-सम्मान देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

88) हमें सद-सत विवेक देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

89) हमें विवेक देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

90) हमें सफलता देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

91) हमें ध्यान देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

92) हमें आंतरिक शांति देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

93) हमें आंतरिक खुशी देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

94) प्रकाशित चित्त देने के लिए आपका धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

95) हमें निर्लिप्तता देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

96) दैवीय हथियारों से लैस करने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

97) देवताओं और सभी दिव्य जीवों के कृपालु चित्त में लाने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

98) दूसरों की परवाह करने का स्वभाव हमें देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

99)  दूसरों की मदद करने की शक्ति हमें देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

१००) विश्व निर्मला धर्म के प्रसार की संतुष्टि देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

101) आपका निरंतर चित्त हमारे ऊपर देने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

102) दर्पण होने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

103) हमेशा उपस्थित रहने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

104) कोमल होने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

105) अद्भुत होने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

106) हमारे दिल में होने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

107) हमारे गुरु होने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

108) हमारी माँ होने के लिए धन्यवाद।

सभी: धन्यवाद, श्री माताजी, बार-बार।

हमेशा और हमेशा के लिए धन्यवाद।

(देवी की सजावट)

योगी: इसमें भाग लेने वाले देशों की एक महिला होनी चाहिए। इज़राइल की एक महिला, ऑस्ट्रिया की एक महिला, स्लोवेनिया की एक महिला, हंगरिया की एक महिला, एक सेज़केई, एक स्लोवाकिया की और एक जर्मनी की है।

यह स्लोवेकी की एक महिला, चेक की एक महिला, स्लोवेनिया की एक महिला, इज़राइल की एक महिला, जर्मनी और ऑस्ट्रिया की एक महिला होनी चाहिए।

योगी: एक और महिला। इज़राइल से विक्की, इज़राइल से विक्की।

[महिलाएं मंच पर देवी पूजा करती हैं। भजन: “जागो सवेरा”। “विश्व वंदिता”।

I फिर आरती। तीन महामंत्र]

योगी: बोलो श्री आदि शक्ति माताजी श्री निर्मला देवी की! जय!

[वीडियो का अंत]