Shri Krishna Puja: Primordial Taboos and Sahaj Dharma

Campus, Cabella Ligure (Italy)

1997-08-23 Krishna Puja Talk, Cabella, Italy, DP-RAW, 65' Download subtitles: EN,PTView subtitles:
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श्री कृष्ण पूजा

23.08.1997, काबेला, इटली

आज, हम यहाँ कृष्ण पूजा मनाने के लिए आए हैं। मैं अमेरिका गयी थी और वे चाहते थे कि मैं महाकाली पूजा करूं। लेकिन मैंने कहा, नहीं, मुझे केवल कृष्ण के बारे में बात करने दीजिये, क्योंकि हमें पहले यह महसूस करना होगा कि इस पूजा की शक्ति क्या है। हमें अपने भीतर श्री कृष्ण को कैसे स्थापित करना है।

उन्होंने खुद कहा है, कि जब भी धर्म का पतन होता है – धर्म का मतलब वह नहीं है जिसे हम ‘हिंदू’, ‘ईसाई’ या ‘इस्लामिक’ बेहूदगी  समझते हैं – यह नहीं है। धर्म का अर्थ है, हमारी मौलिक पाबंदियां, जो मानव में आंतरिक रूप से निर्मित हैं। इनके बारे में, मुझे लगता है कि आदिवासी हमसे बेहतर जानते थे। लेकिन फिर हमने क्या किया, हम उन पर हावी हो गए और उन्हें भी अपनी जीवन शैली बदलनी पड़ी। इन आदिकालीन पाबंदियों को केवल तभी समझा जा सकता है जब लोग स्वयं को समझने की कोशिश कर रहे हों अथवा जो कुछ भी परंपरागत उनके पास आया है।

अब, सहज धर्म थोड़ा अलग है अर्थात यह उन सहज-विचारों की तुलना में बहुत ऊंचा है जिनकी हम बात करते हैं। यह श्री कृष्ण ने जो कहा या श्री राम ने कहा, से भी बहुत अधिक ऊंचा है। पहले श्री राम ने सोचा, सबसे अच्छा है उन्हें (लोगों को) अनुशासन देना। लोगों को जीवन के बारे में गंभीर होना चाहिए, अपने स्वयं के अस्तित्व के बारे में पूर्ण समझ होनी चाहिए। उन्हें स्वयं का सम्मान करना चाहिए। ये सभी बातें बहुत समय पहले लिखी गई थीं। इसके अलावा, लोग, मूल रूप से जब वे अच्छे लोग थे, तो वे समझते थे कि हमारे लिए जो भी बुरा है, हमें नहीं करना चाहिए। ये मौलिक पाबंदियां हैं। अब, ये आदि पाबंदियां  हमारे भीतर बनी हुई हैं। अब, मान लीजिये मैं कहती  हूँ कि (मदिरा) मत पीना, आप जाकर पिएंगे। अगर मैं कहती हूं कि झूठ मत बोलिये, आप झूठ बोलेंगे। यह मानव स्वभाव है, आप देखिये, आदि पाबंदियों के खिलाफ जाना, क्योंकि वे सोचते हैं, अब उनके पास स्वतंत्रता है। स्वतंत्रता वह करने की जो वे चाहते हैं । आप स्वतंत्र लोग हैं। वास्तव में वे स्वतंत्र नहीं हैं। वे सभी प्रकार की आकर्षण की चकाचौँध में हैं, आप कह सकते हैं, अथवा प्रलोभन, जो मानव जीवन के खिलाफ हैं। 

धार्मिक व्यक्ति होना बहुत स्वाभाविक है। छोटे बच्चे, ज्यादातर होते है। उदाहरण के लिए, मैंने बच्चों को देखा है, वे अपने कपड़े उतारने में बहुत शर्म महसूस करते हैं, यहां तक कि छोटे-छोटे लड़के, मैंने देखा है। वे दूसरों की उपस्थिति में अपने कपड़े नहीं उतारेंगे। उन्हें शर्म महसूस होती है। अतः इन सभी का वर्णन इस प्रकार किया गया है “या देवी सर्व भूतेषु लज्जा रूपेण संस्थिता”। तो, आपको शर्मीला होना चाहिए। आपको विनम्र होना चाहिए और अपने शरीर का सम्मान करना चाहिए – यह बहुत महत्वपूर्ण है। इन आधुनिक समय में, अपना अनावरण करना महिलाओं की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। वे आदिवासी बनने की कोशिश कर रहे हैं, आप देखिए। उस काल में उनके पास ये विचार कभी नहीं थे और आप देखिये वे इतने भ्रमित नहीं थे। इसलिए, अगर उनकी महिलाएं बहुत कम कपड़े पहनती थीं, तो इसका अर्थ यह नहीं था कि यह किसी तरह का सेक्स था या पुरुषों के लिए किसी प्रकार का सम्मोहन था या पुरुषों का अजीबोगरीब व्यवहार यह दिखाने के लिए कि उन्हें महिलाओं के प्रति विशेष आकर्षण है। मेरा मतलब है, आपको क्यों करना चाहिए? यह बिल्कुल विवेकहीन है कि पुरुषों को महिलाओं के प्रति आकर्षित होना चाहिए और महिलाओं को पुरुषों के प्रति आकर्षित होना चाहिए। और सड़क पर, आप जाते हैं, गली में आप देखते हैं, बस यही चल रहा है! यह अधर्म सबसे बुरा है, मुझे लगता है, यह एक अभिशाप है। क्योंकि, सहज योग में आने के बाद भी लोग इस बेहूदगी को करना शुरू कर देते हैं, आप देखते हैं। उन सभी को पागलखाने जाना चाहिए, मुझे लगता है वे सहज योग के लिए किसी काम के नहीं। लेकिन जैसे ही आपके अंदर आत्मा का प्रकाश आ जाता है, आप में धर्म स्थापित हो जाता है।

श्री राम के समय उन्हें लिखना पड़ा – ए, बी, सी, डी, ई, एफ। मूसा के समय भी उन्हें दस आज्ञाएँ देनी पड़ीं, लिखनी पड़ी – लेकिन कृष्ण ने दूसरे तरीके से सोचा, शुद्ध प्रेम का धर्म स्थापित करें, शुद्ध प्रेम – क्योंकि वह यही चाहते थे। श्री राम की पाबन्दियों को लोगों पर थोपा गया, बिलकुल इस्लामिक की तरह, ईसाईयों की तरह – यह कभी काम नहीं करता है। इसलिए उन्होंने उनसे अपनी स्वतंत्रता में पूछना बेहतर समझा, उन्हें शुद्ध प्रेम विकसित करना चाहिए। राधा जो उनके साथ थी, उनकी शक्ति के रूप में, उन्हें आह्लाददायिनी कहा जाता है। वही है जो आनंद देती हैं, निर्मल आनन्द!

तो, ये सभी सीमित प्रकार के आकर्षण संकट में आ जाते हैं । अब, मदिरा पीना आपके विरोध में है, आप यह जानते हैं। आज वे तंबाकू के बारे में बात कर रहे हैं, कल वे पीने की बात करेंगे, जब वे इतने सारे लोगों को भयानक लिवर से पीड़ित पाएंगे और मरते हुए पाएंगे, फिर वे इसे वर्जित करेंगे। लेकिन यह आपके शरीर के लिए एक प्राकृतिक निषेध है। यदि आप हर समय कुछ ऐसा करते हैं जो आपके लिए अच्छा नहीं है, आपके अच्छे जीवन के लिए उचित नहीं है, आप अधर्मी बन रहे हैं। यह बहुत स्पष्ट रूप से समझा जाना चाहिए कि, सहज धर्म यह है कि आप पूर्ण स्वतंत्र हैं – वासना, लालच और सभी बेकार गुणों से पूर्ण स्वतंत्रता। आप इससे ऊपर हैं। आप इससे ऊपर हैं। सहज धर्म, श्री कृष्ण द्वारा या श्री राम द्वारा स्थापित धर्म से ऊंचा है। क्योंकि आप उस अवस्था में पहुँच चुके हैं। पूर्ण स्वतंत्रता के साथ आपको धार्मिक होना है। जो आपके लिए अच्छा नहीं है, आपको नहीं करना चाहिए। मुझे आपको यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि आप ऐसा नहीं करें या आप वैसा नहीं करें। जो कुछ भी मैं कहती हूं वह आपको स्वीकार्य नहीं भी हो सकता लेकिन तुरंत आपकी चैतन्य लहरी आपको बताएंगी। यह सहज धर्म है। सहज धर्म में, आप सभी से छुटकारा पा लेते हैं। जैसा कि वे कहते हैं: काम, क्रोध, मद, मत्स्य, लोभ, मोह। मतलब – वासना, क्रोध, प्रलोभन, फिर  लालच; यह बहुत महत्वपूर्ण है, लालच – लालच और प्रलोभन। अब, यदि आप समझते हैं कि लोग कैसे लालची हैं; लालची किस लिए? यह अमेरिका आप देख रहे हैं उपभोक्तावाद से मर रहा है। अब, व्यापार की चालाकियाँ देखें: अमेरिका में, आप बैंक से किसी भी राशि का उधार ले सकते हैं कोई समस्या नहीं है। अब, भले ही आप उधार न लें, वे आपको एक पत्र भेजेंगे, आप 20 हजार चेक क्यों नहीं ले लेते जो हम आपको भेज रहे हैं। आपके पास क्यों नहीं है? आह, आप बहुत अमीर बने जाएंगे। आप देखें – यह एक ऋण लेना बहुत अच्छा है! मुझे बताया गया कि कुछ लोग ऋण लेकर गणपतिपुले में आते थे। मैंने कहा, यह मूर्खता (बेकार बातें) बंद करिये। सो वे ऋण लेते हैं और फिर वे गणपतिपुले में आते हैं। हर समय उनके मन में होता है कि मैं इस ऋण का भुगतान कैसे करूंगा। मैं कैसे इसका प्रबंध करूंगा ? ”हर समय उनका  ध्यान विचलित रहता है, जब की आप गणपतिपुले में आकर अपना भला करना चाहते हैं।

तो, ऐसा मन, मुक्त नहीं है। मुक्त मन वह है जिसका ध्यान आत्मा द्वारा पूरी तरह से प्रबुद्ध है, लेकिन समस्या यह है कि हम अभी भी इस मानव बंधन से ऊपर उठकर, आत्मसाक्षात्कार के उच्च जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। और जब हम उस स्तर पर जा रहे हैं, तो हमें यह समझना है कि हमें इन सभी बेड़ियों (हथकड़ियों) को छोड़ना होगा। अपने भीतर इन बेकार बातों को। एक पक्षी की तरह जब यह अंडे से पैदा होता है, तो अंडे के सभी हिस्सों को छोड़ देता है। आपके भाई, आपकी बहनें, आपके पिता, आपकी माँ, आपके पति; प्रत्येक व्यक्ति, वे आपको नीचे गिराने की कोशिश करते हैं। अब, अगर वे मदिरा पी रहे हैं, तो वे कहेंगे हमारे साथ आओ, बेहतर है तुम कुछ पी लो। तुम सामाजिक नहीं हो, तुम बेकार हो, तुम आधुनिक नहीं हो। यह क्या बेहूदगी है? इस प्रकार एक फैशन शुरू होता है और फैशन की यह सामूहिक क्रियाशीलता श्री कृष्ण से नहीं आई हुई और न ही सहज है। सहज में, आप इन सब बेकार बातों से पूर्णतः मुक्त हैं। यदि आप चाहें, तो आप एक अच्छी पोशाक पहन सकते हैं, यदि आप नहीं चाहते हैं तो आपको इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। आप स्वतंत्र हैं। आप पैसे के बंधन से मुक्त हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण है। धन बंधन एक अन्य विषय है। मैं जानती हूं कुछ सहज योगियों को, जो सहज योग से पैसे कमाने की कोशिश में सहज योग में आए थे। आप सहज योग में किस लिए आये थे? उस पैसे के बंधन से बाहर निकलने के लिए। सहज धर्म में, आपके लिए पैसा आपके पैरों की धूल के अलावा कुछ नहीं है। यह इतना महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं। फिर, हमारे भीतर इस प्रकार की बेकार बातों को स्वीकार करने की ऐसी सामूहिक भावना है। इसे हमें त्यागना होगा, विशेष रूप से अमेरिका में, मुझे आश्चर्य हुआ, इंग्लैंड में भी। एक आदमी हिप्पी के रूप में आया था। उसके बाल कुछ बन्दर की तरह दिख रहे थे। बन्दर उससे बेहतर है मैं कहूँगी, मुझे नहीं पता कि किस की तरह, आप कह सकते हैं….. तुलना करने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं आपको बता रही हूं। तो मैंने उनसे पूछा “आपने ऐसे बाल क्यों रखे हैं? ” उसने कहा क्योंकि मैं आदिम बनना चाहता हूं। अब, हमें प्राचीनता की ओर बढ़ना होगा। मैंने कहा, लेकिन आपका दिमाग आधुनिक है, इस प्रकार बालों को बढ़ाने से क्या लाभ? क्या आपको लगता है कि आप आदिम बन सकते हैं? आप नहीं बन सकते। फिर बाद में मुझे पता चला कि वह मर गया। इस तरह एक और (व्यक्ति) आया और वह मरा नहीं, लेकिन वह पागलखाने में चला गया। इस प्रकार मैं कई लोगों से मिली, लेकिन आप ऐसा करते ही क्यों हैं? क्योंकि यही फैशन है।

अब, आप जानते हैं कि इटली बहुत समृद्ध बन रहा है, सभी प्रकार के डिजाइनरों के कारण। अब  नुआ रीश (नए अमीर) लोगों के बारे में एक चुटकुला है, रूस में, विशेष रूप से। रूसी ऐसे नहीं है, आम तौर पर, वे ऐसा कुछ स्वीकार नहीं करते हैं क्योंकि यह एक फैशन है। तो, एक व्यक्ति ने कहा कि: “माई गॉड, आपने उस दुर्घटना में अपना हाथ खो दिया”

“कोई बात नहीं, लेकिन मैंने अपनी बहुत महंगी स्विट्जरलैंड की घड़ी खो दी।“

“वास्तव में? कौन सी?”

“वह रोलेक्स थी”

अगर हाथ चला गया तो कोई बात नहीं। ‘रोलेक्स’ चली  गयी! रोलेक्स एक फैशन है।

तो ये ऐसे नुआ रीश (नए अमीर) लोग हैं जिनके पास पैसा है।  ये (कुत्ते) किसी भी फैशन का पालन नहीं करते हैं, मैंने कुत्तों को कभी फैशन करते नहीं देखा है। बंदर, मेरा मतलब है, मान लीजिये इटालियन  डिजाइनर उनके लिए कुछ खास बनाते हैं। वे इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचेंगे। शायद उनके स्वामी खरीद लें, लेकिन ये जानवर नहीं। हमें बेशक जानवर नहीं बनना है, लेकिन हमें फैशन के गुलाम भी नहीं बनना है। तो वहाँ कुछ दुकानें हैं जो बहुत महंगी हैं। क्यों? क्योंकि वे डिजाइनर हैं। तो आप हर किसी को उसके बारे में बताने के लिए तैयार रहते हैं: देखो, मैं एक डिजाइनर की दुकान से यह चीज पहन रहा हूं, यह डिजाइनर की दुकान से है, इसका मतलब आप क्या हैं? आपके पास डिजाइन की कोई समझ नहीं है, आपको समझने की कोई अक्ल नहीं है? आपको क्या चाहिए और आपको क्या जरूरत नहीं है’! और आजकल उनमें से अधिकांश जेल में हैं, कहने के लिए क्षमा करें, लेकिन उनके पास पैसा है और उन्होंने आपको मूर्ख बनाकर पैसा  बनाया है। विशेष रूप से अमेरिका में मुझे आश्चर्य हुआ कि वे ज्यादातर वे चीजें बेच रहे थे जो इटली डिजाइन हैं, इटैलियन डिजाइन, इटैलियन डिजाइन लिखी हुई थीं, इसलिए वे इसे खरीद रहे थे, इटैलियन डिजाइन। मुझे आश्चर्य हुआ कि ऐसी कलात्मक चीजें जो वे बनाते हैं, वे हर जगह उपलब्ध हैं, ऐसी सुंदर चीजें। लेकिन वे जो स्वीकार करते हैं वह एक प्रकार का सामूहिक-पागलपन है। प्रत्येक व्यक्ति एक ही तरह का डिज़ाइन पहनता है कि यह इस से या उस से है। यह सहज धर्म नहीं है। तुम किसी चीज के गुलाम नहीं हो। आप स्वतंत्र लोग हैं। आपको किसी भी डिज़ाइन या किसी भी चीज़ को स्वीकार नहीं करना है। आह, यह अगर है, तो है! मूर्खों को उसका अनुसरण करने दो। हम सहज योगी हैं।

अब, यह उन लोगों के बीच भी है जो साधुओं के रूप में माने जाते हैं, वे सभी एक ही तरह से कपड़े पहनते हैं। आप कैसे पहचान सकते हैं कि कौन, कौन है? सहज योग में, हम नहीं चाहते हैं कि आप एक ही तरह के कपड़े पहनें, एक ही जैसे दिखें। अपने बालों को एक ही तरह से बनाएँ। नहीं, आपका व्यक्तिगत होना चाहिए, क्योंकि आप स्वतंत्र हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है – स्वतंत्रता हमेशा सुबुद्धि द्वारा समर्थित है – इसका मतलब यह नहीं है कि आप जो चाहते हैं वह करें। सभी प्रकार की हास्यास्पद बातें तब होती हैं जब कोई व्यक्ति यह नहीं जानता कि आत्मा का प्रकाश क्या है। आत्मा के प्रकाश में, आप इस तरह के सामूहिक पागलपन में शामिल नहीं होते हैं जो चल रहा है। हम पागलपन में बहुत सामूहिक हैं। काश, वे बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवहार में अधिक सामूहिक होते। सुबुद्धि बहुत महत्वपूर्ण है और राधाजी कि (सुबुद्धि) आनंद देने वाली गुणवत्ता है। आह्लाददायिनी शक्ति को हमारे भीतर आना होगा। मतलब, जब हम सामूहिकता में किसी अन्य व्यक्ति से मिलते हैं, तो दूसरे व्यक्ति को आपसे खुशी महसूस होनी चाहिए। इसलिए उन्होंने प्रेम का धर्म सिखाया। अगर आप अवहेलना करते हैं तो प्रेम नहीं है, जैसे अगर वह काला है या इसलिए कि वह भूरा है, क्योंकि आप गोरे हैं। यह बहुत ही सतही है – काला, सफेद और पीला क्या है? मुझे समझ नहीं आता। यहां वे स्वयं को काला बनाने के लिए समुद्री तटों पर जाते हैं और दूसरी ओर वे कहते हैं, हम कोई अश्वेत नहीं चाहते, विशेष रूप से अमेरिकियों के लिए। इस तरह का अलगाव मुझे वहां मिला, अश्वेतों और गोरों के बीच, मैं वास्तव में रोयी। 

मैं हार्लेम गयी। सहज योगियों ने कहा: माँ क्या तुम हरलेम जाओगी? मैंने कहा: क्यों नहीं, मैं काली हूँ, अगर आप मुझे काली कहते हैं। मैं काली हूँ। अगर तुम मुझे सफेद कहते हो, मै श्वेत हूँ। अगर तुम मुझे पीला कहते हो, मैं पीली हूँ। तो मैं जा रही हूं। और वहाँ मैंने भाषण दिया, आप जानते हैं, वहाँ बहुत लोग थे, वास्तव में मैं नहीं भूल सकती। यह सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है कि वहाँ एक हॉल बनाया गया है और उसी प्रकार का हॉल ऑस्ट्रेलिया में बनाया गया है जहाँ मैंने कई लोगों को संबोधित किया था। मैंने सोचा, जरा देखो! उन्होंने कहा, माँ, आस्ट्रेलियाई लोगों ने हमारी नकल की। अब, ये लोग, इतने प्यारे, इतने सुंदर, मैं आपको बताती हूं, मैं उनके ह्रदय महसूस कर सकती थी। मैं इसे महसूस कर सकती थी और यह आदमी तुलना करने की कोशिश कर रहा था। मेरे व्याख्यान के बाद वह आया तो उसने मुझे गले लगाया, मुझे चूमा। मेरा मतलब है, उसने मुझे दबोच लिया होता, 22 साल की उम्र का यह छोटा लड़का; ऐसा प्यार उसने महसूस किया। और उसने कहा “माँ अगली बार जब आप आओगी, तो आप हार्लेम अवश्य आएंगी”। लेकिन अब मुझे बताया गया है कि वह हॉल बंद हो गया है।

इसलिए अमेरिकी व्यवस्था किसी न किसी तरह से लोकतंत्र के विरोध में जाती है, न केवल लोकतंत्र के खिलाफ बल्कि अब्राहम लिंकन जो चाहते थे उसके खिलाफ। उनके पास एक ऐसा महान व्यक्ति था और उनके नाम पर एक छोटी सी गली मैंने देखी । वास्तव में, वाशिंगटन में वे कहते हैं कि उनकी कुछ अच्छी सुंदर मूर्तियाँ हैं। अन्यथा उनके सिद्धांत समाप्त हो गए हैं, उनके विचार समाप्त हो गए हैं क्योंकि कुछ लोग आए और उन्होंने उनके विरोध में लिखा – इंग्लैंड वाले विशेष रूप से – काले लोगों के खिलाफ लिखा। ईश्वर द्वारा बनाई गई किसी चीज के विरोध में उन्हें लिखने का क्या औचित्य है ? अगर हर जगह समान रंग हों, तो वे सभी सैनिकों की तरह दिखेंगे। उनके अलग-अलग रंग होने चाहिए, उनके पास रंगों की विभिन्नता होनी चाहिए। देखो, वृक्षों को देखो, फूलों को देखो। आकाश के विभिन्न रंगों को देखें, बस हमें आनंद देने के लिए – आह्लाद। जो आपको खुशी देती है वह है विविधता – विविधता सुंदरता का प्रतीक है। अगर कोई विविधता नहीं है तो जीवन बहुत नीरस लगेगा, बहुत उबाऊ लगेगा: लेकिन उन्हें अपने पर बहुत गर्व है और उन्हें अपने समान कोई दिखाई नहीं देता। उन्हें लगता है कि वे बहुत महान लोग हैं, उनके पास श्रेष्ठता की भावना है, क्योंकि उनके पास एक विशेष प्रकार की नाक या शायद विशेष प्रकार के होंठ या शायद एक विशेष प्रकार के बाल हैं। ऐसी मूर्खतापूर्ण बातें हैं और आप उनका साथ देते हैं? आप उनका कैसे साथ दे सकते हैं? आप अपनी स्वतंत्रता चाहते हैं? फिर स्वतंत्र व्यक्ति बनो।  स्वतंत्रता में आपके पास विविधता होना बहुत जरूरी है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। मैं कहूंगी  कि, अब, जो सहज योगी अमेरिका वापस जा रहे हैं, उनके पास एक नया अभियान होना चाहिए: आप काले लोगों के पास जाएं। मुझे दक्षिण अमेरिका में संगोष्ठी देखकर बहुत खुशी हुई, कि वे विशेष रूप से आदिवासी लोगों के पास गए थे। वे जाकर उनसे मिले। मैं उनसे भी मिली थी और मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि उन्होंने तुरंत कहा: “माँ आप आध्यात्मिक हैं, हम जानते हैं, लेकिन क्या आप हमारी समस्या को हल कर सकते हैं?” मैंने कहा, “आपकी समस्या क्या है?”  “बहुत ही सरल, हमारे पास एक भूमि है”…. । “ज़मीन ठीक है, फिर” “बहुत कम भूमि, 5 या 6 हेक्टेयर भूमि जो हमारे पास है जहां सेज़ (sage) उगता है|” सेज़ एक प्रकार का, उनके अनुसार, यह एक पवित्र पौधा है, ठीक है। “अब, हम हमेशा मिलते हैं, हम सभी वहाँ विभिन्न त्योहारों के लिए क्योंकि हम उस भूमि को एक पवित्र भूमि मानते हैं |” वे बहुत सी बातें जानते हैं, आप जानते हैं। यह एक पवित्र भूमि है – वहाँ चैतन्य था। इसलिए वे हमेशा मिलते थे, जो कि स्वाभाविक है। “तो, अब क्या हो गया है, आपकी समस्या क्या है?”  सरकार ने इस जमीन को, इस अमेरिकी सरकार ने, एक भारतीय को बेच दिया है।  मैंने कहा, एक भारतीय को? “हां, तो क्या आप इस भारतीय से अनुरोध कर सकते हैं? इसे हमें लौटा दो, हम उसे पैसे दे देंगे”। मैंने कहा, “उस भारतीय नाम क्या है?” उन्होंने मुझे नाम बताया, मैंने कहा, “माई गॉड! वह सिंधी है, सिंधी! वह आपको एक पैसा भी नहीं छोड़ेगा। क्या वह आपको यह दे देगा? मुझे क्षमा करें, मैं दिव्य हो सकती हूं या मैं कुछ भी हो सकती हूं, परंतु मैं आपकी मदद नहीं कर सकती। लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ, किसी ने इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई। उन्हें आवाज उठानी चाहिए थी। उन्हें सरकार से कहना चाहिए था, कृपया उनकी जमीन वापस करें। आप उसे क्यों लेना चाहते हैं? आप इसे क्यों हड़पना चाहते हैं? वैसे भी सभी अमेरिकी अप्रवासी हैं, वे उस जगह के मालिक नहीं हैं, वे उस जगह पर अधिकार नहीं रखते – वे अप्रवासी हैं। इसलिए उन्हें किसी की भूमि को अपने पास रखने का कोई अधिकार नहीं है और फिर सोचना वे श्रेष्ठ हैं। बहुत अच्छा है! कोई आपके घर में प्रवेश करता है और सोचता है कि वह उच्चतर श्रेष्ठ है और परिवार के सभी लोगों को बाहर निकाल देता है।

वास्तव में, यही अमेरिका में हुआ है और इसके ठीक विपरीत सहज धर्म है। सहज धर्म के साथ, आप लोगों को अपने हृदय में स्थान देते हैं। आप उन्हें प्यार करते हैं। आपका प्यार हर समय बहता है, आपकी करुणा हर समय बहती है। मेरे लिए यह एक समस्या है, यह शरीर मेरे से ज्यादा दयालु है। मैं करुणा के बारे में सोचती भी नहीं हूं और यह शरीर सब कुछ ग्रहण कर लेता है। यह दूसरों की समस्या को हल करना चाहता है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि आपके पास उस तरह का शरीर हो सकता है, आपके पास नहीं होना चाहिए। लेकिन, कम से कम आपके पास दिल होना चाहिए जो साफ दिल है। आप सड़क पर किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जो एक अश्वेत आदमी है। मुझे काले अमेरिकियों के बारे में यह पसंद है, एक बार जब मैं एक हवाई अड्डे पर उतरी और एक सज्जन, अश्वेत सज्जन ने कहा: 

“हैलो डार्लिंग, आप कैसे हैं? आप यहाँ कैसे? आपको देखकर बहुत खुशी हुई!”

“मैं आपको देखकर खुश हूं। आप कैसे हैं?” 

फिर एक बार जब मैं यात्रा कर रही थी… तो हवाई अड्डा कौनसा था? उर्सुला मेरे साथ थी। तो उसने मुझे देखा, एक व्यक्ति बहुत लंबा, भारी, मोटा। उसने कहा: 

“आह! क्या आप फिर से वापस आ गए हैं?”

“आह”। मैंने कहा, “मैं वापस आ गयी हूं। क्या तुम मुझे जानते हो?”

“बेशक, बेशक मैं आपको जानता हूँ। ”

वह मुझसे कभी नहीं मिला था, मैं उसे कभी नहीं जानती थी। लेकिन मुझे खुशी महसूस हुई, मुझे बहुत खुशी हुई। लोगों से मिलने का यही सबसे अच्छा तरीका है। मान लीजिए कि आप सड़क पर चल रहे हैं, तो आपको कोई अश्वेत सज्जन दिखाई दे रहे हैं। वहाँ एक दुखदायी जीवन है, मैं आपको बताती हूं, यह उनके लिए एक दुखद जीवन है। मुझे पता है, मैंने उन पर कितनी किताबें पढ़ीं, मैं रोयी और रोयी और मुझे बहुत अफ़सोस हुआ। तो, एक सहज योगी होने के नाते, आपको बस उनकी ओर लपकना चाहिए और आपको कहना चाहिए, “नमस्ते, आप कैसे हैं?  उनके साथ हाथ मिलाएं। वे आपका गला नहीं काटेंगे, मैं आपको बता सकती हूं। अपराध करने में – मुझे नहीं पता कि अमेरिका में कौन अधिक अपराधी है, चाहे वे अश्वेत हों या गोरे – प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। लेकिन, अगर आप दयालु हैं और अगर आप प्रेम करते हैं, तो आप मन से अपराधिता के उस हिस्से को हटा सकते हैं जो उनके भीतर है। क्योंकि घृणा को केवल शुद्ध प्रेम से धोया जा सकता है। लेकिन लोग सोचते हैं कि वे बहुत चतुर हैं, चतुराई में बहुत श्रेष्ठ हैं, बिल्कुल। अन्यथा उनकी श्रेष्ठता क्या है? केवल यह त्वचा का रंग, यह सफेद रंग सबसे बुरा है। मैं बहुत गोरी थी, बहुत गोरी, जब तक मेरी शादी नहीं हुई, या कुछ समय के लिए, और फिर मेरा रंग अधिक गहरा और गहरा होने लगा क्योंकि सफेद रंग में सभी प्रकार के रंग मिलते हैं, आप देखते हैं, आप जिस रोशनी को मुझ पर डालते हैं, उसे मैं सोख लेती हूं और काले धब्बे हो जाते हैं । तो यह सफेद रंग होना कोई विशेष महान बात है, मुझे ऐसा नहीं लगता, यह बहुत ही हास्यास्पद और पीली और आनंदहीन दिखाई देती है। लेकिन समुद्र तट पर जाने का कोई फायदा नहीं, अपने शरीर को भूरा बनाने से, मुझे लगता है कि भूरा, भूरा, इतना काला नहीं, भूरा और फिर त्वचा के कैंसर से पीड़ित होना। इस तरह की मूर्खता भी बहुत फैशनेबल है।

अब, सामूहिकता में, हम इससे कितना प्रभावित होते हैं, हमें इस पर नजर रखनी चाहिए। मैंने देखा कि मेरी पोती बिना बाजु की ड्रेस पहने थी। मैंने उससे कहा बेटे तुम्हें बिना बाजु की ड्रेस नहीं पहननी चाहिए। ” वह कहती है, “यहाँ बहुत गरम है, मुझे बहुत गर्मी लगती है”।  मैंने कहा, “लेकिन देखिए, ये दो बहुत महत्वपूर्ण चक्र हैं। यदि आप उन्हें अनावरण करते हैं, तो आपको समस्या होगी ”। वह ऐसे कपड़े पहनना पसंद नहीं करती जो घुटने से ऊपर हों लेकिन वह कहती है, “लोग घुटने के ऊपर भी ड्रेस पहनते हैं”। मैंने कहा, “घुटने, वे बहुत महत्वपूर्ण चक्र हैं, हमें उन्हें ढकना चाहिए, अन्यथा अगर वे प्रभावित होते हैं, तो हमें घुटने में तकलीफ होगी”। उसने तुरंत बदल लिए- तुरंत। “माँ, मैं अंदर ब्लाउज पहनूंगी और ऊपर से कुछ।” तुरंत। क्योंकि वह जानती थी कि यह एक प्राकृतिक आदि वर्जना है जिसे हमें इन दो चक्रों और इन चक्रों को अनावरण नहीं करना चाहिए। लेकिन, आजकल, आपके पास जितनी लंबी टांगे हैं, मुझे नहीं पता, उनके पास उतने ही छोटे कपड़े होते हैं। और मुझे समझ में नहीं आता कि टांगों में क्या रखा है, पूरी सुंदरता टांगों में है या क्या है?

मैं एक महिला से मिली, जिसने मेरे साथ यात्रा की। उसने बुर्का पहन रखा था क्योंकि वह एक मुस्लिम थी और जब तक हम लंदन में उतरे, उसने बुर्का उतार लिया और उसकी पोशाक घुटनों से काफी ऊपर थी। मैंने कहा, वह किस तरह की मुस्लिम  महिला है? ”वह ईसाइयों से भी बदतर है क्योंकि वे इस तरह की चीज नहीं पहनेंगे। आप जानते हैं, हवाई जहाज से बाहर आने के लिए, आपको सीढ़ी से नीचे आना होगा। ना लज्जा, ना शर्म, कुछ नहीं, निर्लज्जता। 

तो, सहज धर्म यह है कि आपको शर्म करनी है, आपमें शर्म की भावना होनी चाहिए। आप दूसरों से क्या बात करते हैं, आप दूसरों से क्या कहते हैं, आप उनके प्रति कैसा व्यवहार करते हैं, सहज धर्म में आह्लाददायिनी है। अगर कुछ आह्लाददायिनी नहीं है, तो चुप रहें। कुछ मत कहो। क्या ज़रुरत है? व्यंग्यात्मक होने की क्या आवश्यकता है? अपने कटाक्ष द्वारा अपने दिमाग की तीव्रता का दिखावा। यह एक अच्छे पालनपोषण (नस्ल) का संकेत नहीं है, कि आप तीखे तरीके से दूसरों पर व्यंग्य करते हैं। लेकिन अगर आप मीठी बातें करते हैं, तो नुकसान क्या है, यह मिठास राधाजी से मिलती है। अब, निश्चित रूप से उन्होंने उसका दुरुपयोग किया है और उन्हें रोमियो और जूलियट जैसा बना दिया है। ऐसा नहीं था। वह एक बहुत ही पवित्र महिला थीं और वह महालक्ष्मी थीं। तो, वर्तमान में, महालक्ष्मी होने के लिए, सहज योग में आने के बाद, आपको पता होना चाहिए कि आपका ऐसा पहनावा होना चाहिए जो पूर्णतः उचित हो। 

एक बार मुझे याद है, मैं एक बड़ी पार्टी में थी और एक सज्जन आए और वह बैठ गए: हा हा हा हा !

मैंने कहा, “क्या हुआ?”

“क्या राहत मिली है माताजी, श्रीमती श्रीवास्तव, आपको देखकर। इन महिलाओं को देखें, मैं ऊब चुका हूं। लेकिन आप आयी, मैं बहुत राहत महसूस करता हूँ”। 

मैंने कहा, “तो राहत की क्या बात है?”

“आप बहुत शांत हैं”।

तो, महिलाएं सहज धर्म में निर्मल हैं। वे मूर्ख नहीं हैं, तुच्छ (ओछा व्यवहार) नहीं, कोई सी भी बात पर हंसती रहें। यह एक महिला की गरिमा नहीं है। कुछ भी हो, उन्हें हंसना है। मेरा मतलब है, अगर कुछ हँसने योग्य है, ठीक है। लेकिन कुछ बातें हँसने योग्य भी नहीं हैं, वे हंसती हैं। वह तरीका उचित नहीं है। वे हास्यास्पद भी हो सकते हैं, दूसरों का उपहास भी कर सकते हैं। लेकिन, प्रशंसा में हंसी, आनंद में हंसी, इतनी शुद्ध है और इस तरह का एक सुंदर वातावरण बनाती है। मुझे लगता है कि पूरी पर्यावरणीय समस्या हमारे दिमाग में है – और आपके पालन पोषण में। यह बाहर नहीं है। यह हमारे अंदर है, जो बाहर प्रतिबिम्बित होता है। गणेश पूजा में मैं आपको बताउंगी कि हम कितनी करीबी तरह से धरती माता से जुड़े हुए हैं, और किस तरह से धरती माता और वातावरण हमारे व्यवहार पर प्रतिक्रिया करते है, हमारी जीवन शैली पर।  सहज धर्म में, आप बहुत आसानी से वासना और लालच छोड़ देते हैं, जो मुझे पता है। मेरा मतलब है कि अगर वे इन्हें भी नहीं छोड़ सकते, तो उन्हें अपने आप को सहज योगी नहीं कहना चाहिए। पहली चीज जो आप छोड़ते हैं वह है वासना और लालच। मैं युवा लोगों में देखती हूँ, अब, जो सहज योग में आते हैं, वे वास्तव में बहुत स्वतंत्र बन जाते हैं। वे महिलाओं के पीछे नहीं भागते। महिलाएं भी पुरुषों के पीछे  नहीं  भागतीं। वे एक साथ हैं, वे एक साथ बैठते हैं, एक साथ बात करते हैं, एक साथ हंसते हैं, पर यह एक पवित्रता है। जो कुरान में वर्णित है कि जब कयामा आएगा, सुंदर महिलाएं और सुंदर पुरुष एक साथ होंगे। लेकिन उनमें कोई लालसा और लालच नहीं होगा, वे शुद्ध होंगे। यह आज, आप देख सकते हैं – वह लालसा और लालच आप में से अधिकांश में समाप्त हो गया है, अधिकांश में। स्वाभाविक रूप से स्वतः यह समाप्त हो गया है और अब आप स्वयं देख सकते हैं कि आप इस बंधन से मुक्त हैं।

फिर कल यहाँ शादियाँ हो रही हैं। सहज धर्म में, पहली बात जो बहुत महत्वपूर्ण है वह है क्षमा। यदि कोई क्षमा नहीं कर सकता, तो वह सहज योगी नहीं हो सकता – क्षमा। यह क्षमा कैसे आती है अतीत को भुला कर। अन्यथा आप यह कहते जाएंगे, कि इस व्यक्ति ने मुझे प्रताड़ित किया, उस व्यक्ति ने मुझे प्रताड़ित किया, वह मेरे लिए बहुत मतलबी था, वह यह था कि उसने मेरे साथ ऐसा किया, यह दर्शाता है कि आप में सहज योग को समझने की योग्यता नहीं हैं । – क्योंकि आप माफ नहीं कर सकते। याद करने के लिए क्या है? वर्तमान सबसे अच्छा है। अब अगर आप यहाँ मेरे साथ बैठे हैं, आप आह्लाददायिनी शक्ति का आनंद ले रहे हैं, उस समय यदि आप अतीत के बारे में सोच रहे हैं, तो क्या दिखाता है? कि आप में बुद्धिमत्ता नहीं हैं। सहज योग के योग्य  होने के लिए, आपको अपने अतीत से मुक्त होना होगा |  ख़त्म । अपने पापों को स्वीकार करने की कोई जरूरत नहीं है। मुझे पता है कि सहज योग के बाद कई लोगों ने मुझे पाप स्वीकारोक्ति के लिए पत्र लिखे और मैंने कहा, अरे बाबा, इन पत्रों को जला दो। मुझे याद नहीं रखना। मैं इसके बारे में कुछ भी पढ़ना नहीं चाहती।अतः क्षमा होनी चाहिए। यदि क्षमा है, तो आप आश्चर्यचकित होंगे, आप बहुत राहत महसूस करेंगे और आपका विवाहित जीवन बहुत खुश होगा। लेकिन अगर आप कुछ याद करने की कोशिश करते हैं। ठीक है, कुछ शादियां वास्तव में, वास्तव में बहुत कठिन हैं, ठीक है, तो आप उसे छोड़ दें। सहज योग में हमने पूर्ण तलाक की अनुमति दी है, लेकिन किसी कारण से होना चाहिए, इसलिए नहीं कि आपको लगता है कि कुछ बेहतर मिल सकता है। अब हमने कई देशों पर प्रतिबंध लगा दिया है जहाँ से हम लड़कियां नहीं चाहते हैं या जहाँ से हम लड़के नहीं चाहते हैं। क्या कारण है? अनुभव के साथ, हमने सीखा है, वे विवाह योग्य नहीं हैं। अब, बेहतर है कि वे शादी न करें, और यदि आप शादी करते हैं तो एक आदर्श सहज योगी की तरह रहें। इसके अलावा, यदि आप सहज योगिनी हैं, तो आप हर समय क्षमा करके इसे बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। हर बार, जब लोग मुझसे कहते हैं,

“माँ, आपको मेरी मदद करनी चाहिए”।

“क्यों?”

“क्योंकि, आप जानती हैं कि मेरे पति मुझे कोई पैसा नहीं देते।”

मैंने कहा, उसे छोड़ दो। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। उसे आपको पैसे देने चाहिए। वह आपको पैसे क्यों नहीं देता?”

यदि आप पति से बात करते हैं, तो वह कहेगा, माँ, वह बहुत खर्चीली है।

मैंने कहा, आप दोनों सहज योग छोड़ दीजिये और वही करें जो आपको पसंद है। 

सहज धर्म में, पति-पत्नी का संबंध वास्तव में प्रेमपूर्ण  होना चाहिए, वास्तव में सुंदर होना चाहिए। ऐसा नहीं है ।आप जानते हैं, हम प्यार और सब की बात करते हैं यहाँ, बहुत कम ही लोग प्यार में पड़ते हैं और यह भावना बनाए रखते हैं। यह एक आशीर्वाद है यदि आप वास्तव में उस तरह की भावना रखते हैं। अधिकांशतः यह एक अभिशाप है। इसलिए प्यार में पड़ना बहुत अच्छा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप भूल जाएं कि आप सहज योगी हैं। उस में, सहज योग बहुत मदद करता है, मुझे लगता है, आपके विवाहित जीवन में। वही धर्म आपके बच्चों के लिए है, कि आप अपने बच्चों का लालन-पालन करें – उन्हें बहुत परेशान न करें,  एक स्वतंत्र जीवन दें। उन्हें अपनी सुबुद्धि/विवेक का उपयोग करने दें। कभी-कभी मुझे पता है कि बच्चे भटक जाते हैं और गलत चीजों का पालन करने की कोशिश करते हैं। फिर आप उन्हें सही करें, आप उन्हें बताएं, यह आपका कर्तव्य है। वे पेड़ों से पैदा नहीं हुए बल्कि वे यहाँ माता-पिता से पैदा हुए थे। इसलिए माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे उन्हें बताएं कि यह गलत है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए | यह बहुत गलत बात है | आपको उन्हें सुधारना चाहिए और यह सुधार-कार्य सहज तरीके से होना चाहिए।

मैं आपको एक उदाहरण बताती हूँ। मुझे एक बार समस्या हुई, किसी ने मेरे पास आकर कहा, “माँ, मैं धूम्रपान के बिना नहीं रह सकता, मुझे धूम्रपान करना है”। मैंने कहा, “अच्छा हैं आप ध्रूमपान करो लेकिन आप सहज योगी नहीं हो सकते, क्योंकि धूम्रपानी सहज योगी एक हास्यास्पद व्यंगचित्र है आप जानते हैं, एक सहज योगी को धूम्रपान करते हुए मैं सोच भी नहीं सकती।  मैं कैसी लगूंगी अगर मैं धूम्रपान करना शुरू कर दूं? “आह, भयानक”! मैंने कहा “अगर आप मेरे बेटे हैं, तो आप धूम्रपान नहीं कर सकते, यह बुरा लगता है”। उसने धूम्रपान छोड़ दिया, क्या आप कल्पना कर सकते हैं? इसलिए, बच्चों के साथ व्यवहार करना, हमेशा अपने आप को एक उदाहरण बनाना |  अपने आप को उस घटना का अंगप्रत्यंग बनाना पड़ता है। ताकि बच्चे महसूस न करें, आप जानते हैं। यह कुछ ऐसा विषय है जिसके बारे में मैंने कई बार बात की है। बच्चे, एक बात है जो मैं आपको बताती हूं, वे सब कुछ छोड़ सकते हैं लेकिन आपका प्यार नहीं। यदि वे जानते हैं कि आप उनसे प्यार करते हैं, तो वे ऐसी किसी भी चीज को स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे आप उन्हें प्यार न करें। यह निश्चित है क्योंकि बच्चे सबसे अच्छे प्राणी हैं जो प्यार के बारे में जानते (समझते) हैं।

बेशक, मुझे नहीं पता, मुझे लगता है कि अंग्रेजी भाषा में, मैंने बच्चों के बारे में बहुत सी किताबें  नहीं देखीं हैं जिनंमें सुंदर सुंदर बातें लिखीं  हों। जब मैं लंदन में थी तब एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी, राजनेताओं के बारे में बात करते हुए बच्चे” और उन्होंने, मेरा सोचना है कि, 5000 पुस्तकें प्रकाशित की थीं और उसी दिन वे सब बिक गईं थी। इसलिए बच्चों से बात करें, उनसे बात करें। आप चकित हो जाओगे, वे मिठास  से भरे हैं। उनके पास इतनी अच्छी-अच्छी बातें हैं और जब वे इस तरह की बात करते हैं, तो आप हैरान होते हैं कि वे कैसे बातें करते हैं, कैसे वे सहज की बात करते हैं, कैसे वे अपनी आध्यात्मिक शक्ति व्यक्त कर रहे हैं। अब, हमारे पास बहुत सारे अच्छे बच्चे हैं और वे भी बिल्कुल सहज हैं। एक लड़का आया और उसने मेरे सामने दंडवत प्रणाम किया। तो, मैंने कहा, “आपने ऐसा क्यों किया?”

“मुझे बहुत ठंडी चैतन्य की अनुभूति हो रही थी, माँ आपसे, इसलिए मैंने ऐसा किया।”

“आपको यह पसंद है?”

“हाँजी! ”

“चॉकलेट से ज्यादा„

“हाँजी! 

मैं हैरान थी। “क्या आप उन्हें खाते हैं या क्या?”

“खाने की कोई जरूरत नहीं है, आप जानते हैं, मैं अंदर से बहुत खुश हैं और मुझे लगता है, माँ, आप अपना हाथ मेरे दिल पर रख रही हैं और मुझे सांत्वना देने की कोशिश कर रही हैं।”

हैरानी हुई। “और आपका दिल कहाँ है?”

उन्होंने कहा, “यह यहाँ है, यहाँ मेरा दिल है, मैं यहाँ महसूस करता हूँ।“ 

आप कल्पना कीजिए, क्या प्यार और  क्या समझ सहज योग की । इन छोटे बच्चों के लिए, जो पांच साल से कम उम्र के हैं। अब, आप सब मेरे बच्चे बड़े हो गए हो और मैं चाहती हूं कि आप उन सभी सौन्दर्य को जानो जो आपके भीतर विद्यमान हैं, जिनका आपको आनंद लेना है।

सबसे पहले, स्वयं पर हंसना सीखें। अपने आप से आनंद लेने का सबसे अच्छा तरीका है, आप जानते हैं। और दर्पण में स्वयं को देखने के लिए ज्यादा समय नहीं बिताना है, यह एक और तरीका है। अगर आप दर्पण के सामने बहुत अधिक समय खर्च करते हैं, तो आपके साथ कुछ गड़बड़ है। मुझे लगता है, व्यक्तिगत रूप से, कि यह एक प्रकार की बाधा हो सकती है। तो, आपको अपने अंदर क्या देखना चाहिए: क्या हम सहज धर्मी हैं? श्री माता जी ने सहज धर्म की स्थापना की है, जो श्री कृष्ण स्थापित करना चाहते थे, उससे भी कहीं अधिक। वह प्यार के धर्म की स्थापना करना चाहते थे जो हमारे पास है, लेकिन इसके अलावा हमारे पास कई अन्य सुंदर पहलू और ऐसी आंतरिक सुंदर चीजें हमारे व्यक्तित्व मैं हैं जो हम आनंद लेना भूल गए हैं। तो, ध्यान हमारे अपने गुणों पर होना चाहिए, अपने व्यक्तित्व पर और फिर आप आश्चर्यचकित होंगे कि कैसे आपका व्यक्तित्व आपको आनंद दे रहा है | आपको आह्लाद दे रहा है, आपको दूसरों के साथ व्यवहार में इतना धैर्य दे रहा है। मुझे पूरी बात एक परिहास की तरह लगती है क्योंकि कुछ भी इतना गंभीर नहीं है। यह राम का समय नहीं है, आपको गंभीर नहीं होना है। मुझे किसी को मारना नहीं है, मैं इस जीवन काल में किसी भी हथियार का उपयोग नहीं करती हूं। बिना हथियारों के अगर समस्याएँ हल हो जाती हैं, तो इससे बेहतर और क्या हैं? लेकिन आप, सहज योगियों के रूप में, यह सुंदरता को देखने का प्रयास करें। आपको यह देखने के लिए संवेदनशील होना चाहिए कि आपको कैसे मदद की गई है, आपको कैसे निर्देशित किया गया है, आपको कैसे आशीर्वादित किया गया है। यह सहज धर्म है। यदि आप यह नहीं जान सकते, तो आप बहुत निम्न स्तर पर रहते हैं। यह सहज योग का दोष नहीं है, लेकिन यह आपकी अपनी शैली है, आप संवेदनशील नहीं हैं। मान लीजिये कोई अपना हाथ नहीं जलाता। तो आप क्या करेंगे? उसकी कोई समझ नहीं है, उसकी कोई संवेदनशीलता नहीं है, वह महसूस नहीं कर सकता। वह मदिरा पी सकता है, वह धूम्रपान कर सकता है, वह सब कुछ कर सकता है और फिर भी वह ठीक जीवित है। अवश्य एक राक्षस होगा, मुझे लगता है या मुझे नहीं पता कि क्या कहना चाहिए।

इसलिए, हमें अन्य अच्छे सहज योगियों का उदाहरण लेना होगा, न कि बुरे लोगों से और कैसे हम आनंद में आगे बढ़ें – जो एक महासागर है, सिर्फ एक महासागर है। उदाहरण के लिए, अब, मैं आयी, हर कोई पंखा करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन पश्चिम में एक अन्य समस्या यह है कि वे  सीलबंद कमरों में रहना पसंद करते हैं, भली-भांति बंद करके कारें, वे वायु की झोंको से बहुत डरते हैं, मुझे नहीं पता, जैसे कि वे उड़ जाएंगे या उनका क्या होगा। वे खुली  हवा नहीं चाहते हैं। मेरा मतलब है कि  हवा किसी हिमखण्ड  से नहीं आ रही  है। इसलिए, वे ताजी हवा में बिल्कुल भी विश्वास नहीं करते हैं और यह एक और कारण है कि लोग बहुत घुटन महसूस करते हैं कभी-कभी आप जानते हैं, वे सिर्फ घुटते रहते हैं। वे घुटन भरे जीवन के आदी  है।

एक बार जब मैं भारत में थी, तो बहुत गर्मी  थी, मेरी गाड़ी कोई चला रहा था लेकिन वह व्यक्ति पश्चिमी देश से था। उन्होंने कहा, “मत खोलो, खिड़की मत खोलो”। मैंने कहा “क्यों?” “बाहर तेज़ हवा है”। मैंने कहा, “इस देश में, भारत में लोग खुले में रहते हैं। तेज़ हवा क्या है? आप किस तेज़ हवा की बात कर रहे हैं?” आप दरवाजा नहीं खोल सकते, आप खिड़की नहीं खोल सकते, आप कुछ भी नहीं खोल सकते, अगर आप कुछ भी खोलते हैं, तो वे सभी मृत हो जाएंगे, ज़रा सोचिए। अतः अपने आप को खोलो !

जैसा कि प्रकृति के बारे में है, यही उनके निजी जीवन में भी है। वे खुलना नहीं चाहते। अगर कोई उनके घर आता है, “ओह, माय गॉड, अब हमें वाइन बांटनी  होगी, हमें खाद्य पदार्थों को बांटना होगा”। वे बाँट नहीं सकते। वे बाँट नहीं सकते। यह सबसे अधिक असामूहिक है। लेकिन भारत में, मुझे कहना होगा, लोगों की बांटने की क्षमता अच्छी है क्योंकि वे अभी भी मौलिक हैं, वे अभी भी प्राचीन हैं, अभी अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए सीमा से बाहर नहीं गए हैं। लेकिन मुझे लगता है कि भारत में किसी न किसी तरह, लोग बांटना पसंद करते हैं। 

यदि आप किसी भारतीय को खुश करना चाहते हैं, तो आप उन्हें बताएं, कल मैं आपके साथ भोजन करने आपके घर आऊंगा, उसकी पत्नी खुशी से कूद पड़ेगी। वह कहेगी, अब तुम्हें क्या पसंद है, मुझे बताओ, तुम्हें क्या खाना पसंद है?  वह कूदने लगेगी । लेकिन, दूसरी और क्या होता है, जैसे ही आप कहते हैं कि वह भोजन के लिए आ रहा है, पत्नी कहेगी, नहीं, नहीं, मैं अपनी मां के पास जा रही हूं। तुरंत उसके पास एक कार्यक्रम होगा। मुझे समझ में नहीं आता है। उनके पास सुंदर घर होगा, बहुत साफ-सुथरा, बहुत सुंदर सब कुछ लेकिन अगर कोई उनके घर आता है, तो उन्हें एक झटका लगता है जैसे कि बिजली की करंट गई हो। अतः, यह सब किसके लिए है?

दिखावा करने के लिए, वे बैंकों से पैसा उधार लेंगे। यहां तक कि अमेरिका में भारतीय भी यही करते हैं। वे तीन मर्सिडीज, चार घर चाहते हैं, किसलिए? उधार करके, उधार के पैसे से जीवन  जीते हैं। सहज योगियों को कोई पैसा उधार नहीं लेना है। कोई जरूरत नहीं है, आप चीजों से दूर कर रहे हैं। इतनी कारें किसके लिए? आजकल, लोग बिल्कुल भी पैदल नहीं चलते हैं। हम अपने स्कूल जाते थे, मेरे पिता के पास भारत में एक कार थी – कोई मतलब नहीं । हमें चलना था। हम एक पहाड़ पर चढ़ते थे। यह हर सुबह होता  था, स्कूल से घर पांच मील दूर था। फिर रात में, शाम को गाड़ी आती थी, आप देखिये और मैं नंगे पैर चलती थी। क्योंकि वहाँ की धरती में  बहुत चैतन्य था, और चप्पल, मैं सोचती थी कि मेरे चैतन्य में अवरोधक हो रही है, इसलिए चप्पल मैं हाथ में लेकर चलती थी । एक दिन, हमारे यहाँ एक नया ड्राइवर आया, मेरे पिता ने उसे भेजा था । उसने कहा, “मुझे कैसे पता चलेगा कि आपकी बेटी कौन है”। उन्होंने कहा, हाथ में चप्पल वाली कोई भी लड़की मिले उसे आपको लाना है।

तो, अपनी शालीनता का आनंद लेना है, अपनी उदारता का आनंद लेना है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। और किसी की तरफदारी  नहीं करनी है। आपकी पहचान किसी अन्य से नहीं है।

यह अब बेहतर है, मुझे लगता है, क्योंकि जब से आप सहज धर्म में आये हैं, मैंने देखा है – अंग्रेज आपको बताएगे कि अंग्रेजो में क्या गलत है, स्विस आपको बताएगा कि स्विस के साथ क्या गलत है, भारतीय आपको बताएंगे कि भारतीयों के साथ क्या गलत है। दरअसल, मैंने उनसे सीखा। मुझे नहीं पता था कि ये सब ऐसा हैं। रूसी आपको बताएंगे कि रूसी के साथ क्या गलत है। वे तुरंत यह देखना शुरू कर देते हैं कि हमारे यहाँ क्या गलत है, हमारे यहाँ कहाँ कमी है। क्योंकि एक देश में सामूहिकता, एक भारतीय के रूप में कहें, तो हम अब देखते हैं, भारत में क्या हो रहा है, सभी भ्रष्ट, भयानक, यहाँ, वहाँ।  इसलिए, मैंने कहा, ठीक है, अगर आपको भारत पसंद नहीं है तो आप कहीं और क्यों नहीं जाते हैं? ” नहीं, नहीं, नहीं, – हम यहीं रहेंगे, लेकिन यह एक बहुत ही भ्रष्ट सरकार हमारे यहाँ है, यह बहुत बुरा है, यहाँ तो। आप कहीं भी जाएं, आप पाएंगे कि वे तुरंत देख पाते हैं – क्योंकि आप नहीं जानते कि वे अब अपने देश को बदलने के लिए चुने गए हैं।

अब मैंने कई सवाल उठाए हैं, भारत के विषय में और मैं उस स्तर पर काम शुरू करने जा रही हूं। हमने पहले ही शुरू कर दिया है, एक तरह से बेसहारा महिलाओं के लिए, फिर दूसरी तरह की गरीबी और ये सब। सिर्फ कहने मात्र से कि गरीबी दूर करो, गरीबी नहीं मिट सकती। आपको गरीबों के लिए महसूस करना होगा, तभी  केवल । लेकिन आप उस भावना के साथ और अधिक जुड़ जाते हैं क्योंकि आप एक भारतीय हैं। आप भारतीय हैं, तो क्या हुआ? आपके अपने भाई, बहनें भूखे मर रहे हैं। यदि आप सहज धर्मी हैं तो आपको अपने भीतर बहुत गहरी संवेदना होती है।

अतः  यह नया धर्म है जिसे हमने अब इस दुनिया में स्थापित किया है। एक नई दौड़, एक नए धर्म के साथ, जो श्री कृष्ण की दूर दृष्टि से कहीं ऊपर है – फलीभूत हो रही है। वह आरंभ में वर्णन करते है। (मुझे लगता है] वह एक अच्छा विक्रेता नहीं थे ] क्योंकि वह सबसे उत्तम पहले वर्णन करते  है, आप देखते हैं कि विक्रेता पहले 2 रुपये से शुरू होगा फिर 2000 रुपये तक आगे बढ़ेगा।) लेकिन उन्होंने सबसे पहले हमें बताया कि आपको स्तिथ प्रज्ञ बनना है, यानि सहज योगी – और फिर श्री कृष्ण से अर्जुन द्वारा एक प्रश्न पूछा गया, “स्तिथ प्रज्ञ”। फिर वह एक सहज योगी का वर्णन करते है, जो कि वह पहले अध्याय में पहले वर्णन कर चुके है, दूसरा अध्याय वह है। फिर सवाल शुरू होते हैं। आप जानते हैं, अर्जुन एक महान प्रश्नकर्ता था, मुझे लगता है। तो, वह सवाल पूछना शुरू कर देता है, फिर इस बारे में क्या है और उसके बारे में क्या है और उसके बारे में क्या है? “तो वह उसे समझाते हैं  कि, आप यह जो देख रहे हैं सब सिर्फ एक माया देख रहे हैं, यह सब एक भ्रम है जो आपके पास है। इस भ्रम से बाहर निकलो। यदि एक बार आप इस भ्रम से बाहर निकल जाते हैं, क्योंकि अर्जुन ने कहा, “वे मेरे संबंधी हैं, वे मेरे शिक्षक हैं, मैं उन्हें कैसे मार सकता हूं?” तो, कृष्ण कहते हैं, “किसी को नहीं मारा जाता है”। उन्होंने कहा, “कोई भी मारा नहीं जाता है, लेकिन वे मारे जा रहे हैं क्योंकि वे सत्य धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं” इसलिए यह ठीक है।  तुम्हारा भाई क्या है, तुम्हारी बहन क्या है? वे सत्य धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं|  इसलिए आपको उनसे कोई लेना-देना नहीं है। यदि आप उन्हें ठीक कर सकते हैं और उनकी मदद कर सकते हैं, तो यह ठीक है, अन्यथा उन्हें भूल जाओ।

पहले उन लोगों से निपटें जो सीधे हैं। जैसे हमें कहना चाहिए कि हमें ऐसे लोगों से निपटना चाहिए जो सरल, भले हैं, आप मुश्किल लोगों को ले सकते हैं, जब आप अनुभवी हो जाते हैं। नहीं तो आप यहाँ आकर कहेंगे, माँ, मेरा यह चक्र पकड़ा गया  है, मैंरा वह चक्र पकड़ गया है। तो, सहज धर्म में, आप आत्मा होने के नाते, आप दूसरों के बारे में भी अच्छी तरह से जानते हैं और आप यह भी जान लेते हैं कि कौन क्या है और उसके कौन से चक्र में पकड़ है। लेकिन अमेरिका में परेशानी है, मैंने पाया कि सहज योगी बस जाकर किसी से कहते थे, “आप इस चक्र को पकड़ रहे हैं”। अब, वह पहली बार आया है और आप उससे कहते हैं,  “तुम, तुम बहुत अहंकारी हो”। वह कहता है “तुम्हें कैसे पता?” “आपका आज्ञा चक्र पकड़ रहा है”। हो सकता है, उसकी अपनी  ही आज्ञा पकड़ रही हो। क्या यह एक नये व्यक्ति को अपनाने का तरीका है? क्या यह किसी नए व्यक्ति से बात करने का तरीका है? देखें, इसके विपरीत, आपको कहना चाहिए, “बैठो, बहुत अच्छा है, तुम बहुत महान हो, देखो!” क्योंकि वे अभी भी अज्ञानी हैं, इसलिए वे कुछ प्रकार की खुशामद पसंद करते हैं, जैसा कि आप इसे कहते हैं, आप देखते हैं, हम इसे चापलूसी कहते हैं। फिर, धीरे-धीरे, क्योंकि आप ऐसा सिर्फ उसे सहज योगी बनाने के लिए कह रहे हैं, क्योंकि आप उससे प्यार करते हैं। मूल रूप से यही कारण है। लेकिन जैसे ही कोई अंदर आता है, यदि आप उसे बताते हैं की आपके साथ यह गलत है, आपके साथ वह गलत है। यहाँ कोई एक पादरी जैसा काम नहीं है, जहां आप लोगों को यह बताने में लग जाते हैं कि उनके साथ क्या गलत है, इन सभी मूर्ख लोगों के पास जाना और गलती स्वीकार करना। ऐसा नहीं है। हमें जो दिखाना है, आपको उस व्यक्ति से प्यार हो गया है, आप उस व्यक्ति के साथ अच्छा व्यवहार कर रहे हैं क्योंकि आप उस व्यक्ति को पसंद करते हैं। फिर धीरे-धीरे आप उसे ऊपर (उत्थान) की ओर खींचते हैं। लेकिन जैसे ही वह आता है आप उसे एक झटका दे देते हैं, सब समाप्त। आपके अच्छे संबंध कैसे हो सकते हैं? अमेरिकियों को यह सीखना होगा। मुझे नहीं पता कि अमेरिकी क्यों सोचते हैं कि वे बहुत श्रेष्ठ लोग हैं। मैं तुम्हें सुबुद्धि के लिए कह रही हूं यह नहीं  कि वे बहुत अच्छे हैं। यह पूरी तरह से बुद्धिमत्ता (विवेक) की कमी  है । और वे बहुत जल्दी  लोगों को गलत समझते हैं|  दूसरों को आंकना शुरू करते हैं, यह वह तरीका नहीं है जिससे आप सहज धर्म निभा सकते हैं। सहज धर्म है – आप अपने हैं। आप अपने में हैं, आप अपने दायरे में हैं और अपनी खुशी और आनंद में हैं। दूसरों की आलोचना करने का समय ही कहाँ है? इसलिए सबसे अच्छा यह है कि अपना अधिकतम प्यार प्रत्येक व्यक्ति को दिखाएं। उस प्रेम में, आपको अपनी दया नहीं बल्कि प्रेम दर्शाना चाहिए। जिसे दुबारा कहूँगी ऐसा प्रेम जो आह्लाददायिनी है। यह श्री कृष्ण का संदेश है, लेकिन मुझे नहीं पता कि कितने लोग इसे समझ पाए हैं। अब, आप उन लोगों से मिलते हैं जो श्री कृष्ण का अनुसरण करते हैं जैसे “हरे रामा” वाले अनुयाई, वे वास्तव में सड़क पर भिखारी हैं। वह (श्री कृष्ण) स्वयं कुबेर है, और उनके सभी शिष्य भिखारी हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं। क्या कुबेर के रूप में यह उनकी महिमा को बढ़ता है? तो, सहज योगी ऐसे नहीं हैं। उदार होना चाहिए, अपने बारे में बहुत अधिक चिंता नहीं करनी चाहिए। हर पल अपने बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि सामूहिकता के बारे में सोचना चाहिए कि आप कैसे व्यवहार करते हैं। सामूहिकता का अभिप्राय यह नहीं कि सहज योग में आने के लिए लोगों को मजबूर नहीं करना। एक बार जब वे सहज योग में आएंगे तो उन्हें जीवन का आनंद पता चल जाएगा और आपको उन्हें कुछ और बताने की आवश्यकता नहीं है। कुछ भी नहीं कहना है, बस शांति से यह कार्य करेगा और वे आपके प्रेम को महसूस करेंगे।

आप जानते हैं प्रेम बहुत महान है। यह न केवल दूसरों की मदद करता है बल्कि यह आपकी भी मदद करता है। दूसरों को आत्मसाक्षात्कार देना प्रसन्नता की बात है। लेकिन अगर आप बताना शुरू करते हैं, आपका चक्र पकड़ रहा है”, आप साक्षात्कार क्यों दे रहे हैं? यदि आप यह नहीं जानते कि आत्मसाक्षात्कार कैसे दिया जाए, तो बेहतर है कि आप यह कार्य न करें। इसलिए, आलोचना करना का तरीका नहीं है जिससे आप प्रेम का आनंद ले सकें। आह, बेशक आप कभी-कभी मज़े के लिए एक-दूसरे की टाँग खींच सकते हैं, कह सकते हैं, लेकिन नुकसान पहुँचने के लिए नहीं, यातना नहीं, उस व्यक्ति को नीचे गिराने के लिए नहीं। आप सभी सहज धर्मी हैं, आपने सहज धर्म को स्वीकार कर लिया है और सहज धर्म में हमें हृदय में शुद्ध प्रेम रखना है न कि पाखंड, – और समझदार जीवन जीना है।

अब, यह पोप गर्भपात के खिलाफ है, मैं नहीं। अगर कोई महिला पीड़ित है, तो उसे गर्भपात करवाने दें। जो जीवित है वह उससे अधिक महत्वपूर्ण है जो अभी जीवित नहीं है। यदि कोई गर्भपात करवाना चाहता है, तो वह बच्चा दुबारा पैदा हो सकता है। हमारे अनुसार, कोई भी स्थायी रूप से नहीं मरता, चाहे कुछ भी हो। यह भी एक तरीका है जो वे इसे मानव जाति की बढ़ोतरी के लिए उपयोग करते हैं। जैसा कि वे कहते हैं कि मुस्लिम महिलाएं एक कारखाने की तरह हैं। वे अधिक बच्चे, अधिक बच्चे और अधिक बच्चे पैदा करती रहती हैं। इस प्रकार मतदाता (वोटर) अधिक संख्या में होंगे । तो पोप यह जानता है । इसलिए वह कहता है, “गर्भपात, नहीं”। ईसाइयों को गर्भपात नहीं करना चाहिए, क्योंकि तब मुस्लिम के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए कम ईसाई  होंगे। लेकिन सहज योग में, ऐसी हास्यास्पद, कट्टरपंथी, निरर्थक बातें नहीं हैं। हमारे पास तलाक है|  और हमारे पास गर्भपात भी है|  जिसे समझना महत्वपूर्ण है कि ये सभी निषेध हैं जो यहाँ हैं। लेकिन उन लोगों के लिए नहीं जो परेशानियों से बाहर निकलना चाहते हैं – आपको इन्हें करना होगा। यह इस प्रकार काम करता है। लेकिन स्पष्ट  रूप से कहूं तो, हमें गर्भपात करने की ज़रूरत नहीं है।

 यह परमचैतन्य द्वारा प्राप्त किया जाता है। परमचैतन्य मेरे लिए करता है। मुझे नहीं करना पड़ता है। मुझे कुछ करना नहीं पड़ता है। यह परमचैतन्य है। यह अच्छा है क्योंकि यह जानता है कि क्या करना है, इसे कैसे प्राप्त करना है। और कभी-कभी आप मुश्किल में पड़ जाते हैं|  तो जान लें कि आप परिस्थितियों को परमचैतन्य के हाथों में नहीं छोड़ रहे हैं। यदि आप इसे परमचैतन्य के हाथों में छोड़ देते हैं तो बहुत अच्छी तरह से काम होंगे।

तो, सहज योग को समझने के लिए सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप स्वयं में कितना आनंद ले रहे हैं? आप दूसरों को कितना आनंद दे रहे हैं? उसके लिए आपके पास संगीत है, आपके पास यह है, वह है।

मैं कह रही थी  कि आज मैं ज्यादा नहीं बोलूंगी, लेकिन, किसी तरह, श्री कृष्ण के समय आप चुप नहीं रह सकते। उन्होंने मुरली , बांसुरी, फ्लूट बजायी, उन्हें देखो। मैंने उनकी बात की, लेकिन उन्होंने सिर्फ मुरली बजाई। उन्होंने इतनी बात नहीं की, गीता के सिवाय, आप उनको बात करते हुए नहीं पायेंगे। और जो गीता पढ़ते हैं वे भयानक लोग हैं, मैं आपको बता रही हूं, मैं उनसे मिली  हूं, जो लोग गीता पढ़ते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि श्री कृष्ण का धर्म क्या है। यदि वे श्री कृष्ण को नहीं समझते हैं] तो वे सहज योग को कैसे समझेंगे? इसलिए आप सभी को प्रेम, क्षमा,  माफी पर, दूसरों की सराहना करना, दूसरों को आनंद देने का अभ्यास करना है।

कुछ सहज-योगी मेरे लिए भी बहुत दयालु रहे हैं। एक बार मैं साड़ी खरीदने के लिए एक दुकान पर गयी, अपने लिए और साड़ी मेरे उद्देश्य के लिए बहुत महंगी थी। इसलिए, मैंने खरीदी नहीं, जाने दो, यह रंग सजता (फबता) है, ठीक है, लेकिन कोई अंतर नहीं पड़ता। मेरे पास खरीदने के लिए इतने पैसे नहीं थे। इसलिए, उस सहज योगी ने उस साड़ी को खरीदा और मेरे जन्मदिन पर मुझे दिया – और वास्तव में, मैं देख नहीं पाई क्योंकि मेरी आँखें आँसुओं से भर गई थीं। बस इतनी छोटी-सी बात। आम तौर पर मैं आपसे आशा नहीं करती कि आप मेरे लिए कुछ करें। लेकिन छोटी-छोटी बातें आपको बहुत खुश करती हैं। लेकिन अगर आप किसी के साथ ऐसा करते हैं, तो  हो सकता है वह समझ नहीं पाए, पहचान नहीं पाए, महसूस नहीं कर पाए। लेकिन अगर आप सहज योगी हैं, तो आप अवश्य करेंगे।

तो इस सब के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, जो मैंने आपसे कहा है, आत्म-आनंद लेने की कोशिश करें और दूसरों को भी आनंद दें।

परमात्मा आपको आशीर्वादित करें। 

प. पू. श्री माता जी निर्मला देवी