Shri Hanumana Puja

पुणे (भारत)

1999-03-31 Hanumana Puja Talk, Pune, India, 64' Download subtitles: ENView subtitles: Add subtitles:
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Shri Hanumana puja. Pune (India), 31 March 1999.

[Hindi Transcript]

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari आज हम लोग श्री हनुमान जी की जयन्ती भी चित्र बनाते हैं तो पहले हनुमान जी का ही मना रहे हैं हनुमान जी के बारे में क्या कहें कि वो जितने शक्तिवान थे जितने गुणवान थे उतने ही वो श्रद्धामय और भक्तिमय थे। अधिकतर, ऐसा मनुष्य जो बहुत शक्तिवान हो जाता है, बहुत जो कुछ भी हमने अपने उत्क्रान्ति में, अपने बलवान हो जाता है वह right sided हो जाता है। Evolution में पीछे छोड़ा है उसमें भी जो प्रेम वह अपने को इतना ऊँचा समझता है कि वो और उसमें भी जो आसक्ति थी वो उन्होंने अपने अपने आगे किसी को भी नहीं मानता। पर हनुमान जी एक विशेष देवता हैं, एक विशेष गुणधारी का जो मार्ग माना जाता है जिसमें कि गुरु के वहुत देवता। जितने वे बलवान थे उतनी ही उनकी भक्ति शक्ति के सन्तुलन में थी। इतनी उनके मानते हैं। कुत्ते में वो विशेषता है कि गुरु के जैसे अन्दर जो शक्ति भक्ति थी ये सन्तुलन उन्होंने एक साधक पूर्णतः समर्पित होता है और गुरु के किस प्रकार पाया और उसमें रहे थे, एक वही सिवा उसका और कोई मालिक नहीं होता। कोई मझने की बात है। जिस प्रकार अब हम सहजयोग और उसका विचार नहीं होता। हर समय वो चित्र बनाते हैं। फिर दूसरी उनकी विशेष बात ये है वे अर्ध मनुष्य थे अर्ध बन्दर थे। माने पशु और मानव का बड़ा अच्छा मिश्रण श्री। तो हमारे अन्दर साथ ले लौ थी। जैसे कि आप देखते हैं इन गुरुओं से प्राणी होते हैं, सेवक माने जाते हैं सो कुत्ते को स में पार हो जाते हैं और सहजयोग में हमारे पास अनेक विदू शक्तियां आ जाती हैं उसी के हिसाब से हमें सन्तुलन रखना पड़ता है। हम प्यार करते हैं और प्यार के सहारे, प्यार की शक्ति के सहारे हम अपने कार्य में रत रहते हैं और वो कार्य करते रहते हैं। इसी प्रकार श्री हनुमान जो अत्यन्त शक्तिशाली थे और इनके अन्दर दैवी शक्तियां, नवधा दैवी शक्तियां थीं-जिसे कहते हैं गरिमा, लघुमा वे चाहे जितना बड़े हो सकते थे, अणिमा छोटे बिल्कुल-विल्कुल बारीक हो सकते थे ये सारी शक्तियाँ जो भी पा लेता था वो पागल हो अपनी जान लगा देता है अपने मालिक के लिए। इस प्रकार समझना चाहिए कि एक प्राणी जो कि उत्क्राति में बड़ा हुआ है जब वो मनुष्य क सानिध्य में आता है तो वो क्या सीखता है? परम भक्ति। इसका मतलब है भक्ति हमारे अन्दर जन्मत: बनी हुई है। पूर्णतया पहले ही से हमारे अन्दर भक्ति का बीज बोया हुआ है। हम लोग इस दशा में नहीं थे, मानव दशा में नहीं थे तब हमारे अन्दर भक्ति का उद्भव बहुत भक्ति पूरी तरह से हमारे अन्दर समा गई। आप किसी भी जानवर को ले लें, उसे आप हो गया; स्नेह दें, ज़रा सा स्नेह दें, जरा सा आप प्यार द तो वो इस तरह से आपके निकट हो जाता है, इस तरह आपको मानता है और इस तरह आपसे प्यार करता है। घोड़े की भी बात आपने सुनी होगी। घोडे से जब सवार गिर जाता है जब वो मरने को होता है तो वो उसके ऊपर छा जाता है। इसी प्रकार अनेक हाथियों के बारे में बताया था कि ये जाता था। दोनों को बीच में जो मध्य मार्ग है उस चीज को पाना है जिसे आप शक्ति कहिए चाहे भक्ति कहिए। उनके शरीर का अंग-2 उसी से भरा रहता है। उनकी इसी विशेषता के कारण आज हम बजरंगबली की देश-विदेश में भी अर्चना करते हैं । मुझे आश्चर्य लगता है कि परदेश में जो छोटे लड़के हैं, छोटे बच्चे हैं. वो कोई सा ন

Original Transcript : Hindi हाथियों की निष्ठा भी कमाल की है। वो अपने मालिक को कभी कोई तकलीफ नहीं देता। उनके थी। अब ये जो श्री राम के जो विशेष गुण अत्यन्त शक्तिशाली और उनका निशाना कभी चूकता नहीं था आपने सुना होगा कि सीता-स्वयंवर में उन्होंने मालिक पर गार कोई शेर या एसा जानवर हमला करे तो हाथी उससे लड़ते-2 मर जाएगा पर अपने क्या किया? लेकिन बही श्री राम जब रावण की मालिक को हाथ नहीं लगाने देगा। ये जो रिश्ता एक मालिक का और ऊँचे पहुँचे हुए जानवर का है ये रिश्ता भी हमारे अन्दर स्थित है। पहले उसे तुलसीदास ने बहुत सुन्दर किया है श्रीराम बार-बार बनाओं और इस रिश्ते के साथ जो शक्ति भी बाण मार रहे हैं और रावण के दस सिर में से एक हमको मिली है। पहले जैसे मैंने बताया कि हाथी लड़ते-2 मर जाएगा. तो लड़ने की शक्ति हाथी के अन्दर भी इसलिए है कि उसके अन्दर प्यार हृदय में मारो। जैसे ही हृदय में व भक्ति हैं। हम लोग कहते हैं कि सहजयोग प्यार का, परमेश्वरी प्रेम का कार्य है। बातः सही मर सकता उसका बो बाण जो है वो उसके हृदय है, पर इसी कार्य को करते वक्त उसमें शक्ति भी में लगाओ। अब श्री राम का बड़ा सुन्दर वर्णन है निहित है। हम लोग उसको शायद जाने या न जाने हमें उसमें प्रचीती हो या न हो, वो उसी के साथ निहित है और वो शक्ति, दैवी शक्ति मनुष्य का उन्होंने कहा, देखो, बात ये है कि इस रावण के किसी के प्रति नतमस्तक होना. किसी को मान लेना, किसी को बड़ा समझ लेना ये सब उसी के मारूगा। लेकिन ये बार-बार इसका सिर उतरेगा लक्षण हैं। किन्तु वो जब गुरु मान लेता है तो तो इसका ध्यान जरूर मेरे सिर की और जाएगा। उसके अन्दर गुरु की महिमा तो होती है पर उसके साथ-साथ उसकी शक्ति भी होती है तो उनके लिए ये कहा जाता है कि एक वाण में वो भक्ति और शक्ति दो अलग चीजें नहीं हैं एक ही हैं। हम ये कहेंगे कि गर (Right Hand) में ग़र शक्ति है तो (Left Hand) में भक्ति। ये पति का प्रेम अपनी पत्नी के प्रति । सारी शक्ति के शक्ति-भक्ति का संगम, ये हनुमानजी में बहुत है। सीता जी ने कहा, तुम तो मेरे बेटे हो। मैं बेटे के बल पर नहीं आऊंगी। मेरे पति को आना होगा और इस आदमी का संहार करना होगा। जब वो इसको नष्ट करेंगे तब मैं उनके साथ जाऊँगी। तो हनुमान जी पेड़ पर बैठ गए। उन्होंने कहा ठीक दूसरों को सताता हो, जो दूसरों को नष्ट करता हो है। बो तो उनको ऐसे ही उठाकर ले आते, उनकी उसका वरध करने में उनको विल्कुल किसी तरह शक्तियाँ ही जब माँ ये बात कह रही हैं, ठीक है। और उसके बात आईं तो उसको उन्होंने छोड़ा नहीं। उसका उन्होंने वध कर दिया। उनके धनुष का वर्णन एक गिरता जाए , फ़िर आए जाए, तो लक्ष्मण ने कहा कि कर क्या रहे हैं आप? एक बाण उसके बाण मारोगं बैसे ही बो मर जाएगा, नहीं तो बो मरेगा कैसे? वो नहीं वहाँ। संकोची थे न बहुत संकोची। श्री राम जो थे इतने शक्ति के प्रचण्ड महान प ुरुष होते हुए भी हृदय में मेरी सीता का बास है। तो मैं हदय में नहीं उस वक्त मैं इसको बाण से मारूँगा। नहीं तो वध करते थे। पर अब ये देखिए कि कितनी नजाकत की बात है, कितनी सरलती की बात है, सागर होते हुए भी उनके अन्दर किस कदर प्रेम था। हनुमान जी के तो अनेक किस्से हैं कि जिसमें हनुमान जी ने सिद्ध कर दिया कि वो प्रेम का सागर है। और उसी वक्त जो दुष्ट हो, जो का संकोच नहीं होता था ये जो भक्ति की बात बजरंग बली की है वहीं उनकी शक्ति की भी बात देखने लायक है। वो जानते थे कि रावण ऐसी थीं। लेकिन उन्होंने कहा कि बाद इतना बड़ा महायुद्ध हुआ। उसकी जरूरत 3

Original Transcript : Hindi पर आफ़त आई हुई है, उनके संरक्षण में है। और जो लोग उनको पीड़ा देते हैं, जो नाश करते हैं. जो सताते हैं और जिन्होंने हर तरह की परेशानी इन लोगों के लिए खड़ी की है ऐसे लोगों को, आप को कुछ करने की जरूरत नहीं, सिप बन्धन से ही आप ठिकाने लगा देंगे। ये जो आपके अन्दर शक्तियां आ गई हैं; इसका इस्तेमाल इसीलिए करना चाहिए कि जिससे जो दुष्ट हैं वो खत्म हो जाएं। लेकिन आपकी शक्ति में हाथ में तलवार या गदा नहीं हनुमान अन्तर में हैं। आपके अनुभव आप देख लीजिए कि जो आदमी परेशान करता है, तंग करता है उस पर गदा प्रहार हो जाता गंदा उठाइए या नहीं उठाइए। इस तरह से आप तो स्वयं सुरक्षित हैं ही, आपकी तो सुरक्षा है ही । लेकिन उसके साथ ही साथ आपके जो दूसरे सहजयोगी हें उनकी भी सिर्फ अग्नि से डरता है। इसलिए लंका में गए और लंका दहन कर दिया। ये उनकी शक्ति की वात थी कि उन्होंने लंका दहन कर दिया और उस दहन में किसी को मारा नहीं, किसी को जलाया नहीं, रावण भी जला नहीं, कोई नहीं जला पर उसे दहशत हो गई। वे घबरा गए कि रावण ये क्या पाप कर रहा है। रावण जो इस तरह के कार्य कर रहा था, पहले लोगों में सम्मत था। वो कहते थे ये रावण ही है, क्या है, इसकी इच्छा जो है सो है। इसको जो करना है सो करने दो। हम उसको कहने वाले कौन होते हैं, रावण तो रावण हो है। लेकिन जब, कितनी समझदारी की बात है कि जी जैसे, बाहा में गदा नहीं है पर हैं। चाहे आप हाथ में जब लंका जल उठी, जब लंका का दहन हो गया तब लोग समझ गए कि ये तो बड़ी खतरनाक बात है, बड़ी घवराने की बात है। क्योंकि लंका का दहन हो गया और हम लोग ग़र जल गए होते तो अब आग की विशेषता ये है कि ऊपर जाती है. नीचे नहीं आती है। सब लोग नीचे से ऊपर देख रहे थे कि जल रही है, जल रही है, जल रही है। पूरा लंका दहन हो गया लेकिन कोई जला नहीं। ये डराने के लिए, उनको समझाने के लिए कि रावण महापाप कर रहा है, उन्होंने ये काम किया कितनी समझदारी और कितना सन्तुलन बजरंग बली में था ये देखना है। यही हम देखते हैं। इतिहास में भी इतने लोग शक्तिशाली बहुत थे, उनमें अत्यन्त प्रेम था। गार आप देख लीजिए तो शिवाजी महाराज का एक उदाहरण है कि वे इतने शक्तिशाली थे और उतने ही तमीज़दार, बहुत कायदे के और वहुत ही ज्यादा संयमी आदमी थे। ये सन्तुलन जब आपमें आ गया तब आप सहजयोगीं हैं। गर आपके अन्दर शक्ति आ गईं, इसका सुरक्षा है इस तरह से बचत हो जाती है। अब इसमें भी बजरग बली का हैं। आपको पता नहीं कि वो हाथ बड़ा जबरदस्त आपके आगे पीछे खड़े स्वभाव बच्चों जैसा बहुत निर्मल और बहुत सरल लेकिन इतनी समझदारी और हर तरह की खूविाँ वो जानते हैं इसका मतलब है कि उतकी शक्ति के साथ उनके अन्दर निराक्षर विवेक बहुत है। बड़े बुद्धिमान थे। आजकल की बुद्धि तो बिल्कुल बेकार है । पर बो बुद्धि जो प्रेम से हरेक चीज़ को जाँचे और समझे उस बुद्धि के एक विशेष स्वरूप श्री गणेश थे और श्री हनुमान हैं। दोनों में विशेषता ऐसी है कि हनुमान जी बहुत बलिष्ठ, बहुत तेज ऐसे देवता हैं और श्री गणेश ठण्डे हैं। लेकिन दोनों जब वक्त पड़ता हैं तो बहुत बड़े संहारक। सहजयोगियों को संहार करने की जरूरत नहीं। किसी का संहार करने की जरुरत नहीं। हैं। है तो उनका हुए मतलब ये नहीं कि आप अपने प्रेम और व्यवहार किसी तरह से त्याग दें। किन्तु आप शक्तिशाली हैं उसकी शोभा ही ये है कि आप जो लोग दलित हैं, जो गरीब हैं, जो दुखी हैं, जो पीड़ित हैं, जिन बस, आप ये सोच लीजिए कि आपके साथ ये दोनों हर पल, हर क्षण हैं जब भी आपकी कोई 4

Original Transcript : Hindi परेशान करे, तंग करे तो साक्षात आपके संरक्षक आपके साथ खड़े हैं। बहुत सी बार आप सुनते चेतित कर लिया है। इस आपके नए परिवर्तन से होंगे कि ये मिनिस्टर लोग जाते हैं। कोई जाता है तो उनके साथ सिक्यूरिटी चलती है। सहजयोगियों हो गए। अब किसी की मजाल नहीं कि आपको की सिक्यूरिटी उनके साथ ही चलती है। और छ ले। ऐसे हजारों उदाहरण आपको मैं दे सकती दूसरों तरफ सिक्यूरिटी जो चलती है वो गणों की। हूँ कि जब आप सहज में पार हो गए, तो आपको अभी उनका तो कार्य वहुत ज्यादा है. विविध हैं. कोई भी नहीं छू सकता। पहले भी सन्त साधू तरह तरह के छोटे छोटे काम भी करते हैं । और सबको सताया गया, सबको छला गया, सब कुछ ये ही हैं श्री गणेश को वो गणपति हैं। उनको सब हुआ। पर जितना भी लोगों ने छला या सताया वो खबर देते हैं आपके बारे में, क्या हो रहा है? कहाँ डिगे नहीं। और इतना ही नहीं उनका हमेशा गड़बड हो रही है? कहाँ से आकरमण हो रहा है? कहाँ से आपकी तकलीफ हो रही है? आप जानते कि जिससे लोग वहुत नाराज हो जाएं। सोचते थे भी नहीं होंगे कोई अज्ञात रूप से भी कुछ आपके ऊपर में हमला करना चाहे। तो भी ये दोनो देवता राक्षसों के खिलाफ, सबके खिलाफ, वो ऐसी बातें आपके साथ खड़े हुए हैं। और जब गणपति ये कहते थे जिनसे लोग घवरा जाएं। पर हनुमान जी बात बता देते हैं तो श्री हनुमान उस पर जुट जाते की शक्ति से उनको कोई नहीं छू सका, उनको हैं। तो सहजयोगियों को डरते की कोई जरूरत ही नहीं है। किसी भी चीज से डरने की जरूरत नहीं के बारे में एक बड़ा अच्छा किस्सा है कि उनसे है। अभी एक किस्सा आपको सुनाऊं मैं, बड़ा उनके बादशाह ने कहा कि तुम आकर के मेरे आश्चर्य का है। आपने सुना होगा कि अमेरिका ने सामने झुको, घुटने साफ करो। उन्होंने कहा नहीं, हर जगह बहुत सारे बम गिराए ये सोच के कि मैं आपके सामने नहीं झुकने वाला। आप कौन इस जगह कुछ आक्रामक लागों ने कुछ व्यवस्था होते हैं? बहुत नाराज हुए। उसने कहा कि गर तीन की हुई है। तो ये किस्सा जो मैं आपको सुना रही दिन के अन्दर आपने मेरे सामने सिर नहीं झुकाया हूँ वो ये अफ़्रीका में एक जगह, जहाँ पर कुछ तो मैं आपकी गर्दन कटवा दूंगा। उन्होंने कहा सहजयोगी थे और बहाँ बम गिरा, वो वम गिरने से कटवा दो। नहीं झुकुंगा क्योंकि आप कोई चड़े वहाँ के जितने भी लोग थे, सब मर गए पर सहजयोगियों को कुछ भी नहीं हुआ। बो बड़े उन्होंने आकर के बड़ा ही हंगामा मचाया कि तीन हैरान, उनक ऊपर धुल भी नहीं आई। कभी वो दिन बाद जाकर के इस आदमी की गर्दन काटनी कबैला नहीं आए थे, कभी उन्होंने सोचा नहीं था है। जिस दिन उस गुरु की गर्दन काटने वाले थे, कि कबैला आएंगे पर जब ये हुआ तो कबैला उसी रात इसी बादशाह की गर्दन कट गई। कैसे आए और आके बताया, माँ पता नहीं किसने हमें पता नहीं? ग़र ऐसे इतिहास में न होता तो जो बचा लिया। किसने हमारी रक्षा की। लेकिन हम बड़े-बड़े साधु सन्त हो गए, जो वड़े-बड़े धर्मवीर सारे सहजयोगी बच गए बाकी सब लोग मर गए। हो गए वो खत्म हो जाते, क्योंकि राष्ट्र की प्रभूतियाँ कर लिया हैं । आपने सहज मार्ग से अपना आत्मा आप एक महान भक्त और शक्तिपूर्ण ऐसे इन्सान थे। संरक्षण हुआ। और ऐसी-ऐसी बातें वो कहते थे कोल कि ये क्या बातें कह रहे हैं। राजाओं के खिलाफ, किसी ने नहीं मारा। ख्वाज़ा निजामुद्दीन साहब मैं साधु-सन्त नहीं जो आपके सामने मैं झुकँ। तो इतनी ज्यादा बलवती हैं इतनी हिंसक हैं और इतनी व्यापक हैं कि वो इन लोगों को तो खत्म वाक्या है, सही बात है। और इसका कारण ये है कि आपने अव परमात्मा को स्वीकार्य अब ये 5

Original Transcript : Hindi कर ही देतीं। किन्तु उनके पीछे परमात्मा है और का नाम ले लो और ऐसी-ऐसी संस्थाएं बनाओ। परमात्मा जो है वो एक तरफ हनुमान और दूसरी कोई संस्था बनाने की जरूरत नहीं आप स्वयं ही तरफ गणेश, ये दो शक्तियां मिलकर के बना है। तो संरक्षण बो संभालते हैं। राणा प्रताप रचयिता हैं और न मेवाड़ के. वो जब लड़ाई में गए तो उनके सैनिकों ने सोचा कि भई ये तो हारने वाले हैं तो उनसे कहने लगे आप बापिस जाइए क्योंकि हम चाहते मंतलब है-अपने को जानना। अपने को जानना हैं आप बच जाएं, मेवाड़ू के लिए। उन्होंने कहा माने क्या? जानने का मतलब है कि ये जानिए कि नहीं तुम लोग सब बापिस जाओ। मैं तो ऐसे हो आपके आगे-पीछे कौन-कौन डटा रहूंगा क्योंकि गण मेरे साथ खड़े हुए सहजयोगी थे न वो भी आप को जाना है तो आप है और दुलार है और जो लोगों के प्रति जो हर लोग जाइए में तो ऐसे ही डट के खड़ा रहूगा क्योंकि गण मेरे साथ है। बस समझ लीजिए कि आपके आगे-पीछे हर तरह के संरक्षण है। पर इस एक संस्था हैं। न तो आपको कोई छू सकता है ए तो कोई आपको नष्ट कर सकता है एक अपने को समझने की बात है जो कि सब शास्त्रों में कहा है कि आत्मसाक्षात्कार का खड़ा है? कौन-कौन आपका रक्षक है? और जो आपको लोगों से प्यार हैं। समय ये सोचते हैं क्ि इनको मैं किस तरह से खुश करूंगा जैसे कि सारे संसार को मैं सुखी से भर दूंगा। ये जो भावना आपके अन्दर आती है उसमें सोचना चाहिए आपका कोई भी बिगाड़ने बाला नहीं बेठा हुआ। हिम्मत नहीं है। कोई भी बिगाडेगा और उसके लिए आपको कुछ करना नहीं है। उसके लिए आपको कोई तलवार रखने की जरूरत नहीं, गदा करूंगा, सबको में आनन्द संरक्षण के मिलते ही मनुष्य में क्या होना चाहिए? सहजयोगी में क्या होना चाहिए? वी धीर, गम्भीर और किसी से डरने वाला इन्सान नहीं होना चाहिए। बो किसी से भागता नहीं, जम जाता है उस जगह। और जो कुछ दुष्ट आदमी हैं उसके सामने डट हैं। उसको जाता कुछ करने की जरूरत नहीं। बो रखने की जरूरत नहीं है। वो तो सब है ही वो जमाना गया अव। अब तो आप सिर्फ खड़े हो पहले से ही बन बुन चके आए हुए हैं। और वो जाएं, वो दूसरा भाग जाएगा, उसको पता नहीं आपमें समाए हुए हैं। आपको जरूरत ही नहीं है चलेगा क्या हो रहा है? ऐसे अनेक-अनेक अनुभव कि आप अपने को बलिष्ठ बनाएं, आप हैं। एक सहजयोगी मुझे लिख कर भेजते हैं कि माँ ऐसा चाइनीस किस्सा है, बहुत मजेदार। कि उनके सहाँ हुआ वैसा हुआ, ये बात हुई। नहीं तो इस परदेसी मुरगों की लड़ाई होती है। तो अब मुर्गां की लड़ाई लोगों के सामने सहजयोग फैलाना कोई आसान चीज़ नहीं है। और मुसलमानों में भी जब अब सहजयोग फैलने लग गया तो इससे आप समझ सकते हैं कि दैवी शक्ति जो प्रेम की शक्ति है दुनिया से कैंसे लड़ना चाहिए। क्योंकि ये साधूु उसके अन्दर कितनी ताकत है और उससे कितने किसी से लड़ता नहीं पर उसको कोई छूता भी कार्य हो सकते हैं पर इसका मतलब नहीं कि नहीं। उससे लोग दूर ही भागते हैं और उसकी आप हनुमान जी के नाम पर कोई बड़ी उत्पीड़न तरफ नतमस्तक रहते हैं। तो ऐसी कौन सी इसमें तैयार करें। ये इनका बिल्कुल मतलब नहीं। जैसे बात है कि ये इस तरह से इस दुष्ट दुनिया में इस आजकल बने हुए हैं- हनुमान जी का नाम ले लो, गणेश जी का नाम ले लो और नहीं तो महादेव जी मु्गों को छोड़ जाओ। तो एक मुर्गा उसके पास । होती है तो उसमें ये हो गया कि किसी तरह से एक राजा को ऐसा लगा कि किसी साधू के पास ले जाएं। तो ये मुर्गे जो हैं साधू से सीख लें कि तरह से रह रहे हैं। तो साधू ने कहा कि अच्छा तुम

Original Transcript : Hindi गुस्सा आने का पर आया गुस्सा, लगे मारने-पीटने, इसको उसको हंगामा करने। ये कोई न हनुमान जी की शक्ति हैं? कोई गुस्सा करने की बात ही नहीं है। किसी से नाराज़ होने की बात ही नहीं है । है वो छोड़कर चले गए। एक महीने वाद वो मुर्गे को ले गए और उसको जहाँ लड़ाई हो रही थी, बहुत सारे मुर्गो जिसमें थे, ऐसे प्रांगण में ले जाकर छोड़ दिया। तो अब मुर्गे जो ये महाराज थे ये अपने खड़े रहे गए। अब सब मुर्ग आपस में लड रहे हैं. झगड़ रहे हैं, ये कर रहे हैं, वो कर रहे हैं। एक जरुरत ही नहीं गर आप हनुमान जी को मानते है तो। वो किसी पर गुस्सा नहीं करते। लेकिन इन्सान है हर बात पर गुस्सा आ सकता है। एक ये महाशय खड़े रहे। सब लोग इनसे डरने अहंकार चढ़ता है उसके अन्दर। हनुमान जी में लग गए कि इनको तो कुछ हो हो नहीं रहा है। ये जरा भी अहंकार नहीं था। Right Sided आदमी कोई विशेष हैं कि क्या? और आख़िर में वो ही में बहुत अहंकार होता है। मनुष्य में तो इतना एक मुर्गा वचा रहा जो अपनी शान में खड़ा हुआ अहंकार है अरे वाप रे! अरे वाप रे! मेरा तो जी घबराने लगता है। जब देखती हूँ उनको किस सो आज हम हनुमान जी की यहाँ पूजा चीज का अहंकार था। उस अहंकारिता का कोई कर रहे हैं । तो सोचना चाहिए कि हनुमान जी आर्थ ही नहीं है। फिर ‘हम’ माने क्या? कोई एक साक्षात् हमारे अन्दर बस गए हैं। वो हमारे right सर्वसाधारण मनुष्य भी अहंकार करता है और हैं बहुत से राजे-महाराजे भी अहंकार नहीं करते। और हमारे अन्दर जोश भरते हैं, और उससे इसका कारण है- उनके अंदर ही कोई ऐसी उष्णता भी आती है इन्सान में पर उनका मार्ग स्थिति बनी है कि वो हनुमान जी को नहीं मानते। ऐसा है कि आपके अन्दर उष्णता भी आए और जैसे ही आप हनुमान जी को मानते हैं-वैसे ही आप श्री राम जी को मानते हैं। अब बताइए कि आती है जो जोश आता है वो हमारे अन्दर right गुर आप ight sided आदमी नहीं हैं तो आपको side में काम करता है। और जब हम हनुमान जी तो अस्थमा होना नहीं चाहिए क्योंकि श्री राम का की सन्तुलन शक्ति को प्राप्त नहीं करते हैं तो वास हमारे सहजयाग के हिसाव से right heart हमारे यहाँ अनेक बीमारियाँ आ जाती हैं जैसे पर है। क्योंकि आप हनुमान जी को नहीं मानते हैं। लीवर की बीमारी है, अस्थमा की बीमारी है और उनके तरह का आपका व्यवहार नहीं है, सन्तुलन यहाँ तक Heart Attack कहना चाहिए आता है। नहीं हैं इसलिए आपको अस्थमा भी हो जाता है। हृदय में आपके शिवाजौ का स्थान है। वो भी. जी गर्मी को कंट्रोल करते हैं पर जब गर्मी कट्रोल वोही गड़बड़ हो जाता है और आपको Heari नहीं होती है तो ऐसी-ऐसी बीमारियाँ होती हैं कि attack आ सकता है या आपको और बीमारियाँ जिनका कोई इलाज नहीं। Blood Cancer हो हो सकती हैं। सहजयोग में आने पर आपको सकता है इससे और Intestind trouble हो सकता समझना चाहिए कि हनुमान जी का आपके सामने है। माने दुनिया भर की बीमारियाँ एक लौवर की एक आदर्श है, गणेश जी का है ही, वो तो अबोधिता थे। बिल्कुल अवतार जैसे छोटे बच्चे क्योंकि हम हनुमान जी की बात नहीं मानते। माने होते हैं। वैसे ही भोले भाले लेकिन बुद्धि के बहुत कभी ग़र हमें गुस्सा आए कोई जरूरत नहीं है चाणांक्ष और हनुमान जी के अन्दर एक सन्तुलन, बाद एक, एक बाद एक, सब निकल गए। बस था। side में हैं, माने पिंगला नाडी पर काम करते भक्ति भी साथ-साथ चले। सो जो वो उष्णता जब इनकी गर्मी नीचे की तरफ जाती है, हनुमान खराबी से होती हैं और लीवर की खराबी होती है 7

Original Transcript : Hindi एक प्यार भरा आनन्द और उसी के साथ-साथ है उनके साथ कि नहीं चाहिए, माँ हमको इनको शक्ति दर्शन। ये सब चीजों को समझते हुए ठीक करना ही नहीं, जाओ यहाँ से। जहाँ रहना है एक सहजयोगी का चरित्र या उसका जीवन जैसे रहना है। ऐसा होना चाहिए कि सन्तुलित। आपको जब गुस्सा भी आता है, तो आप चुप होकर दुश्मन है, वो हैं- शराबी। जो लोग शराब पौते हैं देखिए। मुझे मेरे ख्याल से, मुझे तो कभी गुस्सा उनका लंका दहन करते हैं । यानि आप देखते हैं नहीं आता या आता भी होगा तो मुझे तो पता नहीं जो आदमी शराब पीते हैं, न कोई उनसे बात और वगैर गुस्सा किए ही मामला ठीक हो जाता करेगा. न कुछ करेगा अच्छा वो दस शराबी इकट्ठे है। मैं कहँगी जरुर कि भई ये क्या कर रहे हो? करके और शराब पिलाएंगे। अब सब शराब पी बस ज्यादा नहीं, इससे आगे नहीं। और लोग तो रहे हैं न उनके घर में खाने को है, न पीने को है, गाली-गलोंच दुनिया भर की चीजें करते हैं। पर जब ये अति हो जाता है जब ये गुस्सा करने का मादा अति हो जाता है और आदमी वो तो बड़े इधर से मानो तो गुसैल बैठे हुए हैं, वो बहाँ बैठे हैं, गुस्से करके उनको और करो उसके उल्टा, तो वो हो नहीं बैठे हैं, जो गुस्सा कर रहे हैं। इस तरह से जब आदमी हो जाते हैं तो एक गम्भीर बात होती है एक बड़ी गम्भीर बीमारी उनको लगती है उनको है कि एक बड़े अफसर साहब थे एक वार उनके अल्जाइमर कहते हैं। अल्जाइमर की बीमारी, इस गुस्से से होती है। बो गुस्सा जो हम बेकार में कर और मियाँ-बौवी दोनों शराब पीते थे और बड़ी रहे हैं। अब समझ लीजिए, आपके लड़के को जाओ। तो मैंने कहा अच्छा ठहर जाएंगे। तो पूरे किसी ने थप्पड़ मार दिया। हो गए आप गुस्से; बर में एक कम्बल, मेंने कहा, हे भगवान! इतने गुस्सा होने से क्या बात होती है? उल्टे सोचना बड़े अफसर के घर में एक कम्बल। मैंने कहा, चाहिए कि हमारे लड़के की कोई गलती हैं या हम जबरदस्ती अपने घ्यार में उस लड़के को लोग परेशान हो कि एक कम्बल में इनको कहाँ खराब कर रहे हैं। इस तरह का तन्तुलन जीवन सुलाएं। मैंने कहा मेरी चिन्ता मत करो, मैं ठीक में नहीं आएगा. तो ये अल्ज़ाइमर की बीमारी बहुत ही खराब होती है। इसमें आदमी पगला सा लड़की खराब गई लेकिन मानने को तैयार नहीं जाता है। मरता नहीं है और किसी को मरने भी मेरी लड़की खराब गई। बस जैसे ही शराब पी नहीं देता। गालियाँ देता है, चीखते रहता है, उसका लेंगे तो इलाज है सहजयोग में पर बड़ा कठिन है क्योंकि लड़की सबसे अच्छी हैं. आप कुछ मत कहिए । वो तो गालियां देते बैठते है। उसको करने जाएगा, उसको ही गालियां देंगे तो कौन, गुर गई शराब चढ़ गई तो होश ही नहीं उनको। उसका कोई डॉक्टर हो तो उसको कोई गाली दे तो कहेगा बिल्कुल सत्यानाश हो गया उस लड़की का। जा चूल्हे में और मुझे क्या करने का है। यही होता अब दूसरे हनुमान जी के जो बड़े भारी जैसे । न ही कुछ, बस शराब पी रहे हैं पागल जो लोग हनुमान जी को मानते है। वो शराब नहीं पी सकते, नहीं पी सकते। बयोकि सकता। और आजकल में देखती है कि शराब , पीना बहुत बढ़ गया है। और मुझे आश्चर्य होता घर मैं गई क्योंकि हमारे पति के वो दोस्त भी थे। सवन ठण्डे थी। तो मुझे कहने लगे आज रात यहीं ठहर मेरे को तो कोई बात नहीं मैं तो सो लुंगी। अब वो कर लूगी। इतना उनका हाल खराब। उनकी ये कहना शुरु करेंगे कि साहब मेरी जो ठीक वो लड़की का सत्यानाश हो गया है क्योंकि चढ़ अन्त में अभी आई थी मेरे पास रोते हुए। वहुत ০

Original Transcript : Hindi शराबी लिखने वाले और शराबी ही कहने वाले। उनके शरावियों के लेक्चरों से न जाने कितने लोग उसका सर्वनाश कर दिया। तो ये बात है कि. शराब का एक नशा, और नशे को भी बढ़ा देता है। और उसमें सबसे बड़ा नशा ये हो जाता है कि बेवकूफ बनते हैं। पर किसी शराबी का मैंने किसी भी देश में पुतला खड़ा हुआ नहीं देखा! सा ये सब लोग श्री हनुमान के बिरोध में नहीं हैं पर उनको atack करते हैं, उनको आक्रमण करते हैं। फिर वो भी दिखा देते हैं ऐसी गर्मी अन्दर कर देते हैं। पेट में कि फिर कैंसर, फलाना-ढिकाना। सब बीमारियाँ जब पियो और पियो पियो। ये शराब पीने पिलाने की जो ये रस्म चल पड़ी है इसका मुझे तो डर लगता है कि ये हनुमान जी को संभाले रहो, न जाने क्या कर दें? कहाँ से क्या प्रेम नहीं रह जाता है. तो किसी से प्यार मनुष्य का नहीं करता। इसीलिए सबने, सारे धर्मों ने शराब को मना किया है। लेकिन अब इसाई धर्म जैसे हैं सब लोग उसमें तो कुछ न कुछ हिसाब किताब बना लेते हैं। हिन्दू धर्म में भी है, इसाईयों में भी मुसलमानों में तो उन्होंने कहा कि जब ईसा मसीह किसी शादी में गए थे तो उस शादी में शराब बनाई गई थी, बिल्कुल झुूठ, इसलिए हम लोग शराब पीते हैं। माने इ्लैण्ड में तो मैं हैरान हो हो आफत कर दे? इनका क्या ठिकाना सारे शराबियों शराब पीएंगे, कोई पैदा हुआ तो भी शराब पीएंगे। को एक दिन पकड़ के समुन्दर में न डाल दें। तो चो जो आदत हो गई उन लोगों को, और शराब मुझे तो ये ही डर लगता है इनसे। क्योंकि इनमें तो वहाँ बिल्कुल बड़ा भारी, एक संस्कृति सी दया है, भक्ति है, सब है पर जो इनके विरोध में वनी हुई हैं शराब की। किताबें लिखी हुई हैं। कौन खड़े है उनकी नहीं। जैसे श्री गणेश. दुष्चरत्र सी शराब, कब पीना चाहिए. ऐसा नहीं वैसा नहीं. आदमी गुर कोई हो कोई अगर बुरे वर्तन का कैसा गिलास इस्तेमाल करना चाहिए। अभी इन आदमी हो तो उसके विरोध मूलाधार चक्र पर जिसका चरित्र ठीक तहीं। पर इनकी हूँ ये आधे इन्सान हैं आधे विल्कुल पगले हैं । बात और है ये जब किसी आदमी को देखते हैं पागल हैं पर बो वहाँ संस्कृति बन गई। सबसे कि वो अपनी चेतना से ही खेल रहा है। शराब ज्यादा तो फ्रांस की तो संस्कृति बन गई। उनसे पीने से चेतना ही नष्ट होती है। तो फिर उसके कलह होगा, झगड़े हांगे, शराब की बात करते हैं तो ईसा-मसीह जब वहाँ मारा-मारी होगी। अब देखिए कि रस्ते पर मारा-मारी गए तो उस वक्त में वो जगह, हिब्रू में मेने पढ़ा हो रही हैं, गर आप रास्ता रोकने जाएं तो दो हुआ है कि जो है द्राक्ष का रस पीते थे। माने अंगूर शराबी आपस में मार रहे हैं। फिर उसकी हवा का रस पीते थे तो उन्होंने पानी में हाथ डाल के और फैलती है। तो किसी शराबी के घर किसी उसमें अंगूर का रस बना दिया पानी का। शराब सहजयोगियों को जाना नहीं चाहिए क्योंकि वो अपवित्र जगह है और न ही किसी भी शराबी के साथ कोई सम्बन्ध रखना चाहिए। सहजयोगियों के आप शराब को खूब सड़ाइए नहीं और जितनी लिए भी बड़ा घातक है क्योंकि इधर तो आप सड़ेगी उतनी महंगी। पचास साल सड़ी हुई हो तो हनुमानजी को मानते हैं और उधर आप शराबियों और भी अच्छी और सौ साल हो तो बस दुर्लभ! के यहाँ जाते हैं। खास कर पुना में, न जाने कितने मारुति कोई दुल्या गई। कोई मरा तो शराव, कोई मर गया तो भी पड़ता है, शराबी लोगों का जो हाल मैंने देखा वो मैं सांचती जाते हैं । घर में अपने को सीखने का कुछ नहीं। अब वो जो पीछे पड़ कभी सड़ाए गलाए बगैर बनती है क्या? दो मिनट में सहज में शराव बन सकती है क्या? जब तक MA की ideas वना ली शरावियों ने और तरह के हनुमान जी यहाँ हैं- ये शराब

Original Transcript : Hindi मारुति तो कोई वो मारुति, तो कोई वो मारुति। तो पुणे वालों के लिए तो बहुत बचकर रहना चाहिए। सब पार्टी हो रही और ये होगा और सब पागल लोग वहाँ। फिर शादियों में बारातियों में सब में वो एक बार आए थे हनमान जी बाले मेरे पास, के माँ एक लैक्चर दो। मैंने कहा, मैं नहीं आऊगी । कहने लगे क्यों? मैंने कहा आप शराब पीकर के वहाँ गन्दे-गन्दे सिनेमा के गाने गाते हो और आपको मालमू है, ये मारुति क्या है? ऐसे गले घोटेंगे सबके, फिर पता चल जाएगा। तो उस गणपति के यहाँ आजकल मैंने सुना है कि शराब वराब पीने नहीं देते। कोई शराबी पीकर आता है तो उसको भगा देते हैं। आप सोचो कि हिम्मत देखिए कि हनुमान जी के सामने ही जाकर के और ये धंधे करना हनुमान जी के सामने! क्या हिम्मत है! और ये सब कुछ करने से लोग सोचते है कि पैसा आता है। इसका जो धंधा करते हैं और जो पीते हैं, इसकी जो ग्राहक हैं, सब इसी तरह से बिल्कुल चलता है। अब जो इन्सान कार्य करता है बहुत आगें की सोचता है और चहुत विचारक है., सब है, पर । प्रेम नहीं है। सवके प्रति प्रेम की भावना नहीं है उसको भी इसकी तकलीफ होती है। क्योंकि राम की भक्ति करने वाले इस हनुमान जी का कोई ठिकाना नहीं है। गुर आप बड़े कार्यकर्त्ता है, बहुत ं बढ़िया आदमी हैं, सब कुछ है लेकिन आपको चलने नहीं वाला। सबके है। सबके प्रति प्रेम नहीं प्रति प्रेम रखना और इसलिए ईसा मसीह ने कहा है कि सबको माफ करिए। आप कौन होते हैं माफ न करने वाले? जहाँ गर्मी हुई लोगों की खोपड़ी खराब हो जाती है और प्यार का मजा टूट जाता है। ऐसे हनुमान भक्त श्री बजरंग बली को बेकार Bankcrupt, एक पैसा नहीं। अब लोग सबको नमस्कार करना चाहिए और समझना चाहिए कहेंगे कि शराब में ऐसा क्या हैं, क्योंकि ये हमारे अन्दर जो भी सहजयोग से शक्तियाँ आई हैं उसको सन्तुलन में रखें। प्यार ऐसी चीज है कि आप बड़े-बड़े लोगों को प्यार के बन्धन में जी का मामला है भई, इसका क्या कारण हुनुमान दें। हनुमान जी के विरोध में तुम जा रहे हो। उनकी शक्ति आपके अन्दर Righ Side से बहती लो। हम तो यही करते रहते हैं क्योंकि है। उसको इस्तैमाल करो सन्तुलन के साथ बजाय इसके आप शराब पीते हो, अपना लीबर खराब करो, फिर ये खराब करो, फिर वो खराब करो तो ठिकाने आ जाएं। एक बार हम गए थे कही, तो वो तो उखड़ेंगे ही माने सूक्ष्म में यह हनुमान जी वहाँ एक साधू बावा बड़े मशहूर लेकिन गुस्से के का काम है, वाह्य ताल्लुक नहीं समझते। बाह्ययता तेज, ये लोग सब गुस्से के तेज बहुत होते हैं तो ये हालत है कि कहीं गर शराब के विरोध में कुछ कहो तो, तो लोग मारने को दौड़ेंगे आपको गर्दन कर रहे थे क्योंकि उनको ये अहंकार था कि अगर आप नहीं पीते तो कहेंगे क्या बेवकूफ हो? वो बरसात को रोक सकते हैं। और मैं जो ऊपर आप शराब न पीते हो। अरे, बाबा उसके पीछे में गई चढ़ते-चढ़ते ऊपर पहुँची तों विल्कुल भीग इतने बड़े हनुमान जी खड़े हुए हैं एक बार भी गई बरसात में। अब ये बहुत गुस्से होकर बैठे थे। इसका प्रहार किया तो गए आप जिन्दगी से गए तो मैं जाकर उनकी गुफा में बैठी तो वो आकर मेरे ख्याल से पहले ही प्रहार करते नहीं तो लोग बैठ गए। बहुत गुस्से हुए तो मैंने कहा ऐसा क्या ऐसे पागल जैसे कैसे बातें करते। वोही वोही बात हो गया, भीग गए तो क्या हो गया। नहीं कहने लगे करेंगे, वोही वोही वात एकदम और सब पागल। फसा अजीब-अजीब लोगों से पाला पड़ता है। अब उनपर ऐसे प्यार का चक्कर चलाओ की वो हम चढ़के ऊपर गए तो वो गुस्से में यूं, यूं, यूं, यू. आपने मेरा अहंकार निकालने के लिए ही बरसतें 10

Original Transcript : Hindi पानी को रोका नहीं, क्योंकि मैं तो रोक सकता हूँ। है। हाँ हाँ हाँ हाँ सब हुआ। जैसे ही गया- ये ऐसा खराब आदमी है। फिर दूसरा आया वो बैठा खास कर औरतों में बहुत होता है। ये तो आके बैठा हाँ हाँ बड़े अच्छे है, वड़े अच्छे है, हाँ जाओ जाओ। हाँ ये ऐसा आदमी है। अरे भई, ऐसे उँपरी प्यार से तो नहीं हो सकता न। गुर तुम इस तरह ऊपरी प्यार किसी से करोगे तो वो क्या समझता नहीं है क्या? प्यार अन्दर से करने की शक्ति आपको प्राप्त है क्योंकि आप सहजयोगी हैं। और मेरे ये अहंकार हो गया था। ऐसी कोई बात नहीं। मैंने कहा देखों तुम सन्यासी हो और तुमने मरे लिए एक साड़ी खरीदी हैं। मैं सन्यासी से तो कुछ ले नहीं सकती, ले नहीं सकती और तुम मुझे कुछ दे नहीं सकते। तब मैने सोचा, कि भीग जाओ तो लेना ही पड़ेगा। उस चीज़ से उनके आँख से आँसू बहने लग गए। मेरे पैर पर गिर पड़े। मैंने कहा मुझको क्या करना था मुझको तो सिर्फ थोड़ा सा भीगना ही था। नहीं तो मैं भी नहीं लेने बाली थी। पर मैने कहा, थोड़ा भीग जाओ तो फिर लेना पड़ेगा-साड़ी। तो कहने लगे कि अच्छा मैंने कहा कि तुमने मेरे लिए भगुवे रंग की साड़ी ली हैं और नौवार। ये अच्छा किया क्योंकि इसमें तो पेटीकोट भी भीग गया तो नौवार मैं पहन ेा अरं से जब बे चीज़ को आप आत्मसात करोगे। अपने पेड खिलेगा तो आप दूसरों आप, जब प्यार का को आनन्द दोगें और उसकी आएगी। प्यार के सागर के सिवाए और कोई चीज आपको अच्छी नहीं लगेगी। इसलिए बजरंग वेली से जो चीज़ सीखने की है वो है, उनकी भक्ति और वो शक्ति जो उन्होंने आपको दी है कि आपको कोई हाथ नहीं लगा सकता गर आपकी भक्ति सच्ची है। कोई हाथ नहीं लगा सकता। ऐसे हजारों उदाहरण सहजयोग में है। चमत्कार उसको लोग कहते हैं। मैं कहती हूँ, नहीं ये तो श्री हनुमानजी की कृपा है। तो आप सबको अब मैं अनन्त आश्शीवाद और प्यार कहती हूँ। पहले अपने को भी प्यार करो, दुसरों को भी प्यार करो। इसका मतलब नहीं मेरा बेटा, मेरी ये, नहीं नहीं। इसका मतलब है निर्वाज्य प्यार। प्यार जिसका कोई बदला नहीं, जिसका कोई रिश्ता नहीं। जो अगाध है। ऐसी प्यार की शक्ति आपके अन्दर आई हैं, उसको आप इस्तेमाल करें। अनन्त आश्शीवाद। खुशबू आपको भी सकती हूँ। बहुत एकदम उनकी तबियत खुश हो गई। तो ये प्यार ऐसी चीज़ है कि वड़े-बड़े गुस्से वालों को जमीन पर उतार लाती है और पहले के अनेक ऐसे उदाहरण हैं। बो जो बताने बैठ् तो रात पूरी ऐसे बीत जाएगी। पर अब भी हर दिन हो रहा है। प्यार से बात करो। उसमें क्या जाता है। गर आप प्यार करोगे तो दूसरों के सद्गुण आपके अन्दर आएंगे और गर आप किसी से नफरत करोगे उसी से उसके जो दुर्गुण है वो आपके अन्दर आ जाएंगे। लेन देन का मामला हैं। आपने किसी से ये ऐसा वो ऐसा जो देखो कोई ठीक नहीं ऐसे बहुतो के यहाँ रिवाज है, संस्कृति है कि कोई घर में आया, वैठा खाओ पीयो, ठीक 11