8th Day of Navaratri, The Powers of Shri Mahakali

Campus, Cabella Ligure (Italy)

Feedback
Share

                                                नवरात्रि पूजा

 कबेला लिगरे (इटली), 17 अक्टूबर 1999

आज रात हम यहां देवी की पूजा करने के लिए एकत्र हुए हैं, जिन्हें की हम महाकाली कह सकते हैं – या दुर्गा। उन्होने कई प्रकार के रूप धारण किए हैं, उन नकारात्मक शक्तियों को मारने के लिए जो परेशान करने या बाधित करने की कोशिश कर रही हैं, या यहां तक ​​कि उन लोगों को विकसित करने के लिए जो सभ्य और अच्छे थे।

उसके रूप विभिन्न प्रकार के हैं – जिसके बारे में हम जानते हैं कि, उन्होने कितने राक्षसों को नष्ट किया, उन्होने कितने दुष्टों को नष्ट किया। साथ ही हमें यह भी जानकारी नहीं हैं कि जो हमारे विश्व युद्ध हुए थे, वह सही प्रकार के लोगों की रक्षा के लिए वहां मौजूद थीं। और इस तरह वे सभी बहुत ही क्रूर और दुष्ट लोगों की खून खराबे की योजना, दुष्प्रयोजन से बच गए।

दुष्ट लोगों में हर संभव तरीके से घृणा करने और अपनी घृणा व्यक्त करने की क्षमता होती है। वे वास्तव में पैदाइशी दुष्ट हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो ‘बुराई’ बन जाते हैं। जब वे दुष्ट पैदा होते हैं, तो आप उन्हें इस तरह पहचान सकते हैं: कि उनकी पूरी शैली अति आक्रामक और चीजों के प्रति इतनी प्रतिशोधी है। लेकिन नफरत की कोई सीमा नहीं है, बिल्कुल कोई सीमा नहीं है। क्योंकि, अगर वे नफरत करते हैं, अगर वे किसी से नफरत करते हैं, तो – बस उस नफरत को सही ठहराने के लिए – वे हर तरह की बातें कहेंगे। सिर्फ जायज ठहराने के लिए। लेकिन कभी-कभी वे औचित्य भी स्थापित करना  नहीं चाहते। उन्हें बस लगता है कि वे ‘नफरत’ करते हैं और नफरत करना उनका मौलिक अधिकार है।

लेकिन ये ताकतें कभी-कभी आपस में मिलकर बुराई के एक संयुक्त व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं, जो मनुष्यों को प्रताड़ित करने और उन्हें परेशान करने की कोशिश करती है। वे कोई भी नाम ले सकते हैं। वे उन्हें किसी भी नाम से पुकार सकते हैं, लेकिन वे पूरी तरह से शत-प्रतिशत दुष्ट हैं और ऐसे व्यक्तियों के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर से कोई दया या करुणा नहीं है। इन्हें नष्ट किया जाना है। और वह देवी का काम है – उन्हें नष्ट करना – जो, करुणा और प्रेम से भरी हुई एक माँ है।

यह एक बहुत ही विरोधाभासी काम है जो देवी को करना पड़ता है – इन लोगों को मारना – क्योंकि, व्यापक हित में, यह महत्वपूर्ण है कि ऐसे सभी बुरे लोगों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाए। लेकिन वे नहीं हो पाते हैं। वे…  कुछ समय के लिए जैसे वे जेल जाते हैं। ऐसे ही वे कुछ समय के लिए नर्क में जाते हैं, कष्ट सहते हैं और फिर और अधिक बलवान होकर वापस आते हैं और फिर अच्छे संत लोगों को परेशान करने का प्रयास करते हैं। यह एक आम शैली है जो वे पूरी दुनिया में हैं।

वे एक बहुत अच्छे व्यक्ति के रूप में पेश हो सकते हैं, एक बहुत ही सज्जन व्यक्ति के रूप में या एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो “ईश्वर के बारे में बहुत कुछ जानता है” या वे ऐसा भी कह सकते हैं कि वे “आपको साक्षात्कार दे सकते हैं”। वे हर तरह के झूठ के लिए सक्षम हैं, क्योंकि उनके पास वह शक्ति है – बुराई – दुष्टता करने की शक्ति। इसलिए वे हर तरह के झूठ को अपनाते हैं और वे घोषणा करते हैं कि: “हम यह हैं और हम वह हैं” और “हम आपको यह या वह दे सकते हैं।”

दरअसल, वे इस धरती पर लोगों को बर्बाद करने आए हैं। हमारे पास ऐसे बहुत से झूठे लोग हैं और बहुत से मूर्ख लोग उनका अनुसरण करते हैं। उन्होंने कभी एक-दूसरे के खिलाफ बात नहीं की। ईसा-मसीह ने कहा है कि: “शैतान अपने घर के विरुद्ध बात नहीं करेगा।” मानो वे ‘एक’ के घर में हों। और ‘एक’ घर में वे रहते हैं और वे ऐसी कोई बात नहीं कर सकते, वे ऐसी कोई बात नहीं कर सकते जो उनकी सामूहिकता या उनकी बिरादरी को परेशान कर सके। उनकी बिरादरी की भावना इतनी महान है कि वे जहां कहीं भी हैं, वे ‘जानते’ हैं कि वे एक साथ हैं। जरा सोचिए: सभी दुष्ट लोगों को एक जुट हो जाना तथा इस तरह से व्यवहार करना बहुत आश्चर्यजनक है। इस तरह, वे बहुत सामूहिक हैं।

मान लीजिए किसी ने जमीन का एक खास हिस्सा ले लिया है, तो फिर वह वहां पर हावी हो जाता है। दूसरा दूसरे तरीके से लेता है। तीसरा लेता है। वास्तव में उनके बीच ऐसी कोई प्रतियोगिता नहीं है। अंतिम प्रयास, किसी न किसी रूप में, ईश्वर की सम्पूर्ण सृष्टि, दुनिया के सभी अच्छे लोग जिन्हें अंततः आत्म-साक्षात्कार मिलेगा और जिन्हें वास्तविकता के बारे में ज्ञान होगा, को नष्ट करने का है।

इस तरह का माहौल कलियुग के दौरान सबसे खराब होता है और बहुत सारे मूर्ख, मूर्ख लोग हैं, जो सरल हो सकते हैं, भले ही अच्छे स्वभाव के हों, लेकिन वे इन लोगों के बुरे कामों से आकर्षित हो जाते हैं, जबकि अच्छे लोग भी कभी-कभी उनके अनुगामी हो जाते हैं। वे उनका अनुसरण करने का भी प्रयास करते हैं। यह बहुत आश्चर्य की बात है। अच्छे लोगों को यह क्यों नहीं समझना चाहिए कि क्या अच्छा है और क्या बुरा? लेकिन, कई अच्छे लोगों में भी उस अच्छे बुरे के विवेक का अभाव होता है और इसलिए वे गलत चीजों को अपना लेते हैं। और फिर वे हर समय सही ठहराते रहते हैं कि: वे जो कुछ भी कर रहे हैं वह सही है, सबसे अच्छी बात है, उनके पास इसका प्रमाण है, ऐसा सब वे कहते हैं।

अब, जैसा कि आप जानते हैं, कलियुग में उनमें से कई हो चुके हैं और उनमें से कई अब इस पृथ्वी से गायब हो चुके हैं और अब वे हमें परेशान नहीं कर सकते। लेकिन अभी कुछ और भी हैं, जो बेनकाब हो गए हैं। लोगों ने उन्हें इतना बेनकाब कर दिया है कि कोई भी बिना सबूत के किसी को बेनकाब नहीं कर सकता। लेकिन उनमें इतनी हिम्मत है और वे इतने आत्मविश्वास से भरे हुए हैं कि वे जो चाहें कर सकते हैं, और जो कोई भी उन्हें बेनकाब करने की कोशिश करता है, वह निश्चित रूप से उस व्यक्ति को बर्बाद करने का प्रयास करेंगे।

कुछ चीजें जो वे कर रहे हैं… सबसे पहले, वे आपके दिमाग में गलत विचार डालते हैं। वे कहते हैं: “हम बहुत ऊँचे लोग हैं, हम यह हैं, हम वह हैं। भगवान ने हमें भेजा है।” तरह-तरह की बातें करेंगे। लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं है। और मनुष्य कभी भी इस बात का प्रमाण नहीं मांगते कि: “आप ऐसा कैसे कहते हैं? इसका क्या सबूत है?”

तो समाधान सहज योग में है। सहज योग में, आपको अनुभव प्राप्त होता है। आपके पास सबूत है। फिर आप उसमें विकसित होते हैं। आप एकदम से एक महान सहजयोगी नहीं हो सकते, यह एक सच्चाई है। आपको परिपक्व होना है। कुछ लोगों को इसमें थोड़ा समय लगता है। अन्य लोगों के लिए इसमें कुछ और समय लगता है। कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन तुम परिपक्व बनो।

इस बीच, यदि आप इन गलत लोगों के पास जाने की कोशिश करते हैं, तो कोई संभावना नहीं है, आपको फिर से ऊपर लाने का कोई तरीका नहीं है। विशेष रूप से वे लोग जो सहज योग में ऊँचे उठते हैं, मुझे लगता है। गिरते हैं तो बहुत नीचे गिरते हैं। तब एक साधारण सहज योगी भी कह सकता था: “माँ, उसे देखो! वह कहां गया है?”

तो इन सब घटनाओं, बातों के होते हुए हमारा काम क्या है अपने भीतर महाकाली की पूजा करना। क्योंकि, जो वह करती है? शायद हम उसके प्रति बहुत जागरूक नहीं हैं।

सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात कि, वह हमारी रक्षा करती है। आप कहीं भी हों, आप जो कुछ भी कर रहे हों, चाहे आप किसी भी संकट में हों, आपको जीवन में कितने भी खतरनाक तरीके से रखा जाए, वह आपकी रक्षा करती है। पहली बात, वह आपकी रक्षा करती है।

सभी लोग जो मुझे लिखते हैं, उनकी रक्षा कैसे की गई, वे कैसे ठीक हुए, कैसे उनकी मदद की गई। यह बात है कि उन्हें पता होना चाहिए कि यह सब आपके भीतर महाकाली शक्ति के कारण हुआ है। ‘वह तुम्हारे भीतर मौजूद है।’ जब आप महाकाली की पूजा कर रहे हैं, तो आप ‘अपने भीतर’ महाकाली की पूजा कर रहे हैं।

सम्मान सहित, आप को जानना चाहिए कि यह महाकाली अत्यंत संवेदनशील व्यक्तित्व हैं। वह बहुत संवेदनशील है। यदि आप किसी के साथ कुछ गलत करने की कोशिश करते हैं, तो वह आपका मार्गदर्शन करेगी। वह आपको कई तरीकों से बताएगी कि: “आप जो कर रहे हैं वह गलत है। आप किसी व्यक्ति के साथ गलत क्यों कर रहे हैं?” लेकिन अगर आप पश्चाताप नहीं करते हैं और फिर से उसी अवस्था में वापस आ जाते हैं, तो वह आपका त्याग कर देती है। एक बार जब महाकाली ने आपको छोड़ दिया, तो अब आप बेनकाब हो गए हैं और हर तरह की बुरी चीजों के शिकार हो जाते हैं। मैं कहूँगी…

[एक बच्चा रोने लगता है: “बच्चे के साथ क्या बात है?”]

तो, जब आप उनकी पूजा करते हैं, तो आप क्या चाहते हैं? आप चाहते हैं कि वह आपकी रक्षा करे। आपके सही-गलत के भेद में, आपकी गलती में, आप कुछ गलत कर सकते हैं। कुछ ऐसा कर सकते हैं जो आपके लिए ठीक नहीं है, आपके लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। लेकिन वे वह शख्सियत है जो मार्गदर्शन करती है कि सभी खतरों से कैसे बचा जाए। अब, वह आपके जीवन की रक्षा करती है, वह आपके शरीर की रक्षा करती है, वह आपके शरीर के सभी अंगों की रक्षा करती है, वे वही है जो आपको जीवन की सुरक्षा प्रदान करती है।

उसके दायरे में, आप पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करते हैं। आप कभी किसी चीज से नहीं डरते। चूँकि तुमने उसका दायरा छोड़ दिया है, तुम उससे बाहर आ गए हो, इसीलिए – यही कारण है कि,  तुम डरते हो। लेकिन अगर आप उनके सुंदर मार्गदर्शन और उनके आशीर्वाद के अधीन हैं, तो आपको कभी भी कुछ भी करने में डर नहीं लगेगा। आप भी कभी कुछ गलत नहीं करेंगे। जैसे ही आप गलत करने की कोशिश करेंगे, वह आपका हाथ पकड़ लेगी। वह वास्तव में मार्गदर्शक व्यक्ति हैं। वे वही है जो वास्तव में हमें हमारा अस्तित्व देती है। उनके बिना, हमारा अस्तित्व नहीं हो सकता, क्योंकि वह वही है जो श्री शिव की शक्ति है।

वह हमें बहुत कुछ देती है। उदाहरण के लिए, वह हमें विश्राम, नींद देती है। वह तुम्हें सत्य देती है। वह आपको बताती है कि सत्य क्या है और क्या नहीं। कभी-कभी लोग अपने अत्यधिक अहंकार में इतना भरोसा करने की कोशिश करते हैं कि: “जो मुझे लगता है वही सच है।” फिर वही एक ‘माया’, एक तरह का भ्रम पैदा करके इस तरफ इशारा करती है, कि आप सोचने लगते हैं: “यह क्या है?” तो उन के बारे ऐसा भी कहा जाता है कि वो हमें ‘भ्रांति’ देती है, जिसका अर्थ है भ्रम। वह आपको भ्रम में भी डालती है। वह आपको बताती है – आपको भ्रम में डालती है और अंततः वही आपको भ्रम से बाहर निकालती है।

वे वही है जो आपको आराम देती है, क्योंकि वह आपकी सभी जिम्मेदारियों को संभाल लेती है। वह आपकी सभी समस्याओं को संभालती है।वे वही है जो सभी समस्याओं का समाधान करती है। ये तो हम ही हैं जो सारी समस्याओं को उन पर छोड़ना भूल जाते हैं। यदि आप केवल समस्याओं को उन पर छोड़ दें, तो आपकी सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है। इतना ही नहीं, आप वास्तव में आशिर्वादित महसूस करते हैं। यह केवल शारीरिक ही नहीं – मानसिक भी है – कि वह आपके मन को बिल्कुल चिंताओं से मुक्त करती है।

‘वह’ चिंता नहीं करती और वह नहीं चाहती कि ‘आप’ चिंता करें। यदि आप चिंता करते हैं, तो वह यह दिखाने की कोशिश करती है कि, अपनी चिंता के माध्यम से, आप उसे अस्वीकार कर रहे हैं। आप उन्हें अस्वीकार कर रहे हैं। चिंता करना बहुत ही सामान्य बात है और लोग यह कहने में बहुत गर्व महसूस करते हैं: “ओह, मैं चिंतित था।” जब आपकी माता “साक्षात महाकाली” हैं तो आप कैसे चिंतित हो सकते हैं?

वह सभी राक्षसों को मार सकती है। वह उन सभी को खत्म कर सकती है। वह जानती है कि कैसे चीजों को व्यवस्थित करना है। और जब तुम उसके सामने एक बच्चे की तरह हो, तो तुम किसी भी बात की चिंता कैसे कर सकते हो? तो आपकी चिंता समाप्त हो जाती है। वह आपकी परवाह करती है, आपको अपनी चिंता नहीं करनी चाहिए। यही इसका सार है।

उनके द्वारा प्रदत्त सुरक्षा इतनी महान है, वह स्वयं इतनी संरक्षित है कि वह आपको ऐसी सारी सुरक्षा देती है जिसकी आपको आवश्यकता है। आप उनके चरणों को थाम सकते हैं। आप उसकी छवि या किसी भी चीज़ को थाम सकते हैं। आप उनसे प्रार्थना भी कर सकते हैं। बहुत से लोग उनसे प्रार्थना करके ही ठीक हो रहे हैं। क्योंकि वह तुम्हारा इलाज करती है। वह आपकी बीमारियों को ठीक कर सकती है – जो कि बहुत जटिल रोग हैं – उन्हें वे ठीक कर सकती है।

अब उन्हें क्या पसंद है? महाकाली को प्रकाश पसंद है। रात में उनकी पूजा की जाती है, क्योंकि तब हम प्रकाश कर सकते हैं। उसे प्रबुद्ध व्यक्ति पसंद हैं। साथ ही उसे रोशनी पसंद है। उसे सूरज पसंद है। वह कुछ भी ऐसा पसंद करती है जो पूरी तरह से प्रबुद्ध और उज्ज्वल हो।

आपने उन लोगों के बारे में सुना होगा जिनका नामकरण है… मुझे नहीं पता क्या… लेकिन विशेष रूप से पश्चिम में वे उनका उपयोग करते हैं। उनके बड़े दांत हैं और वे… [दर्शकों में से कोई चिल्लाता है: “पिशाच”] हा! और वे लोग हैं, वे जरा कल्पना करें- वे सूर्य के सामने पेश नहीं हो सकते। जैसे ही सूर्योदय होता है, वे बस जा कर और सोना चाहते हैं। हाँ, वे सूर्य को नहीं देख सकते, क्योंकि वे प्रकाश को सहन नहीं कर सकते। अब यहाँ ऐसा हुआ है कि महाकाली उनसे विदा हो गई। और जब महाकाली विदा हो जाती हैं, तब वे डरे हुए रहते हैं। और ऐसे लोगों पर जिनके बारे में पता होता है की वे डरे हुए हैं, इन लोगों द्वारा हमला किया जाता है।

इस महाकाली शक्ति को क्रियान्वित करने के लिए स्वयं सूर्य का बहुत महत्व है। लेकिन, जैसा कि है, विशेष रूप से पश्चिम में, हम बहुत मेहनती और बहुत अधिक सूर्य-उन्मुख हैं और हम सूर्य की पूजा करते हैं। यह सब हम करते हैं: सूर्य की पूजा करते हैं और अत्यधिक दाहिनी ओर भी जाते हैं। फिर वही है जो हमें संतुलन देती है। वही है जो हमें पूरी तरह से आराम देकर और हमारी रक्षा करके हमें संतुलन देती है।

कभी-कभी हम प्रतिस्पर्धी होते हैं और हम वास्तव में चिंतित होते हैं और हम कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिसे करने में हम सक्षम नही होते। तब हम परेशान हो जाते हैं और हमें नहीं पता होता कि क्या करें। फिर वही है जो हमारे लिए नींद लाती है। इसलिए, जब हम सोते हैं, वह हमारी देखभाल करती है, वह हमें शांत करती है और वह हमारी समस्याओं को दूर करती है। वह बहुत कुछ कर रही है। ‘लेकिन हम उसके लिए क्या कर रहे हैं?’ यह हमें सुनिश्चित करना चाहिए।

मुख्य बात यह है कि हम स्वयं उनकी पूजा कर रहे हैं। उन्हें अच्छा लगता है कि उनके बच्चे उनकी पूजा करें, क्योंकि उस स्तर पर ही, वह उनके साथ एकाकार हो सकती हैं। वह उन्हें अपनी करुणा, प्रेम और सभी बुराईयों से सुरक्षा दे सकती हैं।

लेकिन – यह समझना होगा – जो अभी तक स्थापित नहीं हैं, जो अभी तक महाकाली की सुरक्षा की भूमि से संबंधित नहीं हैं, उन पर हमला हो सकता है। और वे… एक बार जब वे उस क्षेत्र को छोड़ देते हैं, तो वे बहुत बुरी तरह से घायल हो सकते हैं, मारे जा सकते हैं, चाहे कुछ भी हो सकता है। तो, हम जी रहे हैं – इस कलियुग में – बहुत खतरनाक समय में। जहां कुछ भी हो सकता है।

इसलिए हमें बहुत सावधान रहना होगा। हमें अपने मन की निगरानी करना होगी, यह जानने के लिए कि यह कैसे काम करता है। यह आपको क्या सिखाता है? यह आपको क्या बताता है? समझने की कोशिश करो: इस दुष्ट व्यक्ति की क्या योजना है, जोकि तुम उसके हाथों में खेल रहे हो? आप उसके हाथों में कैसे खेल सकते हैं और वह जो भी गलत करना चाहता है, आप वैसा कैसे कर सकते हैं?

दूसरे, उस शक्ति के विरुद्ध है ‘अहंकार’। आज सबसे बड़ी समस्या ‘अहंकार’ है। अहंकार प्रदर्शित करेगा: “नहीं, नहीं, मैं यह कर सकता हूं।” अहंकार कहता है: “मैं इसे कर डालूँगा।” अहंकार कहता है: “ऐसा किया जाएगा।” लेकिन देखिये,  मनुष्य अहंकार के आगे झुक जाता है। यह उनके लिए बहुत संतोष की बात है कि उनका अहंकार इतना मजबूत है और वे महाकाली शक्ति की बात नहीं सुनना चाहते हैं।

[एक बच्चा चिल्लाता है। श्री माताजी हंसते हैं और अपनी पोती (सोनू) से हिंदी में कहते हैं: “लड़के (अनंत) को बाहर ले जाओ।”] वह मेरे पास आना चाहता है, तुम देखो। बच्चे ऐसे होते हैं। वे तुम्हें एक पल के लिए भी नहीं छोड़ सकते… तुम्हें बच्चों की तरह बनना होगा। वास्तव में, यह सबसे अच्छा तरीका है, बच्चों की तरह निर्दोष हो जाना।

वह अबोध लोगों से प्यार करती है। वह खुद अबोध है। वह निर्दोष लोगों से प्यार करती है और वह आपकी अधिक देखभाल करती है क्योंकि आप निर्दोष हैं। तुम चालाक नहीं हो। आप … दूसरों पर अपना अहंकार बहुत ज्यादा वापरने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। यदि आप निर्दोष हैं, तो वह आपकी सहायता करेगी। वह निश्चित रूप से आपकी मदद करेगी। लेकिन इस अहंकार को काबू में करना होगा, क्योंकि वह उनका सबसे बड़ा दुश्मन है। उन्हें आपका अहंकार पसंद नहीं है। वह चाहती है कि तुम अहंकार रहित हो जाओ, निर्दोष बनो।

जैसा कि आप जानते हैं कि ऐसा है कि, पहले वे आईं और उन्होंने श्री गणेश की रचना की। इसलिए हम श्री गणेश की पूजा करते हैं। हमें अबोध होना है। अर्थात: हम कुछ बुरा- या अच्छा- या कुछ भी करने की योजना नहीं बना रहे हैं, लेकिन हम बिना किसी इरादे के हैं। हम बस हैं… यह एक कालातीत गतिविधि है। आप बस इस बात की परवाह नहीं करते कि आप क्या करने जा रहे हैं, आप क्या नहीं करने जा रहे हैं, आपको क्या करना चाहिए। ऐसा कुछ नहीं! आप बस अपनी पूरी अबोधिता में मौजूद हैं और खुद का आनंद ले रहे हैं और दूसरों को आनंद दे रहे हैं। अगर घर में एक बच्चा हो तो वह सौ लोगों को नचा सकता है। यह ऐसा ही है। क्योंकि इन बच्चों में मासूमियत की ताकत होती है और वह इसी का सम्मान करती हैं।

हम कभी-कभी ऐसा महसूस करते हैं: “लोग कैसे धोखेबाज होते हैं।” वे हमें कैसे धोखा देते हैं! कैसे वे हर तरह के, – मुझे कहना चाहिए – आक्रामकता! कभी-कभी, वे कैसे झूठ भी बोलने की कोशिश करते हैं! वे हर तरह की चीजें करेंगे और वे आपसे भी बहुत उम्मीद करते हैं। लेकिन ये सब हो रहा है… हो रहा है. आपको इन बातों से परेशान नहीं होना चाहिए।

आपको अपनी अबोधिता में रहना चाहिए और आपको आश्चर्य होगा, आप पूरी तरह से संरक्षित रहेंगे। कैसे? क्योंकि महाकाली आपके चारों ओर खड़ी होंगी। यदि आप निर्दोष हैं तो वह आपकी देखभाल करेगी। भोले-भाले व्यक्ति को क्रोध नहीं आता। गुस्सा करने जैसी क्या बात है? मुझे कहना चाहिए-अबोधिता की अपनी शक्ति होती है, ताकत। यह अत्यंत शक्तिशाली है। एक क्रूर आदमी भी, अगर वह एक बच्चे को देखता है, तो वह इसके बारे में थोड़ा सा जागरूक हो जाता है कि: “एक बच्चा है।” पूरी दुनिया में इस बात के प्रति जागरूकता है कि बच्चों को किसी भी तरह से प्रताड़ित या परेशान नहीं किया जाना चाहिए। क्यों? क्योंकि बच्चे कितने मासूम होते हैं। तो मासूमियत का गुण वास्तव में आपकी बहुत मदद करने वाला है, क्योंकि देवी आपकी अबोधिता के गुण की सराहना करती है।

फिर आप में स्थित एक और चीज जिससे वह प्यार करती है वह है आपकी करुणा। एक दूसरे के लिए अनुकंपा। एक दूसरे के लिए प्यार। दूसरों के प्रति परवाह भी। वह कुछ ऐसा है जिसे वह प्यार करती है। यदि आप एक सहज योगी हैं, यदि आप एक साक्षात्कारी आत्मा हैं, तो वह हमेशा आपके साथ है। लेकिन वह कहती है: “तुम अपनी करुणा के साथ क्या कर रहे हो? आप कितने लोगों को बोध दे रहे हैं? आप कितने लोगों का इलाज कर रहे हैं? आप कितने लोगों की मदद कर रहे हैं?” आप जो कुछ भी कर रहे हैं, उससे वह अच्छी तरह वाकिफ है।

मुझे कहना चाहिए, यह महाकाली की इतनी ज़बरदस्त शक्ति है – कि वह आपके बारे में सब कुछ जानती है। हर चीज़! वह आपके मन की बात जानती है। वह आपके हृदय को जानती है। वह आपके स्वास्थ्य के बारे में जानती है। ‘सब कुछ’ वह जानती है। दरअसल, वह मां है, जो हर तरह से नन्हे-मुन्ने की देखभाल करती है। इस तरह वह जानती है कि यह बच्चा कुछ नहीं करता। वह बहुत मासूम है। तो, जैसे, जब आप बहुत छोटे होते हैं, तो आपकी माँ आपकी देखभाल करती है। वैसे ही यह महाकाली आपकी देखभाल करती है। तब महासरस्वती शक्ति आती है और वह आपको शिक्षित करती है। वह तुम्हें ज्ञान के अन्य विचार देती है… यह, वह। लेकिन, आप में बच्चे की देखभाल करना, आपकी मासूमियत और आपकी करुणा की देखभाल करना, यह सब इस महाकाली शक्ति द्वारा किया जाता है।

इसलिए, वह अपने बच्चों के प्रति बेहद संवेदनशील है। कोई भी उसके बच्चों को छूने की हिम्मत नहीं करता! उसके लिए हर कोई एक बच्चे की तरह है। विशेष रूप से जो साक्षात्कारी आत्मा हैं, वह सोचती है कि बच्चे हैं और उन्हें किसी भी तरह से चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। उन्हें कुछ नहीं होना चाहिए। वह हमेशा उनका ध्यान रखती रहती है।

कोई कह सकता है: “यदि वह एक ‘शख्सियत’ है, तो वह उनका अनुसरण कैसे करती है?”

 चूँकि वह ‘सर्वव्यापी’ है। वह हर जगह मौजूद है। आपके जीवन में हर जगह वह है। विशेष रूप से सहजयोगियों के साथ, वह ऊपर और नीचे उनका अनुसरण करती हैं। हर जगह, आप जो कुछ भी कर रहे हैं। आप एक दुर्घटना में हैं – वह आपको बचाने के लिए है। वह आपके पीछे एक देवदूत की तरह है और आपको कुछ भी नहीं हो सकता है, अगर आप सच्चे दिल से उसकी पूजा करते हैं। किसी लाभ के लिए नहीं, किसी उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि उनके आशीर्वाद के लिए। उनका आशीर्वाद बहुत महान है और उन्होंने वास्तव में मनुष्य को समृद्ध किया है। उन्होंने इस पृथ्वी को समृद्ध किया है। उन्होंने सब कुछ समृद्ध किया है – महाकाली के आशीर्वाद के कारण।

निश्चय ही फिर महालक्ष्मी आती है। उसकी बात यह है कि, महालक्ष्मी सिद्धांत में, आप एक तरह से अनासक्त हो जाते हैं। आप उसे खोजने लगते हैं कि: “आखिर यह दुनिया क्या है?” और एक तरह की वैराग्य की भावना आपके भीतर आ जाती है और आप सोचने लगते हैं कि कुछ बेहतर होना चाहिए, इसके परे भी कोई सत्य होना चाहिए। खासतौर पर वे लोग जिन्हें बुरे लोगों ने प्रताड़ित किया है, हमेशा ऐसा ही सोचते हैं। कि, “कोई तो होगा जो हमें इसमें से उठाएगा।” यहाँ आप में महालक्ष्मी सिद्धांत आता है – जो देवी का सिद्धांत है – ‘उत्थान’ का। वह आपके दिमाग में यह विचार रखती है कि: “अगला क्या है? हमें क्या करना है? आखिर यही हमारे जीवन का अंत है? इस जीवन का उद्देश्य क्या है? हम इस धरती पर क्यों आए हैं? ऐसा क्या खास है कि हमें इस धरती पर रहना चाहिए?” ऐसे तमाम बुनियादी सवाल उठने लगते हैं और फिर वह बस खोज में लग जाता है।

उसमें भी, आपको यह समझना होगा कि महालक्ष्मी सिद्धांत लोगों की समझ से बहुत, बहुत, बहुत भिन्न है। वे सोचते हैं – यदि वे खोज रहे हैं, तो यह बुद्धिगम्य होना चाहिए, यह ‘उनके मन से’ होना चाहिए या तर्कसंगत, ऐसा सब, या वैज्ञानिक हो सकता है।  सत्य की तलाश में, वे इसी तरह चलते हैं। यह मुमकिन नहीं है। महालक्ष्मी का सिद्धांत इस प्रकार है कि:  आपको सत्य और सत्य और केवल सत्य को जानने की “तीव्र इच्छा “होनी चाहिए – और कुछ नहीं।

जब आप ऐसा सोचेंगे, तभी आप दूसरी चीजों को नहीं अपनाएंगे। कई लोगों ने यह सोचकर नशा किया कि ऐसा करने से वे आत्म-साक्षात्कार प्राप्त कर लेंगे। यह गलत विचार है। आप अपनी जागरूकता से दूर हो कर कैसे इसे हासिल कर सकते हैं? जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण चीज है। यदि आप जागरूकता के क्षेत्र में जा सकते हैं, तो आपको यह समझना होगा कि बुनियादी जागरूकता को खोना नहीं है।

यदि आपकी बुनियादी जागरूकता खो जाती है, शराब पीने से या नशीली दवाओं के माध्यम से या इन सभी चीजों के माध्यम से जो लोग करते हैं – वे सोचते हैं कि वे खोज रहे हैं, इसलिए वे ऐसा कर रहे हैं। तो कभी-कभी, वे गलत काम करने के लिए ‘अपनी खोज’ करने का बहाना लेते हैं। यह खुद से  बदला लेने की तरह है, मुझे लगता है, कि आप यह सोचकर खुद से बदला लेना चाहते हैं कि आप अब ‘तलाश’ कर रहे हैं। यह वास्तविक खोज नहीं है। एक वास्तविक खोज में, एक व्यक्ति को सिर्फ ध्यान करना होता है और यह पता लगाना चाहिए कि सही तरीका क्या है। लेकिन, वो भी कुछ किताबें पढ़ने या कुछ झूठे गुरुओं को सुनने से नहीं।

दरअसल, कुंडलिनी जागरण ही वास्तविकता को जानने का एकमात्र तरीका है। अन्य कोई दूसरा रास्ता नहीं है। लेकिन उन्हें कोई नहीं बताता कि यह कुंडलिनी जागरण है। वे आपको बताएंगे: “हम इस स्थान पर जाएंगे, फिर उस स्थान पर, फिर उस स्थान पर और अधिक। फिर यह करना होगा।” और अंत में, तुम कहाँ आते हो? जहां से आपने शुरुआत की थी। यह ऐसे ही है: एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, एक असत्य से दूसरे असत्य की ओर, दूसरे असत्य की ओर, असत्यता की ओर जाना। अंततः इतने सारे साधक खो गए हैं। बहुत से लोग खो गए हैं, क्योंकि उन्होंने सोचा था कि कुछ प्रकार बहुत कीमती है, खोज करना बहुत ‘बहुमूल्य’ है, क्योंकि आप गुरु को बहुत सारा पैसा दे सकते हैं। मेरा मतलब है, आप गुरु को ‘खरीद’ सकते हैं। और इसलिए: “सभी अमीर लोग प्रबुद्ध हो सकते हैं।” यह इसका मतलब है।

लेकिन मुझे नहीं लगता कि अच्छे लोगों का बड़ा हिस्सा केवल अमीर लोग है। जो लोग अच्छे हैं वे अच्छे हैं। वे अमीर हैं या नहीं, यह मायने नहीं रखता। लेकिन ऐसे लोग एक व्यक्ति के आसपास इकट्ठा होने की कोशिश करते हैं, क्योंकि, मुझे लगता है, उनको पैसे का एक सूक्ष्म अहंकार है, कि: “हम इसे खरीद सकते हैं, उसे खरीद सकते हैं।”

एक बार मैं अमेरिका में थी और एक महिला थी जो मुझसे मिलने आई थी और वह नहीं जानती थी कि मैं… एक आध्यात्मिक व्यक्ति हूं। तो उसने कहा: “अब एक बहुत अच्छा गुरु है जो अमेरिका आया है।”

 मैंने कहा: “सच में? वह क्या करता है?”

 उसने कहा: “वहाँ एक सेल लगी है।”

 मैंने कहा: “सच में?” 

“आप उसे आधी राशि दें: वह आपको अपना आशीर्वाद दे सकता है। ठीक है?”

फिर अगले हफ्ते, उसने कहा: “अब बिक्री एक चौथाई भाव में हो गई है। यदि आप एक चौथाई राशि का भुगतान करते हैं, तो वह आपको ‘पूर्ण’ ज्ञान देगा।” मैंने कहा: “यह पारस्परिक कैसे हो सकता है? यह ठीक आनुपातिक नहीं है!” मैंने कहा: “जब आप आधा दे रहे थे, तब वह आपको आधा दे रहे थे और जब आप एक चौथाई दे रहे थे, तो वह आपको पूरा दे रहे थे।”

 “यही बात है”, उसने कहा, “वह बहुत उदार है, आप देखिए। यही तो बात है।” मैंने कहा: “ऐसे सभी लोगों के लिए जो सोचते हैं कि वे सत्य खरीद सकते हैं, वे इसे प्राप्त नहीं कर सकते।”

आप इसे खरीद नहीं सकते। आप अपने कुंडलिनी जागरण के लिए भुगतान नहीं कर सकते। नहीं! न ही आपको उसके लिए कोई धनराशी लेना चाहिए। आत्म-साक्षात्कार पूर्णतः ईश्वरीय कृपा है। और आप उसके लिए पैसे नहीं ले सकते। आप इसे बेच नहीं सकते। यह इतना ‘सस्ता’ नहीं है कि इसे बेचा जाए। अगर आप यह बात समझते हैं, तो महालक्ष्मी शक्ति काम करती है।

और महालक्ष्मी शक्ति वास्तव में उन लोगों के लिए है जो वास्तव में सच्चे साधक हैं, जो वास्तव में खोज रहे हैं। यह इतनी अच्छी तरह से कार्यान्वित होती है और कार्य करती है कि वे एक प्रकार की बहुत, बहुत सहज अनुभूति प्राप्त कर लेते हैं।

यह स्वतःस्फूर्त बोध, आप सभी को मिल गया है। आपको हिमालय जाने की जरूरत नहीं है। आपको ऐसा कुछ नहीं करना है। वो सारी चीजें खत्म हो गई हैं। आप यह सब कर चुके हैं। अपने पिछले जन्मों में, आपने इसे अवश्य किया होगा। अब आपको कुछ नहीं करना है। आप इसे प्राप्त कर सकते हैं, आप इसे यहीं बैठकर प्राप्त कर रहे हैं। आप पूरी दुनिया में कहीं भी हों, आप इसे प्राप्त कर सकते हैं और यह बहुत तेजी से फैल रहा है।

अब, सहज योगियों का भी कर्तव्य है कि वे सहज योग का प्रचार करें। अब यह समझना है कि महालक्ष्मी और महाकाली दोनों साथ-साथ चलते हैं। जब आप देखते हैं, महाकाली आपको आशीर्वाद देती है और वह आपके साथ होती है और आप उसके दायरे में होते हैं, तो महालक्ष्मी आगे आती हैं और वह निश्चित रूप से आप को आत्मसाक्षात्कार प्राप्ति में मदद करती हैं और आपकी समस्याओं को सुधारने, आपकी मदद करने के लिए भी आपकी मदद करती हैं। मेरा मतलब है – इसका वित्तीय पक्ष, आप ऐसा कह सकते हैं, या किसी भी तरह से – अन्य समस्याओं को भी वह हल करती है। सबसे बड़ी समस्या वह हल करती है कि आपकी सबसे बड़ी इच्छा – आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने की – प्रदान की जाती है।

तो, उनके बीच कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। ये तीनों शक्तियां एक साथ काम करती हैं और जिस चीज की जरूरत होती है, उसे पूरा करती हैं। लेकिन महाकाली ही मार्गदर्शन करती हैं कि कहां जाना है और इसलिए महाकाली की शक्ति का बहुत सम्मान किया जाता है। वैसे भी, उसने इतने सारे शैतानों और इतने सारे राक्षसों को मार डाला है और अभी भी और भी हैं – उनमें से कुछ मौजूद हैं – लेकिन मुझे यकीन है कि वे सभी समाप्त हो जाएंगे। इन भयानक लोगों में से कोई भी कभी मौजूद नहीं रहेगा।

लेकिन फिर भी हमें बहुत सावधान और सतर्क रहना होगा और यह पता लगाने की कोशिश करनी होगी कि इन लोगों के साथ क्या गलत है। वे क्या कर रहे हैं और वे क्या प्रचार करने की कोशिश कर रहे हैं? आपको इस तरह परिपक्व होना चाहिए कि आपको इन सभी दुष्टों के बारे में सब कुछ पता चल जाए। आपको पता लगाना चाहिए कि ये झूठे लोग क्या कर रहे हैं। देखिए, यह वास्तव में आसान है, क्योंकि आप प्रबुद्ध हैं। और अपने प्रबुद्ध ध्यान से, आप निश्चित रूप से पता लगा सकते हैं कि किस संगठन में क्या गलत है, प्रत्येक दुष्ट व्यक्ति, कुकर्मी के साथ।

यह होगा… सबसे अच्छा तरीका है ध्यान करना। किसी भी तरह से आक्रामक नहीं होना है। बल्कि सिर्फ ध्यान करने और महाकाली से प्रार्थना करना कि: “नष्ट करो! उसका नाश करो, क्योंकि वह जगत का नाश कर रहा है। आप कृपया उसे नष्ट कर दें!” यह उनका काम है और वे इसे करना पसंद करेगी, लेकिन किसी को उसे बताना होगा और उनसे प्रार्थना करना होगी। यह बहुत अच्छा है, क्योंकि बहुत सारे हैं, कि जब तक आप इस तरफ इशारा  नहीं करते हैं, तब तक वह अपना चित्त उस पर नहीं लगा पाएगी – संभवतः।

तो यह सबसे अच्छा है कि हमेशा उनसे अपनी मदद करने के लिए प्रार्थना करें। व्यक्तिगत आधार पर। राष्ट्रीय आधार पर। शायद सामूहिक आधार पर या शायद वैश्विक आधार पर। ऐसा ही है कि: वह हर जगह मौजूद है। वह विश्व स्तर पर उपलब्ध है। कहीं भी: आप किसी भी रंग, किसी भी जाति, किसी भी राष्ट्र के हो सकते हैं – कुछ भी – लेकिन वह हर समय आपके भीतर मौजूद है।

और उनकी पूजा करना और उन्हें जागृत करना, केवल ‘आपका’ हक है, वह ‘आपको’ करना है। यदि वह आपके भीतर जागृत है, तो आप एक विनम्र व्यक्ति होंगे। आप देखेंगे कि आप क्या गलतियाँ करते रहे हैं और आप इसके बारे में बुरा महसूस करेंगे। आपको ‘दोषी भाव’ नहीं होगा, लेकिन आपको ‘बुरा’ लगेगा, कि: “मैं अब आगे से ऐसा कभी नहीं करूंगा। मैंने बहुत बड़ी गलती की है।” और फिर आप इसे ठीक करने का प्रयास करेंगे।

जब आप अपने दिल में शुद्ध होते हैं तो यह सब बहुत अच्छा काम करता है। आपका हृदय शुद्ध होना चाहिए। यदि आपका हृदय शुद्ध नहीं है, यदि आप दूसरों के साथ कुछ प्रतिस्पर्धा करने के लिए या किसी प्रकार की भौतिक उपलब्धियों के लिए सहज योग कर रहे हैं, यह काम नहीं करेगा। आपको इसे इस तरह से करना है जैसे कि यह एक अबोध कार्य है, कि आप अपनी मां की पूजा कर रहे हैं जैसे एक छोटा बच्चा अपनी मां की पूजा करता है और प्यार करता है। यह एक बहुत ही सरल रिश्ता है, जिसे हम सभी ने महसूस किया है: हमें अपनी माँ से कैसे प्यार करना चाहिए और कैसे हमें उनके मार्गदर्शन और उनकी सुरक्षा में रहना चाहिए। यह एक बहुत ही सरल बात है जिसे आपने अपने बचपन में जाना है और यदि आप वास्तव में माँ की पूजा करते हैं तो उस बचपन को आपके भीतर वापस आना होगा।

परमात्मा आप को आशिर्वादित करे!