We are not ourselves

Istanbul (Turkey)

2000-04-25 We are not ourselves, Istanbul Turkey DP-RAW, 77' Chapters: Preparations, Arrival, Talk, Self-RealizationDownload subtitles: EN,TR (2)View subtitles:
Download video - mkv format (standard quality): Download video - mpg format (full quality): Watch on Youtube: Watch and download video - mp4 format on Vimeo: Listen on Soundcloud: Transcribe/Translate oTranscribeUpload subtitles

Feedback
Share

२०००. ० ४. २५  सार्वजनिक कार्यक्रम, इस्तांबुल, तुर्की, लेवेंट सिरका और ओया बसर थियेटर, माक्का-इस्तांबुल

मैं सत्य       को खोजनेवाले सभी साधकों को नमन करती       हूँ । ये दिन हैं       सर्वाधिक उथल-पुथल के      । हम देख सकते हैं अपने आसपास      सभी प्रकार की आपदाओं को       आते हुए । साथ ही, जो  हम      देखते हैं कि मानव      स्वयं से खुश नहीं है और न ही दूसरों से      । इसका मतलब है,      कुछ मूल-रूप से ग़लत है हमारे साथ , जो कि हम सभी एक साथ शांति से नहीं रह सकते हैं। हमारे पास आनंद नहीं है। हम अपने जीवन का आनंद नहीं ले सकते हैं। हम अनावश्यक रूप से इतने दुखी हैं। चाहे अमीर हो या गरीब, जो भी स्थिति/परिस्थिति/अवस्था      हो, लोग बहुत खुश नहीं हैं।

इसका क्या कारण है? क्या हम दुख और परेशानियों के लिए बनाए गए हैं/क्या हमारी सृष्टि की गई है  दुःख और परेशानियों के लिए  ?      सभी प्रकार के रोगों और सभी प्रकार के संक्रमणों से पीड़ित होने के  लिए ?  प्रकृति भी, धरती माँ, सब का हमारे साथ सामंजस्य नहीं है। इसका कारण है,      हम स्वयं      नहीं हैं। यह बहुत महत्त्वपूर्ण है , जैसा कि सभी के द्वारा कहा गया है ,      कि आपको स्वयं को जानना चाहिए। लेकिन हम कैसे जानें      ? अब समय आ गया है।

कुरान में, इसे दो चरणों में वर्णित किया गया है, एक है क़ियामा और दूसरा है क़यामत । हम बच      सकते हैं और कियामा का आनंद उठा सकते हैं। या हम नष्ट हो सकते हैं और क़यामत को भुगत सकते हैं।  तो, यह निर्णय का समय है।       यह सभी शास्त्रों में       वर्णित किया गया है। आप जो भी      विश्वास करें , जो भी आप      सोचें , उससे कोई       फ़र्क नहीं पड़ता। आप जिस भी जगह पर रहते हैं, जिस भी देश       के हैं, उसका आपसे कोई लेना-देना/संबंध   नहीं है। अब इस पर फैसला/निर्णय  कैसे होगा? हमारे भीतर एक शक्ति निहित है, जिसे हमारे       रचयिता ने       त्रिकोणाकार हड्डी में      स्थित किया है जिसे ‘सेक्रम ‘(पवित्र) कहा जाता है। यह वह शक्ति है जो हमें      अस्तित्व की उच्च स्थिति प्रदान करने वाली है, जहाँ हम स्वयं को जान सकें । अन्यथा, हम  खो जाते हैं इस सांसारिक माया की       झमेले/ गड़बड़  में     ।

यह वह शक्ति है जिसे संस्कृत में हम कुंडलिनी कहते हैं। क्योंकि यह सांप की तरह चलती है। कुछ लोग इसे सर्प शक्ति भी कहते हैं। लेकिन यह शक्ति आपकी व्यक्तिगत माँ है। उसका       कोई और बच्चा नहीं है आपके अलावा । वह आपके बारे में सब कुछ जानती है। वह जानती है      आपकी क्या आकांक्षाएं  हैं। वह जानती है      आपकी क्या गलतियां हैं।वह यह भी जानती है      आपको क्या शारीरिक, मानसिक समस्याएं हैं। जब आप पैदा हुए थे/ आपका जन्म हुआ था ,      आपकी माँ ने सारी       क्लेश अपने ऊपर ले ली थी। लेकिन, उसने आपको परेशान नहीं किया। इसलिए, जब यह आपकी माँ आपको आपका दूसरा जन्म देती है,      वह आपकी सारी परेशानियों को अपने ऊपर ले लेती है। मैं       यहाँ आई हूँ आपको      बताने के लिए      कि आपके पास यह शक्ति है, आप सभी के पास      । यदि       इसे जागृत      किया जाएं और ये छह सूक्ष्म चक्रों से      गुज़रती है,      हमारे छठे सूक्ष्म चक्र से      गुज़रती है, यहाँ  [तालू की ओर इशारा करते हुए], यह दिव्य प्रेम की      सर्वव्यापी शक्ति से जुड़ जाती है।

आइंस्टीन ने कहा है कि वह थके हुए थे।आइंस्टीन, थक चुके थे ,सापेक्षता के सिद्धांत के बारे में जानने की       प्रयास में । और       वह बहुत परिश्रांत हो गए। वह अपने बगीचे में चले      गए और खेलना शुरू कर दिया …      खेलना शुरू कर दिया साबुन के बुलबुले के साथ । साबुन के बुलबुलों के साथ खेलते हुए, वह कहता है, मुझे नहीं पता      कहीं अज्ञात से सापेक्षता का सिद्धांत मुझ पर प्रकाशित हो गया। उन्होंने इसे अपनी भाषा में ऐंठन का स्थान कहा है।       यहाँ तक कि यू , फ्रायड का शिष्य       , जिन्होंने अपने गुरु को त्याग दिया और कहा कि हमारे परे कुछ है,       जहाँ हमें अपने दिमाग़ से परे जाना होगा।      क्योंकि यह बुद्धि ,क्योंकि       यह मन हर चीज़ पर प्रतिक्रिया करता है। यह हर समय प्रतिक्रिया करता रहता है। और इस कारण हम परेशान रहते हैं। ये विचार हमारे पास निरंतर आते हैं ,या तो भविष्य से या फिर अतीत से।       लेकिन हम वर्तमान में नहीं हो/रह  सकते। एक विचार इस तरह से  उठता है, [लहर की तरह हाथ से इशारा] गिर जाता है,दूसरा विचार इस तरह से उठता है और      गिरता है।

लेकिन जब यह कुंडलिनी उठती है/ कुंडलिनी का उत्थान होता , तो ये विचार लम्बे हो जाते हैं और बीच में एक जगह हो जाती है और यह वही जगह      है       जहाँ हमारा वर्तमान      है। तो हम वर्तमान में आते हैं और वास्तविकता वर्तमान में होती है।तो आप वास्तविकता को जानते हैं और आपको अपने बारे में ज्ञान होता  है। कैसे? क्योंकि जब आप इस सर्वव्यापी शक्ति,इस दिव्य शक्ति के साथ जुड़ जाते हैं,      आपके हाथ एक प्रकार के बहुत अच्छे/सुंदर  ठंडे चैतन्य का उत्सर्जन करना शुरू कर देते हैं। यह रूह है। यह दैवीय प्रेम की दिव्य ठंडी लहरें हैं और अपने हाथ में,अपनी उंगलियों पर,      आप अपने केंद्रों को       अनुभव कर सकते हैं। इसका मतलब है कि आपके हाथ बोलने लगते हैं। यही है जो मोहम्मद साहब ने कहा है कि क़ियामा के       समय में आपके हाथ बोलेंगे। तो यह क़ियामा का समय है, जब हज़ारों-हज़ारों लोगों ने इसे      अनुभव किया है। यदि आपके हाथ आपके केंद्रों के बारे में नहीं बोलते हैं, तो मैं नहीं कहूंगी कि आप एक सच्चे मुसलमान हैं। यह बात मोहम्मद साहब ने कही है। इसलिए,परिणाम-स्वरूप, हमें जो उम्मीद करनी चाहिए, कि हमारे हाथों को बोलना चाहिए, ताकि हमें  ज्ञान प्राप्त हो स्वयं के बारे में,अपने चक्रों के बारे में      । हम अपने बारे में अच्छी तरह जानते हैं। साथ ही, हम जानते हैं कि हमारा यह शरीर ईश्वरीय इच्छा का एक साधन है। क्योंकि अब हम ईश्वरीय शक्ति से        जुड़े हैं और हमारे पास सारा ज्ञान है जो       संपूर्ण सत्य है। तो, यह पूर्ण ज्ञान का मार्ग है।

मान लीजिए कि एक आदमी है जो       अभिमान युक्त बात करता है और डींगे मारता/अपना बड़ाई करता  है, हमें कैसे पता चलेगा कि वह कोई पाखंडी नहीं है? जैसे ही आप उस व्यक्ति की ओर अपना हाथ रखेंगे, तुरंत आपको पता चल जाएगा यदि यह गर्म है या कभी-कभी आपको कुछ  थोड़ा-थोड़ा.      चुभन अनुभव होगा      , तो       जानिए कि वह एक अच्छा आदमी नहीं है। इतना ही नहीं बल्कि मान       लीजिए कि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं और आपको तब तक इसका पता नहीं चलेगा, जब तक आप मेडिकल/ चिकित्सा  जांच की पूरी प्रक्रिया से नहीं गुज़रते। और फिर भी, वे बहुत निश्चित नहीं होंगे कि आपको क्या       पीड़ा है। लेकिन अपनी उंगलियों के छोर पर, आप अपने बारे में जान पाएंगे कि आपको क्या       क्लेश है।      आप सभी को इस पर  नियंत्रण होगा  , स्वयं के बारे में पूर्ण ज्ञान होगा। और यदि आप जानते हैं      अपने चक्रों को कैसे ठीक किया जाए,आप दूसरों के चक्रों को सही कर सकते हैं। कल्पना कीजिए      आपके पास क्या शक्तियाँ हैं। उदाहरण के लिए, यदि यह उपकरण      जुड़ा नहीं है, तो आप मुझे नहीं सुन       पाएंगे और यह बेकार/व्यर्थ  है। लेकिन यदि आप परमात्मा से जुड़े हैं तो आप में से ऊर्जा बहने लगती है। लेकिन       जब यह शक्ति बढ़ती है, वह छह चक्रों से गुज़रती है, वह उन्हें प्रकाशित करती है। वह उन्हें एकीकृत करती है। इतना ही नहीं, लेकिन यह आपको सूचित करती है      आपके साथ क्या ग़लत है और आप इसे सही कर सकते हैं। आपकी सभी प्रतिक्रियाएँ रुक जाती हैं। लेकिन आप सब कुछ विचारहीन होकर देखते हैं। जैसे आप साक्षी हो जाते हैं। उस साक्षी अवस्था में, आप हर चीज़ के बारे में सच्चाई जान जाते हैं। यह इतना सरल है।

यह सब       घटित हो सकता है इसके लिए भुगतान किए  बिना क्योंकि कुंडलिनी      पैसा       नहीं समझती है और न ही भगवान/ईश्वर  कोई पैसा       लेते हैं । यह अलग है  कि अगर आपको हॉल बुक करना है, तो     हम उसका भुगतान करते  हैं  , लेकिन कुंडलिनी जागरण के लिए नहीं। और आपको अपना अनुभव प्राप्त होता है। यह सिर्फ बात नहीं है। यह अनुभव है आपकी उंगलियों पर और आपके तालु भाग से बाहर निकलने का      । अंध विश्वास का कोई सवाल ही नहीं है। यह सिर्फ पूर्ण समझ है अपने भीतर, अपने अस्तित्व की      । यही वह है जो क़ियामा है, यही वह है जहाँ आप एक महामानव के रूप में विकसित होते हैं।

यह देश विशेष रूप से सूफियों द्वारा आशीर्वादित था। उन्हें परमात्मा का अनुभव था लेकिन वे      नहीं समझा      सकें ,      उन्हें यह कैसे मिला। लेकिन मोहम्मद साहब ने इसका वर्णन किया है, कि वह एक सफेद घोड़े पर सवार थे, जिसका अर्थ है कुंडलिनी। और फिर वह मूसा से मिले तीसरे स्वर्ग पर     , जो सच है क्योंकि हम भी जानते हैं कि ये सभी पैगंबर तीसरे स्वर्ग पर हैं। मैं जो कुछ भी कह रही       हूँ वह आप परख /जांच सकते हैं  अपने आत्मसाक्षात्कार के बाद     । लेकिन कुंडलिनी जागरण के परिणामस्वरूप हमारे सभी शत्रु-क्रोध, यौन दुर्व्यवहार, फिर सभी प्रकार की     अहंकार , ईर्ष्याऐं, सभी छूट जाते हैं। सारा लोभ भी छूट जाता है। ईर्ष्या छूट जाती है क्योंकि आप प्रबुद्ध हो जाते हैं। अंधेरे में, आप यह नहीं देख सकते      आपका शत्रु कौन है। लेकिन जब आप प्रबुद्ध हो जाते हैं,      आप सब कुछ जानते हैं और आप ऐसा कुछ भी नहीं करते हैं जो विनाशकारी हो। आप अपनी सभी विनाशकारी आदतों को छोड़ देते हैं। और जो आपके हृदय में आता है वह है आनन्द। वह आनन्द है जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।

उदाहरण के लिए, हमारे पास अप्रसन्नता और प्रसन्नता है, एक सिक्के के दो पहलू। लेकिन साक्षात्कार के बाद, आप पूर्ण आनंद में होते हैं। और आप बिल्कुल शांत हो जाते हैं। अब हमें जो चाहिए वह है शांति।

 वे बहुत सारे शांति सम्मेलन कर रहे हैं और इतने पैसे खर्च कर रहे हैं लेकिन वे खुद/स्वयं  झगड़ रहे हैं। तो उन सम्मेलनों के होने का क्या फायदा/लाभ  है? लेकिन आपको अपने भीतर बहुत शांत होना होगा क्योंकि आप बहुत सामूहिक हो       गए हैं। आप एक सामूहिक चेतना का विकास करते हैं। दूसरा कौन है? आप अंग-प्रत्यंग है एक सर्वशक्तिमान परमात्मा का      । यह घर…या.. हाथ इस हाथ के लिए महसूस कर सकता है, उसी तरह, हम सभी ऐसा ही अनुभव करते हैं अपने भीतर भी      । आपको आश्चर्य होगा कभी-कभी हमारे       यहाँ ऐसे लोगों का सम्मेलन होता है जो कभी-कभी अस्सी देशों से आते हैं- काला, सफेद, पीला, हर रंग। और न कोई झगड़ा होता है, न कोई लड़ाई। हज़ारों और हज़ारों में, वे एक-दूसरे की संगति का आनंद लेते हैं और एक-दूसरे की मदद/सहायता  करते हैं। आप तुर्की में हो सकते हैं लेकिन आपको सभी देशों में दोस्त मिलेंगे,      आपके भाई वहाँ हैं और आपके बहन वहाँ हैं। अब आप अकेले नहीं हैं। आप       सहायता पा  सकते हैं जीवन के हर क्षेत्र में , आपके  अपने भाई के रूप में      । यह कुछ ऐसा है जिसे हम खुद नहीं जानते हैं,जैसे हम नहीं जानते      हमारी प्रेम की शक्तियां कितनी महान हैं।एक बूंद की तरह जो सागर में गिरती है वह सागर बन जाती है। आप भी सागर बन जाते हो, आपकी सारी सीमाएं समाप्त हो जाती हैं।यही है वह जो  आज रात आपके साथ      होने वाला है।

मुझे नहीं पता कि मुझे आपसे सवाल पूछने के लिए कहना चाहिए। लेकिन अगर आपको लगता है कि यह       महत्त्वपूर्ण है तो      आप पूछ सकते हैं, , लेकिन कुछ बहुत  महत्वपूर्ण प्रश्न       पूछिए क्योंकि आपको आसपास के लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए।

एक और बात है, आप सभी को      मुश्किल से दस मिनट या पंद्रह मिनट लगेंगे अपना आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने के लिए । अगर किसी को यह नहीं चाहिए, तो उन्हें हॉल छोड़ देना चाहिए। बस शर्त यह है कि आपको सभी को क्षमा कर देना चाहिए। स्वयं को भी क्षमा करें। बस आपको कहना है,      अपने हृदय       में , मैं सभी को क्षमा करता       हूँ । यह भी न सोचें कि आपको किसको क्षमा करना है लेकिन सामान्य तौर पर, आपको यह कहना चाहिए,      मैंने सभी को क्षमा कर दिया। साथ ही, आपको खुद/स्वयं  को भी क्षमा करना होगा। आपने कुछ ग़लत किया होगा, इससे कोई       फ़र्क नहीं पड़ता। वह अतीत में था। हम वर्तमान में हैं। एक और बात है, चाहे आप क्षमा करें या आप क्षमा न करें, आप कुछ भी नहीं करते हैं। लेकिन अगर आप       क्षमा नहीं करते हैं तो आप ग़लत हाथों में खेलते हैं।

इसलिए, अब हम आत्म-साक्षात्कार का सत्र       लेंगे । उसके लिए, क्या मैं सभी कैमरामैन से अनुरोध कर सकती       हूँ कि वे कोई तस्वीर न लें और चुप रहें? सिर्फ दस मिनट के लिए। लेकिन जब वे यह कहते हुए अपना हाथ उठाएंगे कि उन्हें आत्म-साक्षात्कार मिल गया है, तो हम ले सकते हैं। इसलिए, कृपया लगभग दस मिनट तक प्रतीक्षा करें।

अब, जैसा कि मैंने आपको बताया, आपको       स्वयं को       क्षमा करना होगा और आपको दूसरों को       क्षमा करना होगा। यह बहुत       महत्त्वपूर्ण है।

अब आपको जो      करना है, बस दोनों हाथों को इस तरह मेरे        तरफ़ रखना है । बस, इस तरह सरलता से ऐसे। जैसा नमाज के लिए करते हैं वैसा ही करें। कृपया ऐसे करें।

ठीक है। कृपया फिर से स्वयं को क्षमा      करिए और बाकी सभी को क्षमा       करिए ।

अब, आप अपना सिर झुका सकते हैं और अपने बाएं हाथ को अपने सिर के तालू भाग पर रखिए, जो आपके बचपन में नरम था, शीर्ष पर और ऊपर।

अब देखिए, अगर आपके सिर के तालू भाग से ठंडी या गर्म हवा निकल रही है, कृपया अपना हाथ हिलाएं। खुद पर विश्वास रखें, खुद को क्षमा करें।

ठीक है, अब कृपया अपना बायाँ हाथ मेरी ओर रखें और दाहिने हाथ से कृपया देखें, अपना सिर झुकाएँ, कृपया देखें कि क्या आपके सिर के तालू भाग से ठंडी हवा निकल रही है। यदि यह गर्म है, तो आपने क्षमा नहीं किया है ,या तो       स्वयं को या दूसरों को      । तो कृपया अब कर दें।

ठीक है, अब फिर से, एक बार और, अपने दाहिने हाथ को इस तरह से मेरी ओर रखिए और अपने बाएं हाथ से देखिए। अपना सिर झुकाएं और खुद देखें कि आपके सिर के तालू भाग से ठंडी या गर्म हवा निकल रही है।

अब, कृपया अपने दोनों हाथों को मेरी ओर करें और कृपया  सोचिए नहीं, क्या आप ऐसा कर सकते हैं     ?सोचिए नहीं।

अब कृपया देखें, यदि आप अपनी उंगलियों पर ठंडी या गर्म हवा       अनुभव कर रहे हैं। यह बहुत कोमल हो सकती है या आप इसे अपनी हथेलियों पर महसूस या अपने सिर के तालू भाग से निकलते       हुए महसूस कर सकते हैं। कहीं से भी अगर आपको ठंडी या गर्म हवा आ रही है तो कृपया अपने हाथों को ऊपर उठाएं,

आप सभी अब सूफी हो गए हैं। बधाई हो।

परमात्मा आपको आशीर्वादित करें।

तुर्की एक बहुत ही दिव्य स्थान है और इतने कम समय में आपको अपना आत्म-साक्षात्कार प्राप्त हुआ। कृपया संदेह नहीं करें। ठीक है, अपने हाथ नीचे करिए। मैंने       विमान-अड्डे में अधिक महिलाओं को देखा, हो सकता है कि पुरुष व्यस्त थे लेकिन मैं चाहती       हूँ कि पुरुष भी साक्षात्कारी आत्मा बनें, बहुत       महत्त्वपूर्ण है। अब आप जानेंगे कि शुद्ध प्रेम, शुद्ध करुणा क्या है      , क्योंकि यह शक्ति है ईश्वरीय करुणा की, ईश्वरीय प्रेम की।

परमात्मा आप सब को आशीर्वादित करें।

वे एक गीत गाएंगे, जिस पर हम ताली बजाएंगे और आप देखेंगे कि इन चैतन्य की ठंडी लहरों में वृद्धि होगी।     पाँच  मिनट के लिए, आप बस फिर से महसूस करें।