Talk after Sahasrara Puja: Penetrate Your Attention

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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सहस्त्रार पूजा के बाद की बात “अपना चित्त प्रविष्ट करें “,  कैबेला  लिगुरे, इटली, 7 मई 2000

यह एक अद्भुत विचार था मेरा  चित्त जीवन के  इन सभी क्षेत्रों पर केंद्रित करना, जो बहुत महत्वपूर्ण हैं  और जैसा कि , मेरा उन सभी पर चित्त है और मैं इन सभी की परवाह करती हूँ लेकिन मैं कहूँगी की अब आप सभी लोगों को इस पर अपना चित्त रखना है क्योंकि वह आप हैं  जो इसके बारे में कुछ कर सकते हैं । आप प्रकृति के साथ शुरू कर सकते हैं जैसा कि कहा गया है कि हमें प्रकृति के प्रति दयालु होना होगा । हमें ऐसी समस्याएं हो रही हैं । लोग पेड़ों को काट रहे हैं, हर प्रकार का कार्य  कर रहे हैं यह सोचे बिना कि यह हमारी संतति के लिए हैं,  जो मरुभूमि बन जाएगी। तो, उसी प्रकार, सभी  के लिए, अपने फल और कृषि के लिए, चैतन्य वास्तव में बदल सकता है। हमारे बगीचे में आपको विश्वास नहीं होगा, एक  पिअनी (बड़े लाल फूल) थे बस इस तरह का, इस से भी बड़ा है, बहुत बड़ा है । हमने ऐसा फूल कभी नहीं देखा। हमारे पास ट्यूलिप के फूल भी उतने ही बड़े थे । मैंने अपने जीवनकाल में इस तरह के ट्यूलिप फूल नहीं देखे है ।

चैतन्य के साथ आप हर जगह सुधार कर सकते हैं।

आप जाकर किसी राजनेता से मिलते हैं, या फिर किसी राजनीतिक दल में जाते हैं, तो आप अपने हाथों का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें हर समय बंधन देते हैं । आप मेज़ के दूसरी तरफ़ बैठते हैं और मेज़ के नीचे आप उन्हें  बंधन देते हैं।

आपके पास शक्तियां हैं, लेकिन यदि आप अपनी शक्तियों का उपयोग नहीं करते हैं तो यह बेकार हैं – यदि आप केवल अपने स्वयं के उत्थान और स्वयं  की देखभाल करने के बारे में सोचते रहते हैं। अब वे दिन चले गए हैं । अब आपको अन्य चीज़ों की देखभाल करनी होगी। और मैं उन सभी चीज़ों से बहुत प्रसन्न  थी  जो उन्होंने दिखाई हैं और मेरा सारा चित्त पहले से ही उन पर है । लेकिन अगर आप लोग भी अपना चित्त उधर लगाते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि मैंने पहले ही विभिन्न परियोजनाओं के लिए महाराष्ट्र में सात बड़ी, बड़ी भूमि, पचास से साठ एकड़ भूमि ख़रीदी है और ये परियोजनाएं आरम्भ हो चुकी हैं।

अब दिल्ली में भी हमारे पास बेसहारा महिलाओं को रखने के लिए एक बहुत बड़ा भूखंड है। पहले, सामाजिक स्तर पर हमें कुछ ऐसा करना होगा जो मैंने सोचा था ।तो,  यह सब हो गया है, हमने एक स्कूल शुरू कर दिया है, हमने एक [संगीत] अकादमी फिर से शुरू कर दी है-हम एक और अकादमी बनाने जा रहे हैं । और युवाओं को व्यावसायिक ज्ञान और वह सब सिखाएंगे ।

भारत ने, इस तरह से, इतनी प्रगति नहीं की है जैसे कि आप लोगो ने की है । लेकिन भारत के बारे में एक बात बहुत महान बात यह है कि -हमारी संस्कृति के कारण हो सकता है, हमारी भारतीय जीवन शैली के सम्मान के कारण- लोग सॉफ़्टवेयर के लिए बहुत अच्छी तरह से सुसज्जित हो गए हैं ।वे बहुत बुद्धिमान और  सॉफ़्टवेयर , क्योंकि  उनका चित्त उसमें प्रविष्ट होता है इसलिए,  यदि आप भी अपना चित्त प्रविष्ट करते हैं, मेरा मतलब है, आप भी वह सब प्राप्त कर सकते हैं।  आप उनसे ऊंचे हैं। लेकिन क्योंकि उन्हें उस संस्कृति में पाला गया है, वे बहुत बुद्धिमान हैं, लेकिन उनका चित्त व्यापक नहीं है । बिल्कुल नहीं,  वह एक बिंदु पर केंद्रित है और प्रविष्ट होता है,  और वे अब इतना अच्छा कर रहे हैं कि एक दिन ऐसा आएगा जब भारत सबसे समृद्ध देशों में से एक बन जाएगा ।

तो यह होना है कि, सबसे पहले, हमारी संस्कृति को ऐसी स्थिति में लाना होगा कि बच्चों को सभी सकारात्मक विचार और एक अच्छा चरित्र और उचित संस्कार मिलें : प्रेम , स्नेह के साथ । लेकिन उन्हें ख़राब करने के लिए नहीं, उन्हें इस तरह से पाला जाना चाहिए कि वे पूरी बात के लिए उचित दृष्टिकोण विकसित करें और उनके अपने चित्त  में गहराई हो, लेकिन अगर आप हर समय अपना चित्त भटकाते रहते हैं, तो हमारा अंत:करण समाप्त हो जाता है, क्योंकि चित्त भटक जाता है।

इसलिए, चित्त की प्रविष्टता को देखना  होगा । उदाहरण के लिए, आप किसी पेड़ को देखते हैं: फिर, बस इसे प्रेम  से देखें। देखें  पेड़ आपसे  क्या बात कर रहा है, वह क्या कह रहा है? यदि आप एक पहाड़ को  देख रहे हैं। फिर बस पहाड़ से बात करें और देखें कि पहाड़ आपसे क्या कह रहा है। अपना चित्त पूरी तरह से एक बात पर रखिए और अपने आप को देखिए, इससे आपको सहायता मिलेगी। लेकिन यदि आपका चित्त इस प्रकार का है , जो इधर – उधर भटकता रहता हैं,।और आलोचना एक और तरीक़ा है जिससे आपका चित्त भटकता है। इस पर बहुत चित्त व्यर्थ जाता है ।

तीसरा : जैसा कि मैंने   कहा, अपने आप को महत्व देना सबसे बुरी बात है उस में, तो, आपको नहीं लगता कि कुछ भी महत्वपूर्ण है, आप केवल अपने आत्म-महत्व को देखते रहते हैं ।

इतने सारे तरीक़े हैं, लेकिन सबसे अच्छा तरीक़ा यह सीखना है कि अपना चित्त कैसे संभाला जाए, और अन्य लोगों को कैसे संभालना है। यह बहुत महत्वपूर्ण है । आप लोगों से कैसे निपटते हैं एक सहज योगी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप एक उचित तरीक़े से, एक सभ्य तरीक़े से, एक ऐसा तरीक़ा जो अनुकूल हो , और सराहनीय हो तो आपके इतने सारे दोस्त बन जाएंगे और वे पता लगाने की कोशिश करेंगे : आप ऐसे कैसे हैं; आप इतने शांतिपूर्ण कैसे हैं , आप  इतने दयालु कैसे हैं, आप दूसरों की तरह उत्तेजित क्यों नहीं हैं तो आप अपनी जीवनशैली में इसे स्थापित कर सकते हैं। लेकिन जब आप दूसरों के साथ व्यवहार कर रहे होते हैं मेरा तात्पर्य है कि दूसरों के साथ सामाजिक संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं।

अब, आपको किस स्तर से शुरू करना चाहिए मैं नहीं कह सकती । यह आपके स्वभाव और योग्यता पर निर्भर करता है। लेकिन इन क्षेत्रों में से जो भी आपको लगता है कि महत्वपूर्ण है, आप केवल पता लगाने की चेष्टा कर सकते हैं कि समाधान क्या है? आप इसमें सहायता कैसे कर सकते हैं? आप कैसे इसे कार्यान्वित  कर सकते हैं?

आप सभी ऐसा कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि किसी भी चीज़  से लड़ने के लिए आपको किसी तरह का दल विकसित करना है केवल अपने चित्त को केंद्रित करना है, आपको कई समस्याओं का समाधान पता चल जाएगा।  कई समस्याओं को सुलझा सकते हैं यदि समाधान पता चल जाए । लेकिन समाधान जो आप मन की अपनी एकाग्रता से पाते हैं, वह बहुत महत्वपूर्ण है । और अगर आप वास्तव में ऐसा कर सकते हैं, तो आज आप जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जीवन के उन विभिन्न क्षेत्रों में, उन्हें आसानी से हल किया जा सकता है । यह इतना कठिन नहीं है । पारिवारिक जीवन  जैसा कि आपने कहा कि हल किया जा सकता  है, जो पत्नी और पति पर निर्भर करता है और उनके रिश्ते पर निर्भर करता है। यह बहुत सरल है।

लेकिन किसी भी कारण से हमारी पृष्ठभूमि ऐसी है, मुझे लगता है, कि हम सरल बातें समझ नहीं पाते । हम केवल जटिल बातों को समझते हैं । सरल तरीक़े से अगर आप जीवन के इन अलग-अलग पहलुओं से अलग-अलग स्तर पर लोगों से निपटेंगे तो आश्चर्य चकित रह जाएंगे, आप काफ़ी लोकप्रिय हो जाएंगे । लोग जानना चाहेंगे कि यह किस प्रकार से हो रहा है ।

मैं आपको बताती हूं एक सज्जन थे। उनका नाम श्रीमान धूमल था। वह अब नहीं हैं। ये उसे जानते हैं । वह एक गांव में थे , वह अपने खेतों और चीज़ों की देखभाल कर रहे थे, वह एक किसान की तरह थे। और किसी तरह,  उन्हें पूना में आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हो गया । पूना में आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के बाद वह अपने ही स्थान पर चले गए और उन्होंने वहां सहज योग शुरू कर दिया । और उन्होंने आत्मसाक्षात्कार देना शुरू कर दिया,  यहाँ और वहां । और यह आश्चर्य की बात थी, क्योंकि वह कभी नहीं आये मेरे पास, या वह पूना में भी कभी नहीं आए और अचानक उन्होंने मन में एकाग्रता विकसित कर ली । और लोगों ने मुझसे कहा, “मां, वहाँ इतने सारे सहज योगी बन गए हैं । उन्होंने इसे ऐसी समझ के साथ विकसित किया है । और जब मैं वहां गयी थी,  मैं हैरान थी कि  वहां हमारे पूना  से भी अधिक सहज योगी थे। पूना में सहज योगी थे जो काम कर रहे थे, लेकिन इस एक बंदे ने  अहमदनगर  और  राहुरी में लोगों के पूरे विचार ही बदल दिये थे। बहुत आश्चर्य की बात थी यह, कि वह केवल एक साधारण आदमी और एक प्रकार के किसान थे, और फिर उन्होंने अपनी गतिविधियों और चीज़ों के लिए चैतन्य का उपयोग शुरू कर दिया । और यह इतना  कि वास्तव में वह बहुत शिक्षित नहीं थे लेकिन हम हमेशा वहाँ गए और उनके घर में रहे, हम वास्तव में उस तरीक़े से आकृष्ट थे जिस तरीक़े से उन्होंने अपनी आध्यात्मिकता को दूसरों के सामने व्यक्त करने का प्रयास किया। इसी तरह आप सब लोग भी कर सकते हैं।  

अब मैंने जो देखा है कि हम बहुत शर्मीले हैं-सहज योग के बारे में शर्मीले । एक बार मैं विमान में यात्रा कर रही थी और वहाँ एक महिला बैठी थी जिससे बड़े ही गर्म स्पंदन आ रहे थे तो,मैंने उनसे पूछा, “आपका गुरु कौन है?” और वह वर्णन के एक और ही दायरे में  चली गयी, “गुरु इस तरह हैं.” मैं जानती हूं कि वह गुरु एक भयानक झूठ है,मेरा मतलब भयानक झूठा व्यक्ति है-भयानक-लेकिन वह उसकी इतनी प्रशंसा कर रही थी।  मेरे बारे में अधिक जाने बिना वह बस बोले और बोले ही जा रही थी और मैंने कहा, “इस औरत को देखो, कितना वह अपने गुरु के बारे में बात कर रही है!” और  हम सहज योग के बारे में बात करने के लिए थोड़ा शर्म महसूस करते हैं। पहले सहज योग के बारे में पेड़ों से बात करना शुरू करें, हो सकता है(हँसते हुए )  -आप  इस तरह से अभ्यास करें और फिर आप सहज योग के बारे में दूसरों से बात करना शुरू कर सकते हैं ।

आप इस काम को कर सकते हैं । आपको यह करना होगा।  जो कोई भी आपसे मिलता है, आपको देखता है, उसे आपसे पूछना चाहिए । क्योंकि यह आपके चेहरे से, आपके व्यवहार से काफ़ी स्पष्ट होगा, कि आप एक अलग व्यक्ति हैं। लेकिन फिर आपको इस बारे में खुलकर बात शुरू करनी चाहिए, अगर मैं आप लोगों की जैसी शर्मीली होती तो सहजयोग नहीं फैलता ।(हँसते हुए)

तो,  इसके बारे में शर्म करने की कोई आवश्यकता नहीं है । आपको बस यह पता होना चाहिए कि आप सहज योगी हैं, आप सभी सूफ़ी हैं और आप उन सभी लोगों से खुलकर बात कर सकते हैं जिनसे आप मिलते हैं । धीरे-धीरे आपको आश्चर्य होगा कि वे आपके चरित्र को देखेंगे, वे आपके स्वभाव को देखेंगे, और बदल जाएंगे। इसी तरह धूमल : एक बार वह एक ऑफ़िस में गए और उन्हें कुछ काम करवाना था । और वहां उन्होंने उनसे कहना शुरू कर दिया, मैं यह करना चाहता हूं।  लेकिन वह इतना शांतिपूर्ण और प्रसन्नचित्त थे कि उन्होंने उनसे पूछा, “आपको अपना भोजन किस चक्की से मिलता है?” आप देखिए, वे समझ नहीं पाए कि वह इतने शांत कैसे हो सकते हैं, और इतने ईमानदार और बहुत गहराई वाले कैसे हैं। और इससे उन्हें उस कार्यालय में बहुत लोकप्रियता मिली । यह एक कलेक्टर का कार्यालय था । और इतने सारे लोग आए और उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि मैं श्री माताजी का अनुयायी हूं और मैं सहज योगी हूं और आप सभी सहज योगी बन सकते हैं। उन्होंने कहा, ठीक है, हम भी बन जाएंगे। इस तरह  हमें सहज योग के बारे में बात करने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए । अन्यथा,  क्या होता है कि यह आपके साथ समाप्त हो जाता है।

इसलिए,  मैं बार-बार यह कहती रही हूं। आपने जो भी बातें कही हैं, वह बहुत अच्छी हैं। मेरा चित्त वहां है और मैं पूरी दुनिया की एकमात्र महिला हूं जो सभी समाचार पत्रों को पढ़ती होगी आम तौर पर महिलाएँ अखबार नहीं पढ़ती हैं, क्योंकि वह उनके लिए सिरदर्द हैं लेकिन मैं समाचार पत्र पढ़ती हूं और मैं पालन करने की कोशिश करती हूं और मैं सही बात पर पहुंच जाती हूं और, मेरा मतलब है, यह इन बातों के बारे में मेरे मन में काफ़ी है । लेकिन केवल एक व्यक्ति यह सब अकेले नहीं कर सकता। आपके पास अन्य लोग होने चाहिए जो इसका आगे प्रचार करेंगे तो,  मैं कहूँगी कि – शर्म महसूस मत करो। आपको इस बारे में बात करनी चाहिए। आप बैज पहनें। बैज पहनने पर लोग आपसे सवाल पूछेंगे, “यह कौन है?” इसके बाद आप उनसे बात करें। किसी भी तरह से आप अपने आप को उजागर करें और वह बेहतर तरीक़े से काम करेगा।

इन सभी समस्याओं का समाधान आपके द्वारा किया जा सकता है। आपकी पर्याप्त संख्या में यहां हैं, और प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उनका जो आपके पीछे हैं । इसलिए आप समझ सकते हैं कि आपका व्यक्तित्व क्या है और आप लोगों को कितना प्रभावित कर सकते हैं। ठीक है?

धन्यवाद!