Guru Puja: Shraddha

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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गुरु पूजा, कबैला, लिगुरे (इटली), २३ जुलाई २०००।

आज हम यहाँ गुरु सिद्धांत के बारे में जानने के लिए आए हैं।गुरु क्या करते हैं,आपके पास जो कुछ भी है,आपके भीतर की सभी बहुमूल्य चीज़ें,वह आपके ज्ञान के लिए उन्हें खोजते हैं। वास्तव में यह सब कुछ आपके भीतर ही है। सम्पूर्ण ज्ञान, सम्पूर्ण अध्यात्म,सम्पूर्ण आनंद, सब यही है।सही समय!यह सब आपके  भीतर समाहित है।गुरु केवल एक ही कार्य करते हैं आपको आपके ज्ञान के बारे में और आपकी आत्मा के बारे जानकारी प्रदान करना। सबके भीतर आत्मा है। हर किसी के अंदर आध्यात्मिकता है।ऐसा कुछ भी नहीं है जो आपको बाहर से मिले।लेकिन यह ज्ञान प्राप्त करने से पहले, आपका बर्ताव या कहें , आप अज्ञान में जी रहे हैं।उस अज्ञानता में आप नहीं जानते कि आपके  भीतर क्या निधि है।तो गुरु का काम है आपको बताना की आप क्या हैं? यह पहला कदम है।यह शुरुआत है आपके भीतर की जागृति होने की, जिसके द्वारा आप जान पाते हैं कि आपका अस्तित्व यह बाहर की दुनिया नहीं है, यह सब एक भ्रम है।और आप अपने भीतर ही प्रबुद्ध होने लगते हैं।कुछ लोगों को पूरा प्रकाश मिलता है और कुछ लोगों को यह धीरे-धीरे मिलता है।सभी धर्मों का सार यह है कि आपको स्वयं को जानना चाहिए।वह लोग जो धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं,आपको उनसे जाकर पूछना होगा,

आपको उनसे पूछताछ करनी होगी, कि क्या आपके धर्म ने आपको स्वयं की पहचान कराई ?अगर सभी धर्मों ने एक बात कही है तो आपको यह सारे कार्य केवल स्वयं को जानने के लिए करने हैं।लेकिन लोग कर्मकाण्डों में ढल जाते हैं।वह सोचते हैं कि यह सारे कर्मकाण्ड करके वह ईश्वर के समीप हैं।

वह स्वयं के बारे में बिल्कुल अज्ञान में रहते हैं, और दिन प्रतिदिन वह कुछ न कुछ कार्य करते रहते हैं,जिसका स्वयं से कोई लेना देना नहीं है।बहुत सारी कलाबाज़ियाँ, प्रार्थनाएँ,पूजाएँ, यह सब चलता रहता है।क्योंकि यह सब अज्ञान है।लोग उन्हें धन  देते चले जाते हैं और वह बहुत अमीर हो जाते हैं और उनकी दिलचस्पी केवल धन प्राप्त करने में है।वह आपका सारा धन ले लेना चाहते हैं,और आपको मूर्ख बनाते हैं।वह आपके अहंकार को प्रोत्साहित करते हैं।उस अहंकार के प्रोत्साहन के साथ आप उस भ्रम के सागर में बहने लगते हैं। और आप उस भ्रम में डूब जाते हैं,यह सोचकर कि आप बहुत धार्मिक हैं और आप केवल परमात्मा के साथ सम्बंधित  हैं, जो कि  आप नहीं हैं।परमात्मा को जानने के लिए आपको स्वयं को जानना होगा। बिना स्वयं को जाने, आप ईश्वर को नहीं जान सकते।यह आवश्यक है, कि आप अपने आप को जानें। लेकिन जब आप स्वयं को जानते हैं, तो आप आंशिक रूप से जानते हैं।अनुभव पर्याप्त नहीं है।ज्ञान की प्राप्ति होनी चाहिए। गुरु आपको यह स्वयं का ज्ञान देते हैं।अब आपको हिसाब लगाना है।आपको पता होना चाहिए कि आपके गुरु ने आपको क्या बताया है। क्या वह सत्य है या नहीं? वह सही है या नहीं?या यह एक और भ्रम है?अब इस ऊर्ध्वगति में लोगों को बहुत सारी समस्याएं आती हैं।

सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण ‘अहंकार’ समस्या है, खासकर पश्चिम में।अहंकार विकसित होता है और आप सोचने लगते हैं कि आप महान हैं,आप दूसरों से बेहतर हैं,और आपके बारे में कुछ ख़ास है।  मुझे लगता है यह अज्ञान अधिक ख़तरनाक है,सांसारिक अज्ञानता से,क्योंकि सांसारिक अज्ञानता में, आप ग़लत चीज़ों के परिणामों को महसूस करते हैं,लेकिन जब आप आधे रास्ते में होते हैं,जब आपकी अज्ञानता अपने बारे में होती है,जब आप एक उच्च आयाम में जा रहे होते हैं,तो आपको हमेशा समझना चाहिए कि आपके पास अहंकार नहीं होना चाहिए।तब जिस चीज़ की शुरुआत होती है वह आत्मनिरीक्षण  है।

आप स्वयं को देखना शुरू करते हैं,आपके साथ क्या ग़लत है।जब आप समझते हैं कि आपको अहंकार है, तब आप स्वयं को देखना शुरू करते हैं।या जब आप पाते हैं कि कुछ कमी है या कुछ ग़लत है,तब भी, आप आत्मनिरीक्षण शुरू करते हैं।यह एक बहुत, बहुत , बहुत सच्चा प्रयास होना चाहिए।सहज योग में कुछ लोग, बहुत प्रारंभिक अवस्था में,यह सोचने लगते हैं कि वह बहुत महान हैं और उन्हें किसी आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता नहीं है।और वह फिर से अज्ञानता के बादलों में अपनी वृद्धि करते हैं, बिना

“स्व व्यक्तित्व” या मैं कहूँ “आत्म साक्षात्कार” किए हुए।इसलिए आपको आत्मनिरीक्षण करना होगा और आपको स्वयं को देखना होगा कि आप क्या कर रहे हैं, आप क्या हैं, आप कितने आगे बढ़ चुके हैं।

कृपया आप अभी अनुवाद न करें। आप इसे बाद में कर सकते हैं।आपको पूरी एकाग्रता के साथ सुनना चाहिए।अगर आपको समझ में नहीं आता है तो भी यह काम करेगा।अब ऐसे व्यक्ति की शैली धीरे-धीरे बदलती है। कैसे? सबसे पहले एक व्यक्ति जो बेहद आक्रामक,गर्म स्वभाव वाला और अहंकार से भरा है

वह बहुत ही सौम्य और सज्जन बनने लगता है। अन्य प्रकार, जो भयभीत और डरा हुआ है और बहुत सतर्क है, वह भयमुक्त होने लगता है।उस अवस्था में आपको कोई डर नहीं है।आप सुनिश्चित होते हैं कि आप सही रास्ते पर हैं ,और आप सही मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।आप आसानी से वहाँ परेशान नहीं होते। लेकिन फिर भी आपको ऊंचे और ऊंचे उठना है, जहाँ जब आप ध्यान करते हैं, तो आप समझते हैं कि आपके

भीतर कुछ गड़बड़ है।आपने अपना साक्षात्कार प्राप्त कर लिया है।आपको आत्मसाक्षात्कार का आशीर्वाद मिल गया है।आपका स्वास्थ्य अच्छा है, आपको हर तरह के आशीर्वाद मिले हैं जिन्हें आप गिन नहीं सकते। यह सब तो है लेकिन अभी भी आपको और आगे जाना है।और वह है सहजयोग के बारे में सम्पूर्ण ज्ञान को समझना। आरम्भ के लिए आपको अपनी मानसिक क्षमता के माध्यम से समझना होगा,

और फिर आपको सत्यापित करना होगा, यह कि यह कितना सही है।आपने अब तक इसे कितना  समझा है,आपने इस पर कितना कार्य किया है,आप कितना ज़्यादा जानते हैं।और जब आप स्वयं को देखना शुरू करते हैं, तब आप भक्ति के दायरे में प्रवेश करने का प्रारम्भ करते हैं।आप एक नम्र व्यक्ति बन जाते हैं, एक मधुर व्यक्ति बन जाते हैं,आप बहुत अधिक बात नहीं करते हैं, आप किसी को परेशान नहीं करते हैं।

आप एक बहुत ही सुखद व्यक्ति हैं, बहुत ही सौम्य,बहुत समझदार।हर व्यक्ति को यह सत्यापित करना होगा कि वह दूसरों के प्रति कैसा व्यवहार कर रहा है।अब चित्त अपने आप से दूसरे पर जाना शुरू होता है,

और आप यह देखना शुरू करते हैं कि आप कैसे व्यवहार करते हैं।आप कैसे प्रेम करते हैं?आपकी करुणा की गुणवत्ता क्या है?जब आप किसी को बिना किसी अपेक्षा के प्रेम करते हैं, बस प्रेम, तब आप उस व्यक्ति के लिए बिल्कुल समर्पित हैं, बिल्कुल।आप बस आज्ञा मानते  हैं ।आप उस व्यक्ति के लिए कुछ भी करेंगे।

अगर यह प्रेम है, जिसे आप समर्पण कहते हैं। यह केवल प्रेम  है।समर्पण और कुछ नहीं, प्रेम है,

और वह प्रेम, जो अत्यंत आनंद देने वाला है, तब भक्ति शुरू होती है, यह समर्पण शुरू होता है,

और आप उस भक्ति से शुद्ध हो जाते हैं।आपमें जो भी बुरे गुण हैं,आप उन्हें स्मरण कर सकते हैं, आपमें जो भी कमियाँ हैं,जो भी समस्याएँ हैं,आप समझते हैं और आप उन्हें छोड़ देते हैं।

अब यदि आप किसी व्यक्ति को समान गुण और समान समस्याओं के साथ देखते हैं,आप उस व्यक्ति के प्रेम में,सहन करने की कोशिश करते हैं।ऐसे व्यक्ति केवल सहन करते हैं।कोई आक्रामकता नहीं है,

और यह लोग क्षमा कर देते हैं।आत्म साक्षात्कारी लोग क्षमा करते चले जाते हैं,क्षमा करने की उनकी क्षमता ज़बरदस्त है।वह किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं रखते।उन्हें किसी के प्रति कोई क्रोध नहीं है।

वह बस सहन करते जाते हैं और क्षमा और क्षमा करते जाते हैं।यह क्षमा सिर्फ़ एक संगीत है, मुझे कहना चाहिए, आपकी भक्ति का।क्षमा की मात्रा जो इन गुरुओं में है, ईसा मसीह के जीवन से देखी जा सकती है।

उन्हें प्रताड़ित किया गया, सूली पर चढ़ाया गया, ज़्यादातर संतों पर अत्याचार किया गया।लोगों ने उन्हें कभी पसंद नहीं किया।और उन्हें सूली पर चढ़ाया गया, लेकिन जैसा आप जानते हैं कि उन्होंने कभी अप्रसन्नता व्यक्त नहीं की,उन्होंने कभी बदला नहीं लिया,उन्होंने कभी ऐसा कुछ नहीं किया जो करुणामय नहीं था।उन्हें ऐसे लोगों पर दया और करुणा आती थी,उन्हें लगता था कि ‘हे परमात्मा, कृपया इन्हें क्षमा कर दें। यह जो कर रहे हैं यह नहीं जानते।अत्यंत करुणामय।और वह जो हैं, उनका स्वभाव वैसा ही बन जाता है।जब यह उनका स्वभाव बन जाता है, तब वह पूर्णतया शांत लोग बन जाते हैं।वह परेशान नहीं होते हैं।जो कुछ भी हो रहा है, उससे वह कभी परेशान नहीं होते और उन्हें लगता है कि यह ईश्वर की इच्छा है। क्योंकि कुछ भी उन्हें परेशान नहीं कर सकता,कुछ भी उन्हें दुखी नहीं कर सकता।वह केवल अपनी भक्ति का आनंद लेते हैं।शायद उनके गुरु की भक्ति।परमात्मा की भक्ति।उस भक्ति में वह सुंदर कविता लिख सकते हैं, वह नृत्य कर सकते हैं,वह गायन कर सकते हैं, क्योंकि शांति भीतर है और वह स्वयं का आनंद ले रहे हैं।जब वह अकेले होते हैं, तब वह कभी अकेले नहीं होते हैं,वह स्वयं का आनंद लेते हैं।

वह जानते हैं कि वह परमात्मा के साथ एकरूप हैं, और परमात्मा के आशीर्वाद का आनंद लेते हैं । एक और बात यह है कि वह कभी भी कृत्रिमता नहीं अपनाते हैं। वह कभी चिंतित नहीं होते हैं, कभी परेशान नहीं होते हैं,वह ना तो भविष्यवादी हैं और न ही अतीत के बारे में सोचते हैं,वह वर्तमान में हैं।जब वह वर्तमान में होते हैं,तब वह बिल्कुल शांत रहते हैं।यदि कोई समस्या है, या उनके साथ कुछ भी होता है, तो वह तुरंत निर्विचार समाधि में चले जाते हैं।यही उनकी क्षमता है।गुरु बनने के लिए आपको उस व्यक्तित्व को विकसित करना होगा न कि किसी चीज़ से बंधने के लिए।अब मैं आपको अपना उदाहरण बताती हूँ।

मैं कभी जल्दी नहीं करती, मैं समय के बारे में कभी परेशान नहीं होती।एक बार मैं अमेरिका जा रही थी –

क्योंकि अगर आपको विश्वास है कि आपके लिए परमात्मा की योजना है,तो आप परेशान नहीं हो सकते,

परमात्मा आपकी देखरेख कर रहे हैं, इसलिए परेशान क्यों होना है , मैं अमेरिका जा रही थी और वहाँ एक बच्चा नीचे गिर गया।मैं बस उठकर जाने ही वाली थी , उसकी बाँह टूट गयी। मैंने बच्चे को देखा तो मैंने कहा “सब ठीक है, मैं उस बच्चे को सही कर देती हूँ”।लेकिन, उन्होंने कहा, “आप अमेरिका जा रही हैं!” 

मैंने कहा, “मैं वहाँ हर हाल में चली जाऊंगी! मैंने उस बच्ची को ठीक किया, इन सब में आधा घंटा लग गया, मैं बाहर आई और कहा – “अब चलो, हवाई अड्डे चलते हैं।” उन्होंने कहा,” माँ आप बहुत देर से आई हैं।”  मैंने कहा,” मैं कभी देर नहीं करती।चलो चलते हैं!”हम हवाई अड्डे पहुंचे,और जिस विमान से मैं जा रही थी, वह ख़राब था,इसलिए एक और विमान वाशिंगटन जा रहा था ,न्यूयॉर्क नहीं,और मैं केवल वाशिंगटन जाना चाहती थी!तो आप कल्पना कीजिए कैसे चीज़ें कार्यान्वित होती हैं,और हम उन्हें ‘सहज’ कहते हैं। यह कार्य सहज ढंग से हुआ है।इसका मतलब है कि यह सहज है।लेकिन सबसे पहले आपका व्यक्तित्व ऐसा होना चाहिए कि आपकी भक्ति,इतनी महान हो कि परमात्मा आपकी देखभाल करने के लिए मजबूर हो जाए। आपकी देखभाल करने के लिए मजबूर!आपको यह समझना होगा कि ईश्वरीय शक्ति आपके आस-पास है, यह ईश्वरीय शक्ति आपकी सुरक्षा के लिए पूर्णतया उत्तरदायी है। जो कुछ भी आप करना चाहते हैं उसके लिए।आप कह सकते हैं कि “माँ आप बहुत शक्तिशाली हैं”।आप भी बहुत शक्तिशाली बन सकते हैं,आप पूरी तरह से दिव्य कार्य करने के लिए समर्पित हों, तो आपके पास भी सभी शक्तियां होगीं,

और परमात्मा आपको सभी आवश्यक कार्य प्रदान करेंगे जो आप करना चाहते हैं, आवश्यक समय जो आपके पास करने के लिए होना चाहिए ।सब कुछ परमात्मा द्वारा प्रदान किया जाता है। लेकिन करुणा,जब यह अन्य लोगों से परमात्मा तक फैलती है,या दिव्य व्यक्ति या आपके गुरु के लिए,फिर जीना बहुत आसान और सरल हो जाता है,किसी भी प्रकार कि जटिलता नहीं,सब कुछ सुलझ जाता है,और आप किसी भी चीज़ के बारे में परेशान नहीं होते हैं।आप बस अपनी आँखें बंद करें और चीज़ें कार्यान्वित होती हैं।सब कुछ कार्यान्वित होता है जैसे कि आपका संकल्प है,लेकिन आपको संकल्प नहीं लेना है, इसके बारे में सोचना नहीं है,यह कार्य स्वतः होता है, परमात्मा सब कुछ देखते हैं।यह आपके आराम की देखभाल करते हैं, आपके स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं, सब कुछ की देखभाल करते हैं।और यह ईश्वरीय मदद,आप खोजते नहीं, आप मांगते नहीं,लेकिन आप एक व्यक्तित्व हैं, जिसके लिए परमात्मा उत्तरदायी हैं।आप परमात्मा के एक विशेष उत्तरदायित्व हैं।और वह जानते हैं कि आपके लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं।एक उदाहरण है, मैं कई ऐसे दे सकती हूं, जहां मुझे लगता है,  कि कोई मुझसे मिलने आ रहा है,और लोगों ने मुझसे कहा “मां, वह बहुत नकारात्मक है”, वह कभी नहीं आएगा,वह कभी नहीं आएगा।सभी सकारात्मक चीज़ें होंगी, और यदि कोई नकारात्मक चीज़ें होती हैं,तो आप अपनी करुणा का उपयोग करेंगे।यदि यह नकारात्मक है तो आप अपनी करुणा का उपयोग करेंगे और आप समस्या का समाधान करेंगे।आप अपनी समस्याओं को हल कर सकते हैं,अपने आस- पास की, अपने समुदाय की। अब आपको अपना आत्मसाक्षात्कार मिल गया है।आप इसमें कितना आगे बढ़ गए हैं, मुझे नहीं पता।मुझे महिलाओं से कुछ शिकायतें हैं, , बहुत सारी महिलाएं,कि वह ध्यान नहीं करती हैं कि वह स्वयं की देखरेख नहीं कर रही हैं,

वह आत्मसाक्षात्कारी नहीं हैं,और इसीलिए कई पुरुष उन्हें तलाक़ देना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह महिलाएं किसी काम की नहीं हैं,और कुछ पुरुष भी ऐसे हैं।इस समस्या को हल करने के लिए आपको करुणामय होना होगा,और आपको किसी न किसी तरह से, करुणा से, अपने जीवन साथी को प्रसन्न करना चाहिए।आख़िर पुरुष महिलाओं की तुलना में बहुत अधिक व्यस्त हैं।लेकिन महिलाएं कई अन्य चीज़ों में लिप्त हैं।उन्हें अपने परिवार, अपने बच्चों, अपनी हर चीज़ की देखभाल करनी होती है।

और उनका दिमाग़ ऐसी सभी सांसारिक चीज़ों में व्यस्त है,जिससे उनके पास ध्यान करने का समय नहीं है।ध्यान के बिना आपका उत्थान नहीं हो सकता।आपको ध्यान करना होगा।लोग सोचते हैं कि, “अब हमें आत्म साक्षात्कार मिल गया है, इसलिए सब ठीक है”। नहीं!हर दिन आपको ध्यान करना चाहिए,

क्योंकि इस से सफ़ाई होती है।सफ़ाई के साथ आप समझते हैं।आप समझते हैं कि क्या आवश्यक है,

और क्या आवश्यक नहीं है, अब आप निर्मल हो गए हैं।जो कि परमात्मा द्वारा किया जाता है।

लेकिन आपको निरंतर रूप से ध्यान करना चाहिए।धीरे-धीरे आप पाएंगे कि आपका ध्यान बहुत गहरा हो जाएगा।आप बहुत, बहुत गहरे हो जाएँगे और आपको अपनी शक्तियाँ दिखायी पड़ने लगेंगी । आप जहाँ कहीं भी होंगे, नकारात्मकता वहाँ से भाग जाएगी।सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।आप जो भी करना चाहते हैं वह आपके लिए उपलब्ध है।दूसरों की मदद करने की,या किसी को कुछ देने की, आपकी जो भी इच्छा है,वह आपको बस मिल जाती है।यह मेरा अपना अनुभव है जो मैं आपको बता रही हूं।आपको हर शाम कम से कम दस मिनट और सुबह लगभग पाँच मिनट ध्यान करना है।

पूरे समर्पण के साथ, पूरे आदर भाव के साथ।मैंने कुछ लोगों को यहाँ देखा है, ऐसी भक्ति, ऐसी भक्ति,

जो “श्रद्धा” है – भक्ति से ऊँची है -जो आपके अस्तित्व का अंग प्रत्यंग बन जाती है।यह आपको पूरी तरह से ढक देती है।जब आपके पास वह श्रद्धा है, तो यह बहुत ही चमत्कारी है।बहुत सारे चमत्कार होते हैं।यह सच है कि कुछ लोग ठीक हो गए थे,केवल मेरे बारे में सोचने से, यह एक सत्य है।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके पास उस स्तर की श्रद्धा थी,इसका मतलब है कि उन्हें उस श्रद्धा का विकास करना है।अब श्रद्धा कैसे विकसित की जाए,जो कि यह आत्मा का एक प्राकृतिक प्रकाश है।क्योंकि लोग बहुत कोशिश कर रहे हैं,श्रद्धा को विकसित करने के लिए,लेकिन श्रद्धा को मानसिक गतिविधि द्वारा विकसित नहीं किया जा सकता है,किसी गतिविधि से नहीं, केवल मौन ध्यान से।अगर आप ध्यान करते हैं – मैंने हमेशा आपको ध्यान करने के लिए कहा है।मैं तुरंत हर ऐसे व्यक्ति को जान लेती हूं,जो ध्यान कर रहा है, और जो नहीं कर रहा ।वह मेरी पूजा में आएंगे, ठीक है,और वह सहज योग के बारे में बात करेंगे,वह बाहर जाएंगे और इसे लोकप्रियता के लिए करेंगे।बहुत से लोग ऐसे हैं।वह बाहर जाते हैं और लोकप्रियता के लिए इसे करते हैं।लेकिन अंदर ही अंदर उन्होंने अभी तक अपने स्वयं को ढूंढा नहीं  है।

तो इस विकास के स्तर पर आपको प्रोत्साहित किया जाना चाहिए,और यह समझा जाना चाहिए कि ध्यान और आत्मनिरीक्षण के माध्यम से आप उस स्थिति तक बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं,आत्मनिरीक्षण से आप  एक नई गुणवत्ता विकसित करेंगे जिस से आप चीज़ों का समाधान कर पाएंगे ।  आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति का यह एक और गुण है। यह आपकी सभी समस्याओं का समाधान दे सकता है।

यह सुझाव दे सकता है कि आपकी किस तरह मदद की जा सकती है । फिर, श्रद्धा से एक प्रकार का भाईचारा विकसित होता है।आप सहज योग पर बड़े व्याख्यान दे रहे हैं,आप सभी प्रकार के काम कर सकते हैं,लेकिन जब तक आपके पास श्रद्धा नहीं है, तब तक आप उठ नहीं सकते हैं।और यह श्रद्धा आपके भीतर एक तरह का प्रेम है,मुझे कहना चाहिए, जो कोमल अग्नि की तरह फैलता है,जो जलाता नहीं है, जो गर्मी नहीं देता है,लेकिन ठंडी, सुंदर हवा की तरह महसूस होता है,तो आपको समझ में आता है।आप कभी किसी सहज योगी के बारे में ग़लत नहीं बोलेंगे।मैं कभी किसी की नहीं सुनती, जो मुझे सहज योगी के विरुद्ध कुछ कहता है।एक समय तक,परन्तु जब यह एक सामूहिक शिकायत होती है,तब मैं थोड़ा परेशान होती हूं और मैं इसके बारे में मुखिया से बात करती हूं।लेकिन अन्यथा अगर कोई व्यक्ति आता है और मुझे ऐसी वैसी बातें बताता,मैं बस उस व्यक्ति को कहती हूं, “आप आत्मनिरीक्षण करें, ऐसा नहीं है”।

दूसरों में दोष ढूंढना,एक सामान्य खेल है, जो सभी मनुष्य खेलते हैं।वह कभी अपने दोष नहीं देखते।

दूसरों के दोष खोजने से क्या लाभ?दूसरों के दोष खोजने से आपकी कोई मदद होने वाली नहीं हैं।अपने भीतर के दोषों को खोजने की कोशिश करें, जिन्हें आप ठीक कर सकते हैं, जिन्हें आप सुधार सकते हैं, जिन्हें आप कार्यान्वित कर सकते हैं।यह आपकी एक ज़िम्मेदारी है, आपको स्वयं को पता होना चाहिए

कि आप अपने दोषों का बेहतर पता लगा सकते हैं ,और उन्हें ठीक कर सकते हैं।लेकिन कुछ लोगों को अपने शौक़ पर बहुत गर्व है ,वह इस तरह से बात करते हैं, “मुझे यह पसंद है, मुझे यह पसंद है”।

आत्मा के बारे में क्या?आपको यह पसंद है, आपको वह पसंद है, फिर आपकी आत्मा के बारे में क्या?

क्या वह पसंद है?क्या वह आनंदित है?वह कहते रहते हैं, “मुझे यह पसंद है, मुझे वह पसंद नहीं है,मुझे यह पसंद नहीं है!” यह पश्चिम में बहुत आम है।अब देखिए, कुछ महिलाओं ने मेरे लिए यह सुंदर कालीन बनाए हैं।यह इतने मोटे हैं कि जब मैं इन पर चलती हूँ तब मैं थोड़ा संतुलन खो देती हूं,लेकिन जिस प्रेम से यह बने हैं,वह मुझे इतना हर्षित करता है, इतना ख़ुश करता है कि आप कल्पना नहीं कर सकते हैं कि मैं उनके बारे में क्या महसूस करती हूं।यह आनंद, यह आनंद का महासागर, आपके भीतर है।

और जब यह हलचल शुरू होती है, तब यह आपको पीड़ा नहीं देती है, यह आपको सुंदर, मुझे नहीं पता है कि इसे व्यक्त करने के लिए शब्दों का कैसे उपयोग करुँ,यह आपके अस्तित्व पर एक बूंदा बांदी की तरह है,यह आपके अस्तित्व पर एक आशीर्वाद की तरह है।दूसरे लोगों का प्रेम आपको रोमांचित करता है।आप इसके लिए नहीं पूछते हैं, लेकिन यदि आप एक ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जो बहुत प्रेमी और दयालु है,तो उस तरह के रिश्ते में वास्तविक दोस्ती है।लेकिन सहज योगियों के बारे में बुरी बात करना यह बहुत ग़लत है।और फिर सभी से बात करते हुए कि, “इस व्यक्ति के साथ यह ग़लत है,उसने यह किया था, उसने ऐसा किया था”, यह बहुत ही बहुत ही ग़लत है,और उस व्यक्ति के विरुद्ध सामूहिक भावना पैदा करना, बजाए उस व्यक्ति की मदद करने के। हमेशा लोग परेशानी में रहते हैं।फिर सामूहिक रूप से आपको उस व्यक्ति की मदद करनी चाहिए।उस व्यक्ति की बुराई न करें। कुछ ग़लतियाँ हो सकती हैं,लेकिन अगर आप उस व्यक्ति के विरुद्ध बात करना शुरू करते हैं और कहते हैं,कि ‘यह उसके साथ ग़लत है,वह उसके साथ ग़लत है’,

तो आप सहज योगी नहीं हैं।आप एक सहज योगी हैं जब तक आत्मनिरीक्षण के माध्यम से आप अपने स्वयं के दोषों को देख सकते हैं।अब आप में से कई, मुझे कहना चाहिए बहुत सारे लोगों को आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हो चुका है।आपको अनुभव है।लेकिन आप में से कुछ के पास ज्ञान नहीं है।

वह ज्ञान जिसे आपको प्राप्त करना चाहिए और सत्यापित करना चाहिए कि वह ज्ञान वास्तव में है या नहीं।अमेरिका की तरह, एन. आई. एच. में, जो स्वास्थ्य के लिए एक संस्थान है,वह एक सहज योगी का परीक्षण करना चाहते थे और वहाँ डॉक्टर थे। एक डॉक्टर आगे आया और कहा,ठीक है, मुझे अपने चैतन्य के माध्यम से बताइए, मेरे साथ क्या ग़लत है।तो लड़की ने कहा, “सर, आपके हृदय में कुछ गड़बड़ है”।

उन्होंने कहा, “यह सही है”।क्योंकि उसकी एक महीने पहले ही हृदय की शल्य चिकित्सा हुई थी

और वह अस्पताल से बाहर था।बिल्कुल सही, और इसने उन्हें चौंका दिया।वह निदान, आप देखते हैं, रोगी को आधे रास्ते में मारता है।बस चैतन्य को महसूस करके यह एक व्यक्ति का निदान करने का बहुत आसान तरीक़ा है,और उन्होंने हमें इतना अच्छा ध्यान दिया,वह अपने अस्पतालों में सहज योग विकसित करना चाहते हैं।इसलिए आपको भी स्वयं को जांचना  चाहिए, स्वयं की जांच करनी चाहिए और अपने बारे में पता लगाना चाहिए कि आप क्या हैं?पति और पत्नी कहें – अब पत्नी ध्यान करती है,वह सब कुछ जानती है, वह अपने पति के बारे में जानती है, उसके साथ क्या ग़लत है और वह उसे नहीं बताती है।

वह सहन करती है,वह शिकायत नहीं करती है, वह कुछ भी नहीं मांगती है,वह केवल सहन करती है।

और यह सहिष्णुता पति को आश्वस्त करती है कि उसका व्यक्तित्व उससे अधिक उच्च है।वह स्वयं कुछ भी हो सकता है, लेकिन वह समझता है कि यह वही है जो उसने  प्राप्त किया है, एक महान व्यक्तित्व।हमारे पास कई ख़ामियां हैं, विशेषकर नैतिक रूप से, पश्चिम में,लोग वास्तव में , ऐसे हैं, मैं आपको बताती हूं, जैसे कि एक सांप ने उन्हें काट लिया हो ।यहां लोग जो चीज़ें करते हैं, वह कभी भी उन लोगों के दिमाग़ में नहीं आती हैं, जो विकसित नहीं हैं। इसलिए विकास का अर्थ मान लिया गया है सभी प्रकार के परित्याग,सभी प्रकार के आवारा स्वभाव,और उन्हें लगता है कि वह बहुत स्वतंत्र हैं और वह आनंद ले सकते हैं।यह शैली बहुत आम है,लेकिन आप सिर्फ़ स्वयं को आंकें। क्या आप इन प्रकारों में से एक हैं?या क्या आप उन लोगों में से हैं जो अपनी ऊर्ध्वगति में आपसे ऊपर हैं।यह एक प्रक्रिया है, मुझे स्वीकार करना चाहिए।यह केवल इतना नहीं है कि आप उस स्थिति पर पहुंच जाते हैं।कभी-कभी बहुत नए सहज योगी भी बहुत पुराने सहज योगियों से बेहतर होते हैं,क्योंकि उनकी बहुत तीव्र इच्छा होती है।हम क्या खोज रहे हैं?हमें समझना चाहिए कि हम क्यों खोज रहे थे -क्योंकि हम स्वयं को जानना चाहते थे।

किसी तरह, हम जानते थे कि हमें स्वयं को जानना है,और हम नहीं जानते हैं, इसलिए हम खोजते हैं।

हम खोजते हैं । हम सभी तरह की चीज़ें करते हैं,मेरा मतलब है कि सभी ग़लत चीज़ें भी खोज के नाम पर होती हैं।लेकिन यह खोज है जो आपको सहज योग में लाती है। फिर आपको अपना आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करना होगा,जो कुंडलिनी के माध्यम से बहुत आसान है।कुंडलिनी अधिकतर चीज़ों को, अधिकतर चीज़ों को कार्यान्वित करती है।जैसे किसी ने मुझे बताया कि एक रात में,उसने शराब पीना और धूम्रपान करना छोड़ दिया – एक रात में।मेरा मतलब है कि मैं यह नहीं बताती, मैं ऐसा कभी नहीं कहती।लेकिन एक रात में  उसने छोड़ दिया,और उसने कहा, “मैं अपने बालों की बनावट के बारे में बहुत ध्यान देती थी और मैं अपने बालों की बनावट अलग तरीक़े से बनाती थी,नाई के पास जाती थी,सज्जा करने वाली के साथ इतना समय बिताती थी, वग़ैरह।” उसने कहा, “मैंने इसे छोड़ दिया”।साथ ही उसने कहा, “मैंने ऐसे कपड़े पहना करती थी जो बहुत नैतिक नहीं थे,फिर मैंने अपने शरीर का सम्मान करना शुरू कर दिया और मैंने उचित पोशाक पहनना शुरू कर दिया।”  यह सब ज्ञान आपके पास आता है,अनायास, यह आपके भीतर है, क्योंकि यह सब आपका अपना है।यदि आपके गुरु आपको बताते हैं, तो भी आप निर्देशित हैं।गुरु का काम लोगों का मार्गदर्शन करना है।तो इस मोड़ पर, क्या कमी है?सहज योग में क्या कमी है?वह मुझे आपको बताना है।हमारे पास बहुत सारी सामूहिक आपदाएँ हैं – सभी प्रकार की।हमारे पास कई भूकंप हुए, हमारे पास कई बाढ़,बारिश हुईं, फिर मिट्टी – कीचड़ नदी की तरह नीचे आ गई और दुनिया में बहुत सारी आपदाएं आईं और सहज योगी उनसे बच गए।सभी सहज योगियों को इससे बचाया जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं है,लेकिन बचाए जाने के बाद, आपकी समझ क्या है?आप क्या जानते हैं?यह आपदाएं क्यों आ रही हैं?क्योंकि सहज योग बहुत सामूहिक नहीं है।इसे बहुत सामूहिक बनना  है।इसे बहुत अधिक फैलाना है, चारों ओर।यह बहुत लोगों को बताना है, जो हम नहीं करते हैं।हम एक ठहराव पर हैं, बहुत कम हम इसे करते हैं।लेकिन सब बाहर जाओ! मसीह के बारह शिष्यों को देखो!बेशक लोग ग़लत बातों में चले गए।लेकिन उन्होंने कैसे कार्य किया और कितनी तीव्रता से उन्होंने यह किया।यदि आपके पास यह तीव्रता नहीं है,और यदि आप पूरी तरह से समर्पित नहीं हैं सहज योग के प्रसार के लिए,तो सामूहिक समस्याओं को हल नहीं किया जा सकता है।आप अपनी दैनिक सांसारिक चीज़ों के साथ व्यस्त हैं,और अपनी अन्य नौकरियों और सब कुछ  हैं।यह सब ठीक है, सहज योग में कोई आपत्ति नहीं है।लेकिन आपका अधिक चित्त होना चाहिए जीवन के इस पक्ष पर कि -‘हम सामूहिकता के लिए क्या कर रहे हैं? क्या हम इसके बारे में बात कर रहे हैं?क्या हम सहज योग फैला रहे हैं?क्या हम लोगों को इसके बारे में बता रहे हैं? ‘मैं आश्चर्यचकित थी, एक बार मैं विमान से आ रही थी और एक महिला मेरे बगल में बैठी थी उस औरत की चैतन्य लहरियाँ अच्छी नहीं थीं ।मैंने स्वयं को बंधन के संरक्षण में ले लिया,और मैंने उससे पूछा कि वह अपनी आध्यात्मिकता के लिए क्या कर रही है,और उसने ‘बहाई’ लोगों का नाम लिया।हे भगवान! अगर यह लोग बाहर फैले, यह बहुत सारे हैं!

तो, क्या होगा?आपदाएँ ?वह ऐसे नकारात्मक लोग हैं,असंभव है कि वह दुनिया का किसी भी प्रकार का भला  कर सकते हैं।और जैसे आप देखते हैं, कोई भी, झूठे गुरु,कैसे लोगों को उनके पास ले जाया जाता है, वह उन्हें कैसे ले जाते हैं,और कैसे वह अपना संदेश फैलाते हैं।मैंने लोगों को सड़क पर गाते हुए देखा

है, अपने गुरु की प्रशंसा गाते हुए और अजीब कपड़े पहने हुए भी -हम उस तरह से नहीं चाहते हैं।

लेकिन निश्चित ही आपको ज्ञान मिला है,निश्चित ही आपको आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हुआ हैं।

लेकिन आपने सहज योग के लिए जो किया है यह एक विषय है।आपको सहज योग का प्रसार करना है…. हर जगह।उदाहरण के लिए, आप एक बिल्ला पहनते हैं,फिर वह आपसे पूछेंगे, “यह क्या है?”फिर आपको उन्हें बताना होगा कि यह क्या है।आप सहज योग के बारे में ही बात करना शुरू करते हैं!सहज योग के अलावा कोई बात नहीं।आपको सहज योग के बारे में बात करनी है, सहज योग का प्रसार करना है:  जब तक आप, 

इसे नहीं करेंगे यह सामूहिक नहीं होगा, और तब तक सभी आपदाएं,जो सामूहिक निरर्थकता के कारण होती हैं, आपको मिलती हैं।आप इतनी सारी चीज़ों से बच जाते हैं।अगर प्रदूषण भी है, एक सहज योगी पर इसका कोई प्रभाव नहीं होगा।अगर भूकंप जैसी आपदा आती है तो भी सहज योगी बच जाएंगे।लेकिन पूरी दुनिया को क्यों नहीं बचाएँ?एक के बाद एक आपदाएँ आ रही हैं, और यदि आपके पास करुणा है तो आपको उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जो किसी भी प्रकार की विपत्ति या किसी मुसीबत में पड़ सकते हैं।बेशक मैं बहुत लोगों का इलाज कर सकती हूं, इसमें कोई संदेह नहीं।लेकिन मुझे नहीं पता कि सहज योग को कैसे सामूहिक बनाया जाए।अब आप यहाँ बहुत सारे लोग हैं,आप सभी कम से कम सौ लोगों को आत्मसाक्षात्कार देना शुरू कर सकते हैं।हर जगह जाइए।सहज योग की बात कीजिए। परमात्मा की प्रशंसा गाओ,

और आप पूरी दुनिया को बचाएंगे।यह कुछ लोगों को बचाने से नहीं है,महान सत्य युग हो सकता है,

आपके पास बल्कि आपके पास इस धरती को बचाने के लिए भी है।आपको इसमें शामिल लोगों को बचाना होगा।मेरा मतलब है, जिस तरह से यह लोग हैं,मैंने उनमें से कई को दूरदर्शन पर देखा है।निर्लज्जता से वह किसी ऐसी चीज़ के बारे में बात कर रहे हैं, जिसे वह नहीं जानते हैं।और उनके पीछे हज़ारों और हज़ारों लोग हैं।ऐसा नहीं है कि लोग मूर्ख हैं।ऐसा नहीं है कि वह ग़लत रास्ते पर जाना चाहते हैं,लेकिन वह लोग, जो झूठे हैं,या जो ग़लत हैं, उन्हें पता है कि उन्हें कैसे लुभाना है,कैसे पकड़ना है, उनसे कैसे बात करनी है।लेकिन एक सहज योगी, आप देखते हैं, अगर वह किसी को देखता है, जिसकी नकारात्मक चैतन्य लहरियाँ हैं, तो वह भाग जाएगा।वह ऐसे समाज से बचेगा, उनके पास नहीं जाएगा,और कहेगा, “ओह, बहुत ख़राब चैतन्य, हमें नहीं चाहिए!”।इसलिए आपको साहसी बनना होगा और इन जगहों पर जाना होगा, लोगों से बात करनी होगी और इसे सामूहिक बनाना होगा।अन्यथा आप इस दुनिया को परमात्मा के प्रकोप से नहीं बचा सकते।ईश्वर प्रकोपी हैं, इसमें कोई शक नहीं।आपके लिए, वह आपको बचाएँगे, लेकिन क्या फ़ायदा?

हमें इस धरती माता को बचाना है।और इसके लिए आपको तैयार रहना होगा,आपको इसे पूरा करना होगा, और जब भी मौका मिले आपको सहज योग का प्रसार करना होगा।कुछ लोगों ने मुझसे कहा, “माँ, आप आएँगी तो सब ठीक हो जाएगा।”क्यों? इतना क्या है? …. आप भी मेरे जैसे हो सकते हैं।आप इसके बारे में लोगों से बात कर सकते हैं।मैंने सहज योग की शुरुआत एक व्यक्ति के साथ की थी और उस समय हर जगह पूर्ण अंधकार था।कोई साधक, कुछ भी नहीं, और भयानक लोग,लेकिन यह कार्य हुआ और स्वीकृत हुआ।तो एक व्यक्ति को इतने सारे सहज योगी मिल सकते हैं,क्यों न आप लोग भी ऐसा करें और इस बारे में बात करें।आपका व्यवहार, आपकी शैली,सब कुछ निश्चित रूप से उन्हें प्रभावित करेगी ।आपको इस तरह से कार्य करना है कि आप सामूहिक चेतना के हमारे लक्ष्य को प्राप्त करें।यह केवल सहज योगियों के लिए नहीं है, यह सभी के लिए है।ताकि यह सभी आपदाएं जो हो रही हैं,भयानक चीज़ें जो हो रही हैं, रुक जाएं।पूरी तरह से रुक जाएं, मैं आपको आश्वासन देती हूं, इसे रोका जा सकता है।क्योंकि आप हमेशा बच जाते हैं।तो जो लोग जिनको आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हो रहा है, वह बच जाएंगे।क्यों नहीं इस बारे में खुलकर बात की जाए,लोगों से, कि अगर हम ग़लत करते हैं, अगर हम अनैतिक हैं,अगर हम धोखा देते हैं, अगर हम दूसरों पर अत्याचार करने की कोशिश करते हैं और हम विनाश की इतनी शक्ति बन जाते हैं,

तो यह सामूहिक आपदाएं होंगी और मुझे लगता है कि हम ‘इसके लिए ज़िम्मेदार होंगे।आप जो कुछ

भी उठाते हैं, आप जिस भी विषय को उठाते हैं, आपको उससे लड़ने के लिए कोई संगठन शुरू नहीं करना है। लेकिन लोगों को समझाने की आपकी शक्ति से ही और सहज योग में लाने से इतना अन्तर पड़ेगा।मुझे आशा है कि आप एक गुरु के रूप में समझेंगे कि आपको क्या करना है।

एक गुरु के रूप में बहुत सी चीज़ें हैं और आपके चरित्र के रूप में, कल, जैसा कि उन्होंने दिखाया

कि लाओ त्से ने गुरुओं के बारे में लिखा है,कैसे वह इन सब से ऊपर थे, उथल-पुथल के ऊपर, ईर्ष्या से ऊपर, तुच्छ बातें करने से ऊपर।वह बहुत महान हैं, वह गुरु हैं,और वह गुरु होंगे,और यदि आप ऐसा करने की कोशिश करते हैं तो आप गुरु होंगे।यह आपको हासिल करना है।मुझे पता है कि कुछ ने इसे प्राप्त किया है,लेकिन आप में से अधिकांश को दया और प्रेम के साथ प्राप्त करना है।

आप सबको परमात्मा का अनंत आशीर्वाद |