Without knowing the Self you cannot get rid of your problems

Royal Albert Hall, London (England)

2000-09-26 Without knowing the Self you cannot get rid of your problems, London, England, 51'
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2000-09-26 सार्वजनिक कार्यक्रम, 

रॉयल अल्बर्ट हॉल, लंदन, ब्रिटेन

 सत्य को खोजने वाले सभी साधकों को मेरा प्रणाम। इस आधुनिक समय में यह भविष्यवाणी की गई थी कि बहुत – बहुत से लोग सत्य की खोज करेंगे और आप इसका प्रमाण देख सकते हैं। बहुत से लोग सत्य की खोज करेंगे क्योंकि वे असत्य से तंग आ जाएंगे, उन्हें यह भी पता चल सकेगा है कि बहुत सारी चीज़ें सतही हैं, जो बिल्कुल संतोषजनक नहीं है (यह) इस आधुनिक समय का आशीर्वाद है, यद्यपि हम कहते हैं आधुनिक समय सबसे ख़राब है। इसके अत्याचार के कारण, इसकी समस्या के कारण  लोग सच्चाई जानना चाहते हैं और उन्हें सच भी पहले से पता चल जाएगा। इसके अलावा आपको अपने बारे में भी सत्य जानना होगा। मैंने आपको कई बार कहा है कि सच यह है कि आप यह शरीर नहीं हैं, आप यह मन नहीं हैं, आप यह भावनाएं नहीं हैं, अपितु आप शुद्ध आत्मा हैं।  आप हैं, आप सभी  हैं, यह केवल एक कहानी नहीं जो मैं आपको बता रही हूं, यह एक तथ्य है। लेकिन जब वे कहते हैं कि स्वयं को जानो। सभी शास्त्रों में उन्होंने एक समान बात कही है, आपको स्वयं को जानना चाहिए। क्योंकि यदि आप स्वयं को नहीं जानते हैं तो आप परमात्मा को कैसे जानेंगे? इसलिए सबसे पहले आपको स्वयं  को जानना चाहिए और स्व भीतर है। समस्या यह थी कि स्वयं को जानने के लिए अंदर कैसे प्रवेश करें, स्वयं को अनुभव करने के लिए, स्वयं की शक्ति को अनुभव करने के लिए आपको अंदर प्रवेश करना होता था। और स्व को जाने बिना आप अपनी समस्याओं से छुटकारा नहीं पा सकते। यह सभी शास्त्रों में कहा गया है, सभी शास्त्रों में। विभिन्न भाषाओं में, अलग-अलग तरीक़ों से। तथ्य यह है कि हम स्वयं को नहीं जानते।

इसके लिए हमें अपने सृष्टिकर्ता को दोष नहीं देना चाहिए, क्योंकि सृष्टिकर्ता ने हमारे भीतर सुन्दरता से एक शक्ति की व्यवस्था की है, जो हमें स्वयं का ज्ञान  देगी और यह शक्ति रीढ़ की हड्डी के आधार पर त्रिकोणीय हड्डी में है, जिसे कुंडलिनी के नाम से जाना जाता है। कुंडलिनी के बारे में कई लोग बहुत समय पहले जानते थे। मैं यह अवश्य कहूंगी कि मार्कण्डेय थे, जो तेरह हज़ार वर्ष पूर्व थे, उन्होंने कुंडलिनी के बारे में बात की है। आदि शंकराचार्य ने कुंडलिनी के बारे में बात की है और बाद में मुझे कहना होगा कि कम से कम सोलह से सत्रह महान संत हैं, सत्रह जिन्होंने सोलहवीं शताब्दी में कुंडलिनी के बारे में बात की है। उन्हीं में से एक थे गुरु नानक, जिन्होंने स्पष्ट कहा है कि आपको भीतर ही इसे तलाशना है और ग्रंथ साहिब में शामिल कबीर ने कहा है (हंसते हुए) यह कुंडलिनी ही दे सकती है। सभी ने एक ही बात कही है। शायद यह बाइबिल में नहीं है, शायद यह क़ुरान में नहीं है। लेकिन क़ुरान में कुछ कहा गया  है, वह भी बहुत ही महान है कि जी उठने के समय आपके हाथ बात करेंगे। यह अनुभव है, स्व का अनुभव है, अपनी आत्मा का, और वह क़ुरान में वर्णित किया गया है । जब तक आप इसे अनुभव नहीं करते आप एक मुसलमान नहीं हैं । मुसलमान का अर्थ है समर्पित व्यक्तित्व। यह कुछ आश्चर्य की बात है, सभी शास्त्रों में ये बातें हैं, हालांकि उन्होंने कविता में लिखा था और उन पर ऐसा दबाव था फिर भी उन्होंने यह कहा है । अब यह कुंडलिनी है, मैं अपने जन्म से जानती थी। और मैंने पाया कि जो कोई भी आत्म-साक्षात्कारी  व्यक्ति, जो एक अत्यधिक विकसित व्यक्ति था, उसे प्रताड़ित किया गया, वास्तव में समाज का बाहरी व्यक्ति बना दिया गया । उन्होंने इन सभी महान संतों को हर प्रकार का कष्ट दिया और उन्हें परेशान किया और बहुत कम ने उन्हें पहचाना। लेकिन इन सबके उपरान्त उन्होंने सुन्दर चीज़ें, सुन्दर  पुस्तकें लिखी हैं। यदि आत्मबोध के बाद आप उन्हें पढ़ते हैं तो आप देखेंगे कि वे वही गा रहे हैं जो आप अनुभव कर रहे हैं।

तो पहली बात यह है कि, आपको अनुभूति होनी चाहिए।लोग चाहे जो भी कहें कि यह ग़लत है, वह अच्छी बात नहीं है,  मुद्दा यह नहीं है । मुद्दा यह है कि क्या आपको अपनी उंगलियों पर अनुभव मिला? क्या आपको अपने तालु भाग पर अनुभव मिला? आपको इसे प्राप्त करना होगा। किसी को प्रमाणित नहीं करना है, यह आप हैं जिन्हें स्वयं इसे अनुभव करना होगा। यह सत्य है, और यदि यह सत्य आप लोगों में कार्य करता है तो आपको पता चल जाएगा। आप वास्तविकता को जान जाएंगे, आपको पूर्ण सत्य पता चल जाएगा। पूर्ण सत्य। इसके माध्यम से आप जो भी जानेंगे, उसे चुनौती नहीं दी जा सकती।  हमें एक अन्य दिन अमेरिका में एक बहुत बड़े संगठन  आई. एम. यू. (ऐसा ही कुछ नाम है) में बुलाया, जो हर प्रकार के विकल्पों पर काम कर रहे थे  और वहां एक डॉक्टर ने जब एक सहज योगिनी जो कि एक डॉक्टर नहीं थी से पूछा,  “ठीक है, मुझे अपनी उंगलियों पर बताओ कि मेरे साथ क्या ग़लत है.” और उसने कहा, “आपको हृदय की समस्या है। आपके दिल में समस्या है। और वह हैरान था क्योंकि उसने कहा, “केवल एक महीने पहले ही मेरी  एक बाईपास सर्जरी हुई  थी.” तो आप कल्पना कर सकते हैं कि उंगलियों पर जान कर आप कह सकते हैं कि आपके साथ क्या ग़लत है और दूसरों के साथ क्या ग़लत है। पूर्ण सत्य, आप इसे अपनी उंगलियों पर अनुभव कर सकते हैं।

यह एक ऐसे व्यक्ति का अनुभव है जो एक आत्मसाक्षात्कारी आत्मा है, जिसे अपना आत्मबोध मिला है, जिसने स्वयं को और ‘स्व’ अर्थात् आत्मा को ज्ञात किया है जो कि, चैतन्य के रूप में कार्य कर रहा है। अपने हाथों से और अपने तालु भाग क्षेत्र से चैतन्य के रूप में बाहर आ रहा है। यही बपतिस्मा की  वास्तविकता है। यहां आपको आपके तालु भाग से बाहर आने वाली ठंडी हवा अनुभव होती है। यह उन लोगों में कार्यान्वित होता है जो साधक हैं। जो साधक नहीं हैं, उनको कठिनाई है । लेकिन जो लोग सत्य की खोज कर रहे हैं उनमें यह बहुत शीघ्रता से काम करता है और एक ऐसा व्यक्तित्व विकसित होता है, जो गुरु का हो सकता है। क्योंकि ऐसा होने के बाद वे और अधिक लोगों का सृजन करना चाहते हैं, वे इस ज्ञान को स्वयं नहीं रखना चाहते हैं, और वे अन्य लोगों को प्रबुद्ध करते हैं।

आपकी जानकारी के लिए मुझे आपको बताना है, वे कहते हैं कि सहज योग अभी छियासी देशों में है, जो भी हो, यह छियासी देशों में हो सकता है, लेकिन यह कैसे फैल गया? मैं इन सभी देशों में नहीं गयी। जिन लोगों को आत्मसाक्षात्कार हुआ, वे वहां गए और उन्होंने उन्हें आत्मसाक्षात्कार दिलाया। और बेनिन जैसे दूर-दराज़ देश में हमारे पास नौ हज़ार सहज योगी हैं। बहुत आश्चर्य की बात है यह पूरी दुनिया में इस तरह से कार्यान्वित हुआ है, तो पूरी बात वैश्विक अभिव्यक्ति के लिए है, यह इंग्लैंड के लिए या एक जगह के लिए नहीं है । मैं जानती  हूं कि इंग्लैंड में एक बुनियादी समस्या है, जो मैं आपको बताना चाहूंगी। आप देखते हैं कि अंग्रेज़ इतने वर्षों तक भारत में थे और भारतीयों के लिए इंग्लैंड स्वर्ग है । और ये सभी भयानक गुरु, झूठे गुरु, वे पहले इंग्लैंड आए थे। उन सभी ने हमला किया, उन सभी ने आप पर हमला किया और ऐसी नकारात्मकता उसके साथ आई, कि अब भी मुझे लगता है कि लोग, भले ही वे बोध प्राप्त करते हैं, वे उत्थान की उत्कंठा अनुभव नहीं करते हैं। इतने झूठे लोग, वे यहां आए, यहां बस गए, और हर तरह के ग़लत काम केवल पैसा कमाने और आपकी कुंडलिनी को ख़राब करने के लिए किए, आपका मध्य मार्ग ख़राब कर दिया । शायद आपको एहसास भी नहीं है कि, अन्य सभी जगहों की बजाय वे केवल इंग्लैंड क्यों आए? वे किसी अन्य देश में नहीं गए, इटली कोई नहीं आया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड कोई नहीं आया, ऑस्ट्रिया कोई नहीं आया, स्पेन कोई नहीं आया। वे सब इस छोटे से देश में यहां आये क्योंकि उन्होंने सोचा कि अगर हम इन लोगों को वश में कर सकते हैं तो हम बहुत शक्तिशाली हो जाएंगे। और इस प्रकार है कि कैसे वहां एक भयानक नकारात्मकता इस देश में काम कर रही  है। उन्होंने आपको कष्ट सहने के लिए छोड़ दिया है। यह सब नकारात्मकता आपके विरुद्ध काम करती है। इन सभी नकारात्मक लोगों से आपको केवल सहज योग ही बचा सकता है। ये वह लोग हैं जिन्होंने अंध विश्वास पैदा किया, पैसा बनाया, वे धोखा देते हैं। उन्होंने न केवल आपको धोखा दिया बल्कि पूरी तरह से मैं कह सकती  हूं कि उन्होंने इस देश को लूटा है । मैं एक सज्जन के बारे में भी जानती  हूं, एक गुरु, जिसका शिष्य मेरे पास आया था। और उसने मुझसे कहा, “हम अभी केवल आलू खा रहे हैं। मैंने कहा, क्यों, आप केवल आलू क्यों खा रहे हैं? “हमें पैसा बचाना होगा|” “किसलिए?” “क्योंकि हमारे गुरु का कहना है कि हमें उसे एक रोल्स रॉयस देनी है|” मैंने कहा, मुझे समझ नहीं आ रहा है, आपका गुरु रोल्स रॉयस क्यों मांगे? इसकी क्या आवश्यकता है? तो उसने कहा कि मां “अब देखो, हम आत्मा पाने के लिए बेताब हैं और अगर हमें उसे स्टील जैसा कुछ देना है तो इसमें क्या बुराई है? वह स्टील चाहता है। तो हम पैसे इसलिए बचा रहे हैं ताकि उसके लिए रोल्स रॉयस ख़रीद सकें, उनके पास पहले से ही पचास हैं यह इक्यावनवीं होगी”|

इस तरह के कई लोग हैं जिन्होंने यहां आकर स्वयं को स्थापित कर लिया। उन्होंने इतने लोगों का जीवन व्यर्थ कर दिया है, उन्होंने इतने लोगों को हानि पहुंचाई है। तो एक बात जो मुझे आपको बतानी है कि, आप सावधान रहें । आप हमले के शिकार हैं और आपको केवल अपने भीतर सत्य को  विकसित करने की चेष्टा करनी चाहिए। मैं कई बार देखती हूं, मैं यहां आती  हूं, पूरा हॉल आज की तरह भरा हुआ है और लोगों को उनका आत्मसाक्षात्कार मिलता है, वे सभी इसका अनुभव करते हैं । उन्हें  अपने हाथो  में ठंडी हवा अनुभव होती है और उन्हें अपने तालु भाग में भी यह ठंडी हवा अनुभव होती  है, कोई संदेह नहीं है। लेकिन कुछ समय बाद, वे विकसित नहीं होते हैं। आपको आगे विकसित होना होगा। एक बीज है जो अंकुरित होता है उसे विकसित होना होगा, और उसके लिए आपको कुछ भी भुगतान नहीं देना है, कुछ भी नहीं, लेकिन आप को थोड़ा हमारे केन्द्रों पर या कुछ अन्य कार्यक्रम में भाग लेना होगा| इसे विकसित करने के लिए। आपको अपने भीतर उस गहराई को विकसित करना चाहिए और फिर आप एक गुरु बन जाते हैं और जब आप गुरु होते हैं तो क्या होता है? आप रचनात्मक हो जाते हैं, आप दूसरों को बोध देना आरम्भ करते हैं, आप दूसरों की देखभाल करने लगते हैं, आप दूसरों का इलाज प्रारम्भ करते हैं । हर तरह की बातें आप करते हैं। इसके अतिरिक्त रचनात्मकता इस सीमा तक चली जाती है कि, कई लोग हैं, जो कोई भी भाषा इतनी अच्छी तरह से कभी नहीं जानते थे, वे थे जैसे कि, लोगों के वित्त सलाहकार, अर्थशास्त्री, और अचानक महान कवियों जैसी रचनात्मकता उन के अंदर आ जाती है। वे देखते हैं, मैंने लोगों को चित्रकला और कला के सभी प्रकारों को अपनाते हुए देखा है, वे इसे पाते हैं । और जो लोग कलाकार हैं वे वास्तुविद् बन सकते हैं, वित्त क्षेत्र के महान लोग भी बन सकते हैं। इस तरह से एक संतुलन कार्यान्वित होता है और बहुत, बहुत सुंदर संतुलित तरीक़े से एक व्यक्तित्व विकसित होता है। तो अगर आप एक कलाकार हैं, न केवल कि आप उस विशेष क्षेत्र में विकास करते हैं, बल्कि आप उससे कहीं अधिक हो जाते हैं। मैं एक संगीतकार के बारे में जानती हूं जो मेरे पास आया और मुझे आश्चर्य हुआ कि बोध के बाद उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के बारे में एक बहुत ही सुंदर पुस्तक लिखी है, जिसमें सभी गणितीय गणनाएं हैं। उन्होंने जीवन में कभी गणित नहीं किया। तो यह सब ज्ञान आप के लिए आता है, अपने स्वयं के अघोर बल (Torsion) क्षेत्र से, इस क्षेत्र का नामकरण आइंस्टीन ने किया है | आइंस्टीन एक दिन सापेक्षता के सिद्धांत की खोज का प्रयास कर रहे थे|  लेकिन उन्हें यह नहीं मिल पा रहा था। वह प्रयोगशाला में इतना तंग आ चुके थे, इसलिए घर आकर बग़ीचे में अपनी कुर्सी पर बैठ कर साबुन के बुलबुले उड़ा रहे थे। और अचानक उसे कहीं अज्ञात से अनुभूति हुई, “सापेक्षता का सिद्धांत मुझ पर प्रकट हुआ। उन्होंने उसे अज्ञात अघोर बल क्षेत्र के रूप में नाम दिया है। आप सभी के पास वह अघोर बल क्षेत्र है और आप सभी उस अघोर बल क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं, केवल वह संबंध स्थापित किया जाना चाहिए।

अब यह कुंडलिनी वही है जो कि, उस अघोर बल क्षेत्र के साथ आप का संबंध बनाती है। यह कुंडलिनी ही है जो आपको संपूर्ण ज्ञान देने की शक्ति प्रदान करती है। और आप हर वस्तु की वास्तविकता जान जाते हैं। अब हमारे पास जो भी समस्याएं हैं, वे एक प्रकार से हममें समाहित हैं । जैसे हम ईर्ष्या करते हैं, हम वासना और लालच और वे सभी चीजें रखते हैं। अचानक आप संत बन जाते हैं। आप  नहीं जानते कि संत कैसे बन गए हैं। आप बस इन सभी मूर्खता की वस्तुओं से छुटकारा पा लेते हैं जो आप करते आ रहे हैं और आप एक सुंदर व्यक्तित्व बन जाते हैं। बेहद सुंदर | लालच, वासना और ये सब बेतुकी बातें, जो आत्म विनाशकारी हैं उन्हें बस नकारते हैं। आपकी सभी रचनात्मक शक्तियां अचानक ऐसे प्रकट होती हैं कि, वे कैसे आती हैं कोई नहीं जानता है, और सभी विनाशकारी चीज़ें चली जाती हैं। मैं किसी को नहीं बताती कि, ऐसा मत करो और वैसा मत करो। नहीं, बिल्कुल नहीं, क्योंकि उनमें से आधे वहां से चले जायेंगे। लेकिन ऐसा केवल बोध के बाद होता है। आत्मसाक्षात्कार के बाद वे स्वयं छोड़ देते हैं और आपको जो शक्ति मिलती है, वह है, करुणा और प्रेम की शक्ति। विनाश की शक्ति नहीं, बल्कि करुणा और प्रेम की शक्ति।

ऐसा होता है कि,आप भी सामूहिक रूप से जागरूक हो जाते हैं। जब आप सामूहिकता के प्रति जागरूक हो जाते हैं तो ऐसा होता है कि आप दूसरे को भी अनुभव कर सकते हैं। दूसरा है ही कौन? जब एक बूंद सागर में गिरती है तो आप सागर की तरह हो जाते हैं। तो अब आप प्रेम और स्नेह का सागर हैं और दूसरा कौन है? तो आप ऐसी सामूहिक चेतना विकसित करते हैं जिसके माध्यम से आप जानते है कि दूसरों के साथ क्या ग़लत है। अगर आपने अपनी ग़लतियों को ठीक कर लिया है तो आप उनकी ग़लतियों का भी उपचार कर सकते हैं। तो यह इस प्रकार से एक बहुत ही वैश्विक कार्यवाही बन जाता है, यह एक वैश्विक व्यवहार यह एक वैश्विक चित्त है । आप अपना चित्त कहीं भी डालें, यह कार्यान्वित होता है। वे इसे चमत्कार कहते हैं, मैं नहीं। चूँकि अब आप स्वयं आत्मसाक्षात्कारी हो गए हैं, इसलिए आप अपने आप में एक चमत्कार हैं और जो कुछ भी आप करेंगे वह चमत्कारी ही होगा। तो किसी व्यक्ति को यह समझना होगा कि ये शक्तियां आपके भीतर हैं, कि आप सामूहिकता के प्रति जागरूक  हो सकते हैं। यदि आप इस दुनिया में देखते हैं तो बहुत सारी समस्याएं हैं। व्यक्तिगत, यहां तक कि देशज, राष्ट्रीय, सभी प्रकार की समस्याएं। लेकिन उनमें से अधिकतर मनुष्यों से आती हैं, उनमें से अधिकांश मनुष्य द्वारा काम करने के कारण ही आती हैं । आपको जो करना है वह यह कि आप समझें कि ये सभी मानवीय समस्याएँ समाप्त हो जानी चाहिए। यदि वे समाप्त हो जाती हैं तो आप सुंदर मनुष्य बन जाते हैं। आप सुंदर बने, आपको केवल परमात्मा का ज्ञान होना चाहिए, बस इतना ही।

ऐसा नहीं है कि आप इसके लिए कोई भुगतान कर सकते हैं, आप नहीं कर सकते । बीज के अंकुरण के लिए हम कितना भुगतान करते हैं? यह अपने आप अंकुरित होता है। उसी तरह कुंडलिनी अपने आप ऊपर उठती है, आपको कुछ नहीं करना होता है। लोगों ने मुझसे पूछा है कि यह नि:शुल्क  क्यों है? मैंने कहा, ठीक है, मुझे बताओ कि हमें कितना भुगतान करना है? मैं समझ नहीं पाती हूँ। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि सब कुछ कैसे नि:शुल्क हो सकता है?  क्यों नहीं? आख़िरकार आपने देखा है कि जो भी जीवंत  प्रक्रिया है, सदैव नि:शुल्क है, और यह मनुष्यों के विकास का अंतिम चरण है। जहां आप एक नई जागरूकता में उतरते हैं, जिसे हम निर्विचार जागरूकता कहते हैं। निर्विचार जागरूकता मन की एक ऐसी अवस्था है जहां आप किसी भी चीज़ को देखते हैं तो आप सोचते नहीं हैं, आप केवल निहारते हैं । आप साक्षी होते हैं, बस साक्षी बनते हैं। आप देखते हैं, जो कुछ भी वहाँ है, उसे आप देखते हैं। आप प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। कई लोग कहते हैं, “मां, आप इतनी युवा दिखती हैं।” मैं नहीं जानती, होना चाहिए, लेकिन एक कारण यह भी है कि, मैं कभी प्रतिक्रिया नहीं करती। मैं बस देखती हूं, मैं केवल साक्षी होती हूं और यह कि साक्षी शक्ति उस बात का उपचार करती है, समस्या का इलाज करती है। तो आप उस साक्षी शक्ति के साथ इतने शक्तिशाली हो जाते हैं। आप बस हर चीज़ के और आनंद के साक्षी बन जाते हैं। अब उदाहरण के लिए ऐसे सुन्दर क़ालीन यहां बिछे हुए हैं। मैं उन्हें देखती हूं, बहुत सुंदर, मुझे प्रतिक्रिया नहीं देनी है। जो कोई देखेगा वह कहेगा, ठीक है, इसमें कितना ख़र्च आया है? यह कहां से आया है? अगर यह मेरा है मैं और अधिक चिंतित हो जाऊँगी। लेकिन मैं नहीं होती हूँ, मैं केवल कला देखती हूँ। कलाकार द्वारा तैयार की जाने वाली कला और कलाकार का आनंद, मुझे आनंद देता है। तो आप आनंद से भर जाते हैं। हर चीज़ में आप इतना आनंद देखते हैं कि आप जीवन से कभी थक नहीं पाते। आप कभी ऊबते नहीं हैं, आप सदैव हर बात का आनंद ले रहे हैं, छोटी चीज़ों से ले कर  बड़ी चीज़ों तक। बस अपनी साक्षी अवस्था से, इन फूलों से ले कर, अन्य जो कुछ भी आप देखते हैं। यदि आपके पास चित्त की यह शक्ति नहीं है तो आपके लिए वे खो गए हैं, वे आपके लिए कुछ भी नहीं हैं। लेकिन अगर आपके पास वह साक्षी शक्ति है, तो आपको वास्तव में आनंद होगा,  हर चीज़ का सार आनंद के रूप में प्राप्त होता है।

और फिर सामूहिक आनंद भी मिलता है। सामूहिक रूप से आप आनंद लेते हैं। आप अकेले आनंद नहीं लेते और आपकी संवेदना इतनी सुंदर हो जाती है, आप इतने सामूहिक हो जाते हैं। अब वे सभी, मुझे लगता है कि भारतीय नहीं हैं, मुझे लगता है कि उनमें से कोई भी नहीं है। लेकिन उन्होंने भारतीय गीत जैसे उठाया है और जैसे वे लयबद्ध हैं, भारतीय गीत गाना बहुत कठिन है। वे कितने लयबद्ध रूप से गा रहे हैं, वे कितने सुंदर तरीक़े से गा रहे हैं, उन्हें यह कैसे मिला? और अंग्रेज़ भी, उनके साथ पश्चिमी संगीत है, वे पश्चिमी संगीत भी गा सकते हैं। इसलिए कला में आना बहुत आवश्यक है। आजकल मैं क्या पाती हूँ कि,चूँकि जीवन इतना यांत्रिक है कि, लोग कला के बारे में भूल गए हैं । कला प्रसन्नता देने वाली वस्तु है और एक बार सहज योगी बन जाने के बाद कला की समझ सुन्दरता को खोजने के लिए है। और आप वास्तव में अपने भीतर ही कला का आनंद ले सकते हैं। आजकल लोग कुछ सस्ते प्रकार का संगीत कर रहे हैं, क्योंकि लोग,  उस तरह के लोग,  वैसा पसंद करते हैं, लेकिन अगर वे गहरे हो जाते हैं, तो वे वास्तविक शास्त्रीय का आनंद लेंगे, असली जो आपके आनंद के लिए उत्पादित किए गए थे। तो हम सुरुचिपूर्ण लोग बन जाते हैं, हम बहुत शास्त्रीय रूचि वाले लोग बन जाते हैं, और हम किसी की निंदा नहीं करते हैं। हम यह नहीं कहते कि वह ग़लत है, यह ग़लत है, हम जानते हैं कि हर चीज़ का आनंद कैसे लेना है । हम केवल एक सीमित पैमाना नहीं रखते हैं, या एक, आप कह सकते हैं, चीज़ों के बारे में एक बहुत ही सीमित विचार नहीं रखते।

उदाहरण के लिए, एक पश्चिमी व्यक्ति ऐसा क़ालीन पसंद नहीं करेगा, जो पूरी तरह से भरा हुआ है, वे दूरियां रखते हैं। इसीलिए वे सब कुछ दूर-दूर चाहते हैं, अगर यह दूर-दूर नहीं है तो यह उन्हें पसंद नहीं है । मैंने देखा है, लेकिन बोध के बाद, वे केवल आनंद लेते हैं। ये सभी बिखरे हुए फूलों की तरह हैं । तो ये सीमित विचार जो कि, हम अलग-अलग किताबों से पाते हैं, या शायद अलग परिवारों से,  जो कुछ भी हो, और वे बस विलुप्त हो जाते हैं और आप इनको प्रदर्शित करने वाले सभी कलाकारों की ख़ुशी का आनंद लेना आरम्भ करते हैं । आजकल कलाकार समाप्त हो गए हैं, बहुत कम कलाकार हैं। क्यों? ऐसा क्यों हैं, क्यों हम रफ़ाएल नहीं पा सकते, हम आजकल मोजार्ट क्यों नहीं पा सकते, क्यों? मनुष्य के साथ क्या हुआ? क्योंकि, समझने के लिए बहुत सरल बात है, वे आत्मसाक्षात्कार प्राप्त नहीं हैं । वे उस तरह का शास्त्रीय, जैसा उन सभी कलाकारों का कार्य था का, निर्माण नहीं कर सके, वे जन्मजात आत्मसाक्षात्कारी थे और उन्होंने हमारे लिए यह सब सुंदर काम किया था । अब, यदि आपके पास बोध नहीं है, तो आप जो कुछ भी निर्माण करेंगे वह विश्व स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह तभी स्वीकार किया जाएगा जब आप कुछ ऐसा करेंगे, जो अपने हृदय के भीतरी आनंद को व्यक्त कर रहा हो, आपके दिल के भीतर जो करुणा है उसे व्यक्त करें।

इसके अलावा मैंने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को देखा है, मैं नहीं जानती कि, वहां किस तरह के सामाजिक कार्यकर्ता हैं । वे इसके लिए लड़ रहे हैं, उसके लिए लड़ रहे |आप उस तरह के सामाजिक कार्यकर्ता कैसे हो सकते हैं? जब आपके पास उनके लिए भावना हो तो आपको सामाजिक कार्य करने होंगे । आपका हृदय उनके लिए भावनाओं का अनुभव करे, जब आप उनके लिए असली करुणा रखते हैं। और लोग सोचते हैं कि, “माँ यह करुणा हम कहाँ से लाएँ”, यह आप के भीतर है, यह सब आप के भीतर ही है। आपको इसके लिए कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं है, यह सब वहीं है। आप एक विशेष रूप से बनाए गए इंसान हैं। विशेष रूप से बनाए गए। और यह कुंडलिनी आपकी माँ है, वह आपकी अपनी माँ है, उसके पास कोई अन्य बच्चा नहीं है, लेकिन आप, और वह हर समय आपको देख रही है, वह आपके बारे में सब जानती है। वह जानती है कि आपका अतीत क्या है, आपने क्या ग़लतियां की हैं, आपने क्या अच्छी चीज़ें की हैं । इसके अलावा वह जानती है कि आपकी आकांक्षाएं क्या हैं, आप कहां जाना चाहते हैं । वह मां है जो आपको आपका दूसरा जन्म देती है और इस दूसरे जन्म में आपको कोई कठिनाई नहीं होने देती है। आप किसी मुसीबत में नहीं पड़ते, क्यों? ऐसा क्यों होता है, क्योंकि यही माँ  सारी परेशानी को उठाती है। जब आपका जन्म हुआ, आपकी मां ने आपके जन्म की सारी परेशानी उठा ली, उसी तरह यह दूसरा जन्म होता है। और इस दूसरे जन्म के साथ क्या होता है कि आप एक बहुत विशिष्ट व्यक्तित्व, एक बहुत ही अलग व्यक्तित्व बन जाते हैं। और आप चकित होते  हैं। “मेरे साथ क्या हुआ है? मैं बहुत बदल गया हूं, मैं इतना शांत हो जाता हूं, मैं इतना प्रसन्न हो जाता हूं, मैं इतना शांतिपूर्ण हो जाता हूं । लोग शांति की बात करते हैं। आप उन लोगों के साथ कैसे शांति पा सकते हैं जिनके भीतर शांति नहीं है? सबसे पहले आपको अपने भीतर शांति बनानी है, और वह कुंडलिनी जागरण के माध्यम से स्थापित होती है।

जैसा कि है, मैंने इस हॉल में पहले भी कई व्याख्यान दिए हैं । लेकिन अब मुझे आपको बताना है, कि अगर आप अपने आप को नहीं जानते हैं तो आप मुख्य बात से चूक गए  हैं । आपको स्वयं को जानना चाहिए, न केवल जानना  है, वरन् इसकी गहराई में जाना चाहिए। मैं देखती हूँ जिन लोगों को आत्मसाक्षात्कार मिला है, पांच प्रतिशत, या शायद दस प्रतिशत,  मैं नहीं जानती, जो विकसित हो रहे हैं और इसमें गहरे जा रहे  हैं । उन्हें कोई धन व्यय नहीं करना पड़ता, उन्हें कोई समय ख़र्च नहीं करना पड़ता, लेकिन उन्हें समझना होगा कि क्या किया जाना है। और एक बार उन्हें वह बता दिया जाता है जो कि, किया जाना है तब, प्रयत्न कीजिए, प्रयास कीजिए , इसके बारे में बेतुका होने जैसा कुछ भी नहीं है । कई बार लोगों को लगता है कि उन्हें इस तरह नहीं होना चाहिए, उन्हें ऐसा नहीं होना चाहिए। यह दिखाने के बजाए, आपको यह सोचना चाहिए कि इन लोगों ने जो प्राप्त किया है, उन्होंने सहज योग को समझने के अपने प्रयासों के माध्यम से प्राप्त किया है । सहज है,  सह अर्थात  ‘आपके साथ है’, ‘ ज’ के साथ आपके साथ में जिसका जन्म हुआ है, आपके साथ पैदा हुआ है। अपना आत्मबोध पाने का अधिकार आपके साथ पैदा होता है और आपको उसे पाना होता है।

आपको इसे प्राप्त करना होगा। आप सभी इसके योग्य हैं, मुझे लगता है कि, कोई भी नहीं है जो ऐसा कह सकता है कि वह इसके योग्य नहीं है । अपने आप की निंदा न करें, अपने पर तरस न खाएँ, अपने बारे में अपराध बोध न रखें। ये सभी चीज़ें बहुत सतही हैं। कुंडलिनी के उठते समय ये सभी चीज़ें बिल्कुल समाप्त हो जाती हैं, और वह केवल एक गरजती हुई नदी की तरह जाती है और आपको आत्मबोध देती है। यह होना है, यही समय है, आपको इसका लाभ उठाना चाहिए। तो इसके लिए अब हमारे पास आत्मबोध के लिए कार्यक्रम होगा| लेकिन एक बात पक्की है, अगर आप नहीं चाहते हैं तो मैं आपको आत्मबोध नहीं दे सकती| इसके लिए विवश नहीं किया जा सकता। आप इस बात पर दबाव नहीं डाल सकते हैं तो आपके भीतर इच्छा, शुद्ध इच्छा होनी चाहिए। शुद्ध इच्छा कुंडलिनी है, आपकी अन्य सभी इच्छाएं बेकार हैं। आज आप एक चीज़ चाहते हैं, फिर आप दूसरी चीज़ चाहते हैं, कभी संतुष्ट नहीं होते। लेकिन यदि कुंडलिनी जागृत हो जाए तो आपको पता चल जाएगा कि आपकी शुद्ध इच्छा क्या है। जब तक आपके पास वह इच्छा नहीं है, मैं आपको बाध्य नहीं कर सकती। यह बाध्य नहीं किया जाना चाहिए और यह लोगों उन सब लोगों के लिए कार्यान्वित करेगी, जो शुद्ध इच्छा चाहते हैं। मैं जानती हूँ कि, यह कई अर्थों में सहायक है, यह आर्थिक मदद भी करती है । इसने लोगों की आर्थिक मदद की है, इसने उनके प्रयासों में कई मदद की हैं, उनकी नौकरी में, हर जगह यह मदद करती है। क्योंकि आप स्व बन जाते हैं, आपका व्यक्तित्व स्व बन जाता है, और आप उसका उपयोग करना शुरू कर देते हैं। एक बहुत ही उल्लेखनीय बात है जो इस कलियुग में हो रही है, इस आधुनिक समय में । तो जो कुछ भी है, आप सब आत्मबोध प्राप्त करने में सक्षम हैं, यह मेरा आश्वासन है। और यह भी आश्वासन है कि आप सभी इसमें बहुत गहराई से विकसित हो सकते हैं । आपको स्वयं को भी थोड़ा समय देना होगा और यह काम करेगा। परमात्मा आप सभी को आशीर्वादित करें, परमात्मा आपको आशीर्वाद दें ।

जैसा कि मैंने कहा है, मैं इसे आप पर थोप नहीं सकती  । अपने आत्मबोध को पाने में कठिनाई से पाँच-दस मिनट का समय लगेगा, लेकिन अगर आप नहीं चाहते हैं तो बेहतर होगा कि आप हॉल छोड़ दें। इससे बेहतर है कि आप हॉल छोड़ दें, अगर आप नहीं चाहते हैं, तो आपको बाध्य नहीं किया जा सकता।

अब कृपया अपने दोनों हाथों को मेरी ओर इस तरह रखें। मुझे आशा है कि आपने अपने जूते बाहर उतार दिए हैं, अपने जूते खोल लें अच्छा विचार है । धरती मां हमें बहुत मदद करती है, अगर हम जूते बाहर खोल कर आए हैं, तो यह बहुत अच्छा है।

अब कृपया अपने दोनों हाथ मेरी ओर रखें । अब आप क्या कर रहे हैं? ये पांचों उंगलियां, छठा और सातवां स्थान, वे आपके चक्र हैं, वे आपके चक्रों के सिरे हैं, आपके केंद्रों के हैं। और बाईं ओर भी। तो हम दायाँ पक्ष और बाईं ओर हैं तो बस इस तरह अपने हाथ रख दें। आप अपनी आंखें बंद कर सकते हैं। नहीं, मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि आपको दोषी महसूस नहीं करना चाहिए, यदि आप दोषी महसूस करते हैं तो बाईं ओर का चक्र, जिसे विशुद्धि कहा जाता है, पकड़ा जाता है । इसके साथ आप एंजाइना ग्रस्त हो सकते हैं अन्यथा आप स्पॉन्डिलाइटिस ग्रस्त हो सकते हैं। तो कृपया दोषी अनुभव नहीं करें, आप को दोषी महसूस नहीं करना हैं। यदि आपने कुछ भी ग़लत किया है, तो यह समाप्त हो गया है, और आपको इसके बारे में अब और नहीं सोचना चाहिए। तो कृपया किसी भी चीज़ के लिए दोषी महसूस न करें। एक और बात यह है कि आपको स्वयं को क्षमा करना होगा ताकि आप दोषी महसूस न करें। कृपया अपने आप को पूरी तरह से क्षमा कर दीजिए। आप यहां अपने आत्मसाक्षात्कार के लिए हैं और आपके द्वारा की गई अपनी ग़लतियों पर चिंता करने के लिए नहीं हैं । बस अब आप को वर्तमान में होना है, अतीत समाप्त हो गया है और भविष्य विद्यमान नहीं है। वास्तव में आप वर्तमान में हैं जहां आपको भूलना होगा। आपको उन सभी चीज़ों को भूलना होगा जो आपको दोषी महसूस कराती हैं इसलिए स्वयं को क्षमा कर दें ।

इसके अलावा आपको दूसरों को क्षमा करना होगा, जो कई लोग कहते हैं कि कठिन है। लेकिन ऐसा नहीं है, यह करना सबसे आसान काम है। बस इतना कहना है, मां, मैं सबको क्षमा कर देती हूं। बस इतना ही। क्योंकि चाहे आप क्षमा कर दें या क्षमा न करें, आप कुछ नहीं करते। वास्तव में कुछ भी नहीं करते हैं। लेकिन अगर आप क्षमा नहीं करते हैं तो आप उस का बोझ अपने आप पर लेते हैं और अपने जीवन के लिए अकारण ही दुःख लेते हैं । अगर आप केवल दूसरों को क्षमा कर सकते हैं तो, यह समस्या को बहुत अच्छी तरह से हल करेगा। यह उस चक्र को खोलेगा जिसे हम आज्ञा चक्र कहते हैं, जो ऑप्टिक तन्त्रिका के पार है। जो बहुत अवरुद्ध है और आपको सभी को क्षमा करना होगा ताकि यह चक्र आपकी भावनाओं,व्यवहार, दीर्घकालिक स्मृति क्षेत्र में कुंडलिनी के प्रवेश के लिए खुल जाए। कृपया, स्वयं की सहायता करने की चेष्टा करें। बस अपने आप को क्षमा कर दीजिए और दूसरों को क्षमा कर दीजिए, करने के लिए एक बहुत ही सरल बात|

अब अपने बाएं हाथ को उठा कर अपने सिर के ऊपर की कोमल हड्डी के ऊपर रखें, जो कि जब आप बच्चे थे तब कोमल हड्डी थी। तो कृपया अपने हाथ ऊपर ले जाएँ, पर नहीं बल्कि उससे भी परे ऊपर, और हाथ हिलाएं, अपने हाथ को ऊपर और नीचे ले जाएं और महसूस करें कि,  क्या आपके सिर के ऊपर की कोमल हड्डी क्षेत्र से बाहर आने वाली ठंडी हवा है। यह गर्म भी हो सकती है, अगर आपने अपने आप को या दूसरों को क्षमा नहीं किया है तो यह गर्म हो सकती है। इसलिए कृपया अपने को और दूसरों को क्षमा कर दें। लेकिन अगर यह अभी भी गर्म है, यह अपने सिर के ऊपर की कोमल हड्डी क्षेत्र से बाहर आ रहा है, तो बेहतर होगा आप अपने सिर को झुका लीजिए। अपने सिर को झुकाएँ आप इसे बेहतर महसूस कर सकते हैं। अब, कृपया अपने बाएं हाथ को मेरी ओर  और दाहिने हाथ को अपने सिर के ऊपर की कोमल हड्डी क्षेत्र के ऊपर रखें। स्वयं पर विश्वास रखें, आप को केवल स्वयं पर विश्वास रखना होगा कि आप अपने आत्मबोध को प्राप्त करने में सक्षम हैं। अब अपना हाथ उठाएं और स्वयं देखें कि क्या आपके सिर के ऊपर स्थित कोमल हड्डी क्षेत्र से बाहर आने वाले एक ठंडी या गर्म हवा जैसी चैतन्य लहरियाँ हैं।

अब आप  इसे अपने हाथों पर भी अनुभव कर सकते हैं, दोनों हाथ मेरी ओर रख सकते हैं। आप में से अधिकांश इसे महसूस कर सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों को यह हथेली के नीचे अनुभव हो सकता है, तो इसे इस तरह ऊपर लाने की चेष्टा कीजिए। हथेली के नीचे, कुछ लोगों को हथेली के नीचे महसूस हो सकता है।उन्हें इसे इस तरह से बाहर ले जाना चाहिए। मैं आपको बाद में बताऊँगी कि ऐसा क्यों है। भीतर पूरा मौन है।

उन सभी ने जिन्होंने अपनी उंगलियों पर ठंडी हवा का अनुभव किया है, या उनकी हथेलियों पर, या उनके सिर के ऊपर स्थित कोमल हड्डी क्षेत्र से बाहर, या यहां तक कि गर्म हवा कृपया अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाएँ। आप सभी ने इसे अनुभव किया है। परमात्मा आपका भला करे। आप सभी ने अनुभव किया है। अब आपको  इसके लिए मुझे एक बात का वचन देना है, मुझसे वादा करना है कि आप  सहज योग में विकसित हो जाएँगे। आप एक छोटा सा पौधा नहीं बहुत बड़े पेड़ बन जाएँगे और आप स्वर्गीय आशीर्वाद वाले इस स्वर्ग में आने के लिए संसार की सहायता करेंगे। यह मेरे लिए आपका वादा होना चाहिए। आप यह कर सकते हैं, मैं जानती  हूं कि आप यह कर सकते हैं । यदि मैं ऐसा कर सकती होती, तो मैं आपसे अनुरोध नहीं करती , लेकिन मैं आपसे अनुरोध कर रही हूं कि आपको अपने आप में गहराई में जाना होगा और यह देखना होगा कि आपके पास यह महान ख़ज़ाना है और आपको इसे विकसित करना चाहिए।

परमात्मा आप सबको आशीर्वादित करें!