Evening Program, Eve of Navaratri Puja

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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2000-10-06 नवरात्रि पूजा से पहले शाम का कार्यक्रम 

कबेला, इटली

… कला, केवल वही नहीं बल्कि उसके सभी जटिल स्वरूप।

मैं आनंद से परिपूर्ण हो गई सहजयोगिनियों और सहजयोगियों को इतना अच्छा नृत्य करते हुए देख, और मैं आशा करती हूँ कि इससे बदलाव आएगा – उनके चलने की शैली में (श्री माताजी और लोग हँसते हुए)। जब मैं पहली बार लंदन आई, बहुत समय पहले, अपनी बेटियों के साथ, तो वे आश्चर्यचकित होती थी “यहाँ की औरतों को देखिए” और कहती थी “मम्मी ये सभी घोड़े की तरह चलती हैं।“ मैं कहती थी, “सच में?” “देखो उनके बाल भी इस तरह से ऊपर नीचे जा रहे हैं, और उनकी चाल कैसी है।“ मुझे लगता है घोड़ों का बड़ा भारी प्रभाव है इंग्लैंड पर। वह मैंने ऐसे ही उससे कह दिया था। पर आपने ध्यान दिया होगा कि पवार एक बहुत मज़ाकिया व्यक्ति हैं क्योंकि वे भारत से आए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि वे महाराष्ट्र से हैं और मेरी ही जाति के हैं। वे लोग अपने हास्य के लिए जाने जाते हैं और अपने हास्य से उन्होंने आप सभी का बहुत अच्छे से मनोरंजन करने का प्रयास किया है। 

मुझे यह अवश्य कहना चाहिए कि वे इतने माहिर हैं कत्थक में। उसको समझने के लिए, मैं सोचती हूँ, आपको थोड़ा ज्ञान होना चाहिए – ताल-वाद्य का। यदि आपके पास वह ज्ञान है तो आप समझेंगे कि कैसे यह कठिन है, कैसे यह जटिल है और कैसे यह इतना रचनात्मक है यह प्रस्तुत करना। यह एक बहुत, बहुत बड़ा अध्ययन है, बड़ा कार्य है, जो उन्हें करना है, और अभ्यास के बाद अभ्यास। भारतीय कला इसी प्रकार की है। 

लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ कि जब सहजयोगी इसे (प्रस्तुत) करते हैं, तो वे असाधारण होते हैं और हमें आश्चर्य होता है कि इतने कम समय में, वे इस कला में महारत प्राप्त कर लेते हैं। तो सहज योगियों में कुछ विशेष है। और साथ ही मैं आश्चर्यचकित रह गयी, कल, कि यूक्रेन से वे लोग आये थे। इसके अलावा भी बहुत से कलाकार आए हैं, सभी  स्थानों से। और वे इतने सहज थे, और मुझे बताया गया कि उनमें से किसी ने भी कोई प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया था, किसी भारतीय गुरु के अधीन, या किसी भारतीय विद्यालय में। केवल स्वयं से ही, मैं नहीं जानती कि कैसे स्वतः ही कुंडलिनी ने यह कार्य किया। कौन सा भाग, किस चक्र का, उसने (कुंडलिनी ने) स्पर्श किया, जिससे इन लोगों में भारतीय संगीत का इतना सुंदर ज्ञान विकसित हुआ। मुझे लगता है यह सबसे कठिन चीज़ है, भारतीय संगीत। पर यह इसलिए है क्योंकि यह ऐसा नहीं है – पश्चिमी संगीत जैसा, जहाँ पहले से ही एक संगीतकार होता है, जिसने अपनी रचना आपके सामने रखी, और आपको उसे पढ़ना होता है और उसी प्रकार आपको बजाना होता है। संगीतकार भी एक स्वतंत्र आदमी है। वह अपनी रचना के साथ अपनी इच्छा अनुसार कुछ भी कर सकता है। कभी वह धीरे से शुरू होती है, कभी वह धमाके के साथ शुरू होती है, कभी, मतलब मुझे समझ नहीं आता इसके पीछे क्या तर्क है। पर जो भी है, यह बहुत रोचक है और मुझे आपका पश्चिमी संगीत भी पसंद है यदि वह शास्त्रीय हो। और जैज़ (jazz) भी ठीक है, अन्यथा मैं नहीं जानती कि कैसे पॉप संगीत को समझा जाए। शायद मैं हूँ.. मैं इस विषय से अपरिचित हूँ। फिर आती है हमारी समझ – शैली की, कत्थक शैली की। और कत्थक में भी मैंने देखा है, जो लोग अकादमी में सीख रहे हैं उन्होंने इतना अच्छा किया है। यह आश्चर्य की बात है कि इतने कम समय में उन्होंने कैसे यह प्राप्त किया। क्या यह कुंडलिनी है जो इसे कार्यान्वित करती है, मैं नहीं जानती। कल के प्रदर्शन से भी मुझे विश्वास हुआ कि सहजयोगियों के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वे बहुत मेहनत करें, भारतीय शास्त्रीय संगीत को जानने के लिए या यहाँ तक की मोज़ार्ट और इन सभी महान कलाकारों के समान। आप भी एक दिन कुछ सुंदर रचनाओं का सृजन कर सकते हैं पर यदि आप किसी प्रकार का तुच्छ प्रदर्शन करते हैं तो मुझे नहीं लगता कि आप कभी भी यश प्राप्त कर सकते हैं। वह (यश) कुछ समय के लिए होगा और फिर लोग उसे भूल जाएंगे। तो सबसे अच्छा है कि आप अपनी कुंडलिनी शक्ति को विकसित करें और फिर कोई चीज़ करें जो आप करना चाहते हैं, क्योंकि मैंने ऐसे लोग देखे हैं जो कुछ नहीं जानते जैसे बाबा मामा। वे इतने खराब विद्यार्थी थे भाषाओं के, और मुझे नहीं पता कि कैसे उन्होंने कविताएँ लिखनी शुरु कर दीं। यहाँ तक कि उर्दू भाषा में और मराठी, जिसके बारे में उन्हें कभी कुछ पता ही नहीं था। तो यह कुंडलिनी वास्तव में सहायता करती है और आपको विशेषज्ञ बनाती है, अत्यंत निपुण बनाती है उन कठिन कलाओं में, जो वास्तव में बहुत, बहुत कठिन है, लोगों के लिए उनमें निपुण होना। तो मैं आप सबको आशीर्वादित करती हूँ, इस सब ज्ञान से। और अब मैंने देखा कि यहाँ फ्लेमिंगो भी बहुत अच्छे तरीके से बजाया गया क्योंकि उसमें कुछ महान बात है, ताल को लेकर। ताल के अनुसार वह बहुत अच्छा है परंतु मुझे बहुत अधिक पसंद नहीं आया था, जब मैं स्पेन में थी, स्पेन। वहाँ महिलाओं ने बहुत विचित्र प्रकार से कपड़े पहने हुए थे, फ्लेमिंगो वाली। मुझे वह चीज़ अच्छी नहीं लगी। उनका पहनावा बेहतर हो सकता था, आप देखिए। अपितु वह बहुत लज्जाजनक था और मेरे पति ज़मीन की ओर ही देख रहे थे, आपने देखा। तो यह बहुत अधिक है भारतीयों के लिए, ऐसे महिलाओं को नाचते देखना, आप जानते हैं। परंतु यदि वे सही से कपड़े पहने तो उसमें कोई हानि नहीं है। उन्हें सही प्रकार से कपड़े पहनने चाहिए क्योंकि यह इतना अच्छा उपहार है जो उन्हें मिला है, जिसे हम कहते हैं – ताल, लय। इसकी लय इतनी सुंदर है और कैसे वह बदलती है और कार्यान्वित होती हैं। मुझे यह भी अवश्य कहना चाहिए कि एक बार आप कला के सौन्दर्य को समझना शुरू कर देंगे तो आप कपड़ों इत्यादि पर अधिक समय व्यर्थ नहीं करेंगे, क्योंकि प्रमुख है संगीत। संगीत को सही ढंग से किया जाना चाहिए और सभ्य वस्त्रों के साथ। मेरा यही विचार है क्योंकि यदि आप इसे विश्वव्यापी बनाना चाहते हैं तो आपको ऐसे वस्त्रों का उपयोग करना चाहिए जो अच्छे हैं। मैं बहुत प्रसन्न भी हुई, इतने सारे सहजयोगियों और सहजयोगिनियों को नृत्य करते देख और छोटे बच्चों को। यह वास्तव में बहुत, बहुत सुंदर था और मेरी इच्छा है कि आप सब यह समझना शुरू कर दें कि ताल क्या है। ताल हमारे जीवन का अंग है और श्री शिव द्वारा संचालित किया जाता है। तो यदि आपके जीवन में लय है, आप देखेंगे कि आप कितनी समस्याओं से निजात पा लेंगे। यह एक समझने की बात है और सीखने की भी। और यदि आप इसे सीख नहीं भी पाते तो कम से कम इसे समझिये। मैं आश्चर्यचकित थी कि आप लोग इस संगीत के प्रति कितने संवेदनशील थे और आपको ऐसा महसूस नहीं हुआ कि यह किसी प्रकार का दबाव है आप पर। तो आपकी संवेदनशीलता बहुत अधिक बढ़ चुकी है। जो आप स्पष्ट रूप से उन लोगों में देख सकते हैं जो अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर रहे थे और वे बहुत प्रतिभावान लोग हैं।

अब प्रतिभा, जैसा मैंने आपको बताया बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वह बुद्धिमत्ता है जो भावनात्मक है। और उसे ही हमें विकसित करना है ताकि हम दूसरों पर क्रोधित ना हों, हम दूसरों को कष्ट न दें, हम दूसरों को परेशान ना करें, परंतु हम उनका मनोरंजन करने का प्रयास करें और उन्हें प्रसन्न रखें। यह एक (गुण) है जो हमें विकसित करना है। यहाँ तक की, कलाकारों में यह बहुत ही स्पष्ट रूप से होना चाहिए। तो मैं सभी कलाकारों को धन्यवाद देना चाहती हूँ और आप सभी को, बहुत सारी चीज़ों को सहन करने के लिए जिन्हें आप नहीं जानते और विभिन्न प्रकारों और शैलियों का आनंद उठाने के लिए भी।

मैं आशा करती हूँ कि फ्लेमिंगो लोग भी कत्थक के साथ जुड़ें और उचित पोशाक पहनने का प्रयास करें। बस इतना ही। मुझे लगता है कि वह पोशाक अत्यंत चौंका देने वाली है, हमारे लिए। आप देखिए, तो इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आपके पास वास्तविक कला है तो आपको इन अन्य चीज़ों के बारे में चिंता करने की क्या आवश्यकता है, जिससे आप ओछे दिखें। ऐसी ओछी पोशाक पहनने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यदि वह कला है.. मुझे कहना चाहिए, कि मुझे बहुत समय पहले यह अनुभव हुआ की स्पेन के विचार – भाव ताल के – बहुत महान है और मैं उन्हें शुभकामनाएँ देती हूँ और समझ कि यदि वे विश्वव्यापी बनना चाहते हैं तो उन्हें ऐसी पोशाक बनानी होंगी  जैसे उन लड़कियों की थी, बहुत रोचक थीं। वह अच्छी लगीं और उनका सम्पूर्ण व्यवहार शालीनता और आत्मसम्मान की ओर अधिक होना चाहिए।

परमात्मा आप सबको आशीर्वादित करें। तो अब अंतिम प्रस्तुति आ रही है, एक अच्छा नाटक है और देखते हैं यह कैसे कार्यान्वित होता है। क्योंकि अंग्रेज़ों को अब आपके सामने नाटक प्रस्तुत करने की समझ आ गई है। पहली बार जब मैंने एक अंग्रेज़ी नाटक देखा, वे सब काग़ज में देखकर पढ़ रहे थे। मैंने सोचा कि यह लोग मेरे समक्ष कर रहे हैं या किसी रेडियो पर। वह ऐसा था। अब वे उसे याद करते हैं। तो आप देखिए कितना बदलाव आ गया है। और, और बहुत रोचक होगा यह देखना कि उनकी कला – नाटक की – जो इंग्लैंड और अंग्रेज़ी भाषा का सौन्दर्य है जिसे वे स्थापित करेंगे। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

मैंने सदैव आपसे कहा है कि सभी सहजयोगियों को कलाकारों का सम्मान करना चाहिए, बहुत ज़्यादा सम्मान किया जाना चाहिए। इसका कारण है, कलाकार अभिव्यक्त करते हैं, भावात्मक बुद्धि को। वे भावात्मक बुद्धि की अभिव्यक्ति कर रहे हैं, जो हमारे हृदयों को आकर्षित करती है, हमारे व्यक्तित्व को। वह हमारे व्यक्तित्व को शांत भी करती है। यह कलाकारों का विशेष गुण है कि वे इस प्रकार का मनोरंजन उत्पन्न कर सकते हैं जो आपकी भावात्मक बुद्धि को भी जागृत कर सकता है, कि आप भावात्मक रूप से भी उत्तेजित हो जाते हैं, आपको संतुलन प्रदान करता है। यह परमात्मा का बहुत महान उपहार है कलाकारों के लिए कि वे अपनी भावात्मक बुद्धि द्वारा सृजन कर सकते हैं, कुछ ऐसा जो आप सभी का मनोरंजन करता है। आप मनोरंजित अनुभव करते हैं और वे स्वयं, जब वे कुछ बनाते या सृजन करते हैं तो अत्यंत प्रफुल्लित महसूस करते हैं, मैंने देखा है। वे आश्चर्यचकित होते हैं कि यह कहाँ से आ रहा है। यह सब अंदर से आ रहा है और वह भावात्मक बुद्धि वास्तव में लोगों को एक अच्छा इंसान होने के गुण प्रदान करती है। क्योंकि आप शांतिमय हो सकते हैं, आप आनंदमय हो सकते हैं, आप इसके साथ बहुत दयालु भी हो सकते हैं। और सदैव कलाकारों का सम्मान करें और एक कलाकार दूसरे कलाकार का अवश्य सम्मान करे। मेरा यही विचार है कि वे सभी एक दूसरे का सम्मान करें क्योंकि वे सब एक ही चीज़ कर रहें हैं, साथ में, कि वे इतना सुंदर मनोरंजन प्रदान कर रहे हैं – हमारे अंतःकरण को, जिसे यह भावनात्मक बुद्धि प्राप्त होती है जो बहुत महत्त्वपूर्ण है, और जो प्रेम से निकलती है, करुणा से। लोग इस आधुनिक समय में कितने परेशान हैं और कितने झंझट में फंसे हुए हैं और इस प्रकार का मनोरंजन उनके लिए उत्तम है, जिससे वे आराम करें, दिव्य प्रेम की करुणा में।

आप का बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं उनका बहुत धन्यवाद देती हूँ और परमात्मा उन्हें आशीर्वादित करें।