11th Day of Navaratri

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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नवरात्रि पूजा। कैबेला लॅक्गर (इटली), 8 अक्टूबर 2000.

आज हम देवी की पूजा करने जा रहे हैं, हम उन्हें अम्बा कहते हैं, और कई अन्य नामों से। वह अंतिमा है, हमें कहना चाहिए, “अवशिष्ट शक्ति”। जब वह सभी कार्य पूर्ण कर चुकी होती है, तब वह कुंडलिनी बन जाती है और आप की त्रिकोणीय हड्डी में बस जाती है। यह मूलाधार चक्र है। लेकिन वास्तव में वह बाईं तरफ अधिक अभिव्यक्त होती है, क्योंकि, उस समय, वह विशुद्ध रूप से अम्बा है।

सभी मनुष्यों के लिए यह बाईं बाजू बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपके पास कोई बाईं बाजू नहीं है, तो आप अपने आप को संतुलित नहीं कर सकते, शुरुआत में। और कहा जाता है कि वह आपको सहज योगी का वास्तविक व्यक्तित्व प्रदान करती है। ऐसा है कि, यदि आपकी बाईं नाड़ी कमजोर है, तो आपको उनकी पूजा करनी होगी, और उनसे अनुरोध करना होगा कि: “कृपया हमारी बाईं नाड़ी को समृद्ध करें।” आपकी बाईं नाड़ी को समृद्ध करके, वह क्या करती है, वह सुख प्रदाता है, इसलिए वह आपको क्या देती हैं? सबसे पहले, वह आपको सुख देती हैं। यह कहा जाता है कि वह आपको आराम देती है। ऐसा है कि, वह आपको नींद देती है।

यदि आप भविष्य के बारे में बहुत अधिक सोच रहे हैं और आप भविष्य की योजना में बहुत लिप्त हैं, तो आपको कुछ समस्याएं हैं। लेकिन सबसे अच्छी बात यह है, अगर आप सो सकते हैं, तो यह एक बड़ा आराम है, यह आपके लिए बहुत ही सुखद है, कि आप सो सकते हैं और आप कुछ आराम पा सकते हैं। उसके बिना, तुम सो नहीं सकते: उनकी अनुपस्थिति में, तुम सो नहीं सकते। इसलिए नींद शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है, जिसे बाईं नाड़ी द्वारा प्रदान किया जाता है। चूँकि वे हमें सुख प्रदान करेंगी, इसलिए हम उनकी पूजा करते हैं।

वही है जो, आपको शांति देती है। वे वही है जो आपको भ्रम भी देती है, जिसे भ्रांती कहा जाता है। वह आपको सभी कलात्मक प्रतिभा देती है, वह आपकी रक्षा करती है। लेकिन यह भूमिका, कि वह आपके लिए भ्रम पैदा कर रही है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि वे लोग जो दिव्य के विरोधी हैं, जो वास्तविकता से दूर होने की कोशिश कर रहे हैं, वे उनके लिए भ्रम पैदा करती है। इस तरह वह आपको उन लोगों से जुदा करती है। जब आप वास्तविकता और ऐसे सभी लोगों के बारे में जान रहे होते हैं, जो परेशान कर रहे हैं या उनके काम को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं – वे वही है जो भ्रम पैदा करती हैं। वे वही है जो कुंडलिनी के रूप में रहती है। तो हम कह सकते हैं कि कुंडलिनी उनका ही एक हिस्सा है, लेकिन उनका एक और हिस्सा वह है जो बाईं तरफ रहता है।

अब वे सात स्तर पर रहती हैं। एक बार जब आप पहले स्तर पर उन से आनंद प्राप्त करना शुरू करते हैं, तो उनके पास आपके लिए ये सभी गुण होते हैं जिनका वर्णन किया गया है। वह शांति है, वे वही है जो आपको प्यार देती हैं, वे वही है जो आपके लिए सभी सुंदर चीज़ों की रचना करती हैं। वह माता है। और वह आपसे इस बात की आशा करती हैं कि आप उनकी सुरक्षा का आनंद लें, उनके प्यार का आनंद लें और हमेशा उनकी पूरी सुरक्षा में रहें। तो यह उनके काम का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

और दूसरी बात ऐसी है कि वह कुंडलिनी है। इसलिए वह भी सात स्तरों पर काम करती है। हम कह सकते है कि, सात स्तर पर वह क्षैतिज रूप से चलती है और, सात स्तर वह ऊपर की ओर बढ़ती है। और दोनों तरफ, इन सभी सात स्तरों पर, वह हमारे लिए जबरदस्त काम करती है। वह इन सात स्तरों के माध्यम से हमारी रक्षा कैसे करती है, यह इस तरह है, कि, जब आप बाईं तरफ जाना शुरू करते हैं, तो सात देवियां हैं जो आपको सामान्य स्थिति में वापस लाने की कोशिश करती हैं। शाकिनी, डाकिनी, … ये नाम हैं। और उसके द्वारा, आप सामान्य परिस्थितियों में आने का प्रयास करते हैं।

अब उदाहरण के लिए, कई मनोदैहिक बीमारियां जो हमें होती हैं, जैसे कैंसर और कई अन्य। मनोदैहिक का अर्थ है यह शारीरिक होने के साथ-साथ भावनात्मक भी है। तो ये मनोदैहिक मुसीबतें बाईं तरफ से आने लगती हैं। कभी-कभी आप दाईं तरफ़ बहुत अधिक होते हैं, फिर अचानक आपको बाईं तरफ़ फेंक दिया जाता है, अचानक। और फिर एक पेंडुलम की तरह गति, आप कितनी भी दूर जा सकते हैं। लेकिन बायीं तरफ़ सात शक्तियां हैं जो आपको इन बीमारियों से बचाने में मदद करती हैं, साथ ही उनकी तीव्रता को भी कम करती हैं।

इसलिए, एक समय पर, वे वही है जो शांति दे रही है, वह वही है जो आपकी देखभाल करती है, आपकी रक्षा करती है, और वे वही है जो आपको मनोदैहिक बीमारियों से बचाती है। यह एक बहुत शक्तिशाली संस्था है। अगर वे नहीं होती, तो मुझे नहीं पता कि क्या हुआ होता। इसलिए हमें उनकी पूजा अपने भीतर करनी चाहिए। हमें उनका सम्मान करना चाहिए और उन्हें समझना चाहिए। वह आपकी माँ है। कुंडलिनी के रूप में, वह आपकी विशेष माता है। वही एक है, अम्बा, जो आपको आपका दूसरा जन्म देती है। और, बाईं तरफ़ देवी के रूप में, वह आपको आपके उत्थान में बहुत अच्छा सहारा देती है। आपके उत्थान में बहुत अच्छा आधार। उनके बिना, आप खुद को संतुलित नहीं कर सकते थे।

जब लोग ज्यादा दाहिनी तरफ़ होते हैं, वे कभी-कभी बहुत अति में चले जाते हैं। फिर उन्हें ऐसी बीमारियाँ होती हैं जो बहुत अजीब होती हैं। उन्हें दिल का दौरा पड़ सकता है, उन्हें पक्षाघात हो सकता है। उन्हें दाईं तरफ़ पूरी तरह से लकवा मार जाता है, वे चल नहीं सकते, वे खुद को उठा नहीं सकते। यह दायीं तरफ़ की अति गतिशीलता है। तो फिर वे वही है जो आपको इसके बारे में बुरा महसूस कराती है। वे वही है जो सुझाव देती है कि, आप अपने दायीं तरफ़ गतिविधि को छोड़ दें और थोड़ा बाईं तरफ़ अधिक जाएं। तो इसका मतलब यह नहीं है कि बायीं नाड़ी से उपचारित दायाँ बाजु बहुत अच्छा है। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जो बहुत घमंडी है, अहंकारी है – ऐसा आदमी बिल्कुल विनम्र हो सकता है, और लोग सोच सकते हैं कि वह ठीक हो गया है – नहीं। वह बाईं तरफ़ है। यद्यपि वह विनम्र हो गया है, फिर भी वह सामान्य नहीं है। फिर भी वह बहुत गलत है, क्योंकि अब वह बाईं तरफ़ है।

बाईं बाज़ू, इस ‘समूह’ के ऊपरी स्तर पर किसी व्यक्ति को सिज़ोफ्रेनिया जैसी कई बीमारियां होने लगती हैं। इस तरफ़, यही सात केंद्र आपको बहुत गंभीर परेशानियाँ देने का काम करते हैं। उनमें से एक यह है कि लोग स्किज़ोफ्रेनिक हो जाते हैं। इसे ठीक किया जा सकता है; इसे ठीक किया जा सकता है यदि आप उस व्यक्ति को केंद्र में ले जा सकते हैं। और कुंडलिनी जागरण द्वारा, आप इसे कर सकते हैं।

फिर लोग पागल भी हो जाते हैं। लेकिन दाईं ओर की सभी परेशानियां गायब हो जाती हैं। ऐसे लोग जो बाईं ओर चले गए हैं उन्हें यकृत (लिवर) की समस्या नहीं होगी। उनको लिवर बढ़ने की समस्या हो सकती है, लेकिन उनको अति सक्रिय लिवर नहीं होगा। उन्हें अस्थमा, हार्ट-अटैक जैसे अन्य लक्षण नहीं होंगे … उन्हें दिल का दौरा नहीं पड़ सकता है। वे दूसरों को दिल का दौरा देंगे, लेकिन उन्हें खुद दिल का दौरा नहीं होता हैं! [हंसते हुए]

तो आपके चित्त की बाईं तरफ़ अचानक गति पर, इन सात संस्थाओं, या देवी-देवता जो आपकी देखभाल करते हैं द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाती है, । लेकिन फिर भी, अगर आप इसके साथ चलते जाते हैं … उदाहरण के लिए आप झूठे गुरुओं के पास जाते हैं … तो झूठे गुरु क्या करते हैं? वे आपको आपकी बाईं तरफ़ डालते हैं। वे आपको एक नाम, कुछ नाम देंगे, यह एक नौकर का नाम हो सकता है, या कोई भी, जिस पर उन्होंने कब्ज़ा कर रखा है और जिसकी वे देखभाल कर रहे हैं, दूसरों पर एक तरह के कब्जे के रूप में। ये तांत्रिक है, जहां ये मृत लोगों की आत्माओं को कब्ज़ा कर रखते हैं और उनका उपयोग आपको सम्मोहित करने के लिए करते हैं।

तो जब आप किसी भी कारण से बाईं तरफ़ जाना शुरू करते हैं- बहुत अधिक चिंता करके आप इसके शिकार हो सकते हैं, किसी बात के लिए बहुत दुःख महसूस करके आप इससे ग्रसित हो सकते हैं, या रोना,बिलखना कुछ भी करके कर सकते हैं। तब आपकी दाईं ओर की समस्याएं गायब हो जाती हैं। इसलिए आप इसे करते हैं। लेकिन यह बहुत अति में चला जाता है। दाईं तरफ़ की समस्याएं हैं, अगर वे ठीक हो जाती हैं, तो आपको बाईं तरफ़ की समस्याएं मिलती हैं, जो बहुत अधिक खतरनाक हैं। मैंने आपको सभी प्रकार के मनोदैहिक रोगों के बारे में बताया, मैं आपको डराने के लिए सूची नहीं देना चाहती, लेकिन वे सभी बाईं तरफ़ से आते हैं।

अब, चूंकि उनके अनुसार दाहिना भाग एक तरह से पूरी तरह ठीक हो गया है, लोगों को लगता है कि किसी आत्मा से ग्रसित होना बहुत अच्छा विचार है। तो ये झूठे गुरु, वे क्या करते हैं, वे इन मृत आत्माओं पर काबिज़ होते हैं। कैसे? मेरा मतलब है, वे जानते हैं कि यह कैसे करना है। मुझे आपको बताने की आवश्यकता नहीं है, आप इसे करने नहीं जा रहे हैं। और वे इसमें महारत हासिल करते हैं और वे आपको बताते हैं कि: “आप यह नाम जपे!” भगवान जाने आप किस प्रकार का नाम जपने लगते हैं। वे आपको नहीं कहते हैं कि: “आप किसी भी अवतार का नाम जपे”, लेकिन वे आपको बताएंगे: “राम का नाम लो।” राम का नाम ऐसा नहीं लिया जा सकता है: यह श्री राम, श्री कृष्ण, श्री माताजी होना है। इसलिए उन्होंने श्री को कभी नहीं रखा, वे आपको बताते हैं: “ये नाम लो।” और इन नामों से, क्या होता है कि आप बाईं तरफ़ चले जाते हैं, क्योंकि ये मृत आत्माएं हैं, वे आपको पकड़ लेते हैं।

बाईं ओर मृत आत्माएं हैं और दाईं ओर भी मृत आत्माएं हैं। यदि वे दाईं ओर हैं, तो वे बहुत महत्वाकांक्षी लोग हैं, और वे आपको पकड़ने की कोशिश करते हैं। यह पूरी बात का बहुत भयावह विवरण है। एक बार जब वे आपको पकड़ लेते हैं, यदि आप दाईं तरफ़ जाते हैं, तो आपको सभी दाईं ओर के ‘गुण’ मिलते हैं, आप सामान्य नहीं रहते हैं। कभी-कभी, आपको लगता है कि आप कहीं हवा में जा रहे हैं, आप कुछ ऐसा देखते है, जिसे आप सामान्य रूप से नहीं देखेंगे।

जैसे दो अमेरिकी मुझे मिलने आए थे और वे पत्रकार थे। तो मैंने उनसे पूछा: “आप यहाँ क्यों आये हैं?” उन्होंने कहा: “माँ, आप हमें हरिश्चंद्र की तरह बना दीजिये”। हरिश्चंद्र नाम का एक व्यक्ति था, जो एक पत्रकार था। मैंने कहा: “उसके जैसा?” क्योंकि वह हवा में यात्रा करता था और उसे समाचार मिलते थे। जैसे वह बॉम्बे के किसी हिस्से में क्या हो रहा है, इस बारे में बताएगा – जैसे हमारे पास जुहू बीच है। तो एक दिन अखबार में वह बात छपी जो कि जुहू बीच पर हुआ। और वहाँ उनका नाम था, जो संवाददाता थे, जो श्री हरिश्चंद्र थे। “तो, हरिश्चंद्र ने तुम्हें मेरा नाम कैसे बताया? मैंने उसका उपचार किया, आप उसी परेशानी में क्यों पड़ना चाहते हैं?” “क्योंकि हम यह ‘सूक्ष्म यात्रा’ करना चाहते हैं।” “अमेरिकन! किस लिए?” “क्योंकि हम पत्रकार हैं और हमें हर चीज के बारे में इतना पता होगा, हम सब तरफ़ यात्रा करना चाहते हैं।” मैंने कहा: “मैं ऐसा नहीं करती। बल्कि यदि आप प्रेतलोक की यात्रा कर रहे हैं, तो निश्चित रूप से मैं इसे ख़त्म कर सकती हूं। ”

तो इन सभी गुरुओं को प्रेतलोक यात्रा की इस कला में भी महारत हासिल थी, जो कुछ दायीं तरफ़ा मृत आत्माओं को नियंत्रित करती थीं।

तो दायीं-पक्षीय आत्माएं बहुत महत्वाकांक्षी होती हैं और, वे सभी प्रकार के उपचार, और सभी प्रकार की भविष्यवाणियां करते हैं, क्योंकि वे भविष्यवादी हैं। कभी-कभी वे जानते हैं, कभी-कभी वे नहीं जानते। लेकिन यह सब एक गलत स्रोत से आ रहा है। इसलिए उस जाल में पड़ना बहुत अच्छी बात नहीं है। अगर किसी के पास ऐसा है, तो ऐसा व्यक्ति हर तरह के गलत काम करने लगता है। जैसे वह आपके घर को हड़पने की कोशिश करेगा, आपके पैसे हड़पने के लिए, आपको धोखा देने के लिए, आपकी पत्नी के साथ भाग जाएगा। हर तरह की बातें, जो बिल्कुल गलत हैं। क्योंकि इसके साथ दायें बाजू का प्रभाव बढ़ता है।

कुछ दवाएं भी हैं, जब आप उन्हें लेते हैं, जैसे एलएसडी और वह सब, आप दाईं तरफ़ जाते हैं, और फिर आप रंग देखना शुरू करते हैं। और लोगों को लगता है कि रंगों को देखना बहुत बड़ी बात है, क्योंकि आमतौर पर आप रंग नहीं देखते हैं। वे मूल रूप से नहीं जानते कि उनके साथ क्या गलत है। लेकिन मूल रूप से उनके साथ गलत यह है कि एक भूत है, किसी प्रकार का भूत है जो बहुत ही दायाँ पक्षीय है, आपके अस्तित्व में चला गया है, और यह कार्यान्वित होने  की कोशिश कर रहा है।

लेकिन बायीं ओर के भूत अलग प्रकार के होते हैं। वे धूर्त हैं। और वे तुम्हें झगडालू होना  सिखाते हैं। वे आपको ‘मंत्रमुग्ध करने’ की कोशिश भी कर सकते हैं, इस हद तक कि कोई भी व्यक्ति किसी भी सीमा तक झूठ बोल सकता है। वह झूठ कहता है, फिर वह चुपके से आपके पैसे छीनने की कोशिश करता है, आपके पास जो कुछ भी है उसे छीन लेता है। सभी प्रकार की योजना गुप्त होती है, कुछ भी खुला नहीं है। और आप इसे बिना समझे भी करते हैं।

लेकिन इन सभी लोगों को किसी प्रकार की अत्यधिक भौतिक उन्नति प्राप्त करने में रुचि होती हैं, चाहे वह दाईं ओर वाले हो या बाईं ओर वाले। कई चीजें होती हैं, जैसे कि कट्टरवाद। यदि आप एक कट्टरपंथी हैं, तो ये भूत कब्ज़ा कर लेते हैं और वे आप पर हावी होने की कोशिश करते हैं। वे आपको यह सिखाने की कोशिश करते हैं कि उन लोगों को कैसे मारा जाए जो आपके धर्म या आपके संप्रदाय के नहीं हैं। वे विचार देते हैं, और वे लड़ते हैं और वे झगड़ा करते हैं और वे मार डालते हैं। लेकिन धरती माता, या समुद्र, कुछ भी, इन तत्वों में से कोई भी विनाश का काम कर सकता है। ऐसी जगहों पर, आपको बड़े भूकंप आने और उन्हें नष्ट करने के लिए मिलेंगे। या कोई तूफान आ सकता है जो आकर उन्हें नष्ट कर देगा। बेशक, उनके साथ कुछ निर्दोष लोग भी मारे जाते हैं। ऐसा कुछ भी हो सकता है जब भी आप गलत करते हैं – इन सभी पांच तत्वों द्वारा इसे ठीक किया जाता रहा है।

भारत में, हमारे पास लातूर नामक एक जगह थी, जहाँ लोग बहुत शराब पीते थे। एक बार उन्होंने जा कर तब शराब पी, जब वे श्री गणेश की प्रतिमा का विसर्जन कर के वापस आये थे। जैसा हम सामान्यतया करते हैं, हम उसे तीन दिन, शायद सात दिन या दस दिन बाद समुद्र में डाल देते हैं। और वे वहां से वापस आ गए, और वे उसके बाद पीने के लिए चले गए और वे पूरी तरह से नशे में थे। और फिर भी वे श्री गणेश की स्तुति गा रहे थे और सभी प्रकार की गंदी चीजें, अपवित्र चीजें, गंदी चीजें कह रहे थे, हम उन्हें या बहुत सारी गालियां कह सकते थे जो वे उपयोग कर रहे थे। उन बुरी इच्छाओं को पूरा कर रहे थे| और अचानक भूकंप आ गया। वे सब नाच रहे थे; वे सभी धरती माता के अंदर चले गए और समाप्त हो गए।

हमारा वहां एक केंद्र था, आश्चर्यजनक रूप से, उस केंद्र को छुआ तक नहीं गया था। लगभग 100 गज की दूरी पर, एक गोल घेरा बन गया था, इसलिए कोई भी बाहर नहीं जा सकता था, और वे चकित थे कि यह कैसे है कि इस केंद्र को बिल्कुल भी नहीं छुआ गया है।

यही देवी की शक्ति है। उसी समय, जब वह देखती है कि ये नकारात्मक लोग यातना या कष्ट देने आ रहे हैं – यह देवी ही है जो सही प्रकार के लोगों को बचाती है। जैसा कि आप जानते हैं, आम तौर पर हमेशा, अगर कोई एक अच्छा व्यक्ति है, तो उसके पीछे सौ बुरे लोग पड़े होंगे। और वह व्यक्ति बहुत ही हताश महसूस करता है, लेकिन तब देवी उस आदमी की मदद करती है, और उस व्यक्ति, या उस इंसान को नकारात्मक शक्ति से होने वाली परेशानियों से बचाती है।

तो आप की यह माता सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से लड़ती है। वे हो सकते हैं, जैसा कि मैंने आपको बताया, शराबी हों, जो पीते हैं। इसलिए वह नष्ट करने लगती है। निचले स्तर पर, वह उनके जिगर को नष्ट कर देगी। एक और भी बड़े स्तर पर, वह उनके परिवार को नष्ट कर देगी, वह उनके पैसे नष्ट कर देगी – मैंने कहीं भी नहीं सुना है कि, किसी एक शराबी की मूर्ति है, कभी नहीं! कहीं नहीं, वहाँ भी नहीं जहां पीना एक फैशन है, जहां पीना एक तरह से दैनिक पूजा है, लेकिन मैंने कभी कहीं नहीं देखा। ऐसा कैसे है कि किसी ने भी नशे में धुत किसी एक व्यक्ति की कोई प्रतिमा नहीं बनाई। यह प्रदर्शित करना अच्छा होगा, लेकिन नहीं, क्योंकि ज्ञान प्रबल होता है और लोग समझते हैं कि विनाशकारी शक्ति क्या है।

तो, कोई भी इस तरह के विचार के कब्ज़े में हो सकता है। देखिए, जैसे हिटलर। उसे यह विचार आया कि वह हर चीज का सम्राट है, और यहूदियों को नष्ट करने का उसे हर अधिकार है। और वह नष्ट कर रहा था, उसने इतने लोगों को नष्ट कर दिया। लेकिन अंत में जो हुआ, वह ‘स्वस्तिक’ का उपयोग कर रहा था, जो श्री गणेश का प्रतीक था, और इसके साथ, वह लड़ रहा था। लेकिन, सौभाग्य से, ऐसा हुआ कि माँ ने अपने मन में प्रवेश किया। उसके द्वारा, वह भ्रमित हो कर समझ को खो देता है, भ्रम द्वारा, वह गणेश की शक्ति खो देता है कि, इसका उपयोग कैसे करें। और वह स्टैंसिल का उपयोग कर रहा था और स्टैंसिल के कारण, मुझे कहना चाहिए, ‘स्वस्तिक’ की छपाई उलटी तरफ से की गई थी, जो विनाश के लिए थी। तो उन्होंने स्वास्तिक उलटी तरफ़ से छपवाई। परिणामस्वरूप वह नष्ट हो गया।

तो यह भूमिका भ्रांती की है। वह आपके मन में प्रवेश करती है और आपको एक भ्रांती में डाल देती है, जिसका अर्थ है एक भ्रम। आप गलतियाँ करते हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ होता, तो बहुत से लोग अब तक खत्म हो चुके होते। इसलिए वह ऐसे लोगों के दिमाग में प्रवेश करती है, जो मनुष्यों को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं, कुछ भी नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं, और विचारों को इस तरह से डालती हैं कि वे मर जाते हैं या वे आत्म-विनाश को प्राप्त होते है। यही कारण है कि, यह लिखा है कि वह हमारे भीतर एक भ्रान्तिरूपेण है। वह हमारे भीतर ऐसा भ्रम पैदा करती है, कि जो व्यक्ति हानिकारक होने की कोशिश करता है, जो भी तकलीफदेह होता है, विनाशकारी होता है, नष्ट हो जाता है।

सभी प्रकार की चीजें वह डाल सकती है, और इसी कारण से दुनिया में कितने लोग बच गए हैं। अन्यथा इतने सारे समाप्त हो जाते और शैतान का राज्य होता। लेकिन ऐसा है, यह देवी हैं, वही है जो हमें बचाती है। प्रतीकात्मक रूप से उन्होंने कहा है कि, उसने इतने सारे राक्षसों को मार दिया है। वास्तव में उन्होंने मारा है, ऐसा नहीं है कि बस एक प्रतीकात्मक तरीके से उन्हें मार डाला है। दैत्य और दानव थे। आज भी हमारे पास राक्षसी लोग हैं। और वे सभी न केवल मारे जाएंगे, बल्कि हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे। मैंने रूस में देखा है, मैंने कई देशों में देखा है, उन लोगों को, जो एक समय में भगवान के रूप में माने जाते थे, समाप्त हो गए हैं। यह हर देश में होता है। जहां भी गलत प्रकार के लोग हैं, वे उजागर हुए हैं और लोग उनकी तस्वीरों को देखना भी नहीं चाहते हैं। उन्होंने उनकी प्रतिमाओं को फेंक दिया है। यह सब इसलिए होता है क्योंकि यह देवी वही है जो, लोगों के लिए भ्रम पैदा करती है।

अब, माना कि, एक व्यक्ति है जो बहुत राक्षसी है, जो सभी को नष्ट करने वाला है। तब जो लोग समझदार हैं वे असलियत समझ जाएंगे लेकिन, जो नहीं हैं, वे उसे अपना लेंगे, और उसके साथ नष्ट हो जायेंगे। इस तरह, हजारों लोग नष्ट हो गए हैं क्योंकि उन्होंने वास्तविकता को नहीं परखा है। वे समझ नहीं पाए कि क्या सही है, क्या गलत है।

इसलिए सही और गलत का यह विचार भी उनके द्वारा पूरी तरह से भ्रमित है, ताकि जो गलत प्रकार के हैं, उन्हें नष्ट किया जा सके। हम उन्हें इस धरती पर नहीं चाहते हैं। जो कष्टकारी हैं, जो विनाशकारी हैं, जो बहसबाज़ हैं, वे सब नष्ट हो जाएंगे। लेकिन, बस खुद ही, वे नष्ट हो जाएंगे। देवी के लिए ऐसा करना आवश्यक नहीं है।

तो यह ऐसा ही है जो बहुत से लोग मुझसे पूछते हैं: “यह क्यों कहा गया है कि:” भ्रांती रूपेण संस्थिता “? वह एक भ्रम के रूप में क्यों मौजूद है? ” कारण यही है कि: आपकी विवेकशील शक्ति को चुनौती दी जाती है। लेकिन अगर आप एक सहज योगी हैं, जो एक असली सहज योगी हैं, तो आप अपनी उंगलियों पर महसूस कर सकते हैं कि आप जिस व्यक्ति का अनुसरण कर रहे हैं वह एक अच्छा आदमी है या बुरा आदमी। और फिर आप दूसरों को भी बता सकते हैं कि ऐसा मत करो …

इतने सारे साधक ऐसे ही नष्ट हो जाते हैं। गलत प्रकार के गुरु आए, और उन्होंने उनका अनुसरण किया। ‘बेवकूफ’, वे थे, बिल्कुल बेवकूफ गुरु – और ये ‘बेवकूफ’ लोग थे, मुझे नहीं पता ‘उन्होंने’ उनका अनुसरण क्यों किया। यह इतना स्पष्ट था कि वे किसी प्रकार की रोल्स रॉयस वगैरह के पीछे या ऐसा ही कुछ थे। और मैंने उन्हें देखा है, इतने पागल कि वे इससे बाहर नहीं निकल सकते। अब ऐसे लोग हैं, जो सभी प्रकार के गलत गुरुओं का अनुसरण कर रहे हैं।

उनमें से एक अब सभी भारतीयों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है, जब वे विदेश में हैं, भारत में नहीं। तो वे उस बाबाजी का अनुसरण करते हैं, ठीक है। और यह एक बाबाजी है, वह पैसे लेता है, वह पैसे चुराता है, वह गहने चुराता है, वह सभी तरह के काम करता है। लेकिन वे बुरा नहीं मानते। वह जो भी कर रहा है सब ठीक है। और यह एक ऐसे बाबाजी है, जिसका विनाश होना है। लेकिन इस बाबाजी के होने का ‘फायदा’ यह है कि, इस पृथ्वी पर सभी प्रकार के मूर्ख लोग हैं, जिनमें कोई विवेक शक्ति नहीं है और वे ऐसे बाबाओं के शिकार हैं। उन्हें हार्ट अटैक आ जाएगा, वे अंधे हो जाएंगे, उन्हें कैंसर हो जाएगा, उन्हें हर तरह की परेशानी हो जाएगी और वे नष्ट हो जाएंगे।

लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि मनुष्य ऐसे हैं कि, वे किसी व्यक्ति को किसी बाबाजी, या किसी महिला गुरुणी द्वारा नष्ट होते हुए देखते हैं, और यहाँ तक की किसी को मार दिया जाता है और फिर भी ये भी आगे बढ़ते है। यह कुछ आश्चर्यजनक है, कि मनुष्य यह नहीं देख पाता कि कोई अन्य व्यक्ति नष्ट हो गया है। जैसे, मैंने आपको कई बार बताया है, जो लोग पब में जा रहे हैं – वे देखते हैं कि, लोग पब से बाहर आते हैं और जमीन पर गिरते हैं। और फिर भी वे बाहर आ कर गिरने हेतु अंदर जाने के लिए कतार लगाते हैं – बहुत आश्चर्य की बात है, है ना? उनका कोई दिमाग नहीं है। वे पब में क्यों जाना चाहते हैं, अगर उन्होंने पहले से ही किसी को गिरते हुए देखा है? लेकिन वे ऐसा करते हैं!

अब यह अंतिम निर्णय है, जैसा कि मैंने आपको बताया था। और, इस समय, आपको यह देखना होगा कि, उस व्यक्ति के साथ क्या हो रहा है जो गलत तरीकों से, या इनमें से कुछ गुरुजनों की मदद से चला गया है। यह बहुत स्पष्ट है, अगर आप इसे देखना चाहते हैं, तो बहुत स्पष्ट है। वे खुद को कैसे नष्ट कर रहे हैं।

“किसी भी तरह से”, वे कहते हैं, “किसी भी ढंग से, हमें मरना ही है, इसलिए क्यों न पब में जाएं?” मेरा मतलब है, यह क्या है? इस तरह का तर्क वे देते हैं, इतना बेवकूफ, जैसे उनके पास कोई दिमाग नहीं है, समझने के लिए किसी व्यक्ति के पास कोई बुद्धिमत्ता नहीं है और वह वहां से वापस आ गया है और वह जमीन पर गिर गया है, और उसे उठाने वाला कोई नहीं है। और वे ऐसा कर रहे हैं। और वे कहते हैं कि, ईसा-मसीह ने ऐसा किया, उन्होने लोगों को शराब दी। नहीं, वह नहीं कर सकते, वह एकदम पूर्ण है। उसने शराब नहीं दी, उसने उन्हें सिर्फ अंगूर का एक साधारण रस दिया। आप एक सेकंड में शराब कैसे बना सकते हैं? लेकिन ये ऐसा है कि, वे इसे कैसे उचित ठहराते हैं। उनकी सभी बुरी बातें उनकी तथाकथित बुद्धिमत्ता से उचित ठहराई जाती हैं और वे विनाश की तरफ़ जाते हैं।

और, अब कलियुग में, विनाश बहुत तेजी से काम कर रहा है। क्यों? क्योंकि लोगों ने अपना विवेकशीलता गँवा दी है। वे अब अधिक विवेकवान नहीं हैं। और इतने सारे लोग गँवा चुके हैं, यह संख्या कुछ कम नहीं है। और यह अंधाधुंध बनना एक फैशन है। मैंने कहा: “वे ऐसा क्यों कर रहे हैं?” “माँ, चलन यही!” कोई भी बेवकूफी की चीज अब एक चलन है। अब जब आप उस बेवकूफी वाली बात पर जाते हैं और फिर आप मुश्किल में पड़ जाते हैं।

आजकल, निश्चित रूप से एक फैशन है कि महिलाओं, विशेष रूप से अमेरिका में, मैंने देखा है, वे अपने फ्रॉक पर सिर्फ पट्टियाँ पहनना चाहते हैं, आप इसे जो भी कहें। बस पट्टियाँ, और दोनों चक्र खुले छोड़ दिए जाते हैं। वे बहुत महत्वपूर्ण चक्र हैं -यहाँ तक की बाज़ू रहित भी नहीं पहनना चाहिए – बाजुओं को हमेशा कवर किया जाना चाहिए। आज्ञा को छोड़कर बाकी सभी चक्र को हम ढांकते हैं, आज्ञा को भी हम कुमकुम से कवर करते हैं।

उसके द्वारा, कितने रोग आ सकते हैं। आपको साइनस हो सकता हैं, साइनस से शुरू कर, आपको आंखों की परेशानी हो सकती है, आप को दोनों हाथों का पक्षाघात हो सकता हैं। आपको पार्किंसंस भी हो सकता हैं। सभी प्रकार की बीमारियां आ सकती हैं, क्योंकि ये दो बहुत महत्वपूर्ण चक्र हैं: एक श्री चक्र है, जो दाईं ओर है और दूसरा बाईं ओर ललिता चक्र है। आपको इन चक्रों को, घुटनों को कभी भी उजागर नहीं करना चाहिए।

लेकिन यह आजकल घुटनों को दिखाने का एक फैशन है-मुझे नहीं पता, मैं इसके पीछे के तर्क को नहीं समझ पाती। घुटनों में क्या है? क्यों लोग लोगों के घुटनों को देखना चाहते हैं? मेरा मतलब है, मुझे समझ नहीं आ रहा है। कोई तर्क नहीं है! यह संवेदनहीनता है! पहले, मैंने इसे कभी नहीं समझा, और अब मैं समझ गयी हूं कि वे पुरुषों को आकर्षित करना चाहती हैं! यदि पुरुष आपके घुटनों से आकर्षित होते हैं, तो उन्हें किस प्रकार के पुरुष होने चाहिए? मैं ऐसे पुरुषों को भी नहीं समझ पाती। पुरुषों पूरी तरह से कपडे पहने होंगे, जबकि महिलाएं अपने दोनों नाभी और दोनों चक्रों को उजागर करेंगी, जो बहुत महत्वपूर्ण हैं। और यही चलन है।

कल, फैशन शुरू हो जाएगा कि: “आप अपने सिर मुंडाएं” तो सब लोग गंजे होंगे। जैसे कि, यह भेड़ों के झुंड की तरह है, जो बिना समझे ‘सामूहिक’ होते हैं। तो एक फैशन है जो वास्तव में सामूहिक है। और इस तरह यह पूरी तरह से उनकी समझ को खत्म करता है। आप ऐसा हर दिन देखते हैं और आपको समझ में नहीं आता है।

मैंने उन भारतीय महिलाओं को भी देखा है जो विदेश में हैं-वे भी फैशन की नकल करने की कोशिश करती हैं। और वे अपने दोनों चक्रों को भी उजागर करती हैं, और फिर वे परेशानी में पड़ जाती हैं। बहुत आश्चर्य की बात है। कम से कम भारत में, इस तरह की महिला को देखना  अच्छा शगुन नहीं माना जाता है। लेकिन जब वे विदेश आए हैं, तो उन्होंने इस महान ज्ञान को सीखा है कि – अपने शरीर को कैसे उजागर करें।

इसका दूसरा पक्ष और भी गंभीर हो सकता है, जैसे: “आप अपना चेहरा ढँक लेते हैं।” मोहम्मद साहब ने आधुनिक समय के बारे में सोचा होगा और कहा था: “अपना चेहरा ढँक लो। अपने शरीर को ढक कर रखें। अपने आप को पूरी तरह से ढकें, ताकि आप एक महिला के रूप में सुरक्षित रहें, और पुरुष की सुरक्षा इस प्रकार हो कि, वे लालायित नहीं होते हैं। ” मेरा मतलब है, यह भी अति की तरफ़ जाना हुआ। और इसे इस तरह से कार्यान्वित किया जाना था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं है: मैंने यह भी देखा है कि मुस्लिम महिलाएं बहुत बेवकूफ होती हैं, जब वे अपने पति का सामना कर रही होती हैं, तो जिस तरह से वे पतियों को आकर्षित करने के लिए व्यवहार करती हैं, और जिस तरह से पति हावी होने की कोशिश करते हैं, वह कुछ ज्यादा ही होता है!

तो यह भ्रांती है। माँ, अम्बा द्वारा निर्मित भ्रांती, वही इस भ्राँति का निर्माण करती है। और इस भ्रांती के साथ मैंने देखा कि लोग ‘पगला’ सकते हैं और वे नहीं जानते कि वे पागल हुए जा रहे हैं, क्योंकि वे सभी उस तरफ जा रहे हैं। “तो क्या?” जैसे, एक कहानी है कि, एक पिता ने  अपने बेटे को बताया कि: “जिस भी रास्ते पर लोग चल रहे हों, आपको उसका अनुसरण करना चाहिए।” तो उसने कई लोगों को जाते देखा और वह उनके पीछे हो लिया। वह कहाँ पहुँच जाता है? एक अंतिम संस्कार के लिए!

इसका मतलब यह नहीं है कि: “अपने दिमाग का उपयोग न करें!” यह निश्चित रूप से कहा जाता है। और आप यह भी देखेंगे कि वे क्या करते हैं, यह माना कि, बहुत से लोग जा रहे हैं, उदाहरण के लिए, कुछ गलत करने के लिए। उनके पास अपना कोई दिमाग नहीं है, कोई व्यक्तित्व नहीं है, कुछ भी नहीं, वे बस इसका अनुसरण करते हैं। वे नहीं देखते कि उन्होंने क्या हासिल किया है, उन्हें क्या मिला है, क्या फायदा है, कुछ नहीं! यहां तक ​​कि जब आप कुछ खरीदते हैं, तो आप यह जानना चाहते हैं कि गुणवत्ता क्या है; जिस व्यक्ति ने खरीदा है, वह कैसे उपयोग कर रहा है, वह सब कुछ जिसे आप जानना चाहते हैं। लेकिन जब फैशन का अनुसरण करने की बात आती है, तो कोई भी इसके बारे में नहीं सोचता है। मैं सोचती हूँ कि, एक और फैशन लोगों के लिए बनाया गया है। जो कि शैतानी शक्तियों की मज़ेदार रचना इंसानों के विनाश के लिए है। इसे वे डिजाइनर कहते हैं। मैं कहती हूं कि यह डिजाइनर वगैरह कुछ भी नहीं है, बल्कि उनकी आक्रामक ताकत, उनकी नकारात्मक शक्ति है जो आप पर काम करती है। और बायीं तरफ़ बैठी माँ आपकी रक्षा करती है |

उनके पास सात पर्दे हैं। सात मर्यादाएं है जिनके पार वे आपको जाने नहीं देना चाहती। लेकिन इंसान कहता है: “क्यों नहीं? मैं क्यों नहीं? अगर वे नरक गए हैं, तो मैं भी नरक जाऊंगा! ” ठीक है! यह आपके लिए पहले से ही बनाया गया है, इसलिए आगे बढ़ें! तो इसीलिए वह भ्रांती का निर्माण करती है, क्योंकि कुछ लोगों को इस विकास प्रक्रिया से बाहर, इस प्रचलन से बाहर जाना है। उन्हें बाहर जाने दो! यह अंतिम निर्णय है। सब ठीक है, इस प्रकार आप का आकलन किया जायेगा| आपकी अपनी मूर्खता से, आपको आंका जाएगा।

मैंने बहुत से सहज योगियों को कुछ छोटा सा तरीका बताया है कि आपको रात में कुछ तेल लगाना चाहिए, सुबह के समय इसे धो लें| लेकिन वे ऐसा नहीं करते हैं! लेकिन, ऐसा करने से, क्या होता है कि आप अपने आप को शांत करते हैं, आप अच्छी नींद लेते हैं: तेल लगाना बहुत अच्छी बात है। हमें इसकी आवश्यकता है, हम सभी को, विशेष रूप से इस ठंड के मौसम में, हमें इसकी आवश्यकता है। लेकिन वे नहीं डालेंगे। वे खुद की उपेक्षा करेंगे। क्योंकि वे सोचते हैं, वे सहज योगी हैं, वे सुरक्षित हैं, माता उन्हें तेल दे लगा सकती हैं। ऐसा नही होता है !

आपको खुद की देखभाल करनी होगी – जहां तक ​​आपके शरीर का संबंध है, आपके दिमाग का संबंध है। आप अपने शरीर के लिए जिम्मेदार हैं। सहज योग की मदद से आप समझ पाएंगे कि आपके साथ क्या गलत है, आप क्या गलत कर रहे हैं। मेरा मतलब है, मैं आपको कुछ चीजें बताती हूं जो बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन, आपको ऐसा नहीं लगता, हो सकता है, लेकिन आपको ऐसा करने की कोशिश करनी चाहिए। वास्तव में चूँकि आप आत्मसाक्षात्कारी हैं, वहाँ आपकी आत्मा है, आप वायब्रेशन महसूस कर सकते हैं, और आप समझ सकते हैं कि किसी व्यक्ति के साथ क्या समस्या है।

ज्यादातर, जो मैंने देखा है – हालांकि अब यह बहुत कम है, कि लोगों ने मुझे हमेशा उन लोगों के बारे में सूचित किया है जो बाधित हैं कि: “माँ, इस तरह के और अमुक व्यक्ति बाधा ग्रसित है।” “माँ, इस व्यक्ति को यह बाधा है।” मैंने कहा: “लेकिन, उन्हें बाहर निकाल फेंको! बस इतना ही। आप मुझे क्यों उनके बारे में परेशान करना चाहते हैं? बस उन्हें बाहर फेंक दो! ” फिर, सहज योग से बाहर जाने के बाद, वे महसूस करेंगे, फिर वे कहेंगे: “माँ, हम सहज योग से बाहर नहीं जाना चाहते हैं।” क्यों? क्योंकि वे जानते हैं कि अब वे वास्तविकता से और सुरक्षा से पूरी तरह दूर हैं। वे इसीलिए वापस आना चाहते हैं। जो वापस आ सकते हैं वे वापस आ सकते हैं। लेकिन जिन्हे वापस नहीं आना चाहिए उन्हें कभी वापस नहीं आना चाहिए। क्योंकि वे इतने पागल हैं, कि वे पागलपन का एक फैशन पैदा करेंगे, और लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए दूसरों से प्रभावित होना सहज योगी का लक्षण नहीं है। वह दूसरे को प्रभावित कर सकता है, लेकिन वह दूसरे से कैसे प्रभावित हो जाता है, लेकिन सहज योग के लिए?

सहज योग विवेकशील शक्ति है। और जिसने तुम्हें यह दिया है – वह कुंडलिनी है। तो यह कुंडलिनी, जो आपकी माँ है, जो अब आपकी त्रिकोणीय हड्डी में बसी है, वह आपको आपके अस्तित्व के सभी गुणों और सभी सुन्दरता को भी प्रदान करती है। बेशक, मैंने आपको कुंडलिनी के बारे में इतनी सारी बातें बताई हैं, जो मुझे आपको बताने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन वह बायीं बाज़ू को भी सुधार कर सकती हैं।

कुछ लोगों को हर समय रोने बिलखने की आदत होती है? मुझे नहीं पता। हर बार जब आप उनसे मिलते हैं, वे आँसू में हैं: “और क्या हुआ है?” “माँ, यह हुआ है, यह सब हुआ है”। वे मुझे पत्र के बाद पत्र लिखेंगे, उनके संकटों, उनकी परेशानियों के बारे में और यह और वह। बाबा आप अब सहज योगी हैं। अब आप ईडन के बगीचे में हैं, आप स्वर्ग में हैं। आप सभी नारकीय चीजों के बारे में क्यों सोच रहे हैं, जो महत्वपूर्ण नहीं हैं? क्यों? क्योंकि आपको अपना व्यक्तित्व अभी तक नहीं मिला है।

अब सहज योगियों के रूप में, आपको यह समझने की अपनी विवेकशीलता विकसित करनी होगी कि दूसरे क्या हैं। अपने बारे में भी। आपको चीजों के प्रति इतनी ललक क्यों हैं? समझने की कोशिश करें। इसमें ऐसा क्या महान है? आप इसे क्यों करना चाहते हैं? अपने आप से सवाल करो! क्या यह कुछ बाधा है? क्या यह कुछ फैशन है? या यह आपकी व्यक्तिगत भावना है?

इसलिए, मैं आपको यह बताने की कोशिश कर रही हूं कि यह बायीं बाज़ू इतनी सुरक्षा प्रदान करने वाली है। उसी समय, यदि आप अपने बाएं पक्ष के बारे में बहुत आक्रामक हैं, तो आप एक से दूसरे से दूसरे नरक में फेंक दिए जाते हैं। और तब तुम पीड़ित होते हो। इसलिए आपको समझना चाहिए, आपको ज्ञान होना चाहिए, जिसे आप बाएं पक्ष की मदद से विकसित कर सकते हैं। बुद्धि बहुत अच्छी तरह से विकसित की जा सकती है।

अब, वहाँ कोई है, एक तथाकथित सहज योगी, और वह बिल्कुल आक्रामक, धन-उन्मुख, धोखेबाज है और आप उसके जाल में फंस जाते हैं। हिंदी में हम इसे ‘चक्कर’, ‘चक्कर’ कहते हैं। और एक बार जब आप इसमें शामिल हो जाते हैं, तो आप बहते चले जाते हैं। फिर भी आपका बायां पक्ष एक हद तक सुरक्षा देगा। लेकिन अगर आप बहुत अधिक लिप्त हैं, तो यह आपको फेंक देता है: “बाहर निकलो, बाहर निकलो!”

अब समय आ गया है कि हम सभी यह समझें कि आप सभी सहज योगी हैं और आपके पास एक ‘बहुत बड़ी’ जिम्मेदारी है, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि आपको वही करना चाहिए जो आपका प्रबुद्ध विवेक आपको बताता है। अपने ज्ञान को अपनाएं और उसके प्रकाश में रहो, और अंधकार में मत कूदो। और, इसके द्वारा, आप यह भी समझ पाएंगे कि कौन ठीक व्यक्ति है, कौन सही व्यक्ति नहीं है।

सहज योग में भी, यह नकारात्मकता काम कर सकती है – यह काम करता है। और किसी को दूसरों के नकारात्मक विचारों, या दूसरों के नकारात्मक कार्यों में शामिल नहीं होना चाहिए – आज एक चेतावनी है कि मैं आप सभी को देना चाहती थी, क्योंकि आप लोग अब बहुत कुछ उस आनंद को प्राप्त करने की स्थिति में हैं। अपने चित्त को देखो, यह कहाँ जाता है? बहुत सुंदर चीजें हैं, इतने सुंदर फूल देखें। इन चीजों को देखें, उन्होंने इसे इतना सुंदर बनाया है। मेरा यह हृदय खुशी से झूम उठता है।

जबकि कुछ लोग ध्यान ही नहीं देते हैं। एक अन्य दिन, मैंने किसी से पूछा: “उस फूल की व्यवस्था किसने की थी?” “कौन सा फूल?” मैंने कहा: “वह जो वहां था।” “कौन सा?” तो मैंने फूलों के नाम बताए। “हमने कभी नहीं देखा।” तुम कहाँ देख रहे थे, कि तुम फूल नहीं देख सकते थे? क्योंकि आपकी आँखें इतनी मूर्ख हैं कि वे सुंदरता नहीं देख सकते हैं। वे सभी प्रकार की नकारात्मक चीजों से प्रभावित हैं।

तो देवी को सभी राक्षसों को मारना होगा। मुझे नहीं पता कि उसने कितने लोगों को मारा है, और फिर से वे वापस आ गए हैं। और फिर से लोग फंसते जा रहे हैं। यह चल रहा है … तो, ये राक्षस वहां हैं और आपको उन्हें इंगित करना है और लोगों को बताना है कि: “आप कहाँ जा रहे हैं?” वह एक राक्षस है। उसने क्या किया है? उसने क्या-क्या हासिल किया है? ” अब आपको इस तरह से बात करनी चाहिए, खुले तौर पर। तो अब आप कई लोगों को बचा सकते हैं, जो इन राक्षसों के पास जा रहे हैं, जो इस तरह के कपड़ों में प्रकट हो रहे हैं कि आप उन्हें पहचान भी नहीं सकते। एक-एक करके वे नष्ट किये जाएंगे। लेकिन जब वे इतने सारे लोगों के दिल में हैं, तो आप उन्हें कैसे नष्ट कर सकते हैं? तो यह आप लोगों पर निर्भर है कि लोगों को बताएं कि ये राक्षस क्या कर रहे हैं। मैं उनकी चाल जानती हूं, लेकिन सबसे बुरी बात यह है कि इंसान उनकी चाल में पड़ जाता है।

इसलिए आपको बहुत आत्म-समझ होना चाहिए। हमेशा सवाल पूछें: “क्यों? मैं इस ओर आकर्षित क्यों हूं? क्या लाभ है? ” अपने आप से यह सवाल पूछें! आप पाएंगे कि सहज योग में आने के बाद, आपने बहुत कुछ हासिल किया है। तो अब यह झूठा विचार क्यों है? झूठी बातों, नकारात्मक बातों के पीछे क्यों जाते हैं? यही सहज योगियों को करना है, क्योंकि, ऐसा नहीं है कि वे दूसरों के लिए ही जिम्मेदार हैं, वे स्वयं के लिए भी जिम्मेदार हैं।

अब उसके बारे में सबसे प्यारी बात यह है कि वह आपको ‘श्रद्धा’ देती है। श्रद्धा हम इसे आस्था के रूप में अनुवादित कर सकते हैं। श्रद्धा सही ढंग से, गलत तरीके से नहीं। गलत आस्था होने पर लोग पूरा फायदा उठाते हैं। लेकिन श्रद्धा बहुत महत्वपूर्ण है, जो कि वे देती है। और यह बहुत प्रसन्नता दायक है। आस्था बहुत आनंद देने वाली है।

लेकिन जब अवतार रहते थे, तो किसी को भी उन पर विश्वास नहीं था। उन्हें उनमें कोई विश्वास नहीं था। क्राइस्ट – वे क्रूस पर चढ़ गए-कोई भी यह कहने के लिए खड़ा नहीं था: “तुम उसे क्यों क्रूस पर चढ़ा रहे हो?” उन सभी को! खड़ा हो कर कहने योग्य श्रद्धा कोई नहीं रख सका था। वे अपने देश के लिए लड़ सकते हैं, वे अपने धर्म या अपनी बकवास के लिए लड़ सकते हैं, लेकिन, कि “यह आदमी – वास्तव में सच्चा है, वह वही है जो एक अवतार है”, कोई कहने वाला भी नहीं होगा!

इसलिए, कल, मैं उनके द्वारा दिखाए गए नाटक को देखकर दंग रह गयी। मेरा मतलब है, मैं खुद का सामना नहीं कर सकी, मुझे कहना चाहिए।हालांकि यह सच्चाई है, मैं सहमत हूं। लेकिन मैं खुद का सामना नहीं कर सकी। मैं इस तरह की बात को स्वीकार करने के लिए बहुत विनम्र हूं, और यह बहुत प्रवीणता है, इस तरह के नाटक का निर्माण करना बहुत अच्छा है। और, सभी चीजों के बारे में, पहले मैंने कहा था कि अंग्रेजों में नाटक की इतनी समझ है, उनके पास शेक्सपियर और वैसे लोग थे, और जिस तरह से वे नाटक का निर्माण कर रहे थे, मैं समझ नहीं सकी। लेकिन यह पूर्णता पर अंतिम शब्द था। इतना कि मैं इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कह सकती। मैं तो दंग रह गयी। वह सत्य जो उन्होंने प्रतिपादित किया है।

लेकिन, मेरे जीवनकाल में, आपको कोई संदेह नहीं रहेगा, अगर आप में कुछ समझ है। क्योंकि इतने सारे चमत्कार हो रहे हैं। आज ही किसी ने मुझे बताया: “किसी को कैंसर, अल्सर और सभी प्रकार की चीजें थीं, और सहज योग के बाद, वह अस्पताल गई – उसके अंदर कोई रोग शेष भी नहीं था।” ऐसे सभी चमत्कार हो रहे हैं, इस अकेले को छोड़ भी दें। इसके अलावा पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ है, कि मेरी तस्वीरें हैं, जिन्हें आप देखते हैं- यह उल्लेखनीय है। यहां तक ​​कि वैज्ञानिक भी इस बात से हैरान हैं कि ये तस्वीरें कैसे आ रही हैं। दरअसल, इसके पीछे वास्तव में श्री गणेश खड़े थे। केवल एक कैमरे में यह आ गया। यह सिर्फ आप लोगों के विश्वास के लिए है।

क्योंकि, जब व्यक्ति नहीं होता है, जैसे क्राइस्ट नहीं रह जाता है, तो अब हर कोई चर्च जा रहा है। श्री राम नहीं हैं, इसलिए वे सभी उनकी प्रशंसा गा रहे हैं। श्री कृष्ण वहाँ नहीं हैं इसलिए वे “हरे राम, हरे कृष्ण” हैं। इसलिए जब साक्षात् है, जब तुम्हारे सामने है, तो तुम स्वीकार नहीं करते। क्योंकि, शायद, आपको विश्वास नहीं है कि आप इसके लायक हो सकते हैं, शायद। या शायद ऐसा है, मुझे नहीं पता, इंसान – उन्हें समझना बहुत मुश्किल है। जब आप उनके सामने खड़े होते हैं, तो उन्हें विश्वास नहीं होता। जब आप जीवित नहीं होंगे, तब वे विश्वास करेंगे। यह एक बहुत ही अजीब बात है, है ना? कुल मिलाकर, यदि आप आध्यात्मिकता के इतिहास को देखते हैं, तो ऐसा ही यह चल रहा है। और ज्ञानदेव ने कुछ चमत्कार दिखाए, फिर भी, केवल बुद्धिमान, केवल समझदार इसे समझ सकते थे और विश्वास कर सकते थे। और वे इतने कम हैं, कि परिणामस्वरूप, ऐसे लोगों को सूली पर चढ़ा दिया जाता है, मार दिया जाता है या [अस्पष्ट] कर दिया जाता है।

कोशिश उन्होंने मेरे साथ भी की है, लेकिन, आप जानते हैं, इस जीवन में, मैं सभी रूपों में आयी हूं, और कोई भी मुझे नष्ट नहीं कर सकता है। जहाँ तक और जब तक मैं खुद को खत्म नहीं करना चाहती, तब तक कोई नहीं कर सकता। शक्तियां प्रेम, स्नेह, करुणा की हैं, लेकिन एक ऐसी शक्ति भी है जो अन्य लोगों को पूरी तरह से सुधार करती है।

तो, आप लोगों के लिए, सहज योग में विश्वास नहीं करना पूरी तरह से खोखलापन दिखाता है। तुमने तस्वीरें देखी हैं, तुमने सब कुछ देखा है, तुम चमत्कारों को जानते हो, यह तुम्हें हुआ है। आपको सहज योग का अनुभव है। उसके बावजूद, आपका विश्वास इतना कमजोर है।

वह वही है जो आपको श्रद्धा दिलाती है। तो, आपको उनकी प्रशंसा करनी है, आपको उनके चरणों में गिरना है, आपको उनकी पूजा करनी है और उनसे प्रार्थना करना है: “हे माँ, हमें वह श्रद्धा दे।” और, इस विश्वास के साथ, आप आश्चर्यचकित होंगे, जिस किसी भी व्यक्ति के पास इस तरह की श्रद्धा है, वह मुझे बताता है: “माँ, कृपया, यह करो!” होता है, बस होता है। ऐसा अधिकार उन्हें कुछ भी माँगने को मिला है। यह काम करता है।

लेकिन, सबसे पहले, आपकी श्रद्धा ठोस होना चाहिए। विश्वास वास्तविक होना चाहिए। यदि यह वास्तविक है और यदि यह गहरा है, तो आप जो चाहें प्राप्त कर सकते हैं। गलत नहीं, लेकिन अच्छी बातें। और इसलिए, उस श्रद्धा को विकसित करने का प्रयास करें और, श्रद्धा के रूप में आपको ऐसा आनंद और खुशी मिलती है, आप प्रतिबद्ध होते हैं, आप जुड़ जाते हैं, और आप इससे बाहर निकलना नहीं चाहते हैं।

तो सबसे बड़ी बात, बाईं तरफ़ का आशीर्वाद श्रद्धा है। श्रद्धा जो विशुद्ध है, श्रद्धा का अनुवाद किया जा सकता है, हम कह सकते हैं, “विश्वास”, लेकिन नहीं। आस्था “श्रद्धा” है। श्रद्धा का अर्थ है, कुछ ऐसा जो भीतर है, जिसमें कोई संदेह नहीं है, जो ऐसा कर नहीं रहा है, ऐसा ही है। इसलिए आपको अब अपने बारे में और सहज योग के बारे में श्रद्धा विकसित करना चाहिए। अगर आपकी श्रद्धा मज़बूत है, तो आप कई चमत्कार भी देखेंगे। लेकिन चमत्कार के साथ, सब कुछ के साथ, फिर भी, यदि आप नहीं समझते हैं, तो यह आपका विवेक है।

परमात्मा आपको आशिर्वादित करें!