New Year Puja, You All Have to Become Masters in Sahaja Yoga

(भारत)

2000-12-31 New Year Puja Talk, Kalwe, India, 71' Download subtitles: EN,IT,PT,TRView subtitles: Add subtitles:
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New Year Puja 31st December 2000 Date: Place Kalwe: Type Puja Speech

[Hindi translation from English talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

वे सफल नहीं हो सकते। अब इस बात का निर्णय सहजयोगियों को करना है कि किस प्रसन्नता तथा वैभव से परिपूर्ण नववर्ष की सीमा तक वे सहजयोग को फैलाएंगे और मंगलकामना करती हूँ। मेरे इस देश में कितने लोगों को सहजयोग में लाएंगे। इस आप सबकी सहजयोग में गहन उन्नति वर्ष से लोग आपकी प्रतीक्षा कर रहे हो। मेरी ये मंगल कामना है अब आप सब होंगे और यदि आप सब लोग मिलकर इसे लोग सहजयोगी हों और आपको सहजयोग कार्यान्वित करने का निर्णय ले लें, तो मुझे में गुरु बनना है सहजयोग में गुरु बनने पूर्ण विश्वास है, आपको ऐसे बहुत से लोग के लिए, मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप लोग मिल सकते हैं जिन्हें कलियुगी अभिशाप के आज हम नव वर्ष की शुरुआत कर रहे हैं इस अवसर पर मैं आप सबके लिए बहुत ध्यान धारणा, अन्तर्वलोकन तथा अन्य सभी कारण ठगा गया। नव वर्ष के इस दिन प्रकार के आवश्यक कर्म कर रहे हैं। मैं यह शपथ आपको लेनी है कि अब हम सोचती हूँ इस वर्ष में बीते हुए वर्षों की सहजयोग को नए. विशाल एवं अधिक अपेक्षा आपके लिए अधिक उन्नति करने के गतिशील तरीके से आरम्भ करेंगे। अवसर है क्योंकि कठिनाईयों के वे वर्ष अब इसके लिए पहली आवश्यक चीज़ है ‘संघ शक्ति’ अर्थात आपकी सामूहिकता। अब हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे ये सामूहिकता अत्यन्त सुदृढ़, सुगठित, हैं या ये कहें कि अब सत्य युग स्थापित हो सूझ-बूझ पूर्ण तथा प्रेम के योग्य होनी चुका है। आरम्भ में हो सकता है कि आपको चाहिए। सहजयोग में ऐसा होना कठिन ये महसूस न हो कि कलियुगी वातावरण नहीं है क्योंकि व्यवहारिक रूप से सारी को पूरी तरह से साफ कर दिया गया है। ईष्ष्याएं, सारे तुच्छ विचार आपकी कुण्डलिनी निःसन्देह शनैः शनैः आप इस शुद्धीकरण ने धो दिए हैं। आपके लिए ये सारे कार्य को महसूस कर लेंगे और जो लोग आपके कुण्डलिनी ने कर दिए हैं। अब आप भिन्न आध्यात्मिक, राष्ट्रीय और पारिवारिक जीवन प्रकार के लोग हैं, अत्यन्त, अत्यन्त भिन्न के लिए भयानक हैं उन्हें पीछे हटना होगा। प्रकार के। केवल इतना ही नहीं आपने समाप्त हो गए हैं।

स्वयं को समझ लिया है। स्वयं को पहचान आवश्यकता नहीं है क्योंकि आप तो शक्ति लिया है और जो लोग स्वयं को पहचान से परिपूर्ण हैं। परमेश्वरी की शक्ति तो लेते हैं वे परस्पर झगड़ नहीं सकते क्योंकि आपमें विद्यमान है। इस परमेश्वरी शक्ति यह ‘स्व’ (self) या आत्मा ही व्यक्ति का का उपयोग किया जाना चाहिए । यह शक्ति और परमात्मा का प्रतिबिम्ब है। परमात्मा आपको बर्वाद करने के लिए नहीं दी गई यदि आपके हृदय में हैं तो किस प्रकार है। इसका उपयोग किया जाना चाहिए आप लड़-झगड़ सकते हैं। आपमें यदि ये अन्यथा शक्तिशाली होने का क्या लाभ है? स्थिति नहीं होगी तो आप अपने बेटे से भी मान लो यहाँ पर विद्युत शक्ति है और वह लड़ेंगे, ऐसा करना अत्यन्त मूर्खता होगी। प्रकाश नहीं देती तो इस विद्युत शक्ति को अतः सारे झगड़े, सारी मूर्खतापूर्ण चीजें जो प्राप्त करने का क्या लाभ है? जो शक्ति अब तक आप करते रहे हैं सब समाप्त हो आपको प्राप्त हुई है वह मानव का उद्धार जाएंगे। इसमें कोई सन्देह नहीं है। आप करने के लिए है। यह शव्ति आपको लोगों अत्यन्त गतिशील हो उठेंगे और अपनी की कुण्डलिनी जागृत करने के लिए दी गतिशीलता को देखकर आप आश्चर्य चकित गई है। यह कार्य आप कर सकते हैं। एक हो जाएंगे। आपको तो उठना भर है। व्यक्ति हजारों लोगों की कुण्डलिनी जागृत प्रकटीकरण के लिए आपको अपनी कर सकता है। मुझे आशा है कि अब आप अभिव्यक्ति मात्र करनी है आप अत्यन्त इसे अपनी ज़िम्मेदारी बना लेंगे। यह आपके सामूहिक, प्रगतिशील बन सकते हैं और लिए, सहजयोग के लिए और पूरे विश्व के असंख्य सहजयोगी बना सकते हैं। आपको लिए महानतम आशीर्वाद होगा क्योंकि पूरे आत्मसाक्षात्कार दिया जा चुका है। विश्व को परिवर्तित करना मेरा स्वप्न है । मैं आत्मसाक्षात्कार का ज्ञान भी आपको नहीं जानती अपने जीवन काल में मैं इस दिया जा चुका है और आपके स्वास्थ्य कार्य को कर पाऊंगी या नहीं। परन्तु आप एवं वैभव के लिए जो कुछ भी सम्भव लोग यदि पूर्ण हृदय से मेरा साथ दें तो ये था किया जा चुका है। अपने सृजनात्मक कार्य हो सकता तरीकों से परमेश्वरी का ऋण चुकाना है। सर्वप्रथम तो मैं सुनती हू कि बहुत से लोग ध्यान धारणा के लिए, सामूहिक आपको अत्यन्त सृजनात्मक बनना होगा। ध्यान धारणा के लिए नहीं जाते। वे आप देखते हैं कि विश्व में लोगों को सामूहिक नहीं है ये अत्यन्त आश्चर्य अनगिनत समस्याएं हैं, ऐसी समस्याएं जिनसे की बात है इतने वर्षों तक कार्य करने अब आपका कर्तव्य है। आप मुक्त हो चुके हैं। आप उनकी सहायता के पश्चात् भी, तीस वर्षों से मैं इस कर सकते हैं। आपको किसी सहायता की कार्य को करती आ रही हूँ परन्तु अब

भी लोग सहजयोग अपना अधिकार चाहते थे और वो आपको मिल गया है । (बपौती) समझते हैं। आप अपनी ऐसी बात नहीं है। आप महान सहजयोगियों जिम्मेदारी नहीं समझते। सामूहिक रूप से आपको ध्यान धारणा करनी होगी होंगे परमेश्वरी आपसे यही कार्य करवाना जहाँ भी कहीं सामूहिक ध्यान धारणा चाहती हैं। ये नहीं कि परमेश्वरी शक्तियों हो आपको उसमें जाना चाहिए। अपने का लाभ उठाते रहें कि मेरे पिता को ठीक क्षेत्रों में भी आप सामूहिक ध्यान धारणा का सृजन करने के शुद्ध आनन्द से आनन्दित कर दो, मेरी माँ को ठीक कर दो, मेरी आरम्भ कर सकते हैं यह सफल होगी। बहन को ठीक कर दो। कोई कहती है मेरे सहजयोग में आए हुए बहुत से लोग अब ६ पति मुझसे दुर्व्यवहार करते है या पति यान धारणा करने लगे हैं। मैं उन्हें पहचान पत्नी में से कोई ऐसी बात करता है। इन सकती हूँ। मैं जानती हूँ कि कौन ध्यान ६ बातों का कोई अन्त नहीं है इन्हें भूल ये जाएं। Tरणा करता है और कौन नहीं करता। समझ लेना कठिन कार्य नहीं है। इसके अतिरिक्त आपके साथ और भी बहुत सी समस्याएं है जैसे माँ की पिता की, चाचा आपको अपने अन्दर से गहन शक्तिशाली बनना है आप यदि अपनी दिव्य शक्तियों की आदि-आदि। इन चीजों की चिन्ता का उपयोग नहीं करते तो आपको किस करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप प्रकार पता चलेगा कि आपने ये शक्तियाँ यदि आत्म-साक्षात्कारी हैं और यदि प्राप्त कर ली है। ये तो इतनी साधारण आपका योग परमेश्वरी शक्ति से हो बात है जिन लोगों ने इन शक्तियों को उपयोग किया है वे मुझे बताते ही रहते हैं. कि उनके साथ क्या चमत्कार हुए, क्या आपकी इच्छा पूर्ण हो जाएगी। परन्तु ऐसा नहीं होता! क्यों? क्योंकि अभी तक आप ने ये नहीं समझा गया है तो घटित हुआ। किस तरह से उनकी रक्षा की गई, जो कुछ भी उन्होंने चाहा उन्हें किस कि आप क्या बन गए हैं। देखें कि अन्य लोगों को आत्मसाक्षात्कार देने से आपको प्रकार प्राप्त हो गया! परन्तु सहजयोग में आप पाखण्डी नहीं क्या आनन्द प्राप्त होता है, कितना गहन आनन्द मिलता है! यह आनन्द आपको हो सकते। आपमें यदि पाखण्ड है तो किसी अन्य कार्य में नहीं प्राप्त हो सकता, सहजयोग इसे जानता है, परमात्मा इसे आप जो चाहे खरीदें चाहे जो आपके पास जानता है कि आप पाखण्डी हैं। अपने हित हो आत्मसाक्षात्कार देने का आनन्द अन्यत्र के लिए अपने उत्थान के लिए आपको कहीं नहीं मिल सकता। इससे आप अत्यन्त सहजयोग में होना है। किसी अन्य के लिए प्रसन्न होंगे, इसलिए नहीं कि आप कुछ आप सहजयोग नहीं कर रहे. अपने लिए

कर रहे हैं। जब लोग इतने शक्तिशाली हो परन्तु समस्या ये है कि आप जाएंगे जाते हैं तो, मुझे हैरानी होती है, कितनी नहीं, आप मुझे पत्र लिखेंगे कि आप आसानी से वे रोगों का इलाज कर लेते हैं। मुझे मिलना चाहते हैं! इससे कोई लाभ परन्तु इसके लिए आवश्यक है कि वे ध्यान होने वाला नहीं। लोग आकर मुझे परेशान धारणा करें और अवश्य सामूहिक ध्यान करते हैं और ऐसे कार्य करते रहे हैं परन्तु धारणा में जाएं और अवश्य सामूहिक ध्यान इसका उन्हें कोई लाभ नहीं होता। स्वयं धारणा में भाग लें। अधिकतर लोग की सहायता करने से ही आपका लाभ सामूहिकता में नहीं जाते, इस बात से हो सकता है। आगामी वर्ष आपके लिए मैं आश्चर्य चकित हूँ। मैं जानती हूँ कि महान वर्ष होगा पश्चिम में, मैं हैरान हूँ, दिल्ली में कई बार तो सहज मन्दिर में किस प्रकार सहजयोग तेजी से फैल रहा सहजयोगियों को एक साथ बैठने की जगह है! रूस के लोग अत्यन्त गहन हैं, अत्यन्त नहीं होती इसलिए उन्हें दो बार आना गहन। एक बार यदि आत्मसाक्षात्कार प्राप्त पड़ता है या शनिवार को या इतवार को। हो जाए तो वे इसका मूल्य समझते हैं। वे कई सहजयोगी तो बाहर प्रतीक्षा करते हैं। अत्यन्त गहन एवं विनम्र हैं, उन्हें कोई बात नहीं परन्तु धारणा के लिए अवश्य जाएं होंगे कि वहाँ पर परमेश्वरी शक्ति बहती में से गुजरे हैं और अब उसकी प्रतिक्रिया है, चैतन्य लहरियाँ बहती हैं, मैं स्वयं हो रही है इस सबके बावजूद मैं इन पांचों वहाँ होती हूँ। ऐसा नहीं है कि मात्र देशों को दिव्य देश कहती हूँ क्योंकि अत्यन्त कर्भकाण्ड के लिए आप वहाँ जाते हैं। सुन्दर रूप से उन्होंने सहजयोग को स्वीकार समस्या ये है कि आप लोग इस बात किया है। आधुनिक मापदण्ड के अनुसार को महसूस नहीं करते कि आप वो लोग निर्धन हैं परन्तु हृदय से वो अत्यन्त, सहजयोग के लिए जिम्मेदार हैं, अन्य लोगों को आत्मसाक्षात्कार देने की के कारण भी वे अत्यन्त वैभवशाली हैं। जिम्मेदारी आपकी है तथा आपको उनके ध्यान धारणा के सभी कार्यक्रमों में चीज़ में वे कुशल हैं। उनका एक वैज्ञानिक उपस्थित होना चाहिए। सामूहिक ध्यान धारणा से आप ठीक हो जाते हैं। निकालीं जिनके द्वारा आप सभी चक्रों को, नियमित रूप से यदि सामूहिक ध्यान कुण्डलिनी, चक्र बाधाओं आदि सभी कुछ धारणा में आप जाएं तो आपकी सभी देख सकते हैं। कुछ चीजें हम आपको समस्याओं का समाधान हो जाता है। दिखा भी सकते हैं। दूसरी ओर हमारे इस बात का आपको मैं वचन देती हूँ भारतीय वैज्ञानिक मेरा विरोध करने में लगे कुछ नहीं सामूहिक ध्यान चाहिए। किसी चीज की उन्हें इच्छा नहीं । आप हैरान है। यद्यपि वे साम्यवाद की भयानक समस्या अत्यन्त धनवान हैं। सहजयोग की समझ वैज्ञानिक अत्यन्त कुशल है। हर भारत आया, उसने ऐसी विधियाँ खोज

हुए है! अधजल गगरी छलकत जाए (Little तो परमेश्वरी विचार आपमें किस प्रकार भरे knowledge is dangerous thing) वो नहीं जा सकते हैं। बर्तन यदि पानी आदि किसी समझते हैं कि मैं क्या कर रही हूँ और कैसे चीज़ से पहले ही भरा हो तो आप इसमें कर रही हूँ। वे तो बस मेरी आलोचना कुछ अन्य नहीं डाल सकते। अतः सर्वप्रथम करना चाहते हैं और ये तथाकथित बुद्धिवादी आपको इसे खाली करना होगा स्वयं को भी, विशेष रूप से महाराष्ट्र के बुद्धिवादियों खाली करना होगा, स्वयं को खाली करें के मस्तिष्क में तो मैं सोचती हूँ कुछ खराबी अपने मस्तिष्क को खाली करें । यह हैं। वे सहजयोग को नहीं समझ सकते। सहजयोग के माध्यम से सम्भव है, यदि सहजयोग उनकी समझ से परे है। उन्हें आप प्रतिक्रिया छोड़कर अपनी कुण्डलिनी क्या हो गया है ये तो मैं नहीं जानती परन्तु को आज्ञा चक्र से ऊपर ले जाएं। वे सहजयोग को नहीं समझ सकते। सहजयोग उनकी समझ से परे है । ये महाराष्ट्र के लोग अपने कर्मकाण्डों में व्यस्त हैं। प्रातः चार बजे उठकर वे स्नान करेंगे और न जाने कैसी -कैसी पूजा आरम्भ कर बन्धनों के कारण। कुछ लोग अपने अहं के देंगे! अभी कोई व्यक्ति बीमार पड़ा तो कारण प्रतिक्रिया करते हैं या बन्धनों के उसकी पत्नी ने मुझे लिखा कि न तो हम किसी मन्दिर जाते हैं न कोई कर्मकाण्ड प्रतिक्रिया करनी चाहिए? बिना प्रतिक्रिया करते हैं फिर भी मेरे पति बीमार पड़ गए किए आप आनन्द क्यों नहीं लेते? मात्र प्रतिक्रिया बहुत बुरी चीज़ है क्योंकि, जैसा मैंने उस दिन बताया था, आज्ञा चक्र से ही प्रतिक्रिया आरम्भ होती है। प्रतिक्रिया या तो आपके अहं के कारण होती है या कारण। किसलिए हमें किसी चीज के प्रति हैं। कल्पना करें! मानो यह सब कुछ न देखें कि किस प्रकार इतने सुन्दर फूलों का करने से ही आप लोग सहजयोगी बन सृजन किया गया है। इनका आनन्द लें। जाते हों! आप यदि सच्चे सहजयोगी हैं प्रतिक्रिया की क्या आवश्यकता है? कुछ तो आपको कुछ नहीं हो सकता। परन्तु लोग दोष ढूँढने में ही लगे रहते हैं। कोई आपके मन में तो एक गलत धारणा है। कहेगा ये चीज़ नहीं होनी चाहिए थी। आप चाहे मन्दिर जाएं या गलत स्थानों पर इन्होंने ये क्यों लगाई? सभी प्रकार की जाएं या किसी भी प्रकार के कर्मकाण्ड करें बेवकूफी भरी बातें! सृजन का आनन्द मौजूद इनसे कभी आपको लाभ नहीं हुआ। है, आपमें ये देखने महसूस करने और इसका आनन्द लेने की योग्यता होनी अतः पहले आपको स्वयं को खाली करना चाहिए। केवल तभी आप सहजयोगी हैं होगा आप यदि इन विचारों से परिपूर्ण हैं, अन्यथा नहीं। आप यदि प्रतिक्रिया करते हैं ये युगों पुराने विचार यदि आपके मस्तिष्क तो आप सहजयोगी नहीं हो सकते। में भरे हैं, उन्हें यदि आप चला रहे हैं सहजयोग तो एक उपाधि है। हुए

मैंने देखा है कि सभी कुगुरुओं का मेरे विचार से भिन्न प्रकार के सहजयोगी हैं। कोई व्यक्ति तो मात्र ऋणात्मक (Minus) एक एक करके पर्दाफाश हो रहा है। कहीं है कोई व्यक्ति धनात्मक (Plus)। कोई ऐसा भी आप इनसे मिलें और इनका दृष्टिकोण है, कोई वैसा । परन्तु सहजयोगी की देखें:- एक बार मैं हवाई जहाज में यात्रा गहनता तो इस बात से मापनी चाहिए कर रही थी। मेरी साथ वाली सीट पर एक कि वह किस प्रकार आनन्दित एवं प्रसन्न महिला बैठी हुई थी। उसकी लहरियाँ इतनी रहते हैं । हर समय आलोचना करते गर्म थीं कि मैंने उससे कि कौन रहना, हर समय क्रोध में रहना ये सारी से गुरु की शिष्या हो? उसने मुझे नाम चीजे चल रही हैं और व्यक्ति सोचता बताया और कहने लगी वो गुरु बहुत अच्छा है कि मैं सहजयोगी हूँ। हमारे परमेश्वरी है ये सर्वोत्तम है, ये है, वो है! उसके विश्व विद्यालय में कोई डिग्री नहीं है, हम शरीर से इतनी गर्मी निकल रही थी! परन्तु तुम पूछा गुरु कोई प्रमाण पत्र नहीं देते। आपने यदि मैं हैरान थी कि किस प्रकार ये महिला आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर लिया है तो आप इतने गर्व पूर्वक अपने गुरु की बात कर सहजयोगी हैं। कुण्डलिनी ने यदि आपका रही थी। ये गुरु बहुत बुरा आदमी है पर सहस्रार खोल दिया है तो आप सहजयोगी बिना मुझे जाने पहचाने एक अजनबी से हैं। परन्तु ये आवश्यक नहीं कि ऐसा वह बोले जा रही थी! परन्तु सहजयोगी सहजयोगी सच्चा सहजयोगी हो। यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप कितने अपने पड़ोसियों से आस-पास के लोगों से आनन्द में हैं और अन्य लोगों को सहजयोग की बात करें। बात ही नहीं करते। आपको चाहिए कि आत्मसाक्षात्कार देने के आप कितने इच्छुक जैसे भारत में बहुत से वार त्यौहार हैं हैं। आत्मसाक्षात्कार का आनन्द क्या आप अन्य लोगों के साथ बाँटना चाहते हैं? इसे जिनमें हम लोगों से मिलते हैं, जैसे महाराष्ट्र अपने तक सीमित नहीं रखना चाहते। यदि में हम लोग हल्दी और कुमकुम की रस्म आपकी स्थिति ऐसी नहीं है तो अभी तक करते हैं। हल्दी और कुमकुम के लिए आई आप पूर्ण सहजयोगी नहीं हैं। आप ये पता हुई महिलाओं से सहजयोग की बात बिल्कुल लगाएं कि आपने कितने लोगों को नहीं करते। उनके पास मेरा फोटो तक आत्मसाक्षात्कार दिया? ऐसा करना बहुत नहीं है! यदि वो चाहें तो ये कार्य कर आवश्यक है क्योंकि आगामी वर्ष बहुत ही सकते हैं। परन्तु मेरी समझ में नहीं आता महत्वपूर्ण होगा, बहुत ही महत्वपूर्ण वर्ष । कि उन्हें किस चीज़ की घबराहट है ये इस वर्ष में मैं चाहूंगी कि आप सब लोग बहुत अच्छा अवसर है। जब भी कोई रात्रि भोज हो, कोई जन सभा हो, आप सहजयोग चहूँ ओर जाकर आत्मसाक्षात्कार दें।

की बात करें। परन्तु लोग सहजयोग के हैं आपके देश की संस्कृति बहुत अच्छी बारे में नहीं बताते हैरानी की बात है कि है मैंने अमरीका तथा अन्य स्थानों की वे सहजयोग की बात नहीं करना चाहते, ये समस्याएं देखी हैं। ये समस्याएं हमारे यहाँ नहीं बताना चाहते कि हमें सहजयोग के इतनी अधिक व्याप्त नहीं है आपको केवल माध्यम से ये प्राप्त हुआ है। तो सहजयोग इतना समझना है कि आप सहजयोगी हैं। किस प्रकार फैलेगा? ये बात सबको समझनी एक वृक्ष की तरह। वृक्ष जब बढ़ता है तो ये है। आप सबको ये देखना है कि लोगों को जानता है कि ये वृक्ष है। वृक्ष को इस बात सहजयोग में लाने के लिए आप क्यों का ज्ञान होता है कि उसे फल उगाने हैं. ज़िम्मेदार हैं। निःसन्देह आप सबको सुरक्षा बिना किसी लक्ष्य के इसका विकास नहीं प्रदान की गई है आप सब आशीर्वादित हैं । हुआ सूखी छड़ी की तरह से खड़े होने के सबकी कामनाएं पूर्ण हो गई हैं. अधिकतर कामनाएं। परन्तु कितने लोग कुछ करना इस ऋण को चुका रहे हैं? अन्य लोगों को कोई न कोई कार्य है। तो क्या सहजयोगियों आत्मसाक्षात्कार देने के लिए कितने लोग का कोई कार्य नहीं? इतनी दुर्लभ घटना कार्य कर रहे हैं? सहजयोग आप पर घटित हुई है कि आपको आत्मसाक्षात्कार लिए इसे नहीं उगाया गया नहीं । इसे है। इस विश्व में हर चीज़ का एक ऋण है। परन्तु यदि आपका चित्त प्राप्त हो गया है। तो हमें अपने चित्त को अस्थिर (Haphazard) है, चित्त यदि इंधर-उधर नष्ट क्यों करना चाहिए? क्यों? स्वच्छ नहीं है, निर्मल नहीं है तो आप हमें उन्नत होना है। हम भिन्न लोग हैं। सभी प्रकार से भौतिक अष्टभुज (octopus) के जाल में फँसे रहते हैं । आप स्वयं ही अष्टभुज सम बन जाते हैं और हर मामलें में उस के जाल में उलझते आत्म-साक्षात्कारी न था और न ही उनसे चले जाते है । आपको स्वतंत्र पक्षी सम होना चाहिए। ये सारे मोह आपको कहीं भी नहीं पहुँचाएंगे। हमारे तौर तरीके बिल्कुल भिन्न हैं । विश्व में हम ही साक्षात्कारी लोग हैं। वास्तव में ईसा-मसीह के समय में कोई भी पूर्व कोई था। मैं हैरान थी कि चीन तथा अन्य स्थानों पर एक समय में एक गुरु की आवश्यकता थी, परन्तु आप लोग बहुत बड़ी संख्या में गुरु है। परन्तु आप गुरु रूप आपकी आसक्ति केवल सहजयोग से में अपनी शक्तियों का उपयोग नहीं करना होनी चाहिए और इस बात के प्रति चेतन चाहते। महिलाएं भी इसका उपयोग क्यों होना चाहिए कि आप स्वयं को पहचान नहीं करती? मैं देखती हूँ कि सहजयोग में चुके हैं। अपना मूल्य, अपना स्तर आप महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा कहीं अधिक जान सकते हैं। मैं आपको बताती हूँ कि अकर्मण्य हैं। उन्हें ये समझना चाहिए कि हम पूरे विश्व को परिवर्तित कर सकते मैं स्वयं एक महिला हूँ। अकेले मैंने ये सारा

कार्य किया है आप ये कार्य क्यों नहीं कर जो लोग अधिक करुणामय होते हैं उनक सकतीं? विश्व भर के लोगों का हृदय ओर भी अधिक सहजयोगी आकर्षित होते परिवर्तन करना अत्यन्त कठिन कार्य है, हैं। अपने इस स्वभाव का परिवर्तन करना परन्तु आपके लिए ये अत्यन्त सहज है। मैं बहुत आवश्यक है। आप यदि आडंबर करने यदि इस कार्य को करती हैूँ तो आप क्यों का प्रयत्न करेंगे तो कोई भी आपसे प्रभावित नहीं कर सकतीं? अपना पूर्ण चित्त इसको न होगा आप यदि स्वयं को बड़ी बहुत दें कि हम सहजयोग को केवल अपने लिए चीज मानते हैं तो कोई आपको देखेगा भी कार्यान्वित न करके मानवता के हित के नहीं। अत्यन्त विनम्र करुणामय व उदार लिए कार्यान्वित करेंगे। इस बात की हमें बनें और अत्यन्त आनन्दमय भी कल्पना संख्त जरूरत है। करे, सहजयोगी कुछ लोगों के साथ यदि आप केवल अपने और अपने परिवार जा रहा हो और वह हमसे कहे मेरे माताजी बीमार हैं, मेरे पिताजी मरने वाले हैं, ऐसा घटित हो रहा परन्तु के विषय में सोचते हैं तो आपकी करुणा, आपका प्रेम सभी कुछ व्यर्थ है। इसका मैं कोई लाभ नहीं। ऐसा आत्मसाक्षात्कार से सहजयोग कर रहा हूँ! तो लोग कहें गे. पूर्व भी सभी लोग करते हैं। तो अपने ‘आप सहजयोग किसलिए कर रहे हो? आप उनके पास बैठे और रोए बिलबिलाएं । वह यदि वास्तव में परिवार से तथा अन्य चीज़ों से आसक्त होने का क्या लाभ है? अन्य चीज़ों और विश्व से हमे जुड़ना है हम पुरे विश्व से सहजयोग कर रहा है तो कोई बीमारी सम्बन्धित हैं। अब आप व्यक्तिवादी नहीं आ नहीं सकती। कोई कठिनाई नहीं पूरे आ सकती। यह सच्चाई है। समझने का हैं। जैसा मैंने कहा कि बूँद अब सागर बन गई है। समुद्र से अपना तदात्म्य करें । प्रयत्न करें, केवल आपके ही कारण जो आपने यदि देखा हो तो समुद्र का स्तर लोग वहाँ है उनका उत्थान होगा। परन्तु निम्नतम होता है। इतना निम्न कि जो लोग सहजयोगी नहीं है उनके साथ बिन्दू समुद्र से आरम्भ होता है। सागर इतना विनम्र है। इसका स्तर निम्नतम है चाहे आपके सम्बन्धी हों, जो चाहे हों, कोई परन्तु फिर भी सभी नदियाँ आकर इसमें लाभ नहीं है क्योंकि आपका स्तर भिन्न है गिरती हैं! समुद्र स्वयं सूखकर आकाश में और उनका भिन्न है। या तो उनका स्तर बादलों का सृजन करता है और वहाँ पर उठाने का प्रयत्न करें या उनसे कोई बादल वर्षा बनकर फिर उसी समुद्र में सम्बन्ध न रखें। वो तो आपको भी पतन गिरते हैं। अतः जो लोग विनम्र होंगे उनकी की ओर खींच लेंगे वो आपकी बुलन्दी को ओर अधिक सहजयोगी आकर्षित होंगे, और नहीं देखेंगे क्योंकि देखने के लिए उनके शून्य तादात्म्य करने का कोई लाभ नहीं है वो

पास आँखें ही नही हैं, सुनने के लिए कान नहीं हैं और समझने के लिए संवेदना नहीं आपको आशीर्वाद देती हूँ और कामना करती है। उन्होंने यदि आपमें हुआ परिवर्तन देखा हूँ कि आपमें शुद्ध इच्छा हो कि आप केवल होता तो वे सिर के भार सहजयोग में आ स्वयं ही सहजयोगी न बनें अन्य लोगों को जाते। यदि वो नहीं आते तो यह आपका भी सहजयोगी बनाएं। यह आप ही की का आनन्द उठा रहे है। मैं हृदय से बार-बार काम नहीं है। आपने उनकी चिन्ता नहीं शुद्ध इच्छा है। आपने चाहे इसे पहचाना न करनी। वो यदि सहजयोग में आत हैं तो हो परन्तु जब तक आप इस इच्छा को पूर्ण ठीक है अन्यथा वो आपके सम्बन्धी नहीं नहीं कर लेते आप अच्छे सहजयोगी नहीं हैं। किसी भी प्रकार से वे आपके सम्बन्धी बन सकते। शुद्ध इच्छा कि हर प्रकार से, नहीं है किस प्रकार आप उन्हें सहजयोग सर्वत्र, सबमें सहजयोग को फैलाना है। समझाएंगे? किसी भी चीज़ की व्याख्या सहजयोग अच्छी तरह से फैलेगा तो बहुत से आप उनके सम्मुख कैसे करेंगे उन लोगों से लोगों की रक्षा की जा सकेगी, बहुत लोग जो माया के जाल में फँसे हुए हैं वो उचित मार्ग पर लौट आएंगे। आप उनके लिए क्या कुछ कर सकते है इस बात को सोचें? यदि मैं अकेली इतने सारे सहजयोगी से बातचीत कर पाना असम्भव होगा। अतः आज मुझे आप सबको बताना है कि हमारा सहजयोग परिवार अत्यन्त विशाल है 86 देशों में यह फैल रहा है और बहुत अच्छा चल रहा है। हमें केवल इतना देखना बना सकती हैँ तो आप लोग भी क्यों नहीं है कि आप उसी महान सहजयोग परिवार रूपी समुद्र से सम्बन्धित हैं। परन्तु आपने ही इसका आगे विस्तार करना है। इसके प्रयत्न करते और बहुत से सहजयोगी बनाते? इस विश्व का अभिप्राय ही सहजयोग है। समाचार पत्रों में जब मैं कोई समस्याएं देखती हूँ तो सोचती हूँ ‘हे परमात्मा, यदि ये लोग सहजयोगी होते तो ये समस्याएं न बारे में आपने उनका हृदय परिवर्तन करना है। ये आपकी ज़िम्मेदारी है। बिना किसी होतीं। परन्त अब भी मैं लोगों को इधर- कारण के आपको सहजयोग नहीं दिया गया। आपको महान सहजयोगी, बेहतर सहजयोगी बनना है। इसके लिए आप स्वयं उधर भटकते हुए देखती हैँ। मैं नहीं जानती कि उनके पास मस्तिष्क हैं भी या नहीं? विश्व कहाँ जा रहा है और कौन इसकी ध्यान धारणा करें। केवल ध्यान धारणा ही रक्षा करेगा? न करें, जहाँ तक सम्भव हो सामूहिक कार्यक्रमों में भी भाग लें। मुझे प्रसन्नता है कि आप लोग भारत में रुके रहे और इस नहीं हूँ कि आपको अपने निजी जीवन में पूजा में पहुँचे। खूब बारिश हुई फिर भी क्या करना चाहिए। परन्तु आपको स्वयं आप लोग यहाँ हैं और परमात्मा के आशीष इस बात का ज्ञान होना चाहिए। आपको मैं यहाँ पर आपको यह बताने के लिए

अत्यन्त स्वच्छ एवं सुन्दर (आन्तरिक रूप लोग हैं मेरे विचार में 80 प्रतिशत लोग ऐसे से) होना चाहिए। स्वयं के साथ आपने क्या हैं जो जिज्ञासु हैं, उन्हें आप सहजयोग दें। करना है? कुछ लोग इतने उथले हैं कि आप उनके साथ नहीं चल सकते। सहजयोग उनके भेजे में नहीं जाता, वो इतने उथले कि अब आप सहजयोग की जिम्मेदारी अपने हैं। अतः उन्हें जाएं। मैं नहीं सोचती कन्धों पर ले लें और सबको बताते चले कि उनकी रक्षा की जा सकेगी। अतः उन्हें जाएं। मेरा कहने का अभिप्राय ये है कि भूल जाओ, वे आनन्द नहीं ले सकते। सदैव मुझे तुच्छ लोकप्रियता नहीं चाहिए। मैं तो वो किसी व्यर्थ की चीज की चिन्ता में लगे ये चाहती हूँ कि चारों तरफ सहजयोगी रहते हैं। तो ऐसे लोगों के साथ आपको हो। नहीं चलना चाहिए। परन्तु अब भी ऐसे आपकी माँ की केवल एक यही इच्छा है भूल परमात्मा आपको धन्य करें।