New Year’s Eve Puja

(भारत)

2001-12-31 New Year Puja Talk, Kalve, India, 28' Download subtitles: PT,TRView subtitles: Add subtitles:
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New Year Puja – You Should Be Satisfied Within 31st December 2001 Date: Kalwe Place Type Puja

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

देर हो गई और आप लोगों की प्रेम की आप कर रहे हैं कि सिर्फ इस शक्ति को शक्ति मुझे खींच के लाई है यहाँ । कुछ तो अपने लिए, अपने बच्चों के लिए आप आपकी माँ की तबियत ठीक नहीं है और इस्तेमाल करें? ये बहुत जरूरी है क्योंकि इच्छा शक्ति जबरदस्त है। उसी के बूते मैंने देखा है कि पार होने पर भी लोगों में दोष रह जाता है। पूर्णता आनी चाहिए। पर चल रहा है। मैं चाहती हूँ आप लोगों की भी इच्छा जब तक आप दूसरों से संबंधित हो कर शक्ति जबरदस्त हो जाए। इस मामले में के सहजयोग का कार्य न करें, आपको आपने क्या किया वो खुद ही सोचना चाहिए। पता ही नहीं चलेगा कि आप के अंदर अपनी ओर नज़र करके देखें कि आपने इसमें कौन सी मेहनत की? आप ध्यान लोग आते हैं और पैसा बनाते हैं। ऐसे करते हैं, ध्यान में आप गहनता लाएँ और बहुत से लोग हैं जो सहजयोग में आने के सोचिए कि आप एक संत हैं। और आपको बाद पैसा बनाते हैं बाद में जरूर वो खुल क्या करना चाहिए? माँ ने आपको संत जाते हैं, दिखाई देता है और बेकार परेशानी बना दिया है। अब आपको आगे क्या करना होती है। सो फायदा क्या? चाहिए? अपनी दुरुस्ती तो करनी है। इसमें कोई शक नहीं । आगे आपको क्या करना आप यहाँ धर्म बाँधने आये हैं। और धर्म को चाहिए? अपनी दुरुस्ती आप करिए, पर मानना चाहिए। और बंबई शहर में हमने उसके बाद जब वो फलीभूत हो गई और सुना है कि अनेक तरह के अधर्म चल पड़े जब पूर्णत्व को आप पहुँच गए, तब आप हैं जो 20-25 साल पहले यहाँ बिल्कुल क्या कर रहे हैं? तब भी आप सिर्फ ध्यान नहीं थे। एक तो आजकल के सिनेमा जो में जाते हैं या प्रोग्राम में जाते हैं और वहीं बन रहे हैं, उसकी शुद्धता बहुत कम है। कौन से दोष रह गए हैं। यहाँ तक कि | आप यहाँ पैसा कमाने नहीं आए हैं । ऐसे सिनेमा देखना ही नहीं चाहिए। आप तक चलता है। इसके आगे क्या किया? आपको ये दान मिला है आपकी आत्मा के इतने लोग ऐसे सिनेमा न देखें तो वो आधार से। आत्मा ने आपको पुनर्जन्म दिया, सिनेमा चलेंगे ही नहीं और वैसे चल भी तो आप इससे आगे क्या कर रहे हैं, ये नहीं रहे हैं । पर जो गन्दे सिनेमा होएंगे वो आपको देखना चाहिए। कौन सी प्रगति लोगों को पसन्द नहीं। लोग चाहते हैं कि

अच्छे ऐसे सिनेमा बने कि जिसको कुटुम्ब ओर नजर करें और नजर से देखें कि जा कर देख सके । एक ये बात हो गई और भी अत्यंत हैं। इसी को हम कहते हैं कि आप अपनी मलेच्छ, गन्दे तरीके से लोग गन्दी -गन्दी चीजें पढते हैं आप लोग महीं पढ़ते नहीं हैं। मैं मानती हैं। पर अखबार जाएँगे। क्या फासदा हैं इन दोषों को रखने में भी । से। उससे किसी को आज तक फायदा आपके अंदर अभी तक कौन से दोष वचे सफाई करो। । आप लोग उससे जो दोष हैं वे पूरी तरह से नष्ट हो निर्मल तत्प अपने अंदर लाएं बहुत अश्लील चीजें लिखी जाती हैं सौ सबसे पहले अपने को निर्मल कर लेना नहीं हुआ। अधिकतर लोग तो जेल ही चाहिए सबसे बहुत है लोगों में कि उनकी चले गए और जो नहीं गए हैं उन पर लोग आँखें चारों तरफ दौड़ने लगती हैं। जिनकी थूकते हैं। इसलिए आप लोगों से मुझे ऑँखे इधर-उधर दौड़ती हैं बो बताना है एक ही बात कि आप दूसरों के हैं ही नहीं। ऑँखे स्त्ध, निश्चल होनी दोषों की तरफ मत देखिए । अपने दोपों चाहिए। ये पहली पहचान है। गर अब भी की तरफ देखिए और देखिए कि आप में ऑखें इसकी तरफ, उसकी तरफ ऐसे दौड़ती क्या दोष हैं तो इसे कहना चाहिए, अभी आप के अब भी आँख में लालसा है? और सहजयोगी नहीं। दूसरे लालच। आप में अगर अब भी ये खरीदें, वो खरीदें, ये लाएँ, बो लाएँ। ये लालच बाकी है तो आप सहजयोगी नहीं सबसे ज्यादा अमेरीका में था लेकिन हो सकते। और ये लालच एक दिन खुल America एक दम बड़े भारी आघात से दब जाएगी पहली चीज़ है लालच छूटनी ये खरीद, वो खरीद। चाहिए। पर श्री कृष्ण ने तो कहा है कि पहली खरीदना ही है तो ऐसी चीज खरीदो जो चीज़ है गुस्सा छूटना चाहिए। जब तक हाथ से बनी हो। जिसमें कल्पना हो, जिसमें गुस्सा आपको आए तो सोंचना चाहिए कि आपकी सृजन शक्ति दिखाई दे। ऐसे लोग आप अभी सहजयोगी नहीं हैं। किसी ने बेचारे जो इतनी बढिया-बढ़िया चीजें बनाते हमें गुस्सा होते देखा नहीं। सब लोग कहते हैं, उसको कोई नहीं खरीदता। फालतू की हैं कि माँ आप तो गुस्सा होते ही नहीं और कभी-कभी ऐसी बातें हो जाती कि उस न तो आमका भला होगा और न ही उन पर किसी को भी गुस्सा आ जाए, मैं कहती लोगों का जो इतनी अच्छी चीजें बनाते हैं। हैं, क्या फायदा? गुस्से से कोई फायदा हरेक चीज में अगर आप कलात्मक हो नहीं। सहजयोरगी है । गुस्सा आ में आता है? आप आपको Attraction है सब चीजों के लिए? गया पागल जैसे इसके चर जा, उसके घर जा। हाँ अगर काही चीजे खरीदते हैं । इन फालतू की चीजों से जाएँ। घर में हरेक चीज जो आए वो कलात्मक होनी चाहिए। पचासों बर्तन रखेंगे आज बताना मुझे ये है कि आप अपनी

पर एक कायदे का बर्तन नहीं कारीगरों अपने यहाँ बगीचा लगा लिया। मतलब से ये जो बनी हुई चीजें हैं उनका संगोपन सौन्दर्य दृष्टि सबसे पहले सहजयोगियों में होना चाहिए. अगर आप सहजयोगी हैं। आनी चाहिए। फालतू की बहुत सी चीजें बेकार की चीजे आप खरीदते रहते हैं. घर के अंदर भरी हुई हैं आजकल क्योंकि जिनका कोई अर्थ नहीं। यहाँ तक मैंने बाजार हैं। बाजार में जाते हैं वहाँ कुछ हैं ऐसी जितनी भी चीजें हैं, उठा पर साड़ियोँ और एक भी साड़ी कायदे की कर होली कर दीजिए बेकार की चीजों नहीं अजीब- अजीय, उसमें व्या-क्या बना की प्लास्टिक का आजकल इतना हो देते हैं भूतों जैसी चीज। अच्छी सुन्दर और गया है कि गिलास भी ढूंढना हो तो वो ज्यादती है। देखा है कि औरतें साड़ियाँ खरीदेगी। साड़ियों खरीदते कल्पना से भरी हुई आप दो साड़ियां रखें, प्लास्टिक अरे ये तो बहुत में बनिस्थत आप 50 साड़ियाों लें । अपने देश तो प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं कर सकती में अमी भी कलात्मकता का Appreciation प्लास्टिक की साडियाँ हो गई। प्लास्टिक है। उसको जानना है उसको समझना है। का ये हो गया। इतना उपयोग प्लास्टिक मैं देखती हूँ जय घरों में जाओ तो अजीब का आ गया है कि उससे आदमी बीमार पडने का बडा अंदेशा है । बच्चे मरते हैं। भूत जैसे रंग लगे हुए हैं । हैं। भूत जैसी Deo০ ं। सब कुछ है। तो जहाँ तक हो सके प्लास्टिक आप लोग सहजयोगी हैं जहाँ तक हो सके। समझना चाहिए कि कौन सी चीज सौन्दर्य पर आजकल सभी चीज़ में प्लास्टिक आ खासकर बम्बई में तो बड़ी मुश्किल तभी आप अपने जीवन को भी सुन्दर है कि यहाँ तक कि सोफा सैट भी प्लास्टिक का बनाते हैं। बैठना है तो प्लास्टिक में, औरत आप से मिले वो ये कहे कि बहुत ही पहनना तो प्लास्टिक, चलना तो प्लास्टिक बढ़़िया आदमी है बहुत ही सुन्दर है। और अब थोड़े दिन में मोटरें भी प्लास्टिक से की बनाएँगे सौ आपका प्लास्टिक से कोई आप सहजयोगी हैं । मैं ये और घरों को सौन्दर्य से सजाएगें यह नहीं कहती कि आप चौगा पहन के घूमो। पहली पहचान है। अगर सहजयोगी भूत ये नहीं है सजहयोग में। कायदे के कपड़े जैसा घूमता हो तो वो किस काम का। पहनिए। कायदे से रहें। कोई ऐसी बात कायदे से कपड़े पहनना, कायदे से बातचीत नहीं है कि जिससे आप साधू वाबा दिखाई करना, कायदे से सबसे व्यवहार करना, दें। । पर जो चीज़ सुन्दर-सुन्दर चीजों से अपने घर को आपके लिए हितकारी नहीं वो नहीं इस्तेमाल सजाना। फूलों से भी सजा सकते हैं करनी चाहिए। उससे दूर रहना चाहिए. ration R आप को इस्तेमाल महीं करें पूर्ण है और सौन्दर्य को समझना चाहिए। गया है। बनाऐंगे। कि जो आदमी आपसे मिले या जिस तरह से आप अपने को सौन्दर्यं सजाएगे इसी तरह से आप उसके वातावरण मतलब नहीं। कोई ढोंगबाज़ी नहीं

और बच्चों को भी बचाना चाहिए दूसरी बात सहजयोग में मैंने देखा कि अब जिस दशा में आप आएँ अब आप उस सब लोग चाहते हैं कि मैं उनके धर जाऊँ। समाधान को प्राप्त हों और देखें कि आप आप क्यों नहीं समझते कि मैं आपके घर जो भी कर रहे हैं उससे आपको समाधान आऊँ, ऐसा आपने क्या किया? या फिर मिलें । जिसको देखो वही हमारे घर आना चाहता है! मैं कहीं भी जाती हैँ मुझे आराम से सहजयोग बढ़ाएँ आप बहुत समाधानी हो रहने नहीं देते आपने अभी कुछ भी नहीं जाएँगे आपको यह नहीं लगेगा कि माँ के किया है। आप किसी भी तरह से ये इच्छा बनी रहें अधिकतर मैंने ऐसा देखा है कि जो रहने दीजिए और ये सोचिए कि अभी लोग बहुत आगे-आगे करते हैं वो या तो आपकी औकात क्या है? आप क्या चाहते बेईमान होते हैं और या तो वो चोर होते हैं? ऐसी क्यों चाहत करें जिससे आपकी हैं। जो लोग दिल से साफ हैं और जो माँ को तकलीफ हो। ऐसे क्यों काम करना जैसे हम कहीं से आए, आकर सामने खड़े हैं। अब मैं चाहती हैँ कि अब ये समय आ हो गए। ऐसा नहीं करिए। समाधान अगर गया है कि आप लोग अब मेरे ऊपर सहजयोग में नहीं आया तो आप बेकार हैं। मेहरवानी करें क्योंकि मुझसे तो सब जहाँ भी हैं, माँ हमारे साथ हैं, इस प्रकार एक समाधानी वृत्ति होनी चाहिए। उसी से आप लोग ठीक नहीं हैं तो मेरी तबियत आपकी प्रगति होगी। जिस चीज़ की दुनिया खराब हो जाती है। इसलिए आप को में प्रगति होती है. वो सब कुछ समाधान में बिल्कुल ये निश्चय कर लेना चाहिए कि रत है। जब आम स हम ऐसे बने कि जिससे माँ जो है वो खुश समय आप दबते रहें सबके सामने तो हो जाएं और फिर उससे जो है दुनिया उससे क्या फायदा? समाधान से जहाँ आप बदल जाए। आज बहुत देर तक लोग बैठे हैं वहीं माँ है ऐसा जब आपको महसूस रहे, कुछ गए भी होंगे पहचान ये ही है होगा तभी माना जाएगा कि आप सहजयोगी कि आप यहाँ बैठे हैं। शान्ति में बैठे हैं हैं। जहाँ बैठे हैं, सामने आना, स्टेज पर पहले तो धूम धड़ाका सब लोग इतनी चढ़ना, इसकी ज़रूरत नहीं किसी समाधानी आदमी को। हमें सबके बारे में मालूम है शांत बैठे हैं ये मेरे लिए तो बहुत ही पर समाधान ऐसी चीज़ है कि जिससे कमाल ही चीज है । गहराई में आप मुझे पा सकते हैं और मैं आपको जान सकती हैं। मैं चाहती हैं कि आप सहजयोग में कार्यरत हों और सामने सारी चीजें रखें माँ के सामने खड़े 1 है वो अपने प्यार में मग्न रहते प्यार में रत Vibrations आप खींचते हो और अगर माघानी नहीं और पूरे जोर-जोर से चिल्लाते थे, बोलते थे अब परमात्मा आपको धन्य करें।