Sahasrara Puja: Watch Yourself

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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Sahasrara Puja Talk Cabella, Italy

2002-05-05 

आज एक बहुत महान दिवस है, मुझे कहना चाहिए, सहस्रार मनाने के लिए, सहस्रार की पूजा। यह बहुत ही अद्वितीय बात है, जो घटित हुई है, कि आपके सहस्रार खोले गए।

ऐसे कुछ बहुत ही कम लोग थे, इस पूरे विश्व में। उसमें कुछ सूफ़ी थे, कुछ संत थे। उसमें कुछ और लोग भी थे चीन इत्यादि में। परन्तु बहुत कम, बहुत कम अपने सहस्रार खोल पाए। इसलिए जो कुछ भी उन्होंने कहा, या लिखा, वह कभी लोगों द्वारा समझा नहीं गया। उन्होंने वास्तव में उन्हें सताया। उन्होंने उन्हें क्रूस पर चढ़ाया। और सभी प्रकार की भयानक चीज़ें कीं, क्योंकि वे सहन नहीं कर सकते थे, कि किसी को यह आत्मसाक्षात्कार मिला रहा है।

इसलिए, यह बहुत ही महान दिवस है, क्योंकि सामूहिक रूप से यह सहस्रार खोला गया है। आप में से हर एक को यह मिल गया है। साथ ही विश्व भर में, आपके यहाँ कई लोग हैं जिन्होंने अपने सहस्रार खोले हैं। निश्चित रूप से, हमें और भी अधिक की आवश्यकता है, उन्हें समझाने के लिए, कि क्या है यह महान घटना, सहस्रार का इस तरह से सामूहिक रूप से खोला जाना। 

कुछ बहुत अधिक बढ़ गए हैं, अपना आत्मसाक्षात्कार पाने के बाद, बहुत अधिक। उन्होंने सहज योग को बहुत अच्छी तरह से समझा है। और उन्होंने अपनी गहराई को विकसित किया है, और उनकी चेतना वास्तव में एक बहुत बड़ी जागरूकता है, ईश्वर के साथ एकाकारिता की। ईश्वरीय शक्ति से एकाकार होना मनुष्य के लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है।

अब तक वे मनुष्य थे, अस्तित्व के एक निचले स्तर पर। और उनमे वे सभी समस्याएं थीं उस स्तर की- ईर्ष्या, घृणा; सभी तरह की समस्याएँ, जो आज-कल होती हैं- झगड़ों की, दूसरों को परेशान करने की, दूसरों को नष्ट करने की, और दूसरों से प्रेम न करने की। यह सभी समस्याएं होती थीं क्योंकि उनका सहस्रार नहीं खोला गया था। इसलिए हमारी मुख्य समस्या है, पूरे विश्व के लोगों का सहस्रार खोलना; जो कि बहुत सरल है, जिसे आप सभी कर सकते हैं, और यह अधिक अच्छा कार्यान्वित होगा यदि आप सामूहिक रूप से करें। यदि आप सामूहिक हैं, तो आप इसे बहुत अच्छी तरह से कार्यान्वित कर सकते हैं। इस प्रकार सहज योग में कई लोग आए हैं, जिनके सहस्रार पूर्णतया खोले गए थे, और उन्होंने अपनी गहराई का अनुभव किया था।

सर्वप्रथम, आपको अपनी गहराई का अनुभव करना चाहिए। यदि आप अपनी गहराई का अनुभव नहीं करते हैं और आप एकाकार नहीं होते, अपने व्यक्तित्व के साथ, जो कि इतना गहरा है, तो आप आत्मसाक्षात्कार का आनंद नहीं ले सकते। सर्वप्रथम, आपको स्वयं को समझना चाहिए। यदि आप स्वयं को नहीं समझते हैं, तो आप अन्य लोगों को कैसे समझ सकते हैं? आप नहीं समझ सकते। इसलिए पहले इस सहस्रार को पूर्णतया खोला जाना चाहिए- ‘पूर्णतया’ का अर्थ है सम्पूर्ण एकाकारिता ईश्वरीय शक्ति के साथ। यह कठिन नहीं है। केवल आपको ध्यान करना होगा, थोड़ा सा, और फिर यह कार्य करेगा। यह कई लोगों में कार्यान्वित हुआ है। मैं बहुत प्रसन्न हूं देखकर, और मिलकर ऐसे लोगों से, सहज योग में, जिन्होंने इतनी अधिक सामूहिकता प्राप्त की है, और एक आत्मसाक्षात्कारी की जागरूकता भी।

तो एक आत्मसाक्षात्कारी की जागरूकता क्या है? यही है, जो हमें समझना होगा आज। यह बहुत महत्वपूर्ण दिन है, जैसा कि मैंने कहा। जागरूकता ऐसी है कि अब आपको पता होना चाहिए कि इस दुनिया में क्या हो रहा है, और आप इसमें कैसे सहायता कर सकते हैं। आप लोगों की सहायता कैसे कर सकते हैं, इस जागरूकता को प्राप्त करने में? जब तक आप में यह पूर्ण…पूर्ण ज्ञान नहीं है, स्वयं के बारे में, स्वयं की पूरी ताकत के बारे में और आत्मविश्वास में, आप यह नहीं कर सकते।

 ईश्वरीय शक्ति से अपने संबंध को बिल्कुल सशक्त करने के लिए, सहस्त्रार दिवस को मनाया जाना चाहिए। जिससे आपकी चेतना पूर्णतया प्रबुद्ध हो जाए, और आपको हर चीज़ में सही तथ्य दिखाई दे।

यह बहुत सारे देशों में हुआ है, मैंने देखा है, लोगों ने इसे बहुत, बहुत शीघ्रता से अपनाया है, यह आश्चर्यजनक है, अफ़्रीक़ा में, जिसे बहुत विकसित-देश नहीं माना जाता है। यह अच्छा है, क्योंकि हज़ारों को आत्मसाक्षात्कार मिल गया है। जो विकसित हैं वे उत्थान के स्तर से दूर चले गए हैं, मुझे लगता है। यही बात होती होगी। कि उन्हें वापस आना होगा, उस विकसित अवस्था से इस अवस्था में, जहां से वे ऊपर उठ सकते हैं। 

और इसलिए जिन लोगों को यद्यपि आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हो गया है, (वे) ऊपर नहीं उठ रहे हैं, उस शीघ्रता से, जैसे वे लोग जिनका अब तक उतना विकास और आधुनिकीकरण नहीं हुआ। फिर भी यह कार्यान्वित हुआ है। यह बहुत सारे लोगों में कार्यान्वित हुआ है। और बहुत से इस उत्थान को प्राप्त कर चुके हैं, बहुत अच्छी तरह से।

परन्तु मैं कहूंगी कि, जब आप ध्यान में होते हैं…बाहर भी, आपको साक्षी भाव विकसित करना चाहिए। आपको यह पता लगाने का प्रयत्न करना चाहिए कि क्या बात है। आप में क्या ग़लत है? दूसरों में क्या ग़लत है? और आप इसमें कैसे सहायता कर सकते हैं? मात्र अपनी चैतन्य लहरियों से, आप अपने देश में बहुत सारी चीज़ों को ठीक कर सकते हैं, अपने परिवार में, हर जगह। और जैसा कि आप अब देख रहे हैं, जिस प्रकार सहज योग बढ़ रहा है, इसमें इतनी आवश्यकता है, और आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने की इतनी इच्छा है।

परन्तु केवल एक चीज़, आपका जाकर संपर्क करना प्रेम और समझ से परिपूर्ण होना चाहिए। वे अज्ञानता के अंधेरे से आ रहे हैं, और उन्हें ईश्वरीय शक्ति की प्रकाशित सृष्टि में जाना पड़ेगा, जो उनके लिए बहुत अधिक उजला हो सकता है। इसलिए, धीरे-धीरे, यदि आप इस उत्साहपूर्ण दयालुता, प्रेम को विकसित करें, तो मुझे विश्वास है, आप उनके उत्थान के लिए और अधिक कर सकते हैं। कोई उपयोग नहीं है उनसे क्रोधित होने का। क्योंकि वे इतने अज्ञानी हैं। वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं, आप देखिए। जैसा कि ईसा मसीह ने कहा था कि, “वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं।” इसलिए आपको क्या करना चाहिए कि, उन्हें समझाएं कि – वे जो भी कर रहे हैं, जो कुछ भी वे समझ रहे हैं, वह अभी भी कम है, यह अभी तक इतना विस्तृत नहीं है, जितना कि हो सकता है, यदि वे आत्मसाक्षात्कारी बन जाएं।

आत्मसाक्षात्कार के बाद भी मैंने पाया है कि लोगों को एक समस्या होती है। उनमें अभी भी पिछले जन्म की समस्याएँ होती हैं जो समाप्त हो चुकी हैं, और मृत है। परन्तु वे अभी भी उसे लेकर चलते हैं। और चेतना के, इतने प्रबुद्ध होने पर भी, नहीं दिखाई देता कि उनमें क्या ग़लत है।

उदाहरण के लिए, अहंकार का विषय लीजिये। अहंकार इतना विकसित हो गया है। पाश्चात्य देशों में जहां वे इतने विकसित हैं, अहंकार भी विकसित हो गया है। और उन्हें यह पता लगाना होगा कि उनमें क्या ग़लत है।

यह अहंकार एक विशेष प्रकार की चेतना से आता है कि, आप कुछ महान हैं, आप ऐसे हैं, आप वैसे हैं। आपके माता-पिता महान हो सकते हैं, शायद। आपकी संपत्ति बहुत बड़ी है। या शायद आपका बहुत बड़े पद पर अधिकार हो, या कुछ भी। यह किसी भी चीज़ से आ सकता है। और यह चेतना आपकी जागृति के विरुद्ध है क्योंकि यह सत्य नहीं है। आप ऐसी कोई वस्तु नहीं हैं, जो इन बाह्य चीज़ों के द्वारा ढाले गए हैं, अपितु आप अपने अन्दर विद्यमान निजि जागरूकता के द्वारा ढाले गए हैं।

इस जागरूकता को चले जाना होगा। कहाँ से… यह समझना होगा – हमें यह अहंकार कैसे प्राप्त होता है, कहाँ से?

कल मुझे लगा कि, ऐसे बहुत सारे लोग थे, जो अपने ऊपर बहुत अधिक दायाँ पक्ष लिए हुए थे। यह दायाँ पक्ष किसी काम का नहीं है। यह आपके लिए समस्याएं पैदा करेगा, आपके लिए बीमारी पैदा करेगा। और कोई उपयोग नहीं है दाएं पक्ष के सहज-योगी को रखने का। 

तो मुख्य बात है – प्रेम की शक्ति को समझना। प्रेम की शक्ति उच्चतम और सबसे महानतम है। और यदि आप किसी न किसी प्रकार से प्रबंध कर लें, अपने क्रोध को त्यागने का, अपने लालच को त्यागने का, और अपने अहंकार को भी; यदि आप ऐसा कर सकें, तो आप सहस्रार में रह सकते  हैं।

अब थोड़ा अहंकार के खेल देखिये। यह आपका आगे का उत्थान रोक देता है। अहंकार पर ही लोग खो जाते हैं, क्योंकि अहंकार पर ही वे बाईं अथवा दाईं ओर बढ़ते हैं, और वे बहुत अधिक दाईं ओर जा सकते हैं, या बाईं ओर जा सकते हैं। वे इन दोनों में से किसी एक की अति में जा सकते हैं।

इसलिए सबसे पहले हमें अपने अहंकार को ठीक करना होगा। इस अहंकार के लिए, हमें क्या करना चाहिए? इस अहंकार के लिए हमें स्वयं को देखना चाहिए और स्वयं पर हंसना चाहिए। हमें क्या अहंकार है, किसका? हम इंसान हैं, अब दिव्य बन गए हैं। और ईश्वरीय शक्ति के हमारे भीतर होने से, इस प्रकाश के हमारे भीतर होने से, हमें यह समझना होगा कि हम परमात्मा के अंग प्रत्यंग (बन गए) हैं। केवल एक बूंद हैं, प्रेम के सागर में।

यदि आप अपने अहंकार को कम कर सकें, यदि आप इसे ला सकें, अपने अस्तित्व की वास्तविक समझ में, तो यह अधिक अच्छा कार्यान्वित होगा। मैंने यह जाना है, पश्चिम में कि, यह अहंकार बहुत शक्तिशाली है; बहुत, बहुत शक्तिशाली। और जो कुछ भी वे ग़लत करते हैं, वे सोचते हैं कि सही है, क्योंकि अहंकार हर प्रकार से आपका समर्थन कर सकता है। जबकि, इसके विपरीत, वे लोग जो विकासशील हैं, वे देश जो अब तक विकसित नहीं हुए हैं, वहां समस्या अहंकार की नहीं है, अपितु प्रति-अहंकार की है। जिसे सुधारा जा सकता है। परन्तु अहंकार आपका अपना शत्रु है, आपके द्वारा निर्मित। इसलिए आपको इससे लड़ना होगा, और देखना होगा, स्वयं ही, कि यह कहां से आ रहा है। यह देश के अनुसार हो सकता है, यह परिवार के अनुसार हो सकता है, यह कहीं से भी आ सकता है।

इसलिए सर्वप्रथम हमें सतर्क होना चाहिए अहंकार के प्रति, यदि वह सहस्रार है, जिसमें हमें प्रवेश करना है।

जब मैं ढूंढ रही थी, एक सामूहिक अवसर सहस्रार खोलने का, तब मैंने पाया कि, वह अहंकार था लोगों का, जो मुझे रोक रहा था। मुझे लोगों के अहंकार से लड़ना पड़ा। क्योंकि मैं बहुत सरल स्वभाव की एक महिला हूँ। कोई गर्व नहीं, कुछ भी नहीं, इसलिए लोग मुझे दबाते थे, मुझसे हर प्रकार की बातें कहते थे। परन्तु मैं उन्हें समझती थी, क्योंकि उनको अहंकार की समस्या थी। और एक बार जब यह अहंकार विकसित होता है और हावी होने का प्रयत्न करता है, तो हमारे यहाँ देश में हिटलर हो सकते हैं, हमारे यहाँ वे सभी भयानक लोग हो सकते हैं, विश्व भर में।

तो पहली बात आपको समझनी चाहिए कि- जिन में अहंकार होता है, हमें कभी उनके अधीन नहीं होना चाहिए। नि:संदेह, आपको लड़ना आरम्भ नहीं करना चाहिए। परन्तु आप स्वयं पर विश्वास कीजिये, कि आप वे लोग हैं जिन्हें आत्म-साक्षात्कार मिला है। उनसे आप कहीं अधिक शक्तिशाली हैं।

मेरी शक्तियाँ, तभी कार्य करतीं हैं जब आप आत्मसाक्षात्कारी होते हैं। आपको आश्चर्य होगा। वे कई चीज़ों को क्रियान्वित करती हैं, जो शायद अहंकार वाले लोगों के साथ कार्य नहीं करती हैं। जैसे कि उस दिन, मैंने अफ़्रीक़ा से सुना कि लोग अचानक विलुप्त हो रहे हैं। वहाँ तख़्तापलट हो गया था और राष्ट्रपति सहज योगी हैं। वह ग़ायब हो गए।  कोई भी उन्हें ढूंढ नहीं पाए। क्योंकि वे बहुत ही आत्मसमर्पित हैं। वे इतने अधिक आत्मसमर्पित हैं कि उन्हें मेरी शक्तियों का लाभ मिलता है। आप सभी को भी मेरी शक्तियों का उपयोग करना चाहिए –  सुरक्षा की (शक्ति)। यह सुरक्षा की शक्ति बहुत, बहुत शक्तिशाली है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो बिलकुल सहज योग में हैं, जो बिलकुल इसमें हैं। इसलिए आपको  सबसे पहले पूर्ण विश्वास होना चाहिए स्वयं पर, कि आप सहज योगी हैं। परन्तु वह अहंकार नहीं। “सहज योगियों” का अर्थ है कि आप में अहंकार नहीं होना चाहिए।

यह अहंकार का कार्यकलाप विभिन्न स्रोतों से आया है, आप उसे जानते हैं। परन्तु इस को स्वच्छ करना चाहिए। जैसे कि जब नदी बहती है तो हर प्रकार की गंदगी, मैल इसमें बहकर आता है, परन्तु जब वह समुद्र से मिलती है, तो वह समुद्र बन जाती है। उसी प्रकार आपको ऐसा बनना है। समुद्र बनने के लिए, आपको क्या करना है कि, भूल जाएँ उन सभी सहायक-नदियों को जो आप में आ रही थीं, और यह सभी ग़लत विचार जो आपके पास आए थे। यह किसी भी स्रोत से हो सकते हैं। मुझे नहीं पता कि उनका नाम कैसे बताया जाए क्योंकि, एक बड़ी सूची है इन स्रोतों की। लोग पागल हो जाते हैं, कभी-कभी इस अहंकार से।

तो मुख्य बात यह है कि- कैसे अपने अहंकार को देखें और साक्षी हो जाएँ? यह कैसे कार्य करता है? यह कैसे आपकी मनोदशा को ख़राब करता है?  कैसे यह आपके संबंधों को ख़राब करता है? कैसे यह आपको मूर्ख बनाता है?

अहंकार, की पहली बात यह है कि यह आपको बहुत ही मूर्ख बनाता है। और आप इस प्रकार से व्यवहार करना शुरू कर देते हैं, कि लोग सोचना शुरू कर देते हैं कि, “ओह, आप आज तक के सबसे बड़े, सबसे मूर्ख व्यक्ति हैं!”  परन्तु यह किसी काम का नहीं है, क्योंकि यदि वे मानते हैं कि आप एक मूर्ख व्यक्ति हैं, तो क्या होगा?

इसके विपरीत, यदि आप में सद्बुद्धि है, यदि आप में वह शांति है, यदि आप में वह विशेष मनोभाव है, जीवन की हर चीज़ का आनंद लेने का, और साथ ही सामूहिकता का मनोभाव, तो वह कार्य करेगा। वे प्रभावित होंगे। क्योंकि उस प्रकाश में वे उनकी अपनी मूर्खता को देख सकते हैं, अपनी असत्यता आदि और उन्हें अनुभव होगा कि वे जो सोचते हैं वह सत्य नहीं है और, “यह सज्जन मुझसे अधिक गहरे हैं। उनमें जो है, वह मुझ में नहीं है।” यही मुख्य बात है हम सभी के लिए।

सहज योग में हमारे यहाँ ऐसे लोग हैं जो प्रमुख हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि वे वास्तव में प्रमुख बन जाते हैं, परन्तु इसका अर्थ है कि उनकी गहराई अधिक है। यदि उनमें नहीं है, तो वे बाहर निकल जाते हैं। यदि उनमें गहराई है तो वे प्रमुख हैं, इसका तात्पर्य है कि दूसरे उन्हें देखें और वास्तव में आनंद लें। यथार्थ में उनके वहाँ होने का आनंद लें।

तो हर चीज़ में आप स्वयं ही देख सकते हैं, विशेष रूप से, मैं कहूंगी, प्रमुख के विषय में, क्योंकि लोग उन्हें देखते हैं। और वे उनके लिए आदर्श हैं। मेरे बारे में, वे कहते हैं कि “माँ तो माँ है।  हम उनसे क्या प्राप्त कर सकते हैं।” परन्तु प्रमुखों से वे एक सबक सीखते हैं। और वे समझते हैं कि यह ग़लत है और यह उचित नहीं है।

सबसे पहले आपको एक आदर्श बनना चाहिए- सहज योग का आदर्श। और यही मैंने आपसे हमेशा कहा है, कि अपने अहंकार से छुटकारा प्राप्त कीजिए।  यह सबसे बुरी बात है, क्योंकि सबसे पहले यह क्रोध लाता है। आपको लगता है कि आप कुछ महान हैं, और आप ऐसा कर सकते हैं, आप वैसा कर सकते हैं क्योंकि आप सहज योगी हैं। यह सत्य नहीं है। इसके विपरीत आप बेहद विनम्र, बेहद विनम्र बन जाते हैं, और आप सही कार्य करते हैं। आप ऐसे नहीं बन जाते, जैसे कि और अधिक, और अधिक अभिमानी,और क्रोध से भरे हुए भी। क्रोध आपसे दूर हो जाता है, पूर्णतया, पूर्णतया। यह आपको एक संतुलन देता है, यह आपको सद्बुद्धि देता है जिसके द्वारा आप देखते हैं कि -आपका कार्य क्या है? आप इस धरती पर क्यों हैं? यह ऊर्जा आपके पास क्यों आई है? आप एक दिव्य व्यक्तित्व क्यों हैं? यह बहुत, बहुत बड़ा उत्तरदायित्व है। आपको स्वयं की देखभाल करने की आवश्यकता नहीं है, नहीं। ईश्वरीय शक्ति आपकी देखभाल करेगी। निश्चित रूप से। वह आपकी रक्षा करेगी, वह आपकी देखरेख करेगी, वे ऐसा सब करेगी जो आपके लिए आवश्यक है।

परन्तु किसी स्थिति में,  किसी स्थिति में, यदि आप में यह अहंकार आ जाए, तो आप स्वयं को अलग कर लेते हैं- सत्य से, वास्तविकता से। और आप एक बहुत ही गर्म स्वभाव के और घमंडी व्यक्तित्व बन जाते हैं। यह दूर होना चाहिए।

सहज योगी संत हैं। संत नहीं हैं, परन्तु वे संतों से अधिक हैं। क्योंकि वे स्वयं को व्यक्त कर सकते हैं, श्रेष्ठतर रूप से। उनके पास ऐसी शक्तियां हैं जिनका वे उपयोग कर सकते हैं। जिनको वे अन्य लोगों को दिखा सकते हैं कि आप इतने शक्तिशाली हैं। कि आप चीज़ों की व्यवस्था अधिक अच्छे प्रकार से कर सकते हैं, आपकी सोच की अपेक्षा।  उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि, कोई समस्या है और पूरी दुनिया व्याकुल है इसके बारे में। केवल यदि आप जानते हों कि कैसे इसे साक्षी भाव से देखा जाए, तो वह ग़ायब हो जाएगा। वह विलुप्त हो जाएगा, पूरी दुनिया में। वह उधर नहीं रह सकता। तो आजकल विश्व, भरा है उथल-पुथल से, जैसा कि आप देख रहे हैं, भरा है निरर्थक लोगों से जो आते है, भरा है झगड़ालू लोगों से, प्रभुत्व जमाने वाले लोगों से- वे हावी हो रहे हैं। इस समय यदि आप इसे केवल देखें, साक्षी भाव में, तो यह ग़ायब हो जाएगा। क्योंकि बहुत शक्तिशाली…आप बहुत शक्तिशाली हैं।

परन्तु आपको सबसे पहले पता होना चाहिए कि, आपके पास उपकरण होना चाहिए बिजली का उपयोग करने के लिए। यदि आपके भीतर वह उपकरण है, तो आप इसे कर सकते हैं। परन्तु अपने अहंकार द्वारा, आप नहीं कर सकते।

अहंकार आपके उत्थान में सबसे बड़ी बाधा है। आप देखिए, वह अहंकार एक ऐसी जगह पर है जहाँ से आपको बस पार होकर जाना है, सहस्रार तक। और सहस्रार को भेदना बहुत आसान है वैसे तो, परन्तु यदि अहंकार है, तो आप पहले से ही उस अहंकार में खो जाते हैं।

तो इस सब के विरोध में, समझना होगा कि, स्वयं को देखते रहें- “क्या वह अहंकारी है? वह स्वयं को क्या समझता है?” अहंकार बहुत सीमित है। वह आपको सीमित बनाता है। और आप अपने जीवन का उद्देश्य नहीं देखते हैं। आप एक आत्मसाक्षात्कारी क्यों बने हैं? आप समझते नहीं कि आप मात्र अपने कामकाज में ही जुटे है- अपने परिवार में, अपने बच्चों में, अपनी…ऐसी कुछ बातों में, बहुत निचली। परन्तु यदि आपके पास…यदि! आपके पास एक अहंकार-रहित मनोभाव है तो आप बहुत प्रभावी हैं। पूरी शक्ति कार्य करती है।

मैंने जो देखा है, कि सहस्रार की शक्ति इतनी महान होती है, कुछ लोगों में इस से अद्भुत कार्य हुए हैं। उन्होंने इसे बहुत अधिक कार्यान्वित किया है। परन्तु अहंकार के कारण, इतने सारे लोग अभी भी उस स्तर के नहीं हैं, कि हम कह सकें कि वे सहज योगी हैं।

अब वैसे तो मैं यहाँ हूँ, इसके बारे में आपको बताने के लिए। और उन दिनों में जब वे संत आए थे, तो कोई नहीं था उनके मार्गदर्शन के लिए, उन्हें कुछ भी बताने के लिए। इसके विपरीत, उनका इतना अधिक विनाश हुआ था, उस वातावरण द्वारा। और लोगों को कभी समझ नहीं आया कि उनमें कोई अहंकार क्यों नहीं है। वे इतने विनम्र क्यों हैं? इसलिए उन्होंने दुरुपयोग किया। परन्तु अब आपके पास शक्तियां हैं। आपको अपनी शक्तियों का उपयोग करना  आना चाहिए। परन्तु इससे आपको किसी संयोगवश अहंकार नहीं प्राप्त होना चाहिए; कोई भी अहंकार कि आपके पास शक्तियां हैं। इसके विपरीत, आपको विनम्र होना चाहिए। आपके पास शक्ति है, विनम्र होने की। और यदि आप विनम्र हो सकें और समझें कि- “वे लोग अभी आत्मसाक्षात्कारी नहीं हैं। वे एक निचले स्तर पर हैं। अभी तक उनका अहंकार उन्हें पकड़ रहा है। और वे एक निचले स्तर पर हैं। उन्हें ऊपर आना होगा।” जब आप यह समझेंगे, तब आपको न केवल दया आएगी, अपितु उनके बारे में समझ भी आएगी और एक प्रकार की सहायता आपको प्राप्त होगी ईश्वरीय शक्ति से, जो आपकी समस्याओं का समाधान करेगी।

मैंने जाना है कि आप में से अधिकांश को समस्याएं होती हैं, बहुत निचले स्तर की, कभी-कभी। और फिर मैं हैरान होती हूँ कि, आप इन समस्याओं से परेशान क्यों हैं? आप देखिए, आप इतने शक्तिशाली हैं। तो सहस्रार में आपको पता होना चाहिए कि कौन सी शक्तियां हैं। इसमें एक हजार शक्तियां हैं। एक हजार शक्तियां आपके भीतर, जिनको प्रबुद्ध किया जा रहा हैं। यदि आप इसे समझ सकें, तो आप समझ जाऐंगे कि- “अहंकार के होने का क्या उपयोग है! क्योंकि आपके भीतर ऐसी बहुत सारी शक्तियां हैं, जिनका आपने उपयोग नहीं किया है। हमें उपयोग करना चाहिए, परन्तु अहंकार के कारण आप नहीं कर सकते। प्रेम द्वारा आप कर सकते हैं। प्रेम द्वारा आप इसकी व्यवस्था कर सकते हैं, और आप बहुत कुछ कर सकते हैं। इसलिए मैं निवेदन करुँगी आप सभी से, कि आज एक प्रण लें कि, “हम और मौका नहीं देंगे अपने अहंकार को। हम इसे त्याग देंगे। हम अपना अहंकार छोड़ देंगे।” क्योंकि इसमें कोई विवेक नहीं है। यह एक बाधा है हमारे बीच में। जब सहस्रार कार्य करना चाहता है, यह नहीं कर पाता क्योंकि अहंकार की बाधा होती है।  इसलिए अच्छा होगा कि किसी चीज़ का अहंकार न हो। आप एक अच्छे गायक हो सकते हैं, आप जीवन में कुछ भी हो सकते हैं, शायद कोई बड़े व्यक्ति या कुछ भी, जो तथाकथित हो। कोई अर्थ नहीं है। आज हमें जो चाहिए, वह हैं ऐसे लोग जो अहंकार-रहित हों, और जिनमें शक्तियां हों, पूर्णतया बहती हुई।

सहस्रार के खुलने से, इन सभी शक्तियों का प्रवाह होना चाहिए, यदि सहस्रार पूरी तरह से खुला है तो।  प्रेम की इन सभी शक्तियों का प्रवाह होना चाहिए। आप चकित हो जायेंगे, मेरा तात्पर्य है कि, मैं जहाँ भी जाती हूँ, लोग बस मेरे प्रेम में पड़ जाते हैं। मैं नहीं जानती कि क्यों, मैं कुछ नहीं करती उन पर, परन्तु बस वे मेरे प्रेम को अनुभव करते हैं। यही होना चाहिए, कि लोगों को आपके प्रेम का अनुभव होना चाहिए, और उन्हें पता होना चाहिए कि आप एक प्रेम करने योग्य व्यक्ति हैं।

इसी बात के लिए आपको बनाया गया है, विशेष लोगों जैसा, बहुत विशेष, इस पूरी दुनिया के उद्धार लिए। यह आपका कार्य है। और इसके विपरीत नहीं, कि बस पैसा इकट्ठा करना और सभी प्रकार के निरर्थक काम करना। आप यहाँ पर हैं, बहुत, बहुत समझदारी के कार्य के लिए, जो कि लोगों की कुंडलिनी उठाने और उनकी महानता से उनको अवगत कराने का है। मनुष्य इसलिए नहीं बनाए गए कि युद्ध और लड़ाई करें, इसलिए नहीं बनाए गए कि राजनीति खेलें और सभी गंदी चाल चलें। वे इसलिए नहीं बनाए गए, कि यहाँ ऐसा जीवन व्यतीत करें, जो बहुत…मैं कहूँगी, मैला और गंदा है। परन्तु इस विश्व में, हम यहाँ हैं, ऐसे महान परमात्मा के कार्य को करने के लिए, जिन्होंने हमें बनाया है। तो यह संभव हो सकता है, यदि आप अवगत हों  कि आपके सहस्रार खोले जा रहे हैं, और यह कि, इस सहस्रार में पवित्रता का निवास है। न कि इन सभी छोटी- छोटी बातों के बारे में जिस से आप चिंतित हैं।

कुछ लोग सहज योग का लाभ उठाने का प्रयत्न करते हैं, यह सोचकर कि, “ओह, वे अच्छी तरह से कर सकते हैं।”  “वे दूसरों की सहायता प्राप्त कर सकते हैं।” ऐसा कुछ नहीं है! आपकी सहायता स्वयं आपके द्वारा हो सकती है, आपको किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं है। इसके विपरीत आपको दूसरों की सहायता करनी चाहिए। कोई आवश्यकता नहीं है किसी से भी सहायता की अपेक्षा करने की।

मुझे देखिये, मैं एक साधारण गृहिणी हूँ, वैसे तो, परन्तु कैसे यह कार्यान्वित हुआ है, विश्व में चारों ओर। किस (के माध्यम) से? केवल प्रेम की शक्ति से। केवल समस्या यह है कि मैं अपने प्रेम की शक्ति का उपयोग कर सकती हूं, जबकि आप जानते नहीं कि कैसे उपयोग करें; बस यही समस्या है। यदि आप अपनी प्रेम की शक्ति का उपयोग करना चाहते हैं, तो ध्यान में आप विकसित कर सकते हैं, उस प्रेम की शक्ति को। इससे आप लोगों को जीत सकते हैं। इससे आप समझ सकते हैं, कि उनकी यह समस्याएं हैं, कि वे सहज योगी नहीं हैं, वे ऐसे लोग नहीं हैं, जो सभी आशीर्वाद पा रहे हैं, या परमात्मा के साथ संबंध रखते हैं।

कल्पना कीजिए, आप ईश्वरीय शक्ति से जुड़े हैं! और ईश्वरीय शक्ति एक ऐसी महान बात है जिसने इस पूरे ब्रह्मांड को बनाया है, आपको बनाया है, और सभी महान कार्य किए हैं। तो आप क्या हैं? आप उस ईश्वरीय शक्ति के अंग-प्रत्यंग हैं। तो क्यों न हम अपनी ईश्वरीय शक्ति का उपयोग पूर्णतया करें, प्रेम के साथ और समझ के साथ, जिससे आप अपने भीतर इस सद्बुद्धि का विकास करें।

यही है जो स्वयं से कहा जाना चाहिए कि, “हम आत्मसाक्षात्कारी हैं।” यह एक प्रकार का, एक व्यक्तित्व है, विशेष, बहुत ही विशेष। इस विश्व में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो आत्मसाक्षात्कारी हैं, परन्तु अब हमारे पास बहुत सारे हैं, मैं उन्हें देख सकती हूं। परन्तु अभी भी कुछ समस्याएं हैं, हमारे अहंकार के कारण।

किसी को अहंकार नहीं होना चाहिए किसी चीज़ का। सब कुछ नश्वर है। जो नश्वर नहीं है, वह है दिव्य प्रेम।  जो नश्वर नहीं है, वह है दिव्य व्यक्तित्व। जब भी आप संतों आदि को देखते हैं, भले ही वे मर चुके हैं, लोग उन्हें याद करते हैं। उनकी सभी कविताओं को याद किया जाता है। भले ही वे सहस्रार का अधिक कार्य नहीं कर सके, वे लोगों को आत्मसाक्षात्कार नहीं दे सके, फिर भी उनके व्यक्तित्व के कारण, उनका अभी भी आदर होता है। और लोग जानते हैं कि वे लोग अद्भुत कार्य कर रहे हैं, चमत्कारी कार्य।

इस प्रकार आप स्वयं के चमत्कार देख सकते हैं, और आप स्वयं देख सकते हैं कि आप क्या करने में सक्षम हैं, क्योंकि अब आप परमात्मा से जुड़े हुए हैं। यह एक तथ्य है जो आपको पता होना चाहिए।

जब भी कोई संकट हो, जब भी कोई समस्या हो, आप बोलेंगे- आप बचाए जाएंगे। आप में से बहुतों को बचाया गया है, निःसंदेह। परन्तु यह पर्याप्त नहीं है। आप को किस लिए बचाया गया हैं? आप के जीवन का मूल्य क्या है? आप क्यों जीवित हैं? बात क्या है? परमात्मा ने आपको क्यों बचाया है, आपको यह सब दिया है? क्योंकि बहुत कुछ किया जाना बाकी है, इस विश्व के लिए। आप सत्य के सैनिक हैं, अच्छाई के सैनिक हैं। और वह सब किया जाना चाहिए, बड़े साहस और समझ के साथ।

तो आपको जो करना है, वह है आत्म-ज्ञान प्राप्त करना। आपको स्वयं के बारे में  जानना चाहिए। आप में आत्म-ज्ञान होना चाहिए- आप क्या हैं?  यदि आपके पास वह नहीं है, तो सहस्रार खोलने का क्या उपयोग है? आत्म-ज्ञान जो है, आपको कोई अभिमान नहीं देता, बिलकुल नहीं, अपितु आपको कर्तव्य देता है, कि आपको क्या करना चाहिए, आपको क्या कार्यान्वित करना चाहिए।

यह केवल आपके लिए नहीं है – सहज योग। परन्तु आप पूरे विश्व के लिए हैं। कृपया समझने का प्रयत्न करें। कभी-कभी हमें लगता है कि सहज योग हमारी भलाई के लिए है। हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए है, ऐसा, वैसा। इसलिये नहीं है। यह दूसरों की भलाई के लिए है। आपकी शक्तियां उपस्थित हैं, जिनका आप उपयोग नहीं करते। आप अभी भी व्यस्त हैं। मुझे यह कहते हुए पत्र मिलते हैं कि, “हमारे साथ यह ग़लत है। इसके साथ यह ग़लत है।” मेरा अर्थ है, आप स्वयं को  ठीक क्यों नहीं कर सकते? यदि आप स्वयं को ठीक नहीं कर सकते हैं, तो आप दूसरों को कैसे ठीक करेंगे? यही तो बात है।

मैं कहूंगी, मैं देख सकती हूं, कि आपकी समझ के भीतर एक समझ प्रवेश कर रही है कि, आप महान हैं, और आप सामान्य लोग नहीं हैं। और इसका अभ्यास करना पड़ेगा, और उपयोग करना होगा इस प्रकार से, कि दिखाई दे कि आप सहज योगी हैं। आप कम नहीं हैं किसी से, किसी सूफ़ी से,  किसी आत्म साक्षात्कारी से, या किसी संत से। कम नहीं हैं। किसी से कम नहीं। परन्तु आपके पास ऐसी शक्तियां हैं जो उनके पास नहीं थीं, जिनके बारे में वे सचेत नहीं थे, जब कि आपके पास यह शक्तियां हैं। समझने का प्रयत्न करें, कि आपके पास क्या शक्तियां हैं।

परन्तु ऐसा समझकर, आपको इसके बारे में अभिमान नहीं होना चाहिए, किसी भी प्रकार से। परन्तु यह आपका कार्य है, आपको यह करना पड़ेगा। आप वहाँ पर हैं। और आप इसका आनंद लेंगे, क्योंकि यह अहंकार वाला नहीं है, लेकिन अहंकार-रहित कार्य है। यदि आप बस इतना प्रबंधन कर लें, तो यह बहुत अच्छा होगा।

अब, अहंकार कम हो गया है, बहुत मात्रा में, मुझे कहना चाहिए, बहुत मात्रा में। मैं लोगों से सुनती हूं कि अहंकार कम हो गया है। परन्तु कभी-कभी, वे अभी भी बिलकुल विचित्र होते हैं और लड़ते हैं, ऐसे और वैसे। परन्तु इन सबके उपरान्त, मुझे यह कहना चाहिए कि, जो भी कार्य किया गया है इन वर्षों में, आपस में लोगों ने इसे कार्यान्वित किया है। इसलिए आपको स्वयं को देखना होगा और स्वयं ही देखना होगा। आप में कैसा अहंकार है? क्या? क्यों आप अहंकारी बनें!

कुछ लोगों को अपने देश का अहंकार होता है। कुछ लोगों को….मेरा अर्थ है, कि यह सब मिथ्या है। यह सब मिथ्या है। इसमें क्या है? आप कहीं भी जन्म ले सकते थे। तो आप एक विशेष देश में पैदा हुए हैं, आप में उसका अहंकार होता है। और यह कुछ ऐसा है कि, मुझे कहना चाहिए, कि लज्जा आनी चाहिए। क्योंकि आपका देश जो कुछ भी है, बहुत अच्छी अवस्था में नहीं है। आध्यात्मिक रूप से तैयार नहीं है।  इसलिए आप अपने देश पर इतना अभिमान क्यों करें? जब आप इसे क्रियान्वित करेंगे और वे आध्यात्मिक रूप से तैयार हो जाएंगे, तो निश्चित रूप से आप अपने देश पर अभिमान कर सकते हैं। परन्तु मैं ऐसा होते हुए नहीं देख रही हूं। और इसलिए आपको इसे क्रियान्वित करना होगा।

और मुझे यह देखकर भी प्रसन्नता हो रही है, कि इतना सहज योग अब फैल गया है, हर जगह। यह बहुत शीघ्रता से फैल रहा है। जिन देशों में मैंने कभी आशा नहीं की थी, यह फैल रहा है।

तो दुनिया में हर जगह ऐसे लोग हैं जो इसे पाना चाहते हैं। वे अपना आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करना चाहते हैं। और वे जानना चाहते हैं कि इस मानव जीवन से परे क्या है। वे अब अधिक अपना जीवन व्यर्थ नहीं करना चाहते, मानव के रूप, न्तु अति-मानव के रूप में, मुझे उन्हें सहज योगी कहना चाहिए।

तो हमारे अहंकार को देखना जाना चाहिए, ध्यान दिया जाना चाहिए, साक्षी अवस्था में। कैसे यह कार्य कर रहा है? और किस प्रकार यह हमें रोकता है, सही रास्ते की गति से। केवल उस बात से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि वह अंतिम चक्र है जिसे खोला जाना है। एक बार जब यह पूरी तरह से खुल जाता है, तो आप परमात्मा के साथ एकाकार हैं, और आपकी सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, क्योंकि यह समस्याएँ इतनी तुच्छ हैं, और इनका कोई अर्थ नहीं है और यह कुछ ही समय में चली जाएंगी, जब भी आप इसे क्रियान्वित करेंगे, अपने सहस्रार में।

यह बहुत अच्छा है कि आज बहुत ही विशेष दिवस है, साथ ही तीन गृह एक साथ आए, और इसका विशेष आशीर्वाद है।

यदि आपकी शक्तियां बढ़ती हैं, तो वे सभी लोग जो बहुत बुरे हैं, जो समाज को आकर्षित करने का प्रयत्न कर रहे हैं, अपनी बेतुकी राजनीतिक आदि से, वे सब लुप्त हो जाएँगे। उनके पास कोई शक्तियां नहीं हैं, वे सभी लुप्त हो जाएंगे। तो, सबसे पहले, आपका अहंकार-रहित स्वभाव काम आएगा, सभी के काम आएगा।

परमात्मा आप सभी को आशीर्वादित करें |