Adi Shakti Puja: Use Your Right Side For Giving Realization

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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श्री आदि शक्ति पूजा, काबेला लिगुरे इटली, 2002

यह एक अलग दिन है, पूर्ण रूप से, आप सब के लिए क्योंकि यह पूजा है आदिशक्ति की और आदिशक्ति एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व है। यह केवल बायाँ पक्ष नहीं  है जिसे आप जानते हैं। आप सभी केवल बायाँ पक्ष जानते हैं, श्री गणेश से, भिन्न-भिन्न चक्रों  के उत्थान से बायीँ नाड़ी में। मैं आपको बताना नहीं चाहती थी दाएँ पक्ष के बारे में, शुरुआत में, क्योंकि जो लोग दाएँ पक्ष से गुजरे हैं, वे बस खो गए। उन्हें गायत्री मंत्र मिला ग्रन्थों से, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह किस बारे में है, वे बस इसे रटते थे। वे इसका वास्तविक अर्थ भी नहीं जानते थे, और इसी तरह वे चले गए दाहिनी ओर और, मुझे नहीं पता, वे अटक गए आज्ञा पर; और फिर वे प्रयास कर रहे थे आत्म-साक्षात्कार के लिए।

उन्हें भरोसा दिया गया था कि यदि आपने यह दायाँ पक्ष सही से किया तो आप पहुँच जायेंगे अंतिम लक्ष्य तक आत्म साक्षात्कार के। परन्तु उनमे से कोई भी वहां नहीं पहुँचा। उनमें से अधिकांश भयानक क्रोध में आ गए, भयानक क्रोध दूसरों को श्रापित करने का, दूसरों को नष्ट करने का। यह सारी बातें उन्होंने सीखीं अपने दाएँ पक्षीय आंदोलन से। कुण्डलिनी की जागृति नहीं थी, और उन्हें पहुँचाया गया ज़्यादा से ज़्यादा आज्ञा चक्र तक, और फिर उनका पतन हो गया पूर्ण अज्ञानता के भिन्न स्थानों में। ये सारी पुस्तकें लिखी गयी थीं बिना समझ के कि दाएँ पक्ष से हो कर जाना सरल नहीं है पर सर्वोच्च था जागृत करना अपनी कुण्डलिनी को। कुण्डलिनी सीधे आपको ऊपर ले जाती है सभी चक्रों के मध्य में से आज्ञा चक्र तक, और आज्ञा को भेदती है और आज्ञा से परे सहस्रार पर जाती है और फिर सहस्रार का भेदन करती है। अब इतना महत्वपूर्ण क्या है ब्रह्मरन्ध्र के बारे में, जहाँ पर यह भेदन करती है? मैंने आपको इसके बारे में कभी नहीं बताया। लेकिन अब मुझे लगता है कि आप में से अधिकांश के लिए यह समय आ गया है।

आप बचपन में देखते हैं कि बच्चे के पास तालु है, फॉन्टनेल (ब्रह्मरंध्र) हड्डी का क्षेत्र है जो हमेशा स्पन्दनशील रहता है। यह स्पंदित है क्योंकि आत्मा ने उस क्षेत्र से प्रवेश किया था, और जब आप इसे बंद करते हैं, तो यह हृदय में बस जाती है। अब आपको बनना है आत्म-उन्मुख व्यक्ति, लेकिन प्रवेश कैसे करें सहस्रार में, यह समस्या थी। जो तांत्रिक वहाँ थे, वह बाएँ पक्ष में से गुज़रे, और उन्होंने विकसित की सारी प्रथाएँ तम की, हमें कहना चाहिए बाएँ पक्ष की। 

तो दाएँ पक्षीय एकदम गर्म स्वभाव के हो गए, अत्यंत गर्म स्वभाव के, मुझे कहना चाहिए, अत्यंत महत्वाकांक्षी, क्रूर, और उन्होंने लोगों की हत्या शुरू कर दी श्राप के आधार पर। वे लोगों को श्राप देने में बहुत माहिर थे; हमेशा अग्रसर, सभी को पीछे धकेलना और हर किसी के अधिकारों की अवहेलना करना। उन्हें माना जाता था सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे शक्तिशाली लोग ।

अब ब्राह्मण और कुछ हद तक क्षत्रिय, फिर उन्होंने दाँया पक्ष लिया। दाहिनी ओर के कारण वे बहुत शक्तिशाली हो गए, इसमें कोई संदेह नहीं। उन्हें विश्व पर सभी शक्तियां प्राप्त हुईं और उन्हें अत्यंत शक्तिशाली और गौरव-पूर्ण माना जाता था, लेकिन वे थे नहीं, क्योंकि वे इतने गर्म स्वभाव के थे। गर्म स्वभाव वाले लोग आध्यात्मिक नहीं हो सकते।

तो उन्हें बताया गया, आप अपनी आध्यात्मिकता प्राप्त करेंगे, चिंता न करें, चलते रहें, और सात चक्रों का वर्णन किया गया था, दाईं ओर। उनके अनुसार भू है, भुर्वः है। भू यह पृथ्वी है, यह संसार है, भू। भुर्वः पूर्ण ब्रह्माण्ड है, या हम इसे अंतरिक्ष कह सकते हैं। स्वः – स्वः उपभोग है नाभि चक्र पर; और स्वधा, स्वधा है, सेवन भीतर से, समावेश है, स्वाहा, स्वधा। फिर मन है, ह्रदय – मनः। मनः के बाद आये आज्ञा, विशुद्धि। विशुद्धि जनः है, सामूहिकता, संघ हैं, संघ के पास जाइये – जनः। फिर आज्ञा पर है तपः। तपः में हमारे पास येशु हैं मध्य में; बाईं ओर उनके पास जैन धर्म था, दाईं ओर ईसाई धर्म था।

वे वास्तव में आरोही मार्ग नहीं थे, वे केवल  बगल के निकास थे, हम कह सकते हैं, ऊर्जा के लिए उन लोगों की जो खोज में थे सत्य की। अब यह युगों के लिए हुआ भारत में। सभी गुरु, सभी साधु, सभी बड़े तपस्वी, सभी ने यही किया। पर वे कहाँ पहुँचे? तपस्वी वे लोग थे जो श्राप दे सकते थे – क्षु शाप – लोगों को, वे किसी को श्राप दे सकते थे। कटाक्ष से, यानि एक दृष्टि डालने से वह किसी की हत्या कर सकते थे, कुछ भस्म कर सकते थे, सारी दाईं पक्षीय शक्तियाँ उनके पास थीं। और इन दाईं पक्षीय  शक्तियों के साथ, वे कहाँ तक पहुँचे? नरक में, मुझे कहना चाहिए, एक तरह से, अगर अधर में नहीं, जैसा कहते हैं। किसी को आत्म-साक्षात्कार नहीं मिला। आप भारत के पुरातन ग्रन्थ पढ़ें, अन्यथा यूनानी; और फिर हमारे पास मिस्र-वासी, अंग्रेज़ और सभी प्रकार के आक्रामक लोग थे, जर्मन सभी आक्रामक थे, कैथोलिक, और आपके पास रोमवासी भी थे। वे सभी आक्रामक थे, और भूमि और संपत्ति ले रहे थे दूसरे देशों की; बेहद आक्रामक, वे विश्वास रखते थे लोगों की हत्या में, बेहद अपमानजनक, गर्म स्वभाव वाले। तो उन्हें सामान्य पर कैसे लाया जाए, मध्य मार्ग पर? 

एक पक्ष था, जैसा कि मैंने आपको बताया, भू, भुर्वः, स्वाहा, स्वधा, यह उपभोग गुरु सिद्धांत द्वारा किया गया था। फिर हमारे पास है मनः, जनः जो सामूहिक है। वे सामूहिक हो गए, बेशक, क्योंकि वे इतने शक्तिशाली थे कि उनके साथ इतने सारे लोग थे अत्याचार के लिए लड़ने वाले। अपने दमनकारी स्वभाव के साथ वे लोगों से लड़ रहे थे और उन पर अत्याचार कर रहे थे। सब इस तरह की पीढ़ी इतिहास में आईं, जैसा कि आप जानते हैं, और गायब हो गयीं। युद्ध रचे गए, फिर इतने लोग मारे गए। हमारे पास हिटलर था,  चरम सीमा क्रूरता की। उन्होंने मानवता की कभी परवाह नहीं की।

अंततः आज्ञा पर बात आयी। आज्ञा पर भी मार डाला ईसा मसीह को, उन्होंने नष्ट कर दिया ईसा मसीह को। उन्होंने इतने महान संतों को नष्ट कर दिया जो वास्तव में केंद्रीय मार्ग के माध्यम से संत थे, कुछ अवतार थे और उन्होंने उन्हें नष्ट कर दिया। यह सब हुआ राम के समय से, वह सब हुआ है। और एक के बाद एक इतने सारे राक्षस आते गए, और उन्होंने विश्व की शांतिपूर्ण संस्कृति को नष्ट कर दिया; बेहद अहंकारी, दिखावटी, जैसा कि हम उन्हें बुला सकते हैं, बहुत आक्रामक लोग। और यह आक्रामकता आ गई, इतनी बड़ी ताकत के साथ आयी एक के बाद एक। यह एक सीमा तक गया।

जब लोगों ने प्रतिक्रिया की, तो वे मारे गए और नष्ट कर दिए गए। तो भयानक लोग पैदा हुए; ये सभी लोग, चूंकि वे आक्रामक और विनाशकारी थे। यह प्रकृति अभी भी हमारे भीतर है, कुछ लोग, क्योंकि वे दाएँ-पक्षीय (राइट-साइडेड) हैं। सभी राइट-साइडेड लोगों को यह समस्या थी: क्रोध, आक्रामकता, दूसरों को नियंत्रित करना।

विकास रुक गया, और कोई आध्यात्मिक विकास नहीं हुआ। वे आध्यात्मिकता चाहते थे, लेकिन इस तरह के व्यवहार से जो उन्होंने विकसित किया, आध्यात्मिकता भाग गई। हमारे पास इतने अवतार हुए। वे सभी मारे गए, सूली पर चढ़ा दिए गए या समाप्त कर दिए गए। कोई संभावना नहीं थी मानव को बचाने की, सामान्य रूप में। एक बुरा आदमी आया, और उसने पूरी दुनिया को तहस-नहस कर दिया। हमारे पास एक हिटलर था जिसने वास्तव में सभी लोगों को मारा, सभी देशों को, सभी राष्ट्रों को, और हम सब समाप्त हो गए।

यह सब इसलिए है क्योंकि हमने दाएँ पक्षीय (राइट-साइडेड) संचलन को पकड़ा है जो उन्हें लगता था कि सरल था आध्यात्म के लिए, जो कि नहीं था। तो उन्होंने सारी हदें पार कर दीं, और वे एक स्तर पर पहुंच गए कि वे बिल्कुल शैतान बन गए, राक्षस, बिना यह समझे कि मानव राक्षस हैं, वही बन जाते हैं। यहां तक कि उनके गुरु भी ऐसे ही थे, और कुछ नहीं, लेकिन उन्होंने तो अवतरणों तक को भी यातनाएं दीं, सभी अवतार उनके द्वारा सताए  गए।

वास्तव में उन्होंने कैसे खुद को बचाया, उल्लेखनीय है, पर अंततः वे कोई परिणाम नहीं ला सके। इसलिए, मैंने सबसे पहली कोशिश की अध्ययन करने की कुण्डलिनी के बारे में,  कि मुझे कुण्डलिनी को उठाने में सक्षम होना चाहिए। और मुझे पता था कि मैं उसके लिए आयी हूं, और किसी कार्य के लिए नहीं, बल्कि केवल लोगों की कुण्डलिनी को उठाने के लिए, ताकि वे मध्य मार्ग पर आ जाएं, न कि दाईं या बाईं ओर। पर मैंने आपको बाईं ओर का ज्ञान बताया, साथ ही आपकी कुण्डलिनी को ऊपर उठाने का। अपनी कुण्डलिनी को ऊपर उठाकर, आपने अपने सहस्रार को भेद दिया, और आपने प्रवेश किया वास्तविक आनंद के क्षेत्र में, वास्तविकता के। ये सारे अवगुण  दूर होने लगे।

मध्य मार्ग पर पहले मूलाधार आया। मूलाधार और मध्य मार्ग की जागृति से आप लोग अति शुद्ध हो गए। आपकी आंखें शुद्ध हो गईं, आपकी अनैतिकता चली गई, आपका सस्तापन चला गया और आप हो गए, मुझे लगता है हमें कहना चाहिए, अत्यंत धार्मिक लोग। जब तक ऐसा नहीं होता, आप सहज योग में नहीं आ सकते। आप अनैतिक नहीं हो सकते, आप स्त्री-लम्पट नहीं हो सकते, आप ऐसे व्यक्ति नहीं हो सकते, जो दूसरों से पैसा हड़पना चाहता हो, और ये सब, या कोई भी जो बहुत आक्रामक हो वह सहज योग में हो सकता है। इसलिए ऐसे सभी लोगों को बाहर निकाल दिया गया। एक बार जब उन्हें बाहर निकाल दिया गया तो वे अपने दांत दिखने लगे, मुझे कहना चाहिए। उन्हें यह पसंद नहीं आया कि उन्हें बाहर निकाल दिया गया। लेकिन अब वे समझते हैं, उनमें से कुछ, कि हमने गलतियाँ की हैं। 

तो सर्वप्रथम यह है कि आपको विकास करना चाहिए अपनी पवित्रता का,  उसका मान रखना चाहिए और उसका आनंद लेना चाहिए। ऐसा हुआ आपके मूलाधार की जागृति के कारण। यह पहला चक्र है बाईं ओर का, जहां आपके पास श्री गणेश हैं। लेकिन दाहिनी ओर भी हमारे पास देवता हैं। प्रत्येक चक्र पर हमारे पास क्षतिपूर्ति करने के लिए देवी-देवता हैं, लेकिन श्री गणेश मध्य में हैं। और इस तरह हम धन्य हो गए उनकी शक्तिशाली पवित्रता से, और हम समझने लगे सुंदरता पवित्रता की, शक्ति पवित्रता की। इस तरह हमने दाहिना भाग समाप्त कर दिया।

राइट-साइड लड़ाई के लिए था, हत्या के लिए, गुस्से (के लिए)। कोई शांति नहीं थी इन लोगों के लिए। केवल एक बात वे जानते थे कि दूसरों पर कैसे हावी होना, और असहनीय होना। और फिर, वे उच्च, उच्च स्तर तक बढ़ गए स्वाधिष्ठान के। स्वाधिष्ठान में वे उठे, और आक्रामकता रचनात्मक लोगों की, कुछ निर्माण करने के लिए। अब भी हमारे पास कई हैं। वे सभी प्रकार की बकवास बनाते हैं, निर्मित करते हैं सभी प्रकार के विकृत, और भी बहुत, कहना चाहिए, गंदी बातें, नाम बनाने के लिए। इसलिए, यह एक और चीज़ है जो हमें स्वाधिष्ठान में मिली है, जो लोग बनाना चाहते थे नाम, स्थान – जो आया दाएँ स्वाधिष्ठान से। 

फिर तीसरा चक्र जो वहाँ था वो नाभि चक्र था। नाभि चक्र पर वे पूरी तरह से लग गए पैसे बनाने में, लक्ष्मी नहीं बल्कि पैसा, पैसा किसी भी तरीके से, और उन्होंने धोखा दिया पूरी दुनिया को। इस पैसे से, जो उन्हें मिला, उन्होंने सभी तरह के बुरे काम किए। या तो उन्होंने धोखा दिया या वे आक्रामक थे। धोखाधड़ी बहुत थी बाएं-पक्षीय (लेफ्ट-साइडेड) देशों में, जैसे भारत, और आक्रामकता दाएँ-पक्षीय (राइट-साइडेड) देशों में।

मध्य में, हमारे पास जो गुण स्वाधिष्ठान में है, सृजनात्मकता है: सृजनात्मक कला के लिए, जो बहुत सुंदर है, जो बहुत गहरी है, जो पूर्णतः आध्यात्मिक है। वह लुप्त हो गयी, और लोगों ने, यहाँ तक कि, अवतरणों को भी, बुरी आदतों से पूर्ण दिखाना शुरू कर दिया। सभी प्रकार की गंदगी आ गई उस प्रगति के साथ। फिर, जैसा कि मैंने आपको बताया, नाभि है। नाभि में लोग धन के पीछे लग गए। लेफ्ट-साइडेड लोग धन कमा रहे थे, राइट-साइडेड अपने धन को लेकर आक्रामक थे। अगर वे कमा रहे थे तो उन्हें लगा कि वे दुनिया के शीर्ष पर हैं। अगर उनके पास धन था तो वे सोचते कि हमसे बेहतर कोई भी नहीं है। 

इस सब ने उन्हें समाप्त कर दिया, यह खत्म हो रहा है। यह उस सीमा तक आएगा जहां उन्हें एहसास होगा कि पैसा विनाश के लिए नहीं है, बल्कि निर्माण के लिए है: निर्माण देश का, मानवों का सामूहिक  निर्माण, उनके बीच शांति और प्रेम लाने के लिए, मदद करने के लिए, सभी प्रकार के अच्छे कार्य करने के लिए। फिर वही राइट-साइडेड लोग  गए माँ के चक्र में, और वे भयानक माताएँ थीं, अपने बच्चों पर हावी होने की कोशिश की, सभी पर हावी होना, और कुछ भी त्याग नहीं कर सकीं बच्चों के लिए। हमारे पास इनमें से काफी महिलाएं थीं जो अपने पतियों के साथ आक्रामक हैं, अपने बच्चों के साथ आक्रामक हैं। और यहां तक कि पुरुषों के बीच मातृत्व मृत और समाप्त हो गया है।

सभी इस प्रकार के लोग, जब मैं धरती पर आयी तो मैंने देखे, और मैं स्तंभित थी कि वे किस प्रकार के मानव हैं? मैं उनके साथ क्या करूंगी? मैं उनकी कुण्डलिनी कैसे जगाउंगी? नाभि चक्र में ही वे खो गए थे, लेकिन अब यह माँ का चक्र है। उनके पास कोई पितृत्व नहीं था, कोई मातृत्व नहीं था, उन्होंने अपने बच्चों को बाहर निकाल दिया, बहुत स्वार्थी, आत्म-केंद्रित, हावी माता-पिता। यह हृदय चक्र था।

फिर सामूहिक चक्र आया, जिसे हम कहते हैं विशुद्धि। विशुद्धि चक्र पर वे पूरी दुनिया पर अधिकार रखना चाहते थे। वे पूरी दुनिया को अपने कब्ज़े में लेना चाहते थे सम्राट बनने के लिए, और उन्होंने साम्राज्यों का गठन किया और इस हद तक दुर्व्यवहार किया कि इस तरह व्यवहार करना मानवीय रूप में संभव नहीं है। वे वास्तव में राक्षस थे, मुझे कहना चाहिए, और वे राक्षसी गुण अभी भी हैं। उनके व्यवहार में, हर बात में, आप देख सकते हैं, वे लोगों के प्रति कैसा व्यवहार करते हैं, उनके साथ ऐसा बर्ताव करते हैं, ऐसे लोगों का निर्माण करते हैं जो आध्यात्म के विरोध में हैं, और जो आक्रामक हैं। खैर, ये दोमुखी दुनिया की तरह हो गए, जहां वे लोग हैं जो आक्रामक हैं और वे लोग हैं जिन पर अत्याचार होता है।

यह दोमुखी दुनिया अब भी अस्तित्व में है, लेकिन बहुत कम है। सामूहिक समझ धन्य हो जिसके कारण कई अच्छे संस्थान हैं जो स्थापित किए गए, पर वे कार्यान्वित नहीं हैं, वे इतने सफल नहीं हैं क्योंकि इसके प्रमुख नियंत्रित कर रहे हैं, लेकिन नियंत्रित क्या कर रहे हैं? स्वयं को नहीं, दूसरों को नियंत्रित कर रहे हैं, और उनके व्यवहार ने बिगाड़ दिया है इस चक्र के पूरे कार्य को। 

सामूहिक रूप से आपके पास, अगर आप आसपास देखते हैं तो, आज हर जगह युद्ध चल रहा है, लड़ाई चल रही है, हत्या हो रही है, विनाश हो रहा है। यह कैसे है? अब इतने सारे आध्यात्मिक लोग हैं इस दुनिया में। तो, इसका कारण यह है, आध्यात्मिक लोग बहुत शांत हो गए हैं, अपने आध्यात्मिक जीवन का आनंद ले रहे हैं, बहुत शांत और बहुत सुखी लोग हो गए हैं। लेकिन इससे शांति नहीं आती। आपको गतिशील होना है और आपको दुनिया में शांति लाना है, आपको इसके बारे में कुछ करना है। हम अपनी प्रगति से बहुत संतुष्ट हैं, लेकिन हमें इस  बात की चिंता नहीं है कि दूसरों ने क्या प्रगति की है, वे कितनी आगे गए हैं, हम उनसे कहाँ मिल सकते हैं, हम उन्हें क्या बदल सकते हैं?

अपने स्तर पर मैं कई परिस्थितियाँ बदल सकती हूं, लेकिन आपके स्तर पर आपने कितने लोगों को बदला है? आपने क्या किया? यह देखना आवश्यक है। अभी भी आप रहते हैं अपने अहंकार के साथ, आज्ञा पर, और आप अपनी शांति से बहुत खुश हैं, सब से जो आपको सहज योग के माध्यम से मिला है। यह सबसे बड़ा संकट है जो विश्व आज झेल रहा है, वह सब जो इतने आध्यात्मिक हैं, जिन्होंने महान ऊंचाइयों को हासिल किया है, उन्हें कोई चिंता नहीं है की क्या कल्याण होना है। वह क्या कर रहे हैं कि अपने अध्यात्म का आनंद ले रहे हैं, पूजा में आना, अधिक से अधिक इसको पाना। लेकिन उन्होंने लोगों को परिवर्तित करने के लिए कोई सामूहिक कार्य नहीं किया है। उनमें से कुछ कार्य कर रहे हैं, एक या दो, बाकी  सब अच्छे से आनंद ले रहे हैं इस तरह से  कि लोग उन्हें महान आत्मा मानते हैं, अच्छे लोग, बस इतना ही। 

मैं चाहूंगी कि अब आप आत्म-निरीक्षण करें और यह पता करें कि आपने कितना सामूहिक कार्य किया है, ऐसे कितने लोग आपके पास हैं। किनसे आप बात कर रहे हैं? कितने लोगों को आपने सहज योग के बारे में बताया है? बस इतने से ही हैं। ईसा मसीह के केवल बारह शिष्य थे; वे आपकी तुलना में बहुत अधिक गतिशील थे। इसलिए अब आपको दाईं ओर जाना चाहिए। और जब आप दाईं ओर जाते हैं, तो हम गतिशील लोगों का निर्माण करेंगे, न कि कुछ बेकार, धैर्यवान, बहुत चुपचाप, शांतिमय लोगों का। यह सहज योग का उद्देश्य नहीं था। सहज योग का उद्देश्य है परिवर्तन करना, परिवर्तन इतने सारे लोगों का। और वह सब जो ऐसा कर रहे हैं, मेरा पूर्ण आशीर्वाद उनके साथ है। लेकिन जो लोग  अपने आप में ही मगन हैं, यह बहुत अच्छी बात नहीं है। आपके देश में कितने लोगों ने सहज योग अपनाया है? ज़रा पता लगाइये। कितने लोगों के साथ आपने इसे कार्यान्वित किया है? 

तो आपका योग पूर्ण नहीं है, आपका तो आंशिक योग है बाईं ओर का, आप बहुत प्रेममय हैं, बहुत दयालु हैं, बहुत ऐसे हैं। मैं यह नहीं कह रही हूं कि आपको आक्रामक होना चाहिए किसी भी तरह से। लेकिन यहां तक कि मैंने देखा है कि लोग नेता बनना चाहते हैं, वे कुछ महान बनना चाहते हैं; पर कितने लोगों को उन्होंने आत्म-साक्षात्कार दिलाया है? उन्होंने सहज योग के बारे में कितने लोगों से बात की है? मैंने कहा है की हवाई जहाज़ में भी आप जाएँ, सड़क पर चलें, कहीं भी लोग सहज योग के बारे में बात करते हैं। लेकिन हम यहाँ सहज योग अपनी महानता के लिए उपयोग में ला रहे हैं, स्वयं की समझ के लिए।

सहज योग इसलिए आपको नहीं दिया गया है। यह आपको दिया गया है कई लोगों को आत्म-साक्षात्कार देने के लिए। मैं सभी युवा लोगों से, युवा पीढ़ी से निवेदन करती हूं कि वे अपनी सहज ऊर्जाओं को निरर्थक बातों पर बर्बाद न करें जैसा कि पुराने लोगों ने किया है। बेहतर होगा आप आगे बढ़ कर लोगों से सहज योग की बात करें और सहज योग का प्रसार करें। वे अधिक रुचि रखते हैं स्कूलों को चलाने में, निराश्रितों की देखभाल में, यह करते हुए, वह करते हुए,  यह आपका काम नहीं है। आपका कार्य है अधिक सहज योगियों, अधिक सहज योगिनियों का निर्माण करना। लेकिन ऐसा नहीं है, जो मैं देखती हूँ, ऐसा नहीं है। दायाँ पक्ष गायब है। आपको दाएँ पक्ष पर आना चाहिए। पूर्ण रूप से बढ़ें। आपको  कुछ नहीं होगा। कोई भी आपको मार नहीं सकता, कोई भी आपको परेशान नहीं कर सकता, कोई भी आपको गिरफ्तार नहीं कर सकता, मेरा विश्वास कीजिये।

आपके पास शक्तियां हैं लेकिन यदि आप उनका उपयोग नहीं करते, तो आप इसी तरह हैं। इसलिए हम इस गतिहीन स्थिति पर आ गए हैं कि हमें पता होना चाहिए कि हमें अपने दाएँ पक्ष का उपयोग करना है। दायाँ पक्ष बहुत महत्वपूर्ण है। अगली बार मैं आपको दाएँ पक्ष के बारे में बताऊंगी, कि आपके पास कौन-सी दाईं पक्षीय वस्तुएँ हैं। अब आप बाएँ पक्षीय नहीं हो सकते जो  भी चेष्टा करें; इसलिए अपने दाएँ पक्ष का सही दिशा में सही समझ के साथ उपयोग करें, इस  प्रकार का नहीं, मुझे कहना चाहिए, बहुत मनमाना या बहुत हावी, हिटलर की तरह।

सहजा योगियों के बीच में भी हिटलर रहे हैं। लेकिन अब समय आ गया है आपके लिए, संतों ने जो पहले किया है, उससे अधिक करने के लिए, इस तरह से कार्यान्वित करने के लिए; अपने आप में रहने के लिए नहीं, कि आपके पास एक परिवार है, आपके पास बहुत अच्छे बच्चे हैं, होना, आनंद लेना, इस सब के लिए सहज योग नहीं है। सहज योग पूरी दुनिया  के परिवर्तन के लिए है। आपको इसके बारे में सोचना होगा: आप क्या कर रहे हैं, आप कहां हैं, और आपने क्या प्राप्त किया सहज योग से?

फिर हम आज्ञा पर आते हैं। आज्ञा में यह हुआ कि सहज योगी बन गए हैं…, उनके पास…, वे कुछ भी सहन कर सकते हैं, वे कुछ भी झेल सकते हैं – ऐसा हम नहीं चाहते हैं। हम क्या चाहते हैं, दूसरों के कष्टों को दूर करना, दूसरों की आक्रामकता को दूर करें। तो हम उस तरह का संगठन नहीं चाहते, हमारे पास नहीं है, उस तरह की समझ हमारे पास नहीं है। और यदि वह कार्यान्वित होता है, तो आप अलग लोग होंगे। तो हम संतों की तरह हो गए हैं, आप देखिए, बैठे हैं अपने एकांतवास भवन  में, कुछ ऐसा है, इससे अधिक नहीं। तो बेहतर है कि प्रयास करें कुछ सकारात्मक करने का बिना आक्रामकता के। मुझे पता है कि आप में से कुछ अभी भी बहुत आक्रामक हैं, दिखावटी  हैं, मुझे यह पता है।

लेकिन अगर आप सामूहिक रूप से कार्यान्वित करने के भाव में आ जाएँ, तो आपको एहसास होगा कि आपकी क्या गलतियाँ हैं, अभी भी आपके व्यक्तित्व में क्या कमियाँ हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। आज्ञा चक्र में कई सहज योगी लड़खड़ाते हैं, मुझे नहीं पता उनके साथ क्या होता है। आज्ञा पर मैंने कहा है कि आपको क्षमा करना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप लोगों को गलत काम करने दें।

क्योंकि आप क्षमा करना चाहते हैं, बहुत आसान है कि लड़ाई न करें, कुछ भी न कहें, बस दूर रहें, केवल क्षमा करें – नहीं। आप जाइये और उस व्यक्ति से बात करें और उसे बताएं कि यह गलत है। आपको इसका सामना करना होगा। यदि आप इसका सामना नहीं कर सकते हैं तो आप बेकार हैं, अन्य लोगों की तरह। आप लोगों को आत्म-साक्षात्कार मिलने का क्या लाभ हुआ? तो अब हमें यह समझना होगा कि केवल यह नहीं है कि हमारे पास चैतन्य है, कि हम सब अच्छे हैं, कि आप कुछ लोगों को ठीक कर सकते हैं यह अंतिम वचन है – नहीं।

आपको इसका प्रसार करना है, आपको जनता में जाना है, आपको इस विषय पर सामूहिक होना है और आपको सहज योग का प्रसार करना है। सम्पूर्ण विश्व में इतने सारे सहज योगियों के साथ हमने ज़्यादा प्रगति नहीं की है। तो अब यह है कि आपको योजना बनानी है कि आप क्या करना चाहते हैं, आप इसे कैसे करना चाहते हैं, और आप कैसे सहज योग का प्रसार करना चाहते हैं। यह अति आवश्यक है।

क्योंकि आप लोग अच्छे हैं, कहने को, सहज योग के बारे में बात करने में, सहज योग के गीत गाने में; यह सब बातें   निरर्थक हैं जब तक आपके पास ठोस प्रमाण नहीं है बहुत अधिक लोगों को सहज योग में लाने का। तुर्की जैसे छोटे देश में हमारे पास पच्चीस हजार सहज योगी हैं, आप क्या कहते हैं? वे सभी मुसलमान हैं, पच्चीस हज़ार मुसलमानों का सहज योगी बनना, जबकि आप पाते हैं कि यह संख्या बहुत कम है अन्य देशों में। वे बहुत धनी नहीं हैं, किन्तु अपने आत्म-साक्षात्कार का ध्यान  रखते हैं और दूसरों को आत्म-साक्षात्कार देने का भी।

यह बहुत आश्चर्यजनक है कि यह कैसे  कार्यान्वित हुआ है, यह कैसे फैल गया है। इसलिए अपनी समस्याओं के बारे में, अपने शत्रुओं, अपनी शक्तियों के बारे में सोचने के बजाय, दूसरों को शक्ति देने के बारे में सोचें और उन्हें सहज योग बनाने के। यह बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप सहस्रार में हैं तो आपके पास सारी शक्तियां हैं। सहस्रार में यदि आप सहज योग का प्रसार नहीं करते, तो आत्म-साक्षात्कार का क्या लाभ है? केवल अपने लिए –  यह बहुत स्वार्थपरायण है।

तो मैं यह कहूँगी कि अपनी महिमा फैलाने के बजाय, अपना नाम, कृपया अधिक लोगों को सहज योग में लाने का प्रयास करें। बहुत गतिशील प्रभाव में जाइये। कितने लोगों ने मुझसे शिकायत की है कि सहज योगी और कुछ नहीं बस निर्जीव लोग हैं। क्या यही हैं आप? मेरे जैसे एकल व्यक्ति ने इतना कार्य किया है, तो आप लोग क्यों नहीं? अपने देश में आपने इसे पूर्णतः कार्यान्वित किया है? ज़रा इसके बारे में सोचिये। 

और इसीलिए, जब तक आप ऐसा नहीं करते, तब तक आप सम्पूर्ण नहीं हैं, आप पूर्ण नहीं हैं, और आदि शक्ति की शक्तियाँ आप नहीं समझ पाए हैं उनके पूर्ण रूप में। इसलिए मैं आज आपको बता रही हूं कि यह एक बहुत महत्वपूर्ण दिन है कि आप मुझे आदि शक्ति के रूप में पूजते हैं। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि आदि शक्ति को पूर्ण रूप होना है। यह केवल आधा बायाँ-पक्षीय नहीं हो सकता। अगर वह कार्यान्वित नहीं होता, तो क्या उपयोग है? यह कोई भी, किसी भी अन्य साक्षात्कार को प्राप्त करने जैसा है जो कि इतना महत्वपूर्ण नहीं है।

न केवल आपको प्रसार करना चाहिए, बल्कि आपको उन्हें बनाना चाहिए और आत्म-साक्षात्कार करवाना चाहिए। मेरा पूर्ण आशीर्वाद, मेरा सर्वस्व प्रेम, मेरी सारी शक्तियां मैं आपको देती हूँ; पर समझने की कोशिश करें। ठीक है?

आपका बहुत बहुत धन्यवाद।