Adi Shakti Puja: You Have to Become Fragrant

Campus, Cabella Ligure (Italy)

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आप सभी को फिर से यहाँ देख कर बहुत अच्छा लग रहा है।
मुझे लगता है कि इस स्थान पर हमारी पहली पूजा है, जो हम
कर रहे हैं और मुझे आशा है कि आप सभी आराम से हैं
और यहाँ पहुँचना सुविधाजनक रहा होगा ।
आज वास्तव में बहुत ही महान दिन है
यह एक आदि शक्ति हैं, आदि शक्ति का उत्सव मनाना,
और आदि शक्ति की उत्पति क्या है।
मैंने इसके बारे में कभी बात नहीं की है,
यह पहली बार है जब मैं आपको बताऊँगी
कि आदि शक्ति आदि माँ है, वे शक्ति है,
ईश्वर की शक्ति है,
जो इस दुनिया को बनाना चाहती थी।
और उन्होंने स्वयं ही इस महान दुनिया को बनाने की व्यवस्था की
(क्या आप सब बैठ नहीं सकते?
उनके लिए कोई जगह नहीं है या क्या है?
कृपया बैठ जाएँ।
वे क्यों खड़े हैं?
आपके पीछे कुर्सियाँ हैं।
यह सब ठीक है आप कुर्सियों पर बैठ सकते हैं।)
यह सब नीचे गिर रहा है [माइक्रोफोन]।

जहां तक ​​संभव हो आराम से रहें,
अपने आप को अनावश्यक रूप से तनाव न दें।
मुझे आशा है कि आप सभी
को आराम से बैठने के लिए कुछ जगह मिल जाएगी।
तो आज मैं आपको आदि शक्ति के विषय में बताने जा रही हूँ,
जो एक बहुत ही प्राचीन विषय है।
आदि शक्ति स्वयं ईश्वर की शक्ति है,
और उन्होंने इस पृथ्वी पर ईश्वर का साम्राज्य स्थापित करने हेतु इस दुनिया का निर्माण किया।
आप कल्पना कर सकते हैं कि यहाँ अंधकार के सिवाय और कुछ नहीं था
उसी अंधकार से उन्हें इन सभी सुंदर, चित्रमय वृक्षों और सभी प्रकार की वनस्पतियों की रचना करनी थी , वह उन्होंने बनाया। लेकिन इन सब चीजों का क्या फायदा ? जो न बोल सकती है, न ही समझ सकती है, न ही उनकी कोई अभिव्यक्ति है।
अवश्य ही कुछ पेड़ और कुछ फूल
सुंदर चैतन्य प्राप्त करते है,
और वे बहुत अच्छी तरह से विकसित होते हैं,
लेकिन सब नहीं, उनमें से कुछ।
उदाहरण के लिए, मुझे आपको अवश्य ही यह बताना होगा कि यहाँ के
फूलों में खुशबू नहीं है,
सभी फूलों में खुशबू नहीं है।
मैं यह देखने के लिए सभी ओर गयी कि यहाँ कहीं सुगन्धित फूल तो नहीं है।
लेकिन वो क्या करते हैं उन्हें बड़ा विकसित करते है। और बड़ा करते है,
, इतने बड़े होते है कि आप उन्हें कहीं और खोज नहीं सकते हैं।
लेकिन सुगंध नहीं है,
जबकि भारत जैसे गरीब देश के फूलों में अत्यंत सुंदर सुगंध होती है।
यहां तक ​​कि छोटे फूलों में भी जबरदस्त सुगंध होती है।
अब भारत में सुगंध की क्या विशेषता होती है और कहीं नहीं है! कहीं भी नहीं।
कुछ फूलों में थोड़ी सुगंध हो सकती है लेकिन कुछ फूलों में कोई सुगंध नहीं होती है जो बहुत सुंदर रूप से उगाए जाते हैं, प्रेम और देखभाल से । लेकिन भारत में बहुत सारे जंगली फूलों में भी सुगंध पायी जाती है। क्या कारण है? वे कहते हैं, कि भारत की धरती में सुगंध है। मिट्टी में सुगंध कैसे हो सकती है? लेकिन यह एक सच्चाई है। मैं जो कह रही हूं वह सिर्फ
एक कहानी नहीं है, बल्कि यह एक तथ्य है
कि भारत में कोई भी फूल जो आप ज्यादातर उगाते हैं, उनमें
अधिकतर में खुशबू होती है।
जबकि यहां ऐसा नहीं है।
न किसी अन्य देश में है,
आप नॉर्वे जाते हैं या आप जर्मनी जाते हैं,
किसी भी अन्य देश में आप जाते हैं,
आपको फूलों में कोई सुगंध नहीं मिलेगी।
यह बहुत चौंकाने वाला है कि फूलों में सुगंध क्यों नहीं है।
जब इस दुनिया को बनाया गया था तो
कोई सुगंध नहीं थी,
लेकिन कुछ क्षेत्रों में थी,
विशेष रूप से ऐसे क्षेत्र थे ,जिन्हें हम भारत या कुछ और कहते हैं। यह अविश्वसनीय है कि यहां या विदेश में कहीं भी सुगन्धित फूल नहीं हैं। इसलिए अब आप यहां पैदा हुए हैं।आप सुगंध लाए हैं , आप वे लोग हैं जो आत्मसाक्षात्कारी है,
और आपको सुगंध फैलाने ​​का उत्तरदायित्व मिला है।
इसलिए आपका उत्तरदायित्व दोगुना है, मुझे लगता है,
कि आपको अवश्य ही सुगंध फैलानी चाहिए।
सुगंध कुछ बहुत ही जन्मजात है।
यहां तक ​​कि यह मिट्टी जिसे हमें कहना चाहिए कि सुगंध के बिना है,
लोगों के चरित्र में,
उनके व्यवहार में, उनकी समझ में सुगंध होनी चाहिए।
और वहां शांति है, जिसके वे आकांक्षी हैं।
मैं नहीं कहती कि वे शांतिप्रिय हैं,
लेकिन वे शांति पाने के इच्छुक हैं।
यह आकांक्षा केवल यह दर्शाती है कि वे बहुत
सुगंधित लोग हैं,
एक मनुष्य में सुगंध क्या होती है
उसकी प्रकृति , उसका स्वभाव,
वह कैसा है और वह दूसरों के प्रति कैसा व्यवहार करता है।
सभी देशों में, सभी जगह, अभी तक इस बात की जानकारी नहीं है कि आपको सुगंधित बनना है। अगर वे जागरूक हो जायेंगे तो सभी युद्ध समाप्त हो जाएंगे, सब कुछ समाप्त हो जाएगा और वे जान जाएंगे कि हम सभी एक हैं।
हम अलग-अलग देशों या ऐसी किसी भी चीज़ से सम्बंधित नहीं हैं, जिसे हमने बनाया है। ईश्वर ने भेद नहीं बनाया है, हमने बनाया है कि यह आपका देश है, यह उनका देश है
और देशानुसार हम लड़ते हैं। यह देश किसी का नहीं है।
यह ईश्वर का है। लेकिन लोग मूर्खता से देशों पर लड़ते हैं, कि यह हमारा देश है,
यह हमारा देश है।
अब मैं पूरी दुनिया की यात्रा कर चुकी हूं , पर मैं किसी भी देश को अपना नहीं कहूँगी
क्योंकि अगर आप किसी देश को अपना मानते है तो उसकी सुगंध आप में होनी चाहिए,
आपके पास स्वभाव होना चाहिए, जिससे दूसरे लोगों को महसूस हो कि आप सुगंध वाले देशों से आये हैं। आपको बहस नहीं करनी।
लेकिन एक देश दूसरे देश के साथ लड़ रहा है,
हर जगह यही चल रहा है।
आप इस मूर्खता को देखते है हर बार जब भी अखबार में पढ़ते हैं,
कि देश लड़ रहे हैं और वे जितने अधिक विकसित हो रहे हैं, उतने ही बेहतर हो रहे है। उनके विकास में मुझे आशा है कि वे उठेंगे और आध्यात्मिक बनेंगे और उनमें सुगंध का विकास होगा।
लेकिन मुझे लगता है कि मनुष्यो में यह लड़ाई की भावना शैतान से आई है, मुझे लगता है
कि वे स्वयं को मार रहे हैं, दूसरों को मार रहे हैं और पूरी दुनिया को नष्ट कर रहे हैं। आप अखबार में पढ़ते हैं तो आपको कितनी शर्म महसूस होती होगी कि मनुष्य कैसे चल रहा है।
तो सभी सहज योगियों को किसी भी तरह की लड़ाई का समर्थन नहीं करना चाहिए। वो ये नहीं हैं; वे यहाँ लोगों के लिए सुगंध लाने के लिए हैं, खुशियाँ लाने के लिए हैं, आनंद के लिए हैं और युद्ध करने के लिए नहीं हैं!
यह सहज योगियों के पहले कर्तव्यों में से एक है,
कि वे किसी भी ऐसी चीज़ से न जुड़े जो घृणा करता हो,
जो लड़ता हो , जो समस्याएं पैदा करता हो।
इन लड़ने वाली आत्माओं ने मिट्टी की सुगंध को नष्ट कर दिया है। यदि लोग प्रेमी और स्नेही बनते हैं,तो यह मिट्टी स्वयं ही सुगंधित हो जाएगी।
पहली चीज जो हमें सीखनी चाहिए वह है , एक-दूसरे से प्रेम करना
और किसी से घृणा न करना। घृणा करने के बहुत सारे तरीके हैं,
यह भी एक मानवीय गुण है। जानवर घृणा करते हैं क्योंकि वे जानवर हैं।
मनुष्य जानवर नहीं हो सकते, हम मनुष्य हैं और मनुष्यों के तौर
पर हमारे पास प्रेम , स्नेह होना चाहिए और किसी भी तरह की घृणा नहीं होनी चाहिए
अब जैसा कि आप सहज योगी हैं , मैं कहूँगी कि आपको अपनी लड़ने की क्षमता या दूसरों की आलोचना करने की क्षमता के बजाय अपनी प्रेम क्षमता को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।
आलोचना करना बहुत आसान है। लेकिन यह समझने की कोशिश करें कि हमारी मिट्टी में कोई सुगंध नहीं है, हम इस मिट्टी में सुगंध कैसे ला सकते हैं?
यह केवल तभी हो सकता है जब लोग यहां रहे और एक-दूसरे के प्रति प्रेम की भावना रखें। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है, जब सृजन हुआ तो वह केवल स्नेह के माध्यम से ही हुआ था।
अन्यथा! इन सभी चीज़ों को बनाने की प्रकृति को क्या आवश्यकता थी, यह सब किसके लिए है?
आपको सुंदर महसूस कराने के लिए,
ये सभी पेड़ सुन्दर है, आपको अच्छा महसूस कराने के लिए, कि प्रकृति के साथ एकस्वरूपता हैं।
उस तरह से हम मनुष्यों ने अपना योगदान नहीं दिया।,
अब मैं सहज योगियों को नहीं कह रही हूं,
वे दुर्लभ हैं और वे अद्भुत हैं और उन्होंने अच्छा काम किया है
क्योंकि वे प्रेम को सर्वोच्च मानते हैं। लेकिन आपको दूसरों को यह भी दिखाना होगा कि आप उनसे प्रेम करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए।
पूरी दुनिया बनी है क्योंकि प्रेम था, अन्यथा इन महाद्वीपों और सभी अन्य देशों पर ऊर्जा बर्बाद करने की क्या आवश्यकता थी? लड़ना नहीं था, एक दूसरे से घृणा
करने या स्वयं को अनंत सोचने के लिए नहीं ;
बल्कि एक दूसरे से प्रेम करने के लिए, और अधिक भाई-बहन पाने के लिए करना था।
जैसा कि सहज योग में आप महसूस करते हैं,
आप सभी भाई-बहन हैं। आज जब मैं आ
रही थी, तो मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि पूरे यूरोप से लोग थे
और भारत से भी , यह कैसे संभव है?
क्योंकि आपने उस प्रेम को विकसित किया है,
क्योंकि आपके पास वह प्रेम है, वह अन्तर्निहित प्रेम है,
इसलिए आप जहाँ भी जाते हैं, जहाँ भी आप लोगों से मिलते है ,
उन्हें यह कहना चाहिए कि हमने सहज योगियों को देखा है,
जो प्रेम के अलावा कुछ नहीं हैं। वे परेशान नहीं हैं
कि आप क्या हैं, आपकी स्थिति क्या है
या कुछ भी है, वे केवल जानते ये हैं कि आप एक सहज योगी हैं
और एक सहज योगी अन्य सहजयोगियों से प्रेम करते है।
ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
यह कभी नहीं था, क्योंकि मिट्टी में कोई सुगंध नहीं थी , मनुष्य में कोई सुगंध नहीं थी ,
अब वह आ गयी है। अब आपको एक-दूसरे से प्रेम करने और एक-दूसरे की मदद करने और एक-दूसरे को समझने की क्षमता मिल गई है। न आलोचना करने , न अपमान करने या किसी भी तरह से उन्हें बदनाम करने की।
यह मैं कह रही हूं क्योंकि आप सभी दुर्लभ लोग हैं जो सहजयोगी हैं।
कितने लोग सहजयोगी हैं ?, बहुत कम!
हमारे पास और अधिक सहजयोगी होने चाहिए,
जिससे वे समझ सकें कि हम सभी एक देश के अंग – प्रत्यंग हैं और यह देश, प्रेम का है। जब ऐसा होता है तो हम कहेंगे कि सहज योग ने काम किया है।
एक-दूसरे की मदद करना, एक-दूसरे को समझना,
यही होना चाहिए,
और मुझे लगता है कि सहज योगी एक-दूसरे को समझते हैं
और वे एक-दूसरे से प्रेम करते हैं,
लेकिन फिर भी इसे अपनी सीमा से अधिक जाना चाहिए।
बहुत से लोग यह नहीं समझते हैं कि सहज योग केवल उनके लिए नहीं है;
यह पूरी दुनिया के लिए है, आपको इसे दूसरों को देना होगा
और आपको प्रेम की एकता को आगे लाना होगा।
प्रेम में आप गलत चीज़ें नहीं देखते हैं।
आप बस प्रेम का आनंद लेते हैं और यही आज की पूजा में भी देखने को मिलता है,
क्या हम किसी के प्रति कोई भी घृणा रखते हैं?
क्या हम किसी के लिए या किसी भी देश के लिए दुर्भावना रखते हैं?
हमें स्वयं की जांच करने की कोशिश करनी चाहिए। यदि आप सत्य में एक सहजयोगी हैं,
तो आप किसी से घृणा नहीं करेंगे, आप किसी से भी घृणा नहीं करेंगे,
लेकिन आप प्रेम करेंगे और उन्हें अपना समझ कर प्रेम करेंगे।
प्रेम सबसे बड़ी चीज़ है, जिसे ईश्वर ने मनुष्यो को दिया है
और यही है जिसे हमे विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए ।
मैं यहां बहुत खुश हूं अब आप यह पहले दिन का उत्सव मनाने के लिए बहुत दूर से आए हैं, अपनी उन्नति का पहला दिन सहजयोगियों के रूप में ।
अब अगर सहजयोगी फैल गए और सहजयोगी और सहजयोगी बन गए,
तो आपका काम समाप्त हो जायेगा, क्योंकि तब आप एकता का आनंद ले रहे होंगे।
इसलिए एक तरह से यह करना है कि हम सब एक हो जाएं।
आलोचना करने या किसी से घृणा करने के लिए कुछ भी नहीं है,
लेकिन एक-दूसरे से प्रेम करना ही एक कारण है,
और वहां मुझे लगता है कि बहुत सारे सहजयोगी हैं
जिन्होंने उस प्रेम के स्तर को प्राप्त किया है
और कुछ अभी भी हैं जो संघर्ष कर रहे हैं,
वे उस स्तर तक नहीं आए हैं, कुछ! सभी नहीं।
सहजयोग का अर्थ है हम सब एक हैं, सहजयोग
हम सभी हैं, लेकिन अलग-अलग नहीं, एक साथ।
यदि हर कोई इस तथ्य को समझता है,
तो आपने आज आदि शक्ति का महान दिवस मनाया है।
आदि शक्ति ने इस दुनिया को क्यों बनाया?
यह सब क्यों हुआ?
हम क्यों नहीं सोचते कि इतना प्रेम,
इतनी समृद्धि हमें क्यों दी गई है?
हमें कभी एहसास नहीं होता कि हम कहां हैं और हमें कितना मिला है।
यह पैसा नहीं है, बल्कि प्रेम,
और जब आप ये समझेंगे तब ही वास्तव में एक-दूसरे से प्रेम करेंगे
और कोई घृणा नहीं, कोई बदला नहीं,
केवल प्रेम और प्रेम और प्रेम ही करेंगे।
यही आज का संदेश है।
हम सभी को एक-दूसरे से प्रेम करना होगा।
हमारे पास सभी प्रकार के संस्कार हैं
लेकिन यह केवल हमारे प्रेम की अभिव्यक्ति है।
यह सिर्फ एक संस्कार नहीं है, यह प्रेम है।
जब आपके पास माता का प्रेम है तो आप उसे कैसे अभिव्यक्त करेंगे ? उसी तरह हमें यह जानना होगा कि आज हमें यह संकल्प करना होगा
कि हमारे लिए प्रेम ही सबसे महत्वपूर्ण है।
हमें प्रेम करना चाहिए।
लोग अपने ही परिवारों में प्रेम नहीं करते।
मैं ऐसे लोगों से बात नहीं कर रही हूं, मुझे पता है।
उन्हें अपने परिवार, अपने गाँव,
अपने आस-पास, हर जगह, हर जगह से प्रेम होता है।
लेकिन अभी भी दुनिया युद्ध, लड़ाई और सभी प्रकार की परेशानियों के साथ चल रही है।
पूरी दुनिया को एक-दूसरे से प्रेम करने हेतु सामने आना होगा, प्रेम करने के अलावा और कोई उपाय नहीं है। और उस प्रेम में कोई स्वार्थ नहीं,
बल्कि आनंद है, और उस आनंद को आपको महसूस करना चाहिए
और दूसरों को देना चाहिए।
मुझे यकीन है कि आप सभी सहजयोगी ऐसा कर रहे हैं
और दूसरों की गलतियों को देख रहे हैं,
किसी को परेशानी में नहीं डाल रहे हैं।
प्रेम आदि शक्ति का संदेश है।
अब आप इसके बारे में सोचें।
एक आदि शक्ति ने पूरी दुनिया को बनाया।
उन्होंने कैसे किया होगा? उन्होंने क्या योजना बनाई होगी,
वह कैसे आयोजित किया होगा ।
यह आसान बात नहीं है। केवल इसलिए कि वे प्रेम करती थी।
उनके प्रेम की अभिव्यक्ति है कि आप सब वहाँ हैं,
और यही कारण है कि उनके साथ एक होना चाहिए, एक दूसरे को प्रेम करना सीखना चाहिए।
निश्चित रूप से इसमें आपको यह जानना होगा
कि आपको क्षमा कर देना चाहिए।
यदि आप नहीं जानते कि कैसे क्षमा करें
और अन्य लोगों की गलतियों को देखें, यह काम नहीं करेगा,
अब आपका काम क्या है,
यह देखना है कि आप प्रेम कर रहे हैं,
कि किसी के लिए कोई घृणा नहीं है,
आप घृणा करने या किसी को मारने के बारे में नहीं सोचते हैं।
इसके लिए व्यवस्था करनी होगी।
मुझे यकीन है कि यह कार्यान्वित होगा।
सभी यूरोपीय देशों और भारतीय महाद्वीप में,
जो विकसित हैं ,वे लड़ रहे हैं;
जो विकसित नहीं हैं वे भी लड़ रहे हैं,
उनकी लड़ाई की अपनी शैली है।
बस यही फर्क है, पर वहां प्रेम नहीं है।
यदि आप प्रेम करना चाहते हैं, तो आपको खेद महसूस करना होगा।
मान लीजिए कि मैं कुछ देश देख रही हूं। तो मेरे लिए आलोचना करना बहुत आसान है
यह कि यह देश बहुत बुरा है, लोग बुरे हैं,
यह बुरा है, यह है …
लेकिन मुझे लगता है कि उन सभी में अच्छाई की क्षमता हैं और
बहुत अच्छे लोग हैं । किसी न किसी तरह से मुझे उन्हें समझाना चाहिए,
यदि वे समझते हैं कि प्रेम क्या है और प्रेम का आनंद लें,
तो किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होगी ।

सिर्फ इंसान ही प्रेम करना जानते है,
और कोई नहीं।
जानवर भी प्रेम करते हैं लेकिन उनका प्रेम इतना सीमित होता है।
लेकिन इंसान, उनका प्रेम इतना सुन्दर होता है।
वे तभी सुंदर लगते हैं जब वे प्रेम करते हैं।
इसलिए मुझे आपको यह बताना होगा कि निम्नस्तरीय प्रेम नहीं करना चाहिए,
लेकिन एक ऐसा प्रेम जिसका आप आनंद उठा पाएंगे
और दूसरा व्यक्ति भी आनंदित होगा। ये समझना होगा कि
लोगों का प्रेम को समझने का तरीका कभी-कभी बहुत अज़ीब होता है।
तो पहले यह समझना होगा कि प्रेम क्या है,
यह भी समझना है कि आप प्रेम करते हैं या नहीं।
यदि आप वास्तव में दुनिया से प्रेम करते हैं,
यदि आप वास्तव में ईश्वर की इस रचना से प्रेम करते हैं,
तो कोई घृणा नहीं होनी चाहिए, कोई लड़ाई नहीं होनी चाहिए,
बल्कि सिर्फ अच्छे तथ्यों को देखना चाहिए ।
जैसे कि एक माँ अपने बच्चे को देखती है आपको पूरी दुनिया को एक खूबसूरत कृति के रूप में देखना चाहिए, जिसे परमात्मा ने आपके लिए बनाया है।
यह विषय इतना लंबा है कि मैं आपसे घंटों बात कर सकती हूं
लेकिन मुझे सिर्फ इतना कहना है कि
अगर आप इसे समझ सकते हैं ,थोड़ा बहुत, तो यह है कि आप सभी को एक दूसरे के प्रति प्रेम
होना चाहिए और हम में समझ होनी चाहिए।
छोटे बच्चों को देखो, वे एक दूसरे से प्रेम करते है, उन्होंने अभी सीखा नहीं है कि घृणा कैसे की जाती है लेकिन अगर बच्चों को अच्छी तरह विकसित न किया गया हो तो
वे एक-दूसरे से घृणा कर सकते हैं।
वे बहुत बेढंगेपन से हास्यप्रद हो सकते हैं,
और इसलिए आज कई देश ऐसे हैं।
वे सिर्फ इसलिए लड़ रहे हैं क्योंकि वे प्रेम नहीं करते।
तो अब सहजयोगियों के पास बहुत बड़ा काम है,
बहुत बड़ा जीवन है कि उन्हें यह दिखाना होगा
कि प्रेम एक बहुत बड़ी चीज़ है।
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता
कि आप हिंदू हैं, ईसाई हैं, यह निरर्थक है,
आप सभी मनुष्य हैं और हमें प्रेम करने का अधिकार है
और यदि आप किसी तरह से सभी लोगों से प्रेम करने लगें, तो
मैं आपको बताती हूं कि सहजयोग बस जाएगा।
सहज योग एक पेड़ की तरह है
जिसे पानी की तरह प्रेम की आवश्यकता होती है।
इसे करके देखें। अपने जीवन के चारों ओर प्रयास करें और आपको पता चलेगा कि प्रेम कैसे आधार बन जाएगा। यह देखने के लिए नहीं कि आप कितना खर्च करते हैं
या आप क्या करते हैं।
ऐसा नहीं है कि आप उन सभी चीजों को गिनते हैं,
यह ठीक उसी तरह है जैसे एक महासागर के चारों ओर सब कुछ तैरता है,
आप ऐसे ही बन जाते हैं, सहजयोग का एक विशिष्ट व्यक्तित्व।
इसलिए सभी सहज योगियों को आज तय करना चाहिए
कि हम उन सभी लोगों को क्षमा करने जा रहे हैं जिनसे हम घृणा करते हैं
और हम उन सभी से प्रेम करने जा रहे हैं। देखते हैं कि यह काम करता है या नहीं।
मुझे यकीन है कि यह बाहर काम करेगा क्योंकि सबसे पहले आप सभी आत्मसाक्षत्कारी हैं।
और दूसरी बात यह है कि प्रेम मनुष्यों के लिए सबसे बड़ा, सबसे बड़ा वरदान है,
जिसे अगर आप उपयोग करते हैं,
तो किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होगी।

इसलिए आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद।