Shri Ganesha Puja मुंबई (भारत)

Shri Ganesha Puja 18 sept 1988 Mumbai

परमात्माकी सृष्टिकी रचनाकारकी शुरुआत जिस टंकारसे हुई उसीको हम ब्रम्हनाद तथा ओमकार कहते है। इस टंकारसे जो नाद विश्वमे फैला वो नाद पवित्रताका था। सबसे प्रथम परमात्माने इस सृष्टीमे पवित्रताका संचारण किया। सर्व वातावरणको पवित्र कर दिया। पहले उन्होंने पुनीत किया जो चैतन्य स्वरुप आज भी आप लोग जान सकते है। उसे महसूस कर सकते है, उसकी प्रचिती आपको मिल सकती है। वही ओमकार आज चैतन्य स्वरुप आपकोभी पवित्र कर रहा है।

श्री गणेश की पूजा हर पूजामे हमलोग करते है और आज तो उन्हीकी पूजा का बड़ा भारी आपलोगोंने आयोजन किया है। लेकिन जब हम किसी भी चीज की पूजा करते है तो उनमे बोहोत सारी विविध स्वरुप की मांगे होती है। कुछ लोग

होते है कामार्थी होते है, […]

Shri Krishna Puja: The State of Witnessing Como (Italy)

श्री कृष्ण पूजा (साक्षी भाव की स्तिथि )

इटली , 6 अगस्त 1988.

आज हम यहाँ एकत्रित हुए हैं, श्री कृष्ण की पूजा करने के लिए।

हमें, विशुद्धि चक्र पर श्री कृष्ण के अवतरन के महत्व को समझना चाहिए। जैसा कि आप अच्छी तरह से जानते हैं, सिवाय एक या दो बार,श्री ब्रह्मदेव ने अपना अवतार लिया है। और एक बार श्री गणेश ने जन्म लिया, भगवान येशु मसीह के रूप में । लेकिन विष्णु तत्व, […]

Sahaj Yogiyon Ko Upadesh (भारत)

सहजयोगियों को उपदेश

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK सबसे पहले एक बात समझ लेनी चाहिए कि यहाँ जो बंबई वाले और दिल्ली वाले लोग आये हैं ये मेहमान नहीं हैं। मेहमान जो लोग बाहर से आये हैं वो हैं। बसेस उनके पैसे से आयी हैं। आप तो एक पैसा भी नहीं दे रहे उसके लिए। एक कवडी भी नहीं दे रहे हैं। बसेस उनकी हैं, वो सब बसेस मार कर आप लोग यहाँ आ गये। यहाँ | बसेस छोड़ दिये, […]

Conversation with doctors New Delhi (भारत)

Conversation with doctors, New Delhi (India), 4 November 1986.
Left symphatetic nervous system represents our emotional side. Right
symphatetic nervous system represents our physical side. When both come
into play (i.e. psyche as well as somatic) then psychosomatic problems
result.
In the over activity of Right side, liver is the commonest to be
disturbed. This is because of too much thinking. “Swadistan Centre” has
to manufacture grey cells for the brain when brain is over active – […]

Dharma Ki Avashyakta – Why is Dharma needed (Evening) Sir Shankar Lal Concert Hall, New Delhi (भारत)

Dharma Ki Avashyakta Aur Atma Ki Prapti 23rd February 1986 Date : Place Delhi : Public Program Type : Speech Language Hindi

आत्मा को खोजने वाले सभी साधकों को हमारा प्रणिपात! आज का स्वर्गीय संगीत सुनने के बाद क्या बोलें और क्या न बोलें! विशेषकर श्री. देवदत्त चौधरी और उनके साथ तबले पर साथ करने वाले श्री गोविंद चक्रवर्ती, इन्होंने इतना आत्मा का आनन्द लुटाया है कि बगैर कुछ बताये हये ही मेरे ख्याल से आपके अन्दर कुण्डलिनी जागृत हो गई है। सहज भाव में एक और बात जाननी चाहिए कि भारतीय संगीत ओंकार से निकला हुआ है। ये बात इतनी सही है, […]

Mahashivaratri Puja New Delhi (भारत)

Mahashivaratri Puja Date : 17th February 1985 Place Delhi Туре Puja Speech Language Hindi

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari अपनी कुण्डलिनी को नीचे नहीं गिरने दें । आज शिवरात्रि के इस शुभ अवसर पे हम लोग एकत्रित हुए हैं और ये बड़ी भारी बात है कि हर बार जब भी शिवरात्रि होती है मैं तो दिल्ली में रहती हूँ। हमारे सारे शरीर, मन, बुद्धि, अहंकार, सारे चीजों में सबसे महत्वपूर्ण चीज है आत्मा और बाकी सब कुण्डलिनी इसलिए नीचे गिरती है क्योंकि हमारे अन्दर बहुत से पुराने विचार, […]

Raksha Bandhan and Maryadas (England)

(परम पूज्य श्रीमाताजी निर्मला देवी, रक्षाबंधन, मर्यादा, लंदन, 1984)

यू.के. के इस सुंदर दौरे के बाद मुझे भरोसा हो चला है कि सहजयोग ने अब अपनी जड़ें पकड़ ली हैं और उनमें से कुछ पौधों को उगते हुये भी आप देख सकते हैं। यह हैरान करने वाली बात है कि जैसे ही मैंने घोषणा की कि यह मेरा यू.के. का यह आखिरी दौरा होगा तो सब कुछ क्रियान्वित होने लगा है। जहां-जहां भी हम गये हमारा दौरा सफल और अच्छा रहा खासकर कुछ स्थानों पर तो यह अत्यंत चमत्कारपूर्ण भी था। आपने उस महिला के बारे में तो अवश्य ही सुना होगा जो अपने घर से बाहर निकलती ही नहीं थी …….. […]

New Year Puja, Who Is A Sahaja Yogi? New Delhi (भारत)

1984-01-03, New Year Puja: Who Is A Sahaja Yogi?, Delhi

Nav Varsh Puja – S. Sahajyogi Ki Pahechan 3rd January 1984 Date : Place Delhi :

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Nirmala Yog लेकिन माँ की व्यवस्था और है कि पहले चैतन्य को पा लो. जान लो कि परमात्मा है, उस पर विश्वास करो जो अन्धविश्वास नहीं है, सत्य के रूप हर साल नया साल आता है और पुराना साल खत्म हो जाता है। सहजयोगियों के लिए हर क्षण एक नया साल है, […]

Mental Projection, Guru Puja Evening Talk Nirmala Palace – Nightingale Lane Ashram, London (England)

[Translation English to Hindi]

                 

मानसिक कल्पना

सहज योगियों से बातचीत  

निर्मला पैलेस आश्रम, नाईट एंगल लेन

1982-04-07

नोट [कृपया ध्यान दें श्री माताजी उस समय उपस्थित भारतीय नर्तकियों के लिए अनुवाद करती हैं और मैंने इसे कोष्ठक में (भारतीय भाषा में बोलती है) के रूप में चिह्नित किया है।]

श्री माताजी: क्या आप कल सुबह आ सकते हैं, उन्होंने कहा कि शायद यह कल के बाद से बेहतर होगा, ….कुछ न कुछ तर्क संगत, मैंने कहा। ????कृपया बैठ जाइये। अभी वीडियो रिकार्डिंग क्यों कर रहे है आप इसे क्यों रखना चाहते हैं? […]

Shri Krishna Puja, There is a war going on (England)

Shri Krishna’s Birthday Puja, Bala’s home, Tamworth, Birmingham (UK), 15 August 1981

वे इस तरह हमला कर रहे हैं की वे सूचनाओ को आप के मस्त्रिष्क में डाल रहे है . अब, हमें यह जानना होगा कि शैतानी बलों और दिव्य शक्तियों के बीच एक युद्ध जारी है अब आप ऐसे लोग हैं, जिन्होंने दिव्य होना चुना है।

लेकिन, भले ही आपने इसे चुना है, और इश्वर ने तुम्हें स्वीकार कर लिया है, और आपको अपनी शक्तियां भी दी हैं, […]

Guru Purnima London (England)

आपको समझना होगा कि स्वयं से इस भौतिकता के लबादे को हटाने के लिये आपको अपने ऊपर कार्य करना होगा। और एक बार जब आपने इसे नियिंत्रत कर लिया तो कम से कम ….. अब आप कहीं भी सो सकते हैं अगर नहीं तो कुछ समय तक जमीन पर सोने का प्रयास करें। सन-टैनिंग के लिये आप क्या नहीं करते हैं … लोग इन बेवकूफियों के लिये स्वयं को रोक ही नहीं सकते हैं क्योंकि इन विचारों को आपके अंदर डाला गया है। इन विचारों को डालने वालों ने आपको शोषण किया है … […]

Diwali Puja Hampstead (England)

(श्री दीवाली पूजा, हॅम्पस्टेड (लंदन), 9 नवम्बर 1980)
आपको मालूम होना चाहिये कि आप एक ही परिवार के सदस्य हैं। किसी को भी युद्ध नहीं करना है, किसी को भी एक दूसरे से महान नहीं बनना है, किसी को भी दूसरे में सुधार लाने की आवश्यकता नहीं है, किसी को भी यह नहीं कहना है कि मैं कुछ अनोखा ही व्यक्ति हूं। आप सबको एक साथ मिलकर कार्य करना है और साथ में कार्य करते हुये प्रेम व मित्रता से समस्याओं का समाधान ढूंढ निकालना है। कोई भी जो स्वयं को
अन्य लोगों से अलग कर कुछ और ही बनने का प्रयास करता है वह बाहर (सहज से) चला जाता है और सहज के लिये वह व्यक्ति एकदम किसी काम का नहीं है …. […]

How To Know Where You Are Chelsham Road Ashram, London (England)

                  सलाह, कैसे पता करें कि आप कहां हैं     

 चेल्सीम रोड आश्रम, क्लैफम, लंदन (यूके) , 7 सितंबर 1980

… तस्वीरों के सम्मुख चैतन्य, जो की, बहुत महत्वपूर्ण है। जहां तक परमात्मा का संबंध है, कैसे जाने की आपकी स्थिति कहाँ है। यह मुख्य बात है, क्या ऐसा नहीं है? हम इसी के लिए यहां हैं: ईश्वर से एकाकारिता के लिए, उसकी शक्ति के साथ एकाकार  होने के लिए, उसका उपकरण बनने के लिए। , हमें इसे समझने की कोशिश करनी चाहिए की हमारे कनेक्शन कैसे ढीले हो जाते हैं, […]

Guru Puja, The Statutes of the Lord (England)

लेकिन आज मैं आपको गुरू बनने का अधिकार देती हूं ताकि आपके अपने चरित्र और व्यक्तित्व से ….. जिस प्रकार से अपने जीवन में आप सहजयोग करते हैं और इसके प्रकाश को फैलाते हैं उससे लोग आपका अनुसरण करने लगेंगे और आप उनके हृदय में परमात्मा का विधान स्थापित कर सकेंगे और उन्हें मुक्ति दे पायेंगे और उन्हें मोक्ष प्रदान कर पायेंगे क्योंकि आपको भी मोक्ष प्राप्त हो चुका है। आप परमात्मा के चैनल हैं…. बिना इन चैनलों के यह सर्वव्याप्त शक्ति कार्यान्वित नहीं हो सकती है … […]

Why Are We Here? Hampstead Friends Meeting House, Hampstead (England)

[Hindi translation from English]

हम यहाँ क्यों है? 

 हैम्पस्टेड, लंदन (यूके), 6 जून 1980

आप की बहुत मेहरबानी है की आप ने मुझे हेम्पस्टेड में आमंत्रित किया है, जो मैं पहले भी कई बार आ चुकी हूँ। और मैंने हमेशा महसूस किया कि इस खूबसूरत क्षेत्र में रहने वाले लोगों के ईश्वर के बारे में सुंदर विचार होना चाहिए, क्योंकि आप प्रकृति में, प्रकृति की सुंदरता में ईश्वर के प्रभाव को बेहतर देखते हैं। और फिर आप सोचने लगते हैं कि किस प्रकार ईश्वर ने हमें आनंद देने के लिए इस खूबसूरत दुनिया को  […]

Attention London (England)

चित्त

 डॉलिस हिल, लंदन (इंग्लैंड)

 26 मई 1980 

आज मैं आपसे चित्त के बारे में बात करने जा रही हूं: चित्त क्या है, चित्त की गतिविधि क्या है और हमारे चित्त के उत्थान की क्या विधि और तरीके हैं। इसे व्यापक तरीकों से रखें। ठीक है? लेकिन जब मैं ये सारी बातें कह रही हूं तो आपको पता होना चाहिए कि मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से बात कर रही हूं – यह दूसरों के बारे में नहीं है। व्यक्ति हमेशा सबसे पहले ऐसा करता है, […]

The Real Becoming, Seminar Old Arlesford Place, Arlesford (England)

“वास्तविक बन जाना”

 ओल्ड आर्लेसफोर्ड , नियर विनचेस्टर, हैम्पशायर, इंग्लैंड 

18 मई, 1980

… इन सभी मिश्रणों के साथ, अब इसके बारे में सोचो। यह केवल इसलिए है क्योंकि मैंने तुम्हें जन्म दिया है। इससे पहले कोई नहीं कर सका था, मैं आपको बताती हूं। आप दूसरों का इलाज कर सकते हैं; आप सहज योग पर भाषण दे सकते हैं। आप अपनी समस्याओं को जान सकते हैं; आप अपने माता-पिता का इलाज कर सकते हैं। आप अपने खुद के परिवेश को ठीक कर सकते हैं। आप खुद को और दूसरों को साफ कर सकते हैं। केवल आत्मसाक्षात्कार के साथ यह शुरू होता है। यह सब एक साथ एक गठरी में है। यह पहली जागरूकता से जब यह केवल एक इच्छा मात्र थी से क्या छलांग है और यहां आपने सब कुछ शुरू किया। लेकिन ये सभी चीजें जो शुरुआत में जब आप इच्छुक थे, […]

Preparation for Becoming, Evening Seminar Old Arlesford Place, Arlesford (England)

                   बनने की तैयारी 

ओल्ड आर्ल्सफोर्ड (इंग्लैंड) में शाम का सेमिनार,

 17 मई 1980।

बनने के लिए खुद का सामना करें। तब कुछ बनने की तैयारी की जाती है और समग्र रूप से, जब आप जानते हैं कि यह आपका अहंकार और प्रति-अहंकार है जो आप पर बोझ डाल रहा है, तो आपको उन्हें वाइब्रेशन की जागरूकता से जाँच लेना होगा।

अब हमें दो तरह से चित्त देना होगा। पहले एक निरंतर चित्त है जो एक सहज योगी की दिनचर्या है, […]

What is a Sahaja Yogi, Morning Seminar Old Arlesford Place, Arlesford (England)

                                     एक सहज योगी क्या है 

 सेमिनार की सुबह, ओल्ड आर्ल्सफ़ोर्ड (इंग्लैंड)

17 मई 1980।

हमें पता होना चाहिए कि सहज योग एक जीवंत प्रक्रिया है। यह उसी प्रकार की प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक बीज अंकुरित हो एक पेड़ में परिवर्तित होता है। यह एक जीवंत प्रक्रिया है। तो यह ईश्वर का काम है मेरा मतलब है कि उन्हें यह करना होता है । यह तुम्हारा काम नहीं है। 

बीज अंकुरित करना उनका काम है।

लेकिन समस्या इसलिए आती है, […]

Sahasrara Puja, Sincerity Is The Key Of Your Success London (England)

सहस्त्रार पर आपको सामूहिक आत्मा द्वारा आशीर्वादित किया जा रहा है।
(सहस्त्रार पूजा, डौलिस हिल)
हम कह सकते हैं कि 5 मई 1970 को पहली बार परमात्मा की सामूहिक आत्मा का द्वार खोला गया था। इससे पहले परमात्मा के आशीर्वाद लोगों को व्यक्तिगत रूप से ही प्राप्त होते थे …. और वे अपना आत्मसाक्षात्कार भी व्यक्तिगत रूप से ही प्राप्त करते थे एक के बाद एक। व्यक्तिगत आत्मसाक्षात्कार की विधि सामूहिक साक्षात्कार से एकदम अलग थी। उन्हें (व्यक्तिगत आत्मसाक्षात्कार) पहले अपना धर्म को स्थापित करना पड़ता था ……. […]

The Value of Marriage Dollis Hill Ashram, London (England)

                                            “विवाह का आदर्श”

डॉलिस हिल आश्रम, लंदन (यूके), 8 मार्च 1980

..तो सहज योग सबसे पहले आपका अंकुरण शुरू करता है, फिर विकास करता है। उस वृद्धि में, आपको एक व्यापक, अधिक व्यापक व्यक्तित्व बनना होगा। शादी के साथ आप एक और भी बेहतर इंसान बनते हैं, और आप एक बेहतर व्यक्तित्व का विकास करते हैं।

अब, सहज योगियों के लिए शादी क्यों जरूरी है?

सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात, शादी करना सबसे सामान्य बात है। भगवान ने आपको  […]

Seminar for the new Sahaja yogis Day 1 (भारत)

नए सहज योगियों के लिए सेमिनार 

बोरडी शिबिर, महाराष्ट्र, भारत,

 28 जनवरी 1980,

मुझे बताया गया कि मुझे अंग्रेजी भाषा में सभा को संबोधित करना चाहिए। मुझे पता है कि अगर मैं आपको अंग्रेजी में संबोधित करती हूं तो यह कुछ लोगों के लिए ठीक होगा।मुझे लगता है कि हमारे लिए यह सोचने का समय है कि भगवान ने इस खूबसूरत प्राणी, इन्सान को क्यों बनाया है। उन्होंने अमीबा अवस्था से हमें इसे विकसित करने के लिए इतनी परेशानी क्यों उठाई? […]

Transformation, Morning Advice at Bordi seminar (भारत)

                    रूपांतरण 

 बोर्डी (भारत) सेमिनार में सुबह की सलाह 

 27 जनवरी, 1980

जब सभी यहां आये तब हर कोई बहुत अच्छा महसूस कर रहा था, खुश था और उन्हें लगा, उनके चैतन्य बिल्कुल ठीक थे। लेकिन ऐसा नहीं था।

इसलिए सतर्क रहें, आप देखें – एक-दूसरे से इसे परखने को कहें कि कृपया आप जाँच करें, इसके बारे में विनम्र रहें।

आपको परखते रहना चाहिए। जब तक आप खुद की जांच नहीं करते, तब तक आप कैसे जानेंगे कि आप क्या चीज पकड़ रहे हैं? […]

Guru Puja: The Declaration London (England)

(परम पूज्य श्रीमाताजी निर्मला देवी, श्रीमाताजी की उद्घोषणा, डॉलिस हिल आश्रम लंदन, इंग्लैंड, 2 दिसम्बर 1979।)
आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि बहुत समय पहले … जब ईसा नन्हे बालक थे तो उन्होंने उस समय के अनेकों लोगों को बताया कि वह एक अवतरण हैं … जो मानवता का रक्षा हेतु आये हैं। उस समय के लोगों का विश्वास था कि उनकी रक्षा हेतु कोई आने वाला है। बहुत समय पहले एक रविवार को उन्होंने उद्घोषणा की कि वही मानव मात्र की रक्षा के लिये आये हैं। इसी कारण आज … […]

The Meaning of Yoga London (England)

The Meaning Of Yoga Date : 11th November 1979 Place : London Туре Public Program Speech

[Translation from English to Hindi, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

सहजयोग आपके अन्दर जीवाणु की तरह आड़ोलन एक के बाद एक क्रिया आदि एक से विद्यमान है । यह आपके अन्दर जन्मी हुई दूसरी तरह के आड़ोलन के माध्यम से होता चीज है। व्यक्ति के अन्दर ये अन्तर्जात होती है जो अवययों में मौजूद है जैसे पेट स्वतः स्वतः इसका अंकुरण होता है अभिव्यक्ति होती है। बिल्कुल वैसे ही जैसे सब आपके मस्तिष्क से आता है । अनुकंपी आप छोटे से बीज को अंकुरित होकर वृक्ष नाडीतन्त्र और पराअनुकम्पी नाड़ी तन्त्र बनते (Sympathetic, […]

Navaratri Celebrations मुंबई (भारत)

(नवरात्रि उत्सव, कुंडलिनी और कल्कि शक्ति , मुंबई,महाराष्ट्र, भारत, 28 सितंबर 1978)।

आज हम कुंडलिनी और कल्कि के संबंध पर बात करेंगे। वास्तव में कल्कि शब्द निष्कलंक शब्द का अपभ्रंश है। निष्कलंक का अर्थ वही है जो मेरे नाम का निर्मला का अर्थ है … निष्कलंक अर्थात बिना दाग धब्बे वाला… बिना किसी दाग धब्बे वाला व्यक्ति।कल्कि …. इस अवतरण का वर्णन कई पुराणों में मिलता है …. कि कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर इस धरती पर, […]

1st Day of Navaratri Celebrations, Shri Kundalini, Shri Ganesha मुंबई (भारत)

Kundalini Ani Shri Ganesha 22nd September 1979 Date : Place Mumbai Seminar & Meeting Type

[Hindi translation from Marathi talk]

आज के इस के प्रथम दिन शुभ घड़ी में, ऐसे इस सुन्दर वातावरण में इतना सुन्दर विषय, सभी योगायोग मिले हुए दिखते हैं। आज तक मुझे किसी ने पूजा की बात नहीं कही थी, परन्तु वह कितनी महत्त्वपूर्ण है! विशेषतः इस भारत भूमि में,महाराष्ट्र की पूण्य भूमि में, जहाँ अष्टविनायकों की रचना सृष्टि देवी ने (प्रकृति ने) की है । वहाँ श्री गणेश का क्या महत्त्व है और अष्टविनायक का महत्त्व क्यों है ? […]

Public Program, Chitta Ke Gaharai (भारत)

Public program (Hindi). Bordi Shibir, Maharashtra, India. 24 March 1979.

[Hindi Transcript]

आप लोग सब सहजयोग में आये हैं। कुछ लोग पहले से आये हैं, बहुत सालों से और कोई लोग नये हैं। धीरे- धीरे सहजयोग में संख्या बढ़ने वाली है इसमें कोई शक नहीं है और सत्य जो है वो धीरे -धीरे ही प्रस्थापित होता है। सत्य की पकड़ धीरे-धीरे होती है। आपके यहाँ ऐसे लोग हैं जो आठ-आठ, नौ-नौ महिनों तक सहजयोग में आते रहे और उसके बाद पार हुए। सत्य को पाने के लिये हमारे अन्दर पहले तो गहराई होनी चाहिए। पर सबसे बड़ी चीज़ है हमारे अन्दर सफाई होनी चाहिए। अब अनेक गुरुओं के बीच में जाकर के हमारा चित्त जो है वो बुरी तरह से विक्षिप्त हो जाता है । दूसरा, […]

Vishuddhi Chakra New Delhi (भारत)

Vishuddhi Chakra (Hindi). Delhi (India), 16 March 1979.

विश्व के लोग हमारी ओर आँखें किये बैठे हैं, कि भारतवर्ष से ही उनका उद्धार होने वाला है, तब तक नहीं पा सकेंगे। और हमारी ये हालत है कि एक साधारण सा जो व्यवहार होता है, वो भी नहीं। कल मैंने आप से कहा था कि मैं आपको हृदय में बसे ह्ये शिवस्वरूप सच्चिदानंद आत्मा के बारे में बताऊंगी आज। लेकिन सोचती हूँ कि आखिर में ही बताऊंगी जब सारे ही चक्र बता चुकुंगी। वो अच्छा रहेगा । हालांकि उनको पहले से आखिर तक अपनी दृष्टि वहीं रखनी चाहिये । बाकी जो भी चक्र हैं, […]

Chakro Per Upasthit Devata मुंबई (भारत)

Public program, “Deities on all chakras” (Hindi). Bharat Vidya Bhavan, Mumbai, Maharashtra, India. 17 January 1979.

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK (एक आदमी से बातचीत) ‘आ रहे हैं अब? नहीं आ रहे है न? सिगरेट पीते थे आप?’ ‘कभी नहीं! ‘कभी नहीं पीते थे ? या मंत्र कोई बोले होंगे?’ ‘पहले बोलता था अब विशेष नहीं। ‘वहीं तो है न ! आप देखिये, आप मंत्र बोलते थे, आपका विशुद्धि चक्र पकड़ा है। विशुद्धि चक्र से आपको अभी मैं दिखाऊँगी, […]

Shri Ganesha & Mooladhara Chakra मुंबई (भारत)

Shri Ganesha Aur Mooladhar Chakra, Public program, “Shri Ganesha, Mooladhara Chakra” (Hindi). Bharat Vidya Bhavan, Mumbai, Maharashtra, India. 16 January 1979.

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK भाषण सुनने से पहले ही मैं आपको बताती हूँ, कि इस तरह से हाथ रखिये और आराम से बैठिये। और चित्त हमारी ओर रखिये। इधर-उधर नहीं, कि जरा कोई आ गया, कोई गया। इधर-उधर चित्त नहीं डालना। क्योंकि दूसरों को तो हम हर समय देखते ही रहते है, कभी अपने को भी देखने का समय होना चाहिये। कल मैंने आपसे इन चक्रों के बारे में बताया था। आज मैं आपको सब से नीचे जो चक्र है जिसको गणेश चक्र कहते हैं, […]

What is the Kundalini and how it awakens मुंबई (भारत)

Talk in Hindi at the Bharat Vidya Bhavan, Mumbai, Maharashtra, India. 9 January 1979.

[Hindi transcript until 00:49:05]

सबको फिर से मिल के बड़ी ख़ुशी होती हैं | मनुष्य पढता है लोगो से सुनता है बड़े बड़े पंडित आ करके लोगो को भाषण देते हैं | इस संसार में परमात्मा का राज्य हैं परमात्मा न सृष्टि है | ऐसे हाथ करिये बैठे राहिएए जब तक में भाषण देती हूँ उसी के साथ ही कुण्डलिनी का जागरण हो जाता है | आज में आपसे ये बताने वाली हूँ की कुण्डलिनी क्या चीज़ है और उसका जागरण कैसे होता है | कल मेने आपसे बताया था मानव देह हम आज देख रहे हैं इस मानव देह को चलाने वाली शक्तियां हमारे अंदर प्रवाहित हैं | उन गुप्त प्रवाहों को हम नहीं जानते हैं | जिनके कारन आज हमारी सारी शक्तियां ये शरीर मन बुद्धि अहंकार सारी चीज़ो का व्यापर करती हैं उनके बारे में जो कुछ भी हमने साइंस से जाना है वो इतना ही जाना है की ऐसी कोई स्वयंचालित शक्तियां है जिसको की ऑटोनॉमस सिस्टम कहते हैं जो इस कार्य को करती हैं और जिसके बारे में हम बोहत ज्यादा नहीं बता सकते | की वो शक्ति कैसी है और किस तरह से वो अपने को चलाती है | किसी भी चीज़ को जानने का तरीका एक तो ये होता है की अँधेरे में उस चीज़ को खोजिये जैसे आप इस कमरे में आये है और यहाँ अंधेरा है इसको धीरे धीरे टटोलिये जानिये की ये क्या है कोई दरवाजे से आये कहने लगे की ये की ये एक खम्बा है और कोई उस दरवाजे से आये और कहते हैं की वो एक पर्दा है | जो उस तरफ से आये वो कहते हैं की ये किताबे हैं अँधेरे की खोज जो होती है वो अपूर्ण होती है इतना ही नहीं अष्पष्ट होती है और वो अधूरी होने वजह से बोहत गलत भी साबित हो जाती है | समझ लीजिये की इस कमरे को किसी ने खम्भा मान लिए उसने इस कमरे के बारे में कुछ भी नहीं जाना | इस तरह से साइंस में लोग खोजते है ऑब्जेक्टिविटी उसे कहते हैं , […]

Seminar Day 1, Bija Mantras, Shri Lalita, Shri Chakra Easthampstead Park Conference Centre, Wokingham (England)

सेमिनार प्रथम दिवस ,बीज मंत्र,श्रीललिता,श्रीचक्र

(ईस्ट हैम्पस्टेड पार्क कॉन्फ्रेंस सेंटर,वर्किंगघम, ब्रैकनैल, इंग्लैंड)

14 अक्टूबर 1979

जब कुंडलिनी जागृत होती है,वह ध्वनि उत्पन्न करती है।और जो ध्वनि विभिन्न चक्रों में सुनाई देती है निम्न रूप में उच्चारित की जा सकती है-ये उच्चारण देवनागरी की ध्वन्यात्मक भाषा में प्रयुक्त किये गए हैं,जिसका अर्थ होता है ‘देवों के द्वारा बोली गई भाषा‘।

मूलाधार पर जहाँ चार पंखुड़ियाँ हैं,ध्वनियाँ हैं ÷ व् श् ष् स्

जिसमें से अंतिम ‘ष’ और ‘स्’ […]

Atma Ki Anubhuti (भारत)

Atma Ki Anubhuti, 28th December 1977

[Hindi Transcription]

 ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK आपसे पिछली मर्तबा मैंने बताया था, कि आत्मा क्या चीज़ है, वो किस प्रकार सच्चिदानंद होती है, और किस प्रकार आत्मा की अनुभूति के बाद ही मनुष्य इन तीनों चीज़ों को प्राप्त होता है। आत्मसाक्षात्कार के बगैर आप सत्य को नहीं जान सकते। आप आनन्द को नहीं पा सकते। आत्मा की अनुभूति होना बहुत जरूरी है। अब आप आत्मा से बातचीत कर सकते हैं। आत्मा से पूछ सकते हैं। आप लोग अभी बैठे हुए हैं, […]

The Creation New Delhi (भारत)

“The Creation”, New Delhi (India), 20 February 1977

[Hindi translation from English]

आज हमने ‘सृजन’ विषय पर बात करने का निर्णय किया है, परन्तु हमारे आयोजक मेरे लिए श्यामपट और चाॉँक की व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। में नहीं जानती, बिना रेखाचित्र बनाए मैं इसकी व्याख्या करने का प्रयत्न करूंगी।

यह अत्यन्त कठिन विषय हे, परन्तु आपके लिए मैं इसे सुगम (बोधगम्य) बनाने का प्रयत्न करूंगी और ये अनुरोध भी करूंगी कि ‘सृजन’ जैसे दुर्गण विषय को समझने के लिए आप अपना पूरा चित्‌ इस पर बनाए रखें। आज एक अन्य आशीर्वाद भी है।

आज का महानतम आशिष ये है कि आपमें से बहुत से लोग चैतन्य लहरियों को अनुभव कर सकते हैं। केवल इतना ही नहीं, […]

Nirvicharita मुंबई (भारत)

Nirvicharita “VIC Date 6th April 1976 : Place Mumbai Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

तुम लोगों को बुरा लगेगा इसलिये मराठी में बोलने दो। मैं कह रही हूँ कि तुम्हारे सामने जो भी प्रश्न हैं, उन प्रश्नों को तुम अचेतन में छोड़ो, वो मेरे पैर में बह रहा है। माने ये कि कोई भी प्रश्न , अब तुमको अपनी लड़की का | प्रश्न है समझ लो। उसमें खोपड़ी मिलाने से कुछ नहीं होने वाला। जो भी प्रश्न है वो यहाँ छोड़ दो। उसका उत्तर मिल जायेगा। अब तुम अगर सोचते हो कि इस चीज़ से लाभ होगा , […]

प्रजापति का यज्ञ मुंबई (भारत)

प्रजापति का यज्ञ 02/03/1976

इस संसार में जो सबसे बढ़कर के माया है वो है पढ़त मूर्खों की। पढ़तमूर्ख उन्हें कहते हैं जिनके लिए कबीरदासजी ने कहा है,’पढ़ी पढ़ी पंडित मूरख भए’ और इसलिए मैं किताब लिखने में भी बहुत डरती थी। और जब किताब लिखने का सोचा भी है, तो भी ऐसे महामूर्खों के हाथ में वो नहीं पड़नी चाहिए। वो लोग उसी प्रकार हैं जिस प्रकार कोई इंसान किसी भी देश में नहीं जाता है और झूठी बातें सारी दुनिया में बताता है कि मैं वहाँ गया था और वहाँ पर ये देखा, […]

महाशिवरात्री पूजा-उत्पत्ति, आदिशक्ति और शिव मुंबई (भारत)

1976-02-29 Mahashivaratri Puja: Utpatti – Adi Shakti aur Shiva ka Swaroop, Mumbai, महाशिवरात्री पूजा-उत्पत्ति, आदिशक्ति और शिव मुंबई २९/२/७६

आप से पहले मैने बताया उत्पत्ति के बारे में क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन जब शिवजी की बात करनी है तो उसका प्रारंभ उत्पत्ति से ही होता है इसलिए वह आदि है । पहले परमेश्वर का जब पहला स्वरूप प्रगटीत होता है, याने मॅनिफेस्ट होता है जब की वह ब्रह्म से प्रकाशित होते है, उस वक्त उन्हे सदाशिव कहा जाता है । इसलिए शिवजी जो है, […]

Public Program Balmohan Vidyamandir, मुंबई (भारत)

Public Program

[Hindi Transcript]

Parmatma Ka Prem Date : 26th December 1975 Place Mumbai Type Seminar & Meeting Speech Language Hindi CONTENTS | | Transcript Hindi 02 – 09 English Marathi || Translation English Hindi Marathi

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK सत्य को खोजने वाले आप सब को मेरा वंदन है। के उपरान्त जो कुछ भी कहना है, आज आप से आगे की बात मैं करने वाली हूँ। विषय था, ‘एक्सपिरिअन्सेस ऑफ डिवाईन लव’। परमात्मा के कल आप बड़ी मात्रा में भारतीय विद्या भवन में उपस्थित हये थे और उसी क्षण प्रेम के अनुभव। इस आज के साइन्स के युग में, […]

Public Program मुंबई (भारत)

Updesh – Bhartiya Vidya Bhavan- 1, 17th March 1975 Date : Place Mumbai Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

( … अस्पष्ट) उन सब के बारे में काफ़ी विशद रूप से मैने आपको बताया है। और जिस चैतन्य स्वरूप की बात हर एक धर्म में, हर समय की गयी है उससे भी आप में से काफ़ी लोग भली भाँति परिचित हैं। उस पर भी जब मैं कहती हूँ कि आप गृहस्थी में रहते हो और आप हठयोग की ओर न जायें, […]

Dhyan Aur Prathna, Second Talk मुंबई (भारत)

Dhyan Aur Prathna, Second Talk

सहजयोग में सबसे आवश्यक बात ये है, कि इसमें अग्रसर होने के लिये, बढ़ने के लिये आपको ध्यान करना पड़ेगा| ध्यान बहुत ज़रूरी है|  आप और चाहे कुछ भी न करें लेकिन अगर आप ध्यान में स्थित रहें, तो सहजयोग में प्रगति हो सकती है|

जैसे कि मैंने आपसे कहा था कि एक ये नया रास्ता है| नया आयाम है, dimension है; नई चीज़ है जिसमें आप कूद पड़े है| आपके अचेतन मन में, […]

Talk to Sahaja Yogis, Kshma Ki Shakti Ka Mahatav, Power of Forgiveness मुंबई (भारत)

Kshama Ki Shakti Ka Mahatva IV 20th January 1975 Date : Place Mumbai Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

कलयुग में क्षमा के सिवाए और कोई भी राक्षस है। आपके चित्त में घुसे हुए हैं । बात समझ बड़ा साधन नहीं है। और जितनी क्षमा की शक्ति में आई? अगर कोई साधु ही सिर्फ हो तो ठीक है। होगी उतने ही आप शक्ति शाली होंगे । सबको क्षमा परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्क ताम्। साधु कर दें। क्षमा वही कर सकता है जो बड़ा होता है। के साथ एक दुष्ट बैठा हुआ है तो बहुत ही प्रेम से छोटा आदमी क्या क्षमा करेगा? […]

Public Program (भारत)

Sarvajanik Karyakram Date 22nd December 1973 : Place Nagpur Public Program Type : Speech Language Hindi

बहुत पहले से ही ऐसे कुछ, सहज में ही कहना चाहिये, ऐसे कुछ समय आये, कि मुझे भाषण देने पड़े। बहुत बड़े बड़े जमावों के सामने, कहना चाहिये हजारो लोग यहाँ थे। १९३० की बात है, जब कि गांधी जी ने उपोषण किया था। मेरे पिताजी भी बड़े अच्छे वक्ता थे। आप सब उनके बारे में जानते होंगे। लेकिन उनको जरूरी काम से घर जाना पड़ा। सब लोगों ने कहा, […]

Public Program New Delhi (भारत)

Public Program
जानवर में, जो प्रश्न होते ही नही है, जो मनुष्य में होते है। जानवर के लिए तो कोई प्रश्न ही नही होता। वो सिर्फ जिता है। जिस शक्ति के सहारे वो जिता है। उसकी और भी, उसका कोई प्रश्न नही होता है। कि वो कौनसी शक्ति है, कि जिसके सहारे मै जिता हूँ। उसकी वजह ऐसी है, की ये चैतन्य शक्ति, क्यौकी सारी सृष्टी की रचना करती है, उसकी चालना करती है। उसकी व्यवस्था करती है। वो प्राणीमात्र, […]

Atma Sakshatkar ka Arth (Understand your importance) मुंबई (भारत)

1973-09-03 Atma Sakshatkar ka Arth 1973 Mumbai

इसी तरह से जब आगे हो जाएंगे तो इसमें ना तो कोई शैतान रह जाएगा ना कोई बुरा रह जाएगा | जो आपके सामने आएगा वो आपके प्यार में घुलना ही चाहिए और नहीं घुले तो वो भाग जाए ऐसी जिस दिन दशा आएगी उस दिन फिर आपको इस protection (कवच)की जरूरत नहीं रहेगी | और protection के बहुत सारे तरीके आप ही लोगों ने ढूंढ के निकाले हैं । उसमें से कुछ तरीके जो हैं आप चाहें तो ये लोग बता सकते हैं आपको कोई भी उठ करके जो जो ये लोग इस्तेमाल करते हैं या आप इनसे पूछ सकते हैं । जैसे फोटो पे लेना, […]

Shri Krishna Puja: Most Dynamic Power of Love Bharatiya Vidya Bhavan, मुंबई (भारत)

श्री माताजी निर्मला देवी

28 अगस्त, 1973 श्री कृष्ण पूजा 

‘प्रेम की अधिकतम गतिशील शक्ति’

मुंबई, भारत

…ईश्वर द्वारा। उदहारण के लिए, अगर मैं सिर्फ अपने सिर को जानती हूं तो काफी नहीं है। अगर मैं सिर्फ अपनी गर्दन को जानती हूं तो काफी नहीं है। अगर मैं सिर्फ अपने पैरों को जानती हूं तो काफी नहीं है। लेकिन जितना अधिक मैं स्वयं के विषय में जानूंगी उतनी ही मैं गतिशील बन जाऊंगी, उतनी ही मै विस्तृत हो जाऊंगी।

और जो कुछ महान था, […]