Shri Krishna Puja पुणे (भारत)

Hindi Transcript of Shri Krishna Puja. Pune (India), 9 August 2003.

हम लोगों को अब यह सोचना है कि सहजयोग तो बहुत फैल गया और किनारे किनारे पर भी लोग सहजयोग को बहुत मानते हैं। लेकिन जब तक अपने अन्दर सहजयोग वायवास्तीह रूप से प्रकटित नहीं होगा तब तक जैसा लोग सहजयोग को मानते हैं वो मानेगें नहीं। इसलिए ज़रूरत है कि हम कोशिश करें कि अपने अन्दर झांकें। यही कृष्ण का चरित्र है कि हम अपने अन्दर झांके और देखें जाने की कौन सी ऐसी चीजे हैं जो हमें दुविधा में डाल देती हैं। इसका पता लगाना चाहिए। हमें अपने तरफ देखना चाहिए, […]

Navavarsha, Hindi New Year New Delhi (भारत)

1995-10-25 Navavarsha (Hindi New Year) Delhi (Part 1)

आज नया साल का शुभ दिवस है | आप सब को शुभ आशीर्वाद!

हर साल, नया साल आता है और आते ही रहता है | लेकिन नया साल बनाने की जो भावना थी, उसको लोग समझ नहीं पाते, सिवाय इसके कि नए साल के दिन नए कपड़े पहनेंगे, ख़ुशी मनाएंगे | कोई ऐसी बात नहीं सोचते हैं कि नया साल आ रहा है, इसमें हमें कौन सी नयी बात करनी है | जैसा ढर्रा चल रहा है, […]

Interview Varikstraat Ashram, Amsterdam (Holland)

मुलाकात – हिंदुस्तान टिव्ही स्टेशन, वरिक्स्त्रात आश्रम, अॅमस्टरडॅम, हॉलंड
३१.७.१९९४
प्रश्नकर्ता :- श्री माताजी, आप छोटे रुपमें अपना परिचय दे सकती है ?
श्री माताजी :- परिचय ऐसे की, शालिवाहन का जो खानदान था, उस खानदान के हम है| हमारे पिता और माता दोनोही गांधीजीके परमभक्त थे| और हमारे पिता अपनी कोंन्स्टीटयुएन्ट असेम्बली और उसके बाद पार्लमेंट वगैरा सबके मेम्बर थे| माता भी हमारी ऑनर्स मैथमेटिक्स में थी| और हमारे एक भाई साहब जो है वो अपने कॅबिनेट के मिनिस्टर भी है| लेकिन असल में अध्यात्मिक रूपसे हमारे माता पिता हमें पहचानते थे, […]

Public Program Galat Guru evam paise ka chakkar (भारत)

Public Program, गलत गुरु एवं पैसे का चक्कर डेहराडून, १२/१२/१९९३

[Hindi Transcript]

सत्य को खोजने वाले ,आप सभी साधकों को हमारा नमस्कार ! संसार में हम सुख खोजते हैं, आनन्द खोजते हैं और ये नहीं जानते कि आनन्द का स्रोत कहाँ है। सत्य तो ये है कि हम ये शरीर बुद्धि, अहंकार, भावनायें और संस्कार ये उपाधियाँ नहीं है। हम शुद्ध स्वरूप आत्मा हैं। ये एक सत्य हुआ, और दूसरा सत्य ये है, जैसे कि आप ये सारे यहाँ के सुन्दर फूलों की सजावट देख रहे हैं, […]

Shri Ganesha Puja New Delhi (भारत)

Shri Ganesha Puja. Delhi (India), 5 December 1993.

आज हम श्री गणेश पूजा करने है | इस यात्रा की शुरूआत हो रही है और इस मौके पर जरूरी है कि हम गणेश पूजा करें खासकर दिल्ली में गणेश पूजा की बहुत ज्यादा जरूरत है। हालांकि सभी लोग गणेश के बारे में बहुत कम जानते हैं। और क्योंकि महाराष्ट्र में अष्ट विनायक हैं और महा गणपति देव तो गणपति पूले में हैं। इसलिए लोग गणेश जी को बहुत ज्यादा मानते हैं। लेकिन उनकी वास्तविकता क्या है? […]

Dyan Ki Avashakta, On meditation New Delhi (भारत)

Dhyan Ki Avashayakta   ध्यान की आवश्यकता 

Date:27th November 1991 Place: Delhi   

Seminar & Meeting Type: Speech Language Hindi 

[Original transcript, scanned from Hindi Chaitanya Lahari] 

आज आप लोगों से फिर से मुलाकात हो रही है और सहज योग के बारे में हम लोगों को समझ लेना चाहिए।  सहज योग,  ये सारे संसार के भलाई के लिए संसार में उत्तपन्न  हुआ है, कहना चाहिए और उसके आप लोग माध्यम हैं।  आपकी जिम्मेदारियाँ बहुत ज़्यादा हैं क्योंकि आप लोग इसके माध्यम हैं, और कोई नहीं है इसका माध्यम।    कि  हम अगर पेड़ को वाईब्रेशन्स (Vibrations) दें या किसी मन्दिर को वाईब्रेशन्स दें या कहीं और भी वाईब्रेशन्स दें तो वो चलायमान नहीं हो सकते,   वो कार्यान्वित नहीं हो सकता।  आप ही की धारणा से और आप ही के कार्य से यह फैल सकता है।  फिर हमें यह सोचना चाहिए कि सहजयोग में एक ही दोष है। ऐसे तो सहज है, सहज में प्राप्ति हो जाती है। प्राप्ति सहज में होने पर भी उसका संभालना बहुत कठिन है क्योंकि हम कोई हिमालय पर नहीं रह रहे हैं। हम कहीं ऐसी जगह नहीं रह रहे हैं, जहाँ और कोई वातावरण नहीं है, बस सब  आध्यात्मिक वातावरण है। हर तरह के वातावरण में हम रहते हैं। उसी के साथ-साथ हमारी भी उपाधियाँ बहुत सारी हैं जो हमें चिपकी हुई हैं। तो सहजयोग में शुद्ध बनना,  शुद्धता अंदर लाना ये कार्य हमें करना पड़ता है। जैसे कि कोई भी चैनल (Channel)हो वो अगर शुद्ध न हो, तो उसमें से जैसे बिजली का चैनल है उसमें से बिजली नहीं गुज़र सकती। अगर पानी का नल है उसके अंदर कुछ चीज़ भरी हुई है उसमें से पानी नहीं गुज़र सकता। इसी प्रकार ये चैतन्य भी जिस  […]

New Year Puja (भारत)

New Year Puja. Kalwe (India), 1 January 1991.

[Hindi]

आज हम लोग बम्बई के पास ही में ये पूजा करने वाले हैं। बम्बई का नाम, मुम्बई ऐसा था। इसमें तीन शब्द आते हैं मु-अम्बा और ‘आई’। महाराष्ट्रियन भाषा में, मराठी भाषा में, माँ को ‘आई’ ही कहते हैं। वेदों में भी आदिशक्ति को ‘ई’ कहा गया है। सो जो आदिशक्ति का ही प्रतिबिम्ब है, reflection है, वो ही ‘आई’ है। इसलिए मां को आई, ऐसा कहते हैं और बहुत सी जगह माँ भी कहा जाता है। इसलिए पहला शब्द, […]

Arrival and Kundalini Puja (भारत)

Arrival and Kundalini Puja

आप सब लोगों को मिल करके बड़ा आनन्द आया। और मुझे इसकी कल्पना भी नहीं थी कि इतने सहजयोगी हैद्राबाद में हो गये। एक विशेषता हैद्राबाद की है, कि यहाँ सब तरह के लोग आपस में मिल गये हैं। जैसे कि हमारे नागपूर में भी मैंने देखा है कि हिन्दुस्थान के, सब ओर के, लोग नागपूर में बसे हुए हैं। और इसलिये वहाँ पर लोगों में जो संस्कार हैं, उसमें बड़ा खुलापन है और एक दूसरे की ओर देखने की दृष्टि भी बहुत खुली हुई है ।

अब
हम लोगों को जब
सहजयोग
की ओर नये तरीके से मुड़ना है
तो बहुत सी बातें ऐसी जान लेनी
चाहिये, […]

Shri Mahalakshmi Puja New Delhi (भारत)

महालक्ष्मी पूजा दिल्ली, ३/११/१९८६

इस नववर्ष के शुभ अवसर पर दिल्ली में हमारा आना हआ और आप लोगों ने जो आयोजन किया है ये एक बड़ी हुआ महत्त्वपूर्ण घटना होनी चाहिए। नववर्ष जब शुरू होता है तो कोई न कोई नवीन बात, नवीन धारणा, नवीन सूझबूझ मनुष्य के अन्दर जागृत होती है। वो स्वयं होती है। जिसने भी नवीन वर्ष की कल्पना बनाई है वो कोई बड़े भारी द्रष्टा रहे होंगे कि ऐसे अवसर पर प्रतीक रूप में मनुष्य के अन्दर एक नई उमंग, […]

Chaitra Navaratri Puja New Delhi (भारत)

सहजयोगियों के लिये भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का महत्त्व दिल्ली , २५/३/१९८५

आज नवरात्रि के शुभ अवसर पर सबको बधाई ! सहजयोग के प्रति जो उत्कण्ठा और आदर प्रेम आप लोगों में है वो जरूर सराहनीय है, इसमें कोई शंका नहीं। क्योंकि जो हमने उत्तर हिन्दुस्तान की स्थिति देखी है वहाँ पर हमारी परम्परागत जो कुछ धारणाएँ हैं उसी प्रकार शिक्षा प्रणालियाँ हैं, सब कुछ खोई हुई हैं । बहुत कुछ हम लोगों का अतीत मिट चुका है और हम लोग एक उधेड़बुन में लगे हुए हैं कि नवीन वातावरण, […]

Seminar for the new Sahaja yogis Day 3 (भारत)

1980-01-30, Seminar for the new Sahaja yogis Day 3, Bordi 1980 (Hindi)

और जाते समय, आप सब लोगों को, यहाँ पर छोड़ के, इतनी प्यारी तरह से, इन्होंने, अपने हृदय से निकले हुये शब्द कहे, जिससे, चित्त बहुत खिच सा जाता है। आजकल के जमाने में, जब प्यार ही नहीं रह गया, तो प्रेम का खिंचाव और उससे होने वाली, एक आंतंरिक भावना भी संसार से मिट गयी है। मनुष्य हर एक चीज़ का हल बुद्धि के बूते पर करना चाहता है। बुद्धि को इस्तेमाल करने से मनुष्य एकदम शुष्क हो गया। जैसे उसके अन्दर का सारा रस ही खत्म हो गया और जब भी कभी, […]

Evening prior to departure for London, Importance of Meditation पुणे (भारत)

Evening prior to Her departure for London (Marathi & Hindi). Pune, Maharashtra, India. 30 March 1979.

[Hindi Transcript]

 ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK आप लोग सब इस तरह से हाथ कर के बैठिये। इस तरह से हाथ कर के बैठे और आराम से बैठे। इस तरह से बैठिये। सीधे इस तरह से आराम से बैठिये। कोई स्पेशल पोज़ लेने की जरूरत नहीं है। बिल्कुल आराम से बैठिये। सहज आसन में। बिल्कुल सादगी से। जिसमें कि आप पे कोई प्रेशर नहीं। न गर्दन ऊपर करिये, […]

Vishuddhi Chakra New Delhi (भारत)

Vishuddhi Chakra (Hindi). Delhi (India), 16 March 1979.

विश्व के लोग हमारी ओर आँखें किये बैठे हैं, कि भारतवर्ष से ही उनका उद्धार होने वाला है, तब तक नहीं पा सकेंगे। और हमारी ये हालत है कि एक साधारण सा जो व्यवहार होता है, वो भी नहीं। कल मैंने आप से कहा था कि मैं आपको हृदय में बसे ह्ये शिवस्वरूप सच्चिदानंद आत्मा के बारे में बताऊंगी आज। लेकिन सोचती हूँ कि आखिर में ही बताऊंगी जब सारे ही चक्र बता चुकुंगी। वो अच्छा रहेगा । हालांकि उनको पहले से आखिर तक अपनी दृष्टि वहीं रखनी चाहिये । बाकी जो भी चक्र हैं, […]

Public Program, Brahmajana New Delhi (भारत)

Brahama Ka Gyan (Knowledge of Bramh) Date : 1st February 1978 Place Delhi Type Public Program

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK कुछ चक्रों के बारे में बता चुकी हूँ। और इसके आगे के चक्रों के बारे में भी आज बताऊंगी। जैसे कि पहले चक्र का नाम मैंने आपसे बताया मूलाधार चक्र है। जो नीचे स्थित यहाँ पर चार पंखुड़ियाँ वाला होता है। और इस चक्र से क्योंकि ये सूक्ष्म चक्र है और इसका जो जड़ अविभाव है, […]

Atma Ki Anubhuti (भारत)

Atma Ki Anubhuti, 28th December 1977

[Hindi Transcription]

आपसे पिछली मर्तबा मैंने बताया था, कि आत्मा क्या चीज़ है, वो किस प्रकार सच्चिदानंद होती है, और किस प्रकार आत्मा की अनुभूति के बाद ही मनुष्य इन तीनों चीज़ों को प्राप्त होता है। आत्मसाक्षात्कार के बगैर आप सत्य को नहीं जान सकते। आप आनन्द को नहीं पा सकते। आत्मा की अनुभूति होना बहुत जरूरी है। अब आप आत्मा से बातचीत कर सकते हैं। आत्मा से पूछ सकते हैं। आप लोग अभी बैठे ह्ये हैं, […]

Samarpan मुंबई (भारत)

1977-01-08 Samarpan: Kuch bhi nahi karnahai (Surrender)

This is inaction. Can you say how we should do it on your thinking that is not Sahaj. You cannot go back saying that I don’t do anything. You are all the time forward, moving forward saying how?

कैसे आगे जाने का? इसी को स्वीकार कर लेना कि यह घटना चेतना की ओर होती है और चेतना ही इसको घटित करती है। हमें पूरी तरह से प्रयत्न को छोड़ देना है । जब हम अकर्म में उतरते है तब यह चेतना घटित होती है। इसका मतलब है कि आपको कुछ भी नहीं करना है। यह बहुत कठिन काम है मनुष्य के लिए । कुछ नहीं तो विचारही करता रहेगा। लेकिन यह घटना जब घटित होती है तो विचार भी डूब जाते हैं क्योंकि अभी तक जो भी आपने साधना देखी है उसमें आपको कुछ न कुछ करना पड़ता है । यह सब साधना आपको अपने से बाहर ले जाती है । सहजयोग घटना है वह अन्दर ही घटित होती है । जब लोग पुछते है कि समर्पण कैसे करना है? […]

Public Program मुंबई (भारत)

Updesh – Bhartiya Vidya Bhavan- 1, 17th March 1975 Date : Place Mumbai Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

( … अस्पष्ट) उन सब के बारे में काफ़ी विशद रूप से मैने आपको बताया है। और जिस चैतन्य स्वरूप की बात हर एक धर्म में, हर समय की गयी है उससे भी आप में से काफ़ी लोग भली भाँति परिचित हैं। उस पर भी जब मैं कहती हूँ कि आप गृहस्थी में रहते हो और आप हठयोग की ओर न जायें, […]

Dhyan Aur Prathna, Second Talk मुंबई (भारत)

Dhyan Aur Prathna, Second Talk

सहजयोग में सबसे आवश्यक बात ये है, कि इसमें अग्रसर होने के लिये, बढ़ने के लिये आपको ध्यान करना पड़ेगा| ध्यान बहुत ज़रूरी है|  आप और चाहे कुछ भी न करें लेकिन अगर आप ध्यान में स्थित रहें, तो सहजयोग में प्रगति हो सकती है|

जैसे कि मैंने आपसे कहा था कि एक ये नया रास्ता है| नया आयाम है, dimension है; नई चीज़ है जिसमें आप कूद पड़े है| आपके अचेतन मन में, […]

Unidentified Talk (extract on Swadishthana) (भारत)

1979-0101 Unidentified Hindi Talk (extract on Swadishthana)

स्वाधिष्ठान चक्र. इस चक्र का तत्व है कि आप सूजनशाली हो जाते हैं आपकी सूजनता बहुत बढ़ जाती है. ऐसे लोग जिन्होंने कभी एक लाइन भी स्वतंता नहीं लिखी, वह काव्य लिखने लगते हैं. जिन लोगों ने कभी भाषण नहीं दिया वह बड़े भाषण देने लग जाते हैं और जिन लोगों ने कभी पेंटिंग नहीं करी, कुछ कला नहीं देखी वह कलात्मक हो जाते हैं. बहुत सुजन हो जाते हैं. […]