Public Program New Delhi (भारत)

Sahaj Yogi Ek Adarsh Hindustani Date 24th March 2003: Place Delhi: Public Program Type

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

आप लोगों का ये हार्दिक स्वागत देखकर के हृदय अंदर एक नई रोशनी आ गई। कोई समझ भी नहीं आनंद से भर आता है और समझ में नहीं आ रहा है कि सकता, कोई मान भी नहीं सकता कि ऐसा घटित हो क्या कहूँ और क्या न कहूँ! आपसे आज के मौके पर सकता है, […]

Public Program New Delhi (भारत)

Sarvajanik Karyakram – Public Program Date 24th March 2002: Place New Delhi Public Program Type

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

वो सबके अंदर है और स्थित है। उसके क. अंदर रंग, जाति-पाति कोई भेद नहीं। हर इंसान में है। जानवर में भी है। आपको आश्चर्य होगा कि जानवर प्यार बहुत समझते हैं। इंसान से भी ज्यादा जानवर समझते हैं प्यार क्या चीज़ है। तो हम लोग वाकई अगर अपनी उत्क्रान्ति में बढ़ रहे हैं, […]

Public Program Satya Ki Prapti Hi Sabse Badi Prapti Hai New Delhi (भारत)

Satya Ki Prapti Hi Sab Se Badi Prapti Hai Date 25th March 2001: Place Delhi Public Program Type

सत्य को खोजने वाले और जिन्होंने सत्य को खोज भी लिया है , ऐसे सब साधकों को हमारा प्रणाम। तो विश्वास ही नहीं होता था कि दिल्ली में इतने व्यापक रूप में सहजयोग फैला हुआ है कि एक जमाने में दिल्ली में दो-चार भी सहजयोगी मिलेंगे। यहाँ का वातावरण ही ऐसा उस वक्त था कि जब लोग सत्ता के पीछे दौड रहे थे और व्यवसायिक लोग पैसे के पीछे दौड़ रहे थे। तो मैं ये सोचती थी कि ये लोग अपने आत्मा की ओर कब मुडेंगे। पर देखा गया कि सत्ता के पीछे दौड़ने से वह सारी दौड निष्फल हो जाती। थोडे दिन टिकती है। ना जाने कितने लोग सत्ताधारी और कितने उसमें से उतर गये। उसी तरह जो लोग धन प्राप्ति के लिए जीवन बिताते हैं उनका भी हाल वही हो जाता है । क्योंकि कोई सी भी चीज़ जो हमारी वास्तविकता से दूर है उसके तरफ जाने से अन्त में यही सिद्ध होता है कि ये वास्तविकता नहीं है। उसका सुख, […]

Public Program New Delhi (भारत)

Hamari Atma Kya Chij Hai Date 25th March 2000: Place Delhi: Public Program Type

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

की। एंसा मुझें लगता है कि लोग जा हैं को हमें केवल सत्य मिला नहीं। जिस चीज को पीतल में खाना नहीं खाएंगे और लोहे में खाना बुद्धि ठीक समझतो थी उसी को हमने सल्य मान खाएंगे। इस प्रकार की बहुत ही औपचारिक बाते लिया। फिर बहकते-बहकते ये बुद्धि उस दिशा इसमें लिखी हैं। लेकिन जो दृश्य हैं जो सामने चल पडी कि कॉई सा भी काम करों व दिखाई देता है यो बहुत भयानका है और बहुत आज तक हम लोग जानते ही नहीं थे कि आ है। ठीक है, […]

Address to IAS Officers, Stress and Tension Management मुंबई (भारत)

Address to IAS Officers, Mumbai (India), 11 March 2000.
I bow to all the seekers of truth. That’s a very interesting subject that has been given to Me to talk to you people because I have been always worried about the IAS, IPS, and other Government servants, very much worried because I have known the kind of life My husband was leading. And I used to think: if these new people, who have come to the services, […]

Public Program पुणे (भारत)

Public Program, Pune, India 7th March 2000

सत्य को खोजनेवाले सभी साधकों को हमारा प्रणाम !! 

  आज संसार भर में सत्य की खोज हो रही हैI क्योंकि लोग सोचते हैं जिस जीवन में वो उलझे हुए हैं, वो उलझन इसलिए है कारन वो सत्य को नहीं जानते। अपने देश में शायद ये भावना कम हो लेकिन और अनेक देशों मे ये भावना बहुत जबरदस्त है और अपने देश में भी होनी चाहिए I अब हम रोज अख़बार पढ़ते हैं तो यही सुनते हैं की इतने यहाँ लोग गुंडागर्दी कर रहे हैं, […]

Public Program पुणे (भारत)

Velechi Hallk 25th March 1999 Date: Place Pune Public Program Type

[Hindi translation from Marathi talk]

सत्य साधको को हमारा प्रणाम ! इसके पहले भी मैंने कई बार आपको सत्य के बारे में बताया है । सत्य क्या है? सत्य और असत्य इन दोनों में क्या अन्तर है, ये कैसे जान सकते हैं। इसके बारे में मैंने बहुत अच्छी तरह से समझाया है । सबसे पहले इस पुणे में या पुण्यपट्टणम् में हम सत्य क्यों खोज रहे हैं, […]

Public Program New Delhi (भारत)

नैतिकता और देशभक्ति दिल्ली, १८/१२/१९९८

सत्य को शोधने वाले आप सभी साधकों को हमारा नमस्कार! हम सत्य को खोज रहे हैं किंतु कौन सी जगह खोजना चाहिए? कहाँ खोजना चाहिए? कहाँ ये सत्य छुपा हुआ है? ये पहले समझ लेना चाहिए। आप देखते हैं कि परदेस से हजारों लोग हर एक देश से यहाँ आते हैं और उनसे पूछा जाये कि, ‘तुम यहाँ क्यों आयें?’ तो कहते हैं कि, ‘हम यहाँ सत्य खोजने आयें हैं, हमारे देश में तो सत्य नहीं लेकिन भारत वर्ष में तो सत्य है। ये समझ कर के हम यहाँ आयें हैं। और इस सत्य की खोज में हम हर साल हजारों लोग इस देश में आते हैं और हजारों वर्षों से इस देश में आते हैं। आपने सुना ही होगा कि इतिहास में चायना से और भी कई देशों से लोग यहाँ आते थे। और उनको पता नहीं कैसे मालूम था कि इस देश में ही सत्य नेक है, […]

Public Program New Delhi (भारत)

Public Program, Ramlila Maidan, Delhi (India), 4 December 1997.

[Hindi Transcript]

[Talk in Hindi ends and English starts]

I am sorry I have to speak in Hindi language because there are so many people who know only Hindi. But I am sorry for you because I wont be able to meet you again as you are going away on the tour.What I was telling them that whatever maybe taught through religion and whatever they might frighten you, […]

Public Program New Delhi (भारत)

Public Program Date 3rd December 1996: Place Delhi Public Program Type Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

सत्य को खोजने वाले आप सभी साघकों को हमारा नमस्कार। तो इस भारत वर्ष में अनादिकाल से सत्य की खोज होती रही है, ये हमारे शास्त्रों से ज्ञात होता है। अनेक मार्गों से हमने सत्य की खोज की। अपना देश एक विशेष रूप से अध्यात्मिक है उसका कारण ये कि अपने देश में बहुत सी बातें सुलभ हैं। हम जानते नहीं कि हमारा देश कितना समृद्ध है और कितना पावन है, […]

Public Program, Satya Ki Pahchan Chaitanya Se He (भारत)

Satya Ki Pahchan Chaitanya Se Hai 14th December 1995 Date : Lucknow Place : Public Program Type

सब से पहले ये जान लेना चाहिये, कि सत्य है वो अपनी जगह। उसको हम बदल नहीं सकते, उसका हम वर्णन नहीं कर सकते। वो अपनी जगह स्थिर है। हमें ये भी करना है कि हम उस सत्य सृष्टि को प्राप्त करें। परमात्मा ने हमारे अन्दर ही सारी व्यवस्था की हुई है। इस सत्य को जानना अत्यावश्यक है। आज मनुष्य हम देख रहे है कि भ्रमित हैं। इस कलियुग में बहता चला जा रहा है। उसकी समझ में नहीं आता कि पुराने मूल्य क्या हो गये और हम कहाँ से कहाँ पहुँच गये और आगे का हमारा भविष्य क्या होगा। जब वो सोचने लगता है कि हमारे भविष्य का क्या है? […]

Public Program, Sarvajanik Karyakram कोलकाता (भारत)

Public Program

सत्य
को खोजने वाले आप सभी साधकों
को हमारा प्रणाम

इस
कलियुग में मनुष्य जीवन की
अनेक समस्याओं के कारण विचलित
हो गया है,
और
घबरा रहा है। कलियुग में जितने
सत्य को खोजने वाले हैं,
उतने
पहले कभी नहीं थे और यही समय
है जबकि आपको सत्य मिलने वाला
है। लेकिन ये समझ लेना चाहिए
कि हम कौनसे सत्य को खोज रहे
हैं ?
क्या
खोज रहे हैं?
नहीं
तो किसी भी चीज़ के पीछे हम लग
करके ये सोचने लग जाते हैं कि
यही सत्य है। इसका कारण ये है, […]

Public Program Galat Guru evam paise ka chakkar (भारत)

Public Program, गलत गुरु एवं पैसे का चक्कर डेहराडून, १२/१२/१९९३

[Hindi Transcript]

सत्य को खोजने वाले ,आप सभी साधकों को हमारा नमस्कार ! संसार में हम सुख खोजते हैं, आनन्द खोजते हैं और ये नहीं जानते कि आनन्द का स्रोत कहाँ है। सत्य तो ये है कि हम ये शरीर बुद्धि, अहंकार, भावनायें और संस्कार ये उपाधियाँ नहीं है। हम शुद्ध स्वरूप आत्मा हैं। ये एक सत्य हुआ, और दूसरा सत्य ये है, जैसे कि आप ये सारे यहाँ के सुन्दर फूलों की सजावट देख रहे हैं, […]

Public Program New Delhi (भारत)

Sarvajanik Karyakram 22nd March 1993 Date : Place Delhi : Public Program Type

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

सहजयोग का ज्ञान सूक्ष्मज्ञान है और सूक्ष्मज्ञान को प्राप्त करने कास्प पे दोड़ते रहते हैं। आज ये विचार आया। कल ये विचार के लिये, हमें भी सूक्ष्म होना है। ये सूक्ष्मता क्या है कि हमें आत्मा स्वरुप होना चाहिये। आत्मा से ही हम इस सूक्ष्म ज्ञान को समझ चढ़ती है तो क्या होता है कि विचार कुछ लम्बा हो जाता है। सकते हैं। क्योंकि आत्मा का अपना प्रकाश हैं और वो प्रकाश इन दोनों विचारों के बीच में जो स्थान है उसे विलम्ब कहते हैं। जब हमारे ऊपर प्रगटित होता है तो उस आत्मा के प्रकाश में इस विलम्ब स्थिति में आप आ जाते हैं और विलम्ब की स्थिति ही हम इस सूक्ष्मज्ञान को जानते हैं ये हमारे ही अन्दर की आत्मा जो बहुत संकीर्ण होती है वो बढ़ जाती है। ये हो वर्तमान है। है। ये परमात्मा का प्रतिबिम्ब हमारे ही अन्दर आत्मा स्वरुप है और कुण्डलिनी परमात्मा की इच्छा शक्ति आदि शक्ति का से सतर्क है, […]