Inauguration of Vishwa Nirmal (भारत)

Udghatan – Vishwa Nirmala Prem Ashram Date 27th March 2003 : Noida Place : Seminar & Meeting Type

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

मांगने का । मैंने कहा कि भाई तुमको मांगना पड़े तो पता चले। औरतों के प्रति एक अत्यन्त उदासीन प्रवृत्ति जो अपने देश में आ गई है मुझे उससे तो रोना ही आता था। और इसीलिए मैंने यह ठान लिया था कि इनके रहन-सहन का, इनके खान-पान का, इन बेचारी औरतों का कुछ न कुछ इलाज तो करना चाहिए। वो लोग रास्तों में भीख मांगती हैं, […]

Talk, Paane ke baad dena chaahiye swagat samaroh New Delhi (भारत)

Aapko Sahajayoga Badhana Chahiye Date 5th December 1999: Place Delhi: Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

सत्य को पाने वाले सभी सहजयोगियों को जो आप उठा रहे है वो दूसरों को भी देना हमारा प्रणाम । आप लोग इतनी बड़ी संख्या में चाहिए। यहाँ उपस्थित हुए है ये देखकर मेरा वाकई में हिन्दुस्तान तो है ही मेरा देश और यहाँ आने में जो एक विशेष आनन्द होता है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता और जब में आप लोगों के लोगों ने, […]

Guru Nanak Birthday (भारत)

Guru Nanak Puja 23rd November 1999 Date: Noida Place Type Puja Speech Language Hindi

आज गुरु नानक साहब का जनम दिन है और सारे संसार में मनाया जा रहा है वैसे। और आश्चर्य की बात है कि इतना हिन्दुस्तान में मैंने नहीं देखा, फर्स्ट टाइम इतना पेपर में दिया है, सब कुछ किया है । उन्होंने सिर्फ सहज की हैं। धर्म के बारे में कहा, उपवास बात की। सहज पे बोलते रहे। हमेशा कहा, कि सब जो है बाहर के अवडंबर करना, […]

Expression of Subtle Elements New Delhi (भारत)

Panch Tattwa – The Subtle Elements Date 16th December 1998: Place Delhi: Seminar & Meeting Type Hindi & English Speech

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

इतने ठंड में और तकलीफ में आप सब इतना भयंकर दावानल जैसे चारों तरफ से लगा लोग आए। एक माँ के हृदय के लिए ये बहुत हुआ दिखाई देता है। उसके बीच आप सहजयोगी बड़ी चीज़ है। अब और कोई दिन मिल नहीं रहा था, इसी दिन आप लोगों का तकलीफ वर्णन शास्त्रों में है। पर उसमें ये कहा जाता है उठानी पड़ी। और आप लोग इतने प्रेम से, […]

75th Birthday Felicitation Program, Put Attention To Your Spirit (भारत)

75th Birthday Felicitation Program. Delhi (India), 20 March 1998.
I bow to all the seekers of truth.
So much has been said and really my heart is full of gratitude for all of you to come here, all the way, and the way people have described about Sahaja Yoga. To understand Sahaja Yoga, we should know where are we today in this Kali Yuga. What are we facing today? It should really make you feel quite disturbed to see the way things are going on in every country, […]

Birthday Felicitations New Delhi (भारत)

Janam Diwas Puja – Prem Tattwa 21st March 1995 Date : Place Delhi : Type Puja Hindi & English Speech Language

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

अपने ही जन्मदिन में क्या कहा जाए? जो उम्मीद नहीं थी वो घटित हो गया है आप इतने लोग आज सहजयांग में दिल्ली में बैठे हुए है, इससे बढ़कर एक माँ के लिए और कौन सा जन्म दिन हो सकता है? आप लोंगों ने पर उसमें भी खुले आम कोई गलत काम करने की हिम्मत नहीं क्योंकि समाज इतना जबरदस्त है कि उसे खींच लेगा। इसलिए जो बात मैं आज आपको बताने वाली हूं वो ये है कि एक अपने देश की संस्कृति इतनी ऊंची जो अब भी मानी जाती है और अब भी अपने यहां लोग नैतिकता का स्तर मानते हैं। ऐसे देश में विचार करना चाहिए कि यहां किसने इतना अधिक कार्य किया। ये की शक्ति ने और इस शक्ति के सहार उसने अपने बाल-बच्चे, […]

Talk To Yogis Madras (India)

Talk to Sahaja Yogis, Madras 1994-01-17
[Translation in PDF]
[Transcript Scanned from Divine Cool Breeze]
Today we are lost in the Shabad Jalam We say mantras, we read books, there are Shaivaites and Vaishnavities. All these things to us have been important also because we thought by following these methods, we will achieve our moksha, our last goal. This way I must say that Indians are very alert and basically spiritually minded. They also know what is wrong and what is good. […]

Advice on Gudi Padwa New Delhi (भारत)

परमपूज्य माता जी श्री निर्मला देवी द्वारा दी गयी शिक्षा गुडी पाडवा, दिल्ली २४-०३-९३

आज सत्य युग का पहला दिन हैं। प्रकृति आप को बताएगी कि सत्य युग आरम्भ हो गया है। सहजयोग सत्ययुग ले आया हैं। आप आत्म साक्षात्कारी हैं, आपको स्वयं में श्रद्धा तथा विश्वास होना चाहिये। सहजयोग की कार्य शैली में आपकी श्रद्धा होनी चाहिये । आपकी ज्योतिर्मय श्रद्धा में क्या कार्य करता है? पूर्ण विश्वास होना चाहिये । मेरी ओर देखिये । मैनें अकेले सहजयोग को फैला दिया हैं। बस परम चैतन्य में विश्वास रखें । यदि आपको कोई सन्देह हैं, […]

Dyan Ki Avashakta, On meditation New Delhi (भारत)

Dhyan Ki Avashakta 27th November 1991 Date : Place Delhi : Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

[Original transcript, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

आज आप लोगों से बहुत देर बाद मुलाकात होना चाहिए और इन नसों को शुद्ध करने को हो रही है और सहज योग के बारे में हम लोगों जिम्मेदारी आप लोगों की हैं। हालांकि आपने को समझ लेना चाहिए। सहज योग, ये सारे मुझे कितनी बार कहा है कि माँ हमें भक्ति दो। संसार की भलाई के लिए इस संसार में उत्पन्त माँ हमें निताँत आपके प्रति श्रद्धा दो किन्तु ये ध्यम हैं। चीज आपको खुद ही समझदारी से जानना है। पहली तो बात है कि शुद्ध जब नसे हो जाएँगी तो आप आनंद में आ जाएंगे। आपको लगेगा ही नहीं कि आप कोई कार्य कर रहे है। आप काई सा भी कार्य करते जाएंगे उसमें आप यश प्राप्त हुआ है। और उसके आप लोग आपकी जिम्मेदारियाँ बहुत ज़्यादा हैं क्योंकि आप इसके माध्यम हैं। और कोई नहीं है माध्यम। हम अगर किसी पेड़ को Vibration दे या किसी मन्दिर को Vibration दें या कहीं और भी Vibration दे तो बो चलायमान नहीं हो करेगे। यहुत सहज में सारे कार्य हांते जाएंगे जो सकता. […]

How We Should Behave (two talks) पुणे (भारत)

1989-12-27 India Tour – How We Should Behave
FIRST SPEECH
It was very interesting I was thinking about you all and about the people who have done so much for Sahaja Yoga. It is impossible really to say how many have worked for Sahaja Yoga with such interest and dedication. And this dedication is directed by divine force that’s why I think you people are not even aware how much you have worked so hard without getting any material gain out of it. […]

Talk to Sahaja Yogis, Value Systems (भारत)

हिन्दी (Hindi)

अभी जो मैने बातचीत की थी उसका सारांश ये है की जब हम मनुष्यता के रूप से अपनी ज़िंदगी बसर करते है तब हमारे अंदर मनुष्यता नहीं रह जाती हम सिर्फ़ अपनी संपदा के बारे में सोचतें हैं और मनुष्यता की जो संपदा है उसे नही सोचतें हैं | जिस वक़्त हम सहज योग में उतर आते है तभी हमारे में पहली मर्तबा वो समर्थता आ जाती है की हम मनुष्यता को अपनाएँ | मनुष्यता से बढ़कर और कोई सी भी चीज़ नहीं ये हमारे समझ में आ जाती है और समझ में आने का मतलब है की वो हमारे जीवन में ही उतरने लग जाती है | जब तक हम मनुष्यता के रूप को और उसके मधुर स्वाद को चखतें नहीं तब तक मनुष्य अपने ही एक आवरण में, […]

Address to Sahaja Yogis, The need to go deeper Sydney (Australia)

(सहजयोगियों से बातचीत, प्रश्नोत्तर, बरवुड, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया), 6 मई, 1987)
आज मैंने आपकी उन सभी समस्याओं को सोख लिया है जो कैनबरा में थीं और बाद में उस कॉफ्रेंस में थीं और उसके बाद यहां पर भी थीं। ये सभी समस्यायें मेरे चित्त में आती हैं और मैं उन पर वर्क करने का प्रयास कर रहीं थी। मेरी वर्क करने की शैली एकदम अलग है क्योंकि मेरा यंत्र अत्यंत तीक्ष्ण और प्रभावशाली है। लेकिन इसके लिये मुझे इस पर अपना चित्त डालना पड़ता है और कभी कभी मुझे थोड़ा-बहुत कष्ट भी उठाना पड़ता है लेकिन कोई बात नहीं।
आपके लिये भी यह महत्वपूर्ण है कि आप भी इन गहन भावनाओं को…. […]

Raksha Bandhan and Maryadas Montague Hall, Hounslow (England)

(परम पूज्य श्रीमाताजी निर्मला देवी, रक्षाबंधन, मर्यादा, लंदन, 1984)

यू.के. के इस सुंदर दौरे के बाद मुझे भरोसा हो चला है कि सहजयोग ने अब अपनी जड़ें पकड़ ली हैं और उनमें से कुछ पौधों को उगते हुये भी आप देख सकते हैं। यह हैरान करने वाली बात है कि जैसे ही मैंने घोषणा की कि यह मेरा यू.के. का यह आखिरी दौरा होगा तो सब कुछ क्रियान्वित होने लगा है। जहां-जहां भी हम गये हमारा दौरा सफल और अच्छा रहा खासकर कुछ स्थानों पर तो यह अत्यंत चमत्कारपूर्ण भी था। आपने उस महिला के बारे में तो अवश्य ही सुना होगा जो अपने घर से बाहर निकलती ही नहीं थी …….. […]

Parent’s day celebrations New Delhi (भारत)

माता-पिता का बच्चों के साथ सहज मन्दिर, दिल्ली, १५ दिसम्बर १९८३

स आज मैं आपको एक छोटी-सी हजयोग क्या है और उसमें मनुष्य क्या-क्या पाता है, आप जान सकते हैं। लेकिन बात बताने वाली हूँ कि माता-पिता का सम्बन्ध बच्चों के साथ कैसा होना चाहिए। सबसे पहले बच्चों के साथ हमारे दो सम्बन्ध बन ही जाते हैं, जिसमें एक तो भावना होती है, और एक में कर्तव्य होता है। भावना और कर्तव्य दो अलग-अलग चीज़ बनी रहती हैं। जैसे कि कोई माँ है, […]

Talk to Sahaja Yogis, Open Your Heart, Seminar 4th Session (भारत)

योगीयों से बातचीत लोनावाला (भारत), 25 जनवरी 1982

सारी दुनिया से इतने सारे सहज योगियों से मिलने और उनसे बात कर पा कर बहुत खुशी है। वे मुझे विश्व में सबसे अच्छी समझते हैं|, इस पूरे विश्व में एक ऐसे व्यक्ति के साथ जो की सहज योगी नहीं है तालमेल होना असंभव है| यहां तक कि अगर आप उन्हें आत्मसाक्षात्कार भी देते हैं, यदि वे सहज योगी नहीं बनते हैं, तो उन्हें अपने स्वयं के अस्तित्व की सूक्ष्मता भी समझने में मुश्किल हो सकती है। आज, […]

About self control, dedication and behaviour New Delhi (India)

Advice to sahaja yogis, regarding self control, dedication and behavior. New Delhi (India), 11 March 1981.
* Translation of Shri Mataji’s advice given in Hindi at New Delhi on 11.3.81. Also see NIRMALA YOGA
Vol. 3 (May June 81). […]

Seminar for the new Sahaja yogis Day 3 (भारत)

1980-01-30, Seminar for the new Sahaja yogis Day 3, Bordi 1980 (Hindi)

और जाते समय, आप सब लोगों को, यहाँ पर छोड़ के, इतनी प्यारी तरह से, इन्होंने, अपने हृदय से निकले हुये शब्द कहे, जिससे, चित्त बहुत खिच सा जाता है। आजकल के जमाने में, जब प्यार ही नहीं रह गया, तो प्रेम का खिंचाव और उससे होने वाली, एक आंतंरिक भावना भी संसार से मिट गयी है। मनुष्य हर एक चीज़ का हल बुद्धि के बूते पर करना चाहता है। बुद्धि को इस्तेमाल करने से मनुष्य एकदम शुष्क हो गया। जैसे उसके अन्दर का सारा रस ही खत्म हो गया और जब भी कभी, […]

Do Sansthaye – Man Aur Buddhi , Seminar for the new Sahaja yogis Day 2 (भारत)

1980-01-29, Seminar for the new Sahaja yogis Day 2, Bordi

[Hindi Transcript]

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK कल आपको प्रस्तावना मैं मैंने बताया, कि जो आप हैं वो किसलिये संसार में आये हैं। परमात्मा ने इतनी मेहनत से आपको क्यों इन्सान बनाया? और इस इन्सान का क्या उपयोग है? इसके लिये परमात्मा ने हमारे अन्दर जो जो व्यवस्था की है वो अतीव सुन्दर है। और बड़ी मेहनत ले कर के बड़ी व्यवस्था की गयी। और सारी तैय्यारियाँ अन्दर जुट गयी। लेकिन जिस वक्त मनुष्य को स्वतंत्रता दी गयी, […]

The Meaning of Yoga (England)

The Meaning Of Yoga Date : 11th November 1979 Place : London Туре Public Program Speech

[Translation from English to Hindi, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

सहजयोग आपके अन्दर जीवाणु की तरह आड़ोलन एक के बाद एक क्रिया आदि एक से विद्यमान है । यह आपके अन्दर जन्मी हुई दूसरी तरह के आड़ोलन के माध्यम से होता चीज है। व्यक्ति के अन्दर ये अन्तर्जात होती है जो अवययों में मौजूद है जैसे पेट स्वतः स्वतः इसका अंकुरण होता है अभिव्यक्ति होती है। बिल्कुल वैसे ही जैसे सब आपके मस्तिष्क से आता है । अनुकंपी आप छोटे से बीज को अंकुरित होकर वृक्ष नाडीतन्त्र और पराअनुकम्पी नाड़ी तन्त्र बनते (Sympathetic, […]

Evening prior to departure for London, Importance of Meditation पुणे (भारत)

Evening prior to Her departure for London (Marathi & Hindi). Pune, Maharashtra, India. 30 March 1979.

[Hindi Transcript]

 ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK आप लोग सब इस तरह से हाथ कर के बैठिये। इस तरह से हाथ कर के बैठे और आराम से बैठे। इस तरह से बैठिये। सीधे इस तरह से आराम से बैठिये। कोई स्पेशल पोज़ लेने की जरूरत नहीं है। बिल्कुल आराम से बैठिये। सहज आसन में। बिल्कुल सादगी से। जिसमें कि आप पे कोई प्रेशर नहीं। न गर्दन ऊपर करिये, […]

Advice at Bordi Shibir (English part) (भारत)

Sarvajanik Karyakram Date : 22nd March 1979 Place : Mumbai Туре Public Program

[ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

आप एक बहुत सुन्दर प्रकृति की रचना हैं। बहुत मेहनत से, तो आखें हैं नहीं हम इसे कैसे जानेंगे और हमारे लिए भी यह नजाकत के साथ, बनाया है। आप एक बहुत विशेष अनन्त योनियों में से घटित होकर इस मानव रुप में स्थित हैं। आप इसलिए इसकी महानता जाएगी। इस प्रकार आपके अन्दर भी कोई चीज ऐसी ही बनी नहीं जान पाते क्योंकि, […]

Sahaja Yoga & the Subtle System मुंबई (भारत)

Sarvajanik Karyakram Date 22nd March 1979 : Place Mumbai : Public Program Type Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

आप एक बहुत सुन्दर प्रकृति की रचना हैं। बहुत मेहनत से, तो आखें हैं नहीं हम इसे कैसे जानेंगे और हमारे लिए भी यह नजाकत के साथ, अत्यंत प्रेम के साथ परमात्मा ने आप को बनाया है। आप एक बहुत विशेष अनन्त योनियों में से घटित होकर इस मानव रुप में स्थित हैं। आप इसलिए इसकी महानता जाएगी। इस प्रकार आपके अन्दर भी कोई चीज ऐसी ही बनी नहीं जान पाते क्यांकि, […]

Advice to Delhi Yogis New Delhi (भारत)

Advice to Delhi Yogis (Hindi). Delhi (India), 15 March 1979.

हर जगह के अपने वाइब्रेशन्स होते है दिल्ली, १५.३.१९७९ देलही के निवासियों ने सहजयोग में जो मेहनत की है वो बहुत प्रशंसनीय है क्योंकि आप जानते हैं कि सहजयोग में हमारे कोई भी मेंबरशिप नहीं है, कोई रूल्स नहीं है, कोई रेग्युलेशन्स नहीं है, ना ही कोई हम लोग रजिस्टर रखते हैं और ऐसी हालात में कुछ लोग इससे इतने निगडित हो जायें और इसके साथ इतने मेहनत से काम करें और ये सोंचे कि एक जगह ऐसी होनी चाहिए जहाँ सब लोग आ सके। अभी तो इनके घरों में ही प्रोग्राम होते हैं। तो इन्होंने मुझसे कहा था। मैंने कहा, […]

Talk about Gandhi New Delhi (भारत)

Talk about Gandhi. Mumbai, Maharashtra, India. 11 March 1979.
बिल्कुल सामने आ रहा है ,जो बताया गया है ,  विशुद्धि चक्र के बारे में I अब इसी विशुद्धि चक्र से ही collective conciousness की  सीढ़ी है Iमैंने कहा था कि कृष्ण को पूर्ण अवतार माने क्योंकि ये विराट है विराट वो शक्ति है जिसमें संपूर्ण समावेश है ह्रदय में शिव जी की शक्ति है और पेट में गुरुओं की शक्ति है और स्वाधिष्ठान चक्र में ब्रह्मा देव शक्ति है ब्रेन में ब्रह्मा देव की शक्ति है आप कह सकते हैं और जब विराट जागृत हो जाता है जब  विराट का सहस्त्रार खुलता है तब इसके अंदर बसे हुए अनेक cell का पेशियों का भी सहस्त्रार खुलता है I
Bible मैं कहा जाता है  परमात्मा ने मनुष्य को अपने जैसा बनाया अपना इमेज बनाया है और ये बात सही है जैसे विराट हैं वैसे ही संपूर्ण आप हैं, […]

Seminar Day 2 New Delhi (भारत)

Seminar in Delhi (India), 10 March 1979.

भारतवर्ष योगभूमि , सेमिनार दिल्ली, १०/३/१९७९ आज सबेरे मैंने आपसे बताया था अंग्रेजी में कि परमात्मा ने हमें जो बनाया है, आप इसे माने या न माने, उसका अस्तित्व आप समझे या न समझे वो है। और उसने हमें जिस प्रकार बनाया, जिस तरह से बनाया है वो भी | एक बड़ी खूबी की चीज़ है। मैंने सबेरे बताया था कि कैसे बहुत थोड़े से समय में एक अमीबा जैसे प्राणी से मनुष्य बनाया गया। और आप को मनुष्य बनाया गया सो क्यों? […]

Seminar New Delhi (भारत)

Seminar (Hindi). Delhi, India. 9 March 1979.

[ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

कृष्ण ने गीता में कहा है कि योगक्षेम त्रिकोणाकार अस्थि से उठकर के ब्रह्मरन्ध्र को वहाम्यहम्। इसका मतलब है-पहले योग। पहले छेदती है, जब कुण्डलिनी की शक्ति ब्रह्मरन्ध्र को छेदती है, तब उसमें ज्योति आ जाती है, क्योंकि आत्मा ज्योति को पा लेती है और उस ज्योति के कारण नाभि चक्र में जो ‘लक्ष्मी तत्व’ है वह जागृत हो जाता है। जैसे ही लक्ष्मी तत्व आपमें जागृत हो वो क्षेम कहते, […]

Seminar (भारत)

Seminar (Hindi). Dheradun, UP, India. 4 March 1979.

परमात्मा सब से शक्तिशाली है देहरादून, ४ मार्च १९७९ आज मैंने आपसे सबेरे बताया था कि कुण्डलिनी के सबसे पहले चक्र पे श्री गणेश जी बैठते हैं, श्री गणेश का स्थान है और श्री गणेश ये पवित्रता के द्योतक हैं। पवित्रता स्वयं साक्षात ही है। वो तो पहला चक्र हुआ। और ये चक्र जो है कुण्डलिनी से नीचे है वो कुण्डलिनी की रक्षा ही नहीं करता है, लेकिन वो लोग जो कुण्डलिनी में जाते हैं उनसे पूरी तरह से सतर्क रहते हैं। इस रास्ते से कोई भी कुण्डलिनी को नहीं छू सकता है। आज सबेरे मैंने आपसे बताया था कि इस रास्ते से जो लोग कोशिश करते हैं वो बड़ा ही महान पाप करते हैं। हालांकि उससे थोड़ा बहुत रुपया-पैसा कमा सकते हैं। लेकिन अपने लिए जो पूँजी इकठ्ठी करते हैं, […]

Seminar Day 1, Bija Mantras, Shri Lalita, Shri Chakra Easthampstead Park Conference Centre, Wokingham (England)

सेमिनार प्रथम दिवस ,बीज मंत्र,श्रीललिता,श्रीचक्र

(ईस्ट हैम्पस्टेड पार्क कॉन्फ्रेंस सेंटर,वर्किंगघम, ब्रैकनैल, इंग्लैंड)

14 अक्टूबर 1979

जब कुंडलिनी जागृत होती है,वह ध्वनि उत्पन्न करती है।और जो ध्वनि विभिन्न चक्रों में सुनाई देती है निम्न रूप में उच्चारित की जा सकती है-ये उच्चारण देवनागरी की ध्वन्यात्मक भाषा में प्रयुक्त किये गए हैं,जिसका अर्थ होता है ‘देवों के द्वारा बोली गई भाषा‘।

मूलाधार पर जहाँ चार पंखुड़ियाँ हैं,ध्वनियाँ हैं ÷ व् श् ष् स्

जिसमें से अंतिम ‘ष’ और ‘स्’ […]

Triguna New Delhi (भारत)

Trigun – Bhartiy Sanskruti Ka Mahatva IV Date 3rd February 1978 : Place Delhi : Public Program Type : Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

जिस शक्ति को आप इस्तेमाल कर रहे हैं उसे चल रहा है, माताजी थोड़ा म्यूजिक कर दें? हमने Refill कर लेते हैं हम। Modern बीमारी एक और कहा कर दो भाई। ऐसे ही बैठेगें आराम से। हमारे जिसे हम Tension कहते हैं। Tension’ मुझे तो Vibrations चलते रहते हैं, […]

Sahajyog, Kundalini aur Chakra मुंबई (भारत)

Sahajyog, Kundalini aur Chakra, Mumbai, India 30-01-1978

सहजयोग, कुण्डलिनी और चक्र मुंबई, ३० जनवरी ७८ ये सहज क्या होता है?आप में से बहुतों को मालूम भी है । नानक साहब ने बड़ी मेहनत की है और सहज पर बहुत कुछ लिखा है । यहाँ आप लोगों पर बड़ा वरदान है उनका। लेकिन उनको कोई जानता नहीं है, समझता नहीं। सहज’ का मतलब होता है स ह ज। ‘सह’ माने साथ, ‘ज’ माने पैदा होना। आप ही के साथ पैदा हुआ है। यह योग का अधिकार आपके साथ पैदा हुआ है। हर एक मनुष्य को इसका अधिकार है कि आप इस योग को प्राप्त करें। लेकिन आप मनुष्य हो तब! […]

Atma Ki Anubhuti (भारत)

Atma Ki Anubhuti, 28th December 1977

[Hindi Transcription]

आपसे पिछली मर्तबा मैंने बताया था, कि आत्मा क्या चीज़ है, वो किस प्रकार सच्चिदानंद होती है, और किस प्रकार आत्मा की अनुभूति के बाद ही मनुष्य इन तीनों चीज़ों को प्राप्त होता है। आत्मसाक्षात्कार के बगैर आप सत्य को नहीं जान सकते। आप आनन्द को नहीं पा सकते। आत्मा की अनुभूति होना बहुत जरूरी है। अब आप आत्मा से बातचीत कर सकते हैं। आत्मा से पूछ सकते हैं। आप लोग अभी बैठे ह्ये हैं, […]

Prem Dharma मुंबई (भारत)

Prem Dharma Date : 23rd March 1977 Place Mumbai Type Seminar & Meeting Speech Language Hindi

[Hindi Transcript]

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK बहुतों को ऐसा लगता है जब वो पहली मर्तबा देखते हैं कि ये कोई बच्चों का खेल है कि कुण्डलिनी जागरण है? कुण्डलिनी जागरण के बारे में इतना बताया है दुनिया भर में कि सर के बल खड़ा होना, दुनिया भर की आफ़त करना , और इतने सहज में कुण्डलिनी का जागरण कैसे हो जाता है ? […]