Sahasrara Puja: Consciousness and Evolution Alpe Motta (Italy)

१९८६ -०५-०४ , सहस्त्रार पूजा, इटली, चैतन्य और उत्क्रांति 

आज हम सब के लिए एक महान दिवस है, क्योंकि यह सोलवां सहस्त्रार दिवस है। जैसे कि सोलह ताल या सोलह हरकत में आप कविता के एक उच्च स्तर पर पहुँच जाते हैं। क्यों कि इस प्रकार से यह पूर्ण हो जाता है।  जैसे श्री कृष्ण को भी एक पूर्ण अवतरण कहा जाता है, क्योंकि उनकी सोलह पंखुड़ियां होती हैं। इस परिपूर्णता को “पूर्ण” कहते हैं।  तो अब हम एक और आयाम पर पहुंच गए। पहला वह था जहाँ आपने आत्म साक्षात्कार प्राप्त किया।   […]

Guru Puja: The State of Guru Grand Hotel Leysin (Leysin American Schools), Leysin (Switzerland)

                          गुरु पूजा

 लेसिन (स्विट्जरलैंड), 14 जुलाई 1984।

मैं दुनिया के सभी सहज योगियों को नमन करती हूं। आप सब को बड़ी संख्या में यहां गुरु पूजा करने के लिए इकट्ठा होते देखना बहुत खुशी की बात है।

व्यक्तिगत रूप से अपने गुरु की पूजा करना सर्वोच्च आशीर्वाद माना जाता है। लेकिन मेरे मामले में यह बहुत अलग संयोजन है कि मैं आपकी माता और आपका गुरु हूं।

तो आप समझ सकते हैं कि कैसे श्री गणेश ने अपनी माता की आराधना की थी। आप सभी श्री गणेश जैसी ही छवि में बने हैं जिन्होंने अपनी माँ की पूजा की और फिर वे आदि गुरु, […]

Mental Projection, Guru Puja Evening Talk Nirmala Palace – Nightingale Lane Ashram, London (England)

[Translation English to Hindi]

                 

मानसिक कल्पना

सहज योगियों से बातचीत  

निर्मला पैलेस आश्रम, नाईट एंगल लेन

1982-04-07

नोट [कृपया ध्यान दें श्री माताजी उस समय उपस्थित भारतीय नर्तकियों के लिए अनुवाद करती हैं और मैंने इसे कोष्ठक में (भारतीय भाषा में बोलती है) के रूप में चिह्नित किया है।]

श्री माताजी: क्या आप कल सुबह आ सकते हैं, उन्होंने कहा कि शायद यह कल के बाद से बेहतर होगा, ….कुछ न कुछ तर्क संगत, मैंने कहा। ????कृपया बैठ जाइये। अभी वीडियो रिकार्डिंग क्यों कर रहे है आप इसे क्यों रखना चाहते हैं? […]

The gurus who are trying to exploit the Western people Nice (France)

सार्वजनिक कार्यक्रम दिवस 2, 22 फरवरी 1980, नाइस, फ्रांस

कल मैंने आपको हमारे भीतर की अवशिष्ट शक्ति के बारे में बताया जो कि “सैक्रम बोन” (त्रिकोणाकार अस्थि) में रहती है। इस शक्ति को कुंडलिनी कहा जाता है। यह वही शक्ति है जो ऊपर को चढ़ती है इन उर्जा केंद्रों में से होती हुई और हमें हमारा आत्मसाक्षात्कार दिलाती है, हमारा पुनर्जन्म। मैंने आपको यह भी बताया है कि कई लोगों में आप देख सकते हैं इस कुंडलिनी के स्पंदन को स्पष्ट रूप से अपनी खुली आँखों द्वारा।  […]