Mahashivaratri Puja Sydney (Australia)

श्रीशिवजी पूर्णतया अनासक्त हैं ……
(महाशिवरात्रि पूजा, सिडनी, 3 मार्च 1996)
सहजयोगियों के रूप में आपको छोटी-छोटी चीजों को ज्ञान होना आवश्यक है, बड़ी-बड़ी चीजों का ज्ञान होना भी आवश्यक है। उस महान दृष्टि के कारण जिससे आप परमात्मा के साम्राज्य में पहुंच चुके हैं। मैं कह सकती हूं कि आप वहां प्रवेश पा चुके हैं। मैं कह सकती हूं कि आपने वह अवस्था प्राप्त कर ली है। परंतु अभी भी आप वहां नहीं हैं। ये ऐसा ही है कि यदि मैं किसी से कहूं कि आप अब ऑस्ट्रेलिया में हैं लेकिन वह आस्ट्रेलिया में है ही नहीं लेकिन मैं कहूं कि तुम आस्ट्रेलिया में ही हो तो वह इसका विश्वास कर लेगा कि वह आस्ट्रेलिया में है। लेकिन यह गलत है। आपको आस्ट्रलिया में होना होगा और फिर आस्ट्रेलिया के बारे में जानना होगा कि वहां की जलवायु कैसी है … […]

Address to Sahaja Yogis, The need to go deeper Sydney (Australia)

(सहजयोगियों से बातचीत, प्रश्नोत्तर, बरवुड, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया), 6 मई, 1987)
आज मैंने आपकी उन सभी समस्याओं को सोख लिया है जो कैनबरा में थीं और बाद में उस कॉफ्रेंस में थीं और उसके बाद यहां पर भी थीं। ये सभी समस्यायें मेरे चित्त में आती हैं और मैं उन पर वर्क करने का प्रयास कर रहीं थी। मेरी वर्क करने की शैली एकदम अलग है क्योंकि मेरा यंत्र अत्यंत तीक्ष्ण और प्रभावशाली है। लेकिन इसके लिये मुझे इस पर अपना चित्त डालना पड़ता है और कभी कभी मुझे थोड़ा-बहुत कष्ट भी उठाना पड़ता है लेकिन कोई बात नहीं।
आपके लिये भी यह महत्वपूर्ण है कि आप भी इन गहन भावनाओं को…. […]