Christ and Forgiveness Caxton Hall, London (England)

इसा मसीह और क्षमा

कैक्सटन हाल,

यूनाइटेड किंगडम (यू.के.)

11 मई, 1981

…उस सत्य की खोजना जिस के बारे में सभी धर्मग्रंथों में वर्णन किया गया है। सभी ग्रंथों में कहा गया है कि, आप का पुनर्जन्म होना है। आप का जन्म होना है, उस  के बारे में पढ़ना नहीं है, सिर्फ यह कल्पना नहीं करनी कि आपका पुनर्जन्म हुआ है, सिर्फ यह विश्वास नहीं करना कि आप का पुनर्जन्म हुआ है या फिर कोई नकली कर्मकाण्ड जो यह प्रमाणित करता है आप दोबारा जन्मे है उस को स्वीकारना नहीं है अपितु निश्चित रूप से हमारे अंदर कुछ घटित होना चाहिए। सच्चाई का कुछ अनुभव तो हमारे अंदर होना ही चाहिए। यह सिर्फ कोई विचार नहीं है कि ये ऐसा है कि, […]

What is Happening In Other Lokas? Caxton Hall, London (England)

                                 अन्य लोकों में क्या हो रहा है

कैक्सटन हॉल, लंदन, इंग्लैंड, 30 जून 1980।

आज, मुझे आपको यह बताने में कोई आपत्ति नहीं है कि अन्य लोकों में क्या हो रहा है, अन्य लोक जो हम नहीं देखते हैं, जिसके बारे में हमें जानकारी नहीं है। यह आपको थोड़ा डरा सकता है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम यह जानें कि संपूर्ण के संबंध में हमें कैसे रखा गया है, परमेश्वर की क्या योजनाएँ हैं, […]

The Subtlety Within Caxton Hall, London (England)

                                          आतंरिक कुशाग्रता 

 कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके), 9 जून 1980

एक अन्य दिन आश्रम में, मैं आपको हमारी कुशग्राताओं के बारे में बता रही थी, जो कुशाग्रताएँ हमारे पास पहले से हैं, जिन्हें हम नहीं समझते हैं। हमारे अवचेतन मन से हो सकता है, हमारे अग्र चेतन मन से हो सकती है, कहीं से भी हो सकती है जो हमारे लिए अज्ञात है; लेकिन हमें उन कुशाग्रताओं की परवाह करना चाहिए जो हमें हमारे सार्वभौमिक अस्तित्व की ओर ले जाती हैं।

हमने कभी-कभी ऐसे लोगों के बारे में सुना है जिन्हें संकेत मिलता है। जैसे कोई कहता है, […]

The Egg and Rebirth Caxton Hall, London (England)

परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी

”अंडा पुनर्जन्म से कैसे संबंधित है?”

कैक्सटन हॉल, यू.के.

04-10-1980

अभी हाल में ही मैंने आश्रम में आपको ईस्टर, ईसा मसीह के जन्म, उनके पुनरुत्थान और ईसाई धर्म का संदेश जो की पुनरुत्थान है, के बारे में बताया था। 

एक अंडा बहुत ही महत्वपूर्ण है और भारत के एक प्राचीन ग्रंथ में लिखा है, कि अंडे के साथ ईस्टर क्यों मनाया जाना चाहिए। यह बहुत आश्चर्यजनक है। यह बहुत स्पष्ट है वहां अगर आप देख सके कि किस प्रकार ईसा मसीह को अंडे के रूप में ‌प्रतीकत्व किया गया है।

अब, […]

Christmas And Its Relationship To Lord Jesus Caxton Hall, London (England)

The Incarnation Of Christ, The Last Judgement Date : 10th December 1979 Place : London Туре Seminar & Meeting Speech

[Translation from English to Hindi,Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

आज का दिन हमारे लिए यह स्मरण करने का के लिए यंह बात अत्यन्त कष्टकर है और उन्हें है कि ईसामसीह ने पृथ्वी पर मानव के रूप में जन्म खेद होता है कि जो अवतरण हमें बचाने के लिए लिया। वे पृथ्वी पर अवतरित हुए और उनके आया उसे इन परिस्थितियों में रखा गया। क्यों नहीं, […]

How to get to the Spirit that lies within Caxton Hall, London (England)

आत्मा को कैसे पायें
 सार्वजनिक कार्यक्रम। कैक्सटन हॉल, लंदन, इंग्लैंड। 26 नवंबर 1979।
…और किस प्रकार यह हमारे भीतर रहती है और कैसे हम माया के पर्दों में खोए रहते हैं।
आज मैं आपको बताने जा रही हूँ कि हम उस आत्मा तक कैसे पहुँचते हैं।
उस आत्मा का पता लगाने के लिए लोग दो प्रकार के तरीके अपनाते हैं। एक को अणुवोपाय कहा जाता है, और दूसरे को शाक्तोपाय कहा जाता है। ‘अणु’ का अर्थ है एक अणु। जब हम माया में खोए होते हैं, […]

How realisation should be allowed to develop Caxton Hall, London (England)

          बोध को कैसे विकसित होने दिया जाना चाहिए

 कैक्सटन हॉल, लंदन, इंग्लैंड। 15 अक्टूबर 1979।

आप में से अधिकांश यहाँ सहजयोगी हैं।

अब जिन लोगों को साक्षात्कार मिल गया है, जिन्होंने स्पंदनों को महसूस किया है, उन्हें पता होना चाहिए कि वे अब दूसरे ही स्वरुप में विकसित हो रहे हैं । अंकुरण शुरू हो गया है, और आपको अंकुरण को अपने तरीके से काम करने देना चाहिए।

लेकिन सामान्य तौर पर, जब हमें बोध भी हो जाता है, […]

Self-realisation and fulfilment Caxton Hall, London (England)

‘आत्मसाक्षात्कार और तृप्ति’ , सार्वजनिक कार्यक्रम, कैक्सटन हॉल, लंदन, इंग्लैंड, 

6 अगस्त, 1979

….क्या ये ठीक है?

सहज योग के बारे में पहले ही बहुत कुछ कहा जा चुका है। जैसा कि पहले मैंने आपको बताया था, नये लोगों के लिए मैं कहना चाहूंगी, ‘सह’ माने साथ ‘ज’ माने जन्मा। यह आपके साथ ही जन्मा है। यह आपके साथ है। अंकुरित करने वाली शक्ति जो आपको परमात्मा से जोड़ेगी, वो आपके साथ ही पैदा हुई है। जैसे इस देह में आपकी नाक है, […]

We have to seek our wholesomeness Caxton Hall, London (England)

                                            सार्वजनिक कार्यक्रम 

“हमें विराट से अपनी एकाकारिता की आकांक्षा करनी चाहिए”।

 कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके)। 24 जुलाई 1979।

कल, मैं एक महिला से मिली, और उसने मुझसे कहा कि वह ईश्वर को खोज रही है। मैंने कहा, “परमात्मा के बारे में आप की सोच क्या है, आप क्या खोज रही हैं?” जब हम कहते हैं कि हम खोज रहे हैं, तो क्या हम जानते हैं कि हमें क्या खोजना है, और क्या हम समझते हैं कि अपनी खोज़ की पूर्णता हम कैसे महसूस करने जा रहे हैं, […]

How truthful are we about seeking? Caxton Hall, London (England)

हम सत्य की ख़ोज के बारे में कितने ईमानदार हैं?
 सार्वजनिक कार्यक्रम, कैक्सटन हॉल, लंदन, इंग्लैंड। 16 जुलाई 1979।
एक दूसरे दिन मैंने आपको उस उपकरण के बारे में बताया जो पहले से ही हमारे अंदर है, अपने आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए, जो एक वास्तविक अनुभूति है, जो एक अनुभव है, जो एक घटना है जिसके द्वारा हम वह बन जाते हैं। यह हो जाना है, यह कोई वैचारिक मत परिवर्तन या उपदेश नहीं है बल्कि यह एक ऐसा बनना है जिसके बारे में मैं बात कर रही हूं। जब हम कहते हैं, […]

The Three Paths Of Evolution Caxton Hall, London (England)

                                             विकास के तीन रास्ते

सार्वजनिक कार्यक्रम, कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके)। 30 मई 1979।

हम जो भी जानते हैं उससे अधिक ऊँचे जीवन के बारे में आपसे बात करने के लिए मैं यहां हूं, उस शक्ति के बारे में जो हर अन्य शक्ति को व्याप्त करती है, प्रविष्ट कर जाती है ; और उस दुनिया के बारे में जिसे शांति और आनंद की दुनिया कहा जाता है।

इन सभी शब्दों के बारे में आपने पहले भी सुना होगा। लेकिन मैं यहां आपको उस यंत्र के बारे में बताने वाली हूं जो हमारे भीतर रहता है, […]

Agnya Chakra means ‘to order’ Caxton Hall, London (England)

                       “आज्ञा चक्र”

 केक्सटन हॉल, लंदन (यूके), 18 दिसंबर 1978।

आज हम छठे चक्र के बारे में बात कर रहे हैं जिसे आज्ञा चक्र कहा जाता है। ‘ज्ञा’,  शब्द का अर्थ ‘जानना’ है, आज्ञा यानी जानना है। और ‘आ’ का अर्थ है ‘संपूर्ण’।

आज्ञा चक्र का एक और अर्थ भी है। आज्ञा का अर्थ है ‘आज्ञाकारिता’ या ‘आदेश  करने के लिए’। इसका मतलब दोनों चीजों से हो सकता है। यदि आप किसी को आदेश देते हैं तो यह एक आज्ञा है और जो आदेश का पालन करता है वह आज्ञाकारी है। वह जो आज्ञा देता है।

मानव में छठा चक्र तब बनाया गया जब उसने सोचना शुरू किया| विचार भाषा में व्यक्त होते हैं|  […]

Knots On The Three Channels Caxton Hall, London (England)

                                         “तीन नाड़ियों की ग्रंथियां”

 कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके), 2 अक्टूबर 1978

यह जो ब्रह्म का तत्व है, यह सिद्धांत है उस स्पंदित भाग, हमारे ही अंदर निहित शक्ति का तत्व, जिसे हमें महसूस करना है, और जो हर चीज में स्पंदित होती है। यह सहज योग के साथ होता है, बेशक, कुंडलिनी चढ़ जाती है, लेकिन यह इसका अंत नहीं है,  क्योंकि, मानव वह साधन है जिसमें यह प्रकाश प्रकट होता है। लेकिन एक बार प्रकट होने के बाद यह जरूरी नहीं है कि यह हर समय ठीक से जलती रहे। एक संभावना है, […]

The Principle of Brahma Caxton Hall, London (England)

                                             ब्रह्म का तत्व

 कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके), 11 सितंबर 1978

आज मैं आपको कुछ ऐसा बताना चाहती हूं, शायद मैंने उस बिंदु को पहले कभी नहीं छुआ है। या मैंने इसके बारे में विस्तार से बात नहीं की है। यह ब्रह्म के तत्व के बारे में है: ब्रह्म का तत्व क्या है? कैसे इसका अस्तित्व है? यह कैसे पैदा होता है? यह कैसे अभिव्यक्त होता है? और कैसे, यह निर्लिप्त भी है और संलग्न भी है ।

विवरण में,  […]

What happens after Self-realisation? Caxton Hall, London (England)

              आत्म-साक्षात्कार के बाद क्या होता है? 

 कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके), 26 जून 1978

प्रश्न यह है कि आत्म-साक्षात्कार के बाद वास्तव में हमारे साथ क्या होता है? बेशक, मेरा मतलब है, आप निर्विचार जागरूक महसूस करते हैं, आप सामूहिक चेतना महसूस करते हैं, आप दूसरों की कुंडलिनी को महसूस कर सकते हैं, आप कुंडलिनी को ऊपर उठा सकते हैं, आप चक्रों को महसूस कर सकते हैं। यह सब आप जानते हैं। लेकिन असल में, इंसान के साथ गहरे तरीके से क्या होता है, […]

The Difference Between East & West Caxton Hall, London (England)

                                 पूर्व और पश्चिम के बीच अंतर

कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके), 19 जून 1978

हमारे पाश्चात्य समाज की समस्या यह है…

आप देखिए, पूर्वी समाज की अपनी समस्याएं हैं और पश्चिमी समाज की अपनी समस्याएं हैं। मूल रूप से वे दो अलग-अलग समस्याएं हैं, बिल्कुल दो अलग-अलग समस्याएं हैं, और पूर्व की समस्याओं के बारे में चर्चा करना आपके लिए किसी काम का नहीं होगा।

उदाहरण के लिए, भगवद गीता में, श्री कृष्ण ने कहा है कि, […]

Rationalism, Emotionalism And Wisdom Caxton Hall, London (England)

                            “तर्कबुद्धि, भावनात्मकता और विवेक”

 कैक्सटन हॉल, लंदन, 12 जून 1978।

… तो तर्कसंगतता क्या कर सकती है? हमारे अंदर तर्कसंगतता होने के कुछ कारण होने चाहिए [और] भगवान ने हमें तर्कसंगतता क्यों दी है। वह अपने हीरे को इस तरह बर्बाद नहीं करता है!

तर्कसंगतता हमें यह समझने की समझ देती है कि हम तर्कसंगतता के माध्यम से वहां नहीं पहुंच सकते।

क्योंकि जहाँ तक और जब तक यह घटना आपके साथ घटित नहीं होती, तब तक आप उस पर विश्वास नहीं करेंगे। आप इस पर विश्वास नहीं करने जा रहे हैं कि, […]

We are all seeking Caxton Hall, London (England)

                    हम सभी इच्छुक हैं

 सार्वजनिक कार्यक्रम, कैक्सटन हॉल, लंदन, 20 मार्च 1978

ग्रेगोइरे ने इतनी सारी बातें कह दी हैं कि मैं वास्तव में नहीं जानती कि उसके बाद क्या कहना है। सच में अवाक। मुझे पता है कि यह एक सच्चाई है और आपको इसका सामना करना होगा, हालांकि मैं इसके बारे में संकोचशील हूं।

तुम सब खोज रहे थे, और मुझे लगता है कि जब से मुझे याद पड़ता है, तब से मैं किसी ऐसे व्यक्ति से नहीं मिली जो खोज नहीं रहा था। वे पैसे में, […]

God and Creation Caxton Hall, London (England)

                                         परमात्मा और रचना 

 कैक्सटन हॉल, लंदन 1977-11-28

जैसा कि गेविन ने आपको पहले ही विस्तार से बताया है कि आज का विषय वास्तव में एक बहुत विस्तृत विषय है और इस विषय को समझने के लिए एकाग्र चित्त होना होगा। और जैसा कि उन्होंने आपको पहले ही बताया है कि यह मेरा व्यक्तिपरक ज्ञान है जो आपका भी हो सकता है। और आपको इसे अपनी चैतन्यमयी जागरूकता से ही सत्यापित करना होगा। क्योंकि यही एकमात्र ऐसी जागरूकता है जो आपको पूर्ण परिणाम दे सकती है। जैसा कि मैंने आपको बताया है, […]

The history of Tantrism Caxton Hall, London (England)

                          तंत्रवाद

सार्वजनिक कार्यक्रम

 कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके), 21 नवंबर 1977

मेरे प्रिय साधकों,

मैं गेविन ब्राउन की शुक्रगुजार हूं कि वह मेरे द्वारा पहले कही गई कुछ बातों को समेटने में सक्षम हैं और मुझे पिछली बार जो मैंने आपको बताया था, उसके सभी विवरणों में जाने की जरूरत नहीं है। आप में से कुछ लोग यहां पहली बार आए हैं। [टेप बाधित]।

जैसा कि उन्होंने कहा, तंत्र का अर्थ है तकनीक, यह एक तकनीक है। और संस्कृत भाषा में यंत्र का अर्थ है तंत्र\यंत्र रचना। तो, […]