The Culture of Universal Religion Bordi (भारत)

“विश्व निर्मल धर्म की संस्कृति”
बोर्डी (भारत), 7 फरवरी 1985।
युद्ध के मैदान में हमारी नई यात्रा का आज दूसरा दिन है। हमें लोगों को प्यार, करुणा, स्नेह और आत्मसम्मान से जीतना है।
जब हम कहते हैं कि यह एक विश्व धर्म है, यह एक सार्वभौमिक धर्म है जिससे हम संबंधित हैं, सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात, इसका सार शांति है। शांति भीतर होनी चाहिए, शुरुआत करने के लिए। आपको अपने भीतर शांत रहना होगा। यदि आप शांत नहीं हैं, […]

A New Era – Sacrifice, Freedom, Ascent Bordi (भारत)

                                एक नया युग – त्याग, स्वतंत्रता, उत्थान

 बोरडी (भारत), 6 फरवरी 1985।

आप सभी को यहां देखकर मुझे अपार हर्ष हो रहा है। मुझे नहीं पता कि मेरी तरफ से क्या कहना है। शब्द खो जाते हैं, उनका कोई अर्थ नहीं है।

आप में से बहुत से लोग उस अवस्था में जाने के इच्छुक हैं, जहाँ आपको पूर्ण आनंद, कल्याण और शांति मिलेगी। यही है जो मैं आपको दे सकती हूं। और एक माँ तभी खुश होती है जब वह अपने बच्चों को जो दे सकती है वह दे पाती है। उसकी नाखुशी, […]

Powers Bestowed upon Sahaja Yogis Bordi (भारत)

                        सहज योगीयों को प्रदत्त शक्तियां 

 बोर्डी (भारत)

 27 जनवरी, 1980

मैंने कल आपसे कहा था, कि हमें अपनी पहले से उपलब्ध शक्ति, और वे शक्तियाँ जो हमें मिल सकती हैं उनके बारे में जानना होगा, । सबसे पहले हमें यह जानना चाहिए कि हमें कौन सी शक्तियां मिली हैं, और हमें यह भी पता होना चाहिए कि हम उन शक्तियों को कैसे संरक्षित करने जा रहे हैं और कौन सी शक्तियां हम बहुत आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

 पहली शक्ति जो आत्मसाक्षात्कार के बाद आपको मिलती है, […]

Transformation, Morning Advice at Bordi seminar Bordi (भारत)

                    रूपांतरण 

 बोर्डी (भारत) सेमिनार में सुबह की सलाह 

 27 जनवरी, 1980

जब सभी यहां आये तब हर कोई बहुत अच्छा महसूस कर रहा था, खुश था और उन्हें लगा, उनके चैतन्य बिल्कुल ठीक थे। लेकिन ऐसा नहीं था।

इसलिए सतर्क रहें, आप देखें – एक-दूसरे से इसे परखने को कहें कि कृपया आप जाँच करें, इसके बारे में विनम्र रहें।

आपको परखते रहना चाहिए। जब तक आप खुद की जांच नहीं करते, तब तक आप कैसे जानेंगे कि आप क्या चीज पकड़ रहे हैं? […]

Public Program, Chitta KI Gaharai Bordi (भारत)

Public program (Hindi). Bordi Shibir, Maharashtra, India. 24 March 1979.

[Hindi Transcript]

आप लोग सब सहजयोग में आये हैं। कुछ लोग पहले से आये हैं, बहुत सालों से और कोई लोग नये हैं। धीरे- धीरे सहजयोग में संख्या बढ़ने वाली है इसमें कोई शक नहीं है और सत्य जो है वो धीरे -धीरे ही प्रस्थापित होता है। सत्य की पकड़ धीरे-धीरे होती है। आपके यहाँ ऐसे लोग हैं जो आठ-आठ, नौ-नौ महिनों तक सहजयोग में आते रहे और उसके बाद पार हुए। सत्य को पाने के लिये हमारे अन्दर पहले तो गहराई होनी चाहिए। पर सबसे बड़ी चीज़ है हमारे अन्दर सफाई होनी चाहिए। अब अनेक गुरुओं के बीच में जाकर के हमारा चित्त जो है वो बुरी तरह से विक्षिप्त हो जाता है । दूसरा, […]

Advice at Bordi Shibir (English part) Bordi (भारत)

Sarvajanik Karyakram Date : 22nd March 1979 Place : Mumbai Туре Public Program

[ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

आप एक बहुत सुन्दर प्रकृति की रचना हैं। बहुत मेहनत से, तो आखें हैं नहीं हम इसे कैसे जानेंगे और हमारे लिए भी यह नजाकत के साथ, बनाया है। आप एक बहुत विशेष अनन्त योनियों में से घटित होकर इस मानव रुप में स्थित हैं। आप इसलिए इसकी महानता जाएगी। इस प्रकार आपके अन्दर भी कोई चीज ऐसी ही बनी नहीं जान पाते क्योंकि, […]

Seminar Day 2, Attention and Joy Bordi (भारत)

[Hindi translation from Enlgish]

    चित्त और आनंद 

                                    3 ​​दिन के शिबिर का दूसरा दिन

 बोरडी (भारत), 27 जनवरी 1977।

…  बहुत ज्यादा भटकाव और चित्त को स्थिर कैसे करें| अब चित्त की गुणवत्ता आपके विकास की स्थिति के अनुसार बदल जाती है। उदाहरण के लिए, एक जानवर में …

तो इंसान में चित्त कहाँ रखा जाता है? यह एक निश्चित बिंदु नहीं है। आप कह सकते हैं, चित्त जागरूकता की सतह या किनारा है। जहां भी हमें जागरूक किया जाता है, […]

Seminar Day 1, Questions and Answers, Advice to Realised Souls Bordi (भारत)

[Hindi translation from English]                    

1977-01-26 1 Seminar Day 1, Questions Answers, Bordi, India

आपने जो पूछे हैं, मैं अधिकतर बिंदुओं पर प्रकाश डालने का प्रयास करूँगी। परन्तु मैं यह अवश्य ही कहूँगी कि आप के अधिकतर प्रश्न सुनकर मैं बहुत प्रसन्न हुई क्योंकि यह दिखाता है कि आपकी जिज्ञासा सूक्ष्म से सूक्ष्मतर हो रही है, क्योंकि आप पहले से ही चक्रों के स्थूल स्वरूप जानते हैं और अब आप सूक्ष्मतर स्वरूप को जानना चाहते हैं।

अब पहला प्रश्न जो सबसे पहले लेना चाहिए, […]

Talk on Attention Bordi (भारत)

[Hindi translation from English]

ध्यान पर बात

बोर्डी, भारत, 1977-0126  

वे इसे कैसे कार्यान्वित करते हैं। यही कारण है कि जब मोहम्मद साहब आए, तो उन्होंने उपदेश दिया कि आपको किसी के सामने नहीं झुकना चाहिए। जो भी हो, क्योंकि झुकने के बारे में, वह जानते थे कि जब वास्तविक व्यक्तित्व आएँगे, तो कुछ भी हो आप उन्हें  पहचान ही लेंगे। लेकिन एक सामान्य दृष्टिकोण था, जिसे की यहाँ तक ​​कि नानक साहिब भी नहीं बदल सके थे। और नानक साहिब ने कई महान आत्माओं के द्वारा कही ज्ञान की बातों का संग्रह “गुरु ग्रन्थ साहिब” में किया, […]

Public Program Bordi (भारत)

1973-0125 Public Program, Bordi (Hindi)

सो आपके स्वादिस्ठान चक्र में अगर कुछ गरबड हो तो आप ये अंगूठे से ठीक कर सकते हो. अंगूठे से. अब आपको अपना महत्व देखना है की आप क्या है.?  आप शीशे के सामने खड़े हो जाये ऐसे पोज करके, आपमें चेंज आना शुरु हो जायेगा. आपका जो रिफ्लेक्सन शीशे में पड रहा है उसीसे आप समझ सकते है की आप क्या चीज है ? अपना खुद ही प्रतिबिंब देखे आप शीशे में और देखते रहे. […]