Inauguration of Vishwa Nirmal (भारत)

Udghatan – Vishwa Nirmala Prem Ashram Date 27th March 2003 : Noida Place : Seminar & Meeting Type

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari] 

अपने देश में जो अनेक प्रश्न हैं, उसमें सबसें बड़ा प्रश्न है कि यहां पर औरतों को और आदमियों को अलग-अलग तरीके से देखा जाता है। पता नहीं ये कैसे आया, क्योंकि अपने शास्त्रों में तो लिखा नहीं है। कहते हैं शास्त्रों में कि: यत्र पूज्यन्ते नार्या, नारियां जहां पूजनीय होती है तत्र रमन्ते देवता।  तो पता नहीं कैसे हमारे देश में इस तरह की स्थिति सम्पन्न हुई है, जिससे औरतों के प्रति कोई भी आदर नहीं है। विशेषतः मेरा विवाह यू.पी. […]

Talk, Paane ke baad dena chaahiye swagat samaroh New Delhi (भारत)

Aapko Sahajayoga Badhana Chahiye Date 5th December 1999: Place Delhi: Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

सत्य को पाने वाले सभी सहजयोगियों को जो आप उठा रहे है वो दूसरों को भी देना हमारा प्रणाम । आप लोग इतनी बड़ी संख्या में चाहिए। यहाँ उपस्थित हुए है ये देखकर मेरा वाकई में हिन्दुस्तान तो है ही मेरा देश और यहाँ आने में जो एक विशेष आनन्द होता है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता और जब में आप लोगों के लोगों ने, […]

Guru Nanak Birthday (भारत)

Guru Nanak Puja 23rd November 1999 Date: Noida Place Type Puja Speech Language Hindi

आज गुरु नानक साहब का जनम दिन है और सारे संसार में मनाया जा रहा है वैसे। और आश्चर्य की बात है कि इतना हिन्दुस्तान में मैंने नहीं देखा, फर्स्ट टाइम इतना पेपर में दिया है, सब कुछ किया है । उन्होंने सिर्फ सहज की हैं। धर्म के बारे में कहा, उपवास बात की। सहज पे बोलते रहे। हमेशा कहा, कि सब जो है बाहर के अवडंबर करना, […]

Expression of Subtle Elements New Delhi (भारत)

Panch Tattwa – The Subtle Elements Date 16th December 1998: Place Delhi: Seminar & Meeting Type Hindi & English Speech

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

इतने ठंड में और तकलीफ में आप सब इतना भयंकर दावानल जैसे चारों तरफ से लगा लोग आए। एक माँ के हृदय के लिए ये बहुत हुआ दिखाई देता है। उसके बीच आप सहजयोगी बड़ी चीज़ है। अब और कोई दिन मिल नहीं रहा था, इसी दिन आप लोगों का तकलीफ वर्णन शास्त्रों में है। पर उसमें ये कहा जाता है उठानी पड़ी। और आप लोग इतने प्रेम से, […]

Evening Program, Eve of Shri Ganesha Puja Campus, Cabella Ligure (Italy)

1997-09-06 ईपी श्री गणेश पूजा, कबेला,इटली

मैं आस्ट्रेलियाई सामूहिकता और अन्य सभी देशों को धन्यवाद देना चाहूंगी जो यहां हैं । कितनी खूबसूरती से उन्होंने सारी चीज़ को संगठित किया है । उन्होंने इन सभी कार्यक्रमों के साथ समय बर्बाद नहीं किया, आप  देखिये  । आपको नहीं पता कि मैं क्या महसूस कर रही हूँ जब मैं  इन सभी देशों को देखती हूँ जहाँ मैं पहले जा चुकी हूँ, और मैं आप में से अधिकांश को अच्छी तरह से जानती हूँ। । जिस तरह से आपको अपनी आध्यात्मिक जागृति के माध्यम से जो पूरी खुशी और आनंद मिला है, […]

Talk To Yogis (भारत)

Talk to Sahaja Yogis, Madras 1994-01-17
[Translation in PDF]
[Transcript Scanned from Divine Cool Breeze]
Today we are lost in the Shabad Jalam We say mantras, we read books, there are Shaivaites and Vaishnavities. All these things to us have been important also because we thought by following these methods, we will achieve our moksha, our last goal. This way I must say that Indians are very alert and basically spiritually minded. They also know what is wrong and what is good. […]

Advice on Gudi Padwa New Delhi (भारत)

परमपूज्य माता जी श्री निर्मला देवी द्वारा दी गयी शिक्षा गुडी पाडवा, दिल्ली २४-०३-९३

आज सत्य युग का पहला दिन हैं। प्रकृति आप को बताएगी कि सत्य युग आरम्भ हो गया है। सहजयोग सत्ययुग ले आया हैं। आप आत्म साक्षात्कारी हैं, आपको स्वयं में श्रद्धा तथा विश्वास होना चाहिये। सहजयोग की कार्य शैली में आपकी श्रद्धा होनी चाहिये । आपकी ज्योतिर्मय श्रद्धा में क्या कार्य करता है? पूर्ण विश्वास होना चाहिये । मेरी ओर देखिये । मैनें अकेले सहजयोग को फैला दिया हैं। बस परम चैतन्य में विश्वास रखें । यदि आपको कोई सन्देह हैं, […]

Dyan Ki Avashakta, On meditation New Delhi (भारत)

Dhyan Ki Avashayakta   ध्यान की आवश्यकता 

Date:27th November 1991 Place: Delhi   

Seminar & Meeting Type: Speech Language Hindi 

[Original transcript, scanned from Hindi Chaitanya Lahari] 

आज आप लोगों से फिर से मुलाकात हो रही है और सहज योग के बारे में हम लोगों को समझ लेना चाहिए।  सहज योग,  ये सारे संसार के भलाई के लिए संसार में उत्तपन्न  हुआ है, कहना चाहिए और उसके आप लोग माध्यम हैं।  आपकी जिम्मेदारियाँ बहुत ज़्यादा हैं क्योंकि आप लोग इसके माध्यम हैं, और कोई नहीं है इसका माध्यम।    कि  हम अगर पेड़ को वाईब्रेशन्स (Vibrations) दें या किसी मन्दिर को वाईब्रेशन्स दें या कहीं और भी वाईब्रेशन्स दें तो वो चलायमान नहीं हो सकते,   वो कार्यान्वित नहीं हो सकता।  आप ही की धारणा से और आप ही के कार्य से यह फैल सकता है।  फिर हमें यह सोचना चाहिए कि सहजयोग में एक ही दोष है। ऐसे तो सहज है, सहज में प्राप्ति हो जाती है। प्राप्ति सहज में होने पर भी उसका संभालना बहुत कठिन है क्योंकि हम कोई हिमालय पर नहीं रह रहे हैं। हम कहीं ऐसी जगह नहीं रह रहे हैं, जहाँ और कोई वातावरण नहीं है, बस सब  आध्यात्मिक वातावरण है। हर तरह के वातावरण में हम रहते हैं। उसी के साथ-साथ हमारी भी उपाधियाँ बहुत सारी हैं जो हमें चिपकी हुई हैं। तो सहजयोग में शुद्ध बनना,  शुद्धता अंदर लाना ये कार्य हमें करना पड़ता है। जैसे कि कोई भी चैनल (Channel)हो वो अगर शुद्ध न हो, तो उसमें से जैसे बिजली का चैनल है उसमें से बिजली नहीं गुज़र सकती। अगर पानी का नल है उसके अंदर कुछ चीज़ भरी हुई है उसमें से पानी नहीं गुज़र सकता। इसी प्रकार ये चैतन्य भी जिस  […]

How We Should Behave (two talks) पुणे (भारत)

1989-12-27 India Tour – How We Should Behave
FIRST SPEECH
It was very interesting I was thinking about you all and about the people who have done so much for Sahaja Yoga. It is impossible really to say how many have worked for Sahaja Yoga with such interest and dedication. And this dedication is directed by divine force that’s why I think you people are not even aware how much you have worked so hard without getting any material gain out of it. […]

Talk to Sahaja Yogis, Value Systems Ganapatipule (भारत)

हिन्दी (Hindi)

अभी जो मैने बातचीत की थी उसका सारांश ये है की जब हम मनुष्यता के रूप से अपनी ज़िंदगी बसर करते है तब हमारे अंदर मनुष्यता नहीं रह जाती हम सिर्फ़ अपनी संपदा के बारे में सोचतें हैं और मनुष्यता की जो संपदा है उसे नही सोचतें हैं | जिस वक़्त हम सहज योग में उतर आते है तभी हमारे में पहली मर्तबा वो समर्थता आ जाती है की हम मनुष्यता को अपनाएँ | मनुष्यता से बढ़कर और कोई सी भी चीज़ नहीं ये हमारे समझ में आ जाती है और समझ में आने का मतलब है की वो हमारे जीवन में ही उतरने लग जाती है | जब तक हम मनुष्यता के रूप को और उसके मधुर स्वाद को चखतें नहीं तब तक मनुष्य अपने ही एक आवरण में, […]

Seminar Day 1, Introspection and Meditation Shudy Camps Park, Shudy Camps (England)

Advice, “Introspection and Meditation”. Shudy Camps (UK), 18 June 1988.

परामर्श, “आत्मनिरीक्षण और ध्यान”।शुडी कैंप (यूके), 18 जून 1988।

इस साल हमारे विचार से यूके में सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होंगे, क्योंकि कुछ परिस्थितियां भी हैं। लेकिन जब भी कोई ऐसी परिस्थिति आती है, जो किसी न किसी रूप में हमारे कार्यक्रमों को बदल देती है, तो हमें तुरंत समझ जाना चाहिए कि उस बदलाव के पीछे एक उद्देश्य है, और हमें तुरंत खुले दिल से इसे स्वीकार करना चाहिए कि ईश्वर चाहते हैं कि हम बदल दें। मान लीजिए मैं एक सड़क पर जा रही हूँ और लोग कहते हैं, […]

“The light of love”, Evening before Diwali Puja Lecco (Italy)

“प्रेम का प्रकाश”कोमो झील (इटली), 24 ऑक्टुबर 1987।

[मंत्र उच्चारण के बाद।]परमात्मा आप सबको आशीर्वादित करें।और लक्ष्मी की, समस्त अष्ट लक्ष्मी की कृपा आप पर हो। परमात्मा आपका भला करें।

आज हम यहां दीपावली का एक बड़ा उत्सव मनाने के लिए आए हैं, जिसका अर्थ है रोशनी की पंक्तियाँ, या प्रकाश का त्योहार। यह श्री राम के राज्याभिषेक का जश्न मनाने के लिए भी था, यानी प्रतीकात्मक रूप से एक ऐसे राज्य की स्थापना का जश्न मनाने के लिए जिसमें एक कल्याकारी प्रशासन हो।आज मैं आप सभी को यहां अपने सामने बैठी रोशनी के रूप में पाती हूं और इन रोशनीयों के साथ मुझे लगता है कि दीपावली वास्तव में मनाई गई है; […]

Talk, Eve of Shri Vishnumaya Puja YWCA Camp, Pawling (United States)

श्री विष्णुमाया पूजा से एक दिन पहलेन्यूयॉर्क (यूएसए), 8 अगस्त 1987।

यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि आज,आप में से बहुत से अमेरिकी एकत्र हुए हैं, और कल आप विष्णुमाया पूजा करना चाहते हैं। मुझे वे दिन याद हैं जब मैं केवल कुर्सियों से ही बात करती थी, लेकिन इतने वर्षों में इतनी मेहनत करने के बावजूद, इस देश में इतनी बार यात्रा करने के बाद भी, किसी भी अन्य राष्ट्र की तुलना में हमारे पास बहुत कम सहज योगी हैं।

श्रीकृष्ण के इस देश में लोगों का ध्यान धन पर लगाना अनिवार्य है, […]

Address to Sahaja Yogis, The need to go deeper Sydney (Australia)

(सहजयोगियों से बातचीत, प्रश्नोत्तर, बरवुड, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया), 6 मई, 1987)
आज मैंने आपकी उन सभी समस्याओं को सोख लिया है जो कैनबरा में थीं और बाद में उस कॉफ्रेंस में थीं और उसके बाद यहां पर भी थीं। ये सभी समस्यायें मेरे चित्त में आती हैं और मैं उन पर वर्क करने का प्रयास कर रहीं थी। मेरी वर्क करने की शैली एकदम अलग है क्योंकि मेरा यंत्र अत्यंत तीक्ष्ण और प्रभावशाली है। लेकिन इसके लिये मुझे इस पर अपना चित्त डालना पड़ता है और कभी कभी मुझे थोड़ा-बहुत कष्ट भी उठाना पड़ता है लेकिन कोई बात नहीं।
आपके लिये भी यह महत्वपूर्ण है कि आप भी इन गहन भावनाओं को…. […]

Talk to Sahaja Yogis: How To Be Respected, Leadership The Hague Ashram, The Hague (Holland)

सम्मान कैसे प्राप्त करें, नेतृत्व और प्रशासन,हेग (हॉलैंड), 17 सितंबर, 1986

अब। (हिंदी एक तरफ में)

तो। अब, आप देखिये, अन्य लोगों को प्रभावित करने के लिए हमें यह जानना होगा कि हमारा स्वयं पर भी कितना नियंत्रण है; यह बहुत महत्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए, आप देखते हैं कि कुछ लोगों की कोई उचित छवि नहीं होती है और वे दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, इसलिए यह एक मजाक हो जाता है। कोई भी ऐसे व्यक्ति से प्रभावित नहीं होता जिसकी अपनी कोई छवि नहीं होती। इसलिए, […]

Talk about Shri Krishna (before the dinner) Hostellerie am Schwarzsee, Plaffeien (Switzerland)

शाम की बात, श्री कृष्ण पूजा संगोष्ठीश्वार्जसी (स्विट्जरलैंड), 23 अगस्त 1986।

तो हमने फैसला किया… [माइक्रोफ़ोन थोड़ा और आगे लाया जाना चाहिए ], हमने अपने शाम के खाने के बाद पूजा करने का फैसला किया है क्योंकि श्री कृष्ण रात में लगभग बारह बजे पैदा हुए थे,जबकि मेरा जन्म भी दिन के समय बारह बजे पैदा हुआ था, श्री राम के साथ भी ऐसा ही। और क्राइस्ट का जन्म भी रात के बारह बजे हुआ था।

मैंने आपको बताया है कि आज मैं आपको गीता के बारे में बताने जा रही हूं। वह कृष्ण के जीवन का दूसरा भाग है। यह इतना अलग और विविध है कि कुछ लोग, […]

Morning of Shri Krishna Puja seminar Hostellerie am Schwarzsee, Plaffeien (Switzerland)

कृष्ण पूजा संगोष्ठीश्वार्जसी (स्विट्जरलैंड), 23 अगस्त 1986।

आज आप सभी को यहां श्री कृष्ण पूजा करने के लिए एकत्रित देखकर बहुत आनंद और खुशी हो रही है।

क्या तुम मुझे वहाँ सुन पा रहे हो? नहीं? सुन नहीं सकते।

ग्रेगोइरे: फिल, क्या आप वापस जोड़ सकते हैं …

श्री माताजी : इतने सारे सहजयोगियों को यहाँ एकत्रित देखकर, मुझे यकीन है कि शैतान बहुत पहले भाग गया होगाऔर कारवां चला गया होगा, लेकिन मुझे आशा है कि हम इसके बारे में जागरुक हैं और हमअपनी पकड़ के बारे मेअपने डर, […]

Going from Swaha to Swadha Brompton Square House, London (England)

                “स्वाहा से स्वधा पर जाना,” 

श्री माताजी का निवास, 48 ब्रॉम्प्टन स्क्वायर, लंदन (इंग्लैंड), 3 मार्च 1986।

यही आखिरी चीज़, मैंने, दिल्ली में अपने व्याख्यानों में इस्तेमाल की थी कि;  श्री कृष्ण ने कहा है कि मानव जागरूकता नीचे की ओर जाती है और मानव जागरूकता की जड़ें मस्तिष्क में हैं। और जब मनुष्य नीचे की ओर जाने लगते हैं तो वे परमात्मा के विपरीत दिशा में चले जाते हैं। इतना ही उन्होंने कहा है। उन्होंने इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा है।

अब देखिए, […]

Health Advice, the Sun, western habits, the brain and medical matters Near Musalwadi Lake, Musalwadi (भारत)

               सूर्य, मस्तिष्क, चिकित्सा प्रश्न

 राहुरी (भारत)। 13 जनवरी 1986।

[आगमन पर:

श्री माताजी: “आज का दिन बहुत हवादार और अच्छा और ठंडा है”।

वारेन: “माँ, यह तो आपकी बयार है”।

श्री माताजी (हँसते हुए): “मुझे लगता है कि यह उससे पहले है”]

श्री माताजी : कृपया बैठ जाइए। मैं थोड़ा पानी लुंगी। शादियां अब हो चुकी हैं?

वॉरेन: वे अगले दरवाजे पर जा रहे हैं, माँ।

श्री माताजी: (हँसते हुए) मैंने सोचा कि विवाह समाप्त होने के बाद मुझे यहाँ आना चाहिए।

इसे मेरी पीठ पर रखना बेहतर होगा, […]

The Innocence of a Child & purpose of Ganapatipule, Evening Program, Eve of Shri Mahaganesha Puja Ganapatipule (भारत)

एक बच्चे सी अबोधितागणपतिपुले (भारत), 31 दिसंबर 1985।

गणपतिपुले एक बहुत ही खूबसूरत जगह थी और आप सभी के लिए बहुत सुकून देने वाली जगह थी इसके अलावा यहांआने का मेरा एक विशेष उद्देश्य था । कारण यह है कि – मैंने पाया कि इस जगह में चैतन्य थे जो आपको बहुत आसानी से स्वच्छ कर देंगे, सबसे पहले। लेकिन आपको इसकी इच्छा करनी होगी, वास्तव में, तीव्र्ता के साथ। आपको वह इच्छा रखनी चाहिए अन्यथा कुंडलिनी नहीं उठ सकती है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है; […]

The English Are Scholars, Seminar Totley Hall Training College, Sheffield (England)

“अंग्रेज विद्वान हैं”अंग्रेज संगोष्ठी, शेफ़ील्ड (यूके), 21 सितंबर 1985।

जैसा कि मैंने कल कहा, यह क्षेत्र है; वह क्षेत्र जहाँ प्रबोध को आना है। इतने दीपों से क्षेत्र को जगमगाना पड़ता है। और यह क्षेत्र जो प्रबुद्ध है, प्रकृति से भी समृद्ध है। और जब तुम गा रहे थे, तो मुझे लगा कि बादल स्वरों को पकड़ रहे हैं, उन्हें अपने भीतर बुन रहे हैं और जब बारिश होगी, तो बारिश फिर से गीत गाएगी; मानो घाटियाँ इतनी खूबसूरती से गूंज रही हों। और प्रतिध्वनि बहुत कोमल थी और पूरे वातावरण को भर रही थी।

शायद आपको ईश्वरीय सूक्ष्मता के बारे में पता नहीं है कि वह इसे कार्यांवित करने के लिए कितना उत्सुक है । लेकिन हमारे यंत्र हमारी तुरहियां और हमारी बांसुरी और हमारे ढोल ठीक होने चाहिए। तालमेल होना चाहिए, […]

The Priorities Are To Be Changed Chelsham Road Ashram, London (England)

प्राथमिकताओं को बदला जाना है
चेल्शम रोड, क्लैफम लंदन (यूके), 6 अगस्त 1985।
अब मेरा इंग्लैंड में प्रवास अपना 12वां वर्ष पूरा कर रहा है और यही कारण है कि मैं आप लोगों से सहज योग के बारे में बात करना चाहती थी। यह कहां तक चला गया है और हमारे पास कहां कमी है।
सबसे बड़ी बात यह हुई है कि हमने अपने धर्म की स्थापना की है: निर्मल धर्म, जैसा कि हम इसे कहते हैं, […]

Seminar, Mahamaya Shakti, Evening, Improvement of Mooladhara University of Birmingham, Birmingham (England)

                                            महामाया शक्ति

बर्मिंघम सेमिनार (यूके), 20 अप्रैल 1985. भाग 2

श्री माताजी: कृपया बैठे रहें।

क्या यह सब ठीक है?

क्या आप ठीक रिकॉर्ड कर रहे हैं?

सहज योगी: हाँ माँ

तो इसी तरह से महामाया के खेल होते हैं | उन्होंने हर चीज की योजना बनाई थी। उनके पास सारी व्यवस्था बनायीं थी और साड़ी गायब थी। ठीक है। तो उन्होंने आकर मुझे बताया कि साड़ी गायब है, तो अब क्या करना है? उनके अनुसार, […]

A New Era – Sacrifice, Freedom, Ascent Bordi (भारत)

                                एक नया युग – त्याग, स्वतंत्रता, उत्थान

 बोरडी (भारत), 6 फरवरी 1985।

आप सभी को यहां देखकर मुझे अपार हर्ष हो रहा है। मुझे नहीं पता कि मेरी तरफ से क्या कहना है। शब्द खो जाते हैं, उनका कोई अर्थ नहीं है।

आप में से बहुत से लोग उस अवस्था में जाने के इच्छुक हैं, जहाँ आपको पूर्ण आनंद, कल्याण और शांति मिलेगी। यही है जो मैं आपको दे सकती हूं। और एक माँ तभी खुश होती है जब वह अपने बच्चों को जो दे सकती है वह दे पाती है। उसकी नाखुशी, […]

Put me in your Heart Chelsham Road Ashram, London (England)

                 “मुझे अपने दिल में रखो”

चेल्शम रोड, लंदन (यूके), 5 अक्टूबर 1984

श्री माताजी : कृपया बैठ जाइए। ठीक है।

योगी: क्योंकि आज हम कुछ समय के लिए अपनी मां को और ऑस्ट्रेलिया के अपने आदरणीय भाई डॉ वारेन को भी विदाई दे रहे हैं, जिन्होंने यहां रहते हुए अथक परिश्रम किया है। हमारी माँ की ओर से और हमारी ओर से, और इस देश में काम करने में मदद करने के लिए पर्दे के पीछे जबरदस्त काम किया; […]

Talk to Sahaja Yogis: The Time of Destruction Milan (Italy)

                    “विनाश की बेला” 

सहज योगियों से बात 

 इटली, १९८४, सितंबर, १८ 

श्री माताजी : धुआँ। धुएं की तरह।

सहज योगी: “फुमो”।

श्री माताजी: और यह कितनी बेतुकी जगह है। और हैरानी की बात यह भी है कि हर 28 मिनट में एक जगह धरती मां से हर 28 मिनट में पानी निकलता है। यह ठीक 28 मिनट के बाद फव्वारे की तरह निकल पड़ता है। यह एक बहुत ही मज़ेदार जगह है और बहुत सारी सल्फर है, […]

Raksha Bandhan and Maryadas (England)

(परम पूज्य श्रीमाताजी निर्मला देवी, रक्षाबंधन, मर्यादा, लंदन, 1984)

यू.के. के इस सुंदर दौरे के बाद मुझे भरोसा हो चला है कि सहजयोग ने अब अपनी जड़ें पकड़ ली हैं और उनमें से कुछ पौधों को उगते हुये भी आप देख सकते हैं। यह हैरान करने वाली बात है कि जैसे ही मैंने घोषणा की कि यह मेरा यू.के. का यह आखिरी दौरा होगा तो सब कुछ क्रियान्वित होने लगा है। जहां-जहां भी हम गये हमारा दौरा सफल और अच्छा रहा खासकर कुछ स्थानों पर तो यह अत्यंत चमत्कारपूर्ण भी था। आपने उस महिला के बारे में तो अवश्य ही सुना होगा जो अपने घर से बाहर निकलती ही नहीं थी …….. […]

Talk to doctors: the fourth dimension and the parasympathetic Brighton (England)

               श्री माताजी की डॉक्टरों से बातचीत

ब्राइटन (यूके), 26 जुलाई 1984।

श्री माताजी: जिस चौथे आयाम के बारे में उन्होंने उल्लेख किया है, वे उसका क्या अर्थ लगाते है? वह महत्वपूर्ण बात है।

वारेन: वे उस अतींद्रिय अवस्था को कहते हैं।

श्री माताजी: लेकिन क्या?

वारेन: वे इसका वर्णन नहीं कर सकते।

(यहाँ माँ फिर से कहती है “क्या?”, जबकि वॉरेन शब्द “वर्णन” कह रहा है)

श्री माताजी: वे इसका वर्णन नहीं कर सकते, आप देखिए। मान लें कि किसी के दिल की धड़कन कम है, […]

Parent’s day celebrations New Delhi (भारत)

माता-पिता का बच्चों के साथ सहज मन्दिर, दिल्ली, १५ दिसम्बर १९८३

स आज मैं आपको एक छोटी-सी हजयोग क्या है और उसमें मनुष्य क्या-क्या पाता है, आप जान सकते हैं। लेकिन बात बताने वाली हूँ कि माता-पिता का सम्बन्ध बच्चों के साथ कैसा होना चाहिए। सबसे पहले बच्चों के साथ हमारे दो सम्बन्ध बन ही जाते हैं, जिसमें एक तो भावना होती है, और एक में कर्तव्य होता है। भावना और कर्तव्य दो अलग-अलग चीज़ बनी रहती हैं। जैसे कि कोई माँ है, […]

Talk to Sahaja Yogis, Money, Sleep, Bhoots, Lethargy Surbiton Ashram, Surbiton (England)

                                             पैसा-भूत-नींद-आलस्य

आश्रम में बात, दीवाली पर माँ के साथ अलाव रात

सर्बिटन (यूके), 5 नवंबर 1983।

मैंने पुरे अमेरिका की एक अति व्यस्त, कठिन यात्रा की है और यह मेरी अपेक्षा से बहुत अधिक था, इसने बहुत अच्छा काम किया और मैं इसके बारे में बहुत खुश हूं। सभी अमेरिकी इंग्लैंड और अन्य देशों के सहज योगियों के बहुत आभारी हैं जिन्होंने इस दौरे में योगदान दिया है और विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिन्होंने यात्रा की और चक्कर लगाया और उन्हें व्यवस्थित किया। इसलिए मैं आपको बताती हूं कि वे बहुत आभारी हैं, […]

Left Mooladhara and Supraconscious, Meditation Dhule (भारत)

                            बायाँ मूलाधार और अग्रचेतना, मकर संक्रांति 

धूलिया, (भारत), 13 जनवरी 1983।

भारत में हम सूर्य की कक्षा में परिवर्तन का जश्न मनाते हैं। चूँकि अब वह मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर मुड़ जाता है। इसलिए ऐसा है?

तो, अब इस देश में गर्मी अधिक होने वाली है। तो गर्मी की तैयारी के लिए और इसके लिए लोगों को तैयार करने के लिए वे थोड़ा गुड़ और तिल या चीनी और तिल देते हैं और कहते हैं कि “हम आपको मीठा देते हैं इसलिए आप भी मीठा बोलें”, […]

Talk about Shri Saraswati and the Veena Kolhapur (भारत)

श्री सरस्वती और वीणा 
 1983, कोल्हापुर, भारत
जो सज्जन साथ दे रहे हैं, उनका नाम मिस्टर चटर्जी है लेकिन मैंने आज तक कभी किसी को तबले पर इतनी अच्छी तरह से ताल बजाते हुए नहीं देखा। तबले पर सभी उत्तर भारतीय ताल को बजाना ठीक है, लेकिन दोनों को मिलाना और तबले पर दक्षिण भारतीय तालों का प्रबंधन पहली बार मैं देख रही हूं। अन्यथा वे आम तौर पर मृदुंगम का उपयोग करते हैं।
यह उन चीजों का एक बहुत ही अनूठा संयोजन है, […]

Mental Projection, Guru Puja Evening Talk Nirmala Palace – Nightingale Lane Ashram, London (England)

[Translation English to Hindi]

                 

मानसिक कल्पना

सहज योगियों से बातचीत  

निर्मला पैलेस आश्रम, नाईट एंगल लेन

1982-04-07

नोट [कृपया ध्यान दें श्री माताजी उस समय उपस्थित भारतीय नर्तकियों के लिए अनुवाद करती हैं और मैंने इसे कोष्ठक में (भारतीय भाषा में बोलती है) के रूप में चिह्नित किया है।]

श्री माताजी: क्या आप कल सुबह आ सकते हैं, उन्होंने कहा कि शायद यह कल के बाद से बेहतर होगा, ….कुछ न कुछ तर्क संगत, मैंने कहा। ????कृपया बैठ जाइये। अभी वीडियो रिकार्डिंग क्यों कर रहे है आप इसे क्यों रखना चाहते हैं? […]

Talk to Sahaja Yogis, Open Your Heart, Seminar 4th Session (भारत)

योगीयों से बातचीत लोनावाला (भारत), 25 जनवरी 1982

सारी दुनिया से इतने सारे सहज योगियों से मिलने और उनसे बात कर पा कर बहुत खुशी है। वे मुझे विश्व में सबसे अच्छी समझते हैं|, इस पूरे विश्व में एक ऐसे व्यक्ति के साथ जो की सहज योगी नहीं है तालमेल होना असंभव है| यहां तक कि अगर आप उन्हें आत्मसाक्षात्कार भी देते हैं, यदि वे सहज योगी नहीं बनते हैं, तो उन्हें अपने स्वयं के अस्तित्व की सूक्ष्मता भी समझने में मुश्किल हो सकती है। आज, […]

Subconscious, Supraconscious and Our Correct Ideals Chelsham Road Ashram, London (England)

                     अवचेतन, अतिचेतन

 चेल्शम रोड, क्लैफम, लंदन (यूके) 24 मई 1981

…इन लोगों ने इसे देखा और सोचा वे एक तरह के पागल लोग हैं। ऐसी सभी प्रकार की संभावित बातें। और नया सिद्धांत यह है कि मन कुछ नहीं कर सकता। लोग कहते हैं कि बेहतर होगा कि आप कुछ ऐसा करें जो आपके मन के नियन्त्रण के बाहर हो, आप देखिए।

लेकिन इसका एक आसान सा जवाब है; मैं कहती हूँ देखते हैं, सरल उत्तर क्या है? […]

You are to become Prophets, Guru Nanak’s Birthday Puja Temple of All Faiths, Hampstead (England)

                  “तुम्हें पैगंबर बनना है”

 गुरु नानक जयंती पूजा 

 हैम्पस्टेड मंदिर, लंदन (यूके), २३ नवंबर १९८०।

आज गुरु नानक के जन्मदिन का विशेष दिन है। हमने एक गुरु पूजा मनाई है और जैसा कि आप जानते हैं कि गुरु नानक भी आदि गुरु के अवतार थे। वही आत्मा इस पृथ्वी पर आई। और वह वही है जिसने मोहम्मद के काम को फिर से स्थापित करने की कोशिश की।

मोहम्मद उसी आत्मा के अवतार थे – आदि गुरु। वह इस धरती पर धर्म की स्थापना के लिए आए थे। इस्लाम उस धर्म का नाम है, […]

How To Know Where You Are Chelsham Road Ashram, London (England)

                  सलाह, कैसे पता करें कि आप कहां हैं     

 चेल्सीम रोड आश्रम, क्लैफम, लंदन (यूके) , 7 सितंबर 1980

… तस्वीरों के सम्मुख चैतन्य, जो की, बहुत महत्वपूर्ण है। जहां तक परमात्मा का संबंध है, कैसे जाने की आपकी स्थिति कहाँ है। यह मुख्य बात है, क्या ऐसा नहीं है? हम इसी के लिए यहां हैं: ईश्वर से एकाकारिता के लिए, उसकी शक्ति के साथ एकाकार  होने के लिए, उसका उपकरण बनने के लिए। , हमें इसे समझने की कोशिश करनी चाहिए की हमारे कनेक्शन कैसे ढीले हो जाते हैं, […]

Guru Tattwa Caxton Hall, London (England)

अबोधिता में निहित सार

कैक्सटन हॉल, लंदन (यूके), 23 जून 1980। सार्वजनिक कार्यक्रम (लघु) और सहज योगियों से बात

यह एक तथ्य है। यह एक ऐसी चीज है जिसे आप देख सकते हैं। यह एक वास्तविकीकरण है। और हम अपनी कल्पनाओं में, अपने मतिभ्रम और पथभ्रष्टता में इस कदर खोए हुए हैं कि हम विश्वास नहीं कर सकते कि ईश्वर के बारे में कुछ तथ्यात्मक हो सकता है।

लेकिन अगर ईश्वर एक तथ्य है, तो यह घटना भी हमारे भीतर होनी ही है, […]