Shri Rajalakshmi Puja New Delhi (भारत)

Shri Rajalakshmi Puja, Nizamuddin Scout Ground, New Delhi (India), 4 December 1994.
[Shri Mataji (in Hindi: Sorry I am late, my granddaughter is a little sick and I stayed back to make her better. First I will speak in English and then in Hindi].
Today we are going to worship Rajalakshmi, means the Goddess which rules the kings. It’s a very important thing today to understand that something has basically gone wrong in the working of our political systems and why the people have lost their sense of justice, […]

Shri Bhavasagara Puja 1991 (Australia)

(श्रीभवसागर पूजा, ब्रिसबेन (ऑस्ट्रेलिया), 6 अप्रैल 1991।
(संदीप दुरूगकर की पोस्ट का हिंदी अनुवाद)
आज मैं आप सबको बताना चाहती हूं कि आपको अपने अंदर गहनता को प्राप्त करना होगा। यदि आप उस गहनता को अपने अंदर प्राप्त नहीं कर पाते हैं तो अभी भी आप साधारण दर्जे के सहजयोगी ही हैं। वास्तव में देवी और उनकी शक्तियों के विषय में पहले कभी भी किसी को नहीं बताया गया … कभी भी नहीं। इस विषय में उन्हें पूरी तरह से तब पता चला जब परमात्मा से उनकी एकाकारिता स्थापित हो पाई। इससे पहले उन्हें इस विषय पर बिल्कुल कुछ पता ही नहीं चल पाता था।
आज सहजयोग का जमाना है और जैसे ही आपको आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है वैसे ही आप अन्य लोगों को भी साक्षात्कार दे सकते हैं। तुरंत ही कुंडलिनी आपके हाथों की गति के अनुसार गति करने लगती है। आप अपना हाथ किसी के भी सिर पर रखें तो उस व्यक्ति को आत्मसाक्षात्कार मिल जायेगा। यह सच्चाई है। कुंडलिनी इसी प्रकार से कार्य करती है। लेकिन कुछ लोग सोचते हैं कि अब हमको कुछ नहीं करना है … […]

Shri Fatima Puja Saint-George (Switzerland)

                                 श्री फातिमा पूजा

सेंट जॉर्जेस, स्विट्जरलैंड, 14 अगस्त 1988।

आज हम फातिमा बी की पूजा करने के लिए इकट्ठे हुए हैं, जो कि गृह लक्ष्मी का प्रतीक थी, और इसलिए हम अपने भीतर गृह लक्ष्मी सिद्धांत की पूजा करने जा रहे हैं। जिस तरह गृहिणी को हर काम, घर की हर चीज पूरी करना होती है और फिर वह नहाने के लिए जाती है, उसी तरह आज सुबह ,मुझे भी बहुत सारे काम करने थे और फिर मैं आपकी पूजा के लिए आ सकती थी, […]

Guru Puja (Austria)

Guru Puja
आपका चित्त कहाँ है? यदि आप गुरू हैं तो फिर आपका चित्त कहाँ है? यदि आपका चित्त लोगों को व स्वयं को सुधारने और अपना पोषण करने पर है तो फिर आप सहजयोगी हैं। फिर आप गुरू कहलाने योग्य हैं। जो भी चीज जीवंत है वह गुरूत्वाकर्षण के विपरीत एक सीमा तक उठ सकती है …. ये सीमित है। जैसे कि हमने पेड़ों को देखा है… वे धरती माँ की गोद से बाहर आते हैं और ऊपर की ओर बढ़ते हैं लेकिन केवल एक सीमा तक ही। हर पेड़ … […]

Guru Puja: Awakening the Principle of Guru Lodge Hill Centre, Pulborough (England)

गुरु पूजा                             
“गुरु के सिद्धांत को जागृत करना”
लॉजहिल (यूके), 24 जुलाई 1983

आज आप सभी यहाँ गुरु पूजा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। आपकी गुरु, पहले एक माँ है और फिर एक गुरु है और इस बात ने मेरी बड़ी मदद की है। हमने पहले भी कई गुरु पूजन किए हैं, ज्यादातर इंग्लैंड में। और आपको आश्चर्य होना चाहिए कि माँ हमेशा किसी भी तरह गुरु पूजा लंदन में क्यों कर रही हैं। समय चक्र हमेशा इस तरह से चलता है कि, […]

दिवाली पूजा London (England)

दिवाली पूजा चेल्शम रोड आश्रम, लंदन (यूके) – 1 नवंबर, 1981
आज मैंने आपको लक्ष्मी सिद्धांत के महत्व और तीन प्रक्रियाओं के बारे में बताया जिनसे हम गुजरते है । पहला गृह लक्ष्मी है। असल में,अधिकतर यह चंद्रमा के तेरहवें दिन मनाया जाता है, जहां वे कहते हैं कि गृहिणी को कुछ उपहार देना चाहिए। और सबसे अच्छी चीज जो है वह एक बर्तन है। तो लोग उसे कुछ बर्तन देते हैं, वास्तव में यह एक बहुत ही पारस्परिक बात है, […]

Guru Purnima London (England)

आपको समझना होगा कि स्वयं से इस भौतिकता के लबादे को हटाने के लिये आपको अपने ऊपर कार्य करना होगा। और एक बार जब आपने इसे नियिंत्रत कर लिया तो कम से कम ….. अब आप कहीं भी सो सकते हैं अगर नहीं तो कुछ समय तक जमीन पर सोने का प्रयास करें। सन-टैनिंग के लिये आप क्या नहीं करते हैं … लोग इन बेवकूफियों के लिये स्वयं को रोक ही नहीं सकते हैं क्योंकि इन विचारों को आपके अंदर डाला गया है। इन विचारों को डालने वालों ने आपको शोषण किया है … […]