Shri Krishna Puja पुणे (भारत)

Hindi Transcript of Shri Krishna Puja. Pune (India), 9 August 2003.

हम लोगों को अब यह सोचना है कि सहजयोग तो बहुत फैल गया और किनारे किनारे पर भी लोग सहजयोग को बहुत मानते हैं। लेकिन जब तक अपने अन्दर सहजयोग वायवास्तीह रूप से प्रकटित नहीं होगा तब तक जैसा लोग सहजयोग को मानते हैं वो मानेगें नहीं। इसलिए ज़रूरत है कि हम कोशिश करें कि अपने अन्दर झांकें। यही कृष्ण का चरित्र है कि हम अपने अन्दर झांके और देखें जाने की कौन सी ऐसी चीजे हैं जो हमें दुविधा में डाल देती हैं। इसका पता लगाना चाहिए। हमें अपने तरफ देखना चाहिए, […]

Shri Hanumana Puja पुणे (भारत)

Shri Hanumana puja. Pune (India), 31 March 1999.

[Hindi Transcript]

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari आज हम लोग श्री हनुमान जी की जयन्ती भी चित्र बनाते हैं तो पहले हनुमान जी का ही मना रहे हैं हनुमान जी के बारे में क्या कहें कि वो जितने शक्तिवान थे जितने गुणवान थे उतने ही वो श्रद्धामय और भक्तिमय थे। अधिकतर, ऐसा मनुष्य जो बहुत शक्तिवान हो जाता है, बहुत जो कुछ भी हमने अपने उत्क्रान्ति में, […]

Public Program New Delhi (भारत)

Sarvajanik Karyakram 22nd March 1993 Date : Place Delhi : Public Program Type

[Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

सहजयोग का ज्ञान सूक्ष्मज्ञान है और सूक्ष्मज्ञान को प्राप्त करने कास्प पे दोड़ते रहते हैं। आज ये विचार आया। कल ये विचार के लिये, हमें भी सूक्ष्म होना है। ये सूक्ष्मता क्या है कि हमें आत्मा स्वरुप होना चाहिये। आत्मा से ही हम इस सूक्ष्म ज्ञान को समझ चढ़ती है तो क्या होता है कि विचार कुछ लम्बा हो जाता है। सकते हैं। क्योंकि आत्मा का अपना प्रकाश हैं और वो प्रकाश इन दोनों विचारों के बीच में जो स्थान है उसे विलम्ब कहते हैं। जब हमारे ऊपर प्रगटित होता है तो उस आत्मा के प्रकाश में इस विलम्ब स्थिति में आप आ जाते हैं और विलम्ब की स्थिति ही हम इस सूक्ष्मज्ञान को जानते हैं ये हमारे ही अन्दर की आत्मा जो बहुत संकीर्ण होती है वो बढ़ जाती है। ये हो वर्तमान है। है। ये परमात्मा का प्रतिबिम्ब हमारे ही अन्दर आत्मा स्वरुप है और कुण्डलिनी परमात्मा की इच्छा शक्ति आदि शक्ति का से सतर्क है, […]

Public Program, Satya aatma ke prakash men hi jana ja sakta hai (भारत)

Sarvajanik Karyakram 12th March 1989 Date : Noida Place Public Program Type Speech Language Hindi

सत्य को खोजने वाले सभी साधकों को हमारा प्रणाम ! सब से पहले तो बड़ी दुःख की बात है, कि इतनी देर से आना हुआ और एरोप्लेन ने इतनी देरी कर दी और आप लोग इतनी उत्कंठा से और इतनी सबूरी के साथ सब लोग यहाँ बैठे हये हैं। और हम, असहाय माँ, जो सोच रही थी कि किस तरह से वहाँ पहुँच जायें? […]

Sahaj Yogiyon Ko Upadesh Ganapatipule (भारत)

सहजयोगियों को उपदेश

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK सबसे पहले एक बात समझ लेनी चाहिए कि यहाँ जो बंबई वाले और दिल्ली वाले लोग आये हैं ये मेहमान नहीं हैं। मेहमान जो लोग बाहर से आये हैं वो हैं। बसेस उनके पैसे से आयी हैं। आप तो एक पैसा भी नहीं दे रहे उसके लिए। एक कवडी भी नहीं दे रहे हैं। बसेस उनकी हैं, वो सब बसेस मार कर आप लोग यहाँ आ गये। यहाँ | बसेस छोड़ दिये, […]

Mahashivaratri Puja New Delhi (भारत)

Mahashivaratri Puja Date : 17th February 1985 Place Delhi Туре Puja Speech Language Hindi

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari अपनी कुण्डलिनी को नीचे नहीं गिरने दें । आज शिवरात्रि के इस शुभ अवसर पे हम लोग एकत्रित हुए हैं और ये बड़ी भारी बात है कि हर बार जब भी शिवरात्रि होती है मैं तो दिल्ली में रहती हूँ। हमारे सारे शरीर, मन, बुद्धि, अहंकार, सारे चीजों में सबसे महत्वपूर्ण चीज है आत्मा और बाकी सब कुण्डलिनी इसलिए नीचे गिरती है क्योंकि हमारे अन्दर बहुत से पुराने विचार, […]

New Year Puja, Who Is A Sahaja Yogi? New Delhi (भारत)

1984-01-03, New Year Puja: Who Is A Sahaja Yogi?, Delhi

Nav Varsh Puja – S. Sahajyogi Ki Pahechan 3rd January 1984 Date : Place Delhi :

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Nirmala Yog लेकिन माँ की व्यवस्था और है कि पहले चैतन्य को पा लो. जान लो कि परमात्मा है, उस पर विश्वास करो जो अन्धविश्वास नहीं है, सत्य के रूप हर साल नया साल आता है और पुराना साल खत्म हो जाता है। सहजयोगियों के लिए हर क्षण एक नया साल है, […]

Tattwa Ki Baat New Delhi (भारत)

1981-02-15 Talk at Delhi University 1981: Tattwa Ki Baat 1, Delhi

Tattwa Ki Baat – 1 Date 15th February 1981 : Place Delhi Public Program Type Speech Language Hindi CONTENTS | Transcript | 02 – 18 Hindi English Marathi || Translation English Hindi 19 – 30 Marathi

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindii Chaitanya Lahiri कल मैंने आपसे कहा था कि………….. है? अगर धरती माता की वजह से ही सारा कार्य आज आपको तत्व की बात बतायेंगे जब हो रहा है तो घरती माता की वजह से यह जो हम एक पेड़ की ओर देखें और उसका उन्नतिगत पत्थर है वो क्यों नहीं पनपता ? […]

What To Do After Self-realisation and Sahasrara Chakra, Delhi New Delhi (भारत)

1981-02-10 What To Do After Self-realisation and Sahasrara Chakra, Delhi (PP)

सहजयोग में प्रगति नई दिल्ली, १० फरवरी १९८१ यहाँ कुछ दिनों से अपना जो कार्यक्रम होता रहा है उसमें मैंने आपसे बताया था कि कुण्डलिनी और उसके साथ और भी क्या-क्या हमारे अन्दर स्थित है। जो भी मैं बात कह रही हूँ ये आप लोगों को माननी नहीं चाहिए लेकिन इसका धिक्कार भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये अन्तरज्ञान आपको अभी नहीं है । और अगर मैं कहती हूँ कि मुझे है, […]

Do Sansthaye – Man Aur Buddhi , Seminar for the new Sahaja yogis Day 2 Cowasji Jehangir Hall (भारत)

1980-01-29, Seminar for the new Sahaja yogis Day 2, Bordi

[Hindi Transcript]

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK कल आपको प्रस्तावना मैं मैंने बताया, कि जो आप हैं वो किसलिये संसार में आये हैं। परमात्मा ने इतनी मेहनत से आपको क्यों इन्सान बनाया? और इस इन्सान का क्या उपयोग है? इसके लिये परमात्मा ने हमारे अन्दर जो जो व्यवस्था की है वो अतीव सुन्दर है। और बड़ी मेहनत ले कर के बड़ी व्यवस्था की गयी। और सारी तैय्यारियाँ अन्दर जुट गयी। लेकिन जिस वक्त मनुष्य को स्वतंत्रता दी गयी, […]

5th Day of Navaratri Celebrations, Guru Tattwa (Mahima) and Shri Krishna मुंबई (भारत)

5th Day of Navaratri Celebrations, Guru Tattwa (Mahima) and Shri Krishna

[Hindi Transcript]

गुरू तत्व और श्रीकृष्ण शक्ति २६ सितम्बर १९७९, मुंबई अभी तक के लेखों के अनुसार अपने शरीर में अलग-अलग देवताओं के विशिष्ट स्थान हैं। सद्गुरु का भी स्थान अपने शरीर में है और यह स्थान हमारे शरीर में हमारी नाभि के चारों तरफ है। नाभिचक्र पर श्री विष्णुशक्ति का स्थान है। विष्णुशक्ति के कारण ही मानव की अमीबा से उत्क्रान्ति हुई है। और इसी विष्णुशक्ति से ही मानव का अतिमानव होने की घटना घटित होगी। सद्गुरु का स्थान आप में बहुत पहले से स्थित है। अब गुरूतत्व कैसा है यह समझने की कोशिश करते हैं । गुरुतत्व अनादि है। आप में अदृश्य रूप से तीन मुख्य शक्तियाँ कार्यान्वित हैं। इसमें से पहली शक्ति को हम श्री महाकाली की शक्ति, […]

Public Program, Chitta Ke Gaharai Bordi (भारत)

Public program (Hindi). Bordi Shibir, Maharashtra, India. 24 March 1979.

[Hindi Transcript]

आप लोग सब सहजयोग में आये हैं। कुछ लोग पहले से आये हैं, बहुत सालों से और कोई लोग नये हैं। धीरे- धीरे सहजयोग में संख्या बढ़ने वाली है इसमें कोई शक नहीं है और सत्य जो है वो धीरे -धीरे ही प्रस्थापित होता है। सत्य की पकड़ धीरे-धीरे होती है। आपके यहाँ ऐसे लोग हैं जो आठ-आठ, नौ-नौ महिनों तक सहजयोग में आते रहे और उसके बाद पार हुए। सत्य को पाने के लिये हमारे अन्दर पहले तो गहराई होनी चाहिए। पर सबसे बड़ी चीज़ है हमारे अन्दर सफाई होनी चाहिए। अब अनेक गुरुओं के बीच में जाकर के हमारा चित्त जो है वो बुरी तरह से विक्षिप्त हो जाता है । दूसरा, […]

Seminar Day 2 New Delhi (भारत)

Seminar in Delhi (India), 10 March 1979.

भारतवर्ष योगभूमि , सेमिनार दिल्ली, १०/३/१९७९ आज सबेरे मैंने आपसे बताया था अंग्रेजी में कि परमात्मा ने हमें जो बनाया है, आप इसे माने या न माने, उसका अस्तित्व आप समझे या न समझे वो है। और उसने हमें जिस प्रकार बनाया, जिस तरह से बनाया है वो भी | एक बड़ी खूबी की चीज़ है। मैंने सबेरे बताया था कि कैसे बहुत थोड़े से समय में एक अमीबा जैसे प्राणी से मनुष्य बनाया गया। और आप को मनुष्य बनाया गया सो क्यों? […]

Seminar (भारत)

Seminar (Hindi). Dheradun, UP, India. 4 March 1979.

परमात्मा सब से शक्तिशाली है देहरादून, ४ मार्च १९७९ आज मैंने आपसे सबेरे बताया था कि कुण्डलिनी के सबसे पहले चक्र पे श्री गणेश जी बैठते हैं, श्री गणेश का स्थान है और श्री गणेश ये पवित्रता के द्योतक हैं। पवित्रता स्वयं साक्षात ही है। वो तो पहला चक्र हुआ। और ये चक्र जो है कुण्डलिनी से नीचे है वो कुण्डलिनी की रक्षा ही नहीं करता है, लेकिन वो लोग जो कुण्डलिनी में जाते हैं उनसे पूरी तरह से सतर्क रहते हैं। इस रास्ते से कोई भी कुण्डलिनी को नहीं छू सकता है। आज सबेरे मैंने आपसे बताया था कि इस रास्ते से जो लोग कोशिश करते हैं वो बड़ा ही महान पाप करते हैं। हालांकि उससे थोड़ा बहुत रुपया-पैसा कमा सकते हैं। लेकिन अपने लिए जो पूँजी इकठ्ठी करते हैं, […]

Public Program Balmohan Vidyamandir, मुंबई (भारत)

Public Program

[Hindi Transcript]

Parmatma Ka Prem Date : 26th December 1975 Place Mumbai Type Seminar & Meeting Speech Language Hindi CONTENTS | | Transcript Hindi 02 – 09 English Marathi || Translation English Hindi Marathi

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK सत्य को खोजने वाले आप सब को मेरा वंदन है। के उपरान्त जो कुछ भी कहना है, आज आप से आगे की बात मैं करने वाली हूँ। विषय था, ‘एक्सपिरिअन्सेस ऑफ डिवाईन लव’। परमात्मा के कल आप बड़ी मात्रा में भारतीय विद्या भवन में उपस्थित हये थे और उसी क्षण प्रेम के अनुभव। इस आज के साइन्स के युग में, […]

Public Program 2, Science, Trigunatmika मुंबई (भारत)

Trigunatmika Date 30th March 1975 : Place Mumbai : Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

अधिकतर प्रगल्भ है. developed है मनुष्य पूरी तरह से इन तीन शक्तियों में पूर्णतया कल मैंने आपसे बताया था, सबको सुनाई दे रहा है या नही ? पीछे में सुनाई दे रहा है ? आपसे मैंने यह बताया था कि मनुष्य का शरीर उसका मन, उसकी बुद्धि, आदि उसका जितना भी पूरा व्यक्तित्व है. […]

Public Program, Parmatma ka swarup मुंबई (भारत)

Parmatma Ka Swarup 3rd March 1975 Date : Place Mumbai Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

जगह खरीदने के लिये दो लाख बीस हजार रूपया चाहिये। कोई आसान काम नहीं है। इसलिये जितना बन पड़े उतना दे दें। जगह अपने ही लिये, अपने बच्चों के लिये हो जायेगी और वहाँ पर मेडिटेशन तो होगा ही लोगों का। क्यूअर भी होंगे, पार भी होंगे लोग। और बहुत बड़ा धर्म का कार्य है। अपने धर्म के लिये हम लोगों ने खर्चा ही नहीं किया है । अपने बारे में ही सोचते रहते है। सेल्फ सेंटर्ड। कोई धर्म भी करो । धर्म के बगैर संसार में कुछ अधर्म आ जायेगा। अधर्म आ जायेगा तो तुम्हारे पैसे का भी तुमको सुख नहीं मिलने वाला। तुम्हारे बच्चों का तुमको सुख नहीं मिलने वाला। किसी चीज़ का नहीं। धर्म की स्थापना के लिये वो जगह बना रहे हैं। आपको मालूम है, […]

Talk to Yogis, Must listen every day मुंबई (भारत)

मैं आज फिर से बता रही हूं कि निर्विचारिता आपका किला है….(योगियों से बातचीत, मुंबई, 25 जनवरी 1975 )

केवल एक ही तरीका है जो मैं हजारों बार बता चुकी हूं और आज फिर बता रहीं हूं कि निर्विचारिता आपका किला है। निर्विचारिता में कुछ भी आप जानें तो आप सब कुछ जान जायेंगे। जो कुछ भी आप करना चाहते हैं तो निर्विचारिता में चले जाइये। एक बार जब आप निर्विचारिता में सांसारिक कार्यों को करने लगते हैं तो आपको पता चलेगा कि यह कितना गतिशील या डायनेमिक हो चुका है। फूलों को खिलते हुये या फल बनते हुये किसने देखा है ? […]

Public Program Birla Kreeda Kendra, मुंबई (भारत)

Public Program, Sarvajanik Karyakram – Birla Kendra Date 8th December 1973 : Place Mumbai

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK .बीचोंबीच जाने वाली शक्ति उनसे जा कर के हमारे रीढ़ की हड्डिओं के नीचे में जो त्रिकोणाकार अंत में जो अस्थि है उसमें जा के बैठ जाती है। इसी को हम कुण्डलिनी कहते हैं। क्योंकि वो साढ़े तीन वर्तुलों में रहती है, कॉइल्स में रहती है, कुण्डों में रहती है। और जो दो शक्तियाँ बाजू में मैंने दिखायी हुई हैं, […]

Seven Chakras and their Deities, Paane ke baad मुंबई (भारत)

1973-11-25 Seven Chakras and their Deities (Paane ke baad) 1973, Mumbai

[Original transcript Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

परमेश्वर की आशीर्वाद की बाणी को सुनना है और कुछ आपको कुछ भी नहीं करने का है सहज में हो जाता सहज शब्द का अर्थ रोजमर्रा भाषा में सहज माने भी नहीं करना है। बस यहीं तक देखते देखते आप अपने आसान। लेकिन सहज शब्द जहाँ से आया वो ‘सह’ और में ही विभोर हो जाइए। अब सिर्फ देखने का होता है “ज’ […]