Birthday Puja Talk New Delhi (भारत)

Birthday Puja, Delhi, India, 3rd of Octoer, 1991 आज आप लोगों ने मेरा जन्म-दिवस मनाने की इच्छा प्रगट की थी I अब मेरे कम-से-कम चार या पांच जन्म-दिवस मनाने वाले हैं लोग I इतने जन्म-दिवस मनाइएगा उतने साल बढ़ते जाएंगे उम्र के I लेकिन आपकी इच्छा के सामने मैंने मान लिया कि इसमें आपको आनंद होता है, आनंद मिलता है तो ठीक है I लेकिन ऐसे दिवस हमेशा आते हैं I उसमें एक कोई तो भी नई चीज हमारे जीवन में होनी चाहिए, क्योंकि हम सहजयोगी हैं, प्रगतिशील हैं, और हमेशा एक नयी सीढ़ी पर चढ़ने का यह बड़ा अच्छा मौका है I सहजयोग में जो आज स्थिति है वो बहुत ही अच्छी है I जबकि हम देश की हालत देखते हैं आज, तो लगता है की सहजयोग एक स्वर्ग है हमने हिंदुस्तान मे खड़ा किया है I और, इसकी जो हमारी एक साधना है, इसमें जो हम समाए हुए हैं, इसका जो हम आनंद उठा रहे हैं, वो एक स्थिति पर पहुंच गया है I और इसका आधार भी बहुत बड़ा है I इसका आधार है कि आपने अपनी शुद्धता को प्राप्त किया है, अपनी शांति को प्राप्त किया और अपने आनंद को प्राप्त किया I यह आपकी विशेष स्थिति है जो औरों में नहीं पाई जाती I और इसको सब लोग देख रहे हैं समझ रहे हैं कि यह कोई विशेष लोग हैं और उन्होंने कोई तो भी विशेष जीवन प्राप्त किया है I मैं जहां भी जाती हूं और जगह, लोग मुझसे बताते हैं कि हम एक Read More …

Public Program Day 1 New Delhi (भारत)

Sarvajanik Karyakram Date 2nd March 1991 : Place New Delhi Public Program Type : Speech Language Hindi [Original transcript Hindi talk, scanned from Hindi Chaitanya Lahari] सत्य को खोजने की जो सत्य को खोजने वाले आप सभी साधकों को हमारा नमस्कार । आवश्यकता हमारे अंदर पैदा हुई है, उसका क्या कारण है ? आप क हैं गे कि इस दुनियां में हमने अनेक कलयु ग में मनुष्य भ्रांति में पड़ गया है, परेशान हो गया है । उसे समझ नही आता कि ऐसा क्यों हो रहा है । तब एक नए तरह के उसको विल्यिम ब्लेक ने ‘मैन । चारों तरफ हाहाकार दिखाई दे रहा है । कष्ट उठाए तकलीफें उठाई मानव की उत्पत्ति हुई है, एक सुजन हुआ है । उसे साधक कहते हैं ऑफ गाड’ कहा है । आजकल तो परमात्मा की बात करना भी मुश्कल है फिर धुम की चर्चा करना तो ही कठिन है क्योंकि परमात्मा की बात कोई करे तो लोग पहले उंगली उठा कर बताएँ गे कि जो में, मस्जिदो में चर्चों में गुल्द्वारां में घूमते है, उन्हंने कोन से बड़े इन्होंने कोन-सी बड़ी शांति से सन्मार्ग से चलते हैं । किसी भी धर्म में कोई भी मनुष्य हो किसी भी धर्म का बहुत लोग बड़े परमात्मा को मानते हैं, मन्दिरों भारी उत्तम कार्य किए है ? आपस में लड़ाई, झगड़ा, तगाशे खड़े किए हैं । दिखाई है ? ये कोन पालन करता है, परमात्गा को किसी तरह से भी मानता हो, लेकिन हर एक तरह का पाप वो कर सकता है । उस Read More …

Diwali Puja: Touch Your Depth Chioggia (Italy)

दीवाली पूजा  चिओगिया, वेनिस (इटली), 21 अक्टूबर 1990। आप सभी को उस जुलूस में शामिल देखकर बहुत आश्चर्य हुआ। दरअसल मैं इंतज़ार कर रही थी और इंतज़ार कर रही थी, और मैंने सोचा, “ये लोग मुझे पूजा के लिए क्यों नहीं बुला रहे हैं?” यह एक सुंदर आश्चर्य था, यह बहुत खुशी देने वाला है। तुम्हारी आँखों में खुशी नाच रही थी। मैं तुम्हारी आँखों में प्रकाश देख सकी थी और यही असली दीवाली है। दीवाली शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘दीपा’ और ‘अवाली’। दीपा का अर्थ है, आप जानते हैं, दीप, और अवाली का अर्थ है रोशनी की पंक्तियाँ, पंक्तियाँ और पंक्तियाँ। ऐसा लगता है कि यह एक बहुत ही प्राचीन विचार है और दुनिया भर में, आप देखिए, जब भी उन्हें कुछ जश्न मनाना होता है तो वे रोशनी करते हैं। और रोशनी क्योंकि रोशनी खुशी देती है, आनंद देती है। इसलिए अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए हमें खुद को भी प्रबुद्ध करना होगा। और इसलिए महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर के प्रकाश को महसूस करने के लिए आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करना चाहिए। और आपने देखा होगा कि आत्मसाक्षात्कार के बाद आंखें भी चमकती हैं। हर सहजयोगी की आँखों में ज्योति है। आज वह दिन है जब हम लक्ष्मी की, लक्ष्मी सिद्धांत की पूजा करते हैं, जो हमारी नाभी में है। लक्ष्मी सिद्धांत जैसा कि समझा जाता है, मैंने आपको कई बार बताया है, लक्ष्मी का वर्णन किया है कि वह कमल पर खड़ी है और उसके हाथों में दो कमल Read More …

Public Program (भारत)

Sarvajanik Karyakram Date 31st March 1990 : Place Yamaunanagar Public Program Type Speech Language Hindi सत्य को खोजने वाले आप सभी साधकों को हमारा नमस्कार! सबसे पहले हमें ये जान लेना चाहिये कि सत्य जहाँ है, वहीं है, उसे हम बदल नहीं सकते| उसे हम मोड़ नहीं सकते। उसे तोड नहीं सकते। वो था, है और रहेगा। अज्ञानवश हम उसे जानते नहीं, लेकिन हमारे बारे में एक बड़ा सत्य है कि हम ये शरीर, बुद्धि आत्मा के सिवाय और कुछ नहीं। जिसे हम शरीर, बुद्धि और अहंकार आदि उपाधियों से जानते हैं वो आत्मा ही है और आत्मा के बजाय कुछ भी नहीं। ये बहुत बड़ा सत्य है जिसे हमें जान लेना चाहिए । दूसरा सत्य है कि ये सारी सृष्टि, चराचर की सृष्टि एक सूक्ष्म शक्ति है, जिसे हम कहेंगे कि परमात्मा की एक ही शक्ति है। कोई इसे परम चैतन्य कहता है और कोई इसे परमात्मा की इच्छाशक्ति कहता है। परमात्मा की इच्छा केवल एक ही है कि आप इस शक्ति से संबंधित हो जायें, आपका योग घटित हो जायें और आप उनके साम्राज्य में आ कर के आनंद से रममाण हो जाए। वो पिता परमात्मा, सच्चिदानंद अत्यंत दयालू, अत्यंत प्रेममय अपने संरक्षण की राह देखता है। इसलिये ये कहना की हमें अपने शरीर को यातना देनी है या तकलीफ़ देनी है ये एक तरह की छलना है। कोई भी बात से जब आप नाराज़ होते हैं तो आप कहते हैं कि अच्छा है,’ इससे कुछ पा कर दुःखी होता है, सुख तो होने वाला नहीं। सो, सिर्फ Read More …

Thinking and How we trigger a cancer Auckland (New Zealand)

                                           सार्वजनिक कार्यक्रम  1990-03-14, ऑकलैंड, न्यूजीलैंड उदाहरण के लिए, हम बहुत मेहनत करते हैं, बहुत ज्यादा सोचते हैं, आप राइट साइडेड हैं; इसकी भरपाई करने के लिए,  कहते हैं, हम स्लिपिंग पिल्स या ड्रिंक्स, या ऐसा ही कुछ लेते हैं, केवल क्षतिपूर्ति करने के लिए। बहुत ज्यादा राईट साइड को हम सहन नहीं कर पाते। लेकिन ऐसा सब करने से आपको कोई मदद नहीं मिलती, क्योंकि आप एक छोर से दूसरे छोर तक झूलते रहते हैं। इसलिए, आपको मध्य में गति करनी होती है, और उसके लिए हमारे भीतर एक विशेष तंत्र है। जैसा कि मैंने कल आपको बताया था, आपको बहुत वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना होगा, अपने दिमाग को खुला रखना होगा। अगर यह काम करता है, तो आपको ईमानदार लोगों के रूप में इसे स्वीकार करना होगा। हम कहते हैं कि हम संशयवादी हैं। ठीक है, लेकिन हम इसके बारे में खुद को खुला रख सकते हैं, क्योंकि आखिरकार, हम परम सत्य तक नहीं पहुंचे हैं। तो, अगर आपको उस सत्य तक पहुंचना है, तो हमें कैसा होना चाहिए? हो सकता है कि भारत के लोगों को इसकी अधिक जानकारी है, आंतरिक दुनिया में उनकी खोजों के कारण। लेकिन, पश्चिम में भी,इस ज्ञान कि आवश्यकता है क्योंकि, जैसा कि मैंने कल कहा था, कि जो पेड़ इतना बड़ा हो गया है, उसे अपनी जड़ों को जानना है। वरना हमेशा कोई एक समस्या होती है, जिसका सामना करना आपको नहीं आता। इसलिए, जैसा कि मैंने आपको जड़ों के बारे में बताया है, अब, बाईं बाज़ू और दाईं बाज़ू, दो अनुकंपी तंत्रिका Read More …

Arrival and Kundalini Puja (भारत)

Kundalini Puja talk Date: 1990/02/05 आप सब लोगों को मिल करके बड़ा आनन्द आया।  और मुझे इसकी कल्पना भी नहीं थी कि इतने सहजयोगी हैद्राबाद में हो गये हैं।  एक विशेषता हैद्राबाद की है  कि यहाँ सब तरह के लोग आपस में मिल गये हैं।  जैसे कि हमारे नागपूर में भी मैंने देखा है कि हिन्दुस्थान के  सब ओर के  लोग नागपूर में बसे हुए हैं।  और इसलिये वहाँ पर लोगों में जो संस्कार हैं,  उसमें बड़ा खुलापन है और एक दूसरे की ओर देखने की दृष्टि भी बहुत खुली हुई है । अब हम लोगों को जब सहजयोग की ओर नये तरीके से मुड़ना है तो बहुत सी बातें ऐसी जान लेनी चाहिये  कि सहजयोग ही सत्य स्वरूप है, और हम लोग सत्यनिष्ठ हैं।  जो कुछ असत्य है,  उसे हमें छोड़ना है।  कभी-कभी असत्य का छोड़ना बड़ा कठिन हो जाता है क्योंकि बहुत दिन तक हम किसी असत्य के साथ जुटे रहते हैं।   फिर कठिन हो जाता है कि उस असत्य को हम कैसे छोड़ें।  लेकिन जब असत्य हम से चिपका रहेगा  तो हमें शुद्धता नहीं आ सकती।  क्योंकि असत्यता एक भ्रामकता है और उस भ्रम से निकलने के लिए हमें एक निश्चय कर लेना चाहिए कि जो भी सत्य होगा उसे हम स्वीकार्य करेंगे और जो असत्य होगा उसे हम छोड़ देंगे।  इसके निश्चय से ही आपको आश्चर्य होगा कि कुण्डलिनी स्वयं आपके अन्दर जो कि जागृत हो गयी है,  इस कार्य को करेगी।  और आपके सामने वो स्तिथि ला खड़ी करेगी कि आप जान जाएंगे कि सत्य Read More …

Reach the Absolute Truth Kyiv, Antonov Aircraft Corp. Palace of Culture (Ukraine)

सार्वजनिक कार्यक्रम दिवस 1 एंटोनोव एयरक्राफ्ट कार्पोरेशन, पैलेस ऑफ कल्चर, कीव,यूक्रेन,यूएसएसआर,  22 अक्टूबर, 1989 मैं सत्य के सभी साधकों को नमन करती हूं। सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि सत्य जो है वह है। हम इसे व्यवस्थित नहीं कर सकते, हम इसे आदेश नहीं दे सकते। और मानवीय स्तर पर हम इसे हासिल नहीं कर सकते। हम अमीबा से इंसानों की इस अवस्था तक बन गए हैं। लेकिन अभी भी हम अपने परम सत्य तक नहीं पहुंचे हैं। कुछ लोग मानते हैं कि अमुक अच्छा है, कुछ लोग मानते हैं कि वह अच्छा है। तो इसके तहत हम भावनात्मक आधार पर या तर्कसंगत आधार पर कुछ तय कर सकते हैं। और ये दोनों सीमित हैं। तार्किकता से किसी भी बात को जायज ठहराया जा सकता है। साथ ही भावनात्मक रूप से हम न्यायोचित ठहरा सकते हैं; हमारी भावनात्मक जरूरतें हो सकती हैं। तो हर कोई अपने अनुमानों के अनुसार अलग तरह से सोच सकता है। तो आपको एक ऐसे अवस्था पर जाना होगा, एक ऐसी स्थिति जहां आप सभी इसे एक सामान रूप से ही कह सकते हैं, यह सत्य है। पूरी मानवता को उस स्थिति में आना होगा जहां वे जान सकें कि यह है निरपेक्ष। इसलिए हमें यह समझना होगा कि हमारा विकास अभी पूरा नहीं हुआ है। इसमें एक और महत्वपूर्ण खोज़ है। यह खोज़ है आत्म-साक्षात्कार। अपने आप को जानना है। स्वयं को जानना संभव नहीं है यदि आप इसे मानसिक, शारीरिक या भावनात्मक रूप से क्रियान्वित करते हैं। आखिर जब हम अमीबा से इस Read More …

Shri Jesus Christ Puja Bogota (Colombia)

जीसस क्राइस्ट पूजा बोगोटा (कोलंबिया)                           26 जून 1989   ‌‌                                                                              आज मैं आप को बताना चाहूंगी ईसा मसीह और ईसाई धर्म के बारे में, क्योंकि वह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश बहुत कैथोलिक है। और यदि आप प्रोटेस्टेंट या कैथोलिक भी हैं, चर्च ने वह पूर्ण नहीं किया है जो ईसा मसीह उनसे करवाना चाहते थे, जो आप बहुत स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।                                                           यदि आप बाइबल पढ़ते हैं तो आपको ज्ञात होगा कि ईसा का वर्णन माता मेरी के पुत्र के रूप में किया गया है, जिनका जन्म पवित्र धारणा के अनुसार हुआ था। किंतु वह वास्तव में उसे पूर्ण गहराई से स्वीकार नहीं कर पाए हैं। ऊपरी तौर पर वे ईसा का उपयोग धन, संपत्ति व चर्च बनाने के लिए कर रहे हैं। क्योंकि वे इसकी व्याख्या नहीं कर सकते इसलिए वे हमेशा कहते हैं कि यह रहस्य है। कि ईसा का जन्म एक अति पवित्र माँ से हुआ था, “निर्मला”, पवित्र धारणा के साथ, उनके अनुसार एक रहस्य है। तथा वे यह भी नहीं समझा सकते कि कैसे ईसा पानी पर चले। क्योंकि वे आध्यात्मिक जीवन नहीं खोज पाए हैं जो कि ईसा का सिद्धांत (विचार) था। और उन्होंने इतना भौतिकवादी संसार बना दिया।                  इसके अतिरिक्त, जितनी धन-संपत्ति वेटिकन के पास है, कोई नहीं समझ सकता कि कैथोलिक देशों में इतनी गरीबी क्यों है। उन्होंने कोई भी प्रयत्न नहीं किया है गरीबी की समस्या दूर करने के लिए। भारत में उन्होंने लोगों का धर्म Read More …

Become the light and give the light Spreckels Organ Pavilion, San Diego (United States)

Public Program Day 2, San Diego (USA), 19th of June, 1989 सार्वजनिक कार्यक्रम  दूसरा दिवस   सैन डिएगो (यूएसए), 19 जून, 1989 कृपया बैठ जाएँ। मैं सत्य के सभी साधकों को नमन करती हूं। जैसा कि मैंने कल आपको बताया था कि हम सत्य की अवधारणा नहीं बना सकते। हम इसे बदल नहीं सकते, हम इसे व्यवस्थित नहीं कर सकते। सत्य की समझ एक अनुभव है|  सत्य को आपकी अनुभूति में होना आवश्यक है। यह इसके बारे में सिर्फ एक मानसिक रवैया नहीं है। क्योंकि दुनिया में,  अगर आप देखें तो ऐसे लोग हैं जो इस या उस तरह के दर्शन को मानते हैं,  इस या उस धर्म को मानते हैं,  हर तरह की बातों को मानते हैं और बड़े आत्मविश्वास से कहते हैं, मैं उस पर विश्वास करता हूं। लेकिन आपके जो भी विश्वास हों, आपका दर्शन या आपका धर्म कोई भी हो, कोई भी व्यक्ति कुछ भी पाप कर सकता है, किसी भी प्रकार की हिंसा कर सकता है, किसी का भी अहित कर सकता है। कोई रोकथाम नहीं है। आप ऐसा नहीं कह सकते कि चूँकि मैं अमुक -अमुक हूं , ऐसा नहीं कर सकता। इसका मतलब है कि विश्वास केवल ऊपरी तौर पर है। और इसलिए हम दूसरों की आलोचना किए चले जाते हैं। अब उदाहरण के लिए यदि आप मुसलमानों के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप यहूदियों से बात करें। और अगर आप यहूदियों के बारे में जानना चाहते हैं तो आप ईसाइयों से बात करें। यदि आप ईसाइयों के बारे में जानना चाहते Read More …

Advice: Beware of the murmuring souls Armonk Ashram, North Castle (United States)

अरमोंक आश्रम में सलाह\खुसुरफुसुर करने वालों से सावधान   न्यूयॉर्क (यूएसए), 27 जुलाई 1988 यहां आकर और आप सभी से मिलकर बहुत अच्छा लगा! आप की मेहरबानी है की आपने मुझे अपने आश्रम में आमंत्रित किया। तो इन दो दिनों के कार्यक्रमों के अनुभव से आपने महसूस किया होगा कि,  हमने वह प्राप्त किया, हालांकि शुरुआत में यह दुर्जेय दिखता है, परिणाम प्राप्त करना और लोगों को आत्म-साक्षात्कार करना इतना मुश्किल नहीं है। मुझे लगता है कि आप सभी बहुत समझदार हैं और आपने इसे बहुत अच्छे से कार्यान्वित किया है। यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात थी, मेरे लिए इतनी खुशी की बात है कि आपने इतने सारे लोगों को आत्मसाक्षात्कार दिया और आप उन्हें सहज योग के बारे में समझाने में कामयाब रहे। इस आधुनिक समय में, विशेष रूप से अमेरिका और इसी तरह के अन्य देशों में, यह बहुत मुश्किल है ऐसा कि लोगों के लिए यह जान पाना असंभव है कि परे भी कुछ है। बेशक, अनजाने में वे खोज रहे हैं – अनजाने में। वे इस बात से भी अवगत नहीं हैं कि उनमें आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने की संभावना है। और इतने नकली लोग आ गए हैं कि उन्हें लगता है कि यह भी एक और तरह की गुरु खरीददारी है जिससे उन्हें गुजरना है। और जब मैं पहली बार अमेरिका आयी थी…मुझे लगता है कि,  एक तरह से सबसे पहले जिस देश में मैं आई थी वह अमेरिका था। उससे पहले मैं ईरान गयी थी क्योंकि मेरा भाई (बाबा मामा) वहां था। और जब Read More …

Shri Vishnumaya Puja: She has created a big maya YWCA Camp, Pawling (United States)

श्री विष्णुमाया पूजान्यूयॉर्क (यूएसए), 9 अगस्त 1987। आज हम यहां विष्णुमाया की पूजा करने के लिए इकट्ठे हुए हैं। विष्णुमाया मानव प्रयास से भी निर्मित होती है। जैसा कि आप बादलों को देखते हैं, जब वे एक दूसरे के खिलाफ रगड़ते हैं, तो बिजली पैदा होती है। तो पहले बादलों को बनाना होगा। सूर्य समुद्र पर कार्य करता है। देखें कि कितने चक्र चलन में आते हैं! समुद्र भवसागर है, और सूर्य समुद्र पर कार्य करता है। साथ ही चंद्रमा समुद्र पर कार्य करता है। इसके फलस्वरूप बादल बनते हैं। यह बिजली समुद्र में पैदा नहीं होती है – इससे समस्याएं पैदा होंगी। आकाश में इसलिए बनाया गया है कि हर कोई इसे देख सके, सुन सके। वे पहले इसे देखते हैं और बाद में सुनते हैं। यह सब सुव्यवस्थित है, सुविचारित है – यही विष्णुमाया है। लेकिन इसे भी, इस पृथ्वी पर मनुष्यों द्वारा कुछ समझ के साथ बनाया गया था। सबसे पहले उन्होंने दो बादलों को आपस में रगड़ते देखा। तो आदिम अवस्था में, मनुष्य ने बिजली बनाने के लिए दो भौतिक चीजों को रगड़ने की कोशिश की। तो दो भौतिक चीजें, यानी पदार्थ के दो हिस्से, रगड़ने पर बिजली पैदा हुई। यह देखना बहुत महत्वपूर्ण है: पदार्थ का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जा सकता है! पदार्थ से बिजली की चिंगारी निकलती है। पदार्थ के बिना, वे खाना बनाना शुरू नहीं कर सकते थे। तो इसने कैसे भवसागर की मदद की है। पहले समुद्र से आकाश में गयी, लोगों को बिजली पैदा करने का संदेश दिया। Read More …

Talk, Eve of Shri Vishnumaya Puja YWCA Camp, Pawling (United States)

श्री विष्णुमाया पूजा से एक दिन पहलेन्यूयॉर्क (यूएसए), 8 अगस्त 1987। यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि आज,आप में से बहुत से अमेरिकी एकत्र हुए हैं, और कल आप विष्णुमाया पूजा करना चाहते हैं। मुझे वे दिन याद हैं जब मैं केवल कुर्सियों से ही बात करती थी, लेकिन इतने वर्षों में इतनी मेहनत करने के बावजूद, इस देश में इतनी बार यात्रा करने के बाद भी, किसी भी अन्य राष्ट्र की तुलना में हमारे पास बहुत कम सहज योगी हैं। श्रीकृष्ण के इस देश में लोगों का ध्यान धन पर लगाना अनिवार्य है, क्योंकि वे विष्णु के अवतार हैं और उनकी शक्ति लक्ष्मी है। लक्ष्मी धन की देवी हैं, लेकिन वह धन नहीं है जिसे “डॉलर” कहा जाता है। यह वह धन है जिसका अर्थ है भौतिक संपदा का पूर्ण, एकीकृत रूप। वैसे भी, पदार्थ में केवल एक ही शक्ति होती है: कि वह दूसरों के प्रति हमारे प्रेम का इजहार कर सके। जैसे, अगर आपको किसी से अपने प्यार का इजहार करना है, तो आप एक अच्छा उपहार या कुछ ऐसा बनाएँगे जो उस व्यक्ति के लिए उपयोगी हो; या तुम अपनी संपत्ति, धन अपने बच्चों को दे सकते हो।एक बहुत ही प्रतीकात्मक तरीके से, आप एक छोटा, छोटा सा पत्थर भी दे सकते हैं, यदि आप अपनी माँ को बच्चे हैं, जो भी आपको दिलचस्प लगता है की जो आपकी माँ को खुश करेगा। लेकिन हर समय, किसी को कोई वस्तु देने के पीछे का विचार है अपने प्यार और भावनाओं को प्रदर्शित करना – Read More …

How to enlighten energy centers? Unity of Houston Church, Houston (United States)

उर्जा केंद्रों को कैसे प्रबुद्ध करेंसार्वजनिक कार्यक्रम, यूनिटी चर्च। ह्यूस्टन (यूएसए), 30 मई 1986। मैं सत्य के सभी साधकों को नमन करती हूं। हमें यह समझना होगा कि सत्य जो है सो है, हम उसकी कल्पना नहीं कर सकते। हम इसे प्रबंधित नहीं कर सकते। हम इसे आदेश नहीं दे सकते। बस एक वैज्ञानिक व्यक्तित्व की तरह से, हमारे पास यह देखने के लिए खुला दिमाग होना चाहिए कि यह क्या है। जैसे हम किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज में जाते हैं, हम यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि वहां क्या है, उसी तरह जब हमें सच्चाई के बारे में पता लगाना है, तो हमें बहुत खुले विचारों वाला होना चाहिए। लेकिन जब हम ‘प्रेम’ की बात करते हैं, तो हमें पता होना चाहिए कि प्रेम और सच्चाई एक ही चीज है। परमेश्वर के प्रेम और स्वयं सत्य में कोई अंतर नहीं है। यह अंतर तब होता है जब हम ईश्वर के साथ एकाकार नहीं होते। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी से बहुत सांसारिक स्तर पर भी प्रेम करते हैं, यदि आप किसी से शारीरिक रूप से प्रेम करते हैं, तो आप कह सकते हैं, या शारीरिक रूप से, आप उस व्यक्ति के बारे में बहुत कुछ जानते हैं; तुम बस इसे जानते हो। लेकिन जब तुम सत्य को जान लेते हो, तब तुम प्रेम बन जाते हो। और जिस प्रेम के बारे में मैं आपको बता रही हूं वह वो प्रेम है जो सर्वव्यापी है, जो क्रियांवित होता है, समन्वय करता है और सत्य है। लेकिन, Read More …

Talk After Sahasrara Puja: Unless and until you are conscious you cannot ascend Alpe Motta (Italy)

सहस्रार पूजा के बाद भाषणमेडेसिमो, एल्पे मोट्टा (इटली), 4 मई 1986 ये वे गीत हैं जिन्हे हिमालय में गाया जाता हैं, और यहाँ गाया जाना वास्तव में कुछ उल्लेखनीय है, है ना? आप इसे यहां गाए जाने के लिए लाए हैं। अब, मुझे लगता है कि मैंने आपको पहले ही एक बहुत, बहुत लंबा व्याख्यान और आपके कथानुसार एक भाषण दिया है, लेकिन कुछ प्रतिक्रियाएं बहुत अच्छी थीं, और कुछ इसे बहुत अच्छी तरह से अवशोषित कर पाये थे। लेकिन कुछ, उन्होंने बताया कि, सो रहे थे। अब ये चीजें नकारात्मकता के कारण होती हैं। आपको अपनी नकारात्मकता से लड़ना होगा, क्योंकि नकारात्मकता ही वह चीज है जो सवाल पूछती है। जब मैं बात कर रही हूं तो मैं सच कह रही हूं, पूर्ण सत्य, लेकिन यह नकारत्मकता सवाल पूछती है और यह प्रतिबिंबित होता है। जब यह प्रतिबिंबित होने लगती है, तो कुछ भी दिमाग में नहीं जाता है क्योंकि आप पिछले वाक्य के साथ रह जाते हैं, और वर्तमान, आप इसके साथ नहीं होते हैं। तो एक पलायन की तरह, सब कुछ उबल कर नीचे बैठ जाता है, और फिर तुम बच जाते हो और तुम सो जाते हो। मेरा मतलब है, मैंने आज आपको अपने चेतन मन में डालने की पूरी कोशिश की। तुम्हें सचेत रहना है, तुम्हें सजग रहना है; और वह बात ऐसी है कि जब तक आप सचेत नहीं होते तब तक आप उत्थान नहीं कर सकते। कोई भी असामान्य व्यक्ति उत्थान नहीं कर सकता। आपको खुद को सामान्य करना होगा। आप में से Read More …

Dharma Ki Avashyakta – Why is Dharma needed (Evening) Sir Shankar Lal Concert Hall, New Delhi (भारत)

Dharma Ki Avashyakta Aur Atma Ki Prapti 23rd February 1986 Date : Place Delhi : Public Program Type : Speech Language Hindi आत्मा को खोजने वाले सभी साधकों को हमारा प्रणिपात! आज का स्वर्गीय संगीत सुनने के बाद क्या बोलें और क्या न बोलें! विशेषकर श्री. देवदत्त चौधरी और उनके साथ तबले पर साथ करने वाले श्री गोविंद चक्रवर्ती, इन्होंने इतना आत्मा का आनन्द लुटाया है कि बगैर कुछ बताये हये ही मेरे ख्याल से आपके अन्दर कुण्डलिनी जागृत हो गई है। सहज भाव में एक और बात जाननी चाहिए कि भारतीय संगीत ओंकार से निकला हुआ है। ये बात इतनी सही है, इसकी प्रचिती, इसका पड़ताला इस प्रकार है कि विदेशों में जिन्होंने कभी भी कोई रागदारी नहीं सुनी, जो ये भी नहीं जानते कि हिन्दुस्तानी म्युझिक क्या चीज़ है या किस तरह से बनायी गयी है। जिनके बजाने का ढंग और संगीत को समझने का ढंग बिल्कुल फर्क है। ऐसे लोग भी जब पार हो जाते हैं और गहन उतरते हैं, तो आपको आश्चर्य होगा कि बगैर किसी राग को जाने बगैर, ताल को जाने बगैर, कुछ भी जानकारी इसके मामले में न होते | हुए, बस, खो जाते हैं। और जैसे आपके सामने आज चौधरी साहब ने बजाया, जब लंदन में बजा रहे थे, तो घण्टों लोग अभिभूत उसमें बिल्कुल पूरी तरह से बह गये। मैं देखकर आश्चर्य कर रही थी कि इन्होंने कोई राग जाना नहीं, इधर इनका कभी रुझान रहा नहीं, कभी कान पर वे उनके ये स्वर आये नहीं, आज अकस्मात इस तरह का Read More …

Talk: You have to be in Nirvikalpa, Eve of Sahasrara Puja Laxenburg (Austria)

              “आपको निर्विकल्प में रहना होगा”। वियना, 4 मई 1985। सहस्रार दिवस मनाने के लिए इतने सारे सहज योगी आते हुए देखना बहुत संतुष्टिदायक है। सहस्रार को तोड़े बिना हम सामूहिक रूप से उत्थान नहीं कर सकते थे। लेकिन सहस्रार, जो कि मस्तिष्क है, पश्चिम में बहुत अधिक जटिलताओं में चला गया है और नसें बहुत अधिक मुड़ी हुई हैं, एक के ऊपर एक। सहस्रार को खुला रखना बहुत आसान होना चाहिए अगर पश्चिमी दिमाग आपकी माँ के बारे में समझ पाते और जागरूक हो सके। जब आपकी माता सहस्रार की देवी हैं, तो सहस्रार को खुला रखने में सक्षम होने का एकमात्र तरीका पूर्ण समर्पण होना है। इसके लिए बहुत से लोग मुझसे पूछते हैं, “हम इसे कैसे करें?” यह एक बहुत ही मजेदार सवाल है – यह अप्रासंगिक है। यदि आपका सहस्रार किसी के द्वारा खोल दिया गया है, और सौभाग्य से वह देवता आपके सामने हैं, तो समर्पण करना सबसे आसान काम होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। यह कठिन है क्योंकि जो चित्त मस्तिष्क की कोशिकाओं के माध्यम से आया है, मस्तिष्क की कोशिकाओं के माध्यम से स्वयं को व्यक्त करता है, वह प्रदूषित है, वह अशुद्ध है, वह विनाशकारी है; यह नसों को खराब कर देता है और जब नसें खराब हो जाती हैं, तो आत्मा का प्रकाश नसों पर नहीं पड़ता है और आप समर्पण करने में असमर्थता महसूस करते हैं। आम तौर पर, यह करना सबसे आसान काम होना चाहिए। इसलिए, हमें मानसिक रूप से खुद से संपर्क करना होगा। हमें खुद से बात Read More …

एकादश रुद्र पूजा Como (Italy)

एकादश रुद्र पूजा कोमो (इटली) १६ सितम्बर, १९८४ आज, हम एक विशेष प्रकार की पूजा कर रहे हैं जो एकादश रुद्र की महिमा में की जाती हैं । रुद्र – यह आत्मा की, शिवजी की विनाशकारी शक्ति हैं । एक ऐसी शक्ति, जो स्वभाव से क्षमाशील हैं। वह क्षमा करती हैं, क्योंकि हम इंसान हैं, हम गलतियां करते हैं, हम गलत काम करते हैं, हम प्रलोभन में फस जाते हैं, हमारा चित्त स्थिर नहीं रहता – इसलिए वह हमें क्षमा करते हैं। वह हमें तब भी क्षमा करते हैं जब हम अपनी पवित्रता को खराब करते हैं, हम अनैतिक चीजें करते हैं, हम चोरी करते हैं, और हम उन चीजों को करते हैं जो परमात्मा के खिलाफ हैं, उनके (परमात्मा के ) खिलाफ बाते करते है, तो भी वह हमें क्षमा करते हैं, । वह हमारा छिछलापन (सुपरफिशिअलिटीज़ ), मत्सर, हमारी कामवासना, हमारे क्रोध को भी क्षमा करते हैं। इसके अलावा वह हमारे आसक्ति , छोटी ईर्ष्या, व्यर्थताओं और अधिकार ज़माने की भावना – को भी क्षमा करते हैं। वह हमारे अहंकारी व्यवहार और गलत चीजों से हमारे जुड़े रहने को भी माफ कर देते हैं। लेकिन हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है, और जब वह क्षमा करते हैं, तो वह सोचते हैं कि उन्होंने आप पर एक बड़ा अनुग्रह किया हैं, और जिन लोगों को क्षमा किया जाता हैं, और जो अधिक गलतियों को करने की कोशिश करते हैं, वह प्रतिक्रिया परमात्मा के अंदर क्रोध के रूप में बनती है । विशेष रूप से, आत्मसाक्षात्कार के बाद, क्योंकि Read More …

Sarvajanik Karyakram Rahuri (भारत)

राहुरी फैक्ट्ररी के माननीय अध्यक्ष श्री सर्जेराव पाटिलजी, मित्र संघ संस्था के संचालकगण, जितने भी राहुरीकार और पिछड़े/दलित जाती के लोग यहाँ एकत्रित हुए हैं, मुझे ऐसा कहना उचित नहीं लगता। क्योंकि वे सब मेरे बच्चे हैं। सभी को नमस्कार! दादासाहेब से मेरी एक बार अचानक मुलाक़ात हुई और मुझे तब एहसास हुआ कि यह आदमी वास्तव में लोगों की फिक्र (परवाह) करता है। जिसके हृदय में करुणा न हो उसे समाज के नेता नहीं बनना चाहिए. जिन्होंने सामाजिक कार्य नहीं किया है उन्हें राजनीति में नहीं आना चाहिए। जिन्होंने सामाजिक कार्य किया है, अगर वे राजनीति में आते हैं, तो उनके मन में जनसामान्य के लिए दया रहेगी। लेकिन ज्यादातर लोग सामाजिक कार्य इसलिए करते हैं ताकि हम राजनीति में आएं और पैसा कमाएं। मुझे सब पता है। मैंने बचपन से अपने देश का हाल देखा है। मैं शायद तुम सब में सबसे उम्रदराज हूँ। मेरे पिता भी बहुत धार्मिक हैं, एक बहुत ही उच्च वर्ग के सामाजिक कार्यकर्ता, देश के कार्यकर्ता, राष्ट्रीय कार्यकर्ता और डॉ अम्बेडकर के साथ बहुत दोस्ताना था,  घनिष्ठ मित्रता थी। उनका हमारे घर आना-जाना था। मैंने उन्हें (डॉ. अम्बेडकर को) बचपन से देखा है।  मैं उन्हें चाचा कहती थी। उनके साथ संबंध बहुत घनिष्ठ हैं। और वह बहुत तेजस्वी और उदार थे। मेरे पिता गांधीवादी थे और यह(डॉ. अम्बेडकर)  गांधी जी के खिलाफ थे। बहस करते थे। तकरार के बावजूद उनके बीच काफी दोस्ती थी। वह बहुत स्नेही थे! जब मेरे पिता जेल गए, तो वह हमारे घर आकर पूछते थे कि कैसे चल Read More …

Shri Yogeshwara Puja Chelsham Road Ashram, London (England)

(परम पूज्य श्रीमाताजी, श्रीकृष्ण पूजा, चेल्शम रोड, लंदन, 15 अगस्त, 1982) एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि वह योगेश्वर हैं और जो बात हमें समझनी है वह यह है कि जब तक आप योगेश्वर के मार्ग का अनुसरण नहीं करते तब तक स्वयं को पूर्णतया स्थापित नहीं कर सकते हैं। श्रीकृष्ण ने कहा सर्वधर्माणां परितज्य मामेकम् शरणम् व्रज। अपने सभी संबंधियों व संबंधों जैसे अपने भाई, पत्नी, बहनों …. को छोड़कर केवल मुझ एक कृष्ण को भज … देखिये ये सब धर्म हैं जैसे स्त्रीधर्म …. अर्थात एक स्त्री का धर्म क्या है। इसी प्रकार से हम कह सकते हैं राष्ट्रधर्म। आज भारत की स्वतंत्रता का भी दिन है। तो हमारा राष्ट्रधर्म भी है …. हम देशभक्त लोग हैं। अपने देश के लिये प्रेम होना ही राष्ट्रधर्म है। इसके बाद समाजधर्म आता है … अर्थात समाज के प्रति आपका कर्तव्य। इसके बाद पति धर्म इसका अर्थ है पति का पत्नी के प्रति कर्तव्य, पत्नी का पति के प्रति कर्तव्य। सभी के कर्तव्य धर्म कहलाते हैं। लेकिन उन्होंने कहा इन सभी धर्मों को छोड़कर … अपने कर्तव्यों को छोड़कर पूर्णतया मुझको समर्पित हो जाओ … सर्वधर्माणां परितज्य मामेकम् शरणम् व्रज। चूंकि अब आप सामूहिक व्यक्तित्व बन गये हैं … आपका उनके साथ ऐक्य हो गया है … और वही आपके धर्मों की …. कर्तव्यों की रक्षा कर रहे हैं। वहीं उनकी ओर दृष्टि किये हुये हैं … वही उनको शुद्ध कर रहे हैं अतः आपको स्वयं को उनको पूर्णतया समर्पित कर देना चाहिये। उन्होंने उस समय ये बात केवल अर्जुन को Read More …

Easter Puja and Havan, The Creation of Lord Jesus Nirmala Palace – Nightingale Lane Ashram, London (England)

ईस्टर पूजा, “प्रभु यीशु मसीह का सृजन”| नाइटिंगेल लेन आश्रम, लंदन (इंगलैंड), १९८२–०४–११| आप सभी को ईस्टर की शुभकामनाएँ। आज हम उस  दिन का उत्सव मना रहे हैं जो बहुत, बहुत महत्वपूर्ण है, पूर्ण रूप से, सबसे अधिक महत्वपूर्ण दिन हम कह सकते हैं जब इतनी महान घटना घटित हुई। और इसे  इसी प्रकार घटित होना था क्योंकि, यह सब एक प्रकार से नियत था|  मेरे पिछले व्याख्यानों में, मैंने आपको बताया है कि किस प्रकार ईसा मसीह का पहले वैकुंठ में सृजन हुआ। ‘देवी महात्म्य’ के अनुसार – यदि आप इसे पढ़ें – उनका सृजन महाविष्णु के रूप में हुआ; और यह बहुत स्पष्ट रुप से लिखा हुआ है कि पहले उनका सृजन एक अंडे के रूप में हुआ था। यह इस ग्रंथ में लिखा हुआ  है, जो संभवत लगभग  १४००० वर्ष पूर्व लिखा गया था। यह ग्रंथ ईसामसीह के बारे में भविष्यवाणी करता है और और इसलिए लोग, विशेषकर पश्चिम में, एक दूसरे को मित्रता स्वरूप एक अंडा भेंट करते हैं । अतः, पृथ्वी पर सबसे पहले अंडे के रूप में जो अस्तित्व हुआ वह ईसा मसीह थे और उसका एक भाग उसी स्थिति में रखा गया और शेष भाग आदि शक्ति द्वारा , महालक्ष्मी द्वारा , ईसा मसीह के सृजन में उपयोग किया गया। उस प्राचीन ग्रंथ में उन्हें ‘महाविष्णु’ कहा गया, अर्थात विष्णु का महत्तर स्वरूप। किंतु वास्तव में, विष्णु पिता हैं और वे आदिशक्ति द्वारा सृजित पुत्र हैं। मेरे व्याख्यान के पश्चात मैं चाहूँगी, यदि आपके पास वह ग्रंथ हो, तो  इनके लिए पढ़ा जाए- Read More …

बाएं तरफ की समस्याओं का मूल  Heartwood Community Center, Santa Cruz (United States)

                                  बाएं तरफ की समस्याओं का मूल  1981-1018 सांता क्रूज़, (यूएसए) कल रात आप सभी से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई और मैं सोच रही थी कि मैं आप तक इतनी सहजता से कैसे पहुँच सकी हूँ। आपसे मिलन के क्षणों को संजोना बहुत अच्छी बात थी। मैं कल तुम्हारी समस्याओं के लिए तुम्हारे अस्तित्व में गयी। ग्रेगोइरे ने कहा कि आप सभी को ज्यादातर बाईं ओर की समस्या है, ना कि दाईं तरफ की। इसका मतलब है कि अहंकार इतना नहीं है जितना कि आपकी बाईं ओर की समस्या है और बाईं ओर की समस्या आपके तक कुछ गलतियों के कारण आती है जो आपने अपनी खोज के दौरान की हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, इसे हल किया जा सकता है। बाएं तरफ की समस्या का मूल इसलिए आता है क्योंकि मुझे लगता है कि आपको अपने माता-पिता का प्यार बचपन में भी नहीं मिला। सबसे बड़ी समस्याओं में से एक माँ की समस्या है, कि जब आप बच्चे थे, तो आपने उस सुरक्षा को महसूस नहीं किया था। यह एक माँ का पक्ष है। बाईं बाजु माता का पक्ष है। एक और बात यह हो सकती है कि जब आप समाज में गए तो उन्होंने जीवन के बारे में अपने स्वयं के मानदंडों और विचारों से आप में भेद  पैदा करने की कोशिश की। सफलता के बारे में उन का विचार एक साधक के विचार से बहुत अलग है। क्योंकि एक साधक को केवल तभी सफलता मिल सकती है जब उसने सत्य को जान लिया हो। यही वह Read More …

Mooladhara and Swadishthan Maccabean Hall, Sydney (Australia)

1981-03-25 मूलाधार और स्वाधिष्ठान, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया  सत्य के सभी साधकों को हमारा नमस्कार।  उस दिन, मैंने आपको पहले चक्र के बारे में थोड़ा बहुत बताया था, जिसे मूलाधार चक्र कहते हैं और कुंडलिनी, जो त्रिकोणाकार अस्थि, जिसे sacrum (पवित्र) कहते हैं, में बची हुई चेतना है। जैसा मैंने आपको बताया था कि यह शुद्ध इच्छा शक्ति है, जो अभी तक जागृत नहीं हुई है और न ही आपके अंदर अभी तक प्रकट हुई है, जो यहाँ पर उस क्षण का इंतजार कर रही है जब वह जागृत होगी और आपको आपका पुनर्जन्म देगी, आपका बपतिस्मा। या आपको शांति देती है। या आपको आपका आत्म-साक्षात्कार देती है। यह शुद्ध इच्छा है कि आपकी आत्मा से आपका योग हो। जब तक यह इच्छा पूर्ण नहीं होगा, वे लोग जो खोज रहे हैं, काभी भी संतुष्ट नहीं होंगे, चाहे वे कुछ भी करें।   अब, यह पहला चक्र बहुत ही महत्त्वपूर्ण है क्योंकि या सबसे पहला चक्र था जिसका निर्माण किया गया, जब आदिशक्ति ने अपना कार्य करना शुरू किया था। यह अबोधिता, जो कि पवित्रता, का चक्र है। इस पृथ्वी पर सबसे पहली वस्तु का निर्माण किया गया वह पवित्रता थी। यह चक्र सभी मनुष्यों में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि जानवरों में अबोधिता है, उन्होंने उसको खोया नहीं है, जबकि हमारे पास अधिकार है या हम काह सकते हैं, हमारे पास यह स्वतंत्रता है कि हम इसका परित्याग करे दें। हम यह कर सकते हैं, हम अपने तथाकथित स्वतंत्रता के विचारों के द्वारा किसी भी प्रकार से इसको नष्ट कर सकते हैं।   Read More …

अद्वितीय खोज – टीवी (तिथि अज्ञात, स्थान अज्ञात) (Location Unknown)

अद्वितीय खोज – टीवी (तिथि अज्ञात, स्थान अज्ञात) श्री माताजी : सच्चाई यह है कि हम यह शरीर, यह बुद्धि, भावनाएं, यह अहंकार, कंडीशनिंग (प्रतिबंधित/ संस्कार ) नहीं हैं, बल्कि हम आत्मा हैं। और दूसरा सत्य यह है कि एक सूक्ष्म, सर्वव्यापी दिव्य शक्ति है जो सभी जीवंत कार्य कर रही है। उद्घोषक: 1970 में श्री माताजी निर्मला देवी ने सहज योग की स्थापना की, जो ध्यान के लिए एक ऊर्जस्वी तकनीक है जो हमें हमारी सीमाओं से परे ले जाती है। हमारे भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा के जागरण के माध्यम से, हम अपने जीवन के सभी पहलुओं, शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक के एकीकरण का अनुभव कर सकते हैं । 40 से भी अधिक देशों के हजारों लोगों ने इस ज्ञानोदय का अनुभव किया है। दुनिया में सच्ची शांति केवल मनुष्य के आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकेगी। सहज योग, अनूठी खोज है। श्री माताजी : मैं सत्य के सभी साधकों को नमन करती हूं। सत्य एक ऐसी चीज है, जिसे बदला नहीं जा सकता।  इसे चुनौती नहीं दी जा सकती।  इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। कोई भी  अपने केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर इसकी सच्चाई महसूस कर सकता है। सच क्या है? सच्चाई यह है कि आप यह शरीर नहीं हैं, आप यह मन नहीं हैं, आप यह बुद्धि नहीं हैं, आप ये संस्कार या अहंकार नहीं हैं, लेकिन आप शुद्ध आत्मा हैं। यह ही सत्य है। दूसरा यह है कि यह पूरा ब्रह्मांड एक बहुत ही सूक्ष्म ऊर्जा से आव्रत है, जिसे परमात्मा के Read More …

Unidentified Talk (Extract on Agnya Chakra) New Delhi (भारत)

1970-0101 Unidentified Hindi Talk (Extract on Agnya Chakra) बैठे थे, प्रोग्राम में आये थे, तो भी कुछ न कुछ अपनी विपदा सोचते रहे । अरे ! मेरे साथ ये हुआ, मेरे साथ वो हुआ, ऐसा हुआ, वैसा हुआ । और माताजी से मैं कब बताऊं, मेरी विपदा क्या हुई? माताजी आप देवी हैं, मेरी ये विपदा है| बजाय उसके कि जो कहे जा रहे हैं उसको समझें, अपनी ही अंदरूनी बात को ही सोच-सोच करके आप चली गई उस बहकावे में ।  और उस बहकावे में आपको कैन्सर की बीमारी हो गई, नहीं तो ये बीमारी हो गई, वो बीमारी हो गई । वैसे ही मानसिक बातें हैं । हम मन से क्या सोच रहे हैं? मन में हमारे कौन से विचार आ रहे हैं? सब यही ना कि हमको ये दुःख है, वो दुःख है, ये पहाड़ है । लेकिन सोचना क्या चाहिए – काउन्ट  यॉर ब्लेसिंगज़ (count your blessings)। अपने पे कितने आशीर्वाद हैं परमात्मा के । ये दिल्ली शहर में करोड़ों लोग रहते हैं, कितनो को सहज योग मिला है? हम कोई विशेष व्यक्ति हैं, कोई ऐसे-वैसे नहीं कि अपने चित्त को बेकार करें। हमें सहज योग मिला है । इसकी धारणा होनी चाहिए अंदर से और उस अंतर्मन में उतरना चाहिए। उसी से ये जो झूठी मर्यादा है सब छूट जाएगी और अगर आप नहीं तोड़िएगा, तो किसी न किसी तरह से ऐसे कुछ आपको अनुभव आयेंगे कि ये टूटते जायेंगे । जिस चीज को आप सोचेंगे कि ये हमारा अपना है। आप कहेंगे हम दिल्ली Read More …

Unidentified Talk (extract on Swadishthana) New Delhi (भारत)

1979-0101 Unidentified Hindi Talk (extract on Swadishthana) स्वाधिष्ठान चक्र।  इस चक्र का तत्व है कि आप सृजनशाली, सृजनशाली हो जाते हैं, आपकी सृजनता बहुत बढ़ जाती है। ऐसे लोग जिन्होंने कभी एक लाइन भी स्वतंता नहीं लिखी, वह काव्य लिखने लग जाते हैं। जिन लोगों ने कभी भाषण नहीं दिया वह बड़े भाषण देने लग जाते हैं और जिन लोगों ने कभी पेंटिंग नहीं करी, कुछ कला नहीं देखी वो कलात्मक हो जाते हैं। बहुत सृजन हो जाते हैं। हमारे आर्किटेक्टस लोग हैं, वह कहां से कहां पहुंच गए। तो इंसान में सृजनता आ जाती है, क्योंकि वह अपनी सृजनता को बड़ी ऊंची सी चीज समझता है। फिर उसको पैसे की परवाह नहीं होती कि पैसा जो है उसको देखो और सृजनता कैसे भी करो। और ना ही बहुत से लोग चाहते हैं कि हमारा बड़ा नाम हो जाए, तो कोई न कोई बड़ी विक्षिप्त सी चीज बनाकर रख दो, कुछ विचित्र चीजें जैसी आजकल बनती हैं, इसलिए कि हमारा बड़ा नाम हो जाएगा, लोग हमें बहुत याद करेंगे, पर उसमें कला नहीं है। तो कला का जो महान अंश है उसको प्राप्त करते हैं आप, जब आपका यह दूसरा वाला चक्र है स्वाधिष्ठान यह ठीक होता है। और इसके कारण, स्वाधिष्ठान के कारण ही हम बहुत जब सोचते हैं तो हमारा जो मस्तिष्क है, उसके अंदर जो ग्रे सेल्स हैं उसकी शक्ति इस्तेमाल करते हैं। तो ये उस शक्ति को पूरित करता है, ये चक्र। तो तो जो लोग बहुत सोचते हैं उनको दुनिया भर की बीमारियां हो जाती Read More …