Left Mooladhara and Supraconscious, Meditation

Dhule (भारत)

1983-01-13 1 Talk at Dhulia Jan 13, 1983 Left Mooladhara, 51'
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                            बायाँ मूलाधार और अग्रचेतना, मकर संक्रांति 

धूलिया, (भारत), 13 जनवरी 1983।

भारत में हम सूर्य की कक्षा में परिवर्तन का जश्न मनाते हैं। चूँकि अब वह मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर मुड़ जाता है। इसलिए ऐसा है?

तो, अब इस देश में गर्मी अधिक होने वाली है। तो गर्मी की तैयारी के लिए और इसके लिए लोगों को तैयार करने के लिए वे थोड़ा गुड़ और तिल या चीनी और तिल देते हैं और कहते हैं कि “हम आपको मीठा देते हैं इसलिए आप भी मीठा बोलें”, क्योंकि गर्मी लोगों को परेशान करती है। और, अगर आपके अंदर गर्मी है, तो आप एक-दूसरे से बहुत कड़वी बातें करने लगते हैं। तो उस गर्मी को शांत करने के लिए वे चीनी या गुड़ आपके लिवर को देते हैं। लेकिन आप सिर्फ इतना ही नहीं दे सकते हैं, इसलिए इसके साथ ’तिल है जो एक सुखदायक तेल भी है।

अब। यह बहुत ही प्रतीकात्मक है। बस यही बात है कि, यह एक प्रतीकात्मक बात है। और यह इस देश में हर 14 जनवरी को किया जाता है। इसे ‘मकर संक्रांति’ कहा जाता है। यह ‘मकर ‘ के लिए परिवर्तन है – मकर का मतलब Capricorn. है। और यह आश्चर्य की बात है! जैसे प्राचीन काल में भारत में Cancer कैंसर को ‘कर्क’  कहा जाता था और आप इस चीज को लंबे समय से कैंसर भी कहते हैं। अब, रोग Cancer कैंसर को भी ‘कैंसर’ कहा जाता है। बस देखें कि यह कैसे संबंधित है। और भारतीय भाषा में इसे कर्क का रोग भी कहा जाता है, कर्क के अर्थ से वे इसे कर्क रोग कहते हैं, आप देखें – दो शब्द। वे इसे ‘कर्क रोग’ के कारण भी कहते हैं और जिसे ‘कर्क रोग’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है – गर्मी पैदा करना। यह सबसे पहले गर्मी पैदा करता है। और दूसरी बात इसका एक और अर्थ था, कि कैंसर में कैंसर माँ के लिए कहा गया है। इसलिए जब आप माता के खिलाफ पाप करते हैं तो कैंसर पैदा होता है। माता के विरुद्ध पाप। कैंसर का चिन्ह केवल माँ का चिन्ह है; और जब आप माता के खिलाफ पाप करने की कोशिश करते हैं तो यह शुरू हो जाता है। और मेरे आगमन के बाद से यह बीमारी बहुत प्रचलित हो गई है क्योंकि आधुनिक समय में माता के खिलाफ पाप सबसे बड़ा पाप है। तो, व्यक्ति को पता होना चाहिए कि माँ के खिलाफ पाप कैंसर के तरफ, ले जायेगा। तो इसकी शुरुआत गणेश तत्व से हुई।

बहुत से लोग जिन्हें यह समस्या है, गणेश समस्या है, वे अन्य चीजों में बहुत अच्छे हो सकते हैं, लेकिन फिर भी, यदि बाईं ओर गणेश समस्या है, तो उन्हें बहुत, बहुत सावधान रहना चाहिए। यह आपके अस्तित्व में एक छेद की तरह है। और उस समस्या को ढंकने के लिए आप किसी और चीज़ \बात का सहारा ले सकते हैं। जैसे लोग कह सकते हैं, “ओह, मैं बहुत महान हूं। मैं ऐसा कभी महसूस नहीं करूंगा।” यह अच्छी बात नहीं है। बस अपनी गणेश समस्या को दूर करें जिसके कारण आप विकृत हैं। तो इन सभी विकृतियों को वैसे ही खीँच लेना चाहिए जैसे एक कछुआ अपने चार अंगों को अपने भीतर खिंच लेता है। उसी प्रकार आप को उन चीजों को खीँच लेना चाहिए। और उन्हें दायीं विशुद्धि का सहारा ले कर स्पष्टीकरण करने की कोशिश मत करो, ऐसा कहकर कि तुम महान हो या तुम यह हो या तुम वह हो।

मैंने कुछ लोगों को इस बारे में ऐसा भी दिखावा करने की और बड़ी-बड़ी बातें करने की कोशिश करते देखा है, लेकिन आखिरकार मुझे पता चलता है कि उनके पास एक बायें मूलाधार की समस्या है। यह एक गंभीर बात है, यह बहुत गंभीर है। तो सावधान रहो। स्वयं को धोखा न दें। आप में से कोई भी। जिन्हें बाएँ मूलाधार की समस्या है, उन्हें अत्यंत सावधानी बरतने की ज़रूरत है कि किसी भी अग्रचेतन supraconscious व्यवहार या बात की तरफ आकर्षण में ना पड़ें।

समर्पण के माध्यम से इसे दूर करने की कोशिश करें, “माँ, मैं कुछ नहीं जानता हूँ।” [यह उनके लिए पहला मंत्र है] “माँ, मुझे कुछ नहीं पता”। अगर तुम समर्पण करते हो। क्योंकि यह एक माँ है। जैसे श्री गणेश। वह कभी कुछ दिखावा नहीं करते। उन्होंने पूरी तरह से माँ को समर्पण कर दिया है। वह कहते है, “मुझे नहीं पता!” आदि शंकराचार्य की तरह कि, “माँ, मैं नहीं जानता।”

जितना अधिक आप तार्किक रूप से या अपने दिमाग के साथ एक प्रकार से स्वयं को व्यक्त करने की कोशिश करते हैं, तो जान लें कि आप उस बिंदु से भटक रहे हैं क्योंकि आपके द्वारा क्षतिपूर्ति करने का एकमात्र तरीका यही है। तो सावधान रहो। मैं आप सभी को बता रही हूँ। यह पश्चिम में बहुत आम है, मैंने देखा है। अचानक वे सभी सहज योगी विशेषज्ञ बन जाते हैं और फिर वे धडाम से गिरते हैं!

तो जो लोग सोचते हैं कि वे महान सहज योगी हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि उनके साथ कुछ गलत है| सबसे पहले आप सभी को एक साथ आगे बढ़ना है, किसी को भी दिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मुझे पता है कि कौन कहां है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। और आपको ऐसे लोगों से ईर्ष्या या ऐसे लोगों से प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं है। जान लें कि आपको वास्तविकता से व्यवहार करना होगा।

इसलिए बायाँ मूलाधार एक बहुत गंभीर समस्या है। इससे सावधान रहें। यह संक्रामक हो सकता है। यह सिर्फ पकड़ हो सकता है। सहज योग में पश्चिमी सहज योगियों के बीच बहुत ही नाजुक बिंदु है। केवल यह बिंदु  – बायाँ मूलाधार – इसलिए सावधान रहें। अपना चित्त स्वच्छ रखने की कोशिश करें। विकृतियां – इसे दूर रखें। अपने आप को, अपने चक्रों को ठीक रखने की कोशिश करें। बेहतर है कि अपने चक्रों  पर चर्चा करने की बजाय उन की देखभाल करें।

कौन खांस रहे हैं? वहाँ कुछ निश्चित रूप से गलत है। यह सब, आपको खांसी क्यों हो रही है? आप ठीक से ध्यान नहीं दे रहे हैं। (खांसी तुरंत बंद हो जाती है) आपको खुद की देखभाल करनी होगी।  जब मैं बात कर ही उस समय आप मुझे परेशान कर रहे हैं- कुछ गलत है। आप खुद की बेहतर देखभाल करें। आपको सुबह, शाम , “अल्लाह हू अकबर,” सोलह बार, कहना होगा। आप को अपने आप को परखना होगा। उन चीजों को खाने से बचने की कोशिश करें जो आपके गले के लिए अच्छी नहीं हैं। आप गरारे कर सकते हैं। आप देखिए, लोग जिस तरह से इसे लेते है कि,  कभी-कभी लोग इस में भी अकड़ महसूस करते हैं|

मैं आश्चर्यचकित हूँ। व्यक्ति को शर्म आनी चाहिए। इसलिए, कृपया सुनिश्चित करें कि आप अपने गले की देखभाल करते हैं और मुझे परेशान नहीं करते हैं। आपने जो यात्रा की है, मैंने उससे कहीं अधिक यात्रा की है। आप जानते हैं कि, मैं बहुत ज्यादा यात्रा कर चुकी हूं। और इसके अलावा आप जानते हैं कि मैं आपकी तुलना में बहुत देर से सोती हूं। यदि आपके गले ठीक नहीं हैं, तो कृपया, उनकी देखभाल करें। कुछ गड़बड़ तो होनी ही चाहिए। यह क्या है? वहाँ कोई भूत हैं। वही है। ऐसा कैसे है कि, अब यह नहीं हो रहा है? बेहतर है आप अपनी धुनी और सब कुछ लें ; वह सब कुछ जो आप करना चाहते हैं। यह कुछ भी नहीं है! यह महत्वपूर्ण है । ऐसा यह कैसे हो सकता है? हमेशा, कैसे तुम्हे यह हो रहा है,  हर समय? तो, अब, मैं तुम्हें धूनी देती हूं, यह, वह – समाप्त!

मैंने बहुत सहा है, इस अर्थ में कि मैं बहुत कष्टों से गुज़री हूं इस तरह से कि मैं उनकी कुंडलिनी, सब कुछ उठा रही हूं। आप यह जानते हैं। लेकिन यह भी कहना कि, “बहुत अधिक धूल थी, वगैरह-वगेरह” : आपको इसकी आदत डाल लेनी चाहिए। यह संभव है। इसके विपरीत, जितना अधिक आप इसे करने की कोशिश करते हैं, उतना ही बेहतर आप महसूस करते हैं। आपको लगता है कि मेरी बातों में योगदान दे रहे हैं। आप संत हैं। संतों की तरह व्यवहार करें। वह महत्वपूर्ण है।

लेकिन पहले, उन्हें, जिन्हें खांसी है, वे मुंह में कुछ डालें। और आपको खांसी नहीं करनी चाहिए। उन्हें खाने के लिए कुछ दें। खुद की देखभाल करें । क्या मुझे इतने बड़े, बड़े लड़कों की देखभाल करनी चाहिए?  बेहतर हो कि आप तरीके से अपनी देखभाल करें।

क्या आप भारतीय सहज योगियों में से किसी को खांसी करता देखते है? कोई नहीं! आपको खुद की देखभाल करनी चाहिए! अपने हाथों को बहुत अधिक हिलाना भी, आप ऐसा करते हैं। हर समय आप इस तरह से बात करते हैं। वह सब न करें अपने हाथों को स्थिर रखें। उनका सम्मान करें! अपने हाथों को स्थिर करने की कोशिश करें। हर समय झटका, अपने हाथों को बहुत अधिक हिलाना भी अच्छा नहीं है।

यहाँ कुछ बातें समझना चाहिए: हमें सहज योग में उतरना है। इसे गंभीरता से कार्यान्वित करने के लिए, निरर्थक चीज़े चलाते रहना ठीक नहीं है| अपने आप से नाराज होने का कोई फायदा नहीं है। ऐसा कुछ भी कहने का कोई उपयोग नहीं है कि,  “मैं, मैं,” “मुझे नहीं पता” “मैं यह बात हूँ”। यह एक बकवास है “मैं यह हूं,” “मैं वह हूं,” “मैं इसे महसूस कर सकता हूं।” यह सब बकवास है! यह अग्रचेतन (दायीं बाजु) बकवास चल रही है। सावधान रहे!

आपको अपनी बकवास से दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

फिर एक और बात मैं आपको बताऊंगी। रूस्तम, क्या आपने कहा कि सहज योग को जानने के लिए आपको संस्कृत सीखना होगा? हर्गिज नहीं। यह बिल्कुल गलत है। कृपया इसका आश्वासन मुझसे ले लें। तुमने फिर से मानसिक गतिविधि शुरू की। बेहतर है इसे बंद करो! इन सभी गलत विचारों को आपको अपने सिर में नहीं लेना चाहिए। धूमल को संस्कृत का एक शब्द भी नहीं पता है। संस्कृत का एक शब्द नहीं। उसमे क्या रखा है? यह सब उधार लिए पंख है? यहाँ तक की आदि शंकराचार्य से भी उधार क्यों लेना? आपकी सारी गहराई, आपकी भावनाएं क्या हैं? दूसरों से उधार क्यों लें? किसी से उधार लेने के बजाय अपनी भावनाओं, अपनी गहराई, अपने स्रोतों का विकास करें। संस्कृत क्यों सीखें? कोई जरूरत नहीं है।

आप शंकराचार्य के बारे में कुछ जान सकते हैं लेकिन सहज योग के बारे में नहीं और मेरे बारे में बिल्कुल नहीं। इसलिए इन सभी तरकीबों में मत जाइए। अब आप कोई भी नाम या कुछ भी बनाना बंद कर दें! कृपया इसे रोकें! अन्यथा आप अग्रचेतन (राइट साइड) में जाएंगे, मैं आपको बता रही हूं। बस यह मत करो। इन सभी मानसिक गतिविधियों को आप सभी को रोकना चाहिए क्योंकि मुख्य समस्या आपकी बायाँ पक्ष है। और कल वह दिन है जब आपको फैसला करना है। कल वह दिन है जब हम सूर्य की पूजा करते हैं, कल वह दिन होता है जब हम सरस्वती की पूजा करते हैं, ताकि सरस्वती आपकी खर्च हो चुकी उर्जा की फिर से पूर्ति करे और आइन्दा आप उसे और अधिक खर्च ना करें। अपने बाएं पक्ष का उपयोग करें। अपनी माँ के समक्ष समर्पण करो, अच्छी माँ बनो, अच्छी बेटियाँ बनो। ठीक है?

समर्पण ही मार्ग है। और सहज योग के बारे में बहुत अधिक मत सोचो। सहज योग के बारे में बात करना, “चक, चक, चक, चक” रास्ता नहीं है। ऐसे सभी लोग कहीं नहीं उन्नत होते हैं। यह मुझे पता है। मैं सभी को जानती हूं, मैं ऐसे लोगों को जानती हूं जो बस सहज योग के बारे में अत्यधिक  सोचते हैं; मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह से जानती हूं। वे मेरे बारे में कुछ नहीं जानते। पैरों पर मुझे पता है। वायब्रेशन पर मुझे पता है। उनके विकास पर मुझे पता है। संस्कृत को जानने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है, यह सच है, लेकिन यह है कि, अपने प्यार के माध्यम से, अपनी शुद्ध समझ के माध्यम से अपनी माँ को जानने की आवश्यकता है; क्योंकि यही आपको ले जाएगा | चूँकि आप उस तरह की बातों के अभ्यस्त हैं इसलिए आप संपूर्ण संस्कृत, इस के पूरे और उस पूरे को जानना चाहते हैं। आप सभी वेदों को पढ़ेंगे। मेरा मतलब है कि इस देश में बहुत सारे ऐसे हैं – मेरे लिए बेकार, किसी काम के नहीं। बस इसे भूल जाओ!

अपने दिमाग के माध्यम से जानने की उस यात्रा में मत जाओ। अपने दिल से जानो। और आप ऐसा इसलिए करते हो क्योंकि यह आप के लिए उपलब्ध नहीं है। यही इस बात का आधार है। बायाँ मूलाधार क्षतिग्रस्त है इसलिए आप किसी अन्य  बात की ओर मुड़ जाते हैं! जो की उपलब्ध नहीं है। वह अबोधिता उपलब्ध नहीं है। उस तक जाने की कोशिश करो। उसे अपने भीतर जागृत करने का प्रयास करें और फिर आप चकित होंगे कि आप मुझे बेहतर ढंग से जान पाएंगे। और कल ही मैंने आपको बताया था कि कैसे इन जटिलताओं ने अवरोध पैदा किया है। वे सिर्फ मुझे देखते हैं। और बस उनके चेहरे को देखते हैं। उसी तरह से। अब भी तुम कभ-कभी इतने दुखी, खोये हुए लगते हो। क्या नहीं? क्योंकि अभी भी आप अपने दिमाग का इस्तेमाल कर रहे हैं। अपने दिमाग का उपयोग करना सहज योग को प्राप्त करने का तरीका नहीं है, कृपया।

क्या आपका गला अब बेहतर है? आपको खांसी नहीं हो रही है? ये सभी भूत थे। आप को क्या हुआ? अब खांसी की कोशिश करो! (हंसी लेकिन खांसी नहीं)

लेकिन अगर आप संस्कृत सीखना चाहते हैं, तो आप सीख सकते हैं। लेकिन वह अंत नहीं है। और वह तरीका नहीं है बेशक, अपनी यात्रा में आप इसे भी जान सकते हैं, लेकिन यह तरीका नहीं है। मेरा मतलब है, मैं नहीं चाहती कि आप ऐसी चीजों को पायें जिनकी वजह से आप का चित्त अपने समर्पण और उत्थान से भटक जाए  – जो कि अधिक महत्वपूर्ण है। शंकराचार्य ने जो कहा है, वह पहले से ही अंग्रेजी में अनुवादित है। यदि आप देखते हैं कि उन्होंने केवल समर्पण की बात की है, अन्य कुछ नहीं। क्या उन्होंने किसी और बारे में कुछ और बात की है रुस्तम ? तो यह बात है।

ये सभी नाम भी, जोकि आपने मुझे दिये हैं, वह सिर्फ इसका एक हिस्सा है, सहज योग भी इसका हिस्सा है। जब मैं आपके साथ हूं, तो आपको इन बातों की परवाह क्यों करनी चाहिए? उसको स्थापित करने का प्रयास करें। इन चीज़ों की वजह से आप अपने दिमाग का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। अपने बाएं मूलाधार की स्थापना करें।

अब बेहतर है? निर्विचार में हो। देखिये, आपकी खांसी कहाँ गई है? ख़त्म हो गई! वे भाग गए हैं। उसी तरह आपको उन्हें नियंत्रित करना चाहिए। उनसे जाने को कह देना।

इसके अलावा, आप बहुत अधिक बोलते हैं, जबकि यात्रा के दौरान एक ध्यानपूर्ण अवस्था में रहें। बोलो मत,  बोलने की आवश्यकता नहीं है। ध्यान के मूड में रहें। तुम मेरे साथ हो, मैं तुम्हारे साथ हूं। ध्यान कि दशा में रहें। यह तुम्हे मदद करेगा; बहुत मदद करेगा। यह यहां है कि आपको चुप रहना चाहिए – बिल्कुल – और इसे महसूस करें।

कोई चर्चा नहीं, कोई बातचीत नहीं, अपने दिमाग का उपयोग नहीं। आप अपने परिवर्तन के लिए अपने अंदर कुछ हासिल करने के लिए यहां आए हैं। इसके बारे में जिम्मेदार बनें। कुछ लोगों ने निश्चित रूप से, माथियास ने बहुत सुधार किया। जबरदस्त! मैं हैरान थी! उसने सुधार किया। लेकिन कुछ सिर्फ वैसे ही हैं। मैंने उनसे पूछा, “आप कैसे हैं?” फिर भी ऐसे ही। मेरा मतलब है, क्या करें? अपने आप को शांत करने का प्रयास करें। शांत हों। शांतिपूर्ण रहें। अपने आप से कहो, “शांत रहो। सावधान रहे। शांत रहो। ”

और जरा सोचिए, मेरे व्याख्यान शुरू करने से पहले कोई नहीं खांस रहा था और अचानक, जैसे ही आप बैठ गए, एक के बाद एक प्रतियोगिता हुई। देखिए कैसे वे आपके माध्यम से कार्य कर रहे हैं। जान लीजिये, यदि राक्षस चाहें भी तो वे मेरे सामने खांस नहीं सकते। केवल इसलिए कि आप मेरे बच्चे हैं, आपके पास ऐसा करने का दुस्साहस हो सकता है। ठीक है? अब मुझे परेशान करने की कोशिश मत करो।

इसलिए, कल की पूजा से पहले हमें अपने स्नान को ठीक से व्यवस्थित करना होगा, चाहे जो भी हो। मैं पूजा दस बजे शुरू करने जा रही हूं, पहले नहीं। लेकिन आपको बाहर जाने या कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है; अपना स्नान वगैरह करें, और फिर मैं यहाँ आउंगी। स्पष्ट? खुद को दूसरों से निर्लिप्त रखें। किसी और से नहीं उलझें। चुप रहना। बात नहीं। कम से कम अब इस पूजा के लिए अभी से अधिकतम ग्रहण करें। और यह पहली बार सरस्वती पूजा होने जा रही है। दरअसल मैं एकादश करना चाहती थी लेकिन एकादश करना आसान बात नहीं है। फिर मैंने सोचा, रहने दो। कल नहीं। लेकिन एक दिन हमें ऐसा भी करना होगा, लेकिन हमें खुद को तैयार करना होगा।

अब बात नहीं करें। चुप रहना। बस चुप रहे। और फिर ध्यान के लिए यहां बैठ जाएं। तुम सब चुपचाप आओ। वास्तव में आपको कुछ भी नहीं करना है। आपको कुछ भी व्यवस्था आदी नहीं करना है। आपको ऐसा नहीं करना है

अब जो भारतीय आयोजन कर रहे हैं वे ध्यानमग्न मूड में हैं! यह आश्चर्य की बात है! जो लोग आयोजन कर रहे हैं, जो इसके लिए दौड़ भाग कर रहे हैं, इसे प्रबंधित कर रहे हैं। यह इतनी आसान बात नहीं है, आप जानते हैं, हर समय सुबह, शाम, इतने लोगों के भोजन का प्रबंधन करना। वे ध्यान के मूड में हैं। इसलिए कल खुद को ध्यान के मूड में रखें। प्रयत्न करें। अपने आप से कहो, “शांत रहो। शांतिपूर्ण रहें। मेरा मन, शांत हो। स्थिर हो। स्थिर हो।” अपने मन को स्थिर होने को कहें। ठीक है? और तुम चकित हो जाओगे कि यह सब अपने भीतर है। अपने भीतर की स्थिरता में लीन होने का प्रयास करें। यदि आप ऐसा नहीं होने देते हैं तो आप अग्रचेतन (राईट साइड) में जाएंगे जो बहुत खतरनाक है।

अब बेहतर है?

बस अपने शांति के स्रोत को बनाए रखें। बैठ जाओ, एक मिनट बैठ जाओ। यही मुसीबत है! लिंडा-उसे बैठ जाने दो। क्या तुम उसे कुछ समय के लिए बैठा नहीं सकती हो? सीधे बैठो! अपने बच्चों को समझाएं। वे कभी नहीं बैठेंगे। अपने ही भीतर शांत\स्थिर बैठ जाओ। अपने ही भीतर शांत\स्थिर बैठ जाओ। अभी भी बैठो। यह आपके अंदर है आप जानते हैं, आपको कहीं भी नहीं जाना है, कुछ भी नहीं बनाना है, यह सब भीतर है। कुछ भी नहीं बनाना है। यह सब तुम्हारे भीतर है बेहतर है? स्थिर बैठो। “अपने मन में निश्चल हों।” यह स्थिरता \शांति, स्थापित करना, यही मैं चाहती हूँ कि तुम अपने अंदर स्थापित करो। वही बचाव है। सभी विकृतियों से बचाव हो जाता हैं।

और मुझे कहना चाहिए कि, मैं आपकी प्रगति से काफी खुश हूं, । इस बार, यह एक बहुत अच्छी सामूहिकता थी, जो अच्छी थी। सब लोग बहुत अच्छे से आ रहे हैं। मुझे कहना चाहिए, हर किसी ने अच्छी प्रगति की है। आप में से हर एक ने बहुत सुधार किया है। लेकिन यह जानने की कोशिश करें कि समस्या कहां है।

 हर व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्याएं होती हैं। उसी बिंदु पर आप इस कि रोकथाम करें। बस इसे बंद कर दें| आप ऐसा कर सकते हैं। यह सभी भूत हैं तुम्हे पता हैं। विकृतियाँ भूतों के माध्यम से आती हैं। मेरा मतलब है, इसे अधिक स्पष्ट करने के लिए कुछ भी नहीं है। मुझे कहना चाहिए, सहज योग से कुछ भी दिशा परिवर्तन, कोई भी मोड़, कुछ भी मध्य से दूरी हो तब, फिर से मध्य में आयें और दूसरों पर ध्यान न दें। स्वयं पर ध्यान दो। आप में से हर कोई महान है। कोई भी अधिक या कम नहीं है। इसलिए किसी की चिंता मत करो। सहज योग के बारे में बहुत ज्यादा बात न करें। भारत में आप शांतिपूर्ण रहें। आपके अपने देशों में इस पर चर्चा करने के लिए बहुत समय है।  यहाँ बस शांत रहो। ग्रहण करो | ग्रहण करो। ग्रहण करो।

भारत में एक पक्षी है, इसे ‘चकवा’ और ‘चकवी’ कहा जाता है, और ये वे हैं जो सिर्फ चंद्रमा की किरणों पर रहते हैं, और वे धीरे-धीरे किरणों को चूसते हैं। उन्हें किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है; बस इतना ही।

अपने मन को स्थिर करो,  हम जो भी मंत्र कहते हैं, अगर वह यंत्रवत कहा गया है तो उसका कोई प्रभाव नहीं होगा। हम कहते हैं, “या देवी सर्व भूतेषु शांति रूपे संस्थिता।” अच्छी तरह से कहो।

इसे स्थिर करो|  लेकिन आपको इसे पूरी समझ, पूर्ण विचार-विमर्श के साथ करना चाहिए। हम यहां कुछ हासिल करने के लिए आए हैं, जबरदस्त गहराई। और आप में से कुछ अपनी यात्रा के अंत में हैं।

बेहतर है?

योगिनी: (अस्पष्ट)

श्री माताजी: एक मध्य हृदय की पकड़? इसे मजबूर मत करो, कुंडलिनी इसे कार्यान्वित कर रही है। बस अभी स्थिर हो!

आप भविष्यवादी हैं। अभी भी किसी (??) के बारे में सोच रहे हैं। भविष्यवादी मत बनो।इसी पल में। वहाँ रहना। मुझे पता है कि आपका दिमाग किस पर काम कर रहा है। नहीं करो| बस विचार मत करो कि मैं आपके सामने बैठी हूं, यह काफी है। समय के बारे में या, कुछ भी मत सोचो। शांत हो। स्थिर हो।

अभी भी सोच – विचार चल रहा है। अपनी आँखें खुली रखो। मत सोचो। तुम मुझे देखो!

चूँकि आप लोग नीवं हैं इसलिए खुद के मन को स्थिर करें। सीमेंट इसे कार्यान्वित कर रहा है लेकिन फिर भी इसे स्थिर तो होना चाहिए।

बस स्थिर होने से आप अपनी सारी बीमारियों पर काबू पा सकते हैं। बस अपने मन को शांत करके। देखा इसे?

बेहतर है? जरा अपने सिर में देख लो।

बेहतर है!

इसके अलावा, मुझे लगता है, अपने मूलाधार को ठीक रखने का एक और तरीका यह है कि देखें आप कितनी देर तक बिना पलक झपकाए रह सकते हैं। बेहतर है?

अपना हाथ रखें। इसे उठाओ।

फिर। कोशिश करो। आप इसका अभ्यास करें; बार – बार।

अब बस प्रार्थना करें कि, “माँ, हमें अपनी शांति में ले जाओ।”

अपनी आँखें बंद न करें।

आपको जोर से कहने की ज़रूरत नहीं है, बस इसे अपने दिल में कहें।

सहस्रार में। सहस्रार पर स्थिर हों। क्या तुम कल्पना कर सकती हो? यह निर्देश \बात आपको कहीं और नहीं बल्कि आपके सहस्रार तक ले जाती है।

जरा अपने सहस्रार को देखिए। यह कितना स्वच्छ है? आप इसे महसूस कर सकते हैं? यह एक पत्थर की तरह है जरा अपना देखिए। मेरा मतलब है कि यह आपका अपना सहस्रार है। दूसरों की चिंता मत करो, बस अपने सहस्रार के बारे में चिंता करो। देखो? यह एक पत्थर की तरह है क्या आप समझ सके ? इसलिए, समर्पण करो। बस आपके दिल में, समर्पण। समर्पण। मुझे वहाँ बिठाओ – तुम्हारा सहस्रार खुल जाएगा।

शानदार यात्रा। सब कुछ भूल जाओ। बस इतना ही करो।

बेहतर है।

सहस्रार अब बेहतर?

ठीक है? तुम मेरे बच्चे हो आप मेरे बेटे और बेटियाँ हैं – ठीक है? अब बेहतर है? अपने सहस्रार पर देखें।

माँ, तुम भगवान हो।

“हमें श्री गणेश की तरह बनाओ।”

हम्म। खुल रहा है।खुल रहा है। कुछ हो रहा है?

ऊपर आओ। इसे आने दो।

साथ ही आपमें से कुछ लोग अनावश्यक रूप से मेरी चिंता करते हैं। बेहतर हो कि अपने बारे में परवाह करें! क्योंकि यह भी पलायन का एक ढंग ही है |

तो किसी व्यक्ति को हिमालय की तरह होना है|

अपनी कुंडलिनी उठाएं! बस इसे धीरे-धीरे, धीरे-धीरे करें। ऊँचा, ऊँचा रखो, बहुत ऊँचा।

इसे ठीक से करें। पूरे ध्यान के साथ। छोटे तरीके से नहीं।

इसे पीछे धकेलो,  पूरा हाथ, वहाँ ऊपर रखो।

फिर । अपने पूरे तत्पर चित्त के साथ।

 गाँठ में, तीन बार। एक दो…

चीजें पूरी तरह से और ठीक से होनी चाहिए, आधे-अधूरे ढंग से नहीं। मैंने देखा है कि लोग जिस तरह से बंधन देते हैं, जिस तरह से लोग अपनी कुंडलिनी चढ़ाते हैं। यह ठीक तरीका नहीं है! इसे ठीक से करें। आप संत हैं! आप संतों के नेता हैं। आप सभी आने वाले संतों की नींव हैं।

क्या हमारे पास उन पैगम्बरों की सारी शक्तियाँ हैं? प्रश्न पूछें।

जानिए आप वो नहीं हैं।

क्या हम वास्तव में आत्मसाक्षात्कारी आत्मा हैं, माँ?

क्या हम मानव सभ्यता के निष्कर्ष\ सार हैं?

क्या हम ईश्वर की रचना के निष्कर्ष\ सार हैं?

ठीक है? अच्छा। अब काफ़ी बेहतर।

इसके अलावा अपने सिर को बहुत ज्यादा न घुमाएं या अपनी आंखों को बहुत ज्यादा ना घुमाएं। उन्हें स्थिर रखो। उन्हें स्थिर बनाए रखने की कोशिश करें।

बस शांत स्थिर आराम से रहो।

अब, मेरा सुझाव है कि आप सभी एक दूसरे से अपने महागणेश की उचित आरती करने के लिए कहें। ठीक है? तो आपके गणेश जाग जाएंगे। आप सभी को आरती करनी चाहिए। आप में से हर किसी को ऐसा करने के लिए किसी और से निवेदन करना चाहिए। और आप चकित होंगे कि आप कितना अच्छा महसूस करेंगे। और इससे राहत मिलेगी,  महागणेश तत्व को राहत मिलेगी -। वह गुणवत्ता आपको प्राप्त करनी होगी, आपको पता होना चाहिए, यह आसान नहीं है| 

जब भी मैं बिंदु को छूती हूं मुझे सिर पर एक बड़ा, बड़ा पहाड़ जैसा मिलता है। धीरे-धीरे आपको इसका सामना करना चाहिए। इसे बाहर निकालो। इसे साफ करें। धीरे-धीरे और लगातार। अब बेहतर है? काफी बेहतर। इस पहाड़ को साफ करना होगा। इसे साफ करें।

मुझे लगता है कि,  आप खुद को बेहतर तरीके से बंधन दें। मैं अपने आप को एक बंधन दे रही हूं ताकि हर किसी को एक बंधन मिले। ठीक है। किया? बेहतर है? निरंजित हो रहा है?

इन सभी तंत्रों को सीखना है। ठीक है? एक दिन में, कितनी बार आप अपने आप को बंधन देते हैं? कम से कम पाँच बार। पांच नमाज अदा करें। सात बार सबसे अच्छा तरीका है।

सुनिश्चित करें कि आप अपने आप को कितना साफ़ कर रहे हैं? हमें खुद को एक बंधन देना होगा और साथ ही हम इसे दूसरे को दे सकते हैं। चलो इन अपनी शक्तियों का कभी-कभी, अपने लिए उपयोग करें। हम्म? उसने इसे निरंजित कर दिया है, क्या आप इसे देख सकते हैं? तुम्हारी सारी बीमारी, तुम्हारी सारी बीमारी।

बेहतर है?

सब लोग, सब। चलो बंधन देते हैं फिल, अपना बंधन खुद को दे। स्वयं।

अब बायीं नाभी। अब आप साफ कर रहे हैं, बस इसे देखें। आप इसे करना पसंद करेंगे क्योंकि आप इससे स्वच्छ होना महसूस करते हैं! हम्म!

यह सब बैक साइड खुल रहा है। ठीक है? आपने कभी इस तरह की कोशिश नहीं की है? पहली बार? एक सौ आठ बार यह सबसे अच्छा तरीका है, कभी-कभी। हा! ले देख?

इसे छोड़ दो, वह इसे साफ कर देगी। क्या आप बेहतर महसूस कर रहे हैं? क्या आप नहीं कर रहे हैं?

मुझे लगा कि आप पहले ही यह कोशिश कर चुके हैं। कभी नहीँ? यह ऐसा है जैसे कि आपको खाने के तरीके के बारे में बताना! यही सहज योग का मूल है।

योगी: सच में?

श्री माताजी: बेहतर है? आप अपनी सारी गर्मी निकाल देंगे। उस ओर देखो! आप सभी ने सोचा कि हमें कभी अपनी समस्याओं को इस तरह से नहीं निकालना चाहिए? बाईं ओर से गरम करें। अच्छा।

जब भी आपका मन करे आप ऐसा कर सकते हैं। यह इतना सुखद है कि आप इसे करते रहेंगे। आप ऐसा करेंगे! (हस रहा)

यह बहुत राहत देने वाला है, आप जानते हैं! दूसरों को साफ़ करने के बजाय, अपने आप को बेहतर साफ़ करें! अन्य अपने आप साफ़ हो जाते हैं। कोशिश करो। इसे करते जाओ।

आप देखिये, सामूहिकता में बायाँ स्वाधिष्ठान। समष्टि (समष्टि – सामूहिक) में । किसी को बायाँ स्वाधिष्ठान है? लिंडा, आप ऐसा क्यों नहीं कर रही हैं? उचित सावधानी से, इसे ठीक से करें। हम्म। पूरा सिर सुधर रहा है। क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं? कि आप यह कभी नहीं जानते थे।

यह अपने आप से अपने आप को सुरक्षा है।

बढ़िया। फिर भी बायाँ स्वाधिष्ठान। इस बाएं स्वाधिष्ठान को बंधन दें।

अभी विशुद्धी। दायीं विशुद्धी। दायीं विशुद्धी।

बायाँ स्वाधिष्ठान, दायीं विशुद्धी। बाप रे बाप! (बाप रे बाप!)। सबसे खतरनाक संयोजन। अहा!

दाहिने विशुद्धि जल रही। दाहिने विशुद्धी जलते हुए।

बेहतर है। ठीक है? अब, इसे मुझ पर छोड़ दो।

हर कोई अब आनंद ले रहा है। हर उंगली पर करो!

अच्छा। काफी बेहतर।

इस उंगली को रगड़ो। दायीं विशुद्धी। बहुत अधिक बोलता है। दायीं विशुद्धी!

मुझे लगता है कि अंग्रेज लोग ज्यादा बात नहीं करते है। यह एक अच्चा गुण है; अच्छी गुणवत्ता। जब तक वे खुद को दोषी नहीं ठहराते और दोष नहीं देते। यह एक अच्छी गुणवत्ता है। सुनने की कोशिश करो।

हा! बेहतर है?

अब दायीं बाजू से चैतन्य बहने लगा है।

इधर-उधर छोटी-मोटी तरकीबें!

अच्छा।

योगी: माँ, आप जैसे अपने रथ को चला रही हैं और हम सभी आपके घोड़े हैं।

श्री माताजी: आप देखिए, मेरे रथ को चलाने के लिए मेरे पास कम से कम ऐसे घोड़े होने चाहिए, जिन्हें खांसी न हो! (हँसी) अन्यथा मुझे सभी झटके लग रहे होंगे। पहले से ही मेरे पास पर्याप्त झटके है! हमें सहज होना है।

बहुत अच्छा। बेहतर है। काफी बेहतर।

एकादश भी। थोड़ा सा। इसे रगड़ें। एकादश। जोर से रगड़ो।

यह अच्छा है। बेहतर है? काफी बेहतर।

तो कल की [पूजा] की तैयारी

हमेशा अपने हाथ रगड़ो!

कंडीशनिंग जाती है। अपना बायां हाथ रगड़ो।

अब, अब देवी प्रसन्न हों।

ठीक है? अब ठीक है।

ठीक है?

तो यह आपने स्वयं की पूजा की और कल आपकी माँ की पूजा हैं।

भगवान आप सबको आशीर्वाद दें।